चीन की खामोश रोबोटिक्स क्रांति कारखानों और नौकरियों की तस्वीर बदल रही है

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चीन की खामोश रोबोटिक्स क्रांति कारखानों और नौकरियों की तस्वीर बदल रही है

कारखानों में छिपी एक क्रांति

चीन भर के स्कूलों, कारखानों और शोध केंद्रों में रोबोट प्रदर्शन मंचों से निकलकर अर्थव्यवस्था की रोजमर्रा की मशीनरी का हिस्सा बन रहे हैं। वे कारों की बॉडी वेल्ड करते हैं, पुर्जों पर पेंट करते हैं, भारी हिस्से उठाते हैं, उत्पादों की जांच करते हैं और उन मशीनों को जोड़ते हैं जो आगे चलकर उत्पादन के और अधिक काम स्वचालित करेंगी।

विषय-सूची
  1. कारखानों में छिपी एक क्रांति
  2. चीन इतनी तेजी से क्यों आगे बढ़ रहा है
  3. रोबोटिक बाजुओं से कम लोगों वाले कारखानों तक
  4. विनिर्माण क्षेत्र के 12 करोड़ कामगारों का क्या होगा?
  5. स्वचालन के पक्ष में जनसांख्यिकी का तर्क
  6. नई तकनीकी कार्यशक्ति को प्रशिक्षण
  7. बीजिंग के सामने नीतिगत संतुलन की कठिन चुनौती
  8. चीन के स्वचालित कारखानों के वैश्विक नतीजे
  9. मुख्य बातें

चीन के कारखानों में अब 20 लाख से अधिक औद्योगिक रोबोट काम कर रहे हैं, जो दुनिया में इनका सबसे बड़ा स्थापित आधार है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स (IFR) के हवाले से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के आधे से अधिक औद्योगिक रोबोट चीनी निर्माता बनाते हैं। इस विस्तार का पैमाना ऐसी राष्ट्रीय रणनीति को दर्शाता है जो उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक सुरक्षा को जोड़ती है।

इस बदलाव को 20 अरब डॉलर की सरकारी योजना गति दे रही है, जिसका उद्देश्य चीन को नवाचार में अग्रणी बनाना और अमेरिका के साथ उसकी प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना है। यह जनसांख्यिकी से जुड़ी समस्या का जवाब भी है। चीन की आबादी घट रही है, उसका कार्यबल बूढ़ा हो रहा है और अगले दशक में कारखानों की नौकरियों के लिए उपलब्ध लोगों की संख्या तेजी से गिरने की आशंका है।

बीजिंग के लिए स्वचालन का मतलब अधिक उत्पादकता और औद्योगिक ताकत को बनाए रखना है। लेकिन लाखों कामगारों के सामने एक अनिश्चित सवाल है: क्या घटती आबादी के बीच रोबोट खाली नौकरियां भरेंगे, या लोगों के नई भूमिकाओं में जाने से पहले ही मौजूदा काम छीन लेंगे?

यह तनाव हांगझोऊ, चेंगदू और अन्य विनिर्माण केंद्रों में दिखता है, जहां लोग और मशीनें अब भी साथ-साथ काम कर रहे हैं। यह उन स्कूलों में भी दिखाई देता है जो किशोरों को ऐसी नौकरियों के लिए तैयार कर रहे हैं, जो शायद अभी मौजूद ही नहीं हैं।

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चीन इतनी तेजी से क्यों आगे बढ़ रहा है

चीन के पास ऐसे फायदे हैं जिनसे बड़े पैमाने पर रोबोट तैनात करना आसान हो जाता है। उसके कारखाने पहले से ही औद्योगिक मशीनें बनाने के लिए जरूरी मोटर, बैटरी, सेंसर, गियर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य पुर्जे तैयार करते हैं। शेनझेन जैसे शहरों में कंपनियां अक्सर कुछ ही घंटों में पुर्जे मंगा सकती हैं, क्योंकि आपूर्तिकर्ता, इंजीनियर और असेंबली संयंत्र आसपास केंद्रित हैं।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स की महासचिव सुज़ान बिएलर ने चीन के तरीके को औद्योगिक क्षमता और दीर्घकालिक योजना का मेल बताया है। उन्होंने कहा कि देश राष्ट्रीय लक्ष्य तय करता है और फिर उन्हें प्रांतों, शहरों और औद्योगिक पार्कों तक पहुंचाता है।

चीन के पास एक विचार भी है। उसकी एक योजना है। उसे पता है कि पांच साल में वह कहां पहुंचना चाहता है,

चीन का विनिर्माण आधार उसे एक और फायदा देता है। चीनी कारखाने के लिए बने रोबोट की जांच और उसमें सुधार उसी आपूर्ति श्रृंखला के पास किया जा सकता है, जो उसका इस्तेमाल करेगी। यही औद्योगिक तंत्र इलेक्ट्रिक वाहन, सौर उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और पवन टर्बाइन बनाने में भी मदद करता है। इन सभी क्षेत्रों में स्वचालित उत्पादन की बड़ी भूमिका है।

2024 में लगातार 12वें साल चीन औद्योगिक रोबोटों का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार रहा। घरेलू बिक्री करीब 3,02,000 इकाइयों तक पहुंची, जबकि वैश्विक रोबोटिक्स खरीद और पेटेंट आवेदनों में चीन की बड़ी हिस्सेदारी रही। अब कार निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर भंडारण, चिकित्सा पुनर्वास और बुजुर्गों की देखभाल तक, दर्जनों प्रमुख उद्योगों में रोबोट इस्तेमाल हो रहे हैं।

मशीनों को नियंत्रित करने वाले सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में चीन की प्रगति कम समान है। उन्नत एआई मॉडल और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटिंग सिस्टम में अमेरिकी कंपनियों को अब भी बढ़त हासिल है। चीनी कंपनियां ओपन सोर्स विकास के जरिए यह अंतर कम कर रही हैं, जिसमें शोधकर्ता और स्टार्टअप कोड साझा करते हैं और एक-दूसरे के काम को आगे बढ़ाते हैं। अगली प्रतिस्पर्धा इस बात पर निर्भर करेगी कि लाखों उपयोगी मशीनों में एआई को कितनी अच्छी तरह शामिल किया जा सकता है, न कि इस पर कि कौन-सा देश सबसे प्रभावशाली प्रयोगशाला प्रदर्शन करता है।

रोबोटिक बाजुओं से कम लोगों वाले कारखानों तक

चेंगदू में सीआरपी टेक्नोलॉजी के एक संयंत्र में करीब 30 अधेड़ उम्र के कामगार रोबोटिक बाजुओं को जोड़ते, उनमें छेद करते और उन्हें चमकाते हैं। पास ही युवा इंजीनियर एक ऐसे प्रोटोटाइप पर काम कर रहे हैं, जिसे दूसरे रोबोट बनाने के काम करने के लिए तैयार किया गया है।

यह प्रोटोटाइप अभी सीमित काम ही कर सकता है। इंजीनियर इसकी सटीकता और बहु-उपयोगिता बेहतर करने की जांच कर रहे हैं। यह क्यूआर कोड स्कैन करने जैसी सरल गतिविधियां कर सकता है। इसकी धीमी प्रगति मंच पर प्रभावशाली दिखने वाले रोबोट और हजारों घंटों तक सुरक्षित रूप से जटिल काम कर सकने वाली मशीन के बीच का फर्क दिखाती है।

कंपनी में अनुसंधान एवं विकास इंजीनियर 31 वर्षीय पांग काई ने कहा कि उनकी टीम को उम्मीद है कि भविष्य में उनकी मशीनें अधिक स्वतंत्र निर्णय ले सकेंगी।

हम चाहते हैं कि हमारा नया रोबोट इंसान जैसा हो। उम्मीद है कि वह खुद सोच सकेगा। हमें इस तरह के रोबोटों की जरूरत है, क्योंकि हो सकता है कि 10 साल बाद चीन में पर्याप्त कामगार न हों।

सीआरपी टेक्नोलॉजी में करीब 300 लोग काम करते हैं और कंपनी नौ साल से रोबोटिक बाजुएं बना रही है। कंपनी का कहना है कि एक बाजू को 90 प्रतिशत से अधिक दोहराव वाले काम करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। इन मशीनों को कार, इलेक्ट्रॉनिक्स या ऊर्जा उपकरण बनाने वाले कारखानों के लिए तैयार किया जा सकता है।

हांगझोऊ में लीपमोटर का इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र दिखाता है कि स्वचालन पहले से स्थापित उत्पादन लाइनों को कैसे बदल रहा है। रोबोट स्टैम्पिंग, वेल्डिंग और पेंटिंग में मदद करते हैं, जबकि निगरानी, रखरखाव और अंतिम जांच में लोग अब भी शामिल हैं। कंपनी में 25,000 से अधिक कामगार हैं और उनमें से सैकड़ों असेंबली लाइन से निकलने वाले वाहनों की जांच करते हैं।

लीपमोटर के उपाध्यक्ष काओ ली ने कहा कि मशीनें लगातार काम कर सकती हैं, हालांकि उन्हें अब भी रखरखाव, निरीक्षण और मरम्मत की जरूरत होती है। संयंत्र के कुछ हिस्सों में स्वचालन लगभग पूरा हो चुका है, जिससे बाकी मानवीय भूमिकाएं अधिक विशेषज्ञता वाली हो गई हैं।

यह पूरी तरह संभव है कि इन क्षेत्रों के कामगारों की जरूरत न रह जाए, और ऐसा अपेक्षाकृत जल्द हो सकता है।

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विनिर्माण क्षेत्र के 12 करोड़ कामगारों का क्या होगा?

चीन के विनिर्माण क्षेत्र में अब भी करीब 12 करोड़ लोग काम करते हैं। इसलिए श्रम से जुड़ा सवाल केवल इस परिचित बहस तक सीमित नहीं है कि कुछ कारखानों में कर्मचारियों की संख्या घटेगी या नहीं। तेजी से होने वाले बदलाव से प्रवासी कामगार, उम्रदराज कर्मचारी और तकनीकी शिक्षा तक सीमित पहुंच रखने वाले लोग प्रभावित हो सकते हैं।

IFR का कहना है कि रोबोट आम तौर पर पूरी नौकरियों की जगह लेने के बजाय खास कामों को अपने हाथ में लेते हैं। मशीनें गंदे, खतरनाक, दोहराव वाले या शारीरिक रूप से कठिन काम कर सकती हैं, जबकि योजना, गुणवत्ता नियंत्रण, मरम्मत और लचीलेपन की जरूरत वाले फैसलों की जिम्मेदारी लोगों के पास रहती है। उत्पादकता बढ़ने से कंपनियां उत्पादन भी बढ़ा सकती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्सों में नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं।

ऐसा बदलाव संभव है, लेकिन इससे सुगम परिवर्तन की गारंटी नहीं मिलती। पुर्जे जोड़ने में वर्षों बिताने वाले किसी कामगार को रोबोट तकनीशियन बनने के लिए महीनों या सालों का प्रशिक्षण लेना पड़ सकता है। नई नौकरियां दूसरे शहरों में हो सकती हैं, उनमें गणित या कंप्यूटर के बेहतर कौशल की जरूरत हो सकती है, या बदलाव के दौरान वे कम वेतन दे सकती हैं।

चीन के आंकड़े दिखाते हैं कि चिंता क्यों बढ़ रही है। सार्वजनिक चर्चाओं में उद्धृत आधिकारिक रोजगार आंकड़ों के एक विश्लेषण के अनुसार, बड़े पैमाने पर औद्योगिक रोबोट अपनाने से पहले और बाद की अवधि के बीच द्वितीयक क्षेत्र में कामगारों की औसत संख्या घटी। इन अवधियों के बीच शहरी बेरोजगारी भी बढ़ी। ये आंकड़े साबित नहीं करते कि पूरे बदलाव का कारण रोबोट ही थे, क्योंकि संपत्ति संकट, कमजोर मांग, पुनर्गठन और महामारी ने भी रोजगार को प्रभावित किया। हालांकि, वे दिखाते हैं कि स्वचालन ऐसे समय आ रहा है जब श्रम बाजार पहले से दबाव में है।

जोखिम कारखानों तक सीमित नहीं हैं। रोबोटैक्सी ने कुछ टैक्सी चालकों की कमाई घटाई है, जबकि डिलीवरी रोबोट और स्वचालित गोदाम बड़े प्लेटफॉर्म आधारित अर्थतंत्र के कामगारों के लिए खतरा हैं। नियोक्ता छोटी टीमों से अधिक काम लेने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में प्रोग्रामर, अनुवादक, पटकथा लेखक और दफ्तरों में काम करने वाले अन्य लोग भी दबाव में एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कुछ कामगार खुद एआई का इस्तेमाल करके ढल रहे हैं। चेंगदू के एक अनुवादक ने भाषा मॉडल को प्रशिक्षित करना शुरू किया और उसे अस्थायी रूप से नया काम मिला, हालांकि इस क्षेत्र में वेतन तेजी से गिरा है। एक पूर्व पटकथा लेखक ने अपनी कंपनी में रचनात्मक कर्मचारियों की कटौती के बाद चित्रों वाली बच्चों की किताबें बनाने के लिए स्वतंत्र स्टूडियो शुरू किया। ये उदाहरण दिखाते हैं कि एआई कमाई का साधन बन सकता है, लेकिन साथ ही स्थापित कौशल का महत्व भी घटा सकता है।

स्वचालन के पक्ष में जनसांख्यिकी का तर्क

चीन के नेता आंशिक रूप से इसलिए रोबोटिक्स को बढ़ावा दे रहे हैं, क्योंकि देश में कामगारों की कमी हो रही है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, 2035 तक एक तिहाई से अधिक आबादी 60 साल से ज्यादा उम्र की हो सकती है। कुछ अनुमानों में अगले दशक के दौरान चीन की आबादी करीब छह करोड़ घटने की आशंका जताई गई है।

इस बदलाव का असर कारखानों, लॉजिस्टिक्स, अस्पतालों और देखभाल सेवाओं पर पड़ेगा। कम कामकाजी उम्र के वयस्कों को अधिक सेवानिवृत्त लोगों का सहारा बनना होगा, जिससे सरकारी वित्त और परिवारों पर दबाव पड़ेगा। जब कंपनियों को अप्रिय या शारीरिक रूप से कठिन नौकरियों के लिए पर्याप्त लोग नहीं मिलते, तब स्वचालन उत्पादन जारी रखने में मदद कर सकता है।

जनसांख्यिकी का तर्क तब सबसे मजबूत होता है, जब रोबोट कामगारों की जगह लेने के बजाय उनकी मदद करें। कोई मशीन भारी पुर्जे उठा सकती है, खतरनाक उपकरणों पर नजर रख सकती है या दोहराव वाली गतिविधियां कर सकती है, जबकि व्यक्ति अपवादों और गुणवत्ता का प्रबंधन करे। इस तरीके से कामकाजी स्थितियां बेहतर हो सकती हैं और उम्रदराज कर्मचारियों का कार्यजीवन बढ़ सकता है।

ह्यूमनॉइड रोबोट अभी अर्थव्यवस्था भर में लोगों की जगह लेने के लिए तैयार नहीं हैं। उद्योग जगत के नेताओं का कहना है कि मौजूदा मशीनें महंगी हैं, नए काम सीखने में धीमी हैं और अपरिचित परिस्थितियों में इंसानों जितनी भरोसेमंद नहीं हैं। बदलते माहौल में काम करते समय रोबोट से बहुत अधिक सफलता दर हासिल करना खास तौर पर मुश्किल है। कई कंपनियों के लिए ह्यूमनॉइड के मुकाबले पारंपरिक रोबोटिक बाजू या चलने वाली मशीन अब भी अधिक व्यावहारिक है।

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नई तकनीकी कार्यशक्ति को प्रशिक्षण

चीन मशीनों में निवेश के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा में भी निवेश कर रहा है। हांगझोऊ टेक्नीशियन इंस्टीट्यूट में छात्र 15 साल की उम्र से प्रशिक्षण शुरू कर सकते हैं। वे रोबोटिक्स, कोडिंग, इंजन, एयरोस्पेस, चिकित्सा उपकरण और दुर्लभ मृदा के प्रसंस्करण का अध्ययन करते हैं। बीजिंग इन क्षेत्रों को औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के लिए अहम मानता है।

एआई और रोबोटिक्स के 28 वर्षीय शिक्षक चेन तियान्यु कारखानों का दौरा करते हैं, ताकि मौजूदा औद्योगिक समस्याओं को कक्षा में ला सकें। उनके छात्र रोबोटिक बाजुओं को प्रोग्राम करते हैं और चिकित्सा उपकरण डिजाइन करते हैं। साथ ही वे सीखते हैं कि तकनीकी कौशल को अपने आसपास की मशीनों जितनी तेजी से बदलना होगा।

अगर एआई और रोबोटिक्स की दुनिया को आपकी जरूरत नहीं है, तो निश्चित रूप से आप उन लोगों में होंगे जिन्हें बाहर कर दिया जाएगा।

चेन ने कहा कि कंपनियां संस्थान के छात्रों को नौकरी पर रखने के लिए उत्सुक हैं और कुछ छात्रों को स्नातक होने से पहले ही नौकरी के प्रस्ताव मिल जाते हैं। उनका मानना है कि युवाओं को पुराने रोजगार के लौटने का इंतजार करने के बजाय तकनीकी बदलाव के बीच अपनी भूमिका तलाशनी चाहिए।

मेरे छात्र मुझसे पूछते हैं कि भविष्य में क्या होगा। मैं कहता हूं कि मुझे नहीं पता। तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है। लेकिन हम यहां बस स्थिर रहकर सो नहीं सकते। हमें आगे बढ़ना होगा, ताकि देख सकें कि हम क्या कर सकते हैं।

व्यावसायिक स्कूल मदद कर सकते हैं, लेकिन प्रशिक्षण अकेले रोजगार की हर समस्या हल नहीं कर सकता। उम्रदराज कामगारों के पास नए कौशल सीखने के लिए समय या पैसा कम हो सकता है। ग्रामीण प्रवासी कामगारों को घरेलू पंजीकरण प्रणाली से जुड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है, जो उन शहरों में सार्वजनिक सेवाओं तक उनकी पहुंच सीमित करती हैं जहां वे काम करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली जैसे क्षेत्रों में महिलाएं स्वचालन से अधिक प्रभावित हो सकती हैं, जबकि इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान में उनकी हिस्सेदारी कम बनी हुई है।

बीजिंग के सामने नीतिगत संतुलन की कठिन चुनौती

चीन चाहता है कि एआई उत्पादकता बढ़ाए और वैश्विक विनिर्माण शक्ति के रूप में उसकी स्थिति को सहारा दे। साथ ही घरेलू आय, उपभोक्ता विश्वास और सामाजिक स्थिरता की रक्षा के लिए रोजगार भी जरूरी है। जब कंपनियों को कर्मचारियों की संख्या घटाने से आर्थिक फायदा हो, तो इन लक्ष्यों के बीच टकराव हो सकता है।

सरकारी सलाहकारों और सांसदों ने एआई से जुड़ी छंटनी पर विशेष बेरोजगारी बीमा, कम आय वाले कामगारों के लिए मुफ्त तकनीकी प्रशिक्षण, कुछ छंटनियों से पहले छह से 12 महीने की देरी और रोजगार के जोखिमों पर नजर रखने वाली प्रणालियों जैसे कदमों का प्रस्ताव दिया है। अन्य प्रस्तावों में कंपनियों के लिए स्वचालन से हुई बचत का एक हिस्सा पुनः प्रशिक्षण पर खर्च करना या किसी एक नौकरी श्रेणी में बदले जा सकने वाले कामगारों के अनुपात को सीमित करना शामिल है।

बीजिंग में श्रम मध्यस्थता के एक फैसले में यह भी संकेत दिया गया है कि केवल एआई अपनाना किसी कर्मचारी को बर्खास्त करने का कानूनी आधार नहीं हो सकता। नियोक्ताओं को पहले अनुबंध बदलने, कामगार को फिर से प्रशिक्षण देने या उसे दूसरी भूमिका में भेजने पर विचार करना पड़ सकता है। ऐसे फैसलों का दायरा अनिश्चित है, खासकर तब जब कंपनियां अल्पकालिक अनुबंधों, कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने या श्रमिक उपलब्ध कराने की व्यवस्थाओं पर निर्भर कर सकती हैं।

स्थानीय सरकारों के सामने एक और बाधा है। कई सरकारें कर्ज और जमीन से होने वाली घटती आय के बोझ में हैं, जिससे प्रशिक्षण पर सब्सिडी देना, सरकारी कंपनियों को सहारा देना या नए नियोक्ताओं को आकर्षित करना मुश्किल होता है। सरकारी कंपनियां कुछ नए स्नातकों और विस्थापित कामगारों को काम दे सकती हैं, लेकिन एक अरब से अधिक आबादी वाले देश में सभी को स्थिर नौकरी नहीं दे सकतीं।

चीन के स्वचालित कारखानों के वैश्विक नतीजे

चीन की रोबोटिक्स मुहिम का असर केवल चीनी कामगारों पर नहीं पड़ेगा। उत्पादन लागत घटने से चीनी इलेक्ट्रिक वाहन, मशीनरी, बैटरी और उपभोक्ता वस्तुएं विदेशी बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं। यूरोप, उत्तर अमेरिका और एशिया के निर्माताओं पर स्वचालन अपनाने, लागत घटाने या उत्पादन को ग्राहकों के करीब ले जाने का दबाव बढ़ सकता है।

इस दबाव से औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का नया दौर शुरू हो सकता है। पहले वैश्वीकरण के चलते कई कारखाने चीन चले गए थे, क्योंकि वहां श्रम सस्ता था। अब स्वचालन चीन को उत्पादन बनाए रखने और उसे उन्नत करने में मदद कर रहा है, जबकि मजदूरी बढ़ रही है और आबादी घट रही है। अगर चीनी कारखाने कम लोगों के साथ अधिक उत्पादन करते हैं, तो दूसरे देश रोबोट, एआई और तकनीकी प्रशिक्षण में अपने निवेश बढ़ा सकते हैं।

नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादकता का फायदा परिवारों तक पहुंचता है या नहीं। अगर कंपनियां उत्पादन बढ़ाती हैं और नई सेवाएं शुरू करती हैं, तो स्वचालन से आय बढ़ सकती है और आबादी में गिरावट के असर को कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन अगर मुनाफा बड़ी कंपनियों तक सिमटा रहे और विस्थापित कामगार असुरक्षित गिग नौकरियों में चले जाएं, तो यही तकनीक औद्योगिक सफलता और घरेलू समृद्धि के बीच की खाई चौड़ी कर सकती है।

इसलिए चीन की खामोश रोबोटिक्स क्रांति मशीनों और लोगों की प्रतिस्पर्धा से कहीं बढ़कर है। यह इस बात की परीक्षा है कि क्या कोई देश कामगारों को ढलने का व्यावहारिक रास्ता देते हुए उत्पादन को आधुनिक बना सकता है। कारखाने तेजी से बदल रहे हैं। इस बदलाव से किसे फायदा होगा, यह शिक्षा, श्रम सुरक्षा और आय सहायता तय करेंगे।

मुख्य बातें

  • चीन में 20 लाख से अधिक औद्योगिक रोबोट हैं, जो दुनिया में इनका सबसे बड़ा स्थापित आधार है।
  • दुनिया के आधे से अधिक औद्योगिक रोबोट चीन में बनते हैं।
  • स्वचालन बढ़ती उम्र की आबादी और घटते कार्यबल की समस्या से निपटने में मदद कर रहा है।
  • चीन के विनिर्माण क्षेत्र में अब भी करीब 12 करोड़ लोग काम करते हैं।
  • रोबोट आम तौर पर खास कामों की जगह लेते हैं, हालांकि कारोबार के पुनर्गठन पर कामगार अपनी नौकरी गंवा सकते हैं।
  • व्यावसायिक स्कूल छात्रों को एआई, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
  • रोबोटैक्सी, डिलीवरी मशीनें और जनरेटिव एआई सेवा क्षेत्र तथा दफ्तरों के काम को भी प्रभावित कर रहे हैं।
  • बीजिंग पुनः प्रशिक्षण, बेरोजगारी सहायता और एआई से जुड़ी छंटनी के नए नियमों पर विचार कर रहा है।
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