इंडोनेशिया ने 2026 के लक्ष्यों के साथ भूमि जब्ती अभियान तेज किया
राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने 7 जनवरी को घोषणा की कि इंडोनेशिया 2026 में पाम ऑयल के चार से पांच मिलियन हेक्टेयर अतिरिक्त बागानों को जब्त करने की योजना बना रहा है। इससे विवादास्पद कार्रवाई और व्यापक होगी, जिसके तहत पहले ही विशाल क्षेत्र राज्य के नियंत्रण में आ चुके हैं। पश्चिम जावा में धान की फसल कटाई के एक समारोह में बोलते हुए प्रबोवो ने कहा कि उनके प्रशासन ने 2025 के दौरान वन क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित 4.1 मिलियन हेक्टेयर बागानों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था और आने वाले वर्ष में इससे भी बड़ी जब्ती की योजना है।
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यह घोषणा प्रबोवो के नेतृत्व में इंडोनेशिया की संसाधन-प्रबंधन रणनीति में बड़ी तेजी का संकेत है। प्रबोवो ने खुद को राष्ट्रीय संपदा का रक्षक बताया है और कहा है कि इसकी लूट अभिजात वर्ग तथा विदेशी हितों द्वारा की जा रही है। जब्ती अभियान में बड़ी पाम ऑयल कंपनियों और छोटे किसानों, दोनों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे खाद्य सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में निवेश की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
हमने कानूनों का उल्लंघन करने वाले चार मिलियन हेक्टेयर पाम ऑयल बागानों को नियंत्रित किया है और अपने कब्जे में लिया है। है न, सरकारी वकील? प्रबोवो ने समारोह में अटॉर्नी जनरल कार्यालय के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा। 2026 में हम शायद चार या पांच मिलियन और जब्त करेंगे।
इंडोनेशिया दुनिया में पाम ऑयल का सबसे बड़ा उत्पादक है। वैश्विक उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 57 प्रतिशत और निर्यात में 60 प्रतिशत है। देश में पाम ऑयल बागानों का कुल क्षेत्रफल 16.8 मिलियन हेक्टेयर है। इसका अर्थ है कि प्रस्तावित जब्ती से लगभग आधे बागान सीधे राज्य की निगरानी या नियंत्रण में आ सकते हैं।
सैन्य नेतृत्व वाली टास्क फोर्स बदल रही है पाम ऑयल क्षेत्र की तस्वीर
जब्ती अभियान का नेतृत्व जनवरी 2025 में गठित एक विशेष वन क्षेत्र नियंत्रण टास्क फोर्स कर रही है, जिसमें सैन्यकर्मी, पुलिस और सरकारी अभियोजक शामिल हैं। रक्षा मंत्री स्जाफ्री स्जामसोएद्दिन इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। यह प्रबोवो प्रशासन के तहत आर्थिक शासन में सेना की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
टास्क फोर्स को बिना उचित परमिट वन क्षेत्रों में संचालित बागानों की पहचान करने, जुर्माना लगाने और भूमि का स्वामित्व राज्य को हस्तांतरित करने का व्यापक अधिकार है। जब्त की गई अधिकतर जमीन एग्रीनास पाल्मा नुसंतारा को दी गई है। यह सरकारी कंपनी पहले बुनियादी ढांचा सेवाएं देने वाली फर्म थी, लेकिन अब क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी पाम ऑयल कंपनी बन गई है। अब तक जब्त बागानों के लगभग 1.7 मिलियन हेक्टेयर एग्रीनास को हस्तांतरित किए जा चुके हैं।
इस अभियान का पैमाना अभूतपूर्व है। केवल नौ महीनों में सरकार ने स्विट्जरलैंड के लगभग बराबर क्षेत्र जब्त किया है, जिसमें बागान, खनन रियायतें और प्रसंस्करण सुविधाएं शामिल हैं। मार्च 2025 में दुटा पाल्मा समूह से 221,000 हेक्टेयर जमीन जब्त किए जाने के बाद अभियान को गति मिली। इस समूह के मालिक सूर्या दरमादी कभी इंडोनेशिया के सबसे धनी लोगों में शामिल थे और धनशोधन तथा भ्रष्टाचार जांच के घेरे में आए थे।
एग्रीनास के अध्यक्ष निदेशक अगुस सुतोमो ने सितंबर में संसद को बताया कि कंपनी के विशाल भूमि भंडार का बड़ा हिस्सा अभी उत्पादक नहीं है और आधे से भी कम भूमि पर पेड़ लगाए गए हैं। इस पोर्टफोलियो में कई छोटे भूखंड हैं, जिनमें से हर एक का आकार कुशल खेती के लिए पर्याप्त नहीं है। इन्हें बहाल करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है।
टास्क फोर्स ने किसानों को राजस्व-साझेदारी व्यवस्था के तहत जब्त जमीन पर बने रहने देने का प्रस्ताव दिया है। इसमें आमतौर पर एग्रीनास को आय का 40 से 45 प्रतिशत मिलता है और किसानों के पास 55 से 60 प्रतिशत रहता है। हालांकि, कई छोटे किसानों ने इन शर्तों का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे उनकी स्वतंत्रता छिनती है और दशकों की मेहनत तथा निवेश के बदले पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलता।
हमने पेड़ लगाए और उनकी देखभाल के लिए कड़ी मेहनत की, उत्तरी सुमात्रा के 48 वर्षीय किसान रुबाहन हसीबुआन ने कहा। उनके परिवार और पड़ोसियों की लगभग 2,000 हेक्टेयर खेती की जमीन जब्त की गई है। हमने अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।विज्ञापनवैश्विक बाजार में हलचल और कीमतों का अनुमान
जब्ती अभियान से वैश्विक पाम ऑयल बाजारों में चिंता बढ़ी है। विश्लेषकों का अनुमान है कि उत्पादन घटने से पूरे 2026 में कीमतें बढ़ सकती हैं। इंडोनेशिया का पाम ऑयल निर्यात वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए अहम है। इसमें किसी भी बड़े व्यवधान का असर दुनिया भर में खाना पकाने के तेल, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और जैव ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा।
हैम्बर्ग स्थित पूर्वानुमान फर्म ऑयल वर्ल्ड के कार्यकारी निदेशक थॉमस मील्के ने बाली में उद्योग सम्मेलन के दौरान अनुमान जताया कि मलेशिया का बेंचमार्क पाम ऑयल वायदा अनुबंध छह महीनों में 5,000 रिंगिट (1,183.71 अमेरिकी डॉलर) प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है। भारत की गोदरेज इंटरनेशनल के निदेशक डोराब मिस्त्री ने कहा कि अगर इंडोनेशिया बागानों को जब्त करना जारी रखता है और बी50 बायोडीजल योजना आगे बढ़ाता है, तो जनवरी से मार्च के बीच वायदा कीमतें 5,500 रिंगिट प्रति टन तक पहुंच सकती हैं।
कीमतों पर यह दबाव उद्योग के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों को और बढ़ाता है। इनमें पुराने पेड़ों से घटती पैदावार और धीमी गति से चल रही दोबारा रोपाई शामिल हैं। मील्के का अनुमान है कि इंडोनेशिया का पाम ऑयल उत्पादन 2025 के 49.4 मिलियन टन से घटकर 2026 में 49 मिलियन टन रह जाएगा और 2027 में भी गिरावट जारी रहेगी।
इंडोनेशिया पाम ऑयल एसोसिएशन (गैपकी) ने इससे अधिक आशावादी अनुमान पेश किया है। उसके मुताबिक अनुकूल मौसम और नए पेड़ों के परिपक्व होने से 2026 में उत्पादन 3 से 4 प्रतिशत बढ़ सकता है। हालांकि, संस्था के प्रवक्ता फाधिल हसन ने जब्ती को लेकर चिंताओं को स्वीकार किया और कहा कि उत्पादन पर असर सीमित और अस्थायी रखने के लिए संतुलित कार्रवाई जरूरी है।
फास्टमार्केट्स के विश्लेषकों का अनुमान है कि भूमि स्वामित्व को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के चलते 2 से 5 मिलियन टन कच्चे पाम ऑयल (सीपीओ) का उत्पादन जोखिम में पड़ सकता है। सरकार अब तक 3.3 मिलियन हेक्टेयर जमीन जब्त कर चुकी है। इसमें से तेल पाम के पेड़ लगे 1.5 मिलियन हेक्टेयर एग्रीनास को हस्तांतरित किए गए हैं, जबकि 1.8 मिलियन हेक्टेयर का सत्यापन किया जा रहा है।
जब्ती से पैदा हुई अनिश्चितता के बीच इंडोनेशिया की महत्वाकांक्षी बायोडीजल विस्तार योजनाएं भी हैं। देश ने फरवरी 2025 से बायोडीजल मिश्रण का लक्ष्य बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया और 2026 की दूसरी छमाही तक इसे 50 प्रतिशत (बी50) करने का लक्ष्य रखा। सरकार ने आगे विचार की जरूरत बताते हुए 2026 के लिए तत्काल लक्ष्य घटाकर बी45 कर दिया है। फिर भी, इस नीति के तहत पाम ऑयल की बड़ी मात्रा निर्यात बाजारों से हटाकर घरेलू ईंधन जरूरतों की ओर मोड़ी जाएगी।
विज्ञापनमील्के के अनुमान के मुताबिक बी50 लक्ष्य पूरा करने के लिए बायोडीजल उत्पादन में 2.2 मिलियन टन अतिरिक्त पाम ऑयल की जरूरत होगी। ग्लेनॉक इकोनॉमिक्स के विश्लेषक जूलियन मैकगिल के अनुसार, जैव ईंधन में अधिक पाम ऑयल मिलाने से लेवी में 7.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है, क्योंकि पाम ऑयल कच्चे माल और डीजल ईंधन की कीमतों के बीच अंतर बढ़ रहा है।
पर्यावरण बहाली बनाम आर्थिक अनिश्चितता
इंडोनेशियाई सरकार इस जब्ती अभियान को पर्यावरण बहाली और शासन सुधार के लिए जरूरी बताती है। प्रबोवो ने जोर दिया है कि इस अभियान का मकसद अवैध गतिविधियों के कारण राज्य के हाथ से निकले संसाधनों को वापस हासिल करना और भूमि प्रबंधन बेहतर बनाना है। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र के कारण इंडोनेशिया में लाखों हेक्टेयर वन नष्ट हुए हैं।
2025 के अंत में सुमात्रा में आई बाढ़ और भूस्खलन में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इन आपदाओं को और बदतर बनाने में वनों की कटाई की भूमिका ने जकार्ता के अभियान को गति दी है। पर्यावरण कार्यकर्ता लंबे समय से पाम ऑयल के विस्तार की आलोचना करते आए हैं। उनका कहना है कि इससे कार्बन-समृद्ध पीटलैंड और ओरंगुटान, बाघ तथा गैंडे जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के आवास नष्ट हो रहे हैं।
प्रबोवो ने इस अभियान को करोड़ों इंडोनेशियाई लोगों के हितों की रक्षा का सही और नेक रास्ता बताया है। उनका कहना है कि वन भूमि के विशाल क्षेत्र अब भी कारोबारी संचालकों के अवैध नियंत्रण में हैं और इस समस्या का समाधान न किया गया तो राज्य को सैकड़ों ट्रिलियन रुपिया का नुकसान हो सकता है।
हालांकि, इस अभियान से निवेश के माहौल और नीतिगत स्थिरता को लेकर बड़ी चिंताएं पैदा हुई हैं। जकार्ता स्थित सेंटर ऑफ इकोनॉमिक एंड लॉ स्टडीज के कार्यकारी निदेशक भीमा युधिस्तिरा अधिनेगारा ने इस तरीके को प्रबोवो-शैली की नियंत्रित अर्थव्यवस्था का बढ़ता हुआ रूप बताया।
इस तरह के तरीकों से निवेशकों की दिलचस्पी घटती है, चाहे वह बागान क्षेत्र हो या संरक्षण का काम, भीमा ने कहा। स्वामित्व को लेकर अनिश्चितता और पिछली तारीख से दंड लगाए जाने के खतरे का असर पहले ही इस क्षेत्र के निवेश फैसलों पर पड़ने लगा है।
उद्योग समूहों ने चेतावनी दी है कि जब्ती नीति से उर्वरक और खेती में निवेश सीमित हो सकता है। रखरखाव गतिविधियां बाधित होने से दो से तीन महीनों में उत्पादन घटने लगेगा। कलीस्वारी इंटरकॉन्टिनेंटल में ट्रेडिंग और हेजिंग रणनीतियों के प्रमुख ज्ञानसेकर त्यागराजन ने कहा कि अगर जब्ती होती है तो आपूर्ति को निश्चित रूप से नुकसान पहुंचेगा।
उत्पादन को जितना नुकसान होगा, उसके बारे में अभी जितना कहने की हमारी हिम्मत है, उससे भी अधिक नुकसान का जोखिम शायद कम जोखिम की तुलना में बड़ा है, थॉमस मील्के ने बाली सम्मेलन में कहा। यह बहुत नाजुक और बेहद संवेदनशील स्थिति है।विज्ञापनसंसाधन राष्ट्रवाद का व्यापक रुझान
पाम ऑयल की जब्ती इंडोनेशिया के विभिन्न कमोडिटी क्षेत्रों में संसाधनों को एक जगह समेटने के व्यापक रुझान का हिस्सा है। सरकार ने इसी तरह की कार्रवाई में अवैध खनन पर भी शिकंजा कसते हुए टिन प्रगलन संयंत्रों, निकल खदानों और कोयला खनन को निशाना बनाया है।
टिन खनन क्षेत्र में सेना के समर्थन वाली एक टास्क फोर्स ने बांका और बेलितुंग द्वीपों में अभियान चलाया। उसने अपतटीय ड्रेजिंग जहाजों और अवैध प्रगलन संयंत्रों को निशाना बनाया तथा जमीन के नीचे छिपी भारी मशीनें बरामद कीं। यह कार्रवाई पीटी टिमाह के अधिकारियों को दोषी ठहराए जाने के बाद हुई। राज्य के स्वामित्व वाली यह कंपनी इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी है और इसके अधिकारियों ने अवैध टिन को आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने के लिए कई वर्षों तक भ्रष्टाचार योजना चलाने की निगरानी की थी।
पीटी टिमाह में भ्रष्टाचार घोटाले के बावजूद सरकार ने जब्त टिन संपत्तियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी इसी कंपनी को सौंप दी और सेवानिवृत्त सेना कर्नल रेस्टु विदियंतोरो को इसका अध्यक्ष निदेशक नियुक्त किया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे वास्तविक सुधार के बजाय राज्य के नियंत्रण को बढ़ाने का चलन सामने आता है।
यह किसी और नाम से राष्ट्रीयकरण ही है, इंडोनेशिया में सेना की भूमिका पर शोध करने वाले आईएसईएएस-युसोफ इशाक इंस्टीट्यूट के विजिटिंग फेलो मादे सुप्रियातमा ने कहा। लेकिन जोखिम यह है कि इसे राष्ट्रीयकरण नहीं माना जा रहा। इसके बजाय प्रबोवो इसे कानून लागू करने का मामला बताते हैं। यह सब राजनीतिक कारणों से प्रेरित है; इसका आर्थिक तर्क से कोई लेना-देना नहीं।
इस कार्रवाई पर खनन समुदायों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। कुछ निवासी अवैध खनन घटने से हुए पर्यावरणीय सुधारों का स्वागत करते हैं, जबकि अन्य ने विकल्पों के बिना अपनी आजीविका खो दी है। पूर्वी बेलितुंग के गंतुङ के खनिक अरी ने कहा, अब कोई काम नहीं बचा है। हमारे लिए जीवन कठिन होता जा रहा है; जिस खदान में मैं काम करता था, वह भी बंद हो गई है। वे उन छोटे लोगों के बारे में सोचे बिना कार्रवाई करते हैं जो टिन खनन पर निर्भर हैं।
पाम ऑयल क्षेत्र में जमीन के आवंटन एक-दूसरे से टकराना आम है। कुछ क्षेत्रों में खेती की अनुमति है, लेकिन उन्हें अब भी वन क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है। कई बागान संचालकों का कहना है कि वे उस जमीन पर खेती कर रहे हैं जिसे उन्होंने वर्षों पहले खरीदा था या आंतरिक प्रवासन को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं के तहत उन्हें दिया गया था।
प्रबोवो का दावा है कि राज्य ने 4 मिलियन हेक्टेयर जमीन वापस हासिल की है, क्योंकि ये भूखंड वन क्षेत्रों में थे, कंसल्टेंसी कंट्रोल रिस्क्स के अचमद सुकारसोनो ने कहा। लेकिन ऐसा हुआ कैसे? स्थानीय सरकारों और सैन्य अधिकारियों की मंजूरी के बिना पाम ऑयल कंपनियां इतनी विशाल जमीन अवैध रूप से नहीं ले सकती थीं।
विज्ञापनवित्तीय दांव और कंपनियों पर असर
जब्ती अभियान के वित्तीय नतीजे इंडोनेशियाई सरकार और प्रभावित कंपनियों, दोनों के लिए बड़े हैं। अटॉर्नी जनरल सानितियार बुरहानुद्दीन ने दिसंबर में घोषणा की कि सरकार 2025 की जब्ती में शामिल पाम ऑयल कंपनियों से लगभग 6.5 अरब डॉलर का जुर्माना वसूल सकती है।
2026 के लिए बुरहानुद्दीन ने वन क्षेत्रों में पाम ऑयल के लिए 109.6 ट्रिलियन रुपिया (6.54 अरब डॉलर) और खनन गतिविधियों के लिए 32.63 ट्रिलियन रुपिया (1.95 अरब डॉलर) के प्रशासनिक जुर्माने की संभावित आय बताई। टास्क फोर्स 20 पाम ऑयल कंपनियों और एक निकल खनन कंपनी से अब तक 2.34 ट्रिलियन रुपिया (139.70 मिलियन डॉलर) से अधिक का जुर्माना वसूल चुकी है।
सरकार द्वारा तय सूत्र के अनुसार, जमीन साफ करने का काम शुरू होने के बाद से हर साल के लिए बागान कंपनियों पर प्रति हेक्टेयर 1,497 डॉलर का शुल्क लगाया जाएगा। तेल पाम के पेड़ों को उत्पादन शुरू करने में लगने वाले समय के मद्देनजर पांच साल की छूट दी जाएगी। इससे कंपनियों पर उनकी जमीन के मूल्य से भी अधिक जुर्माना लग सकता है।
बड़ी अंतरराष्ट्रीय पाम ऑयल कंपनियां पहले ही अपने जोखिम का आकलन कर रही हैं। सिंगापुर स्थित कृषि उपज कारोबारी विलमार इंटरनेशनल लिमिटेड ने कहा है कि उसके बागान क्षेत्र के कुछ हजार हेक्टेयर पर असर पड़ने की आशंका है और वह अधिकारियों के साथ चर्चा कर रही है। मलेशिया में सूचीबद्ध आईओआई कॉरपोरेशन बीएचडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ली येओ चोर के अनुसार, कालीमंतान में पाम बागान और मिलें चलाने वाली कंपनी इंडोनेशिया में निवेश से पहले अब अधिक जोखिम आकलन करेगी।
इंडोनेशियाई अटॉर्नी जनरल कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, लगभग चार दर्जन पाम कंपनियों को कुल करीब 560 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। वहीं, 22 खनन कंपनियों को अवैध कमाई राज्य को लौटाने के लिए 1.7 अरब डॉलर से अधिक चुकाने का आदेश दिया गया है।
निकल क्षेत्र में सरकार पीटी वेदा बे निकल से लगभग 3 ट्रिलियन रुपिया (179 मिलियन डॉलर) के जुर्माने की मांग कर रही है। इस कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक चीन का त्सिंगशान होल्डिंग समूह है। कंपनी पर अपनी 45,000 हेक्टेयर की साइट में से 148 हेक्टेयर का उल्लंघन करने का आरोप है। निकल खनन कंपनियों के लिए जुर्माने की दर 389,000 डॉलर प्रति हेक्टेयर तय की गई है। यह रकम उत्पादन पर अब भी हावी कई छोटी कंपनियों को दिवालिया करने के लिए काफी है।
संसद में बंद कमरे में हुई प्रस्तुति के अनुसार, उद्योग समूह गैपकी को अपने सदस्यों से शिकायतें मिली हैं कि जब्त बागानों की फसल से होने वाली आय पूरी तरह एग्रीनास के खाते में जाती है और साझेदारों को भुगतान 30 दिन से भी अधिक देर से किया जाता है। भुगतान में इस देरी से कामकाज जारी रखने की कोशिश कर रही कंपनियों और किसानों के लिए नकदी की समस्या पैदा होती है।
विज्ञापनसंक्षेप में
- इंडोनेशिया 2026 में पाम ऑयल के 4-5 मिलियन हेक्टेयर अतिरिक्त बागान जब्त करने की योजना बना रहा है। 2025 में 4.1 मिलियन हेक्टेयर जब्त किए गए थे।
- सेना के समर्थन वाली टास्क फोर्स अभियान का नेतृत्व कर रही है और जमीन राज्य के स्वामित्व वाली एग्रीनास पाल्मा नुसंतारा को हस्तांतरित कर रही है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह अब दुनिया की सबसे बड़ी पाम ऑयल कंपनी है।
- विश्लेषकों का अनुमान है कि उत्पादन में व्यवधान और बायोडीजल लक्ष्यों के चलते पाम ऑयल की कीमतें 5,000-5,500 रिंगिट प्रति टन तक बढ़ सकती हैं।
- सरकार को 2026 में पाम ऑयल और खनन कंपनियों से 8.5 अरब डॉलर के संभावित जुर्माने की उम्मीद है।
- इंडोनेशिया वैश्विक पाम ऑयल का 57 प्रतिशत उत्पादन करता है और निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। इसलिए जब्ती का विश्व बाजारों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
- यह अभियान संसाधन राष्ट्रवाद की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत टिन, निकल, कोयला और अन्य खनिज क्षेत्रों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
- राज्य द्वारा प्रस्तावित राजस्व-साझेदारी व्यवस्था से छोटे किसानों की स्वतंत्रता छिनने का खतरा है।
- निवेशकों को नीतिगत अनिश्चितता और पिछली तारीख से लगाए जाने वाले ऐसे जुर्मानों की चिंता है, जो संपत्ति के मूल्य से अधिक हो सकते हैं।
- वनों की कटाई घटने से होने वाले पर्यावरणीय लाभ के सामने आर्थिक जोखिम और आजीविका में व्यवधान की चिंताएं हैं।






