समावेशी अंतरिक्ष अन्वेषण का नया युग
दो पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री चीन के अंतरिक्ष यात्री अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण शुरू करने के लिए बीजिंग पहुंच गए हैं। यह चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम का उसकी सीमाओं से परे ऐतिहासिक विस्तार है। मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम दाऊद तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर अभियानों में हिस्सा लेने के लिए चुने गए पहले विदेशी नागरिक हैं। इनमें से एक के 2026 के आखिर में ही उड़ान में शामिल होने की उम्मीद है।
विषय-सूची
उनका आगमन चीन के 11वें अंतरिक्ष दिवस और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की 70वीं वर्षगांठ के साथ हुआ है। ये समारोह बीजिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपनी परिकल्पना सामने रखने का मंच बन गए हैं। शुक्रवार को नियमित प्रेस वार्ता में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि अंतरिक्ष को बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का “अखाड़ा” नहीं बनना चाहिए।
अंतरिक्ष बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता का “अखाड़ा” नहीं है। चीन अंतरिक्ष में एक खुला “मित्र मंडल” बनाने और बाहरी अंतरिक्ष के अन्वेषण के मानवता के साझा प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए सभी पक्षों के साथ काम करता रहेगा।
गुओ की टिप्पणी उन बढ़ती चिंताओं के जवाब में आई है कि वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा अब उस दौर में प्रवेश कर चुकी है जिसे विश्लेषक “प्रतिस्पर्धा 2.0 चरण” कहते हैं। इसकी पहचान केवल वैज्ञानिक खोज के बजाय नियम बनाने और गठबंधन तैयार करने से है। अमेरिका और उसके सहयोगी जहां आर्टेमिस समझौते और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं चीन अपने अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान केंद्र और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों के जरिए एक वैकल्पिक नेटवर्क विकसित कर रहा है।
हालांकि, चीनी अधिकारियों का कहना है कि उनका दृष्टिकोण अंतरिक्ष सहयोग के पारंपरिक मॉडलों से बुनियादी तौर पर अलग है। पहले अंतरिक्ष क्षेत्र की बड़ी शक्तियां अक्सर साझेदारियां उन विकसित अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित रखती थीं जिनके पास पहले से क्षमताएं थीं। इसके उलट, बीजिंग विकासशील देशों के लिए भागीदारी की बाधाएं सक्रिय रूप से कम कर रहा है।
सितारों तक पाकिस्तान का ऐतिहासिक अभियान
अली और दाऊद का चयन करीब एक साल चली द्विपक्षीय वार्ताओं का नतीजा है। फरवरी 2025 में पाकिस्तान के अंतरिक्ष और ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग (SUPARCO) और चीन की मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी ने एक व्यापक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसने चीन के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में पाकिस्तान की भागीदारी का ढांचा तय किया।
दोनों उम्मीदवारों को असाधारण शैक्षणिक पृष्ठभूमि और शारीरिक सहनशक्ति वाले लोगों को चुनने के लिए बनाई गई कठोर चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। अंतिम सूची में अनुभवी पायलट और एयरोस्पेस से जुड़े विषयों में पीएचडी धारक शामिल थे। चीन के अंतरिक्ष यात्री केंद्र पहुंचने के बाद वे आरक्षित अंतरिक्ष यात्रियों के तौर पर प्रशिक्षण लेंगे। पाठ्यक्रम में तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन की तीन मॉड्यूल वाली संरचना और शेनझोउ अंतरिक्ष यान के संचालन में दक्षता हासिल करने पर जोर होगा।
मूल्यांकन पूरा करने के बाद इनमें से एक भविष्य के शेनझोउ अभियान में पेलोड विशेषज्ञ के रूप में शामिल होगा और अंतरिक्ष यान उड़ाने के बजाय सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में वैज्ञानिक प्रयोग करेगा। नियोजित अनुसंधान क्षेत्रों में पदार्थ विज्ञान, द्रव भौतिकी, जीवन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी शामिल हैं। इनके नतीजे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, खाद्य सुरक्षा और औद्योगिक नवाचार में काम आ सकते हैं।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस अभियान को “पाकिस्तान-चीन की स्थायी रणनीतिक साझेदारी” का प्रतिबिंब बताया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में अंतरिक्ष यात्रियों से मुलाकात के दौरान शरीफ ने उम्मीदवारों से कहा, “मुझे विश्वास है कि आप पाकिस्तान के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेंगे।” उन्होंने कहा कि यह अभियान द्विपक्षीय संबंधों में “नए आयाम” जोड़ेगा और टिप्पणी की, “पाकिस्तान और चीन की दोस्ती अब सितारों तक पहुंचने और आसमान की बुलंदियों को छूने के लिए तैयार है।”
महाद्वीपों में फैली साझेदारियां
पाकिस्तान का यह अभियान कई महाद्वीपों में फैले अंतरिक्ष सहयोग के बढ़ते नेटवर्क की बस एक कड़ी है। अफ्रीका में चीन ने कई देशों के साथ उपग्रह सहयोग समझौते किए हैं। इनमें लिब्रेविल में न्यूस्पेस अफ्रीका सम्मेलन के दौरान सोमालिया के साथ हाल ही में हुआ समझौता ज्ञापन भी शामिल है। चीन के भूमि उपग्रह सुदूर संवेदन अनुप्रयोग केंद्र और सोमालिया के संचार एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच हुए इस समझौते में आंकड़ों पर आधारित विकास और पर्यावरण निगरानी के लिए पृथ्वी अवलोकन के उपयोग पर ध्यान दिया गया है।
बीजिंग ने अपनी अंतरिक्ष कूटनीति में सांस्कृतिक पहलुओं को भी शामिल किया है। अफ्रीकी किशोरों की बनाई दस पेंटिंग फिलहाल तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर प्रदर्शित हैं। अधिकारियों के अनुसार, ये अंतरिक्ष अन्वेषण के ऐसे समावेशी दृष्टिकोण का प्रतीक हैं जिसमें तकनीकी सहयोग के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी महत्व दिया जाता है।
दक्षिण अमेरिका में चीन-ब्राजील पृथ्वी संसाधन उपग्रह कार्यक्रम अमेजन के वर्षावनों की निगरानी और सुरक्षा का काम जारी रखे हुए है। यह कार्यक्रम बीजिंग की अंतरिक्ष साझेदारियों में दीर्घकालिक निरंतरता दर्शाता है। दशकों से संचालित इस कार्यक्रम से पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े मिलते रहे हैं।
ये पहल चीन की व्यापक विदेश नीति की रूपरेखा के अनुरूप हैं, जिसमें बेल्ट एंड रोड पहल का अंतरिक्ष सूचना गलियारा और वैश्विक विकास पहल शामिल हैं। उपग्रह ढांचे को जमीन पर चल रही विकास परियोजनाओं के साथ जोड़कर बीजिंग साझेदार देशों को दूरसंचार, निगरानी और नेविगेशन सेवाएं एक साथ उपलब्ध कराता है।
वैज्ञानिक खोजों की वैश्विक साझेदारी
चीन का सहयोगी दृष्टिकोण मानवयुक्त अभियानों से आगे बढ़कर गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण से मिले वैज्ञानिक आंकड़े और नमूने साझा करने तक फैला है। अप्रैल 2025 में फ्रांस, जर्मनी, जापान, पाकिस्तान, ब्रिटेन और अमेरिका समेत छह देशों के सात संस्थानों को चांग-अ 5 अभियान से लाए गए चंद्र नमूनों का अध्ययन करने की अनुमति मिली।
इन नमूनों के हालिया विश्लेषण से महत्वपूर्ण खोजें हुई हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने अभियान से पृथ्वी पर लाए गए 1,731 ग्राम पदार्थ में चंद्रमा के दो ऐसे खनिजों की पहचान की जो पहले ज्ञात नहीं थे। अंतरराष्ट्रीय खनिज विज्ञान संघ ने मैग्नेसियोचेंजेसाइट-(Y) और चेंजेसाइट-(Ce) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी देकर उनका वर्गीकरण किया है। लौटाए गए नमूनों में वैश्विक स्तर पर पहचाने गए ये सातवें और आठवें नए चंद्र खनिज हैं।
आगे की योजनाओं के तहत, चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन ने घोषणा की है कि 2028 के आसपास प्रक्षेपित होने वाले तियानवेन-3 मंगल नमूना-वापसी अभियान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के पांच पेलोड होंगे। चुनी गई परियोजनाओं में जीवन के संकेत खोजने के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान समिति के नेतृत्व वाला मार्स PEX स्पेक्ट्रोमीटर, मकाऊ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का मंगल आणविक आयन संघटन विश्लेषक और मंगल के वायुमंडल में जल के समस्थानिकों का पता लगाने के लिए हांगकांग चीनी विश्वविद्यालय का लेजर हेटेरोडाइन स्पेक्ट्रोमीटर शामिल हैं।
इसके अलावा, चीन ने सूर्य के अवलोकन के लिए शिहे-2 अभियान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसरों की घोषणा की है और वैश्विक साझेदारों को सौर विज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए साथ काम करने का आमंत्रण दिया है। यह घोषणा वैश्विक शोधकर्ताओं के लिए 10 बड़े वैज्ञानिक प्रोजेक्ट और सुविधाएं उपलब्ध कराने की बीजिंग की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। इनमें चीनी मेरिडियन परियोजना भी शामिल है, जो 18 देशों के 267 संगठनों की पहले ही मदद कर चुकी है।
गहरे अंतरिक्ष और चंद्रमा को लेकर महत्वाकांक्षाएं
चीन का सहयोग ढांचा अनहुई प्रांत के हेफेई स्थित गहन अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयोगशाला (DSEL) के जरिए गहरे अंतरिक्ष के अन्वेषण तक फैला है। 2022 में स्थापना के बाद से DSEL ने अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क बनाते हुए चंद्र और ग्रह विज्ञान में चीन के योगदान का समन्वय किया है।
प्रयोगशाला ने छुएच्याओ-2 रिले उपग्रह और चांग-अ 6 अभियानों में अहम भूमिका निभाई। चांग-अ 6 मानव इतिहास में पहली बार चंद्रमा के सुदूर हिस्से से नमूने लेकर लौटा था। फिलहाल DSEL के वैज्ञानिक चंद्रमा पर मानव बस्तियां बसाने से जुड़े अग्रणी अध्ययन कर रहे हैं। वे ऐसी तकनीकें विकसित कर रहे हैं जिनका परीक्षण स्थायी चंद्र अनुसंधान केंद्र की दिशा में अगले चांग-अ 7 और चांग-अ 8 अभियानों के दौरान किए जाने की उम्मीद है।
जुलाई 2025 में चीन और साझेदार संस्थानों ने अंतरराष्ट्रीय गहन अंतरिक्ष अन्वेषण संघ (IDSEA) की शुरुआत की। गहरे अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए चीन की पहल पर बना यह पहला वैश्विक वैज्ञानिक संगठन है। संघ से 30 से अधिक देशों के 85 संस्थागत सदस्य और 60 देशों के 600 से अधिक वैज्ञानिक जुड़ चुके हैं। 2025 के अंत तक सदस्य संस्थानों की संख्या 100 तक पहुंचने की उम्मीद है।
ये गतिविधियां चीन के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान केंद्र (ILRS) को समर्थन देती हैं, जो अमेरिका के नेतृत्व वाले आर्टेमिस कार्यक्रम का एक विकल्प है। आर्टेमिस समझौते पर ब्राजील, भारत और संयुक्त अरब अमीरात समेत 35 से अधिक पक्षों ने हस्ताक्षर किए हैं। वहीं ILRS की साझेदारी में रूस, बेलारूस, मिस्र, निकारागुआ और दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देश शामिल हैं। औपचारिक सहयोग तंत्र के बिना चंद्रमा पर दो अलग-अलग आधार कार्यक्रमों का समानांतर विकास उस स्थिति को दर्शाता है जिसे कुछ विश्लेषक “अंतरिक्ष-राजनीतिक विभाजन” कहते हैं।
भू-राजनीतिक तनावों के बीच राह तलाशना
समावेशी सहयोग पर जोर देने के बावजूद, वैश्विक अंतरिक्ष परिदृश्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रभावित है। अंतरिक्ष सहयोग के मामले में अमेरिका और चीन के मॉडल एक-दूसरे से काफी अलग हैं। वॉशिंगटन सार्वजनिक-निजी साझेदारियों पर जोर देता है, जबकि बीजिंग राज्य-निर्देशित कार्यक्रमों पर निर्भर है।
2011 से वुल्फ संशोधन ने नासा को संघीय धन का इस्तेमाल कर चीन की अंतरिक्ष संस्थाओं के साथ सहयोग करने से रोक रखा है। इसके चलते चीन को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में भागीदारी से प्रभावी रूप से बाहर रखा गया है। इस विधायी बाधा ने बीजिंग को तियांगोंग स्टेशन समेत अपनी स्वतंत्र क्षमताएं विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के दूसरे रास्ते तलाशने के लिए प्रेरित किया है।
अटलांटिक काउंसिल के विश्लेषकों का कहना है कि अंतरिक्ष में सैन्य टकराव की बड़ी चिंताओं के बावजूद सीमित सहयोग से दोनों देशों को लाभ हो सकता है। शुरुआत के लिए सुझाए गए कदमों में नासा और चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन के बीच एक द्विपक्षीय कार्य समूह बनाना शामिल है। यह 1968 के संयुक्त राष्ट्र के अंतरिक्ष यात्रियों के बचाव और वापसी संबंधी समझौते के आधार पर संकट में फंसे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए संयुक्त बचाव अभियान की तैयारी कर सकता है।
TRENDS रिसर्च एंड एडवाइजरी के शोध में लगातार बढ़ते बिखराव के जोखिमों को रेखांकित किया गया है। वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य 546 अरब डॉलर है और 2030 तक इसके 1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। ऐसे में दोहरे उपयोग वाले उपग्रह तंत्र और प्रतिस्पर्धी शासन व्यवस्थाएं कक्षीय गतिविधियों की स्थिरता को कमजोर कर सकती हैं। दोनों देश उपग्रह-रोधी क्षमताओं और चंद्र संसाधनों के दोहन की तकनीकों में निवेश कर रहे हैं, जिससे अंतरिक्ष के सैन्यीकरण की चिंताएं बढ़ रही हैं।
हालांकि, चीनी अधिकारी लगातार शांतिपूर्ण उपयोग और समावेशी विकास पर जोर देते हैं। भविष्य के संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के लिए विदेश मंत्रालय के स्थिति-पत्र में बाहरी अंतरिक्ष में सहयोग के लिए “समानता, परस्पर सम्मान, शांतिपूर्ण उपयोग और समावेशी विकास” की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। इसमें अंतरिक्ष के सैन्यीकरण और हथियारों की होड़ का विरोध किया गया है।
अंतरिक्ष तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण
चीन की रणनीति उन देशों के लिए अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में पेश करने की लगती है जिन्हें ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट अंतरिक्ष साझेदारियों से बाहर रखा गया है। परंपरागत अंतरिक्ष सहयोग में अक्सर देशों के पास पर्याप्त घरेलू क्षमताएं और पश्चिमी तकनीकी मानकों के अनुरूप व्यवस्था होना जरूरी रहा है। इससे पूर्ण भागीदारी प्रभावी रूप से अमीर देशों तक सीमित रही।
इसके उलट, बीजिंग विकासशील देशों को घरेलू प्रक्षेपण क्षमताओं में अरबों डॉलर का निवेश किए बिना अंतरिक्ष विज्ञान में भाग लेने के अवसर दे रहा है। एक विश्लेषक के शब्दों में, पाकिस्तान के लिए मौजूदा अभियान मानव अंतरिक्ष उड़ान तक पहुंचने का “हाई-टेक शॉर्टकट” है। इसके साथ ही यह दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत कर रहा है, जिसमें 2028 के चांग-अ 8 अभियान के लिए नियोजित पाकिस्तानी चंद्र रोवर भी शामिल है।
एयरोस्पेस नॉलेज पत्रिका के प्रधान संपादक वांग यानान का कहना है कि व्यापक सहयोग के जरिए चीन ने ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एयरोस्पेस तकनीकों तक पहुंच की बाधा कम की है। यह कुछ विकसित देशों के पुराने सहयोगी मॉडल से अलग है, जिनमें केवल उन्हीं चुनिंदा साझेदारों के साथ काम किया जाता था जिनके पास असाधारण संसाधन और उन्नत तकनीक थी।
जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 2030 के आसपास बंद किए जाने की ओर बढ़ रहा है, चीन का तियांगोंग स्टेशन उन देशों के लिए कक्षा में उपलब्ध प्रमुख प्रयोगशाला बन सकता है जिनके पास अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताएं नहीं हैं। यह अंतरिक्ष शासन के बिखराव का संकेत है या पहुंच के विस्तार का, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रतिस्पर्धी शक्तियां कक्षा में साथ रहने के नियम बना पाती हैं या नहीं।
मुख्य बातें
- दो पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री, मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम दाऊद, तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन के अभियानों के लिए पहले विदेशी प्रशिक्षु के रूप में चीन पहुंचे हैं। इनमें से एक के 2026 के आखिर में उड़ान भरने की उम्मीद है।
- यह पहल चीन के 11वें अंतरिक्ष दिवस और उसके अंतरिक्ष कार्यक्रमों की 70वीं वर्षगांठ के साथ हुई है और समावेशी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ओर बदलाव का संकेत देती है।
- चीन ने अफ्रीका में अंतरिक्ष साझेदारियां बनाई हैं, जिनमें सोमालिया के साथ उपग्रह तस्वीरों का हालिया समझौता शामिल है। दक्षिण अमेरिका में वह लंबे समय से चीन-ब्राजील पृथ्वी संसाधन उपग्रह कार्यक्रम चला रहा है।
- अमेरिका समेत छह देशों के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों को चांग-अ 5 अभियान से लौटाए गए चंद्र नमूनों के अध्ययन की अनुमति मिली है। इन नमूनों से चंद्रमा के दो नए खनिजों की खोज हुई।
- 2028 के लिए निर्धारित तियानवेन-3 मंगल अभियान में यूरोप और एशिया के संस्थानों के पांच अंतरराष्ट्रीय सहयोगी पेलोड होंगे।
- चीन का अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान केंद्र और गहन अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयोगशाला अमेरिका के नेतृत्व वाले आर्टेमिस समझौते के वैकल्पिक ढांचे हैं। 30 से अधिक देशों के 85 संस्थान नए अंतरराष्ट्रीय गहन अंतरिक्ष अन्वेषण संघ से जुड़ चुके हैं।
- अधिकारी कहते हैं कि अंतरिक्ष बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता का अखाड़ा नहीं होना चाहिए, हालांकि भू-राजनीतिक तनाव चंद्रमा और उसके आसपास के अंतरिक्ष के अन्वेषण में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करते रहे हैं।






