महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भू-राजनीतिक बदलाव
अमेरिका और इंडोनेशिया ने गुरुवार को एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके तहत अमेरिकी कंपनियों को द्वीपसमूह के निकल और अन्य औद्योगिक वस्तुओं के विशाल भंडार तक बिना किसी प्रतिबंध के पहुंच मिलेगी। विश्लेषकों का कहना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का स्वरूप बुनियादी तौर पर बदल सकता है और इस क्षेत्र में चीन के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को चुनौती मिल सकती है। इस समझौते के तहत इंडोनेशियाई वस्तुओं पर 19 प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा, जबकि दक्षिण-पूर्व एशियाई देश को होने वाले 99 प्रतिशत से अधिक अमेरिकी निर्यात पर शुल्क खत्म हो जाएगा। हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी कूटनीति में यह सबसे बड़े बदलावों में से एक है।
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सात दौर की बातचीत के बाद तय शर्तों के तहत इंडोनेशिया ने अमेरिका के लिए निकल, बॉक्साइट और तांबे के निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही उसने ऊर्जा वस्तुओं, विमानों और कृषि उत्पादों समेत 38.4 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने पर सहमति दी। समझौते में यह भी तय है कि इंडोनेशिया अमेरिकी निवेशकों के स्थानीय कारोबारों के स्वामित्व पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जैसे खनन क्षेत्र में हिस्सेदारी बेचने की अनिवार्यता। हालांकि, इस प्रावधान की 12 महीने के भीतर समीक्षा की जाएगी।
पारंपरिक व्यापार बाधाओं के अलावा, यह समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर भी ध्यान देता है। इंडोनेशिया ने निर्यात नियंत्रण के मामले में वॉशिंगटन के साथ तालमेल बैठाने और अमेरिकी तकनीकी पाबंदियों के दायरे में आने वाले सामान के हस्तांतरण को सीमित करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत जकार्ता को अन्य देशों के साथ डिजिटल व्यापार समझौते करने से पहले वॉशिंगटन से परामर्श करना होगा, यदि उनसे अमेरिकी हितों को खतरा हो सकता है। इंडोनेशिया को ऐसे डिजिटल सेवा कर लगाने से भी रोका गया है जो अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव करते हों।
महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े प्रावधान इस समझौते के केंद्र में हैं। इंडोनेशिया ने अमेरिकी बाजार के लिए कच्चे निकल अयस्क के निर्यात पर पाबंदियां हटाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह उस देश की नीति में बड़ा बदलाव है, जिसने घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2020 में कच्चे अयस्क का निर्यात प्रतिबंधित कर दिया था। यह समझौता इंडोनेशिया के खनन, प्रसंस्करण और डाउनस्ट्रीम उत्पादन में अमेरिकी निवेश को भी बढ़ावा देता है, जिसमें दुर्लभ मृदा तत्व शामिल हैं। साथ ही, यह सुनिश्चित करता है कि विदेशी स्वामित्व वाले औद्योगिक पार्कों पर अन्य कंपनियों जैसी ही कर और कानूनी शर्तें लागू हों।
इंडोनेशियाई निकल पर बीजिंग की पकड़
चीनी कंपनियों का फिलहाल इंडोनेशिया के बैटरी-ग्रेड निकल उत्पादन के लगभग 80 प्रतिशत पर नियंत्रण है। पिछले दशक में उन्होंने देश के खनिज प्रसंस्करण ढांचे में अनुमानित 30 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस वर्चस्व की बड़ी वजह इंडोनेशिया का 2020 में कच्चे निकल अयस्क के निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध था। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को देश के भीतर गलन संयंत्र बनाने पड़े या फिर दुनिया के सबसे बड़े निकल भंडार तक पहुंच गंवानी पड़ी। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, वैश्विक भंडार में इंडोनेशिया की हिस्सेदारी 42.3 प्रतिशत है।
निवेश ने इंडोनेशिया को कच्चे माल के निर्यातक से दुनिया का प्रमुख निकल प्रसंस्करण केंद्र बना दिया। अब वैश्विक खदान आपूर्ति में उसकी हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है। त्सिंगशान होल्डिंग ग्रुप, झेजियांग हुआयू कोबाल्ट और निंगबो लाइगेंड समेत चीनी कंपनियों ने इंडोनेशिया के 90 प्रतिशत से अधिक निकल गलन संयंत्र बनाए हैं। इनमें अक्सर हाई प्रेशर एसिड लीच (एचपीएएल) तकनीक का इस्तेमाल कर सुलावेसी जैसे द्वीपों पर मिलने वाले कम-ग्रेड लेटराइट अयस्क से बैटरी-ग्रेड निकल और कोबाल्ट निकाला जाता है।
पश्चिमी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में इन संयंत्रों को कम पर्यावरणीय और श्रम मानकों का लाभ मिला है। इससे चीनी समर्थन वाली इकाइयों की नकद लागत 3.17 डॉलर प्रति पाउंड रही, जबकि सोरावाको और वेदा बे जैसी पश्चिमी-संचालित खदानों में यह 6.56 से 8.24 डॉलर प्रति पाउंड तक है। लागत के इस लाभ से वैश्विक बाजार में आपूर्ति की अधिकता बढ़ी। 2023 में निकल की कीमतें 44.7 प्रतिशत और 2024 में 26.1 प्रतिशत और गिर गईं। इसके चलते ऑस्ट्रेलिया और न्यू कैलेडोनिया के अधिक लागत वाले उत्पादकों को परिचालन रोकना पड़ा, जबकि इंडोनेशिया की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी।
चीनी स्वामित्व का संकेंद्रण अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए जटिल चुनौतियां पैदा करता है। मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम के कर लाभों पर लागू विदेशी चिंता के दायरे वाली पूर्व शर्तों के तहत, इंडोनेशिया के निकल उत्पादन का बड़ा हिस्सा चीनी बहुमत स्वामित्व के कारण सब्सिडी के लिए अयोग्य होता। हाल के कानून के तहत 30D स्वच्छ वाहन कर क्रेडिट खत्म होने से यह खास बाधा दूर हो गई है, लेकिन आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा और बीजिंग द्वारा बाजार में हेरफेर की आशंका बनी हुई है।
पर्यावरण और श्रम संबंधी चिंताएं
निकल की बढ़ती मांग से पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है। वर्ष 2000 से अब तक कम से कम 156,000 हेक्टेयर वन नष्ट हो चुका है, जिसमें कार्बन सोखने के लिए अहम पुराने वर्षावन का बड़ा हिस्सा शामिल है। सुलावेसी और हलमहेरा जैसे द्वीपों पर खनन कार्यों के कारण स्थानीय आदिवासी समुदाय विस्थापित हुए हैं। इनमें होंगाना मानयावा जैसे बाहरी दुनिया के संपर्क में न आए समुदाय भी शामिल हैं। साथ ही, कोरल ट्रायंगल के संवेदनशील प्रवाल-भित्ति आवास प्रदूषित हुए हैं।
प्रसंस्करण संयंत्रों में कोयले से चलने वाले बिजलीघरों पर भारी निर्भरता है। औद्योगिक पार्क इंडोनेशिया के कोयला बिजली उत्पादन का 15 प्रतिशत हिस्सा लेते हैं। नई परियोजनाएं शुरू होने पर इसके बढ़कर 24 प्रतिशत होने का अनुमान है। जीवाश्म ईंधन पर इस निर्भरता से काफी कार्बन उत्सर्जन होता है। 2023 में प्रमुख निकल उत्पादकों ने करीब 15 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन किया, जिसका बड़ा हिस्सा लेटराइट अयस्क को क्लास 1 बैटरी-ग्रेड निकल में बदलने के लिए कोयले के इस्तेमाल से हुआ।
श्रम की स्थितियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे हैं। अमेरिकी श्रम विभाग ने जबरन मजदूरी की चिंताओं के कारण इंडोनेशियाई निकल उत्पादों को चिन्हित किया है, खासकर चीनी स्वामित्व वाले गलन संयंत्रों में। दिसंबर 2023 में मोरोवाली स्थित चीनी स्वामित्व वाली निकल फैक्टरी में भट्ठी विस्फोट से 20 मजदूरों की मौत ने सुरक्षा की कमियों को उजागर किया। इन चिंताओं के चलते नागरिक समाज संगठनों ने कड़ी निगरानी की मांग की है। पर्यावरण समूहों का कहना है कि आधिकारिक प्रतिबंधों के बावजूद समुद्र के भीतर खनन अपशिष्ट डाला जा रहा है, जिससे मोरोवाली सागर दूषित हो रहा है। इसमें दुनिया की 76 प्रतिशत प्रवाल-भित्तियां हैं।
खबरों के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने चाइना लेबर वॉच जैसे संगठनों के जरिए श्रम निगरानी पहलों को वित्तीय सहायता दी है। संगठन को इंडोनेशियाई यूनियनों को प्रशिक्षण देने और जबरन मजदूरी के मामलों का दस्तावेजीकरण करने के लिए अनुदान मिला। इन प्रयासों का उद्देश्य ऐसे मामले तैयार करना है जिन पर कार्रवाई की जा सके और जो श्रम उल्लंघनों को खास कंपनियों और वैश्विक खरीदारों से जोड़ें। इससे चीनी-संचालित संयंत्रों की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।
महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज
यह व्यापार समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वॉशिंगटन दक्षिण-पूर्व एशिया में बीजिंग के प्रभाव का मुकाबला करने और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों तथा रक्षा उपयोगों के लिए आपूर्ति शृंखलाएं सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है। स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण में वर्चस्व की होड़ में इंडोनेशिया के निकल भंडार अहम केंद्र बन गए हैं, खासकर ऐसे समय में जब हाल के बाजार उतार-चढ़ाव के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की वैश्विक मांग बढ़ रही है।
यह समझौता इंडोनेशिया को बीजिंग से आगे अपने विदेशी साझेदारों में विविधता लाने का रास्ता देता है। हालांकि, जकार्ता के सामने दोनों महाशक्तियों के साथ रिश्ते बनाए रखने की नाजुक चुनौती है। 2024 में जोको विडोडो के बाद राष्ट्रपति बने प्रबोवो सुबियांतो ने अपने पूर्ववर्ती की संसाधन राष्ट्रवाद की नीतियां जारी रखी हैं और साथ ही अमेरिकी निवेश बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, पिछले छह वर्षों में इंडोनेशिया में चीनी निवेश 31 प्रतिशत बढ़कर 2020 से 2025 के बीच 35 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें से 15 अरब डॉलर से अधिक धातु प्रसंस्करण में लगाया गया।
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस समझौते से इंडोनेशिया के चीन के साथ रिश्तों में तनाव आ सकता है, जो जकार्ता का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। चीन की आर्थिक वृद्धि दर में एक प्रतिशत अंक की गिरावट आने पर इंडोनेशिया की वृद्धि दर अनुमानित 0.3 प्रतिशत अंक घट जाती है। इससे बीजिंग को नाराज करने के जोखिम का पता चलता है। चीन इंडोनेशिया के पाम तेल, कोयले और निकल के अधिकांश निर्यात खरीदता है, जिससे जकार्ता पर बीजिंग का काफी आर्थिक प्रभाव है।
इंडोनेशिया जनवरी 2025 में ब्रिक्स आर्थिक समूह में शामिल हुआ और इसी दौरान वॉशिंगटन से करीबी संबंध भी बना रहा है। इससे जकार्ता के नाजुक संतुलन की कोशिश जाहिर होती है। राष्ट्रपति प्रबोवो की हालिया मॉस्को यात्रा और वहां व्लादिमीर पुतिन के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग पर चर्चा इंडोनेशिया की बहु-पक्षीय विदेश नीति को और स्पष्ट करती है। यह रुख दिखाता है कि जकार्ता वॉशिंगटन या बीजिंग में से किसी एक पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय प्रतिस्पर्धी महाशक्तियों के बीच अपने लाभ को अधिकतम करना चाहता है।
कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति सुरक्षा
हाल के महीनों में वैश्विक निकल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहा है। इंडोनेशिया के खनन मात्रा सीमित करने के फैसले के बाद दिसंबर के मध्य से जनवरी के बीच कीमतें 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ गईं। गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की कमोडिटी विश्लेषक लाविनिया फोर्सेलीज़ ने कहा कि इंडोनेशिया की नीति में अपेक्षाकृत छोटे बदलाव भी अब वैश्विक बाजार के संतुलन और कीमतों पर बड़ा असर डालते हैं।
अब बाजार की नजर इंडोनेशिया के आपूर्ति संबंधी फैसलों पर है। नीति या मंजूरी में अपेक्षाकृत छोटे बदलाव भी वैश्विक संतुलन और कीमतों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
कीमतों में उछाल प्रमुख उत्पादक से आपूर्ति सीमित होने की बाजार चिंताओं को दर्शाता है। इंडोनेशिया की सरकारी खनन कंपनी ने हाल में इस क्षेत्र पर नियंत्रण कड़ा करना शुरू किया है। उसने रिश्वत या अनुचित लाइसेंसिंग के जरिए कथित तौर पर हासिल किए गए 4 मिलियन हेक्टेयर से अधिक खनन रियायत क्षेत्र अपने कब्जे में लिए हैं। इस साल 4.5 मिलियन हेक्टेयर और जब्त करने की योजना है। इस कार्रवाई का उद्देश्य राज्य का नियंत्रण मजबूत करना है, लेकिन इससे निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ती है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि बैटरी तकनीक में बदलाव के साथ निकल की दीर्घकालीन मांग को लेकर अनिश्चितता है। लिथियम आयरन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरियों में निकल नहीं होता और अब दुनिया के करीब आधे इलेक्ट्रिक वाहन इन्हीं से चलते हैं। चीनी वाहन निर्माता तेजी से इन लौह-आधारित डिजाइनों की ओर बढ़े हैं, जो निकल-समृद्ध विकल्पों से सस्ते और अधिक स्थिर हैं। यदि यह रुझान तेज हुआ, तो मौजूदा मांग पूरी करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बावजूद इंडोनेशिया की निकल-केंद्रित औद्योगिक रणनीति से मिलने वाला लाभ घट सकता है।
कार्यान्वयन के जोखिम और संसाधन राष्ट्रवाद
समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद इसे पूरी तरह लागू करने में बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। खबरों के मुताबिक, इंडोनेशियाई अधिकारियों ने बातचीत के दौरान की गई कुछ प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने के संकेत दिए हैं। खासकर वे प्रावधान जो चीन और रूस के साथ संबंधों को संभालने में जकार्ता की स्वायत्तता सीमित कर सकते हैं। अमेरिका ने ऐसी शर्तों पर जोर दिया है जिनके तहत इंडोनेशिया के अमेरिकी हितों को खतरे में डालने वाले समझौते करने पर वॉशिंगटन व्यापार समझौता खत्म कर सके। जकार्ता इस शर्त को दखलंदाजी मानता है।
इंडोनेशिया के अनिवार्य हिस्सेदारी-विनिवेश कानूनों के तहत विदेशी खनन कंपनियों को समय के साथ 51 प्रतिशत स्वामित्व इंडोनेशियाई संस्थाओं को हस्तांतरित करना होता है। इससे अमेरिकी निवेशकों के लिए दीर्घकालीन अनिश्चितता पैदा होती है। मौजूदा परिचालन में स्वामित्व हस्तांतरण के बावजूद अक्सर संचालन का नियंत्रण बना रहता है, लेकिन नए निवेशकों को ऊंची बाधाओं और सीमित सौदेबाजी क्षमता का सामना करना पड़ता है। यह शर्त स्वामित्व प्रतिबंधों को औपचारिक तौर पर हटाने वाले समझौते से मेल नहीं खाती। इससे नए व्यापार समझौते और इंडोनेशिया के मौजूदा खनन कानून के बीच संभावित टकराव का संकेत मिलता है।
इंडोनेशियाई निकल के प्रसंस्करण से जुड़ी तकनीकी चुनौतियां भी अमेरिकी भागीदारी को जटिल बनाती हैं। अमेरिकी रक्षा और बैटरी उपयोगों में ज्यादातर क्लास 1 निकल की जरूरत होती है, जबकि इंडोनेशिया मुख्य रूप से स्टेनलेस स्टील के लिए उपयुक्त क्लास 2 निकल बनाता है। इंडोनेशिया के उत्पादन को बैटरी-ग्रेड सामग्री में बदलने के लिए उन्नत रिफाइनिंग क्षमता चाहिए, जिस पर अब भी बड़े पैमाने पर चीन का नियंत्रण है।
इसके अलावा, मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम का 30D कर क्रेडिट खत्म होने से अमेरिकी वाहन निर्माताओं के लिए इंडोनेशिया से आपूर्ति लेने का एक प्रमुख प्रोत्साहन समाप्त हो गया है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति शृंखलाओं पर समझौते का तत्काल प्रभाव घट सकता है। मुक्त व्यापार समझौते के अनुरूप खनिजों पर सब्सिडी का अतिरिक्त लाभ न होने पर इंडोनेशियाई निकल को नियामकीय प्राथमिकता के बजाय केवल कीमत और उपलब्धता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी। अमेरिका में समझौते की स्थायित्व को लेकर कानूनी सवाल भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में टैरिफ लागू करने के लिए प्रशासन द्वारा आपातकालीन शक्तियों के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार किया था।
निष्कर्ष
- अमेरिका और इंडोनेशिया ने एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को इंडोनेशियाई निकल और महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच मिलेगी तथा टैरिफ 19 प्रतिशत तय किया गया है।
- इंडोनेशिया के बैटरी-ग्रेड निकल उत्पादन के लगभग 80 प्रतिशत पर चीनी कंपनियों का नियंत्रण है, जिससे अमेरिका की आपूर्ति शृंखलाओं में संभावित कमजोरियां पैदा होती हैं।
- इंडोनेशिया ने 38.4 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने और महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्यात प्रतिबंध हटाने की प्रतिबद्धता जताई है।
- पर्यावरण संबंधी चिंताओं में 156,000 हेक्टेयर से अधिक वनों की कटाई और प्रसंस्करण के लिए कोयले से चलने वाली बिजली पर भारी निर्भरता शामिल है।
- समझौते को लागू करने में इंडोनेशिया का संसाधन राष्ट्रवाद और खदानों में स्थानीय संस्थाओं के बहुमत स्वामित्व की शर्त जैसी बाधाएं हैं।
- वैश्विक निकल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और इंडोनेशिया के उत्पादन संबंधी फैसले अब बाजार को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक हैं।
- यह समझौता चीनी वर्चस्व से दूर आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की रणनीतिक कोशिश है, हालांकि इंडोनेशिया में बीजिंग का आर्थिक प्रभाव अब भी काफी है।






