सिंगापुर का पहला एआई नैनोउपग्रह: अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में 200 मिलियन डॉलर की छलांग

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सिंगापुर का पहला एआई नैनोउपग्रह: अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में 200 मिलियन डॉलर की छलांग

कक्षा में नई शुरुआत

सिंगापुर 2026 में अपना पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित नैनोउपग्रह प्रक्षेपित करने की तैयारी कर रहा है। यह वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी ताकत बनने की नगर-राज्य की मुहिम में एक निर्णायक पड़ाव होगा। जूते के डिब्बे के आकार का यह छोटा अंतरिक्षयान उन्नत एज कंप्यूटिंग क्षमताओं से लैस होगा। इससे यह पृथ्वी से 500 किलोमीटर ऊपर कक्षा में रहते हुए तस्वीरों का विश्लेषण और डेटा की छंटाई कर सकेगा। कच्ची, असंसाधित तस्वीरें भेजने के बजाय यह केवल जरूरी जानकारी ही धरती पर स्थित केंद्रों तक पहुंचाएगा।

विषय-सूची
  1. कक्षा में नई शुरुआत
  2. मिशन के पीछे की बुद्धिमत्ता
  3. नवाचार की त्रयी
  4. स्मार्ट डेटा प्रसंस्करण और नई ऊर्जा प्रणालियां
  5. उन्नत प्रणोदन और सामग्री परीक्षण
  6. अगली पीढ़ी की ऑप्टिकल इमेजिंग
  7. राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम का निर्माण
  8. प्रयोगशाला से व्यावसायिक उपयोग तक
  9. मुख्य बातें

यह मिशन सिंगापुर के स्पेस एक्सेस प्रोग्राम के तहत पहली परियोजना है। यह राष्ट्रीय स्पेस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट प्रोग्राम का अहम हिस्सा है, जिसके लिए 2022 से सरकार 200 मिलियन सिंगापुर डॉलर से अधिक की राशि देने की प्रतिबद्धता जता चुकी है। यह पहल छोटे और अधिक बुद्धिमान उपग्रहों की ओर रणनीतिक बदलाव का संकेत है। ये उपग्रह धरती पर मौजूद कंप्यूटिंग शक्ति पर निर्भर साधारण डेटा-संग्राहक होने के बजाय कक्षा में ही जानकारी संसाधित करेंगे।

नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी का सैटेलाइट रिसर्च सेंटर इस परियोजना का नेतृत्व कर रहा है और 3U नैनोउपग्रह बनाने के लिए स्थानीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी साटोरो स्पेस के साथ काम कर रहा है। केवल 30 सेंटीमीटर लंबा, 10 सेंटीमीटर चौड़ा और 10 सेंटीमीटर ऊंचा यह अंतरिक्षयान 5 किलोग्राम से कम वजनी होगा। क्यूबसैट प्रारूप का यह उपग्रह अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच डेटा के आदान-प्रदान का तरीका बदलने का वादा करता है। इससे आपदा प्रतिक्रिया से लेकर पर्यावरण निगरानी तक के अनुप्रयोगों में बदलाव आ सकता है और अंतरिक्ष प्रणालियों में सिंगापुर की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता भी प्रदर्शित होगी।

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मिशन के पीछे की बुद्धिमत्ता

पारंपरिक उपग्रह बाहरी स्टोरेज वाले डिजिटल कैमरों की तरह काम करते हैं। वे बड़ी मात्रा में कच्ची तस्वीरें लेते हैं और प्रसंस्करण के लिए सब कुछ धरती पर भेजते हैं। इस तरीके से बड़ी अड़चनें पैदा होती हैं, जो परिचालन क्षमता को सीमित करती हैं। पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रह हर 100 मिनट के चक्कर के दौरान केवल करीब 10 मिनट तक ही भू-केंद्रों के संपर्क में रहते हैं। वहीं, कच्ची उपग्रह तस्वीरों का डेटा रोजाना कई गीगाबाइट तक जमा हो सकता है, जिससे सीमित बैंडविड्थ पर दबाव पड़ता है और तस्वीर लेने तथा उनसे उपयोगी जानकारी हासिल करने के बीच देरी होती है।

नया एआई-संचालित उपग्रह एज कंप्यूटिंग के जरिए इन सीमाओं का समाधान करता है। इस तकनीक में कच्ची जानकारी दूरस्थ सर्वरों तक भेजने के बजाय डेटा का प्रसंस्करण उसके स्रोत पर ही किया जाता है। उपग्रह में मौजूद कृत्रिम बुद्धिमत्ता तस्वीरों का वास्तविक समय में विश्लेषण करेगी, बादलों से ढकी और साफ तस्वीरों में फर्क करेगी, जंगल की आग या तेल रिसाव जैसी आपात घटनाओं की पहचान करेगी और भारी मात्रा में डेटा भेजने के बजाय केवल कार्रवाई योग्य जानकारी प्रसारित करेगी।

सैटेलाइट रिसर्च सेंटर के कार्यकारी निदेशक लिम वी सेंग ने इस तरीके के परिचालन लाभ बताए।

सब कुछ धरती पर भेजने के बजाय, उपग्रह अपने भीतर ही फैसले कर सकता है, जानकारी को छांट और उसका विश्लेषण कर सकता है तथा केवल कच्चा डेटा नहीं, बल्कि उपयोगी जानकारी भेज सकता है। इससे देरी में भारी कमी आती है और अंतरिक्ष प्रणालियां कहीं अधिक कुशल बनती हैं। बुद्धिमान उपग्रह यह तय कर सकते हैं कि कौन-सी जानकारी महत्वपूर्ण है, ताकि अंतरिक्ष की सीमित बैंडविड्थ का इस्तेमाल शोर नहीं, बल्कि जवाब पहुंचाने में हो।

इसका व्यावहारिक असर काफी बड़ा है। कच्ची तस्वीरों के सैकड़ों मेगाबाइट या गीगाबाइट भेजने के बजाय उपग्रह संक्षिप्त नतीजे प्रसारित कर सकता है। इनमें प्रमुख स्थान-निर्देशांक, तस्वीरों के विश्लेषण का सार और चुनी हुई तस्वीरों के छोटे हिस्से शामिल हो सकते हैं, जिनका कुल आकार केवल कुछ किलोबाइट या कुछ मेगाबाइट होगा। भूकंप के बाद राहत कार्यों या समुद्री आपदा प्रतिक्रिया जैसे समय-संवेदी हालात में यह दक्षता बेहद अहम है। ऐसे मामलों में तेज फैसले जान और संसाधन बचाते हैं, जबकि संचार के अवसर कम समय के लिए ही उपलब्ध होते हैं।

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नवाचार की त्रयी

एआई नैनोउपग्रह, स्पेस एक्सेस प्रोग्राम के तहत नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू) की घोषित तीन परियोजनाओं में से एक है। हर मिशन अलग तकनीकी क्षेत्र पर केंद्रित है। इन्हें 2026 से 2028 के बीच हर साल प्रक्षेपित करने की योजना है। इसके अलावा एक पेलोड अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजा जाएगा, जहां कक्षा में कामकाज के कठोर वातावरण में सिंगापुर की ऑप्टिकल तकनीक की क्षमता परखी जाएगी।

स्मार्ट डेटा प्रसंस्करण और नई ऊर्जा प्रणालियां

2026 का प्रमुख मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रायोगिक सौर तकनीक को एक साथ लाएगा। एज कंप्यूटिंग क्षमताओं के अलावा, उपग्रह अगली पीढ़ी की पेरोव्स्काइट सौर कोशिकाओं का परीक्षण करेगा। इन्हें एनटीयू के स्कूल ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग और स्थानीय स्टार्टअप सिंगफिल्म ने मिलकर विकसित किया है। पारंपरिक सिलिकॉन पैनलों की तुलना में इन कोशिकाओं के कई फायदे हैं: इनका निर्माण सस्ता और आसान है तथा इन्हें हल्के, लचीले आधार पर प्रिंट किया जा सकता है। यह छोटे अंतरिक्षयानों के लिए उपयोगी है, जहां हर ग्राम वजन प्रक्षेपण की लागत को प्रभावित करता है।

पेरोव्स्काइट सौर कोशिकाओं में जैविक-अकार्बनिक मिश्रित संरचनाओं का इस्तेमाल होता है। इन्हें सिलिकॉन कोशिकाओं के लिए जरूरी ऊर्जा-खपत वाली क्रिस्टल-विकास प्रक्रिया के बजाय साधारण प्रिंटिंग तकनीकों से बनाया जा सकता है। निर्माण में यह लचीलापन कोशिकाओं को हल्के और लचीले आधारों पर लगाने की सुविधा देता है, जिससे अंतरिक्षयान का कुल वजन घटता है। कक्षा में किया जाने वाला परीक्षण यह जानने के लिए अहम डेटा देगा कि लगातार विकिरण और तापमान में भारी उतार-चढ़ाव से ये सामग्री कैसे खराब होती है। भविष्य में उपग्रह समूहों में व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले यह जानकारी जरूरी है।

साटोरो स्पेस के अध्यक्ष मेवरिक शिह ने इन क्षमताओं को आगे बढ़ाने में स्थानीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

हम एनटीयू की संयुक्त परियोजना का हिस्सा बनकर बहुत खुश हैं। एनटीयू के सैटेलाइट रिसर्च सेंटर और साटोरो के बीच सहयोग से हमें न केवल विश्वसनीय और प्रमाणित क्यूबसैट समाधान विकसित करने का मौका मिलता है, बल्कि सिंगापुर में SaRC के साथ स्थानीय स्तर पर परियोजना लागू करने का अवसर भी मिलता है। इससे सिंगापुर के शोध संस्थानों को अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तेजी से विकसित करने में मदद मिलती है।

उन्नत प्रणोदन और सामग्री परीक्षण

दूसरी परियोजना 2028 के लिए निर्धारित है। इसमें 16U का बड़ा नैनोउपग्रह भेजा जाएगा, जो 40 सेंटीमीटर लंबा, 30 सेंटीमीटर चौड़ा और 30 सेंटीमीटर ऊंचा होगा तथा इसका वजन 30 किलोग्राम तक होगा। यह अंतरिक्षयान एनटीयू से निकली कंपनी एलियना के विकसित MUlti-Stage Ignition Compact इंजन का परीक्षण करेगा। यह इंजन गैस प्रणोदक को आयनित करने और कुशल तरीके से जोर पैदा करने के लिए आयनों को गति देने में विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों का इस्तेमाल करता है। MUSIC इंजन ग्रिडयुक्त आयन थ्रस्टर है, जो रासायनिक रॉकेटों की तुलना में ईंधन का अधिक कुशल इस्तेमाल करता है। विद्युतस्थैतिक ग्रिडों से आयनों को गति देकर यह प्रणाली विशिष्ट आवेग हासिल करती है, जो ईंधन दक्षता का माप है और पारंपरिक थ्रस्टरों से कई गुना अधिक है। इस दक्षता से छोटे उपग्रह कम प्रणोदक खर्च करके अपनी कक्षा बदल सकते हैं, मलबे से बच सकते हैं या अपनी स्थिति बनाए रख सकते हैं। इससे उनका परिचालन जीवन बढ़ता है और ऐसे नए मिशन संभव होते हैं, जो पहले केवल बड़े अंतरिक्षयानों के लिए उपलब्ध थे।

एलियना के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. लिम जियान वेई ने कहा कि कक्षा में उपग्रहों की संख्या बढ़ने के साथ ऐसी क्षमताओं की जरूरत भी बढ़ रही है।

पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों की संख्या बढ़ने के साथ कक्षा में उन्नत गतिशीलता अब वैकल्पिक नहीं रही। इससे अंतरिक्ष के नए उपयोगों के लिए जरूरी मिशन की संभावनाएं खुलती हैं और उपग्रह समूहों के प्रभावी तथा टिकाऊ संचालन के लिए यह अनिवार्य है।

इस उपग्रह में एनटीयू की टेमासेक प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित एक परमाणु ऑक्सीजन डिटेक्टर भी होगा। इससे यह अध्ययन किया जाएगा कि उन्नत सामग्री पृथ्वी की बहुत निचली कक्षा में अत्यधिक संक्षारक परमाणु ऑक्सीजन का सामना कैसे करती है। ऊपरी वायुमंडल में पराबैंगनी विकिरण ऑक्सीजन अणुओं को तोड़ता है, जिससे एकल ऑक्सीजन परमाणु बनते हैं। ये परमाणु अंतरिक्षयान की सामग्री के साथ तीव्र प्रतिक्रिया करके उसे घिसते और खराब करते हैं। इस क्षेत्र में सामग्री की टिकाऊपन को समझना लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्षयानों के डिजाइन के लिए अहम है। कम ऊंचाई पर वायुमंडलीय खिंचाव अधिक होता है, लेकिन अवलोकन का रिजॉल्यूशन बेहतर रहता है।

अगली पीढ़ी की ऑप्टिकल इमेजिंग

तीसरी पहल के तहत सिंगापुर में विकसित LEOCAM नाम का इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग पेलोड छह महीने के परीक्षण मिशन के लिए 2027 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजा जाएगा। पारंपरिक लेंस के बजाय अनोखे तीन-दर्पण वाले ऑप्टिकल डिजाइन का इस्तेमाल करने वाला LEOCAM उच्च-रिजॉल्यूशन वाली पृथ्वी-अवलोकन क्षमता देने का वादा करता है। इसका हर पिक्सेल जमीन पर एक मीटर जितनी छोटी जगह का विवरण दर्ज कर सकेगा। दर्पण आधारित यह तरीका अपवर्तक लेंस प्रणालियों की तुलना में ऑप्टिकल विकृति और वजन कम करता है, जबकि तस्वीर की स्पष्टता बनी रहती है।

लाइटहाउस फोटोनिक्स के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. फुआ पो बून ने स्थानीय उद्योग के विकास के लिए इसके महत्व को रेखांकित किया।

हम अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने ऑप्टिकल इमेजिंग पेलोड का परीक्षण करने को लेकर उत्साहित हैं। यह लाइटहाउस के लिए एक अहम पड़ाव होगा, क्योंकि हम अंतरिक्ष-आधारित ऑप्टिकल प्रणाली बनाने वाली पहली सिंगापुर की कंपनी हैं।

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राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम का निर्माण

ये तकनीकी प्रगति ऐसे संस्थागत परिदृश्य में हो रही है जो तेजी से बदल रहा है और सिंगापुर के बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रबंधन के तरीके को नया रूप दे रहा है। 1 अप्रैल 2026 को सिंगापुर औपचारिक रूप से नेशनल स्पेस एजेंसी ऑफ सिंगापुर की स्थापना करेगा। यह एजेंसी स्पेस टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्री कार्यालय के पहले के कामों को समेटेगी और उनका विस्तार करेगी। यह नई एजेंसी ऐसे समय में शुरू होगी, जब वैश्विक अंतरिक्ष बाजार 2035 तक 2.43 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इससे नगर-राज्य को इस बढ़ती अर्थव्यवस्था में अपना हिस्सा हासिल करने का मौका मिलेगा।

इस संगठन का नेतृत्व नियुक्त मुख्य कार्यकारी नामित ङिअम ली ना करेंगी। उन्हें सार्वजनिक सेवा का 25 साल का अनुभव है और वे डीएसओ नेशनल लेबोरेटरीज तथा डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी में नेतृत्व की भूमिकाएं निभा चुकी हैं। इससे पहले वे पृथ्वी-अवलोकन उपग्रहों और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा आपदा राहत के लिए डिजिटल समाधानों के विकास की देखरेख कर चुकी हैं। एजेंसी को स्पेस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए निर्धारित 200 मिलियन सिंगापुर डॉलर से अधिक के अनुसंधान बजट की जिम्मेदारी मिलेगी। साथ ही उसे राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून बनाने, लाइसेंस प्रक्रिया के समन्वय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बढ़ाने का अधिकार भी मिलेगा, खासकर भूमध्यरेखीय पट्टी और आसियान के उभरते अंतरिक्ष देशों के साथ।

सिंगापुर के अंतरिक्ष क्षेत्र में फिलहाल करीब 70 कंपनियां और 2,000 पेशेवर शामिल हैं। एनएसएएस के समन्वय और लगातार मिलने वाली फंडिंग से अधिकारी भू-स्थानिक विश्लेषण, जलवायु निगरानी, समुद्री निगरानी और अंतरिक्ष स्थिति-जागरूकता के क्षेत्रों में अवसर बढ़ाना चाहते हैं। एजेंसी कक्षीय मलबे और टक्कर के बढ़ते जोखिमों पर भी काम करेगी। इसके लिए अंतरिक्ष स्थिति-जागरूकता क्षमताएं विकसित की जाएंगी, ताकि तेजी से भीड़भाड़ वाली कक्षाओं में मौजूद परिसंपत्तियों की सुरक्षा हो सके।

एनटीयू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रोफेसर वॉरेन चान ने विश्वविद्यालय के प्रयासों को राष्ट्रीय रणनीति से जोड़ा।

यह नया कार्यक्रम दिखाता है कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां तेजी से विकास और अधिक स्मार्ट संचालन की दिशा में बढ़ रही हैं। दो दशक से अधिक के अनुभव के साथ एनटीयू ने उपग्रह प्रौद्योगिकी को तेजी से और किफायती ढंग से सह-विकसित करने तथा तैनात करने का मजबूत रिकॉर्ड बनाया है। कक्षा में एआई क्षमताएं विकसित करने से धरती पर आधारित प्रसंस्करण पर निर्भरता घटती है और अधिक तेज तथा समझदारी भरे फैसले संभव होते हैं। अधिक चुस्त और प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष इकोसिस्टम बनाने की दिशा में यह सिंगापुर के लिए रणनीतिक लाभ है। इससे हमारे साझेदारों को नवाचार जल्द बाजार में लाने में भी मदद मिलेगी।

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प्रयोगशाला से व्यावसायिक उपयोग तक

इन मिशनों में प्रदर्शित प्रौद्योगिकियां शोध के लिहाज से तत्काल उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन इनके पूर्ण व्यावसायीकरण के लिए और विकास तथा परीक्षण जरूरी हैं। लिम वी सेंग ने बताया कि एआई उपग्रह की अत्याधुनिक प्रणालियों को बाजार तक लाने में कई साल लगेंगे। फिर भी, कक्षा में किए जाने वाले ये परीक्षण निवेश आकर्षित करने और वास्तविक अंतरिक्ष वातावरण में प्रदर्शन को प्रमाणित करने की जरूरी नींव रखते हैं। वहां विकिरण, निर्वात और तापमान में लगातार बदलाव जैसी चुनौतियां हैं, जिनकी धरती पर पूरी तरह नकल करना संभव नहीं।

सिंगापुर ऐसे क्षेत्र में कदम रख रहा है, जहां इसी तरह की क्षमताएं पहले ही कारगर साबित हो चुकी हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के फाइसेट-1 क्यूबसैट ने, जिसे करीब 2020 में प्रक्षेपित किया गया था, बादलों से ढकी तस्वीरों को छांटने के लिए ऑनबोर्ड मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करते हुए अग्रणी भूमिका निभाई थी। इससे छोटे उपग्रहों में एज कंप्यूटिंग की अवधारणा का प्रमाण मिला। सिंगापुर की पहल इन क्षमताओं का विस्तार करते हुए नई ऊर्जा प्रणालियों को शामिल करती है और विश्वविद्यालयों तथा निजी कंपनियों के बीच साझेदारी के जरिए स्थानीय व्यावसायिक क्षमता को बढ़ावा देती है।

समुद्री निगरानी ऐसा क्षेत्र है जहां उपग्रह में मौजूद एआई के स्पष्ट फायदे मिल सकते हैं। जहाजों के मार्गों पर नजर रखने, अवैध मछली पकड़ने का पता लगाने और तेल रिसाव पर निगरानी के लिए तुरंत अलर्ट जारी करना जरूरी है। मौजूदा प्रणालियों में अक्सर कच्चे डेटा को भू-केंद्रों पर संसाधित किए जाने तक महत्वपूर्ण सूचनाएं कई घंटे देर से मिलती हैं। सिंगापुर की पहल का लक्ष्य तस्वीर लेने के कुछ ही मिनटों में कार्रवाई योग्य जानकारी देना है, ताकि घटनाएं जारी रहने के दौरान अधिकारी प्रतिक्रिया पोत या विमान भेज सकें, न कि बाद में जांच करें।

इसी तरह, डेटा का चुनिंदा प्रसारण जलवायु निगरानी के लिए भी उपयोगी है। वनों की कटाई पर नजर रखना, कृषि की स्थिति का आकलन करना या शहरी ताप द्वीपों की निगरानी करना बड़ी तस्वीर लाइब्रेरी तैयार करता है। तत्काल नीतिगत फैसलों के लिए इनमें केवल असामान्य घटनाएं या बदलाव मायने रखते हैं। एआई की छंटाई क्षमता से जमीनी टीमों को जंगल की नई कटाई या फसलों पर दबाव के बारे में अलर्ट मिलेंगे और उन्हें स्थिर स्थिति दिखाने वाली हजारों सामान्य तस्वीरों को खंगालना नहीं पड़ेगा। इस लक्षित तरीके से स्टोरेज की लागत और विश्लेषकों का काम घटेगा, साथ ही पर्यावरणीय बदलावों पर प्रतिक्रिया तेज होगी।

मुख्य बातें

  • सिंगापुर 2026 में अपना पहला एआई-संचालित नैनोउपग्रह प्रक्षेपित करेगा। यह संचार की अड़चनें घटाने और आपात स्थितियों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए कक्षा में ही डेटा संसाधित और छांट सकेगा।
  • साटोरो स्पेस द्वारा निर्मित और एनटीयू के सैटेलाइट रिसर्च सेंटर के नेतृत्व में तैयार 3U क्यूबसैट 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक साल के मिशन के दौरान एज कंप्यूटिंग एआई और पेरोव्स्काइट सौर कोशिकाओं का परीक्षण करेगा।
  • दो अन्य परियोजनाओं में 2028 में एलियना के MUSIC आयन इंजन से प्रणोदन प्रणाली का परीक्षण और 2027 में LEOCAM ऑप्टिकल इमेजिंग पेलोड का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन मिशन शामिल है।
  • नेशनल स्पेस एजेंसी ऑफ सिंगापुर 1 अप्रैल 2026 को शुरू होगी। यह स्पेस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट प्रोग्राम की 200 मिलियन सिंगापुर डॉलर से अधिक की फंडिंग और राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून की देखरेख करेगी।
  • इन पहलों का लक्ष्य 2035 तक 2.43 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमानित वैश्विक अंतरिक्ष बाजार है। इनके तात्कालिक उपयोगों में आपदा प्रतिक्रिया, समुद्री निगरानी और पर्यावरण की निगरानी शामिल हैं।
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