चीन के मंगल ऑर्बिटर ने अंतरतारकीय आगंतुक 3I/ATLAS की ऐतिहासिक तस्वीरें लीं

पढ़ने में 11 मिनट
चीन के मंगल ऑर्बिटर ने अंतरतारकीय आगंतुक 3I/ATLAS की ऐतिहासिक तस्वीरें लीं

लाल ग्रह से ली गई दुर्लभ ब्रह्मांडीय आगंतुक की तस्वीरें

गहरे अंतरिक्ष की खोज में चीन के तियानवेन-1 यान ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। यह यान फिलहाल मंगल की कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। अंतरिक्षयान ने धूमकेतु 3I/ATLAS की विस्तृत तस्वीरें सफलतापूर्वक लीं। यह दुर्लभ पिंड हमारे सौरमंडल के बाहर से आया है। अक्टूबर 2025 की शुरुआत में किया गया यह अवलोकन पहली बार है जब किसी अंतरतारकीय “आगंतुक” की तस्वीर मंगल की कक्षा से ली गई। यह दूरस्थ और गतिशील खगोलीय पिंडों पर नजर रखने की क्षमता में उल्लेखनीय प्रगति दर्शाता है। चीनी ऑर्बिटर से करीब 3 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर धूमकेतु का अवलोकन किया गया। उस समय यह 58 किलोमीटर प्रति सेकंड की प्रभावशाली गति से यात्रा कर रहा था। इस अभूतपूर्व अवलोकन से अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय को मूल्यवान आंकड़े मिले हैं, जो अन्य तारा प्रणालियों में बने पिंडों की संरचना और प्रक्षेप पथ का अध्ययन कर रहा है।

विषय-सूची
  1. लाल ग्रह से ली गई दुर्लभ ब्रह्मांडीय आगंतुक की तस्वीरें
  2. दूरस्थ तारा प्रणाली के रहस्यों से उठा पर्दा
  3. तीसरा पुष्ट अंतरतारकीय पिंड
  4. कक्षा में अभूतपूर्व इंजीनियरिंग करतब
  5. बेहद कठिन तकनीकी चुनौतियों से पार
  6. धूमकेतु की संरचना के शुरुआती संकेत
  7. अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रयास
  8. गहरे अंतरिक्ष में चीनी मिशन की बहुमुखी क्षमता साबित
  9. चीन के अंतरिक्ष अन्वेषण के अगले कदम
  10. मुख्य बातें

चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (CNSA) द्वारा जारी तस्वीरों में धूमकेतु का नाभिक और गैसीय कोमा उल्लेखनीय स्पष्टता से दिखाई देते हैं, जिससे इसकी संरचना का गहन विश्लेषण संभव हो सका है। इस अभियान ने तियानवेन-1 के उपकरणों की क्षमता की सीमाओं को परखा। इन्हें मूल रूप से मंगल की सतह का मानचित्रण करने के लिए बनाया गया था। इस मिशन की सफलता पुष्टि करती है कि यान के हार्डवेयर का इस्तेमाल गहरे अंतरिक्ष में तेज गति से चल रहे लक्ष्यों पर नजर रखने के लिए भी किया जा सकता है। उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे से मिले आंकड़े बीजिंग स्थित धरती-आधारित अनुप्रयोग प्रणाली ने प्राप्त किए, संसाधित किए और प्रदर्शित किए। वहां विशेष एल्गोरिदम ने कई एक्सपोज़र को संसाधित कर स्पष्ट तस्वीरें तैयार कीं, जिन्हें बाद में आम लोगों के लिए जारी किया गया।

विज्ञापन

दूरस्थ तारा प्रणाली के रहस्यों से उठा पर्दा

3I/ATLAS का मंगल के पास से गुजरना वैज्ञानिकों के लिए एक ऐसा अनूठा अवसर था, जो महज तस्वीर लेने से कहीं आगे जाता है। अंतरतारकीय पिंडों को ब्रह्मांड का जीवंत टाइम कैप्सूल माना जाता है, क्योंकि वे अपनी मूल तारा प्रणालियों की रासायनिक और भौतिक परिस्थितियों के बारे में अहम जानकारी साथ लाते हैं। धूमकेतु की संरचना के विश्लेषण से आकाशगंगा के दूसरे क्षेत्रों में ग्रहों के निर्माण के बारे में पता चल सकता है। इससे उन सैद्धांतिक मॉडलों को व्यावहारिक संदर्भ मिलता है, जो केवल हमारे सौरमंडल पर आधारित हैं। इन धूमकेतुओं से निकला हर गैस अणु और धूल का कण दूरस्थ तारकीय वातावरण की छाप लिए होता है। इससे खगोलविद प्रकाश-वर्षों दूर स्थित दुनियाओं का अप्रत्यक्ष अध्ययन कर सकते हैं।

CNSA के मुताबिक, 3I/ATLAS का निर्माण मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र के पास किसी प्राचीन तारे के आसपास हुआ हो सकता है। इसकी अनुमानित उम्र करीब 3 से 11 अरब वर्ष है। इस लिहाज से यह संभवतः सौरमंडल से भी पुराना है। यह बाह्यग्रहों की संरचना, विकास और शुरुआती तारकीय इतिहास का पता लगाने के लिए एक दुर्लभ नमूना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि धूमकेतु की उत्पत्ति एक ठंडी आदिग्रहीय डिस्क में हुई होगी। यह दूरस्थ क्षेत्र है, जहां पानी की बर्फ, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे वाष्पशील तत्व अरबों वर्षों तक संरक्षित रह सकते हैं। इन घटकों का वर्णक्रमीय विश्लेषण उस नीहारिका का तापमान और घनत्व तय करने के लिए जरूरी है, जहां धूमकेतु का जन्म हुआ था। यह समझना अहम है कि हमारे सौरमंडल समेत ग्रह प्रणालियां समय के साथ कैसे विकसित होती हैं।

तीसरा पुष्ट अंतरतारकीय पिंड

धूमकेतु 3I/ATLAS खगोलविदों द्वारा खोजा गया तीसरा पुष्ट अंतरतारकीय आगंतुक है। इससे पहले 2017 में ‘ओउमुआमुआ और 2019 में 2I/Borisov गुजरे थे। इसकी खोज जुलाई 2025 में चिली के रियो हुरताडो में ATLAS दूरबीन प्रणाली (क्षुद्रग्रह स्थलीय-प्रभाव अंतिम चेतावनी प्रणाली) ने की थी। इसके प्रक्षेप पथ के विश्लेषण से जल्द ही इसकी सौरमंडल से बाहर की उत्पत्ति की पुष्टि हो गई। इसका प्रक्षेप पथ अतिपरवलयाकार बताया गया है। यह स्पष्ट गणितीय संकेत है कि इसकी उत्पत्ति हमारी ग्रह प्रणाली के बाहर हुई है।

स्थानीय धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों की दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं से अलग, अतिपरवलयाकार प्रक्षेप पथ का मतलब है कि इस पिंड की गति सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त है। हमारे ब्रह्मांडीय पड़ोस से गुजरने के बाद यह अंतरतारकीय अंतरिक्ष में अपनी यात्रा जारी रख सकता है। अक्टूबर के आखिर में धूमकेतु सूर्य के सबसे करीब पहुंचा। उस समय वह करीब 1.4 खगोलीय इकाई, यानी 21 करोड़ किलोमीटर दूर था और मंगल की कक्षा के ठीक भीतर से गुजर रहा था।

विज्ञापन

कक्षा में अभूतपूर्व इंजीनियरिंग करतब

तियानवेन-1 द्वारा धूमकेतु 3I/ATLAS की तस्वीरें लेना इंजीनियरिंग का ऐसा कारनामा था, जिसके लिए बेहद सावधानी से और नए तरीके से योजना बनानी पड़ी। यान का उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरा HiRIC मंगल की स्थलाकृति की बेहद सटीक तस्वीरें लेने के लिए बनाया गया था। यह अंतरिक्ष की अंधेरी पृष्ठभूमि में हल्की चमक वाले छोटे, तेज गति से चल रहे पिंड को ट्रैक करने से बिल्कुल अलग काम है। लक्ष्य हासिल करने के लिए धरती पर मौजूद मिशन टीम को शुरू से ही नई अवलोकन रणनीति तैयार करनी पड़ी।

एयरोस्पेस नॉलेज पत्रिका के प्रधान संपादक वांग यानान ने ग्लोबल टाइम्स को इस उपलब्धि का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि मंगल की खोज के लिए बनाया गया तियानवेन-1 मंगल की कक्षा से इतने दूर स्थित पिंड की तस्वीरें लेने में सक्षम रहा। इससे संकेत मिलता है कि ग्रहों का पता लगाने के लिए प्रक्षेपित अंतरिक्षयान और भी दूरस्थ खगोलीय पिंडों के अवलोकन के नए मंच बन सकते हैं। वांग ने बताया कि कक्षा में यान की दिशा पर सटीक नियंत्रण, जिसमें संभवतः कई अक्षों के बीच तालमेल शामिल हो, बेहद दूर स्थित लक्ष्य के साथ ऑप्टिकल सेंसर को सही ढंग से संरेखित करने और फिर उनका रुख बदलने के लिए जरूरी है। यह कक्षीय अवलोकन और दिशा-नियंत्रण की व्यापक परीक्षा है।

तैयारी के तहत यान के लक्ष्य-निर्धारण तंत्र को पूरी तरह से फिर से कैलिब्रेट किया गया और उपकरणों को धूमकेतु के अनुमानित प्रक्षेप पथ के अनुरूप करने के लिए सटीक कक्षीय चालें चली गईं। आदर्श एक्सपोज़र समय तय करने के लिए टीम ने व्यापक सिमुलेशन किए। एक्सपोज़र इतना कम होना था कि यान और धूमकेतु की सापेक्ष गति से तस्वीर धुंधली न हो, लेकिन इतना लंबा भी कि नाभिक और कोमा से परावर्तित हल्की रोशनी दर्ज की जा सके। उपकरणों का तापीय स्थायित्व भी अहम था। अवलोकन के कुछ मिनटों के दौरान लेंस और सेंसर को उनके अनुकूल तापमान सीमा में रखने के लिए समायोजन जरूरी थे।

बेहद कठिन तकनीकी चुनौतियों से पार

3I/ATLAS की तस्वीर लेना खास तौर पर चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि यह बहुत दूर और आकार में छोटा है। इसका व्यास करीब 5.6 किलोमीटर है। हालांकि, अंतरतारकीय पिंड और ऑर्बिटर की गति ने चुनौती को और बढ़ा दिया। 3I/ATLAS करीब 58 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा कर रहा है, जबकि ऑर्बिटर की सापेक्ष गति 86 किलोमीटर प्रति सेकंड है। इसके अलावा, HiRIC कैमरा मंगल की सतह पर तेज रोशनी में दिखने वाली विशेषताओं का अध्ययन करने के लिए बनाया गया था।

CNSA के मुताबिक, इतने दूर और अपेक्षाकृत धुंधले लक्ष्य की तस्वीर लेने का यह पहला प्रयास था। यह मंगल की सतह के लक्ष्यों की तुलना में 10,000 से 100,000 गुना कम चमकीला दिखाई दिया। इस मिशन ने इतने धुंधले लक्ष्य का पता लगाने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे की क्षमता को उसकी सीमा तक परखा। तुलना के लिए, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मार्स एक्सप्रेस और एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर ने भी अपने-अपने कैमरों, हाई रिज़ॉल्यूशन स्टीरियो कैमरा और कलर एंड स्टीरियो सर्फेस इमेजिंग सिस्टम, से तस्वीरें लीं। उन्हें भी एक्सपोज़र समय और संवेदनशीलता से जुड़ी ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

विज्ञापन

धूमकेतु की संरचना के शुरुआती संकेत

तियानवेन-1 से मिले वर्णक्रमीय आंकड़े और शुरुआती तस्वीरें पहले ही 3I/ATLAS की प्रकृति के बारे में अहम संकेत दे रही हैं। तस्वीरों में एक सघन और स्पष्ट रूप से परिभाषित केंद्र दिखाई देता है, जो संभवतः चट्टान और अलग-अलग तरह की बर्फ के मिश्रण से बना है। इसकी सतह से परावर्तित प्रकाश के विश्लेषण से लालिमा लिए कार्बनिक धूल की मौजूदगी का संकेत मिलता है। ठंडे क्षेत्रों में अपने तारे से दूर बने खगोलीय पिंडों में यह आम बात है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि अक्टूबर के आखिर में प्रकाशित एक प्रीप्रिंट शोधपत्र में पाया गया कि धूमकेतु “सूर्य से स्पष्ट रूप से ज्यादा नीला दिखता है।” इससे इसकी धूल की संरचना को लेकर वैज्ञानिक पहेली खड़ी हो गई है।

इसके अलावा, अन्य अभियानों के स्पेक्ट्रोमीटरों ने सतह से उर्ध्वपातित हो रही पानी की बर्फ और कार्बन डाइऑक्साइड के संकेतों के साथ कार्बन मोनोऑक्साइड के अंश भी दर्ज किए हैं। ये संकेत धूमकेतुओं की सामान्य गतिविधि की पुष्टि करते हैं। धूमकेतु में सक्रियता के स्पष्ट लक्षण दिखे हैं, जैसे एक दुर्लभ प्रतिपुच्छ का बनना और असामान्य रासायनिक संरचना। हाल में ऐसा प्रतीत हुआ है कि इस पिंड ने अपना रास्ता थोड़ा बदला है और संभवतः इसका काफी द्रव्यमान कम हुआ है। ये संकेत बताते हैं कि धूमकेतु गैस छोड़ रहा है, जिससे उसके त्वरण में बदलाव आ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रयास

3I/ATLAS का अवलोकन चीनी अंतरिक्ष एजेंसी की अकेली पहल नहीं थी। मंगल की कक्षा में मौजूद अंतरराष्ट्रीय यानों के बेड़े ने समन्वित अवलोकन अभियान संभव बनाया। इससे पिंड के बारे में जुटाए गए आंकड़ों की मात्रा और गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और NASA ने भी अपने ऑर्बिटर को धूमकेतु की कोमा में गैसों की संरचना का अध्ययन करने और उसके नाभिक की और अधिक उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेने के लिए निर्देशित किया।

गैलीलियो प्रोजेक्ट के प्रमुख और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के खगोल विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवी लोएब ने बताया कि 3I/ATLAS की सबसे उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें NASA के मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर पर लगे HiRISE कैमरे से ली गईं। 50 सेंटीमीटर अपर्चर वाले इस कैमरे ने प्रति पिक्सेल करीब 30 किलोमीटर का स्थानिक रिज़ॉल्यूशन हासिल किया। मंगल की सतह पर मौजूद पर्सिवियरेंस और क्यूरियोसिटी रोवर को भी मंगल के आकाश में धूमकेतु को खोजने और देखने का प्रयास करने के लिए प्रोग्राम किया गया था। इससे जमीन से एक अनूठा नजरिया मिला।

विज्ञापन

गहरे अंतरिक्ष में चीनी मिशन की बहुमुखी क्षमता साबित

तियानवेन-1 टीम के लिए धूमकेतु पर सफलतापूर्वक नजर रखने का अभियान मंगल के अध्ययन के मुख्य मिशन से आगे यान की क्षमताओं की कड़ी परीक्षा था। इस अभियान की सफलता ने ऑर्बिटर के नेविगेशन और दिशा-नियंत्रण तंत्र की लचीलेपन और मजबूती को दर्शाया। यह उपलब्धि भविष्य में अवसर मिलने पर किए जाने वाले अवलोकन अभियानों के लिए अंतरिक्षयान को सक्षम बनाती है। CNSA ने कहा कि धुंधले खगोलीय पिंडों का अवलोकन करने की क्षमता से उपयोगी तकनीकी परीक्षण करने और अनुभव जुटाने का अवसर मिला।

वांग यानान ने जोर देकर कहा कि सेंसरों को तय दिशा में संरेखित करने के लिए कक्षा में इस तरह के सटीक समायोजन भविष्य के क्षुद्रग्रह-अन्वेषण अभियानों के लिए जरूरी कौशल हैं। उन्होंने कहा कि चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ उपलब्धियां साझा करने के सिद्धांत पर कायम रहा है। प्रमुख अंतरिक्ष देशों के अवलोकन संसाधनों और सूचनाओं को साझा कर मानवता इस रहस्यमय पिंड को बेहतर ढंग से समझ सकती है। सफल अवलोकन तियानवेन-1 के लिए एक अहम कदम है। यह एक “अप्रत्याशित उपलब्धि” है, जिसका बाह्यग्रहों के अध्ययन में मानवता के ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा महत्व है।

चीन के अंतरिक्ष अन्वेषण के अगले कदम

जुलाई 2020 में प्रक्षेपित तियानवेन-1 मिशन चीन के अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक अहम पड़ाव है। यान फरवरी 2021 में मंगल की कक्षा में पहुंचा और उसी साल मई में झुरोंग रोवर को सफलतापूर्वक उतारा। फिलहाल ऑर्बिटर अपना मानचित्रण कार्य जारी रखे हुए है और लाल ग्रह के बारे में वैज्ञानिक ज्ञान का विस्तार कर रहा है। यह चार साल से अधिक समय से मंगल की कक्षा में स्थिर रूप से काम कर रहा है।

3I/ATLAS का अवलोकन करने से मिला अनुभव भविष्य के चीनी अभियानों, खासकर तियानवेन-2, के लिए बेहद मूल्यवान माना जा रहा है। मई 2025 में प्रक्षेपित इस नए मिशन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य पृथ्वी के निकट एक क्षुद्रग्रह से नमूने जुटाना और मुख्य क्षुद्रग्रह घेरे के एक धूमकेतु का अध्ययन करना है। अंतरतारकीय आगंतुक के अवलोकन के लिए तैयार की गई प्रक्रियाएं इन नए और जटिल गहरे अंतरिक्ष अभियानों में सीधे इस्तेमाल होंगी। तियानवेन-1 पर किए गए तकनीकी परीक्षण तियानवेन-2 की आगामी मुलाकातों के लिए जरूरी उन्नत संचालन का रास्ता तैयार करते हैं।

विज्ञापन

मुख्य बातें

  • तियानवेन-1 ने अक्टूबर 2025 की शुरुआत में मंगल की कक्षा से अंतरतारकीय धूमकेतु 3I/ATLAS की तस्वीरें लीं।
  • ‘ओउमुआमुआ और 2I/Borisov के बाद यह तीसरा पुष्ट अंतरतारकीय पिंड है।
  • अवलोकन करीब 3 करोड़ किलोमीटर की दूरी से किया गया।
  • धूमकेतु 58 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा कर रहा है, जबकि ऑर्बिटर के सापेक्ष उसकी गति 86 किलोमीटर प्रति सेकंड है।
  • इस अभियान ने मंगल की चमकीली सतह की तस्वीरें लेने के लिए बनाए गए HiRIC कैमरे की क्षमता को उसकी सीमा तक परखा।
  • 3I/ATLAS की उम्र 3 से 11 अरब वर्ष के बीच होने का अनुमान है।
  • आंकड़े अन्य तारा प्रणालियों की संरचना और ग्रहों के निर्माण के बारे में संकेत देते हैं।
  • इस सफलता से चीन के तियानवेन-2 क्षुद्रग्रह नमूना-वापसी मिशन की तैयारियों में मदद मिलेगी।
  • मंगल की कक्षा में मौजूद ऑर्बिटर और रोवर के अंतरराष्ट्रीय बेड़े ने इस पिंड के अध्ययन के लिए समन्वय किया।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है