कूटनीति की कठिन राह
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 14 और 15 मई को बीजिंग में अहम शिखर वार्ता करेंगे। यह बैठक मूल रूप से मार्च के अंत में तय थी, लेकिन ईरान में बढ़ते युद्ध पर ध्यान केंद्रित करने के लिए व्हाइट हाउस ने इसे टाल दिया था। इस देरी से जाहिर होता है कि मध्य पूर्व का संघर्ष अब अमेरिकी विदेश नीति पर हावी है और दुनिया के सबसे अहम द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिशों पर उसकी लंबी छाया पड़ रही है। यह बैठक नवंबर 2017 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनकी चीन यात्रा के बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा होगी। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है, जब व्यापार, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय संप्रभुता को लेकर तनाव दोनों महाशक्तियों के बीच सहयोग को पटरी से उतारने की आशंका पैदा कर रहा है।
विषय-सूची
ईरानी तेल की खरीद, ताइवान को हथियारों की बिक्री और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर नियंत्रण जैसे कई मुद्दों से भरे एजेंडे के बावजूद, दोनों नेता कम उम्मीदों के साथ वार्ता में शामिल होंगे। वॉशिंगटन पिछले अक्टूबर में हुए नाजुक व्यापार युद्धविराम को आगे बढ़ाना चाहता है, जबकि बीजिंग ऐसे रिश्तों को और बिगड़ने से रोकना चाहता है, जिससे निर्यात पर निर्भर उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, ईरान में जारी संघर्ष इन जटिल मुद्दों पर चर्चा के लिए जरूरी कूटनीतिक समय और क्षमता को निगलने का खतरा पैदा कर रहा है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस सप्ताह एक साक्षात्कार में यह चिंता जताई।
हम चीन के साथ स्थिरता चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि यह व्यापक संबंधों या बीजिंग में हमारी बैठक से होने वाले किसी भी समझौते को पटरी से उतार दे।
ग्रीर ने माना कि ईरानी कच्चे तेल की चीन की खरीद पर अमेरिका को गंभीर आपत्ति है। वॉशिंगटन का कहना है कि इससे राज्य-प्रायोजित आतंकवाद को धन मिलता है। अमेरिकी वित्त विभाग ने हाल में वित्तीय संस्थानों को चीन की स्वतंत्र टीपॉट रिफाइनरियों से जुड़े द्वितीयक प्रतिबंधों के जोखिमों के बारे में चेताया। आरोप है कि ये रिफाइनरियां हर साल करोड़ों बैरल ईरानी तेल का प्रसंस्करण करती हैं। फिर भी अमेरिकी अधिकारी इस बात को लेकर सतर्क हैं कि तेहरान का प्रभाव दोनों देशों के उस व्यापक कूटनीतिक संबंध-सुधार को विफल न कर दे, जिसकी उन्हें आर्थिक परस्पर निर्भरता संभालने और विनाशकारी गलत आकलन से बचने के लिए जरूरत है।
ईरानी तेल पर गतिरोध
ईरानी कच्चे तेल को लेकर विवाद शिखर वार्ता को पटरी से उतारने का सबसे तात्कालिक खतरा बनकर उभरा है। 28 अप्रैल को वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने ईरानी कच्चा तेल खरीदने के आरोप वाली चीनी टीपॉट रिफाइनरियों को निशाना बनाने वाले द्वितीयक प्रतिबंधों को लेकर चेतावनी जारी की। ये छोटी स्वतंत्र इकाइयां तेहरान को अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों से बचने का एक अपारदर्शी रास्ता देती हैं। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, चीन के कुल तेल आयात में इनकी हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है। वॉशिंगटन इन लेन-देन को ऐसे शासन को सीधे वित्तीय समर्थन के रूप में देखता है, जिसे अमेरिका दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा राज्य प्रायोजक मानता है।
बीजिंग ने अभूतपूर्व कानूनी अवज्ञा के साथ जवाब दिया। 2 मई को चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने मुख्यभूमि चीन की पांच रिफाइनरियों, जिनमें हेंगली पेट्रोकेमिकल भी शामिल है, पर अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ अपने अवरोधक नियम लागू किए। इस नियम के तहत अमेरिका के उपायों, जिनमें संपत्ति जब्त करना और लेन-देन पर रोक शामिल है, को चीनी अधिकार-क्षेत्र में मान्यता नहीं दी जाएगी, लागू नहीं किया जाएगा और उनका पालन नहीं होगा। अमेरिका के सीमा-पार लागू होने वाले प्रतिबंधों को सीधी चुनौती देना आर्थिक संप्रभुता के विवादों में एक बड़ी बढ़ोतरी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस अवज्ञा को लेकर कड़ी चेतावनी दी।
अगर आप हमारे प्रतिबंधों की अनदेखी करेंगे, तो आपको द्वितीयक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। हम ये कदम केवल प्रतीकात्मक मकसद से नहीं उठाते।
मामले को और जटिल बनाते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सप्ताह बीजिंग का दौरा किया और पाकिस्तान की मध्यस्थता में वॉशिंगटन के साथ चल रही वार्ता की जानकारी चीनी नेतृत्व को दी। यह दौरा इस आशंका का संकेत है कि ट्रंप से व्यापार रियायतें लेने के बदले बीजिंग ईरान के हितों की बलि दे सकता है। चीन ने अस्पष्ट रुख बनाए रखा है: वह निजी तौर पर ईरान से शांति समझौतों पर विचार करने का आग्रह करता है, जबकि सार्वजनिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी तौर-तरीकों को खतरनाक बताकर उनकी निंदा करता है। चीन के आयातित तेल का करीब आधा हिस्सा फारस की खाड़ी से होकर आता है। ऐसे में शी जिनपिंग पर ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखने के साथ-साथ क्षेत्र में ट्रंप के इशारे पर काम करते दिखने से बचने का भारी दबाव है।
आर्थिक दबाव और व्यापार बोर्ड
ईरान पर गतिरोध के अलावा, दोनों नेता ऐसे ठोस आर्थिक नतीजों की घोषणा करना चाहते हैं, जो द्विपक्षीय स्थिरता का संकेत दें। अमेरिकी और चीनी अधिकारी कई महीनों से व्यापार बोर्ड व्यवस्था तैयार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादों की पहचान करना है जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा या अहम आपूर्ति शृंखलाओं से समझौता किए बिना द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाया जा सके। प्रस्तावों में अमेरिकी पोल्ट्री, गोमांस और सोयाबीन के अलावा अन्य फसलों की संभावित चीनी खरीद तथा अगले तीन वर्षों तक हर साल 2.5 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदने की प्रतिबद्धता शामिल है।
विमान क्षेत्र संभावित सौदों में सबसे अहम प्रतीकात्मक महत्व रखता है। उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक, चीन और बोइंग ने 500 737 मैक्स विमानों और दर्जनों वाइड-बॉडी विमानों के ऑर्डर पर चर्चा की है। यह करीब एक दशक में चीन की पहली बड़ी खरीद होगी। ऐसा समझौता ट्रंप को नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले अपनी उपलब्धि बताने का ठोस मौका देगा। इसके अलावा, बीजिंग ने अमेरिका से रोजाना करीब छह लाख बैरल कच्चे तेल का आयात फिर शुरू किया है। इससे ईरानी आपूर्ति का आंशिक विकल्प मिलेगा और व्यापार असंतुलन से जुड़ी चिंताओं पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।
हालांकि, व्यापार का बुनियादी तनाव अब भी गंभीर है। अमेरिकी वाहन, एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग के लिए जरूरी दुर्लभ मृदा धातुओं के वैश्विक उत्पादन पर चीन का दबदबा है। इन अहम खनिजों पर बीजिंग के हालिया निर्यात नियंत्रणों से अमेरिकी औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं में व्यापक बाधाएं आई हैं। जवाब में वॉशिंगटन ने चीन की अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता और जबरन श्रम की प्रथाओं की जांच शुरू की है। दोनों पक्षों ने आर्थिक दबाव के ऐसे औजार तैयार कर लिए हैं, जो वार्ता बिगड़ने पर सौदेबाजी के पत्तों से सीधे हथियार बन सकते हैं।
ताइवान की स्थिति एक केंद्रीय मुद्दा
सार्वजनिक चर्चाओं में आर्थिक मुद्दे हावी हैं, लेकिन ताइवान ऐसा मुद्दा है जिससे वास्तविक संकट भड़कने की सबसे ज्यादा आशंका है। शिखर वार्ता से पहले चीनी अधिकारियों ने बयानबाजी तेज कर दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि ताइवान का सवाल चीन के मूल हितों के केंद्र में है और द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद है। बीजिंग ने निजी तौर पर संकेत दिया है कि वह चाहता है कि वॉशिंगटन अपनी घोषित नीति को, जिसमें कहा जाता है कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता, बदलकर उसका सक्रिय विरोध करने की स्थिति अपनाए। कूटनीतिक भाषा में यह सूक्ष्म, लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव होगा।
अमेरिका ने पिछले दिसंबर में ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दी थी। इसमें 420 आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम, 80 से अधिक हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम और ताइवान की असममित रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए डिजाइन किए गए घूमते हुए युद्धास्त्र शामिल हैं। खबरों के मुताबिक, पैकेज के कुछ हिस्से विदेश विभाग में अब भी अटके हैं, जिससे बीजिंग को दबाव बनाने का संभावित मौका मिल सकता है। चीनी विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व पर ध्यान देने के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र से ट्रंप की रणनीतिक वापसी ताइवान की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सरकार को बड़ी शक्तियों के बीच सौदेबाजी के लिए कमजोर बना सकती है।
चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी ने विदेश मंत्री रुबियो के साथ हालिया बातचीत में ताइवान को संबंधों के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया। उन्होंने वॉशिंगटन से अपने वादे निभाने और सहयोग के लिए नई गुंजाइश खोलने वाले सही फैसले लेने का आग्रह किया। इस आशंका ने ताइपे में बेचैनी पैदा की है कि ट्रंप ईरान पर चीन के सहयोग के बदले हथियारों की बिक्री घटाने का कोई बड़ा समझौता कर सकते हैं। वहां के अधिकारी जानते हैं कि मध्य पूर्व के संघर्षों में खर्च हुए अमेरिकी सैन्य भंडार को फिर से भरने में वर्षों लग सकते हैं।
प्रौद्योगिकी नियंत्रण और एआई कूटनीति
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर पर पाबंदियां विवाद का एक और मोर्चा हैं। व्हाइट हाउस ने हाल में बीजिंग पर औद्योगिक पैमाने पर अमेरिकी एआई मॉडल चुराने का आरोप लगाया। वहीं चीनी नियामकों ने स्थानीय कंपनियों को एनवीडिया के एच200 कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिप खरीदने से हतोत्साहित करना शुरू किया, जबकि ट्रंप ने उनके निर्यात को मंजूरी दे दी थी। यह विरोधाभास तकनीकी प्रतिस्पर्धा की जटिल प्रकृति को उजागर करता है: अमेरिकी कंपनियां चीन के 50 अरब डॉलर के एआई बाजार तक पहुंच चाहती हैं, जबकि वॉशिंगटन उन्नत कंप्यूटिंग के सैन्य इस्तेमाल पर बीजिंग की क्षमता सीमित करना चाहता है।
सौदेबाजी के एक संभावित मुद्दे में चीन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार शामिल है, जिसमें करीब 1.4 अरब बैरल तेल है। ईरान युद्ध के दबाव से बढ़ी वैश्विक ऊर्जा कीमतों को कम करने के लिए ट्रंप इस भंडार को जारी करने का अनुरोध कर सकते हैं। बदले में शी एआई चिप निर्यात और उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों पर पाबंदियां ढीली करने की मांग कर सकते हैं। सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के चीन मामलों के विशेषज्ञ माइकल क्लार्क ने इस संभावित लेन-देन का विश्लेषण किया।
हम चीन को वही चीज देंगे जिसकी उसे अपनी तकनीक और फिर सैन्य क्षमता को उन्नत करने के लिए जरूरत है, और वह भी अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल करके।
विशिष्ट उपकरणों को लेकर विवादों से आगे, दोनों देशों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के लिए सुरक्षा उपाय तय करने का दबाव बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं ने एआई से बढ़ी साइबर हमले की क्षमता और कम परिष्कृत पक्षों द्वारा एआई उपकरणों की मदद से नए जैविक हथियार विकसित करने की आशंका जताई है। शिखर वार्ता में एआई के दुरुपयोग की घटनाओं को लेकर गैर-बाध्यकारी सुरक्षा दिशानिर्देश या सीमित सूचना-साझाकरण समझौते हो सकते हैं, हालांकि दोनों तकनीकी महाशक्तियों के बीच गहरा अविश्वास बना हुआ है।
मानवाधिकार और शिखर वार्ता का मंचन
मानवाधिकार से जुड़े मुद्दे, खासकर हांगकांग के जेल में बंद मीडिया कारोबारी जिम्मी लाई का मामला, कूटनीतिक वार्ता को नैतिक रूप से और जटिल बनाते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह शी के साथ व्यक्तिगत रूप से लाई का मामला उठाएंगे और इसे चीनी नेता के लिए संवेदनशील मुद्दा बताया है। लाई विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत के आरोप में 20 साल की जेल की सजा काट रहे हैं। उनके बेटे ने इस सजा को उम्रकैद जैसी बताया है, क्योंकि 77 वर्षीय लाई की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए यह उनके लिए मौत की सजा के समान है। ट्रंप ने अक्टूबर में बुसान में हुई बैठक के दौरान भी लाई की रिहाई की पैरवी की थी, लेकिन बीजिंग ने नरमी का कोई संकेत नहीं दिया है।
ट्रंप के स्वागत का आयोजन भी अपने आप में राजनीतिक महत्व रखता है। राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से भव्य स्वागत की उम्मीद जताई है, जिसमें वर्दीधारी गार्डों की परेड और शी की ओर से उनके शब्दों में एक जोरदार आलिंगन शामिल होगा। हालांकि, चीनी अधिकारियों को चिंता है कि जरूरत से ज्यादा भव्य समारोह ऐसे समय में चापलूसी भरी तुष्टीकरण की छवि दे सकता है, जब बीजिंग मध्य पूर्व में खुद को तटस्थ शांतिदूत के रूप में पेश करना चाहता है। अमेरिकी सेना के सी-17 परिवहन विमानों के बीजिंग हवाई अड्डे पर उतरने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पहले ही प्रसारित हो चुकी हैं। ये राष्ट्रपति की सुरक्षा टीम और संचार उपकरणों की अग्रिम तैयारियों का संकेत हैं।
ट्रंप के साथ जा रहा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल 2017 की उनकी यात्रा में शामिल करीब 30 मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के दल से छोटा दिखता है। उस यात्रा के दौरान कंपनियों ने 250 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के सौदों पर हस्ताक्षर किए थे। मौजूदा खबरों के मुताबिक, बोइंग और सिटीग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल होंगे। एनवीडिया, एप्पल और क्वालकॉम के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के नेता भी आ सकते हैं, हालांकि व्हाइट हाउस ने आगाह किया है कि निमंत्रणों से जुड़ी खबरें अंतिम पुष्टि होने तक अटकलें ही हैं।
सफलता या विफलता के तीन परिदृश्य
विश्लेषकों ने शिखर वार्ता के संभावित नतीजों के तीन रास्ते बताए हैं। पहले परिदृश्य में बड़ा समझौता हो सकता है: ट्रंप कुछ प्रौद्योगिकी शुल्कों में ढील दें और ताइवान की स्थिति को लेकर सुरक्षा आश्वासन दें, जबकि शी ईरानी तेल का आयात बड़े पैमाने पर घटाएं और तेहरान पर सार्वजनिक रूप से वार्ता का दबाव डालें। दोनों नेता इसे अपनी जीत बताएंगे: ट्रंप शांतिदूत के रूप में और शी वैश्विक आर्थिक स्थिरता के पैरोकार के रूप में।
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के विशेषज्ञों के मुताबिक, दूसरा परिदृश्य अधिक संभावित है: दोनों पक्षों के बीच ठंडा गतिरोध बना रहेगा और कोई बड़ी सफलता नहीं मिलेगी। चीन ईरानी तेल की ग्रे-मार्केट खरीद जारी रखेगा, जबकि अमेरिका प्रतिबंध व्यवस्था बनाए रखेगा। दोनों पक्ष तनाव बढ़ाने से परहेज करने पर सहमत होंगे और अक्टूबर से चले आ रहे असहज सुकून को कायम रखेंगे, लेकिन बुनियादी विवादों का निर्णायक समाधान नहीं होगा।
तीसरे परिदृश्य में बड़ा अलगाव है, जिसमें खुली कटुता शिखर वार्ता को विफल कर देगी। ट्रंप ईरानी निर्यात की पूरी नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर सकते हैं, जबकि शी दुर्लभ मृदा धातुओं के निर्यात पर पाबंदी लगाकर ताइवान के पास सैन्य गतिविधियां बढ़ा सकते हैं। इस तरह की बढ़ोतरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी संकट में डाल सकती है, औपचारिक आर्थिक अलगाव की शुरुआत कर सकती है और दूसरे देशों को नए शीत युद्ध की व्यवस्था में पक्ष चुनने के लिए मजबूर कर सकती है।
आखिरकार, सफलता का आकलन व्यापक समझौतों से नहीं, बल्कि इस बात से होगा कि क्या दोनों नेता गलत आकलन रोकने के लिए पर्याप्त निजी तालमेल और संस्थागत सुरक्षा उपाय कायम कर पाते हैं। परमाणु हथियारों से लैस उन प्रतिद्वंद्वियों के बीच, जिनकी प्रतिस्पर्धा 21वीं सदी की सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था को आकार देती है, राष्ट्रपति स्तर पर संवाद फिलहाल संघर्ष को रोकने का एकमात्र भरोसेमंद तरीका है।
मुख्य बातें
- राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी ईरान युद्ध के कारण मार्च से टली शिखर वार्ता के लिए 14 और 15 मई को बीजिंग में मिलेंगे
- अमेरिका ईरानी तेल की खरीद घटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलवाने में चीन का सहयोग चाहता है
- चीन ने ईरानी कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने वाली अपनी टीपॉट रिफाइनरियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों की अवहेलना के लिए अवरोधक नियम लागू किए हैं
- दोनों देश कृषि उत्पादों की खरीद और संभावित रूप से 500 बोइंग विमानों से जुड़े व्यापार बोर्ड तंत्र पर बातचीत कर रहे हैं
- बीजिंग चाहता है कि वॉशिंगटन ताइवान नीति की भाषा को स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करने से बदलकर उसका विरोध करने की दिशा में ले जाए
- ट्रंप एआई प्रौद्योगिकी पर पाबंदियां ढीली करने के बदले चीन से रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने का अनुरोध कर सकते हैं
- हांगकांग के मीडिया कारोबारी जिम्मी लाई समेत मानवाधिकार के मामले कारोबारी सौदों के साथ एजेंडे में बने हुए हैं
- विश्लेषकों को व्यापक सफलता के बजाय अक्टूबर के व्यापार युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर केंद्रित सीमित नतीजों की उम्मीद है






