गर्मियों की यात्रा पर संकट का साया
एशिया भर के विमान यात्रियों के लिए गर्मियों का यात्रा सीजन आराम के बजाय अफरा-तफरी से भरा है। ईरान में युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को झकझोर दिया है। 28 फरवरी को लड़ाई शुरू होने के बाद से जेट ईंधन की कीमत दोगुनी हो गई है। इसके चलते क्षेत्र की एयरलाइंस को उड़ानों के कार्यक्रम में भारी कटौती करनी पड़ रही है, मार्ग रद्द करने पड़ रहे हैं और ईंधन अधिभार बढ़ाना पड़ रहा है। इससे लाखों लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा बेहद महंगी हो सकती है।
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इस संकट का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। इस संकरे समुद्री मार्ग से आम तौर पर दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की लगभग पांचवीं हिस्सेदारी गुजरती है। वाणिज्यिक जहाजों के लिए यह जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद होने से एशिया का विमानन क्षेत्र अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। दुनिया के लगभग किसी भी अन्य क्षेत्र से अधिक, एशिया मध्य पूर्व से ऊर्जा आयात पर निर्भर है। इस कारण यहां की एयरलाइंस आपूर्ति में रुकावटों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। मार्च से जून के बीच इन रुकावटों के चलते दुनिया भर में 150,000 से अधिक उड़ानें पहले ही रद्द हो चुकी हैं।
यात्रियों पर इसका असर टिकट की ऊंची कीमतों तक सीमित नहीं है। उद्योग विशेषज्ञों ने सेवाओं की विश्वसनीयता घटने, छोटे शहरों से संपर्क कम होने और ईंधन की असहनीय लागत के बोझ तले पूरी एयरलाइंस के बंद होने की आशंका जताई है। विमानन क्षेत्र के एक विश्लेषक के अनुसार, मौजूदा संकट कोविड-19 महामारी के बाद वाणिज्यिक विमानन में सबसे गंभीर व्यवधान है और इससे उबरने में 2027 तक का समय लग सकता है।
ईंधन संकट कैसे काम करता है
जेट ईंधन अन्य पेट्रोलियम उत्पादों से बुनियादी तौर पर अलग है, जिससे यह संकट खास तौर पर गंभीर हो गया है। पेट्रोल या डीजल को उपभोक्ता और कंपनियां अपेक्षाकृत आसानी से जमा कर सकते हैं, लेकिन जेट ईंधन के लिए विशेष भंडारण ढांचे की जरूरत होती है। सामान्य परिस्थितियों में यह एयरलाइन की परिचालन लागत का लगभग 25 से 30 प्रतिशत होता है। युद्ध शुरू होने के बाद से कुछ एशियाई एयरलाइंस का ईंधन खर्च कुल परिचालन लागत के लगभग 45 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस स्तर पर कई मार्गों का संचालन आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन जाता है।
इस कमजोरी की वजह एशिया की सीमित घरेलू रिफाइनिंग क्षमता है। सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत जैसे देश जेट ईंधन बनाते हैं, लेकिन कच्चे माल के रूप में वे मध्य पूर्व के कच्चे तेल पर काफी निर्भर हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने पर क्षेत्र की रिफाइनरियां पहले के उत्पादन स्तर को बनाए नहीं रख सकीं। समस्या तब और बढ़ गई जब युद्ध शुरू होने के बाद दक्षिण कोरिया और चीन ने घरेलू ईंधन आपूर्ति को प्राथमिकता दी। इससे क्षेत्रीय निर्यात बाजार से हर महीने लगभग 1.3 मिलियन टन जेट ईंधन हट गया, जो एशिया की कुल मांग का करीब 10 प्रतिशत है।
भारत, जिसने वित्त वर्ष 2025 में 8.55 मिलियन टन विमानन ईंधन का निर्यात किया था, ने भी घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी है। मार्च में नई दिल्ली ने निर्यात शुल्क लगाया, जो अप्रैल तक बढ़कर 42 रुपये (57 सिंगापुर सेंट) प्रति लीटर हो गया। साथ ही, स्थानीय एयरलाइंस को राहत देने के लिए घरेलू कीमतों में मासिक बढ़ोतरी की सीमा 25 प्रतिशत तय की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिये से ये कदम समझ में आते हैं, लेकिन इनके कारण वियतनाम, म्यांमार और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को वैकल्पिक आपूर्ति के लिए भागदौड़ करनी पड़ रही है।
अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद में एयरलाइंस
एशियाई एयरलाइंस के सामने वित्तीय गणित बेहद कठिन है। मौजूदा कीमतों पर एक सिंगल-आइल वाणिज्यिक विमान प्रति घंटे लगभग 800 गैलन ईंधन जलाता है, जबकि वाइडबॉडी विमान इससे भी अधिक खपत करते हैं। फरवरी से जेट ईंधन की कीमत दोगुनी होने के बाद एयरलाइंस उन मार्गों पर भी घाटा उठा रही हैं जो कुछ महीने पहले तक मुनाफे में थे। खबरों के मुताबिक, कुछ छोटी एयरलाइंस को रोजाना लाखों डॉलर का नुकसान हो रहा है।
विमानन डेटा फर्म Cirium के अनुसार, दुनिया भर में उड़ानों के कार्यक्रम में सबसे बड़ी कटौती करने वाली 20 एयरलाइंस में से 11 एशिया में स्थित हैं। वियतनाम की कम लागत वाली एयरलाइन VietJet कटौती के प्रतिशत के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। उसने मई का अपना उड़ान कार्यक्रम लगभग 20 प्रतिशत घटाया है। उससे आगे केवल मध्य पूर्व की Qatar Airways और Etihad हैं। Sichuan Airlines, Garuda Indonesia, Malaysia Airlines, Xiamen Airlines और AirAsia Group की कई एयरलाइंस ने भी 10 से 15 प्रतिशत तक कटौती की है।
कुछ एशियाई एयरलाइंस को रोजाना लाखों डॉलर का नुकसान हो रहा है। युद्ध जारी रहने पर उड़ानों में और कटौती तय है।
AirAsia Group ने बैंकॉक-सिंगापुर और जकार्ता-कोटा किनाबालु सहित पूरे मार्ग बंद कर दिए हैं। कुछ कटौतियां अक्टूबर के अंत तक लागू रहेंगी। इंडोनेशिया की कम लागत वाली एयरलाइन TransNusa ने अब तक उड़ानें रद्द करने से परहेज किया है, लेकिन उसके ज्यादातर प्रतिस्पर्धी ऐसा नहीं कर पाए। दक्षिण कोरिया की बजट एयरलाइन T'way Air ने मई और जून में केबिन क्रू को बिना वेतन छुट्टी पर भेजने की योजना बनाई है। ईंधन संकट से सीधे जुड़ी यह उद्योग की शुरुआती कर्मचारियों की कटौतियों में से एक है।
क्षेत्र में असर का असमान बंटवारा
एशियाई बाजारों पर असर रिफाइनिंग क्षमता और रणनीतिक भंडार के आधार पर काफी अलग-अलग है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर की स्थिति सबसे सुरक्षित है, जबकि घरेलू रिफाइनिंग ढांचा न रखने वाले देशों के विमानन क्षेत्र पर अस्तित्व का खतरा मंडरा रहा है।
ईंधन आयात पर निर्भर देशों की कमजोरी वियतनाम में साफ दिखाई देती है। देश अपनी जरूरत का दो-तिहाई से अधिक जेट ईंधन आयात करता है। परंपरागत रूप से इसका 60 प्रतिशत चीन और थाईलैंड से आता है। चीन के निर्यात पर रोक और क्षेत्रीय आपूर्ति घटने के बीच हनोई ने बीजिंग से आपूर्ति स्थिर बनाए रखने का औपचारिक अनुरोध किया है। साथ ही, प्रशांत महासागर पार कर अमेरिका से आपातकालीन खेप मंगाने की कोशिश भी की जा रही है। फिलीपींस को केवल जून तक के लिए ईंधन मिल पाया है, जबकि म्यांमार और बांग्लादेश की स्थिति भी इसी तरह नाजुक है।
क्षेत्र के ईंधन भंडार की तस्वीर मिली-जुली है। ऑस्ट्रेलिया के पास 30 दिन का भंडार है, जिसे अब तक इस्तेमाल नहीं किया गया है। 19 अप्रैल तक न्यूजीलैंड के पास 47 दिन की आपूर्ति थी। भारत का कहना है कि उसके पास 60 दिन के लिए पर्याप्त ईंधन है। इंडोनेशिया ने मार्च के मध्य में 38 दिन का भंडार बताया था। सरकारी ऊर्जा कंपनी Pertamina ने जून तक हज उड़ानों के लिए अतिरिक्त ईंधन का इंतजाम भी किया है। मलेशिया की Petronas के पास जून तक के लिए पर्याप्त भंडार है और वह सक्रिय रूप से और ईंधन खरीद रही है।
हालांकि, वियतनाम और फिलीपींस ने संकट की शुरुआत में ही उड़ानें रद्द कर दी थीं। इससे संकेत मिलता है कि सरकारी तौर पर बताए गए भंडार के आंकड़े वास्तविक परिचालन स्थिति नहीं दर्शाते होंगे। क्षेत्र के प्रमुख रिफाइनिंग और व्यापार केंद्र सिंगापुर में भंडार के सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाते, हालांकि वहां मौजूद अधिक भंडार पड़ोसी बाजारों को कुछ राहत देता है।
दुनिया भर में असर
व्यवधान का सबसे ज्यादा असर एशिया पर है, लेकिन संकट दुनिया भर में फैल चुका है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, यूरोपीय एयरलाइंस के पास शायद केवल छह सप्ताह का जेट ईंधन बचा है। Lufthansa ने मई से अक्टूबर के बीच 20,000 उड़ानें रद्द की हैं, जिससे उसकी खपत से लगभग 40,000 मीट्रिक टन जेट ईंधन घटेगा। KLM ने मई के लिए यूरोप के भीतर 160 उड़ानें कम की हैं, जबकि easyJet को वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कर-पूर्व नुकसान 540 मिलियन पाउंड से अधिक होने का अनुमान है।
अमेरिका एक बड़ा तेल उत्पादक देश है और उसके पास घरेलू रिफाइनिंग क्षमता भी है, इसलिए वहां भौतिक कमी के बजाय कीमतें बढ़ रही हैं। Delta, United, American Airlines और JetBlue जैसी अमेरिकी एयरलाइंस ने मूल किरायों के बजाय चेक-इन बैग के शुल्क बढ़ाए हैं। हालांकि, United ने सार्वजनिक रूप से किराया बढ़ाने की घोषणा की है और तीसरी तिमाही तक अपने उड़ान कार्यक्रम में 5 प्रतिशत की कटौती की है।
United के सीईओ Scott Kirby ने कर्मचारियों को भेजे एक ज्ञापन में संभावित नुकसान का आकलन देते हुए कहा कि ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो एयरलाइन को सालाना 11 अरब डॉलर की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है। तुलना के लिए उन्होंने बताया कि United के अब तक के सबसे अच्छे साल में भी मुनाफा 5 अरब डॉलर से कम था। यह अंतर बताता है कि कई विश्लेषक उद्योग में एकीकरण की आशंका क्यों जता रहे हैं। वित्तीय रूप से मजबूत एयरलाइंस संकटग्रस्त प्रतिस्पर्धियों को खरीद सकती हैं।
आपूर्ति के असामान्य रास्ते
विमान उड़ते रहें, इसके लिए संकट में असाधारण कदम उठाए जा रहे हैं। एक बेहद असामान्य घटनाक्रम में अमेरिका एशियाई सहयोगियों को सैन्य श्रेणी का जेट ईंधन प्रशांत महासागर पार भेज रहा है। वॉशिंगटन के Cherry Point से फिलीपींस के Subic Bay तक नौसैनिक विमानन के JP-5 ईंधन के 235,000 बैरल भेजने के लिए निविदाएं जारी की गई हैं। मई और जून में जापान के Yokose तक 260,000 बैरल की खेप भेजने की भी योजना है।
ऊर्जा विश्लेषण फर्म Kpler के अनुसार, 2017 के बाद से अमेरिका से JP-5 निर्यात की यह केवल चौथी और पांचवीं खेप है। आम तौर पर नौसैनिक विमानों के लिए रखे जाने वाले इस सैन्य ईंधन की खेप दिखाती है कि आपूर्ति श्रृंखलाएं कितनी गंभीर दबाव में हैं। ये श्रृंखलाएं आम तौर पर मध्य पूर्व के कच्चे तेल पर निर्भर रहती हैं, जिसे सिंगापुर और दक्षिण कोरिया में रिफाइन किया जाता है।
वाणिज्यिक एयरलाइंस भी अपने संचालन में बदलाव कर रही हैं। कई कंपनियां "टैंकरिंग" कर रही हैं, यानी गंतव्य हवाई अड्डों पर कमी की आशंका होने पर वापसी की यात्रा के लिए भी पर्याप्त ईंधन लेकर रवाना हो रही हैं। कुछ अन्य एयरलाइंस ईंधन की खपत घटाते हुए सीटों को अधिकतम भरने के लिए कई उड़ानों को मिलाकर एक कर रही हैं। Cathay Pacific और HK Express ने मई के मध्य से जून तक कुछ उड़ानें रद्द की हैं और लंबी दूरी के मार्गों पर 150 पाउंड स्टर्लिंग तक ईंधन अधिभार जोड़ा है।
इंसानी और आर्थिक कीमत
हवाई अड्डों से बाहर भी ईंधन संकट एशिया की व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि युद्ध के आर्थिक असर के कारण एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 8.8 मिलियन लोगों के गरीबी में जाने का जोखिम है। केवल दक्षिण-पूर्व एशिया में ही कच्चे तेल के आयात का दो-तिहाई हिस्सा आम तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इससे परिवहन से लेकर विनिर्माण और कृषि तक हर क्षेत्र प्रभावित होता है।
म्यांमार के धान किसान अपनी फसल बचाने के लिए अब काला बाजार में युद्ध से पहले की कीमत से पांच गुना ज्यादा दाम पर डीजल खरीद रहे हैं। ईंधन और खाद की लागत के कारण कंबोडिया के कुछ किसानों ने दोबारा बुवाई छोड़ दी है। फिलीपींस में उत्तरी क्षेत्रों की सब्जियां खेतों में सड़ रही हैं, क्योंकि किसान उन्हें बाजार तक पहुंचाने का खर्च नहीं उठा सकते। पश्चिमी देशों के बड़े खुदरा विक्रेताओं को सामान देने वाले बांग्लादेश के कपड़ा कारखानों का उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित है, क्योंकि पेट्रोकेमिकल से बने धागे की कीमत दोगुनी हो गई है।
पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को खास तौर पर भारी नुकसान हो रहा है। श्रीलंका के होटलों का कहना है कि हवाई किराया तीन गुना होने के बाद उनके यहां ठहरने वालों की संख्या 80 से 90 प्रतिशत तक गिर गई है। मार्च के पहले सप्ताह में थाईलैंड में पर्यटकों की आमद साल-दर-साल 9 प्रतिशत घटी और बड़े होटलों में कमरे भरने की दर एकल अंक में रही। पूरे क्षेत्र में रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता, कारीगर और अनौपचारिक परिवहन सेवा देने वाले लोग पर्यटकों की संख्या घटने से आजीविका खोने के कगार पर हैं।
यात्रियों को क्या उम्मीद रखनी चाहिए
यात्रा की योजना बना रहे लोगों को फिलहाल सतर्क और लचीला रहने की जरूरत है। उद्योग विशेषज्ञ पूरी यात्रा बीमा सुरक्षा के साथ रिफंड योग्य टिकट बुक करने, लंबी दूरी की आने-जाने की यात्रा पर 200 से 400 डॉलर के ईंधन अधिभार का बजट रखने और आपूर्ति सामान्य होने की संभावना के मद्देनजर 2026 के आखिर या 2027 की शुरुआत की यात्रा के टिकट पहले से खरीदने की सलाह देते हैं।
एयरलाइंस अधिक कमाई वाले मार्गों को प्राथमिकता दे रही हैं और कम मुनाफे वाली सेवाएं बंद कर रही हैं। यात्रियों को छोटे शहरों के लिए कम विकल्प मिल सकते हैं, जबकि मुख्य मार्गों पर सेवा जारी रह सकती है। उड़ानों को एक साथ मिलाने से सीटें भरने की दर बढ़ रही है, जिससे चल रही उड़ानों में भी कम किराये वाली सीटों की उपलब्धता घट सकती है।
सरकारें जवाबी कदमों में तालमेल बिठाना शुरू कर रही हैं। यूरोपीय संघ आपातकालीन उपाय पेश करेगा, जिनमें केरोसिन की संयुक्त खरीद और सदस्य देशों के बीच साझा ईंधन भंडार की संभावना शामिल है। एशियाई विमानन क्षेत्र के नेताओं ने भी क्षेत्रीय समन्वय की ऐसी ही मांग की है। हालांकि, ASEAN Petroleum Security Agreement जैसे तंत्र दशकों से कागजों पर मौजूद होने के बावजूद कभी लागू नहीं किए गए।
तेल वायदा बाजारों से संकेत मिलता है कि 2026 के आखिर तक कीमतें घट सकती हैं, लेकिन भौतिक आपूर्ति की बाधाएं इससे अधिक समय तक बनी रह सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य कल ही फिर खुल जाए, तब भी रिफाइनरियों को पूरा उत्पादन बहाल करने में कई सप्ताह लगेंगे और जहाजरानी के कार्यक्रम सामान्य होने में कई महीने। United Airlines का अनुमान है कि 2027 के अंत तक तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहेगी। इससे संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में सस्ते हवाई किरायों का दौर खत्म हो चुका है।
मुख्य बातें
- ईरान युद्ध के चलते जेट ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने से मार्च से जून 2026 के बीच दुनिया भर में 150,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं
- 28 फरवरी से जेट ईंधन की कीमत दोगुनी हो गई; यह लगभग 93 डॉलर से बढ़कर अपने उच्चतम स्तर पर 190 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंच गई
- होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण मध्य पूर्व के तेल पर भारी निर्भरता रखने वाली एशिया-प्रशांत की एयरलाइंस सबसे अधिक जोखिम में हैं
- दुनिया भर में उड़ानों में सबसे बड़ी कटौती करने वाली 20 एयरलाइंस में से 11 एशिया की हैं। इनमें VietJet (20% कटौती) और AirAsia Group की कई एयरलाइंस (10-15% कटौती) शामिल हैं
- यूरोपीय एयरलाइंस के पास छह सप्ताह में ईंधन खत्म होने की आशंका है; Lufthansa ने अक्टूबर तक 20,000 उड़ानें रद्द की हैं
- लंबी दूरी के टिकटों पर 200-400 डॉलर का ईंधन अधिभार जोड़ा जा रहा है; कुछ एयरलाइंस ने अधिभार दोगुना कर दिया है
- घरेलू रिफाइनिंग क्षमता की कमी के कारण वियतनाम, फिलीपींस, बांग्लादेश और म्यांमार को ईंधन की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है
- अमेरिका से जापान और फिलीपींस भेजी जा रही सैन्य श्रेणी के जेट ईंधन की असामान्य खेप आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव दिखाती है
- उद्योग विश्लेषकों को क्षेत्र में एकीकरण की आशंका है; वित्तीय रूप से कमजोर कम लागत वाली एयरलाइंस का विलय हो सकता है या वे बंद हो सकती हैं
- संघर्ष तुरंत खत्म होने पर भी आपूर्ति सामान्य होने में 2026 के अंत या 2027 तक का समय लग सकता है






