सामरिक चकमे का अंत
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने हाल ही में ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास शुरू किया। ‘जस्टिस मिशन 2025’ नाम के इस अभ्यास का उद्देश्य अभियानगत तैयारी को परखना था। बीजिंग स्थित रक्षा थिंक टैंक लांडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अभ्यास 29 दिसंबर को बिना किसी पूर्व चेतावनी के शुरू हुआ। गोपनीयता बरतने की कोशिश के बावजूद अमेरिका और जापान ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह त्वरित प्रतिक्रिया क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं की निरंतर मौजूदगी और चीनी सैन्य गतिविधियों का उसी समय पता लगाने तथा उन पर नजर रखने की उनकी क्षमता को दर्शाती है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि पीएलए जलडमरूमध्य के पार अचानक हमला करना चाहती है, तो उसे अपनी योजना में इस बहुआयामी निगरानी को शामिल करना होगा।
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लांडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएलए का दो दिवसीय अभ्यास शुरू होते ही अमेरिका और जापान के जासूसी विमानों ने अपने नियमित गश्ती मार्गों से हटकर आसपास के क्षेत्रों के चक्कर लगाए या अभ्यास क्षेत्रों के लिए विशेष उड़ानें भरीं। इन विमानों में अमेरिकी एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन और जापानी फाल्कन 2000एमएसए निगरानी विमान शामिल थे। यह जानकारी खुले स्रोतों से मिली उड़ान-पथ ट्रैकिंग पर आधारित थी, जिससे इन विमानों की त्वरित तैनाती का पता चला। यह घटना मौजूदा सुरक्षा माहौल का एक उदाहरण है और संकेत देती है कि ताइवान जलडमरूमध्य में गुप्त सैन्य जमावड़े का दौर प्रभावी रूप से खत्म हो चुका है। बीजिंग के लिए चुनौती अब केवल जटिल सैन्य गतिविधियां करना नहीं, बल्कि विरोधी खुफिया नेटवर्क की लगातार निगरानी के बीच उन्हें अंजाम देना है।
इन अभ्यासों का तुरंत पता चलना क्षेत्र में फैले परिष्कृत और निरंतर निगरानी तंत्र की ओर इशारा करता है। यह तंत्र केवल अभ्यास के दौरान दिखे विमानों तक सीमित नहीं है। इसमें उपग्रह, समुद्र के भीतर लगे सेंसर, जमीन पर स्थित रडार स्टेशन और साइबर खुफिया उपकरण शामिल हैं। अमेरिकी नौसेना इस क्षेत्र में सतही युद्धपोतों और पनडुब्बियों का मजबूत बेड़ा संचालित करती है, जो सभी उन्नत सेंसरों से लैस हैं। जापान शुरुआती चेतावनी देने वाले रडार और समुद्री आत्मरक्षा बल की गश्त के जरिए अहम योगदान देता है। यह बहुआयामी निगरानी केवल जहाजों और विमानों पर ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक संकेतों, मिसाइल प्रक्षेपण और संचार के तौर-तरीकों पर भी नजर रखती है। पीएलए के अभ्यास शुरू करते समय अमेरिकी और जापानी इकाइयां चीनी सैन्य तैनाती की तस्वीर तैयार करने के लिए रेडियो संचार में अचानक बढ़ोतरी और अग्नि-नियंत्रण रडार सक्रिय होने के संकेतों का विश्लेषण कर रही होंगी।
जापान की रणनीतिक भूमिका में बदलाव
पीएलए के अभ्यासों पर नजर रखने में जापान की सक्रिय भूमिका उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव को दर्शाती है। दशकों तक जापान का आत्मरक्षा बल अपने संविधान की सख्त रक्षात्मक व्याख्या के तहत काम करता रहा। हालांकि, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की एक रिपोर्ट बताती है कि दिसंबर 2022 में मंजूर जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति ने ताइवान की रक्षा में व्यापक योगदान देने के देश के इरादे को स्पष्ट किया। टोक्यो अब मानता है कि जलडमरूमध्य के पार शांति और स्थिरता उसकी अपनी सुरक्षा और समृद्धि के लिए अनिवार्य हैं। इस बदलाव ने जापान को निष्क्रिय पर्यवेक्षक से ताइवान से जुड़े किसी भी संकट में अग्रिम पंक्ति के प्रमुख पक्ष में बदल दिया है।
अपने नए रक्षा क्षमता-विस्तार कार्यक्रम के तहत जापान युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए सात अहम क्षेत्रों पर ध्यान दे रहा है। इनमें दूर से हमला करने की क्षमता, एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा और मानवरहित साधन शामिल हैं। दूर से हमला करने की क्षमता हासिल करना खास तौर पर महत्वपूर्ण है। इसके तहत लंबी दूरी की जहाज-रोधी और जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलें शामिल की जा रही हैं। जापान का कहना है कि ये हथियार जवाबी कार्रवाई के लिए हैं, लेकिन इनसे टोक्यो की आक्रामक पहुंच में बुनियादी बदलाव आता है और वह दुश्मन के इलाके में काफी भीतर तक मौजूद खतरों को निशाना बना सकता है। चीन और उत्तर कोरिया के विशाल मिसाइल भंडार के जवाब में इस क्षमता को जरूरी माना जा रहा है। इन क्षमताओं को अमेरिका के साथ व्यापक गठबंधन ढांचे में शामिल करने से एक निर्बाध रक्षा नेटवर्क बनता है, जिससे चीनी सैन्य योजना और जटिल हो जाती है।
जापान की प्रतिबद्धता हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अमेरिका के साथ गहरा अभियानगत तालमेल भी शामिल है। खबरों के अनुसार, दोनों सहयोगी ताइवान जलडमरूमध्य में संकट की स्थिति से निपटने के लिए एक नई अभियान योजना तैयार कर रहे हैं, जो कोरियाई प्रायद्वीप के लिए बनी मौजूदा योजनाओं पर आधारित होगी। संघर्ष की स्थिति में जापान अमेरिकी बलों को महत्वपूर्ण ठिकाने मुहैया कराएगा। मिसावा, योकोटा और काडेना के हवाई अड्डे तथा योकोसुका और ससेबो जैसी नौसैनिक सुविधाएं अभियानों के लिए प्रस्थान केंद्र बनेंगी। इन ठिकानों को हमले के दौरान भी चालू रखने के लिए जापान ने बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों में भारी निवेश किया है। यह रसद और रणनीति का एकीकरण निगरानी नेटवर्क को खास तौर पर मजबूत बनाता है, क्योंकि जापानी और अमेरिकी कमांडरों के बीच जानकारी निर्बाध रूप से साझा होती है।
पीएलए की सामरिक रणनीति में बदलाव
अमेरिकी और जापानी सेनाओं की निगरानी से पैदा हुई पारदर्शिता को देखते हुए पीएलए अपनी रणनीति बदल रही है। विश्लेषकों का कहना है कि हाल के चीनी अभ्यास बड़े पैमाने के एकीकृत संयुक्त अभियानों की ओर बदलाव दिखाते हैं। पहले पीएलए के अभ्यासों में अलग-अलग सैन्य सेवाओं की क्षमताओं पर जोर दिया जाता था। लेकिन 2022 से सेना ने संयुक्त युद्ध-तत्परता गश्त और खास तौर पर ताइवान को लक्ष्य बनाने वाले बड़े अभ्यासों को नियमित कर दिया है। ये अभियान सामरिक अभ्यासों से अलग हैं: इनमें बड़े द्वीपों के खिलाफ संयुक्त अभियान का अभ्यास करने वाले अभियान-स्तर के परिदृश्य अपनाए जाते हैं। पीएलए ने अभ्यासों को सैन्य सोपानों के आधार पर वर्गीकृत करना शुरू किया है और यथार्थपरकता तथा बड़े वार्षिक अभ्यासों को मानकीकृत करने पर जोर दिया है।
एक उल्लेखनीय बदलाव अभियानों के दायरे का विस्तार है। आम तौर पर इन अभ्यासों की अगुवाई पूर्वी थिएटर कमान करती है, लेकिन अब उनका दायरा पीला सागर, पूर्वी चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर तक फैला है। यह कई थिएटर कमानों को शामिल करने वाले संयुक्त अभियानों की पीएलए की बदलती अवधारणा को दर्शाता है। इन बिखरी हुई सैन्य इकाइयों की कमान और नियंत्रण केंद्रीय सैन्य आयोग के संयुक्त अभियान कमान केंद्र से संचालित होता है। इस ढांचे से यह परखा जाता है कि सुधारों के बाद पीएलए की कमान प्रणालियां अलग-अलग थिएटरों में कितनी प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं। अभ्यासों में चीन के तटरक्षक बल को शामिल करना भी एक बड़ा विस्तार है। उत्पीड़नकारी कार्रवाइयों के लिए तटरक्षक जहाज तैनात करके चीन सैन्य और कानून-प्रवर्तन गतिविधियों के बीच की रेखा धुंधली करता है, जिससे इरादे का पता लगाने की कोशिश कर रहे विरोधियों के सामने चुनौती और जटिल हो जाती है।
ये बदलाव क्षेत्रीय रक्षा रणनीतियों के लिए सीधी चुनौती हैं। अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों के बीच तालमेल एक बुनियादी सिद्धांत बना हुआ है, लेकिन ऐसी सैन्य गतिविधियां पड़ोसी देशों की चिंता बढ़ाती हैं। तीसरे पक्ष की भागीदारी का जोखिम घटाने के लिए चीन अपनी गतिविधियों को ताइवान की स्वतंत्रता समर्थक ताकतों के खिलाफ सीमित कार्रवाई के रूप में पेश करता है। हालांकि, बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय देश इन कदमों को रणनीतिक टकराव के नजरिये से देखते हैं। पीएलए की विभिन्न सैन्य सेवाओं और थिएटर कमानों को एकीकृत करने की क्षमता संकेत देती है कि वह गोपनीयता पर निर्भर रहने के बजाय गतिविधियों की मात्रा और जटिलता के जरिए विरोधी निगरानी नेटवर्क को निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है।
दो मोर्चों की चुनौती
ध्यान भले ही ताइवान जलडमरूमध्य पर हो, लेकिन जापान के सामने दो मोर्चों पर प्रतिबद्धता की जटिल चुनौती है। उसकी सुरक्षा जिम्मेदारियों में अब कोरियाई प्रायद्वीप और ताइवान जलडमरूमध्य, दोनों शामिल हैं। उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के कारण लगातार खतरा बना हुआ है। अनुमान है कि उत्तर कोरिया के पास करीब 20 परमाणु हथियार हैं और दर्जनों और बनाने लायक विखंडनीय सामग्री मौजूद है। प्योंगयांग ने अपनी मिसाइल क्षमताओं में लगातार सुधार किया है और ठोस ईंधन वाली मिसाइलें तैनात की हैं, जिन्हें दागने में कम समय लगता है और जिनके हमले से बच निकलने की क्षमता अधिक है। उत्तर से मिलने वाला यह खतरा जापान के लिए अपना पूरा ध्यान ताइवान पर केंद्रित करना मुश्किल बनाता है।
संघर्ष की स्थिति में उत्तर कोरिया चीन के लिए ध्यान भटकाने वाली ताकत के रूप में काम कर सकता है। बीजिंग प्योंगयांग को कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे अमेरिकी और जापानी सैन्य इकाइयां ताइवान जलडमरूमध्य से हट जाएं। उदाहरण के लिए, उत्तर कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां, शोर करने के बावजूद, जापान के दक्षिणी द्वीपों या अमेरिकी मुख्य भूमि के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं और अहम पनडुब्बी-रोधी युद्ध संसाधनों को दूसरी ओर मोड़ने पर मजबूर कर सकती हैं। इसी तरह, उत्तर कोरिया की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के विकास के कारण जापान को अपनी वायु रक्षा प्रणालियां पश्चिम की ओर तैनात रखनी पड़ती हैं, जिससे दक्षिण-पश्चिम में सुरक्षा कमजोर हो सकती है। विरोधी देशों के संसाधनों को कई दिशाओं में बांटना बीजिंग की योजना का एक सोचा-समझा लक्ष्य है। इसके लिए वह मॉस्को के साथ अपनी साझेदारी का इस्तेमाल करता है।
चीनी अकादमिक और सैन्य नेतृत्व जापान की बदलती भूमिका से पूरी तरह वाकिफ है। जापान की लड़ने की इच्छा को लेकर पश्चिमी देशों में कुछ संदेहों के उलट, कई चीनी विश्लेषक जापानी सैन्य हस्तक्षेप की आशंका जताते हैं। उनकी नजर में जापान अमेरिका के लिए एक मजबूत रसद केंद्र है, जो निगरानी, ईंधन भरने और चिकित्सा निकासी जैसी अहम सहायता देता है। इस आकलन के चलते बीजिंग ने जापान को अपनी प्रतिरोधक रणनीतियों में शामिल किया है। चीनी आकलन के मुताबिक, जापान की भागीदारी अमेरिका की प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगी, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि टोक्यो वॉशिंगटन के कदमों का अनुसरण करेगा। कुछ चीनी विश्लेषकों ने ऐसे परिदृश्यों पर विचार किया है जिनमें पीएलए जापानी ठिकानों को अभियान केंद्रों के रूप में निष्प्रभावी करने के लिए उन पर हमला कर सकती है। वहीं, दूसरे विश्लेषक जापान के व्यापार के लिए जरूरी समुद्री मार्गों को बंद करने की चीन की संभावित क्षमता से मिलने वाले आर्थिक दबाव पर ध्यान देते हैं।
रक्षा का दायरा बढ़ता हुआ
ताइवान के आसपास का निगरानी नेटवर्क अमेरिका-जापान के द्विपक्षीय ढांचे से आगे बढ़ रहा है। इसमें फिलीपींस की भागीदारी वाली एक उभरती त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी शामिल है। फिलीपींस ताइवान जलडमरूमध्य के दक्षिणी छोर पर स्थित है और लूजोन तथा ताइवान के बीच बाशी चैनल एक महत्वपूर्ण समुद्री संकरा मार्ग है। किसी भी नौसैनिक नाकेबंदी या सैन्य सहायता अभियान के लिए इस चैनल पर नियंत्रण जरूरी है। अमेरिका, जापान और फिलीपींस संयुक्त अभ्यासों और टेबलटॉप सिमुलेशन के जरिए रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं।
2024 में त्रिपक्षीय सहयोगियों ने वार्षिक बालिकातान अभ्यास के दौरान पहली बार मानवीय सहायता और आपदा प्रतिक्रिया का संयुक्त अभ्यास किया। उन्होंने अभियानों में तालमेल को सुगम बनाने के लिए एक बहुराष्ट्रीय समन्वय केंद्र भी बनाया। हालांकि इन गतिविधियों को आपदा प्रतिक्रिया अभ्यास के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन इनमें विकसित रसद ढांचे और कमान संबंध सैन्य संकटों में भी सीधे लागू हो सकते हैं। फिलीपींस ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि युद्ध की स्थिति में वह ताइवान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए तैयार है। इस काम को आसान बनाने के लिए मनीला ने इटबायत द्वीप पर तटरक्षक स्टेशन स्थापित किया है और सहयोगी देशों के साथ सैन्य अभ्यास बढ़ाए हैं।
यह त्रिपक्षीय सहयोग निगरानी और प्रतिक्रिया के अधिक व्यापक नेटवर्क का निर्माण करता है। इससे रडार और गश्त का दायरा बढ़ता है और पीएलए बलों के लिए बिना पता चले काम करना कठिन हो जाता है। अमेरिका और फिलीपींस के बीच उन्नत रक्षा सहयोग समझौता अमेरिकी बलों को उत्तरी लूजोन के ठिकानों तक पहुंच देता है, जिससे ताइवान जलडमरूमध्य की ओर सैन्य शक्ति भेजने की क्षमता काफी बढ़ती है। इन संबंधों को संस्थागत रूप देकर तीनों सहयोगी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ताइवान जलडमरूमध्य में संकट की स्थिति में प्रतिक्रिया तेज और समन्वित हो। गैर-लड़ाकू लोगों को निकालने के अभियान (एनईओ) चलाने की क्षमता इस योजना का अहम हिस्सा है, ताकि तनाव खुले संघर्ष में बदलने पर नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके।
आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और रणनीतिक संकेत
अमेरिकी अधिकारियों ने चीनी गतिविधियों पर बढ़ी निगरानी को खुलकर स्वीकार किया है। जापान के योकोटा एयर बेस से बोलते हुए रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि पेंटागन ताइवान और उसके आसपास की सुरक्षा स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना अमेरिकी सेना के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती रहा है। ऑस्टिन ने जोर दिया कि अमेरिका क्षेत्र में चीन की दबाव डालने वाली कार्रवाइयों पर ध्यान बनाए हुए है और ताइवान जलडमरूमध्य में यथास्थिति कायम रखने के लिए गतिविधियों पर नजर रखता रहेगा। उनकी टिप्पणियां चीनी सैन्य गतिविधियों की स्पष्ट तस्वीर बनाए रखने को अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकता बताती हैं।
निगरानी की इस स्थिति में अक्सर सीधे टकराव भी होते हैं। अप्रैल 2024 में चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अमेरिकी नौसेना की निगरानी उड़ान की आलोचना की थी। पीएलए की पूर्वी थिएटर कमान के एक बयान में पी-8ए पोसाइडन विमान के वहां से गुजरने को उकसावे वाली कार्रवाई बताया गया। अमेरिकी सातवें बेड़े ने जवाब दिया कि यह उड़ान स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दिखाती है और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप की गई थी। ऐसी घटनाएं क्षेत्र की लगातार निगरानी में निहित तनाव को उजागर करती हैं। अमेरिका का कहना है कि वह जहां अंतरराष्ट्रीय कानून अनुमति देता है, वहां उड़ान भरता, नौकायन करता और अभियान चलाता है। वहीं चीन इन आवाजाही को शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करने वाला उकसावा मानता है।
ताइवान के लिए सहयोगी देशों की निगरानी इकाइयों की दिखाई देने वाली मौजूदगी कुछ हद तक सुरक्षा देती है। जस्टिस मिशन 2025 अभ्यासों का तुरंत पता चलने से साबित हुआ कि ताइवान अकेले खतरे का सामना नहीं कर रहा है। जापान और फिलीपींस की क्षमताओं को व्यापक अमेरिकी रणनीति में शामिल करने से यह सुरक्षा कवच और मजबूत होता है। जलडमरूमध्य की स्थिति अब निगरानी और जवाबी निगरानी के उच्च-तकनीक वाले मुकाबले में बदल चुकी है। पीएलए अमेरिकी और जापानी सेंसरों की नजर में काम करना सीख रही है, जबकि वे सेंसर चीनी अभियानों की गोपनीयता की हर परत को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। सैन्य तकनीक की प्रगति के साथ, जागरूकता का यह मुकाबला क्षेत्र में भविष्य के किसी भी संघर्ष के शुरुआती चरणों को तय कर सकता है।
निष्कर्ष
- पीएलए के जस्टिस मिशन 2025 अभ्यासों का अमेरिकी और जापानी निगरानी इकाइयों ने तुरंत पता लगा लिया। इनमें एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन और फाल्कन 2000एमएसए शामिल थे। यह सामरिक चकमे की क्षमता खत्म होने को दर्शाता है।
- जापान ने ताइवान की सक्रिय रक्षा के लिए अपनी सुरक्षा नीति बदली है, दूर से हमला करने की क्षमताएं हासिल की हैं और अमेरिका के साथ अभियानगत तालमेल गहरा किया है।
- पीएलए कई थिएटर कमानों और चीन के तटरक्षक बल को शामिल करते हुए बड़े पैमाने के एकीकृत संयुक्त अभियानों की ओर बढ़कर अपनी रणनीति बदल रही है।
- जापान के सामने दो मोर्चों पर सुरक्षा की चुनौती है: उसे ताइवान जलडमरूमध्य की संभावित स्थिति की तैयारी के साथ उत्तर कोरिया के खिलाफ भी सतर्क रहना होगा।
- अमेरिका, जापान और फिलीपींस की त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी का विस्तार हो रहा है। मानवीय सहायता अभ्यासों के जरिए संभावित सैन्य निकासी और प्रतिक्रिया के लिए ढांचे तैयार किए जा रहे हैं।






