ऐतिहासिक गिरावट: सियोल में बाजार के इतिहास का सबसे खराब कारोबारी दिन
दक्षिण कोरिया का प्रमुख KOSPI सूचकांक बुधवार को 12.06 प्रतिशत गिर गया। यह बाजार के 46 साल के इतिहास में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट थी और 11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों के दौरान बने पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक थी। इस भारी गिरावट के चलते अगस्त 2024 के बाद पहली बार सर्किट ब्रेकर लागू हुए। नुकसान 8 प्रतिशत की उस सीमा को पार कर गया, जिसके बाद एक्सचेंज की गतिविधियां रोक दी जाती हैं, और कारोबार 20 मिनट के लिए थामना पड़ा।
विषय-सूची
- ऐतिहासिक गिरावट: सियोल में बाजार के इतिहास का सबसे खराब कारोबारी दिन
- तेजी से गिरावट तक: एशिया का सबसे चर्चित बाजार कैसे बिखरा
- ऊर्जा का जाल: ईरान संघर्ष ने कोरियाई बाजारों को क्यों झकझोरा
- टेक दिग्गजों के शेयर गिरे: AI की तेजी के सामने भू-राजनीतिक हकीकत
- मार्जिन कॉल और घबराहट: खुदरा निवेशकों के शेयरों का अनिवार्य परिसमापन
- क्षेत्रीय असर: दबाव में एशियाई बाजार लड़खड़ाए
- अधिकारियों की प्रतिक्रिया: बाजार स्थिर करने के उपाय और आगे का रुख
- मुख्य बातें
इस बड़ी गिरावट के साथ दो दिनों की तेज बिकवाली और बढ़ गई। बाजार पूंजीकरण में करीब 817.6 ट्रिलियन वॉन (553.82 अरब डॉलर) की कमी आई, जो सूचकांक के कुल मूल्य का लगभग पांचवां हिस्सा है। कारोबार बंद होने पर KOSPI 698.37 अंक गिरकर 5,093.54 पर बंद हुआ। कारोबार किए गए 925 शेयरों में से केवल 13 में तेजी आई, जबकि 911 गिर गए। तकनीक-प्रधान KOSDAQ सूचकांक का प्रदर्शन प्रतिशत के लिहाज से और भी खराब रहा। सट्टे वाले शेयरों में अनिवार्य बिकवाली के चलते यह करीब 14 प्रतिशत लुढ़क गया।
बिकवाली की इस तेजी ने कई निवेशकों को चौंका दिया, क्योंकि कुछ ही दिन पहले बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था। सोंगनाम के पांग्यो टेक्नोलॉजी जिले में खुदरा निवेशक जेसिका चुंग ने बताया कि आमतौर पर व्यस्त रहने वाले दोपहर के भोजन के समय कर्मचारी स्मार्टफोन पर नजरें गड़ाए घबराए हुए थे। चुंग ने कहा, "सुबह KOSPI का नुकसान 8% से आगे बढ़ा तो मैंने कुछ सहकर्मियों को हांफते हुए 'यह क्या हो रहा है?' कहते सुना। मैं कारोबार करने के लिए एक शांत कोना ढूंढ़ने बाथरूम गई और, अंदाजा लगाइए, बाहर लोगों की कतार लगी थी।"
तेजी से गिरावट तक: एशिया का सबसे चर्चित बाजार कैसे बिखरा
यह गिरावट उस बाजार के लिए बड़ा उलटफेर थी, जो दुनिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर बाजार रहा था। 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही KOSPI 40 प्रतिशत से अधिक चढ़ा था। इसने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को काफी पीछे छोड़ दिया था और पिछले 12 महीनों में दोगुना हो गया था। सेमीकंडक्टर शेयरों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से प्रेरित तेजी ने इसमें अहम भूमिका निभाई। इस तेज उछाल ने बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की स्थितियां पैदा कर दी थीं। विदेशी फंडों की बड़ी हिस्सेदारी और दक्षिण कोरिया के 14 करोड़ खुदरा निवेशकों, जिन्हें स्थानीय तौर पर "चींटियां" कहा जाता है, का रिकॉर्ड मार्जिन कर्ज भी इसके पीछे था।
मंगलवार को बाजार में 7.24 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जिसे स्थानीय मीडिया ने "ब्लैक ट्यूजडे" नाम दिया। इसे चेतावनी माना जाना चाहिए था। स्वतंत्रता आंदोलन दिवस की छुट्टी के कारण सोमवार को बाजार बंद था। मंगलवार को खुलने पर बाजार ने वैश्विक घटनाक्रमों की भरपाई करने की कोशिश की, लेकिन तुरंत 452.22 अंक गिर गया। विदेशी निवेशकों ने अकेले मंगलवार को 5.17 ट्रिलियन वॉन मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। उन्होंने उन प्रमुख टेक कंपनियों के शेयर बेचे, जिन्होंने बाजार में तेजी को गति दी थी: सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, SK हाइनिक्स और हुंडई मोटर कंपनी।
बुधवार को एल्गोरिदम आधारित ट्रेडिंग प्रणालियों और मार्जिन कॉल के चलते बिकवाली और तेज हुई, जिससे लगातार शेयरों का परिसमापन होने लगा। सिंगापुर में मेबैंक सिक्योरिटीज के प्राइम ब्रोकरेज डीलिंग प्रमुख तारिक होर्चानी ने इसे संस्थागत निवेशकों द्वारा तेजी से जोखिम घटाने की प्रक्रिया बताया। होर्चानी ने कहा, "यह आय के बुनियादी आधार में गिरावट के बजाय निवेश की स्थिति से निकलने और जोखिम कम करने जैसा लगता है। कोरिया वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत बाजारों में से एक रहा था, इसलिए निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी एक ही ओर जमा हो गई थी।"
मॉर्निंगस्टार में इक्विटी रिसर्च की एशिया निदेशक लॉरेन टैन ने उन संरचनात्मक कारकों की ओर इशारा किया, जिन्होंने गिरावट को और बढ़ाया। टैन ने कहा, "KOSPI में गिरावट की बड़ी वजह कोरियाई बाजारों में कुछ चुनिंदा शेयरों का बहुत अधिक दबदबा है।" सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स का संयुक्त रूप से सूचकांक में लगभग आधा भार है। इसका मतलब है कि इन शेयरों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पूरे बाजार पर पड़ता है।
ऊर्जा का जाल: ईरान संघर्ष ने कोरियाई बाजारों को क्यों झकझोरा
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध से वैश्विक बाजारों में घबराहट थी। लेकिन दक्षिण कोरिया की कुछ खास कमजोरियों ने भू-राजनीतिक झटके को घरेलू वित्तीय संकट में बदल दिया। देश अपनी जीवाश्म ईंधन की जरूरतों का करीब 98 प्रतिशत आयात करता है। उसके तेल की आपूर्ति का लगभग 70 प्रतिशत मध्य पूर्व से आता है। इसी वजह से वह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल आयातक है और आपूर्ति में रुकावटों के प्रति बेहद संवेदनशील है।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया की कुल तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है, तनाव का मुख्य केंद्र बन गया। इस अहम समुद्री मार्ग को बंद करने की ईरान की धमकियों से जहाजरानी और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के शेयर बुरी तरह गिरे। पैन ओशन, HMM और KSS लाइन के शेयर 16 से 17 प्रतिशत तक लुढ़क गए। ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक, यह मार्ग बंद होने पर केवल बीमा लागत में ही प्रति बैरल 5 से 15 डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे "युद्ध प्रीमियम" बन सकता है, जो सैन्य संघर्ष सीमित रहने पर भी कायम रह सकता है।
मुद्रा बाजार में भी इन चिंताओं का असर दिखा। दक्षिण कोरियाई वॉन पहली बार 17 साल में रातोंरात अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गया और 1,505.8 तक पहुंचा। बाद में थोड़ा संभलकर 1,485.7 पर बंद हुआ। डॉलर में खरीदी जाने वाली ऊर्जा के आयात पर बहुत अधिक निर्भर अर्थव्यवस्था में कमजोर मुद्रा से महंगाई का जोखिम बढ़ता है। नोमुरा ने चालू खाते पर दबाव के लिहाज से दक्षिण कोरिया को खास तौर पर कमजोर बताया है। उसके मुताबिक, देश का शुद्ध तेल आयात सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2.7 प्रतिशत है।
जब तेल की कीमतें उछलती हैं और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, खासकर कोरिया और जापान जैसे तेल आयातक बाजारों में, तो वैश्विक फंड सबसे अधिक तरलता वाले प्रमुख सूचकांक शेयरों से तेजी से जोखिम घटाने लगते हैं।
कोरियाई बाजारों में ऊर्जा आयातकों और निर्यातकों के बीच का फर्क साफ दिखा। अधिकांश क्षेत्रों में गिरावट रही, लेकिन तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्तिकर्ता कंपनी डेइसंग एनर्जी के शेयरों में 30 प्रतिशत की दैनिक अधिकतम तेजी आई। ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी के बाद ऊर्जा सुरक्षा के लिए मची होड़ साफ नजर आई।
टेक दिग्गजों के शेयर गिरे: AI की तेजी के सामने भू-राजनीतिक हकीकत
सेमीकंडक्टर क्षेत्र ने दक्षिण कोरिया के बाजार को वैश्विक स्तर पर मिली तेजी की अगुवाई की थी। लेकिन AI को लेकर उत्साह और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं के मेल ने मुनाफा वसूली के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना दीं और इस क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर 11.7 प्रतिशत गिरकर फरवरी के आखिर के बाद पहली बार 200,000 वॉन के स्तर से नीचे आ गए, जबकि SK हाइनिक्स 9.6 प्रतिशत लुढ़क गया। हुंडई मोटर के शेयरों में इससे भी बड़ी, 15.8 प्रतिशत की गिरावट आई। निवेशकों ने विनिर्माण लागत बढ़ने और उपभोक्ता मांग कमजोर होने की आशंका को ध्यान में रखा।
बिकवाली के पीछे यह चिंता भी थी कि AI डेटा सेंटरों को पारंपरिक कंप्यूटिंग ढांचे के मुकाबले काफी अधिक ऊर्जा चाहिए। इससे बिजली और कूलिंग की बढ़ती लागत उनके विस्तार में बाधा बन सकती है। मॉर्निंगस्टार की टैन ने कहा कि यह गिरावट "इस बढ़ती चिंता को दर्शाती है कि सामान्य डेटा सेंटरों के मुकाबले काफी अधिक ऊर्जा लागत के कारण AI डेटा सेंटरों को अपनाने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।"
कुछ ही हफ्ते पहले रिकॉर्ड निवेश के साथ कोरियाई टेक शेयरों में पैसा लगाने वाले विदेशी निवेशकों ने अब तेजी से अपना रुख बदल लिया। 16 अरब डॉलर के iShares MSCI South Korea ETF में संकट से पहले वाले सप्ताह में 1.2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया था। यह फंड के 25 साल के इतिहास का सबसे बड़ा साप्ताहिक निवेश था और इससे पता चलता है कि निवेशकों की कितनी बड़ी हिस्सेदारी इस बाजार में लगी हुई थी। ईरान संघर्ष तेज होने के साथ ही ये तेजी से आने-जाने वाले निवेश अचानक बाहर निकलने लगे। बुधवार को कारोबार खत्म होने के करीब विदेशी निवेशक थोड़े खरीदार बने, लेकिन उससे पहले लगातार नौ कारोबारी सत्रों तक शुद्ध बिकवाली करते रहे।
सुरक्षित माने जाने वाले सभी निवेशों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। रक्षा क्षेत्र की कंपनी हन्वा एयरोस्पेस के शेयर मंगलवार को 20 प्रतिशत चढ़े थे, क्योंकि निवेशक सैन्य शेयरों में सुरक्षा तलाश रहे थे। लेकिन बुधवार को ये 8 प्रतिशत गिर गए, क्योंकि भू-राजनीतिक जोखिम से बचाव की रणनीति पर मूल्यांकन संबंधी चिंताएं भारी पड़ गईं।
मार्जिन कॉल और घबराहट: खुदरा निवेशकों के शेयरों का अनिवार्य परिसमापन
दक्षिण कोरिया के खुदरा निवेशक, जिनका दैनिक कारोबार में लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, गिरती कीमतों और अतिरिक्त गारंटी राशि की मांग कर रहे ब्रोकरों के बीच फंस गए। AI से प्रेरित तेजी का फायदा उठाने के लिए व्यक्तिगत निवेशकों ने अपनी निवेश हिस्सेदारी पर उधार लेकर दांव लगाया था, जिससे हाल के महीनों में कोरियाई बाजार में मार्जिन कर्ज रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। कीमतों में तेज गिरावट से अनिवार्य परिसमापन शुरू हुआ और गिरावट का चक्र और गहरा गया।
खुदरा निवेशकों ने अकेले मंगलवार को कुल 5.8 ट्रिलियन वॉन के शेयरों की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को "संभालने" की कोशिश की। लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और मार्जिन कर्ज से जुड़े परिसमापन के दबाव के आगे ये कोशिशें नाकाम रहीं। दक्षिण कोरिया का उतार-चढ़ाव सूचकांक VKOSPI, जिसे अक्सर "डर का सूचकांक" कहा जाता है, उछलकर 62.98 पर पहुंच गया। यह मार्च 2020 में COVID-19 महामारी के दौरान फैली घबराहट के बाद छह साल का उच्चतम स्तर था।
कोरियाई खुदरा निवेशकों में कई युवा पेशेवर हैं, जिन्होंने महामारी के बाद तेजी के दौरान बाजार में कदम रखा था। उनमें से कई ने कभी वास्तविक मंदी का बाजार नहीं देखा था। केवल दो कारोबारी सत्रों में KOSPI करीब 19 प्रतिशत गिर गया। इस तेजी से आई गिरावट ने निवेशकों की नई पीढ़ी को बाजार के उतार-चढ़ाव का कठोर अनुभव दिया।
सैक्सो में मुख्य निवेश रणनीतिकार चारु चनाना ने कहा कि बिकवाली लगातार अव्यवस्थित होती जा रही है। चनाना ने कहा, "एशिया की बिकवाली अव्यवस्थित हो रही है, क्योंकि अब बाजार इसे 'एक हफ्ते की खबर से पैदा हुआ झटका' नहीं मान रहे। 'जो बेच सकते हो, बेचो' वाला दौर फैल रहा है। नकदी की जरूरत के चलते कीमती धातुएं भी गिर रही हैं। यह निवेश का व्यवस्थित रूप से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाना कम और विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में कर्ज घटाने तथा मार्जिन के दबाव में बिकवाली ज्यादा लगती है।"
क्षेत्रीय असर: दबाव में एशियाई बाजार लड़खड़ाए
कोरियाई बाजार में आई गिरावट एशिया के व्यापक बाजार संकट का केंद्र बनी और इसने दिखाया कि मध्य पूर्व से आपूर्ति बाधित होने पर पूरा क्षेत्र कितना प्रभावित हो सकता है। जापान का Nikkei 225 सूचकांक बुधवार को 3.6 प्रतिशत गिरा, जिससे इस सप्ताह की गिरावट 6 प्रतिशत से अधिक हो गई। सेमीकंडक्टर निर्माताओं की ऊर्जा लागत बढ़ने की चिंताओं के बीच ताइवान का Taiex 4.4 प्रतिशत लुढ़का। हांगकांग का हैंग सेंग 2 प्रतिशत और सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक 2.1 प्रतिशत गिरा।
इस एक साथ आई गिरावट से पता चला कि एशिया के बाजार खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति पर साझा रूप से निर्भर हैं। जापान के पास अनुमानित 254 दिनों का तेल भंडार है और चीन के पास गैस का बड़ा घरेलू भंडार है। लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने और ऊर्जा की आधारभूत लागत बढ़ने की आशंका के सामने इन भंडारों से शेयर बाजारों को खास राहत नहीं मिली।
हांगकांग की वेंचरसमार्ट एशिया के मुख्य कार्यकारी फ्रांसिस लुन ने क्षेत्रीय हालात का निराशाजनक आकलन किया। लुन ने कहा, "मुझे लगता है कि ईरान का मामला हाथ से निकलता जा रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत बड़ी गलत गणना की। हालात बेहद गंभीर हैं।"
छुट्टियों के बाद दोबारा खुलने पर दुबई का फाइनेंशियल मार्केट जनरल इंडेक्स 4.9 प्रतिशत लुढ़क गया। निवेशकों द्वारा क्षेत्रीय जोखिम का नए सिरे से आकलन किए जाने के साथ रियल एस्टेट और बैंकिंग शेयरों में सबसे अधिक गिरावट आई। भारतीय प्रमुख सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक गिरे। गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी से क्षेत्रीय कंपनियों की कमाई 2 प्रतिशत घट सकती है। नैटिक्सिस ने भारी ऊर्जा आयात निर्भरता के कारण एशियाई बाजारों में भारतीय परिसंपत्तियों को "सबसे ज्यादा जोखिम में" बताया।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों के बीच का अंतर खास तौर पर चौंकाने वाला रहा। सियोल के बाजारों में गिरावट के बीच बुधवार को अमेरिकी शेयर चढ़े। इसकी वजह उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़े और ऐसी खबरें थीं कि ईरान ने संभावित बातचीत के लिए अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका से संपर्क किया है। S&P 500 में 0.8 प्रतिशत और Nasdaq Composite में 1.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। इससे साफ हुआ कि संघर्ष का आर्थिक नुकसान लड़ाई में शामिल देशों के बजाय ऊर्जा आयातक देशों में केंद्रित था।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया: बाजार स्थिर करने के उपाय और आगे का रुख
दक्षिण कोरिया के वित्तीय अधिकारियों ने नुकसान पर काबू पाने के लिए जल्द कदम उठाए। वित्तीय सेवा आयोग ने कहा कि "अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए जरूरत पड़ने पर बाजार को स्थिर करने वाले कार्यक्रमों का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया जाएगा।" बैंक ऑफ कोरिया ने बयान जारी कर कहा कि वह "इस पर करीबी नजर रखेगा कि वॉन की विनिमय दरें और बॉन्ड यील्ड घरेलू आर्थिक बुनियादी स्थितियों से जरूरत से ज्यादा दूर तो नहीं जा रहे" और मुद्रा बाजारों में "झुंड की तरह व्यवहार" पर प्रतिक्रिया देगा।
वित्त मंत्री कू युन-चोल ने पुष्टि की कि अधिकारी विदेशी मुद्रा बाजारों पर करीबी नजर रख रहे हैं। हालांकि, विश्लेषकों ने कहा कि डॉलर के मुकाबले वॉन की विनिमय दर 1,500 का स्तर पार कर चुकी है और मुद्रा को संभालने वाले तकनीकी स्तर टूट गए हैं। इससे आगे और गिरावट का जोखिम है। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने जनवरी में कहा था कि वॉन मजबूत होकर प्रति डॉलर 1,400 तक पहुंचने की उम्मीद है। मौजूदा हालात में यह अनुमान अब दूर की बात लगता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऊर्जा बाजारों को शांत करने की कोशिश में घोषणा की कि अमेरिका समुद्री व्यापार के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा देगा और जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा देगी। हालांकि, जहाजरानी विश्लेषकों ने चेताया कि इन उपायों से जोखिम केवल कुछ हद तक कम होंगे। बीमा प्रीमियम पहले ही तेजी से बढ़ रहे हैं।
कुछ बाजार प्रतिभागियों ने इस गिरावट को साल भर की तेजी के दौरान जमा हुई अतिरेक से छुटकारा पाने की जरूरी प्रक्रिया माना। कई बड़े बैंकों के विश्लेषकों ने कहा कि अगर ईरान संघर्ष जल्दी सुलझ जाता है, तो कोरियाई टेक कंपनियों की कमाई का बुनियादी आधार मजबूत होने के कारण बाजार तेजी से संभल सकता है। लेकिन अगर राष्ट्रपति ट्रंप के सुझाए चार से पांच सप्ताह के समय से आगे भी संघर्ष जारी रहा, तो लंबे समय तक तेल की ऊंची कीमतें केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती टालने पर मजबूर कर सकती हैं। इससे एशिया की विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं में और गहरी मंदी आ सकती है।
मुख्य बातें
- दक्षिण कोरिया का KOSPI सूचकांक बुधवार को 12.06% गिरा। बाजार के इतिहास में यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट थी और 11 सितंबर, 2001 के हमलों के दौरान बने रिकॉर्ड से भी अधिक थी।
- दो दिनों की गिरावट में बाजार मूल्य से करीब 554 अरब डॉलर मिट गए। सूचकांक हाल के रिकॉर्ड उच्च स्तर से लगभग 19% नीचे आ गया।
- दक्षिण कोरिया की भारी ऊर्जा निर्भरता ने उसे खास तौर पर कमजोर बनाया। देश 98% जीवाश्म ईंधन आयात करता है, जिसमें 70% खाड़ी क्षेत्र से आता है।
- KOSPI में करीब आधा भार रखने वाली टेक दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स के शेयर क्रमशः 11.7% और 9.6% गिरे, क्योंकि AI कारोबार में निवेश की स्थिति से निवेशक तेजी से बाहर निकले।
- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दक्षिण कोरियाई वॉन कुछ समय के लिए 17 साल के निचले स्तर 1,505.8 तक पहुंचा और बाद में थोड़ा संभला। यह मुद्रा पर भारी दबाव को दर्शाता है।
- जापान, ताइवान, सिंगापुर और दुबई समेत क्षेत्रीय बाजारों में भी भारी गिरावट आई, क्योंकि एशियाई ऊर्जा आयातकों को एक साथ संकट फैलने का जोखिम था।
- नुकसान 8% की सीमा पार करने पर सर्किट ब्रेकर ने कारोबार 20 मिनट के लिए रोक दिया। अधिकारियों ने अत्यधिक उतार-चढ़ाव को थामने के लिए दखल देने का भरोसा दिया।
- जहाजरानी और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका से पैन ओशन, HMM और KSS लाइन के शेयर 16-17% लुढ़क गए।






