आधिकारिक समर्थन के बाद येन की तेजी की रफ्तार थमी
जापान और अमेरिका के दुर्लभ संयुक्त मुद्रा हस्तक्षेप से मिली बढ़त का करीब आधा हिस्सा येन गंवा चुका है। इससे चिंता फिर बढ़ गई है कि आधिकारिक खरीद से शायद केवल अस्थायी राहत मिले। सोमवार को डॉलर के मुकाबले येन 1% गिरकर 159.29 पर बंद हुआ। G10 की प्रमुख मुद्राओं में इसका प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा।
विषय-सूची
- आधिकारिक समर्थन के बाद येन की तेजी की रफ्तार थमी
- हस्तक्षेप का असर क्यों घट रहा है
- ब्याज दरें अब भी दबाव का मुख्य कारण
- कारोबारी 160 के स्तर पर नजर रखे हुए हैं
- राजनीति और बाजार जापान के विकल्पों को कैसे प्रभावित करते हैं
- अन्य केंद्रीय बैंक भी मुद्रा बाजार की तस्वीर को प्रभावित कर रहे हैं
- येन की गिरावट का परिवारों और कारोबारों पर क्या असर है
- आगे किन बातों पर नजर रखें
- निष्कर्ष
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के लिए यह गिरावट मनोवैज्ञानिक रूप से काफी अहम है। अधिकारियों के बाजार में उतरने के बाद येन तीन महीने के उच्च स्तर, करीब 155.20, तक चढ़ा था। लेकिन अब यह फिर 160 के स्तर की ओर लौट आया है। कारोबारी अब ऐसे संकेतों पर नजर रख रहे हैं कि गिरावट तेज होने पर टोक्यो और वॉशिंगटन फिर हस्तक्षेप कर सकते हैं।
ताजा उतार-चढ़ाव यह भी दिखाता है कि जब किसी मुद्रा को नीचे धकेलने वाले आर्थिक कारक कायम हों, तो हस्तक्षेप की सीमाएं होती हैं। येन खरीदने से कुछ समय के लिए बाजार में इसकी उपलब्धता घट सकती है, लेकिन इससे जापान और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का अंतर अपने आप खत्म नहीं होता और न ही भविष्य की नीतियों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बदलती हैं।
हस्तक्षेप का असर क्यों घट रहा है
येन के 163.99 प्रति डॉलर तक गिरने के बाद जापान और अमेरिका ने हस्तक्षेप किया था। यह स्तर करीब चार दशकों में येन की सबसे कमजोर स्थिति से जुड़ा है। इस कदम से बाजार का व्यवहार कुछ समय के लिए बदला। सट्टेबाजों ने येन के खिलाफ बड़े दांव घटाए और मुद्रा में तेज सुधार आया।
अब यह प्रतिक्रिया कमजोर पड़ गई है। कारोबारी यह परखते दिख रहे हैं कि मुद्रा को बचाने के लिए अधिकारी और भंडार खर्च करने को तैयार हैं या नहीं। मुद्रा हस्तक्षेप तब सबसे कारगर होता है, जब उसे नीतिगत रुख में स्पष्ट बदलाव, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समन्वित कदम या ब्याज दरों के भविष्य के अनुमान में बदलाव का समर्थन मिले। इन स्थितियों के बिना निवेशक सुधार को येन में नई शॉर्ट पोजिशन बनाने का मौका मान सकते हैं।
शॉर्ट पोजिशन ऐसे सौदे होते हैं जिनसे मुद्रा गिरने पर लाभ कमाने का लक्ष्य रहता है। अमेरिका के एक नियामक के आंकड़ों के अनुसार, 4 अगस्त को समाप्त सप्ताह में सट्टेबाजों ने येन में अपनी शुद्ध मंदी वाली पोजिशन 8.865 अरब डॉलर घटाकर 3.604 अरब डॉलर कर दी। इतनी बड़ी कटौती से पता चलता है कि हस्तक्षेप के बाद तेजी से बदलाव हुआ, हालांकि इससे यह साबित नहीं होता कि कारोबारियों ने अपने दीर्घकालिक नजरिए को छोड़ दिया है।
ब्याज दरें अब भी दबाव का मुख्य कारण
येन की कमजोरी का गहरा संबंध जापान और अमेरिका की ब्याज दरों के अंतर से है। निवेशक अक्सर येन जैसी कम लागत वाली मुद्रा में उधार लेकर अधिक प्रतिफल वाली मुद्राओं में नामित परिसंपत्तियां खरीदते हैं। कैरी ट्रेड कहलाने वाली यह रणनीति येन पर लगातार दबाव डाल सकती है।
बैंक ऑफ जापान ने लंबे समय से चली आ रही बेहद नरम नीति से हटना शुरू कर दिया है, लेकिन बाजार इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि दरें कितनी तेजी से बढ़ेंगी। शोध में उद्धृत बाजार आंकड़ों के अनुसार, कारोबारी बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठक में दर बढ़ने की संभावना 50% से कुछ ही अधिक मान रहे हैं।
दर बढ़ने से जापानी परिसंपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं और येन में उधार लेने से मिलने वाला प्रतिफल घट सकता है, जिससे मुद्रा को समर्थन मिल सकता है। लेकिन अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरें ऊंची रखता है या निवेशकों को संदेह है कि जापान के नीति निर्माता लगातार सख्ती कर पाएंगे, तो इसका असर सीमित रह सकता है। जापान के बॉन्ड बाजार को सहारा देने का राजनीतिक दबाव भी बैंक ऑफ जापान के फैसलों को मुश्किल बना रहा है।
जापानी सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल और कीमतें पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत को प्रभावित करती हैं। प्रतिफल तेजी से बढ़ने पर सरकारी वित्त पर दबाव पड़ सकता है और कंपनियों तथा परिवारों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है। कमजोर येन से आयात महंगा होने के बावजूद यह चिंता नीति निर्माताओं को सावधानी से कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
कारोबारी 160 के स्तर पर नजर रखे हुए हैं
मंगलवार को एशिया में कारोबार के दौरान येन करीब 158.93 प्रति डॉलर पर स्थिर रहा। जापानी बाजार छुट्टी के कारण बंद थे और कारोबार कम रहने से भी कुछ मदद मिली। इस मामूली सुधार से सोमवार की गिरावट की भरपाई नहीं हुई और मुद्रा हस्तक्षेप के बाद बने उच्च स्तर से काफी नीचे रही।
बाजार रणनीतिकारों ने चेताया है कि बैंक ऑफ जापान बाद में दरें बढ़ाए और फेडरल रिजर्व अपनी नीति में बदलाव न करे, तब भी इस महीने येन के फिर 160 तक पहुंचने का जोखिम वास्तविक है। इस स्तर को पार करने पर टोक्यो पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर अगर येन की गिरावट से ऊर्जा, खाद्य पदार्थों और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत बढ़े।
हस्तक्षेप की भी कीमत चुकानी पड़ती है। येन खरीदने के लिए जापान को विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करना होता है। अगर बाजार अधिकारियों के खिलाफ चलता रहे, तो बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप महंगा पड़ सकता है। बार-बार कदम उठाने का असर घट सकता है, अगर कारोबारी यह मान लें कि अधिकारी अव्यवस्थित बाजार हालात से निपटने के बजाय किसी खास विनिमय दर का बचाव कर रहे हैं।
राजनीति और बाजार जापान के विकल्पों को कैसे प्रभावित करते हैं
जापानी अधिकारियों ने सीधे हस्तक्षेप पर लौटने से पहले बाजार को चेतावनी देने को प्राथमिकता दी है। वित्त अधिकारियों के ये बयान कि वे येन पर करीबी नजर रख रहे हैं, सरकारी धन खर्च किए बिना सट्टेबाजी को हतोत्साहित कर सकते हैं। वॉशिंगटन के साथ संवाद भी अहम है, क्योंकि संयुक्त कदम का असर जापान के अकेले की कार्रवाई से अधिक होता है।
अमेरिका ऐतिहासिक रूप से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप को लेकर सतर्क रहा है, खासकर तब जब इसे व्यापार में बढ़त पाने की कोशिश समझा जा सकता हो। इसलिए सहयोग यह संकेत देता है कि येन की गिरावट अब वित्तीय स्थिरता और महंगाई के लिए चिंता बन गई है, न कि केवल जापान के निर्यात को बेहतर बनाने की कोशिश।
समन्वित कार्रवाई भी स्थायी उलटफेर की गारंटी नहीं देती। बाजार बैंक ऑफ जापान के दर संबंधी रुख, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, ट्रेजरी बॉन्ड के प्रतिफल और डॉलर की मजबूती पर नजर रखेगा। इनमें से हर कारक खरीद और बिकवाली के दबाव का संतुलन तेजी से बदल सकता है।
अन्य केंद्रीय बैंक भी मुद्रा बाजार की तस्वीर को प्रभावित कर रहे हैं
येन की गिरावट के साथ ही अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों पर भी नए सिरे से ध्यान जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीतिगत फैसले से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर हाल में आठ सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा। उम्मीद थी कि RBA अपनी नीतिगत दर में बदलाव नहीं करेगा। निवेशक इस पर नजर रख रहे थे कि महंगाई ऊंची रहने पर अधिकारी एक और बढ़ोतरी की संभावना खुली रखेंगे या नहीं।
जब बाजार को ब्याज दरें ऊंची बने रहने की उम्मीद होती है, तो ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को फायदा हो सकता है। यह वैश्विक जोखिम लेने की प्रवृत्ति, कमोडिटी की कीमतों और एशिया के घटनाक्रमों से भी प्रभावित होती है। G10 समूह की मुद्राओं की तुलना करने पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मजबूती येन की कमजोरी को और अधिक स्पष्ट दिखा सकती है।
महंगाई, ऊर्जा की कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिम का आकलन करते हुए अमेरिकी डॉलर प्रमुख समकक्ष मुद्राओं के मुकाबले मोटे तौर पर स्थिर रहा। निवेशक उपभोक्ता मूल्य, उत्पादक मूल्य और खुदरा बिक्री के आंकड़ों की भी तैयारी कर रहे थे, जो फेडरल रिजर्व को लेकर उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी प्रतिफल बढ़ने से आम तौर पर येन के मुकाबले डॉलर को समर्थन मिलता है, जबकि महंगाई घटने के संकेत यह बढ़त कम कर सकते हैं।
जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी एक कारक है। मध्य पूर्व से जुड़े तनावों ने डॉलर, सोना और स्विस फ्रैंक जैसी पारंपरिक सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग बढ़ाई है। बाजार में तनाव के दौर में येन भी सुरक्षित ठिकाने की मुद्रा हो सकता है, हालांकि इसकी कम ब्याज दरें और आयातित ऊर्जा पर जापान की निर्भरता उस समर्थन को कमजोर कर सकती हैं।
येन की गिरावट का परिवारों और कारोबारों पर क्या असर है
कमजोर येन से जापानी निर्यातकों को फायदा होता है, क्योंकि विदेशी कमाई का घरेलू मुद्रा में मूल्य बढ़ जाता है। इससे जापानी उत्पाद विदेशों में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं और डॉलर या यूरो में राजस्व पाने वाली कंपनियों को लाभ हो सकता है।
इसका नुकसान आयात की ऊंची कीमतों के रूप में होता है। जापान ईंधन, खाद्य पदार्थों, औद्योगिक सामग्रियों और उपभोक्ता उत्पादों की आपूर्ति के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर है। येन गिरने पर कंपनियों की लागत अक्सर बढ़ जाती है और इसका बोझ परिवारों तक पहुंच सकता है। जब वेतन वृद्धि जीवन-यापन के खर्च के साथ कदम नहीं मिला पाती, तो यह दबाव खास तौर पर महसूस होता है।
विदेशी निवेशकों के लिए येन में गिरावट से जापानी शेयरों और बॉन्ड से मिलने वाला प्रतिफल डॉलर या उनकी घरेलू मुद्रा में बदलने पर घट सकता है। कुछ निवेशक मुद्रा जोखिम से बचाव कर सकते हैं, जबकि आगे और नुकसान की आशंका होने पर दूसरे अपनी पोजिशन घटा सकते हैं।
आगे किन बातों पर नजर रखें
कारोबार का अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि येन 160 से नीचे स्थिर होता है या हाल के निचले स्तर की ओर फिर गिरने लगता है। अधिकारी गिरावट की रफ्तार, उतार-चढ़ाव और बाजार की स्थिति अव्यवस्थित होने के संकेतों पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। धीरे-धीरे होने वाली गिरावट का मुकाबला करना अचानक आई तेजी से कठिन हो सकता है, क्योंकि इससे निवेशकों को अपनी पोजिशन फिर बनाने के लिए अधिक समय मिलता है।
बाजार बैंक ऑफ जापान के संकेतों पर भी नजर रखेंगे। दरें बढ़ाने की स्पष्ट प्रतिबद्धता येन को अकेले हस्तक्षेप की तुलना में अधिक मजबूत आधार दे सकती है। सतर्क संदेश, खासकर बॉन्ड बाजार के दबाव पर केंद्रित रुख, कारोबारियों को यह मानने पर मजबूर कर सकता है कि मुद्रा पर दबाव बना रहेगा।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व के संकेत भी उतने ही अहम होंगे। ट्रेजरी प्रतिफल बढ़ने से ब्याज दरों का अंतर और चौड़ा होगा और डॉलर की ओर अधिक पैसा आकर्षित हो सकता है। नरम आंकड़ों से डॉलर को मिलने वाला समर्थन घट सकता है और जापानी मुद्रा को अस्थायी राहत मिल सकती है।
पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम ने विदेशी मुद्रा बाजार का एक जाना-पहचाना सबक फिर रेखांकित किया है। सरकारी कार्रवाई से तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है, लेकिन मुद्रा के रुझान आम तौर पर मौद्रिक नीति, आर्थिक वृद्धि, पूंजी प्रवाह और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करते हैं। येन की वापसी दिखाती है कि कारोबारी एक बार फिर इन बुनियादी कारकों को परख रहे हैं।
निष्कर्ष
- सोमवार को येन डॉलर के मुकाबले 1% गिरकर 159.29 पर आ गया। G10 मुद्राओं में यह सबसे कमजोर प्रदर्शन था।
- येन के 163.99 प्रति डॉलर तक पहुंचने के बाद जापान और अमेरिका ने हस्तक्षेप किया था।
- हस्तक्षेप के बाद मिली तेजी का करीब आधा हिस्सा मुद्रा गंवा चुकी है।
- सट्टेबाजों ने येन में मंदी वाले दांव तेजी से घटाए, हालांकि कारोबारी उन्हें फिर बढ़ा सकते हैं।
- बाजार निकट भविष्य में बैंक ऑफ जापान की दर बढ़ोतरी की संभावना 50% से कुछ ही अधिक मान रहे हैं।
- 160 का स्तर, अमेरिकी प्रतिफल, महंगाई के आंकड़े और अधिकारियों की चेतावनियां बाजार के अहम संकेत हैं।






