चीन-लाओस रेलवे से 7 करोड़ से अधिक यात्रियों ने की यात्रा, क्षेत्रीय संपर्क में आया बदलाव

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चीन-लाओस रेलवे से 7 करोड़ से अधिक यात्रियों ने की यात्रा, क्षेत्रीय संपर्क में आया बदलाव

रेल क्रांति ने छुई नई ऊंचाइयां

चीन-लाओस रेलवे ने क्षेत्रीय संपर्क में एक और बाधा पार करते हुए 3 दिसंबर 2021 को परिचालन शुरू होने के बाद से 7 करोड़ से अधिक यात्री यात्राएं दर्ज की हैं। 31 मार्च को चाइना रेलवे कुनमिंग ग्रुप कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1,035 किलोमीटर लंबी इस हाई-स्पीड रेल लाइन ने महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना से दक्षिण-पूर्व एशिया में यात्रा और व्यापार की अहम जीवनरेखा का रूप ले लिया है। इस अवधि में इस पर 3,100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ट्रेन सेवाएं संचालित हुईं। यह उपलब्धि बेल्ट एंड रोड पहल की प्रमुख परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भूभाग में आधुनिक रेल संपर्क की निरंतर मांग को दर्शाती है।

विषय-सूची
  1. रेल क्रांति ने छुई नई ऊंचाइयां
  2. भू-आबद्ध से भू-संपर्कित होने तक
  3. बढ़ती मांग के अनुरूप सेवाओं का विस्तार
  4. पर्यटन और सीमा-पार सांस्कृतिक आदान-प्रदान
  5. माल ढुलाई और आर्थिक गलियारे
  6. क्षेत्रीय एकीकरण और भविष्य का विस्तार
  7. आर्थिक चिंताओं और ऋण की स्थिरता पर ध्यान
  8. मुख्य बिंदु

यह पड़ाव रेलवे द्वारा दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत के कुनमिंग और लाओस की राजधानी वियनतियाने को पहली बार जोड़ने के तीन साल से कुछ अधिक समय बाद आया है। यह रेलवे विविध भू-दृश्यों से गुजरती है और प्रमुख शहरी केंद्रों को 560 से अधिक दर्शनीय स्थलों से जोड़ती है। इनमें उष्णकटिबंधीय वर्षावनों से लेकर प्राचीन मंदिर परिसर तक शामिल हैं। इस तरह यह दो अलग-अलग सांस्कृतिक और पारिस्थितिक क्षेत्रों में फैला एकीकृत पर्यटन गलियारा बनाती है। यह उपलब्धि उस परियोजना के परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित करती है, जिसे दोनों देशों के अधिकारी द्विपक्षीय सहयोग का शिखर बताते हैं।

रेलवे की सफलता केवल यात्रियों की संख्या तक सीमित नहीं है। 120 से अधिक देशों और क्षेत्रों के 7,80,000 से अधिक पर्यटकों ने सीमा-पार सेवाओं का इस्तेमाल किया है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया और व्यापक दुनिया के बीच बढ़ते जन-संपर्क का ठोस प्रमाण है। ये यात्री एशिया के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण निर्माण क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्ग पर सफर करते हैं। इसमें 167 पुल और 88 सुरंगें हैं। घुमावदार पहाड़ी दर्रों से सड़क मार्ग के जरिए पहले जहां दो दिन लगते थे, वहीं अब यह यात्रा करीब 10 घंटे में पूरी होती है। यात्रियों में कारोबारी, छात्र, पर्यटक और रोजाना आने-जाने वाले लोग शामिल हैं, जो विश्वविद्यालय जाने से लेकर सीमा-पार व्यापार तक के लिए इस सेवा का उपयोग करते हैं। इस साल की शुरुआत में एक महीने में दर्ज 2.25 करोड़ यात्राओं का उच्चतम आंकड़ा दर्शाता है कि पारंपरिक त्योहारों और छुट्टियों के दौरान भी यह व्यवस्था भारी यातायात संभाल सकती है, और साथ ही सुरक्षा व समय-पालन के ऐसे मानक बनाए रखती है जो अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं के स्थापित रेल नेटवर्क के बराबर हैं।

रेल लाइन की तकनीकी विशेषताएं इसके महत्वाकांक्षी दायरे को दर्शाती हैं। मानक गेज ट्रैक पर ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलती हैं। वे कार्स्ट पहाड़ों को काटते हुए और गहरी घाटियों के ऊपर से गुजरती हैं। हाई-स्पीड रेल के अनुकूल ढलान बनाए रखने के लिए परियोजना में बड़े पैमाने पर सुरंगें और पुल बनाए गए। इससे उन भौगोलिक बाधाओं को पार किया गया, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से उत्तरी लाओस को उसके पड़ोसियों से अलग रखा था और क्षेत्र के आर्थिक विकास को सीमित किया था।

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भू-आबद्ध से भू-संपर्कित होने तक

कई दशकों तक लाओस दक्षिण-पूर्व एशिया के उन कुछ देशों में रहा जो चारों ओर से जमीन से घिरे हैं। पहाड़ी भूभाग ने समुदायों को अलग-थलग रखा और आर्थिक अवसर सीमित किए। चीन-लाओस रेलवे ने इस भौगोलिक स्थिति को बुनियादी रूप से बदल दिया है। इसने अलगाव को संपर्क में बदला और देश को क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में अधिकारियों के शब्दों में "भू-संपर्कित" केंद्र बना दिया। यह बदलाव केवल शब्दों का फेरबदल नहीं है; यह राष्ट्रीय विकास रणनीति में बुनियादी दिशा-परिवर्तन का संकेत है। अब देश सड़क मार्ग से ट्रकों और नदी परिवहन पर निर्भरता के बजाय आधुनिक लॉजिस्टिक्स और रेल-आधारित व्यापार की ओर बढ़ रहा है।

रेलवे पूरी होने से पहले ही विश्व बैंक ने इसकी क्षमता को पहचाना था। बैंक ने 2020 में अनुमान लगाया था कि व्यापार सुगमता और लॉजिस्टिक्स सुधारों समेत उचित नीतिगत सुधारों के साथ रेल नेटवर्क लंबे समय में लाओस की कुल आय को 21 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। विश्लेषण में कहा गया कि 5.9 अरब डॉलर की यह परियोजना देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से पहला भरोसेमंद भूमि-संपर्क दे सकती है और 2030 तक 15 लाख टन व्यापार को समुद्री मार्गों से रेल की ओर मोड़ सकती है। इससे वियनतियाने और कुनमिंग के बीच परिवहन लागत 40-50 प्रतिशत और कुनमिंग तथा थाईलैंड के लाम चाबांग बंदरगाह के बीच 32 प्रतिशत तक घट सकती है।

निर्माण का वित्तपोषण एक जटिल साझेदारी ढांचे के तहत किया गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा है। लागत का 40 प्रतिशत इक्विटी के जरिए आया, जिसमें लाओस की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत और चीन की 70 प्रतिशत थी। शेष 60 प्रतिशत राशि लाओ-चाइना रेलवे कंपनी द्वारा लिए गए ऋणों से जुटाई गई। इस व्यवस्था के तहत लाओस ने करीब 1.4-1.6 अरब डॉलर का योगदान दिया, जिसका कुछ हिस्सा चीन के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक से मिले ऋणों से जुटाया गया, जबकि अधिकांश निवेश चीन ने किया। छोटी अर्थव्यवस्था के लिए यह भारी लागत बड़े जोखिम लेकर आई। यह राशि लाओस की 2017 की जीडीपी के लगभग एक-तिहाई के बराबर थी, इसलिए इतना बड़ा पूंजी निवेश उचित साबित हो, इसके लिए सावधानीपूर्वक प्रबंधन जरूरी था।

उत्तर-पश्चिमी लाओस के ओडोमक्से प्रांत के 20 वर्षीय छात्र विलासाय इस बदलाव की मिसाल हैं। उनके चाचा को पढ़ाई के लिए चीन पहुंचने में बस से करीब तीन दिन लगते थे। अब विलासाय ट्रेन से युन्नान के पु'अर तक पांच घंटे से कुछ अधिक समय में पहुंच जाते हैं। किराया लगभग 173 युआन (25 डॉलर) है। उनकी कहानी दिखाती है कि यात्रा का समय घटने से ग्रामीण आबादी के लिए शिक्षा तक पहुंच और सामाजिक गतिशीलता पर किस तरह असर पड़ता है, जो पहले भौगोलिक दूरी के कारण अलग-थलग थी।

रेलवे ने सब कुछ बदल दिया है। अब चीन में पढ़ाई करना, यात्रा करना और नए अवसर तलाशना आसान है।

उत्तरी लाओस में अब माता-पिता बच्चों को चीनी भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे जानते हैं कि भाषा का ज्ञान रेलवे क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और स्टेशनों के पास उभर रहे विशेष आर्थिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर खोलता है। यहां तक कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी बुनियादी मंदारिन सीखने के लिए रात्रि विद्यालयों में दाखिला ले रहे हैं, ताकि अपने समुदायों से होकर गुजर रहे आर्थिक अवसरों में भाग ले सकें। यह सांस्कृतिक बदलाव सामाजिक गतिशीलता और शिक्षा संबंधी आकांक्षाओं पर रेलवे के गहरे प्रभाव को दर्शाता है। इससे भाषा शिक्षण और अंतर-सांस्कृतिक कौशल की मांग बढ़ रही है, जो आने वाली पीढ़ियों के कार्यबल को आकार देगी।

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बढ़ती मांग के अनुरूप सेवाओं का विस्तार

यात्रियों की संख्या में तेज बढ़ोतरी के चलते परिचालन का तेजी से विस्तार करना पड़ा और दोनों देशों के रेल अधिकारियों के बीच अभूतपूर्व सीमा-पार समन्वय जरूरी हुआ। दोनों देशों के रेल प्रशासकों ने सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करीबी सहयोग बनाए रखा है। इसके परिणामस्वरूप छुट्टियों की भीड़, कारोबारी यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की मांग पूरी करने के लिए दैनिक सेवाओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

चीन के हिस्से में रोजाना यात्री ट्रेनों की संख्या शुरुआती दिनों के आठ से बढ़कर अधिकतम 86 हो गई। लाओस के हिस्से में भी रोजाना ट्रेनों की संख्या चार से बढ़कर अधिकतम 18 तक पहुंची। चीन में परिचालन का दस गुना और लाओस में चार गुना विस्तार दोनों देशों के बीच किफायती और भरोसेमंद परिवहन की भारी मांग के साथ-साथ व्यवस्था के डिजाइन में शामिल परिचालन लचीलेपन को दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय यात्री सेवाएं 13 अप्रैल 2023 को शुरू हुईं। इनके जरिए कुनमिंग सीधे वियनतियाने से जुड़ा और सीमा-पार यात्रा का समय घटकर करीब 10.5 घंटे रह गया। व्यस्त समय में रेलवे रोजाना 60,000 से अधिक यात्री यात्राएं संभालती है। इसमें सीमा-पार की चार सेवाएं शामिल हैं, जिनसे रोजाना 1,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को सुविधा मिलती है। पारंपरिक त्योहारों और छुट्टियों के दौरान, जब मांग में तेजी से उछाल आता है, ये सेवाएं विशेष रूप से अहम साबित हुई हैं।

बहुभाषी सहायता व्यवस्था के जरिए सेवाओं को अलग-अलग यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है। ट्रेन परिचारक पुतोंगहुआ, दाई भाषा, लाओ और अंग्रेजी में सहायता देते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और मार्ग के आसपास रहने वाले जातीय अल्पसंख्यक समुदायों के लिए यात्रा सुलभ होती है। सर्दियों और वसंत के व्यस्त पर्यटन मौसम में रेलवे अब रोजाना 70 से अधिक यात्री ट्रेनें चलाती है। क्षेत्रीय एकीकरण गहराने और पड़ोसी देशों में संपर्क बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पूरी होने के साथ सेवाओं के और विस्तार की योजना है।

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पर्यटन और सीमा-पार सांस्कृतिक आदान-प्रदान

रेलवे ने दोनों देशों के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाला एकीकृत पर्यटन गलियारा बनाया है, जिससे मुख्य भूमि दक्षिण-पूर्व एशिया में यात्रा के तौर-तरीके बुनियादी रूप से बदल रहे हैं। अब पर्यटक पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली लंबी बस यात्राओं के बिना कुनमिंग के "स्प्रिंग सिटी" आकर्षण, शिशुआंगबन्ना की उष्णकटिबंधीय जैव विविधता, लुआंग प्राबांग के यूनेस्को विश्व धरोहर मंदिरों और वियनतियाने की फ्रांसीसी औपनिवेशिक वास्तुकला तक आसानी से पहुंच सकते हैं। पहले ये कठिन यात्राएं आम पर्यटकों को हतोत्साहित करती थीं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सीमित करती थीं।

शिशुआंगबन्ना स्टेशन पूरे मार्ग के सबसे व्यस्त टर्मिनलों में से एक बन गया है। संचालन के पहले ही साल में यहां से 34.5 लाख यात्री यात्राएं हुईं। अप्रैल 2023 में दाई जल-छिड़काव उत्सव के दौरान एक ही दिन में स्टेशन पर 27,000 यात्री दर्ज किए गए। यह दिखाता है कि सांस्कृतिक आयोजन रेल यातायात बढ़ाते हैं और यह भी कि व्यवस्था सेवा की गुणवत्ता बनाए रखते हुए मौसमी भीड़ को संभाल सकती है।

सीमा-पार सेवाएं कई देशों की यात्रा करने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच खास तौर पर लोकप्रिय साबित हुई हैं। बैंकॉक से ट्रेन पकड़कर वियनतियाने में ट्रेन बदलना और फिर कुनमिंग तक जाना यात्रा में अभूतपूर्व लचीलापन देता है। फ्रांस के यात्री लीज़ दुबो और गिलौम पतिए ने हाल में इस अनुभव को आरामदायक, किफायती और कम कार्बन उत्सर्जन वाला बताया। वे बीजिंग से हनोई और आगे तक अपनी एशियाई रेल यात्रा जारी रख रहे हैं।

रेलवे के उद्घाटन के बाद से लाओस के पर्यटन उद्योग में मजबूत वृद्धि हुई है। 2024 के पहले चार महीनों में देश में 15 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक आए, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 35 प्रतिशत अधिक है। चीनी पर्यटकों की संख्या कम से कम 3,51,000 रही, जिससे थाईलैंड और वियतनाम के बाद चीन विदेशी पर्यटकों का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत बना। 2024 में सीमा स्टेशनों पर पहुंचने वाले वियतनामी टूर समूहों की संख्या 40.7 प्रतिशत बढ़ी, जो रेल-आधारित पर्यटन और सांस्कृतिक भ्रमण में आसियान देशों की बढ़ती रुचि दर्शाती है।

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माल ढुलाई और आर्थिक गलियारे

जहां यात्री आंकड़े लोगों का ध्यान खींचते हैं, वहीं रेलवे की माल ढुलाई सेवाएं क्षेत्रीय व्यापार और कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए उतनी ही परिवर्तनकारी साबित हुई हैं। 2026 की शुरुआत तक इस लाइन से 7.68 करोड़ टन माल ढोया जा चुका है। इसमें सीमा-पार भेजा गया 1.7 करोड़ टन माल शामिल है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी से लेकर कृषि उत्पादों और उपभोक्ता वस्तुओं तक की 3,800 श्रेणियों में आता है।

2022 की शुरुआत में शुरू हुई लानसांग-मेकांग एक्सप्रेस तापमान-संवेदनशील कृषि उत्पादों के लिए एक अहम मार्ग बन गई है। थाईलैंड के ड्यूरियन किसान अब अपने प्रीमियम फल कुनमिंग तक सिर्फ तीन दिन में भेजते हैं, जबकि समुद्री मार्ग से इसमें कई सप्ताह लगते हैं। इस दक्षता ने उपभोक्ता बाजारों को बदल दिया है। प्रीमियम थाई ड्यूरियन की कीमत प्रति पेटी 1,500-1,600 युआन से घटकर करीब 800 युआन रह गई है। स्थानीय लोग आपूर्ति श्रृंखला की बेहतर दक्षता से आए इस बदलाव को "ड्यूरियन की किफायती उपलब्धता" कहते हैं।

लाओस के केले रेलवे की रेफ्रिजरेटेड कंटेनर सेवाओं से सात दिन में बीजिंग पहुंच जाते हैं। लॉजिस्टिक्स संचालकों का कहना है कि फसल के मौसम में ये कोल्ड-चेन कंटेनर पूरी तरह बुक रहते हैं और व्यस्त समय में सुविधाएं रोजाना 100 से अधिक कंटेनर संभालती हैं। कुनमिंग स्थित एक अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स संचालक के उप महाप्रबंधक झांग देहुआन के अनुसार, रेफ्रिजरेटेड कंटेनर इतने लोकप्रिय हैं कि पूरे मौसम में उपलब्ध नहीं रहते और कृषि निर्यातकों को पहले से बुकिंग करनी पड़ती है।

सीमा शुल्क प्रक्रिया में सुधार से इस वृद्धि को बढ़ावा मिला है। चौबीसों घंटे पहले से निर्धारित सेवाएं देने वाले "एक्सप्रेस रेल क्लीयरेंस" मॉडल के तहत कंटेनर मोहन सीमा चौकी से केवल 2-5 घंटे में गुजर जाते हैं, जबकि पहले इसमें 40 घंटे तक लगते थे। मोहन से गुजरने वाली सीमा-पार मालगाड़ियों की संख्या शुरुआत में रोजाना दो थी, जो बढ़कर 18 हुई और अधिकतम 23 तक पहुंची। इससे आसियान के लिए चीन के सबसे व्यस्त रेल बंदरगाह के तौर पर इसकी भूमिका मजबूत हुई है। सेवा नेटवर्क अब दोनों देशों के द्विपक्षीय मार्ग से आगे बढ़कर चीन के 31 प्रांतों को कवर करता है और थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर तथा वियतनाम समेत 19 देशों और क्षेत्रों तक पहुंचता है।

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क्षेत्रीय एकीकरण और भविष्य का विस्तार

चीन-लाओस रेलवे विकासाधीन व्यापक अखिल-एशियाई रेल नेटवर्क के दक्षिणी छोर का काम करती है। इसके संपर्क द्विपक्षीय मार्ग से आगे थाईलैंड और संभावित रूप से मलेशिया तथा सिंगापुर तक फैले हैं। जुलाई 2024 में शुरू हुआ थाईलैंड का इस लाइन से संपर्क, जिसके तहत बैंकॉक और वियनतियाने के बीच यात्री सेवाएं चलती हैं, एकीकरण का अगला चरण है और मुख्य भूमि दक्षिण-पूर्व एशिया में परियोजना के बढ़ते भौगोलिक प्रभाव को दर्शाता है।

बैंकॉक-वियनतियाने संपर्क से थाई राजधानी और लाओ सीमा के बीच यात्रा का समय घटकर करीब 10 घंटे रह जाता है। इससे थाईलैंड की खाड़ी से चीन की सीमा तक एक सतत रेल गलियारा बनता है। भविष्य की योजनाओं में मानक गेज की सतत रेल लाइन मलेशिया से होते हुए सिंगापुर तक बढ़ाने की परिकल्पना है, जिससे कुनमिंग से मलय प्रायद्वीप तक निर्बाध रेल गलियारा बनेगा। इससे आगे चलकर यात्री रेल से सिंगापुर से बीजिंग तक जा सकेंगे और एक ही सतत नेटवर्क पर कई देशों से गुजरते हुए पूरे दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रायद्वीप को पार कर सकेंगे।

फिलहाल थाईलैंड की मीटर-गेज प्रणाली और मानक गेज वाली चीन-लाओस रेलवे के बीच सीमा पर माल उतारकर दूसरी ट्रेन में चढ़ाना पड़ता है। लेकिन बुनियादी ढांचे में निवेश के जरिए दोहरे गेज की पटरियों या माल स्थानांतरण सुविधाओं से इन असंगतियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। आसियान एक्सप्रेस माल ढुलाई प्रणाली ने पहले ही इस नेटवर्क की क्षमता दिखा दी है। इसने थाईलैंड और लाओस से होकर मलेशिया से चोंगछिंग तक नौ दिन में यात्रा पूरी की, जबकि समुद्र से इसमें 14-21 दिन लगते हैं। इससे माल भेजने वालों की लागत में करीब 20 प्रतिशत की बचत हुई।

रेलवे गलियारे के किनारे 12 विशेष आर्थिक क्षेत्र उभरे हैं। इन्होंने चीन, थाईलैंड, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, अमेरिका और स्विट्जरलैंड की कंपनियों से 2.3 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया है। वियनतियाने सयसेथा विकास क्षेत्र में ही 150 कंपनियां हैं और स्थानीय कामगारों के लिए कम से कम 7,000 नौकरियां पैदा हुई हैं। यहां कर प्रोत्साहन और 42 देशों के बाजारों तक विशेष पहुंच मिलती है। विभिन्न व्यापार समझौतों के तहत ये देश लाओस के उत्पादों को शुल्क में छूट देते हैं।

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आर्थिक चिंताओं और ऋण की स्थिरता पर ध्यान

रेलवे की वित्तीय संरचना पर अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने सवाल उठाए हैं, क्योंकि 5.9 अरब डॉलर की निर्माण लागत लाओस की 2017 की जीडीपी के करीब एक-तिहाई के बराबर थी। आलोचकों ने शुरुआत में सवाल किया था कि क्या यह परियोजना ऋण के बोझ को उचित ठहराने लायक पर्याप्त प्रतिफल दे पाएगी, खासकर तब जब देश पहले से बाहरी ऋण दायित्वों का सामना कर रहा है। हालांकि, परिचालन आंकड़े बताते हैं कि यह परियोजना अनुमान से तेजी से वित्तीय स्थिरता के करीब पहुंच रही है। इससे राजकोषीय संकट तय होने या तथाकथित ऋण-जाल कूटनीति की धारणाओं को चुनौती मिलती है।

लाओ-चाइना रेलवे कंपनी लिमिटेड के महाप्रबंधक लिउ होंग ने कहा कि यात्रियों और माल ढुलाई, दोनों के आंकड़े बहुत ऊंची वृद्धि दर के साथ लक्ष्य से आगे रहे हैं। 2023 में अकेले लाओस के हिस्से में 25.94 लाख यात्रियों ने सफर किया, जो साल-दर-साल 85.8 प्रतिशत की वृद्धि थी। वहीं माल ढुलाई 40.89 लाख टन रही, जो 83.1 प्रतिशत अधिक थी। ये आंकड़े 2031 के लिए तय वार्षिक लक्ष्यों के करीब पहुंच चुके हैं। इससे संकेत मिलता है कि प्रदर्शन शुरुआती अनुमानों से करीब एक दशक आगे है।

थाईलैंड के चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय के व्याख्याता और आसियान फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक डॉ. पिटी श्रीसंगनाम का कहना है कि यह परियोजना "ऋण-जाल" के दावों का खंडन करती है। उनके अनुसार, ऐसा जाल तब बनता है जब कोई ऋणदाता जानबूझकर घाटे वाली परियोजनाओं को वित्तपोषित करे, ताकि कर्जदार की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचे। चूंकि चीन की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत है और संयुक्त उद्यम ढांचे के तहत वह परिचालन जोखिम भी साझा करता है, इसलिए यह परियोजना शिकारी ऋण देने के बजाय वास्तविक निवेश है।

यह परियोजना ऋण-जाल की स्थिति के बिल्कुल उलट है। यह लाओस में विदेशी मुद्रा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

रेलवे कंपनी के उप महाप्रबंधक अनोंगदेथ फेत्कायसोन ने पुष्टि की कि 2023 में माल ढुलाई की मात्रा सालाना 20 लाख टन के बराबरी बिंदु से दोगुनी थी। इससे ऋण चुकाने की क्षमता बनी और परिचालन लाभ भी हुआ। लाओस के राष्ट्रपति थोंगलुन सिसुलिथ ने बार-बार जोर दिया है कि रेलवे देश को भू-आबद्ध से भू-संपर्कित बनाने के प्रयासों को बल देती है। पर्यटन से होने वाली आय और लॉजिस्टिक्स सेवाओं के जरिए यह सामाजिक-आर्थिक विकास को आगे बढ़ाती है और ऋण भुगतान की जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी मुद्रा का प्रवाह पैदा करती है।

मुख्य बिंदु

  • चीन-लाओस रेलवे ने दिसंबर 2021 से 7 करोड़ से अधिक यात्री यात्राएं दर्ज की हैं। 120 देशों के 7,80,000 से अधिक पर्यटकों ने 3,100 अंतरराष्ट्रीय ट्रेनों से सीमा-पार यात्रा की
  • सीमा-पार यात्रा और व्यापार की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए चीन के हिस्से में दैनिक ट्रेन सेवाएं 8 से बढ़कर 86 और लाओस के हिस्से में 4 से बढ़कर 18 हुईं
  • 1,035 किलोमीटर लंबी इस लाइन से 7.68 करोड़ टन माल ढोया गया है। इसमें 3,800 उत्पाद श्रेणियों का 1.7 करोड़ टन सीमा-पार माल शामिल है
  • थाई ड्यूरियन और लाओस के केले रेफ्रिजरेटेड रेल सेवाओं से अब 3-7 दिन में चीनी बाजारों तक पहुंचते हैं। इससे लॉजिस्टिक्स लागत 20-30 प्रतिशत घटती है और उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय कमी आती है
  • वियनतियाने तक थाईलैंड की रेल कड़ी जुलाई 2024 में खुली, जिससे गलियारा आगे मलेशिया और सिंगापुर को जोड़ने वाले भावी अखिल-एशियाई नेटवर्क की ओर बढ़ा
  • विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार, व्यापार सुगमता संबंधी पूरक सुधारों और लॉजिस्टिक्स में सुधारों के साथ रेलवे लाओस की कुल आय 21 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है
  • 2023 में माल ढुलाई 40 लाख टन से अधिक रही, जो सालाना 20 लाख टन के बराबरी बिंदु से दोगुनी है। इससे ऋण की स्थिरता और परिचालन लाभप्रदता को समर्थन मिलता है
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