पतन ने उजागर की एक गहरी समस्या
जब पिछले महीने ब्रिटिश अभियोजकों ने क्रिस्टोफर कैश और क्रिस्टोफर बेरी के खिलाफ आरोप वापस ले लिए, तो इस फैसले से तुरंत राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत चीन के लिए जासूसी करने के आरोपी ये दोनों व्यक्ति इसलिए बरी नहीं हुए कि उनकी बेगुनाही साबित हो गई थी, बल्कि इसलिए कि क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने तय किया कि वह यह साबित नहीं कर सकती कि बीजिंग से ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा था। इस कानूनी पेचीदगी ने एक बुनियादी सवाल उजागर किया, जो ब्रिटेन की लगातार कई सरकारों को परेशान करता रहा है: चीन से वास्तव में किस तरह का खतरा है और ब्रिटेन को उसका जवाब कैसे देना चाहिए?
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अटॉर्नी जनरल लॉर्ड हरमर ने बाद में इस मामले के विफल होने के लिए पुराने पड़ चुके कानून को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन इस घटना ने कानूनी खामियों से भी ज्यादा चिंताजनक बात उजागर की। इसने जासूसी की पारंपरिक अवधारणाओं और आधुनिक चीनी राज्य से पैदा होने वाले खतरों की जटिल वास्तविकता के बीच गहरी खाई दिखा दी। पारंपरिक जासूसी में राजनयिक और दस्तावेजों का गुप्त आदान-प्रदान शामिल होता था, जबकि आज के खतरों में साइबर युद्ध, अकादमिक क्षेत्र में घुसपैठ, बड़े पैमाने पर डेटा चोरी और राजनीतिक प्रभाव अभियान शामिल हैं।
कैश और बेरी के खिलाफ मामले को 2024 में घोषित किए जाने पर जवाबी जासूसी में बड़ी सफलता बताया गया था। इनमें से एक व्यक्ति सांसदों को चीन नीति पर सलाह देता था। वर्गीकृत साक्ष्यों की समीक्षा के बाद क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने निष्कर्ष निकाला कि मौजूदा कानूनी ढांचों के तहत यह साबित करना असंभव होगा कि चीन की राज्य गतिविधियां ब्रिटेन के लिए खतरा थीं। इस नतीजे के बाद विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के बजाय बीजिंग के साथ राजनयिक संबंधों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया, जिसे सरकार ने खारिज किया है।
इस मामले के विफल होने से असल में यह उजागर हुआ कि जासूसी के एक अलग दौर के लिए बनाए गए मौजूदा कानून कितने नाकाफी हैं। जब आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की परिकल्पना की गई थी, तब जासूसी का मतलब गुप्त ठिकानों पर संदेश छोड़ना और माइक्रोफिल्म का इस्तेमाल करना था। आज इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बड़े पैमाने पर डेटा जुटाना और ऐसे प्रभाव अभियान शामिल हैं जो वैध अंतरराष्ट्रीय संबंधों और देश को भीतर से कमजोर करने के बीच की रेखा धुंधली कर देते हैं। ब्रिटिश अधिकारियों के सामने चुनौती सिर्फ जासूसों को पकड़ने की नहीं, बल्कि यह तय करने की भी है कि वैध अंतरराष्ट्रीय संबंध कहां खत्म होते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे कहां से शुरू होते हैं।
शीत युद्ध के मॉडल से आगे
एमआई5 के प्रमुख सर केन मैक्कलम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि चीनी खुफिया तंत्र को पुराने नजरिये से नहीं देखना चाहिए।
चीन राजनयिक आड़ में काम करने वाले पारंपरिक खुफिया अधिकारियों को जरूर तैनात करता है, लेकिन यह कहीं बड़ी व्यवस्था का केवल दिखने वाला सिरा है।कोशिश करें कि आप इसे सिर्फ जॉन ले कैरे की कहानियों की तरह दूतावास में तैनात, पहचान-पत्रधारी पारंपरिक जासूसों के नजरिये से न देखें।
चीन की खुफिया सेवाओं में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों को मिलाकर अनुमानित पांच लाख कर्मचारी हैं। यह विशाल पैमाना बीजिंग को ऐसे व्यापक स्तर पर खुफिया लक्ष्य साधने में सक्षम बनाता है, जो अधिकांश अन्य देशों की क्षमता से कहीं बढ़कर है। हालांकि, चीन के तरीके को वास्तव में अलग बनाता है जासूसी का आर्थिक रणनीति, राजनीतिक प्रभाव और सीमापार दमन के साथ एकीकरण।
कैश और बेरी मामले के विफल होने पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के एक उप-प्रमुख ने अपने गवाह बयान में कहा था,
फिर भी, यह विवरण मौजूदा अभियानों की परिष्कृत प्रकृति को पूरी तरह नहीं दर्शाता।चीनी खुफिया सेवाएं नीति-निर्माताओं, सरकारी कर्मचारियों और लोकतांत्रिक संस्थानों समेत कई स्रोतों से जानकारी हासिल करने में रुचि रखती हैं और जो भी जानकारी मिल सके, उसे जुटाने के लिए मौके का फायदा उठा सकती हैं।
हेडहंटर नेटवर्क
आधुनिक दौर की सबसे व्यापक रणनीतियों में से एक है पेशेवर नेटवर्किंग मंचों के जरिये लोगों को स्रोत के रूप में तैयार करना। नवंबर 2025 में एमआई5 ने सांसदों के लिए एक दुर्लभ दृश्य मार्गदर्शिका जारी की, जिसमें चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय (एमएसएस) द्वारा अपनाए जाने वाले खास तरीकों के बारे में चेताया गया। इस चेतावनी में भर्ती करने वाले हेडहंटर बनकर काम कर रहे लोगों की फर्जी लिंक्डइन प्रोफाइल की पहचान की गई और अमांडा चिउ तथा शर्ली शेन जैसे नामों का उल्लेख किया गया।
ये एजेंट संसदीय कर्मचारियों, अर्थशास्त्रियों, थिंक टैंक के कर्मचारियों और भू-राजनीतिक सलाहकारों को निशाना बनाते हैं। शुरुआत में वे मामूली दिखने वाली जानकारी के बदले अच्छी रकम देने की पेशकश करते हैं। इस रणनीति में लोगों से स्वतंत्र सलाहकार के रूप में काम करने और भू-राजनीतिक रिपोर्ट तैयार करने को कहा जाता है, फिर धीरे-धीरे मांग बढ़ाकर गोपनीय और अंदरूनी जानकारी मांगी जाती है। सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने हाउस ऑफ कॉमन्स को बताया कि ये गतिविधियां ब्रिटेन के संप्रभु हितों में दखल देने की गुप्त और सोची-समझी कोशिश हैं।
अकादमिक क्षेत्र भी इसी तरह के दबावों का सामना कर रहा है। एमआई5 ने पेशेवर नेटवर्किंग साइटों के जरिये ब्रिटिश अकादमिक विशेषज्ञों को लुभाने की लगातार कोशिशों का दस्तावेजीकरण किया है। इनका मकसद ऐसी तकनीक हासिल करना है जिसका सैन्य और नागरिक, दोनों तरह से इस्तेमाल हो सकता है। अमेरिका की खुफिया सेवा के पूर्व अधिकारी और द ग्रेट हीस्ट: चाइनाज़ एपिक कैंपेन टू स्टील अमेरिकाज़ सीक्रेट्स के सह-लेखक एंड्रयू बैजर ने चेताया है कि
जब बौद्धिक संपदा और कामकाज की मूल प्रक्रियाओं का ज्ञान लीक होता है, तो पूरा उद्योग उलट-पुलट हो सकता है।
साइबर अभियान और डेटा की भूख
मानव खुफिया अभियान जारी हैं, लेकिन साइबर जासूसी चीन की सबसे शक्तिशाली क्षमता है। अगस्त 2025 में ब्रिटेन ने आखिरकार सॉल्ट टाइफून अभियान में अपनी संलिप्तता की पुष्टि की। इस बेहद परिष्कृत अभियान ने दुनिया भर की दूरसंचार कंपनियों को निशाना बनाया था। जीसीएचक्यू की शाखा, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र (एनसीएससी) ने चेतावनी दी कि
इस गतिविधि के जरिये चुराया गया डेटा अंततः चीनी खुफिया सेवाओं को दुनिया भर में लक्ष्यों के संचार और आवाजाही की पहचान करने तथा उन पर नजर रखने की क्षमता दे सकता है।
सॉल्ट टाइफून चीन की राज्य-समर्थित साइबर गतिविधियों के व्यापक तंत्र का सिर्फ एक हिस्सा है। ऑबर्न यूनिवर्सिटी के मैक्रेरी इंस्टीट्यूट ने कई टाइफून समूहों की पहचान की है। इनमें वोल्ट टाइफून शामिल है, जो सिर्फ जासूसी करने के बजाय संभावित व्यवधान के लिए पहले से तैयारी करने हेतु अहम बुनियादी ढांचे में घुसपैठ करता है; और फ्लैक्स टाइफून, जो डेटा जुटाने के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स उपकरणों को निशाना बनाता है। ये समूह उन सुरक्षा खामियों का फायदा उठाते हैं जिनका पहले पता नहीं चला होता, और सिस्टम में पहले से मौजूद औजारों और प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
विशिष्ट जासूसी अभियानों से आगे बढ़कर, पश्चिमी सुरक्षा अधिकारी बीजिंग द्वारा बड़े पैमाने पर वित्तीय, निजी और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी वाले डेटा सेट जुटाने की कोशिश को लेकर चिंतित हैं। एनसीएससी के पूर्व प्रमुख सियारन मार्टिन कहते हैं कि
चीन ब्रिटेन के लोगों का आबादी-स्तर का डेटा जुटाने की कोशिश करता रहा है। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रशिक्षित करने, देश को बेहतर ढंग से समझने या यहां तक कि जनमत को प्रभावित करने में काम आ सकता है।
2024 में ब्रिटेन के निर्वाचन आयोग में सेंधमारी, जिसका आरोप चीन से जुड़े राज्य-समर्थित समूह एपीटी31 पर लगाया गया, इस बड़े पैमाने पर डेटा जुटाने की मंशा का उदाहरण थी। आधिकारिक आकलनों के अनुसार, इस हमले में उन सांसदों को निशाना बनाया गया था जो चीन की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों को उजागर करने के लिए मुखर रहे हैं। जीसीएचक्यू की निदेशक ऐन कीस्ट-बटलर ने कहा है कि
और यह भी स्वीकार किया है किअब हम चीन पर किसी भी अन्य एकल मिशन से अधिक संसाधन लगा रहे हैं,
चीन से ब्रिटेन को वास्तविक और बढ़ता हुआ साइबर खतरा है।
सीमापार दमन और प्रवासी समुदायों पर निगरानी
चीनी खुफिया संसाधनों का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश राज्य के रहस्य जुटाने के बजाय चीनी प्रवासी समुदायों को नियंत्रित करने और असहमति दबाने पर केंद्रित है। एमआई5 ने चेताया है कि हांगकांग पुलिस ने ब्रिटेन में शरण लिए एक दर्जन से अधिक लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं के खिलाफ इनाम घोषित किए हैं। तिब्बती अभियानकर्ताओं और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ उत्पीड़न और निगरानी की खबरें भी बढ़ी हैं।
सीमापार दमन का मकसद कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य लक्ष्य, घरेलू स्थिरता बनाए रखने, को साधना है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस गतिविधि का बड़ा हिस्सा विकेंद्रित और हैरानीजनक रूप से शौकिया ढंग से संचालित होता है। विदेश संवाददाताओं की रिपोर्टों के अनुसार, प्रांतीय पुलिस विभाग अक्सर विदेश में छोटे दल भेजते हैं, जिनके पास सीमित अनुभव होता है। वे प्रवासी समुदाय के सदस्यों को खुफिया जानकारी जुटाने वाले एजेंट के रूप में भर्ती करते हैं, जो स्वदेश में एहसान के बदले सूचना देते हैं। यह तरीका भले ही केंद्रीय नियंत्रण वाले जासूसी नेटवर्क की छवि को चुनौती देता हो, लेकिन इससे जोखिम में पड़े लोगों के लिए खतरा कम नहीं होता।
आर्थिक सुरक्षा की दुविधा
शायद सबसे जटिल चुनौती वैध आर्थिक जुड़ाव और रणनीतिक निर्भरता के बीच अंतर करना है। ब्रिटेन के 5जी बुनियादी ढांचे में हुआवेई की भूमिका पर बहस ने इस तनाव को स्पष्ट किया। चीनी उपकरण अक्सर सस्ते और तकनीकी रूप से बेहतर थे, लेकिन निर्भरता के कारण दबाव बनाए जाने का जोखिम पैदा हुआ। अगर बीजिंग उस तकनीक तक पहुंच रोक सकता है जिस पर रोजमर्रा की जिंदगी निर्भर है, तो उसे ब्रिटेन की विदेश नीति पर दबाव बनाने का मौका मिलता है।
यह दुविधा अहम खनिजों, इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखलाओं और परमाणु ऊर्जा के बुनियादी ढांचे तक फैली है। ब्रिटेन सरकार को आर्थिक विकास सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के बीच संतुलन साधना होगा। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन आर्थिक विकास में योगदान दे सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और निवेश अधिनियम 2021 तथा खरीद अधिनियम 2023 सरकार को सुरक्षा के आधार पर विदेशी अधिग्रहण रोकने और आपूर्तिकर्ताओं को बाहर करने की नई शक्तियां देते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल अब भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।
लंदन में पूर्व रॉयल मिंट की जगह प्रस्तावित चीनी दूतावास इन चिंताओं का केंद्र बन गया है। आलोचकों को डर है कि इस स्थान से भूमिगत डेटा केबलों पर निगरानी रखी जा सकती है, हालांकि कुछ सुरक्षा अधिकारी चीन की दूर से साइबर पहुंच हासिल करने की सिद्ध क्षमता को देखते हुए इस जोखिम को कमतर मानते हैं। दूतावास को मंजूरी देने या न देने का फैसला अभी लंबित है और यह मौजूदा सरकार के रुख की कसौटी बन गया है।
कानूनी ढांचा और बचाव के उपाय
ब्रिटेन ने इन विविध खतरों के खिलाफ अपना कानूनी शस्त्रागार मजबूत करने की कोशिश की है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 2023 ने जासूसी से जुड़े नए अपराध बनाए और विदेशी हस्तक्षेप पंजीकरण योजना (एफआईआरएस) स्थापित की। इसके तहत विदेशी शक्तियों के निर्देश पर काम करने वाले लोगों को राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी गतिविधियों का पंजीकरण कराना होता है। रूस और ईरान को इस योजना के सख्त स्तर में रखा गया है, जबकि चीन मानक स्तर पर है। इस फैसले की पूर्व कंजरवेटिव नेता सर इयान डंकन स्मिथ समेत सांसदों ने आलोचना की है।
बचाव के उपाय कानून तक सीमित नहीं हैं। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के 2026 की शुरुआत में चीन दौरे के समय उनकी टीम ने स्पाइवेयर इंस्टॉल होने से रोकने के लिए अस्थायी फोन, नए सिम कार्ड और अस्थायी ईमेल पतों का इस्तेमाल किया। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, कम से कम एक दशक से ऐसी सावधानियां सामान्य रही हैं। ये इस हकीकत को दिखाती हैं कि बीजिंग में संवेदनशील बातचीत ब्रिटिश दूतावास के सुरक्षित हिस्से तक सीमित रखनी पड़ती है। 2018 के एक दौरे के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे को एक बार छिपे हुए कैमरों से बचने के लिए रजाई के नीचे कपड़े पहनने की सलाह दी गई थी।
संतुलन साधने की चुनौती
ब्रिटिश नीति-निर्माताओं के सामने मूल चुनौती सुरक्षा चिंताओं और कूटनीतिक तथा आर्थिक जरूरतों के बीच तालमेल बैठाने की है। व्यापार, निवेश और जलवायु तकनीक से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक के क्षेत्रों में शोध सहयोग के लिए चीन के महत्व को देखते हुए ब्रिटेन उससे पूरी तरह नाता नहीं तोड़ सकता। लेकिन जुड़ाव से उन प्रभाव अभियानों के लिए रास्ते खुलते हैं जो लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए खतरा हैं।
अटलांटिक पार बदलते समीकरणों ने इस तनाव को और बढ़ाया है। जैसे-जैसे अमेरिका बीजिंग के प्रति अधिक आक्रामक रुख अपनाता है, वॉशिंगटन लंदन पर अपनी नीतियों के साथ तालमेल बैठाने का दबाव डालता है। ब्रिटेन परस्पर विरोधी मांगों के बीच फंसा है: घरेलू सुरक्षा की रक्षा और सहयोगियों को संतुष्ट करने के साथ चीनी बाजारों और तकनीक तक पहुंच बनाए रखना।
सर केन मैक्कलम ने चीन को
लेकिन सरकार द्वारा वादा किए गए और अब तक जारी न किए गए चीन ऑडिट जैसे स्पष्ट रूप से तय सार्वजनिक मानदंडों के अभाव में ब्रिटिश संस्थान असुरक्षित बने हुए हैं। एमआई5 प्रमुख ने बताया है कि पिछले वर्ष राज्य से जुड़े खतरे की गतिविधियों की जांच में 35% की बढ़ोतरी हुई है। इससे संकेत मिलता है कि समस्या, बचाव की क्षमता से भी तेज रफ्तार से बढ़ रही है।पूरी व्यवस्था के स्तर की चुनौती बताया है, जिसके जवाब में भी पूरी व्यवस्था के स्तर पर गहरी कार्रवाई की जरूरत है।
मुख्य बिंदु
- क्रिस्टोफर कैश और क्रिस्टोफर बेरी के खिलाफ मामला इसलिए विफल हुआ क्योंकि अभियोजक मौजूदा कानूनी परिभाषाओं के तहत यह साबित नहीं कर सके कि चीन से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा था। इससे ब्रिटेन के जासूसी कानूनों की खामियां उजागर हुईं।
- चीनी खुफिया तंत्र व्यापक तरीकों का इस्तेमाल करता है, जिनमें सांसदों और अकादमिकों को निशाना बनाने वाले लिंक्डइन के फर्जी हेडहंटर, बड़े पैमाने पर डेटा जुटाना और दूरसंचार कंपनियों में सेंध लगाने वाला सॉल्ट टाइफून जैसा साइबर अभियान शामिल है।
- एमआई5 ने चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय के एजेंटों द्वारा पेशेवर नेटवर्किंग साइटों के जरिये संसदीय कर्मचारियों और शोधकर्ताओं को स्वतंत्र सलाहकार के काम की पेशकश के साथ भर्ती करने की कोशिशों पर खास चेतावनी जारी की है।
- सीमापार दमन के तहत इनाम घोषित करके और उत्पीड़न के जरिये ब्रिटेन में रह रहे हांगकांग के कार्यकर्ताओं तथा तिब्बती अभियानकर्ताओं को निशाना बनाया जाता है, जबकि साइबर अभियान भविष्य में संभावित व्यवधान की तैयारी के लिए अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हैं।
- ब्रिटेन सरकार के सामने चीन के साथ आर्थिक जुड़ाव और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों के बीच संतुलन साधने की रणनीतिक दुविधा है। उसे बीजिंग और वॉशिंगटन, दोनों के दबावों के बीच विश्वविद्यालयों, संसद और अहम बुनियादी ढांचे की रक्षा करनी है।






