क्षमता में उछाल से बदलता मलेशिया
मलेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया के इतिहास में बुनियादी ढांचे के सबसे नाटकीय विस्तारों में से एक का अनुभव कर रहा है। 2026 के अंत तक देश की डेटा सेंटर क्षमता दोगुने से भी अधिक होने वाली है। रियल एस्टेट समूह जोन्स लैंग लासेल (JLL) के नए शोध के अनुसार, इस उछाल से मलेशिया एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर बाजार बन गया है। दक्षिण-पूर्व एशिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में निर्माणाधीन कुल डेटा सेंटर क्षमता के दो-तिहाई से अधिक हिस्से पर मलेशिया का कब्जा है।
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आंकड़े इस बदलाव का पैमाना दिखाते हैं। 2025 में 6.14 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य वाला मलेशिया का डेटा सेंटर बाजार 2031 तक बढ़कर 11.40 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 10.86% रहने की संभावना है। देश में फिलहाल करीब 51 चालू कोलोकेशन डेटा सेंटर हैं और यहां क्षमता का विस्तार सिंगापुर तथा हांगकांग जैसे पारंपरिक क्षेत्रीय केंद्रों से भी तेज गति से हो रहा है। यह वृद्धि केवल डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं है, बल्कि वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियां एशियाई बाजार को किस तरह देखती हैं, उसमें बुनियादी बदलाव का संकेत है।
यह विस्तार वैश्विक निवेश के अभूतपूर्व दौर के साथ हो रहा है। JLL के वैश्विक परिदृश्य के मुताबिक, 2026 से 2030 के बीच दुनिया भर में करीब 100 गीगावाट की नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़ी जाएगी, जिससे वैश्विक क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी। इस पृष्ठभूमि में मलेशिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कंप्यूटिंग के ढांचे का अहम केंद्र बनकर उभरा है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन, बाइटडांस, एनवीडिया और अलीबाबा यहां निवेश कर रहे हैं।
मलेशिया इस क्षेत्र का पसंदीदा डेटा सेंटर केंद्र क्यों बना
कई कारकों के एक साथ आने से डेटा सेंटर के क्षेत्र में मलेशिया का तेजी से उभार हुआ है। इसका सबसे तात्कालिक कारण सिंगापुर में डेटा सेंटर की नई परियोजनाओं पर तीन साल की रोक थी। इसके बाद शहर-राज्य ने हरित डेटा सेंटरों के लिए कड़े मानक लागू किए, जिससे पारंपरिक क्षेत्रीय केंद्र में विस्तार की गुंजाइश सीमित हो गई। महामारी के दौरान वैश्विक क्लाउड सेवाओं का इस्तेमाल तेज हुआ तो सिंगापुर के वित्तीय और तकनीकी तंत्र के करीब रहना चाहने वाली कंपनियों को मलेशिया एक आकर्षक विकल्प लगा।
भौगोलिक स्थिति मलेशिया को स्वाभाविक बढ़त देती है। दक्षिणी राज्य जोहोर सिंगापुर से एक संकीर्ण जलडमरूमध्य के पार है। वहां जमीन आसानी से उपलब्ध है और लागत कम है, जबकि व्यापक दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार को सेवाएं देने के लिए जरूरी कम विलंबता का लाभ भी मिलता है। मलेशिया का निर्धारित प्रौद्योगिकी शहर साइबरजया में 22 से अधिक डेटा सेंटर पहले से हैं और नौ अन्य केंद्रों की योजना है। इससे देश के प्रमुख डिजिटल बुनियादी ढांचा केंद्र के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हुई है।
लागत में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी एक बड़ा आकर्षण है। मलेशिया में निर्माण लागत प्रति मेगावाट 80 लाख से 1 करोड़ डॉलर के बीच है, जो सिंगापुर की तुलना में काफी कम है। यह अंतर संचालन लागत में भी दिखता है, हालांकि हाल के नीतिगत बदलाव तस्वीर बदल रहे हैं। जुलाई 2025 में मलेशिया ने डेटा सेंटरों के लिए विशेष बिजली दरें लागू कीं। 100 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले केंद्रों को अति-उच्च वोल्टेज श्रेणी में रखा गया है और उन्हें प्रति केंद्र सालाना 1.5 करोड़ से 2 करोड़ डॉलर तक की संभावित अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सरकार ने 2021 के कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोडमैप के जरिए इन निवेशों को सक्रिय रूप से आकर्षित किया है। इस रोडमैप में राष्ट्रीय एआई तंत्र को 2030 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करने के लिए जरूरी बताया गया है। 2026 के राज्य बजट में एक संप्रभु एआई क्लाउड बनाने के लिए 2 अरब रिंगिट (करीब 49 करोड़ अमेरिकी डॉलर) आवंटित किए गए। यह एआई से जुड़े अनुसंधान, विकास, व्यावसायीकरण और नवाचार पहलों के लिए की गई 5.9 अरब रिंगिट की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
बुनियादी ढांचे पर दबाव से विकास को खतरा
आशावादी अनुमानों के बावजूद मलेशिया का डेटा सेंटर उछाल ठोस भौतिक सीमाओं से टकरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने मलेशिया को वैश्विक ऊर्जा प्रणालियों पर दबाव के अहम केंद्र के रूप में चिह्नित किया है। एजेंसी के मुताबिक, 2030 तक देश में बिजली की मांग में होने वाली वृद्धि का पांचवां हिस्सा डेटा सेंटरों से आ सकता है। इस अनुमान के अनुसार, जापान और अमेरिका के साथ मलेशिया भी उन देशों में शामिल है जहां एआई आधारित कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचा ऊर्जा खपत के तौर-तरीकों को सबसे अधिक बदलेगा।
जमीनी स्तर पर संसाधनों पर पहले से ही दबाव है। जोहोर और सेलांगोर में पानी की कमी के कारण राज्य अधिकारियों ने नए डेटा सेंटरों के निर्माण की मंजूरी देने की रफ्तार धीमी कर दी है। डेटा सेंटरों के शीतलन तंत्र में भारी मात्रा में पानी लगता है। एआई के लिए अनुकूलित एक केंद्र रोजाना 20 लाख लीटर तक पानी इस्तेमाल कर सकता है। क्षेत्र के सबसे बड़े निवेशकों में शामिल माइक्रोसॉफ्ट ने अपने आंतरिक अनुमानों में कहा है कि डेटा सेंटरों के लिए उसकी वैश्विक जल जरूरत 2030 तक 150% बढ़ सकती है। हालांकि, नई जल संरक्षण तकनीकें अपनाने के बाद कंपनी ने अपने अनुमानों को घटाया है।
बिजली की उपलब्धता इससे भी बड़ी चुनौती है। मलेशिया का बिजली ग्रिड मुख्य रूप से कोयले और प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। इससे देश की शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं और नए केंद्रों को बिजली देने की जरूरत के बीच टकराव पैदा हो रहा है। सरकार ने डेटा सेंटरों की मांग पूरी करने के लिए 2030 तक गैस से चलने वाली छह से आठ गीगावाट क्षमता जोड़ने की योजना बनाई है। इससे देश के कार्बन-गहन ऊर्जा मार्ग पर लंबे समय तक टिके रहने का जोखिम है। लागत भी बढ़ रही है। JLL के अनुसार, 2026 में वैश्विक स्तर पर निर्माण लागत 6% बढ़कर प्रति मेगावाट 1.13 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। मुद्रास्फीति और नियामकीय बदलावों के चलते मलेशिया में लागत साल-दर-साल 5-7% बढ़ रही है।
प्रमुख बाजारों में बिजली ग्रिड से जुड़ने के लिए अब चार साल से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में संचालक ग्रिड के पीछे बिजली की सीधी व्यवस्था और परिसर में बैटरी भंडारण के विकल्प तलाश रहे हैं। ग्रिड पर दबाव कम करने में प्राकृतिक गैस की अहम भूमिका रहने का अनुमान है, हालांकि कुछ हाइपरस्केलर स्थिरता संबंधी चिंताओं के चलते इन समाधानों को स्वीकार नहीं करते। इसके जवाब में, मलेशिया डिजिटल इकोनॉमी कॉरपोरेशन (MDEC) के तहत मलेशिया के हरित डेटा सेंटर दिशानिर्देश बड़े पैमाने की परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अनिवार्य करते हैं और ऊर्जा-कुशल बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहित करते हैं।
संप्रभुता का सवाल: मेजबानी या स्वामित्व
मलेशिया की डेटा सेंटर रणनीति विदेशी निवेश आकर्षित करने और तकनीकी संप्रभुता हासिल करने के बीच बुनियादी तनाव दिखाती है। देश ने अंतरराष्ट्रीय हाइपरस्केलर कंपनियों के लिए मेजबान के रूप में सफलतापूर्वक अपनी जगह बनाई है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे मलेशिया एआई क्रांति में सक्रिय भागीदार बनने के बजाय केवल बुनियादी ढांचा मुहैया कराने वाला देश बनकर रह सकता है।
सरकार की संप्रभु एआई क्लाउड पहल का उद्देश्य यह असंतुलन दूर करना है। इसके तहत एआई मॉडल मलेशिया की जमीन पर और घरेलू निगरानी में प्रशिक्षित, संग्रहित और तैनात किए जा सकेंगे। हालांकि, इस उद्देश्य के लिए आवंटित 2 अरब रिंगिट अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के मुकाबले बहुत कम हैं। ओपनएआई ने अगले दशक में कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे में 1.4 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर निवेश करने की मंशा जताई है, जबकि मेटा ने 2028 तक अमेरिकी बुनियादी ढांचे में 60 हजार करोड़ डॉलर से अधिक निवेश की प्रतिबद्धता की है। पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने जनवरी 2025 में एआई बुनियादी ढांचे के लिए निजी क्षेत्र से 50 हजार करोड़ डॉलर तक के निवेश की घोषणा की थी।
विश्लेषण के अनुसार, मलेशिया में डेटा सेंटरों से जुड़े कई मौजूदा निवेश मॉडल प्रशिक्षण के बजाय अनुमान (मॉडल का उपयोग) पर केंद्रित हैं। प्रशिक्षण के लिए कहीं अधिक कंप्यूटिंग शक्ति और विशेष चिपों की जरूरत होती है। अनुमान संबंधी केंद्र आर्थिक मूल्य पैदा करते हैं, लेकिन इससे मलेशिया उन "कंप्यूट-नॉर्थ" देशों की श्रेणी में नहीं पहुंचता जो उन्नत एआई मॉडल के विकास की दिशा तय करते हैं। यह अंतर अहम है, क्योंकि प्रशिक्षण केंद्र आम तौर पर तकनीकी ज्ञान का अधिक प्रसार करते हैं और उच्च कौशल वाले रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करते हैं।
एशिया-प्रशांत डेटा सेंटर एसोसिएशन का अनुमान है कि मलेशिया का एआई उद्योग 2030 तक हर साल 30,900 नौकरियां पैदा करेगा। इनमें नेटवर्क इंजीनियर, क्लाउड बुनियादी ढांचा विशेषज्ञ और आईसीटी सुरक्षा पेशेवरों के उच्च-मूल्य वाले पद शामिल हैं। हालांकि, शोध बताता है कि प्रमुख प्रकार की किसी भी अन्य सुविधा की तुलना में डेटा सेंटर प्रति वर्ग फुट सबसे कम नौकरियां पैदा करते हैं। निर्माण के दौरान इनमें हजारों लोग काम करते हैं, लेकिन संचालन के दौरान कर्मचारियों की संख्या 200 से कम होती है। इस बात पर चिंता बढ़ रही है कि अनुसंधान और इंजीनियरिंग के पद विदेशी कामगारों को मिलेंगे, जबकि स्थानीय लोगों को अस्थायी निर्माण कार्य और रखरखाव के निचले स्तर के पदों तक सीमित कर दिया जाएगा।
वैश्विक कंपनियों ने दांव लगाया
माइक्रोसॉफ्ट मलेशिया के डिजिटल बुनियादी ढांचे में सबसे आक्रामक निवेशकों में शामिल है। कंपनी ने जोहोर बाहरू में "साउथईस्ट एशिया 3" नाम से दूसरा क्लाउड क्षेत्र स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। इसमें तीन उपलब्धता क्षेत्र होंगे और इसके दो से तीन साल में चालू होने की उम्मीद है। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब माइक्रोसॉफ्ट को दुनिया भर में क्षमता की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी केविन स्कॉट ने माना है कि चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद बुनियादी ढांचा पर्याप्त तेजी से बनाने की कंपनी की क्षमता के संदर्भ में "भारी किल्लत कहना भी शायद कम होगा।"
विस्तार करने वाली कंपनी माइक्रोसॉफ्ट अकेली नहीं है। एनटीटी डेटा ने अगस्त 2024 में ट्रोपिकाना कॉरपोरेशन बरहाद से 8.85 करोड़ डॉलर की जमीन खरीदी, जहां जोहोर में छह इमारतों वाला डेटा सेंटर परिसर बनाया जाएगा। पहली सुविधा 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। गूगल, अमेजन, बाइटडांस, एनवीडिया और अलीबाबा ने भी मलेशिया में सुविधाएं स्थापित करने के लिए बड़े संसाधन समर्पित किए हैं। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जहां जमीन और बिजली की उपलब्धता ही बाजार में प्रवेश की संभावनाएं तय करने लगी है।
विदेशी निवेश की इस लहर के बीच, स्थानीय कंपनी ब्रिज डेटा सेंटर्स (BDC) दिखाती है कि घरेलू क्षमता भी उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकती है। बैन कैपिटल के समर्थन वाली BDC मलेशिया में 300 मेगावाट से अधिक चालू क्षमता का संचालन करती है, जिससे यह देश की सबसे बड़ी संचालक बन गई है। कंपनी ने वर्टिकल इंटीग्रेशन की रणनीति अपनाई है। डेटा सेंटर डिजाइन और प्रणालियों से जुड़े उसके पास करीब 600 पेटेंट हैं और वह संचालन आउटसोर्स करने के बजाय अपनी इंजीनियरिंग क्षमताएं बनाए रखती है।
ब्रिज डेटा सेंटर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक फैन का कहना है कि उनकी कंपनी "रियल एस्टेट का कारोबार नहीं" बल्कि "अत्याधुनिक समाधानों" पर केंद्रित एक प्रौद्योगिकी कंपनी है। जोहोर और क्लैंग वैली में नए परिसर चालू होने के साथ BDC को 2026 में मलेशिया में अपने कर्मचारियों की संख्या लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है। कंपनी ने क्षेत्रीय प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए सिंगापुर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जैसे संस्थानों के साथ शिक्षा साझेदारियां की हैं। हालांकि, फैन मानते हैं कि उन्नत लिक्विड कूलिंग की जरूरतों के कारण एआई आधारित मांग से लागत, एआई से पहले तैयार किए गए डिजाइन की तुलना में 15-20% बढ़ रही है।
भू-राजनीतिक संतुलन साधने की चुनौती
डेटा सेंटर केंद्र के रूप में मलेशिया का उभार अमेरिका और चीन के बीच तेज होती तकनीकी प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है। आसियान में चीन के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक होने के कारण मलेशिया पर बीजिंग से आर्थिक संबंध बनाए रखने का दबाव है। वहीं, उसे उन्नत जीपीयू के निर्यात पर वॉशिंगटन के सख्त होते नियंत्रण और डेटा सेंटर उपकरणों पर संभावित शुल्कों के बीच भी रास्ता निकालना है। इन पाबंदियों से लागत बढ़ सकती है और जरूरी चिपों तक पहुंच सीमित हो सकती है, जिससे मलेशिया में एआई बुनियादी ढांचे का विस्तार प्रभावित हो सकता है।
इसके साथ ही, मलेशिया की तटस्थता ने उसे उन कंपनियों के लिए आकर्षक बनाया है जो आपूर्ति शृंखलाओं में केंद्रित जोखिमों को कम करना चाहती हैं। खबरों के अनुसार, चीनी कंपनियां तीसरे देशों के जरिए उन्नत चिप हासिल कर अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों से बचने के संभावित रास्ते के रूप में मलेशिया को देखती रही हैं। इस स्थिति से मलेशियाई अधिकारियों के सामने आर्थिक अवसरों और कूटनीतिक वास्तविकताओं के बीच संतुलन बनाने की जटिल चुनौती पैदा होती है।
हालिया अमेरिका-मलेशिया पारस्परिक व्यापार समझौता मलेशिया की राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर रणनीति को जटिल बना सकता है। इस रणनीति का लक्ष्य मध्यवर्ती सेमीकंडक्टर उत्पादन में देश की स्थिति बनाए रखना और धीरे-धीरे उसकी जटिलता बढ़ाना है। अमेरिकी निर्यात पाबंदियों का पालन करने से वैश्विक चिप आपूर्ति शृंखला में तटस्थ मध्यस्थ के रूप में काम करने की मलेशिया की क्षमता सीमित हो सकती है। इससे उस आपूर्ति शृंखला स्वायत्तता को नुकसान पहुंच सकता है जिसकी परिकल्पना पुत्राजया ने शुरू में की थी।
ये भू-राजनीतिक चिंताएं ऊर्जा सुरक्षा तक भी फैली हैं। IEA ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा उपयोगिताओं पर साइबर हमले पिछले चार वर्षों में तीन गुना हो गए हैं और एआई अनुप्रयोगों के कारण अधिक परिष्कृत हुए हैं। जैसे-जैसे डेटा सेंटर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे बन रहे हैं, भौतिक और साइबर खतरों के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ रही है। इससे प्रौद्योगिकी कंपनियों, ऊर्जा प्रदाताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की जरूरत बढ़ती है।
क्षेत्रीय असर
मलेशिया का विस्तार पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रतिस्पर्धा की स्थिति बदल रहा है। फिलीपींस की PLDT इंक. ने कैविते में 100 मेगावाट का हाइपरस्केल डेटा सेंटर बनाने की योजना घोषित की है। इसके अध्यक्ष मैनुअल वी. पांगिलिनन ने स्पष्ट रूप से कहा कि लक्ष्य क्षमता का विस्तार कर "कम से कम मलेशिया की क्षमता के बराबर" होना है। PLDT की इस 12वीं सुविधा का निर्माण 2026 में शुरू और 2028 तक पूरा होने वाला है। इससे संकेत मिलता है कि पड़ोसी देश क्षेत्रीय महत्व के लिए मलेशिया की क्षमता को मानक मान रहे हैं।
इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम भी डेटा सेंटर में निवेश तेजी से बढ़ा रहे हैं। अनुमान है कि 2030 तक वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की हिस्सेदारी 40% होगी। 800 अरब डॉलर के निवेश से इस क्षेत्र की कुल क्षमता करीब 30 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, शुरुआती बढ़त और सिंगापुर से निकटता के कारण मलेशिया आगे है। प्रतिस्पर्धियों के लिए इस बढ़त की बराबरी करना मुश्किल होगा।
क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच जरूरत से ज्यादा क्षमता बनने की आशंका भी है। 2023 से डेटा सेंटर और जीपीयू क्लस्टर इतनी तेजी से बनाए गए हैं कि वे निकट भविष्य में एआई की मांग से आगे निकल सकते हैं। अगर एआई के कामकाज की मांग बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ नहीं बढ़ी, तो उद्योग को एकीकरण और कीमतों में पुनर्निर्धारण का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, JLL के विश्लेषण के मुताबिक 2027 में एआई प्रशिक्षण से अनुमान संबंधी कामकाज की ओर बदलाव से मांग केंद्रीकृत क्लस्टरों से विकेंद्रीकृत क्षेत्रीय केंद्रों की ओर जाएगी। इससे मलेशिया जैसे स्थानों में अतिरिक्त क्षमता का उपयोग हो सकता है, जहां से दक्षिण-पूर्व एशिया के व्यापक बाजारों को सेवाएं दी जाती हैं।
मुख्य बातें
- 2026 के अंत तक मलेशिया की डेटा सेंटर क्षमता दोगुने से अधिक होने का अनुमान है। दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्माणाधीन नई क्षमता के दो-तिहाई से अधिक हिस्से पर देश का कब्जा होगा
- 2025 में इस बाजार का मूल्य 6.14 अरब अमेरिकी डॉलर है और 2031 तक इसके 11.40 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है
- माइक्रोसॉफ्ट जोहोर बाहरू में दूसरा क्लाउड क्षेत्र बना रही है, जबकि स्थानीय संचालक ब्रिज डेटा सेंटर्स के पास 300 मेगावाट से अधिक चालू क्षमता है
- जोहोर और सेलांगोर में पानी की कमी तथा बिजली ग्रिड की सीमाओं के कारण अधिकारी मंजूरियों की रफ्तार धीमी कर रहे हैं और बिजली की नई दरें लागू कर रहे हैं
- जुलाई 2025 में लागू नई दरों से ऊर्जा लागत 10-14% बढ़ेगी। 100 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले केंद्रों पर सालाना 2 करोड़ डॉलर तक की अतिरिक्त लागत आ सकती है
- मलेशिया 2 अरब रिंगिट की संप्रभु एआई क्लाउड पहल के जरिए विदेशी निवेश आकर्षित करने और तकनीकी संप्रभुता के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है
- अमेरिका और चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव से उन्नत चिपों तक पहुंच और निर्यात नियंत्रणों के संबंध में नियमों के अनुपालन की चुनौतियां पैदा हो रही हैं
- 2030 तक वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की हिस्सेदारी 40% होने का अनुमान है और दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेशिया की वृद्धि सबसे तेज है






