परित्यक्त ग्रामीण समुदायों को बदलने के लिए कोरिया ने अपनाया जापानी विलेज होटल मॉडल

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परित्यक्त ग्रामीण समुदायों को बदलने के लिए कोरिया ने अपनाया जापानी विलेज होटल मॉडल

ग्रामीण इलाकों का संकट

दक्षिण कोरिया के पर्वतीय क्षेत्रों और तटीय मैदानों में एक खामोश बदलाव जारी है। कभी जीवंत रहे कृषि समुदाय धीरे-धीरे खाली हो रहे हैं, क्योंकि युवा पीढ़ियां शहरी केंद्रों की ओर पलायन कर रही हैं और पीछे छूट रहे हैं परित्यक्त घरों तथा बंद दुकानों वाले इलाके। क्षेत्रीय विलुप्ति के नाम से जानी जाने वाली यह घटना पूर्वोत्तर एशिया में गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। यहां जन्मदर में भारी गिरावट आई है और बुजुर्ग आबादी बड़े शहरों में केंद्रित हो गई है, जबकि ग्रामीण गांव जनसांख्यिकीय पतन का सामना कर रहे हैं।

विषय-सूची
  1. ग्रामीण इलाकों का संकट
  2. बचे रहने का जापानी खाका
  3. ‘हेल जोसोन’ से बच निकलना
  4. विलेज होटल कैसे काम करते हैं
  5. सरकारी नीति और वित्तीय साधन
  6. ग्रामीण पलायन के दो रूप
  7. ग्रामीण पुनरुद्धार की कठोर हकीकत
  8. मुख्य बातें

आंकड़े शहर और ग्रामीण इलाकों के बीच इस खाई की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। सियोल में 19 से 39 वर्ष की आबादी 2016 के 31.8 लाख से घटकर 2023 में 28.6 लाख रह गई, फिर भी राजधानी संसाधनों को अपनी ओर खींचती जा रही है, जबकि ग्रामीण इलाके खाली होते जा रहे हैं। कोरिया में खाली घर और पड़ोसी जापान में ‘आकिया’ कहलाने वाले मकान अब ग्रामीण इलाकों में स्थापत्य के भूतों की तरह नजर आते हैं। ये इमारतें अक्सर दशकों पुरानी होती हैं और पारंपरिक शैली में घुमावदार खपरैल की छतों तथा लकड़ी की कड़ियों से बनी होती हैं। ये एक ओर सुरक्षा के लिए खतरा हैं, तो दूसरी ओर आर्थिक ठहराव से जूझ रहे समुदायों के लिए ऐसा संसाधन हैं जिसका अब तक उपयोग नहीं हुआ है।

इस जनसांख्यिकीय संकट की तात्कालिकता को समझते हुए दक्षिण कोरियाई सरकार ने एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है, जो ग्रामीण आतिथ्य और सामुदायिक विकास की अवधारणा को नए सिरे से गढ़ती है। परित्यक्त संपत्तियों को गिराए जाने योग्य खंडहर मानने के बजाय अधिकारी अब उन्हें ऐसे नए आर्थिक मॉडल की बुनियाद के रूप में देख रहे हैं, जो पलायन के रुझान को पलट सकता है। यह तरीका पूर्वी सागर के पार जापान से प्रेरणा लेता है, जहां नवप्रवर्तकों ने पूरे गांवों को विकेंद्रीकृत होटलों में बदलने की अवधारणा को आगे बढ़ाया है और इस तरह दम तोड़ते समुदायों के लिए नई आर्थिक जीवनरेखाएं बनाई हैं।

बचे रहने का जापानी खाका

उत्तर ग्योंगसांग प्रांत के मुनग्योंग में हाल ही में हुए ग्रामीण खाली मकान पुनरुद्धार मंच ने इस बढ़ते संकट के समाधान तलाशने के लिए कोरियाई नीति निर्माताओं और निजी क्षेत्र के नेताओं को एक साथ लाया। कार्यक्रम में जापान से आए प्रमुख अतिथि शुनपेई शिमादा भी शामिल हुए, जो क्षेत्रीय पुनरुद्धार में विशेषज्ञता रखने वाली परामर्श कंपनी सातोयुमे कॉर्प. के मुख्य कार्यकारी हैं। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में शिमादा एक तरह की दिग्गज शख्सियत बन गए हैं। कोसुगे गांव के होटल प्रोजेक्ट पर उनके काम को दम तोड़ते समुदायों में फिर से जान फूंकने का क्षेत्रीय मानक माना जाता है।

विलेज होटल की अवधारणा पारंपरिक पर्यटन ढांचे से बिल्कुल अलग है। इस मॉडल में परिदृश्य पर हावी होने वाला कोई विशाल रिसॉर्ट बनाने के बजाय पूरे समुदाय को ही होटल में बदल दिया जाता है। कोई परित्यक्त घर स्वागत कक्ष बन जाता है। दूसरी जर्जर इमारत का नवीनीकरण कर उसे आलीशान अतिथि कक्ष में बदल दिया जाता है। स्थानीय सार्वजनिक स्नानघर, जो ग्राहकों की कमी के कारण शायद बंद होने की कगार पर था, अब स्पा के रूप में काम करता है। पड़ोस के निवासी, जिनमें कई बुजुर्ग हैं, गांव के रेस्तरां में काम पाते हैं या आगंतुकों के साथ स्थानीय जानकारी साझा करते हैं।

इस मॉडल की अवधारणा को साबित करने वाला जापान का दूरदराज का कोसुगे गांव कभी पूरी तरह मिट जाने की कगार पर था। आज वहां हर साल 1,80,000 आगंतुक आते हैं। महज कुछ सौ निवासियों वाले समुदाय के लिए यह उल्लेखनीय बदलाव है। इस सफलता पर सबकी नजर गई है। सातोयुमे अब जापान के 50 से अधिक क्षेत्रों में ऐसे ही विलेज होटल चला रही है। इससे साबित होता है कि सामुदायिक भागीदारी और स्थापत्य की दूरदृष्टि का सही मेल हो तो इस मॉडल को दूसरी जगहों पर भी दोहराया जा सकता है।

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‘हेल जोसोन’ से बच निकलना

कोरिया में इस जापानी मॉडल को ऐसे समय अपनाया जा रहा है, जब देश की राजधानी गहरे सामाजिक संकट से गुजर रही है। युवा दक्षिण कोरियाई लोगों ने सियोल की जिंदगी के लिए एक कड़वा नाम गढ़ा है: ‘हेल जोसोन’। यह उस प्राचीन राज्य का संदर्भ है, जो कभी इस प्रायद्वीप पर था। यह अभिव्यक्ति ऐसे शहर के दमघोंटू दबाव को दर्शाती है, जहां घरों की कीमतें लोगों की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं और कॉर्पोरेट संस्कृति सीमित लाभ के बदले अंतहीन काम की मांग करती है।

इस पलायन के पीछे की हताशा व्यक्तिगत कहानियों में साफ दिखती है। 30 की उम्र के शुरुआती दशक में पूर्व सेल्समैन किम जी-उंग को सियोल में अपना जीवन गहरे अकेलेपन का दौर याद आता है। अकेले रहने वाले अविवाहित किम अपना दिन या तो काम पर बिताते थे या अपार्टमेंट में बंद होकर टीवी चैनल बदलते अथवा वीडियो गेम खेलते थे। एक करीबी दोस्त काम के दौरान गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। यही निर्णायक मोड़ था, जिसने किम को सोचने पर मजबूर किया कि कहीं उनका अंजाम भी वही तो नहीं होने वाला।

उन्हें बाहर निकलने का रास्ता दक्षिण-पश्चिमी शहर मोक्पो के ‘डोंट वरी विलेज’ के एक ऑनलाइन विज्ञापन से मिला। 2,10,000 की आबादी वाले इस शहर में कई परित्यक्त इमारतें हैं। गांव की स्थापना होंग डोंग-वू ने की थी, जो सियोल छोड़कर आए एक और व्यक्ति थे और जिन्होंने विश्वविद्यालय तथा कॉर्पोरेट नौकरी के तयशुदा रास्ते को ठुकरा दिया था। इसे ऐसे समुदाय के रूप में बनाया गया, जहां युवाओं को शहरी जीवन में कमी महसूस होने वाले सामाजिक संबंध मिल सकें।

किम जिस प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसका अध्ययन शिक्षाविदों ने ‘यंग इन-माइग्रेंट टूरिज्म आंत्रप्रेन्योर्स’ यानी YMTEs के उभार के रूप में किया है। ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन के बाद की गतिविधियों और सरकारी सहायता नीतियों से प्रेरित एक तरह के प्रतिशहरीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछली पीढ़ियों के विपरीत, जो ग्रामीण इलाकों को केवल कृषि उत्पादन का केंद्र मानती थीं, ये युवा प्रवासी उन्हें रचनात्मक उद्यम, समुदाय निर्माण और जीवनशैली को नए सिरे से गढ़ने की जगह के रूप में देखते हैं। ऐसे 20 उद्यमियों के साक्षात्कारों के विश्लेषण से पता चलता है कि उन्हें केवल आर्थिक जरूरत ही नहीं, बल्कि सार्थक सामाजिक संबंध बनाने और अपने समय पर नियंत्रण पाने की चाह भी प्रेरित करती है।

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विलेज होटल कैसे काम करते हैं

कोरिया में विलेज होटल की अवधारणा को लागू करने के लिए सार्वजनिक नीतियों और निजी नवाचार का परिष्कृत मेल जरूरी है। मुनग्योंग में हालिया मंच के दौरान अधिकारियों ने सानयांग जियोंगहेंगसो का दौरा किया। यह एक पुरानी शराब बनाने की फैक्ट्री थी, जो जर्जर हो गई थी और बाद में इसे कई तरह की गतिविधियों वाले सांस्कृतिक केंद्र में बदला गया। यह स्थल दिखाता है कि निजी रचनात्मकता और सार्वजनिक सहायता के मेल से सकारात्मक नतीजे कैसे निकलते हैं। क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को आधुनिक कैफे की शैली से जोड़कर इसने पिछले साल 60,000 पर्यटकों को आकर्षित किया।

आतिथ्य तकनीक कंपनी H2O हॉस्पिटैलिटी की सहायक कंपनी कोरियाई फर्म रिप्लेस इस पहल की प्रमुख घरेलू साझेदार बनकर उभरी है। रिप्लेस मुनग्योंग में 200 साल पुराने पारंपरिक मकानों और परित्यक्त औद्योगिक टैंकों का पहले ही नवीनीकरण कर चुकी है। हाल में उसने सातोयुमे के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, ताकि विलेज होटल मॉडल का विशिष्ट कोरियाई रूप तैयार किया जा सके। इस साझेदारी का लक्ष्य सातोयुमे के संचालन अनुभव और रिप्लेस की स्थान नियोजन क्षमता को मिलाकर 2028 तक जापान की सफलता को दोहराना है।

इन परियोजनाओं को चलाने की व्यवस्था जटिल है। सभी सुविधाओं को एक ही जगह पर केंद्रित करने के बजाय विलेज होटल अपनी सेवाओं को कई संपत्तियों में बांटता है। कोई अतिथि स्वागत कक्ष के रूप में इस्तेमाल हो रहे नवीनीकृत फार्महाउस में चेक-इन कर सकता है और फिर कई गलियों की दूरी पर स्थित पारंपरिक हानोक में बने निजी कक्ष में जा सकता है। नाश्ता स्थानीय निवासियों द्वारा चलाए जा रहे कैफे में परोसा जा सकता है, जबकि रात के खाने में उन बगीचों से मिली सामग्री का इस्तेमाल होता है जिनकी देखभाल आतिथ्य क्षेत्र में शामिल हो चुके बुजुर्ग ग्रामीण करते हैं।

इस विकेंद्रीकृत तरीके के कई फायदे हैं। आर्थिक लाभ किसी एक कंपनी तक सीमित रहने के बजाय पूरे समुदाय में फैलता है। नई इमारतें बनाने के बजाय मौजूदा ढांचों का नवीनीकरण कर गांव की स्थापत्य पहचान को बचाया जाता है। इससे आगंतुकों को अधिक प्रामाणिक अनुभव भी मिलता है, क्योंकि वे ग्रामीण जीवन की वास्तविक बनावट से रूबरू होते हैं, न कि उसकी नकल से।

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सरकारी नीति और वित्तीय साधन

इन सांस्कृतिक बदलावों के पीछे नवीनीकरण प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्रशासनिक उपायों का एक मजबूत ढांचा है। कृषि, खाद्य और ग्रामीण मामलों के मंत्रालय ने विध्वंस के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने का असामान्य कदम उठाया है और प्रति मकान अधिकतम सब्सिडी दोगुने से भी अधिक बढ़ाकर 1.6 करोड़ वॉन (11,540 डॉलर) कर दी है। यह मान्यता है कि कुछ परित्यक्त संपत्तियों को बचाना संभव नहीं है और नए उपयोग के लिए जगह बनाने या सुरक्षा संबंधी खतरे दूर करने के लिए उन्हें हटाना जरूरी है।

स्थापत्य या ऐतिहासिक महत्व वाली संपत्तियों के लिए सरकार अपने ‘वैकेंट हाउस बैंक’ का विस्तार कर रही है। यह एक ऑनलाइन मंच है, जो जर्जर संपत्तियों को काम या उद्यम शुरू करने के लिए वहां जाने की इच्छुक शहरी आबादी से जोड़ता है। यह डिजिटल बाजार उन बुजुर्ग ग्रामीण भू-स्वामियों के बीच सेतु का काम करता है, जो अब अपनी संपत्तियों का रखरखाव नहीं कर सकते, और किफायती रहने तथा काम करने की जगह तलाश रहे युवा शहरी पेशेवरों के बीच।

इस रणनीति का अगला पड़ाव जेजू द्वीप है, जहां अधिकारियों ने हानग्योंग जिले में एक स्टार्टअप गांव तय किया है। यहां 15 परित्यक्त मकानों को डिजिटल घुमक्कड़ों और दूर से काम करने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से तैयार सहकार्य स्थलों और दीर्घकालीन आवास में बदला जाएगा। यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि ग्रामीण कोरिया का भविष्य ऐसे कामगारों को आकर्षित करने पर निर्भर हो सकता है, जो कहीं से भी अपना काम कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें भरोसेमंद इंटरनेट और रहने के लिए उपयुक्त जगह मिले।

मंत्रालय के ग्रामीण नीति ब्यूरो के निदेशक जॉन हान-यंग ने इन नीतियों के पीछे आए वैचारिक बदलाव को संक्षेप में रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि खाली मकानों को खंडहर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। यह पहले के उन तरीकों से बड़ा बदलाव है, जिनमें ग्रामीण आबादी घटने को रचनात्मक हस्तक्षेप से हल की जाने वाली समस्या के बजाय ऐसा अपरिवर्तनीय रुझान माना जाता था, जिसे बस संभालना है।

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ग्रामीण पलायन के दो रूप

विलेज होटल मॉडल युवा उद्यमियों और डिजिटल घुमक्कड़ों को लक्ष्य बनाता है, लेकिन इसके साथ ग्रामीण श्रम पलायन का बिल्कुल अलग रूप भी मौजूद है। दक्षिण कोरिया का कृषि क्षेत्र फिलहाल मुख्य रूप से 16 देशों से आए करीब 56,000 प्रवासी कामगारों पर निर्भर है, जो अधिकतर E9 और E10 वीजा पर आते हैं। ये लोग कोरियाई खेतों को चालू रखने के लिए जरूरी काम करते हैं और उन युवा कोरियाई लोगों की जगह भरते हैं, जिन्होंने कृषि कार्य छोड़ दिया है।

इन दोनों समूहों के बीच का अंतर बेहद स्पष्ट है। YMTEs और डिजिटल घुमक्कड़ उद्यमिता के लिए सरकारी सहायता लेकर आते हैं और जीवन में संतुष्टि तथा समुदाय से जुड़ाव चाहते हैं। उन्हें ग्रामीण पुनरुद्धार के अग्रदूतों के रूप में सराहा जाता है। इसके उलट, कई प्रवासी कामगारों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जिन्हें कार्यकर्ता शोषणकारी बताते हैं। केवल बोटुम नाम से पहचानी गई कंबोडियाई कामगार एक स्ट्रॉबेरी फार्म में महीने के 14 लाख वॉन के लिए रोज 16 घंटे काम करती थीं। सर्दियों में वह टूटी छत वाले प्लास्टिक के ग्रीनहाउस में सोती थीं।

अधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों का कहना है कि प्रवासी कामगारों के साथ दुर्व्यवहार कारखानों या निर्माण स्थलों की तुलना में खेतों और मछली पकड़ने वाले गांवों में अधिक आम लगता है। महिला कामगारों को अतिरिक्त जोखिम झेलने पड़ते हैं। 2016 के एक अध्ययन के मुताबिक, 48 प्रतिशत प्रवासी महिलाओं ने या तो यौन उत्पीड़न झेला था या उसे होते देखा था। पिछले साल एक थाई प्रवासी कामगार की उसके नियोक्ता द्वारा हत्या ने इस असुरक्षित आबादी के सामने मौजूद चरम खतरों को उजागर किया।

यह दोहरी हकीकत ग्रामीण कोरिया के भविष्य को लेकर जटिल सवाल खड़े करती है। विलेज होटल मॉडल दम तोड़ते समुदायों में पूंजी और रचनात्मकता लाने का वादा करता है, लेकिन इन क्षेत्रों की पहचान तय करने वाला वास्तविक कृषि कार्य अब भी हाशिये पर धकेले गए कामगारों पर निर्भर है। कोरिया नवीनीकरण प्रक्रिया सरल बनाने और अधिक शहरी प्रवासियों को आकर्षित करने के लिए नए विशेष कानून तैयार कर रहा है। ऐसे में कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी व्यापक ग्रामीण नीति में उन लोगों की कामकाजी परिस्थितियों को भी संबोधित करना चाहिए, जो फिलहाल कृषि अर्थव्यवस्था को बनाए हुए हैं।

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ग्रामीण पुनरुद्धार की कठोर हकीकत

विलेज होटल और स्टार्टअप समुदायों को लेकर उत्साह के बावजूद, ठोस आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण गिरावट को पलटना अब भी कठिन चुनौती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर के युवा-केंद्रित समुदायों में कार्यशालाओं में करीब 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया, लेकिन इनमें से केवल लगभग 900 लोग ही वास्तव में वहां टिके। खास तौर पर ‘डोंट वरी विलेज’ में 21 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित हुईं और 2,000 से ज्यादा आगंतुक आए, फिर भी केवल 20 लोगों ने स्थायी रूप से रहने का फैसला किया।

ग्रामीण इलाकों में जाने वाले प्रवासियों की चुनौतियां किफायती मकान ढूंढने तक सीमित नहीं हैं। कार्यस्थल और प्रमुख बुनियादी ढांचा अब भी सियोल और दूसरे बड़े शहरों में केंद्रित हैं। तेज इंटरनेट वाले नवीनीकृत हानोक में डिजिटल घुमक्कड़ फल-फूल सकते हैं, लेकिन पारंपरिक नौकरी तलाशने वालों को अक्सर शहरी केंद्रों के बाहर सीमित अवसर मिलते हैं। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और परिवहन का ढांचा राजधानी की तुलना में अब भी अविकसित है, जिससे वहां जाने पर विचार कर रहे परिवारों के लिए व्यावहारिक अड़चनें पैदा होती हैं।

इस बीच, दक्षिण कोरिया में आत्महत्या की दर 2024 में प्रति एक लाख लोगों पर 28.3 तक पहुंच गई, जो 13 साल का उच्चतम स्तर है। मामलों में युवाओं की हिस्सेदारी काफी है। ग्रामीण समुदाय ‘हेल जोसोन’ से बच निकलने का रास्ता दे सकते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के इस संकट को बढ़ाने वाले गहरे सामाजिक अकेलेपन और आर्थिक दबावों का समाधान वे अकेले नहीं कर सकते। सरकार ने ‘सीयोल विदाउट लोनलीनेस’ जैसी पहल शुरू की है और भावनात्मक सहायता हॉटलाइन तथा सामुदायिक केंद्रों पर पांच साल में 451.3 अरब वॉन खर्च करने का वादा किया है। फिर भी आर्थिक अवसरों और जीवन की गुणवत्ता के बीच बुनियादी तनाव बना हुआ है।

कोरिया और जापान मंचों तथा प्रस्तावित कोरिया-जापान विलेज होटल नेटवर्क सहित आदान-प्रदान कार्यक्रमों के जरिए अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इस बीच दोनों देश इस सच्चाई का सामना कर रहे हैं कि केवल स्थापत्य नवाचार से जनसांख्यिकीय रुझान नहीं पलट सकते। नए कामगारों के आने से ग्रामीण इलाकों का सन्नाटा टूट सकता है, लेकिन उनका टिकना ऐसे टिकाऊ आर्थिक तंत्र बनाने पर निर्भर करेगा जो लंबे समय तक वहां रहने को सहारा दे सकें।

मुख्य बातें

  • ग्रामीण आबादी घटने से निपटने के लिए कोरिया जापान का विलेज होटल मॉडल अपना रहा है, जिसमें परित्यक्त मकानों को विकेंद्रीकृत आतिथ्य नेटवर्क में बदला जाता है
  • कृषि मंत्रालय ने विध्वंस सब्सिडी दोगुनी करके 1.6 करोड़ वॉन कर दी है और संपत्तियों को शहरी प्रवासियों से जोड़ने वाले ‘वैकेंट हाउस बैंक’ मंच का विस्तार किया है
  • जापानी कंपनी सातोयुमे कॉर्प. और कोरियाई कंपनी रिप्लेस ने 2028 तक विलेज होटल अवधारणा का स्थानीय रूप तैयार करने के लिए साझेदारी की है
  • यह पहल ‘यंग इन-माइग्रेंट टूरिज्म आंत्रप्रेन्योर्स’ को लक्ष्य बनाती है, जो सियोल की ऊंची लागत और तनावपूर्ण कामकाजी संस्कृति यानी ‘हेल जोसोन’ से बच निकलना चाहते हैं
  • कार्यशालाओं में भाग लेने वाले 10,000 लोगों में से केवल 900 ही वास्तव में ग्रामीण युवा समुदायों में जाकर बसे हैं, जो लोगों को वहां टिकाए रखने की चुनौती उजागर करता है
  • यह नीति उन 56,000 प्रवासी कृषि कामगारों की परिस्थितियों से बिल्कुल अलग है, जो खेतों को चलाते हैं लेकिन अक्सर दुर्व्यवहार और खराब आवास का सामना करते हैं
  • जेजू द्वीप में एक स्टार्टअप गांव बनेगा, जहां 15 परित्यक्त मकानों को डिजिटल घुमक्कड़ों के लिए सहकार्य स्थलों में बदला जाएगा
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