ईंधन संकट की चपेट में एशियाई विमानन, थाई एयरवेज़ ने 46 उड़ानें घटाईं
थाईलैंड की राष्ट्रीय विमानन कंपनी थाई एयरवेज़ इंटरनेशनल ने मई 2026 के लिए अपने उड़ान कार्यक्रम में व्यापक कटौती की घोषणा की है। बढ़ती जेट ईंधन कीमतों और कमजोर होती यात्रा मांग के बीच कंपनी ने 46 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या कम कर दी हैं। एशिया और यूरोप के मार्गों पर असर डालने वाली ये कटौतियां कंपनी की कुल क्षमता का करीब 10% हैं और क्षेत्र के विमानन उद्योग में बढ़ते दबाव का संकेत देती हैं।
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बैंकॉक स्थित एयरलाइन ने 17 अप्रैल को टिकट एजेंटों को जारी एक सूचना में कार्यक्रम में बड़े बदलावों का ब्योरा दिया। इसमें तेल की तेजी से बढ़ी कीमतों और साल के पारंपरिक रूप से धीमे मध्य दौर में यात्रियों की नरम मांग का हवाला दिया गया। फरवरी के बाद से जेट ईंधन की कीमतें तीन गुना हो गई हैं। इसकी वजह मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित किया है।
व्यस्त सुवर्णभूमि हवाई अड्डे को केंद्र बनाकर थाई एयरवेज़ एशिया के प्रमुख कारोबारी और पर्यटन स्थलों के लिए उड़ानों की संख्या घटाएगी। दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे व्यस्त हवाई मार्गों में शामिल बैंकॉक-सिंगापुर मार्ग पर मई भर दैनिक उड़ानें पांच से घटाकर चार की जाएंगी। नोम पेन्ह के लिए साप्ताहिक उड़ानें 14 से घटाकर 11 होंगी, जबकि ताइवान के काऊशुंग के लिए सेवा 8 मई से महीने के अंत तक पूरी तरह रोक दी जाएगी।
कटौतियों का सबसे ज्यादा असर उत्तर एशिया के मार्गों पर पड़ेगा। सियोल के इंचियोन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए थाई एयरवेज़ 8 से 31 मई के बीच उड़ानें रोजाना तीन से घटाकर सिर्फ एक कर देगी। बीजिंग और शंघाई के लिए रोजाना एक-एक उड़ान कम होगी, यानी महीने के ज्यादातर समय इन शहरों के लिए प्रतिदिन दो के बजाय एक उड़ान होगी। टोक्यो के नारिता हवाई अड्डे के लिए उड़ानें रोजाना तीन से घटाकर दो होंगी, जबकि ताइपे के लिए तीन से दो और हांगकांग के लिए चार से तीन दैनिक उड़ानें रह जाएंगी।
दक्षिण एशिया के मार्गों पर भी इसी तरह की पाबंदियां होंगी। मुंबई के लिए उड़ानें रोजाना दो से घटाकर एक की जाएंगी, जबकि दिल्ली के लिए साप्ताहिक उड़ानों में मामूली कमी कर उन्हें 22 से घटाकर 21 किया जाएगा। तेजी से उभरते तकनीकी केंद्र हैदराबाद के लिए अब रोजाना के बजाय सप्ताह में पांच उड़ानें होंगी।
यूरोपीय नेटवर्क में कटौती और घरेलू बदलाव
यूरोप के लिए लंबी दूरी की उड़ानें भी कटौतियों से अछूती नहीं रहेंगी। थाई एयरवेज़ कई प्रमुख मार्गों पर उड़ानों की संख्या घटाकर रोजाना से सप्ताह में पांच करेगी। इनमें फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख, कोपेनहेगन, स्टॉकहोम, ओस्लो और इस्तांबुल शामिल हैं। इन बदलावों से हर गंतव्य के लिए सप्ताह में दो उड़ानें कम होंगी। यात्रियों को बाकी दिनों की उड़ानों में समेटते हुए कंपनी इन शहरों से संपर्क बनाए रखेगी।
थाईलैंड के घरेलू मार्गों पर भी ऐसी ही कटौतियां होंगी। कंपनी मई भर बैंकॉक और उडोन थानी के बीच कुछ निर्धारित उड़ानें पूरी तरह रद्द करेगी, जबकि खॉन काएन के लिए उड़ानें रोजाना चार से घटाकर तीन की जाएंगी। उबोन रत्चथानी के लिए साप्ताहिक उड़ानें 14 से घटाकर 12 होंगी। मंगलवार और गुरुवार की उड़ानें रद्द की जाएंगी।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी चाई एमसिरी ने कहा कि ये बदलाव स्थायी रूप से मार्ग बंद करने के बजाय अस्थायी परिचालन उपाय हैं। 24 अप्रैल को परिवहन मंत्रालय में बोलते हुए उन्होंने पुष्टि की कि थाई एयरवेज़ अपने पोर्टफोलियो के सभी मार्गों और गंतव्यों के लिए अधिकार बनाए रखेगी। इसके बजाय, उड़ानों की आवृत्ति घटाकर और छोटे विमानों का इस्तेमाल करके क्षमता में बदलाव किया जाएगा।
मई के लिए किए गए बदलाव एयरलाइन के कुल उड़ान कार्यक्रम का करीब 4 से 5% हैं और अल्पकालिक हैं। हमने मांग पर रोजाना नजर रखने और तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए एक विशेष संचालन केंद्र बनाया है। मांग लौटने पर व्यस्त यात्रा अवधि में उड़ानों की आवृत्ति बहाल की जा सकती है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का ईंधन संकट
विमानन में इन व्यवधानों का तात्कालिक कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का बंद होना है। यह एक अहम समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का करीब 21% गुजरता है। फरवरी 2026 के आखिर में मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाई के बाद इस मार्ग की नाकेबंदी से आपूर्ति संकट पैदा हुआ। इसके चलते जेट ईंधन की कीमतें करीब 90 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 240 डॉलर तक पहुंच गईं और हवाई यात्रा का अर्थशास्त्र पूरी तरह बदल गया।
विमानन विश्लेषकों का कहना है कि इस ईंधन संकट से एशियाई विमानन कंपनियों को यूरोपीय और अमेरिकी कंपनियों की तुलना में खास तौर पर ज्यादा जोखिम है। क्षेत्र की एयरलाइनें आमतौर पर ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए कम हेजिंग करती हैं। कच्चे तेल और रिफाइंड जेट ईंधन की कीमतें एक साथ बढ़ने पर इससे वे हाजिर बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, हॉर्मुज़ से गुजरने वाले कच्चे तेल से एशिया-प्रशांत में सामान्य तौर पर रोजाना बनने वाले कम से कम 400,000 बैरल जेट ईंधन की आपूर्ति इस व्यवधान से प्रभावित हुई है।
विमानन डेटा विशेषज्ञ ओएजी के एशिया-प्रशांत वाणिज्यिक प्रमुख मयूर पटेल ने कहा कि व्यवधान बड़े पैमाने पर हैं और स्थिति बिगड़ रही है। उन्होंने बताया कि जहां लुफ्थांसा जैसी यूरोपीय कंपनियों ने 20,000 उड़ानें रद्द करने की घोषणा की और एसएएस ने अप्रैल की 1,000 उड़ानें रद्द कीं, वहीं एशियाई एयरलाइनें संरचनात्मक रूप से अलग चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
ईंधन के मामले में एशिया की स्थिति यूरोप और अमेरिका से अलग है, क्योंकि पूरे क्षेत्र में हेजिंग कमजोर है। कच्चे तेल और जेट ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आने पर ज्यादा एयरलाइनें सीधे इसकी चपेट में आती हैं। जब जेट ईंधन की कीमत 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 200 डॉलर पहुंची, तो परिचालन अर्थव्यवस्था पर इसका असर तुरंत पड़ा।
क्षेत्रीय एयरलाइनें भी कर रहीं कटौती
आपातकालीन क्षमता कटौती करने वाली थाई एयरवेज़ अकेली नहीं है। ईंधन संकट ने थाईलैंड के विमानन क्षेत्र और उसके बाहर भी व्यवस्थित कटौतियों को मजबूर किया है। देश की सबसे बड़ी कम लागत वाली एयरलाइन थाई एयरएशिया ने मई और जून 2026 में कुल सीट क्षमता 30% घटाने की घोषणा की है। सुवर्णभूमि हवाई अड्डे से शंघाई, रियाद, गुवाहाटी, काठमांडू और कई घरेलू मार्गों की उड़ानें निलंबित की जाएंगी।
लंबी दूरी की कम लागत वाली सहायक कंपनी थाई एयरएशिया एक्स ने अप्रैल के मध्य से बैंकॉक-शंघाई उड़ानें पूरी तरह रोक दी हैं और 30 जून तक रियाद की उड़ानें भी बंद कर दी हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी पट्रा बूसारावोंगसे ने कहा कि वैश्विक विमानन ईंधन की कीमतों में लंबे समय से जारी उछाल के जवाब में ये कठिन, लेकिन जरूरी फैसले हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसा ही रुझान है। बाटिक एयर मलेशिया ने घरेलू क्षमता 35% घटाई है, जो क्षेत्र में किसी एक एयरलाइन की सबसे बड़ी घरेलू कटौती है। वियतनाम एयरलाइंस ने मई के मध्य से जून तक क्षमता 2% घटाने की घोषणा की है। ईंधन की स्थिति बिगड़ने पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 18% तक कटौती हो सकती है। वियतजेट एयर ने 24 मार्गों पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में करीब 20% कटौती की है, जबकि बैंबू एयरवेज़ ने क्षमता 30% घटाई है।
संकट का असर प्रीमियम एयरलाइनें भी झेल रही हैं। हांगकांग की कैथे पैसिफिक और एचके एक्सप्रेस मई से जून तक कम उड़ानों के साथ संचालन करेंगी। ऑस्ट्रेलिया में क्वांटस का ईंधन बिल अनुमानित 800 मिलियन डॉलर बढ़ने वाला है। इसके चलते हैमिल्टन आइलैंड-मेलबर्न और डार्विन-गोल्ड कोस्ट समेत कुछ मार्गों की उड़ानें निलंबित की जा रही हैं। वर्जिन ऑस्ट्रेलिया ने क्षमता में 1% कटौती की पुष्टि की है। ऑस्ट्रेलिया के सीमित घरेलू बाजार में इसका मतलब हजारों सीटें कम होना है।
यात्रियों पर वित्तीय असर
यात्रियों पर असर सिर्फ उड़ानों के कम विकल्पों तक सीमित नहीं है। 1 मई 2026 से जारी होने वाले टिकटों पर थाई एयरवेज़ का ईंधन अधिभार करीब दोगुना हो जाएगा और यह शुल्क सीधे टिकट की कीमत में शामिल होगा। मार्ग और केबिन श्रेणी के हिसाब से बढ़ोतरी अलग-अलग होगी। यूरोपीय मार्गों पर इकोनॉमी श्रेणी का अधिभार 275 डॉलर से बढ़कर 524 डॉलर और लंदन, मिलान तथा पेरिस जैसे गंतव्यों के रिटर्न टिकटों पर बिजनेस क्लास का शुल्क 510 डॉलर से बढ़कर 982 डॉलर हो जाएगा।
क्षेत्रीय मार्गों पर भी इसी अनुपात में बढ़ोतरी होगी। बैंकॉक-सिंगापुर के इकोनॉमी टिकटों का अधिभार 49 डॉलर से बढ़कर 93 डॉलर हो जाएगा, जबकि टोक्यो और सियोल की उड़ानों पर इकोनॉमी शुल्क 152 डॉलर से बढ़कर 292 डॉलर होगा। बैंकॉक-यांगून जैसे छोटी दूरी के मार्गों पर भी इकोनॉमी श्रेणी का शुल्क 49 डॉलर से बढ़कर 93 डॉलर हो जाएगा।
यात्रा उद्योग के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि सीटों की घटती उपलब्धता और बढ़ती परिचालन लागत से मूल किराये भी बढ़ेंगे। सिंगापुर स्थित विमानन विश्लेषक ब्रेंडन सोबी ने कहा कि कम लागत वाली एयरलाइनें खास तौर पर मुश्किल विकल्पों का सामना कर रही हैं, क्योंकि उनके कारोबारी मॉडल सस्ते किराये, कम समय में विमानों को दोबारा उड़ान के लिए तैयार करने और विमानों के अधिकतम इस्तेमाल पर निर्भर करते हैं। ईंधन संकट के चलते किराये 15 से 20% बढ़ने पर कीमतों के प्रति संवेदनशील यात्री यात्रा ही नहीं करते।
कासिकॉर्न रिसर्च सेंटर का अनुमान है कि इन कारकों के चलते दूसरी तिमाही में थाईलैंड आने वाले विदेशी यात्रियों की संख्या 9.2% घटेगी। उड़ान सेवाओं में कमी से पूरे क्षेत्र के पर्यटन पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। संपर्क सुविधाएं कमजोर होने के साथ होटल, टूर ऑपरेटर और स्थानीय कारोबारों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
परिचालन रणनीति और यात्रियों के लिए सलाह
प्रभावित यात्रियों की सहायता के लिए थाई एयरवेज़ ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं और एयरलाइन उड़ान कार्यक्रम में बदलावों के बारे में यात्रियों से सीधे संपर्क कर रही है। 30 अप्रैल से पहले जारी टिकटों पर ईंधन अधिभार की मौजूदा दरें लागू रहेंगी, भले ही यात्रा की तारीख 1 मई के बाद हो। इससे अतिरिक्त लागत से बचने का सीमित मौका मिलता है।
एयरलाइन की परिचालन रणनीति में उड़ानों को एक साथ समेटकर सीटों को भरने की दर बढ़ाना और नेटवर्क का दायरा बनाए रखना शामिल है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी चाई एमसिरी ने बताया कि यात्रियों की कम संख्या से एक अनपेक्षित फायदा हुआ है: माल ढुलाई के लिए अधिक जगह उपलब्ध हो गई है। जहां मांग मजबूत बनी हुई है, वहां उच्च मूल्य वाले सामान और चिकित्सा खेप से आय के अवसर मिल रहे हैं।
गर्मियों में थाईलैंड जाने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए उद्योग की सलाह वही है: जल्दी बुकिंग करें। कई एयरलाइनों में क्षमता कम होने और किराये बढ़ने के बीच पहले से आरक्षण करने पर सीमित उपलब्धता और अचानक बढ़ी कीमतों से बचने की सबसे अच्छी संभावना रहती है। जिन यात्रियों की बुकिंग पहले से है, उन्हें अपने यात्रा कार्यक्रम पर नजर रखनी चाहिए, खासकर उन मार्गों पर जहां उड़ानों में कटौती की घोषणा हुई है।
एशियाई विमानन पर व्यापक असर
मौजूदा संकट एशियाई विमानन में संरचनात्मक बदलावों को तेज कर सकता है। ओएजी के विश्लेषण के अनुसार, ईंधन संकट कमजोर एयरलाइनों के एकीकरण को बढ़ावा दे सकता है और पारंपरिक खाड़ी केंद्रों से होकर गुजरने के बजाय लंबी दूरी की सीधी उड़ानों के पक्ष में दलील मजबूत कर सकता है। एयरबस ए321एक्सएलआर और ए350-1000 जैसे ईंधन-कुशल लंबी दूरी के विमान चलाने वाली एयरलाइनों को ऐसे माहौल में संरचनात्मक लाभ है, जहां खाड़ी के रास्ते होने वाले ठहराव पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता।
चांगी हवाई अड्डा वैकल्पिक मार्ग केंद्र के रूप में उभरा है। खाड़ी की एयरलाइनों की क्षमता घटने के साथ सिंगापुर-लंदन और हांगकांग-लंदन मार्गों की बुकिंग तेजी से बढ़ी है। वहीं, सिंगापुर एयरलाइंस ने बैंकॉक की उड़ानों को बिना किसी बदलाव के जारी रखा है, जिससे थाई एयरलाइनों की कटौती के बीच यात्रियों को भरोसेमंद विकल्प मिल रहा है।
हालांकि, इस संकट ने कुछ विमानन कंपनियों के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एशियाई एयरलाइनें ऐतिहासिक रूप से कम मुनाफे पर काम करती रही हैं, जो 2025 में करीब 3% था। ऐसे में 200 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहने वाली ईंधन कीमतें कम पूंजी वाली प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए कारोबार जारी रखना मुश्किल बना सकती हैं। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर एयरलाइनों के बंद होने की आशंका बढ़ सकती है, हालांकि उद्योग ने पिछले व्यवधानों के दौरान अपनी मजबूती दिखाई है।
जानने योग्य बातें
- थाई एयरवेज़ मई 2026 के दौरान घरेलू, एशियाई और यूरोपीय मार्गों पर 46 उड़ानें रद्द या कम करेगी। इससे कुल क्षमता का करीब 10% प्रभावित होगा
- मध्य पूर्व के संघर्ष और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण फरवरी 2026 से जेट ईंधन की कीमतें तीन गुना हो गई हैं। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का 21% गुजरता है
- प्रमुख कटौतियों में सियोल-इंचियोन की उड़ानें रोजाना तीन से घटाकर एक और सिंगापुर की उड़ानें पांच से घटाकर चार करना शामिल है। काऊशुंग की सेवा पूरी तरह निलंबित होगी
- फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख, कोपेनहेगन, स्टॉकहोम, ओस्लो और इस्तांबुल के लिए यूरोपीय मार्गों पर उड़ानें रोजाना से घटकर सप्ताह में पांच होंगी
- 1 मई से जारी थाई एयरवेज़ के टिकटों पर ईंधन अधिभार करीब दोगुना होगा। यूरोप के लिए इकोनॉमी श्रेणी का शुल्क 275 डॉलर से बढ़कर 524 डॉलर होगा
- मुख्य कार्यकारी अधिकारी चाई एमसिरी ने पुष्टि की है कि सभी कटौतियां अस्थायी बदलाव हैं, स्थायी रूप से मार्ग बंद करना नहीं। विशेष संचालन केंद्र रोजाना स्थिति पर नजर रखेगा
- थाई एयरएशिया, थाई एयरएशिया एक्स और क्षेत्र की अन्य एयरलाइनों ने भी औसतन 30% क्षमता कटौती की है
- कासिकॉर्न रिसर्च सेंटर का अनुमान है कि संपर्क सुविधाएं घटने और लागत बढ़ने से 2026 की दूसरी तिमाही में थाईलैंड आने वाले विदेशी यात्रियों की संख्या 9.2% घटेगी
- 30 अप्रैल से पहले जारी टिकटों पर यात्रा की तारीख चाहे जो हो, यात्रियों को ईंधन अधिभार की कम दरें ही देनी होंगी
- उद्योग विश्लेषकों को आशंका है कि ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहने या आपूर्ति संकट बढ़ने पर एशिया-प्रशांत में क्षमता में और कटौती हो सकती है






