सेमीकंडक्टर कूटनीति में ऐतिहासिक समझौता
संयुक्त राज्य अमेरिका और ताइवान ने एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे वैश्विक सेमीकंडक्टर परिदृश्य में बदलाव आने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत ताइवान की कंपनियां अमेरिका में सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उत्पादन सुविधाओं में सीधे कम से कम 250 अरब डॉलर का निवेश करेंगी। इसके अलावा, ताइवान सरकार इन निवेशों को समर्थन देने के लिए 250 अरब डॉलर तक की ऋण गारंटी देगी। इसके बदले वॉशिंगटन ने ताइवान के अधिकांश सामानों पर जवाबी शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने और जेनेरिक दवाओं, विमान के पुर्जों तथा देश में उपलब्ध नहीं कुछ प्राकृतिक संसाधनों पर शून्य शुल्क लागू करने पर सहमति जताई है।
विषय-सूची
- सेमीकंडक्टर कूटनीति में ऐतिहासिक समझौता
- उत्पादन को वापस लाने का महत्वाकांक्षी 40 प्रतिशत लक्ष्य
- ताइवान का एन-2 नियम और तकनीकी अंतर
- अमेरिका में उत्पादन लाने की संरचनात्मक चुनौतियां
- भू-राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय दृष्टिकोण
- अमेरिका में टीएसएमसी की बढ़ती मौजूदगी
- रणनीतिक एआई साझेदारी और व्यापक प्रभाव
- सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं की आगे की राह
- निष्कर्ष
यह समझौता हाल के इतिहास में दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारियों में से एक है। यह ऐसे समय हुआ है जब सेमीकंडक्टर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में आ गए हैं। अमेरिका विदेशी चिप निर्माण पर अपनी निर्भरता घटाना चाहता है, जबकि ताइवान क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच अपनी आर्थिक स्थिति सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है।
बातचीत में ताइपे की मुख्य वार्ताकार ने कहा कि ताइवान का लक्ष्य अमेरिका के साथ एक "लोकतांत्रिक" उच्च-प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखला बनाना और पिछले सप्ताह वॉशिंगटन के साथ हुए नए शुल्क समझौते के तहत रणनीतिक एआई साझेदारी करना है।
उप प्रधानमंत्री चेंग ली-च्युन ने जोर देकर कहा कि यह समझौता ताइवान के चिप उद्योग को खोखला करने के बारे में नहीं है, जिसे उन्होंने "देश की रक्षा करने वाला पवित्र पर्वत" कहा। इसके बजाय, उन्होंने इसे विस्तार के जरिये ताइवान के उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों की ताकत विदेशों तक पहुंचाने का समर्थन बताया।
उत्पादन को वापस लाने का महत्वाकांक्षी 40 प्रतिशत लक्ष्य
वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा है कि इस समझौते का लक्ष्य ताइवान की पूरी सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला का 40 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका लाना है। इससे चिप निर्माण क्षमता के वैश्विक वितरण में बड़ा बदलाव आएगा। फिलहाल दुनिया के सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर के उत्पादन में ताइवान का दबदबा है।
ताइवान फिलहाल नई कंप्यूटिंग क्षमता की वैश्विक मांग का लगभग एक-तिहाई उत्पादन करता है। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) अकेले दुनिया के अधिकांश उन्नत चिप बनाती है। इससे सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में इस द्वीप की केंद्रीय भूमिका आर्थिक और सैन्य, दोनों तरह के उपयोगों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हो जाती है।
ताइवान की रणनीतिक स्थिति को बताने के लिए "सिलिकॉन शील्ड" की अवधारणा सामने आई है। इस सिद्धांत के अनुसार उन्नत सेमीकंडक्टर के उत्पादन में ताइवान की अपरिहार्य भूमिका संभावित चीनी आक्रामकता को रोकने का काम करती है, क्योंकि किसी भी संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं बाधित होंगी और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचेगा।
हालांकि, विशेषज्ञों ने अमेरिकी अधिकारियों की बताई समय-सीमा के भीतर उत्पादन को वापस लाने का 40 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की व्यवहार्यता पर गंभीर संदेह जताया है। टेक उद्योग विश्लेषक बॉब ओ'डॉनेल ने वॉशिंगटन के दावों को अमेरिका में विनिर्माण बढ़ने की गति को लेकर भरोसा जगाने के उद्देश्य से की गई "अतिशयोक्ति" बताया।
टेक्नालिसिस रिसर्च के संस्थापक ओ'डॉनेल ने कहा, "ज्यादातर लोग वास्तव में नहीं समझते कि सेमीकंडक्टर की आपूर्ति शृंखलाएं कितनी जटिल हैं। इसलिए वे इस बात के अवास्तविक अनुमान लगाते हैं कि इन्हें कितनी जल्दी स्थानांतरित और बदला जा सकता है।" उन्होंने कहा, "इस उद्योग की व्यवस्थागत जरूरतों और जटिलता को देखते हुए, इस लक्ष्य को हासिल करने में कई साल, बल्कि कई दशक भी लग सकते हैं।"
ताइवान का एन-2 नियम और तकनीकी अंतर
ताइवान के अधिकारियों ने अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए सख्त नीतियां लागू की हैं। एन-2 नियम के तहत ताइवान टीएसएमसी के विदेशी विनिर्माण संयंत्रों को ऐसी तकनीकें इस्तेमाल करने से रोकता है, जो घरेलू स्तर पर विकसित तकनीकों से कम से कम दो पीढ़ी पीछे न हों।
यह नीति सुनिश्चित करती है कि सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्रक्रियाओं में ताइवान अपनी बढ़त बरकरार रखे। टीएसएमसी अपने सबसे उन्नत चिप ताइवान में 2-नैनोमीटर तकनीक से बनाती है, जबकि उसके एरिजोना संयंत्र ने हाल ही में अमेरिकी ग्राहकों के लिए उन्नत 4-नैनोमीटर चिप का उत्पादन शुरू किया है। कंपनी की योजना 2030 तक 2-नैनोमीटर और ए16 नोड का उत्पादन बढ़ाने की है, लेकिन तब भी तकनीकी अंतर काफी रहेगा।
सेमीकंडक्टर निर्माण में नैनोमीटर का छोटा आकार अधिक सघन ट्रांजिस्टर का संकेत देता है, जिससे प्रसंस्करण की गति बढ़ती है और ऊर्जा दक्षता बेहतर होती है। ताइवान की घरेलू क्षमता और अमेरिका में उत्पादन के बीच चार से पांच साल का अंतर यह सुनिश्चित करता है कि निकट भविष्य में ताइवान अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाए रखेगा।
सेमीएनालिसिस के विश्लेषक श्रवन कुंडोज्जला ने कहा कि ताइवान की "सिलिकॉन शील्ड" दशक के अंत तक मजबूत बनी रहेगी और दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण उन्नत उत्पादन क्षमता इसी द्वीप पर केंद्रित रहेगी।
टीएसएमसी के मुख्य वित्तीय अधिकारी वेंडेल हुआंग ने जोर देकर कहा कि घरेलू अनुसंधान एवं विकास टीमों और विनिर्माण संचालन के बीच "बेहद गहन सहयोग" की जरूरत के कारण कंपनी अपनी सबसे उन्नत तकनीकें ताइवान में ही विकसित करती रहेगी।
हुआंग ने कहा, "हम ताइवान में अलग-अलग जगहों के बीच सैकड़ों इंजीनियरों को भेजते रहेंगे। इसलिए जब हम सबसे अत्याधुनिक तकनीक का उत्पादन बढ़ाएंगे, तो वह ताइवान में ही रहेगी।"
अमेरिका में उत्पादन लाने की संरचनात्मक चुनौतियां
चिप उत्पादन को ताइवान से बाहर ले जाने में नीतिगत समझौतों से परे कई बड़ी संरचनात्मक चुनौतियां हैं। ताइवान ने इंजीनियरिंग प्रतिभा, उत्पादन क्षमता और आपूर्ति शृंखला नेटवर्क वाला एक अत्यधिक विशिष्ट सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है, जिसे विश्लेषकों के मुताबिक "दुनिया में कहीं और बड़े पैमाने पर दोहराया नहीं जा सकता।"
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ सलाहकार विलियम रेनश ने कहा कि प्रशिक्षित कामगारों की कमी और अधिक उत्पादन लागत के चलते टीएसएमसी के अमेरिकी संयंत्रों के उद्घाटन में पहले ही देरी हुई है। उनका मानना है कि निवेश की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में उम्मीद से अधिक समय लगेगा और तय स्तर तक पहुंचना मुश्किल होगा।
सेमीकंडक्टर निर्माण की प्रक्रिया बेहद जटिल है। इसमें चार से छह महीने लगते हैं और 500 से अधिक अलग-अलग चरण शामिल होते हैं। इसके लिए विशेष डिजाइन सॉफ्टवेयर, विनिर्माण संयंत्र और समर्पित परीक्षण सुविधाओं की जरूरत होती है। एक सामान्य इंटीग्रेटेड सर्किट चिप के विभिन्न घटकों को अंतिम उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार करनी पड़ती हैं।
वैश्विक वेफर निर्माण में अमेरिका की हिस्सेदारी 1990 के 37 प्रतिशत से तेजी से घटकर 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम रह गई है। इस क्षमता को फिर से खड़ा करने के लिए सिर्फ वित्तीय निवेश ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञ मानव संसाधन और आपूर्ति शृंखला नेटवर्क विकसित करना भी जरूरी है।
एक उन्नत विनिर्माण संयंत्र, यानी फैब, बनाने के लिए भारी पूंजी निवेश की जरूरत होती है। टीएसएमसी का अनुमान है कि 3-नैनोमीटर फैब की लागत 20 अरब डॉलर से अधिक है। इन संयंत्रों में अरबों डॉलर के विनिर्माण उपकरण होते हैं और पूरी क्षमता से काम करने से पहले इनमें वर्षों का निवेश और चरणबद्ध सीख शामिल होती है।
भू-राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय दृष्टिकोण
सेमीकंडक्टर समझौते के आर्थिक पहलुओं से परे भी महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक प्रभाव हैं। बीजिंग ने इसका कड़ा विरोध किया है। चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बीजिंग "ताइवान और चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले देशों के बीच हुए किसी भी समझौते का दृढ़ता से विरोध करता है।" चीन ने अमेरिका से "एक-चीन सिद्धांत" का पालन करने का आग्रह किया, जिसके तहत बीजिंग ताइवान पर संप्रभुता का दावा करता है।
चीन के सरकारी मीडिया ने इस समझौते की खास तौर पर आलोचना की है। स्टेट काउंसिल के ताइवान मामलों के कार्यालय के प्रवक्ता पेंग छिंग'एन ने इस समझौते को "पूरी तरह आत्मसमर्पण" बताते हुए आरोप लगाया कि इससे ताइवान के निवासियों के हितों की बलि चढ़ाई गई है और आर्थिक दबाव के तहत द्वीप के औद्योगिक विकास को कमजोर किया गया है।
पेंग ने चेतावनी दी कि ताइवान की सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका ले जाने से ताइवान की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा क्षमता गंभीर रूप से कमजोर होगी और यह द्वीप "खोखला द्वीप" बन जाएगा। उन्होंने इस समझौते को "हितों को बेचने वाला समझौता" बताया और ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
इन आपत्तियों के बावजूद ताइवान सरकार ने इस समझौते का बचाव करते हुए इसे अमेरिका के साथ एक "लोकतांत्रिक" उच्च-प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखला बनाने के लिए रणनीतिक कदम बताया है। यह समझौता ताइवान को जापान और दक्षिण कोरिया के बराबर रखता है, जिन्होंने पिछले साल अमेरिका के साथ इसी तरह की व्यापार शर्तें हासिल की थीं।
सैम ह्यूस्टन स्टेट यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डेनिस लू-चुंग वेंग ने कहा कि सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को रातोंरात कहीं और नहीं ले जाया जा सकता। इसलिए निकट भविष्य में सिलिकॉन शील्ड कमजोर तो हो सकती है, लेकिन बनी रहेगी। उन्होंने इन प्रयासों के भविष्य को लेकर एक अहम सवाल उठाया।
वेंग ने चेताया, "बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप के बाद क्या होगा: अगर भविष्य के अमेरिकी प्रशासन बड़े पैमाने पर उत्पादन स्थानांतरित करने का दबाव बनाते रहे, तो ताइवान की विशिष्ट बढ़त खत्म होगी या नहीं, यह सवाल कम और कब खत्म होगी, यह सवाल ज्यादा रह जाएगा।"
अमेरिका में टीएसएमसी की बढ़ती मौजूदगी
दुनिया की सबसे बड़ी अनुबंध चिप निर्माता कंपनी ने अमेरिका में चिप निर्माण और प्रसंस्करण सुविधाओं तथा एक अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला में 165 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता पहले ही जताई है। इन सुविधाओं से एनवीडिया और एप्पल समेत बड़े ग्राहकों को आपूर्ति की जाती है।
टीएसएमसी का एरिजोना विस्तार इस व्यापक बदलाव का सबसे स्पष्ट उदाहरण है। कंपनी ने एरिजोना में अपनी सबसे उन्नत प्रक्रिया वाले तीन नए विनिर्माण संयंत्र, उन्नत पैकेजिंग के दो संयंत्र और एक अनुसंधान एवं विकास केंद्र बनाने की योजना घोषित की है। कहा गया है कि कंपनी की मौजूदा प्रतिबद्धताओं के अलावा कुल निवेश 100 अरब डॉलर तक पहुंचेगा।
हालांकि, इस विस्तार में चुनौतियां भी आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक योग्य इंजीनियरों को ढूंढ़ने और अमेरिका की अलग श्रम-प्रथाओं के अनुरूप ढलने में कठिनाइयां आई हैं। ये चुनौतियां बताती हैं कि अत्यधिक विशिष्ट विनिर्माण क्षमताओं को अलग-अलग नियामक और सांस्कृतिक माहौल में स्थानांतरित करना कितना मुश्किल है।
इस विस्तार को समर्थन देने के लिए समझौते में कुछ खास प्रावधान शामिल हैं। अमेरिका में नई सेमीकंडक्टर क्षमता बनाने वाली ताइवानी कंपनियां, स्वीकृत निर्माण अवधि के दौरान, उस नियोजित क्षमता के 2.5 गुना तक आयात कर सकती हैं और उन्हें सेक्शन 232 शुल्क नहीं देना होगा। निर्माण पूरा होने के बाद कंपनियां अपनी नई अमेरिकी उत्पादन क्षमता के 1.5 गुना तक आयात बिना शुल्क के कर सकती हैं।
रणनीतिक एआई साझेदारी और व्यापक प्रभाव
सेमीकंडक्टर से आगे बढ़कर यह समझौता कृत्रिम बुद्धिमत्ता में रणनीतिक साझेदारी बनाने का लक्ष्य रखता है। ताइवान और अमेरिका ने अमेरिका में विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क बनाने पर सहयोग करने की सहमति जताई है, ताकि अमेरिका के औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके और उसे अगली पीढ़ी की तकनीक का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।
यह समझौता ताइवान के सेमीकंडक्टर, एआई, रक्षा प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और जैव प्रौद्योगिकी उद्योगों में अमेरिकी निवेश को भी आसान बनाता है। निवेश और तकनीकी सहयोग का यह दोतरफा प्रवाह दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरा आर्थिक एकीकरण बनाने की कोशिश है।
यूरेशिया ग्रुप की ताइवान और चीनी विदेश नीति विशेषज्ञ अवा शेन ने कहा कि चीन का ताइवान पर हमला होने की संभावना कम है और व्यापार समझौते से बीजिंग की सोच बदलने की संभावना नहीं है। उनके मुताबिक मुख्य भूमि के अधिकारी अमेरिका के मुकाबले अपनी सैन्य स्थिति और ताइपे को मिलने वाले अमेरिकी रक्षा समर्थन के स्तर पर अधिक ध्यान देंगे।
नीति निर्माताओं के सामने व्यापक चुनौती आर्थिक एकीकरण और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की है। सेमीकंडक्टर उद्योग अब इतना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है कि बड़ी शक्तियां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला मानती हैं। इससे पारंपरिक व्यापार संबंध और जटिल हो गए हैं।
ताइवान की राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की देखरेख करने वाले वू चेंग-वेन ने जोर दिया है कि ताइवान के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास को देश में बनाए रखना और घरेलू उद्योग को "खोखला होने" से बचाना बेहद जरूरी है।
वू ने पिछले साल फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "अगर हम अपना अनुसंधान एवं विकास विदेश ले जाते हैं, तो यह हमारे लिए खतरनाक होगा।"
सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं की आगे की राह
अमेरिका-ताइवान समझौता दशकों में वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं को नया रूप देने की सबसे महत्वाकांक्षी कोशिशों में से एक है। हालांकि, इस प्रयास की सफलता सिर्फ निवेश की प्रतिबद्धताओं से तय नहीं होगी, बल्कि कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगी।
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के शोधकर्ताओं ने जोर दिया है कि अमेरिका-ताइवान के बीच सफल तकनीकी सहयोग के लिए प्रतिभाओं को तैयार करने और बनाए रखने पर ध्यान देना जरूरी है। उद्योग को कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक इंजीनियरिंग प्रतिभा की भारी वैश्विक कमी का अनुमान है। दोनों देशों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्रों में पर्याप्त विद्यार्थियों को आकर्षित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस क्षेत्र में पढ़ाई के लिए अधिक विद्यार्थियों को आकर्षित करने हेतु संघीय धन से प्रशिक्षण कार्यक्रम और छात्रवृत्तियां उपलब्ध करानी होंगी। इस कमी को दूर करने के लिए अमेरिका और ताइवान के बीच विनिमय कार्यक्रम, काम के दौरान प्रशिक्षण और शोध परियोजनाएं शुरू करनी होंगी।
सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला बेहद जटिल, विभिन्न खंडों में बंटी और अंतरराष्ट्रीय है। एक वर्ग इंच या उससे कम सिलिकॉन पर लाखों या अरबों ट्रांजिस्टर समेटे इंटीग्रेटेड सर्किट चिप आधुनिक तकनीक के लगभग हर पहलू का आधार हैं। उनकी उत्पादन प्रक्रिया भी उतनी ही जटिल है, जिसमें महीनों लगते हैं और सैकड़ों अलग-अलग चरण शामिल होते हैं।
इस जटिलता को देखते हुए कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि नीति का लक्ष्य एक स्वस्थ और लचीला सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होना चाहिए, जिसमें सहयोगी और साझेदार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहें, न कि पूरी आत्मनिर्भरता हासिल करना।
निष्कर्ष
- अमेरिका और ताइवान ने एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत ताइवान की कंपनियां अमेरिकी सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और एआई उत्पादन में 250 अरब डॉलर का सीधा निवेश करेंगी और ताइवान सरकार 250 अरब डॉलर की ऋण गारंटी देगी।
- अमेरिका में ताइवान के अधिकांश निर्यात पर शुल्क 20% से घटकर 15% होगा। जेनेरिक दवाओं, विमान के पुर्जों और कुछ प्राकृतिक संसाधनों पर शून्य शुल्क लगेगा।
- वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा कि लक्ष्य ताइवान की सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला का 40% हिस्सा अमेरिका लाना है, हालांकि विशेषज्ञ इस समय-सीमा को अवास्तविक मानते हैं।
- ताइवान के एन-2 नियम के तहत विदेशी संयंत्रों की तकनीक घरेलू तकनीक से कम से कम दो पीढ़ी पीछे रहनी चाहिए, जिससे द्वीप की तकनीकी बढ़त बनी रहती है।
- टीएसएमसी ने अमेरिका में 165 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें कई संयंत्रों और एक शोध केंद्र वाला एरिजोना "गीगाफैब क्लस्टर" शामिल है।
- विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में ताइवान के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र और इंजीनियरिंग प्रतिभा को बड़े पैमाने पर कहीं और दोहराया नहीं जा सकता।
- चीन इस समझौते को "एक-चीन सिद्धांत" का उल्लंघन मानकर इसका विरोध करता है और इसकी आलोचना करते हुए कहता है कि इससे ताइवान का औद्योगिक आधार कमजोर होगा।
- सेमीकंडक्टर निर्माण में 500 से अधिक चरण शामिल होते हैं और इसमें चार से छह महीने लग सकते हैं, इसलिए आपूर्ति शृंखलाओं में तेजी से बदलाव करना मुश्किल है।
- ताइवान नई कंप्यूटिंग क्षमता की वैश्विक मांग का लगभग एक-तिहाई उत्पादन करता है। टीएसएमसी दुनिया के अधिकांश उन्नत चिप बनाती है।
- विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिका में निवेश बढ़ने के बावजूद ताइवान की "सिलिकॉन शील्ड" दशक के अंत तक मजबूत बनी रहेगी।






