वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव के बीच वियतनाम की औद्योगिक तेजी को बढ़ती चुनौतियों का सामना

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वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव के बीच वियतनाम की औद्योगिक तेजी को बढ़ती चुनौतियों का सामना

धान के खेतों से औद्योगिक क्षेत्रों तक

बैक निन्ह में आया बदलाव हर ओर दिखाई देता है। हनोई के ठीक उत्तर में स्थित इस शहर की पहचान कभी हरे-भरे धान के खेतों और क्वान हो लोकगीतों की मनमोहक प्रेम-युगल गायकी से थी। आज यहां दूर-दूर तक फैले कारखाने, चीनी और कोरियाई भाषा में सेवाओं का विज्ञापन करते होर्डिंग और एशिया की बड़ी खुदरा कंपनियों के नाम वाली दुकानें नजर आती हैं। यह तेज बदलाव दक्षिण-पूर्व एशिया को नया रूप दे रहे व्यापक रुझान का हिस्सा है। वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार युद्ध तेज होने के साथ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं बिखर रही हैं और दूसरी जगहों पर फिर से बन रही हैं। इस बदलाव से वियतनाम को बड़ा लाभ हुआ है। शुल्क बढ़ने और चीन के विकल्प के तौर पर विनिर्माण केंद्र तलाशने की वजह से विदेशी निवेश की जो लहर तेज हुई, वियतनाम ने उसे आकर्षित किया है।

विषय-सूची
  1. धान के खेतों से औद्योगिक क्षेत्रों तक
  2. बड़े पलायन के कारण
  3. दो वियतनाम की कहानी
  4. उत्तर का औद्योगिक केंद्र
  5. दक्षिण का निर्यात केंद्र
  6. तेज वृद्धि की सीमाएं
  7. आपूर्ति शृंखला की दुविधा
  8. व्यापार संबंधों और प्रतिस्पर्धा के बीच राह
  9. 2045 की ओर
  10. मुख्य बिंदु

शुरुआती तेजी जापान और दक्षिण कोरिया के निवेश से आई, जिसने वियतनाम को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद की। लेकिन मौजूदा उछाल अलग है। इसे मुख्य रूप से चीनी कंपनियां बढ़ावा दे रही हैं, जो अमेरिकी व्यापार प्रतिबंधों से बचने के लिए अपने उत्पादन आधारों में विविधता ला रही हैं। इस निवेश से अभूतपूर्व आर्थिक वृद्धि हुई है, लेकिन वियतनाम की तेज तरक्की की संरचनात्मक सीमाएं भी उजागर हुई हैं। देश अब कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें बढ़ती श्रम लागत, कामगारों की कमी और मांग की रफ्तार से तालमेल बैठाने में जूझता बुनियादी ढांचा शामिल हैं।

कारीगरों के केंद्र से उच्च-तकनीक वाले औद्योगिक क्षेत्र में बदलता बैक निन्ह, वियतनाम की व्यापक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और बाधाओं की छोटी-सी तस्वीर पेश करता है। देश मूल्य शृंखला में ऊपर चढ़ने और कम लागत वाली असेंबली से परिष्कृत विनिर्माण की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आगे का रास्ता प्रतिस्पर्धा और घरेलू सीमाओं से भरा है।

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बड़े पलायन के कारण

चीन से विनिर्माण का बाहर जाना कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि पहले से जारी रुझानों में तेजी है। कई दशकों तक चीन दुनिया की फैक्टरी रहा। वहां श्रम लागत कम थी, बुनियादी ढांचा व्यापक था और कामगारों की बड़ी संख्या उपलब्ध थी। लेकिन अब समीकरण बदल गया है। चीन में बढ़ती मजदूरी ने उसकी लागत संबंधी बढ़त कम कर दी है, जबकि भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू किए गए व्यापार युद्ध ने भारी अनिश्चितता पैदा की है। कंपनियां तेजी से "चीन प्लस वन" रणनीति अपना रही हैं और किसी एक देश पर निर्भरता से जुड़े जोखिम घटाने के लिए कई देशों में विनिर्माण फैला रही हैं।

बौद्धिक संपदा से जुड़ी चिंताओं और कोविड-19 महामारी से उजागर हुई आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों ने भी कंपनियों को उत्पादन स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। सैमसंग और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियां इस बदलाव में आगे रही हैं। सैमसंग ने स्मार्टफोन उत्पादन का बड़ा हिस्सा चीन से बाहर स्थानांतरित किया है। खबरों के मुताबिक, चीन में उसकी उत्पादन क्षमता का 80% तक हिस्सा वियतनाम ले जाया जा रहा है। एप्पल ने भी उत्पादन में विविधता लानी शुरू कर दी है और आईफोन का कुछ उत्पादन भारत तथा वियतनाम में स्थानांतरित किया है। इन कदमों का मकसद सिर्फ सस्ता श्रम ढूंढना नहीं है। उद्देश्य ऐसी मजबूत और लचीली आपूर्ति शृंखलाएं बनाना है, जो भू-राजनीतिक झटकों और व्यापार में रुकावटों का सामना कर सकें।

एचएसबीसी के मुख्य एशिया अर्थशास्त्री फ्रेडरिक न्यूमन का कहना है कि व्यापार तनाव कम होने पर भी विविधीकरण की रफ्तार बनी रहेगी। उनके मुताबिक, कंपनियां सिर्फ कारखाने चीन से बाहर ले जाने की कोशिश नहीं कर रहीं, बल्कि अतिरिक्त विकल्प तैयार करने के लिए उन्हें कई देशों में फैला रही हैं। इस संरचनात्मक बदलाव का मतलब है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में विनिर्माण क्षमता की मांग बने रहने की संभावना है, चाहे अल्पकाल में शुल्कों में उतार-चढ़ाव हो।

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दो वियतनाम की कहानी

उत्तर का औद्योगिक केंद्र

वियतनाम का विनिर्माण क्षेत्र एक जैसा नहीं है। विश्लेषक अक्सर उत्तर और दक्षिण के बीच फर्क करते हैं, क्योंकि दोनों की विनिर्माण प्रणालियां बुनियादी तौर पर अलग हैं। बैक निन्ह, हाई फोंग और थाई गुयेन जैसे प्रांतों वाला उत्तरी वियतनाम उच्च-सटीकता वाले विनिर्माण के केंद्रित गलियारे के रूप में विकसित हुआ है। यह क्षेत्र पूर्वी एशिया के उत्पादन नेटवर्क, खासकर चीन, से गहराई से जुड़ा है। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की बड़ी कंपनियां और भारी औद्योगिक असेंबली कारखाने हैं, जो करीबी आपूर्ति शृंखलाओं और तालमेल से चलने वाले उत्पादन चक्रों पर निर्भर हैं।

बैक निन्ह का उभार इसी विशेषज्ञता से गहराई से जुड़ा है। शहर में पहली बड़ी तेजी 2008 के आसपास शुरू हुई, जब सैमसंग ने वहां अपना पहला फोन कारखाना बनाया। इससे वियतनाम कंपनी का सबसे बड़ा विदेशी विनिर्माण केंद्र बन गया। सैमसंग की मौजूदगी ने आपूर्तिकर्ताओं और साझेदारों को आकर्षित किया। अब चीनी कंपनियां भी बड़ी संख्या में यहां आ रही हैं और उसी आपूर्ति शृंखला के बुनियादी ढांचे तथा कामगारों का इस्तेमाल कर रही हैं। चीन की सीमा के पास होने से कलपुर्जों की आवाजाही तेजी से हो सकती है। यह उन इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं के लिए अहम है, जो जरूरत के ठीक समय पर आपूर्ति वाले मॉडल पर काम करते हैं।

दक्षिण का निर्यात केंद्र

इसके उलट, हो ची मिन्ह सिटी और बिन्ह ज़ुओंग तथा डोंग नाई जैसे आसपास के प्रांतों वाला दक्षिणी वियतनाम विविध विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में काम करता है। यह क्षेत्र अपनी लचीली क्षमता के लिए जाना जाता है और यहां रोजमर्रा की तेज़ी से बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुओं तथा कपड़ों से लेकर जूते और फर्नीचर तक के उद्योग हैं। उत्तर जहां तकनीकी विशेषज्ञता और एशियाई आपूर्तिकर्ताओं के साथ एकीकरण पर ध्यान देता है, वहीं दक्षिण में आपूर्तिकर्ताओं का व्यापक आधार और बदलती जरूरतों के अनुरूप ढलने की क्षमता प्रमुख है।

अमेरिका या यूरोपीय संघ में तय समय पर माल पहुंचाने से जुड़ी आमदनी वाले निर्माताओं को दक्षिण में बेहतर लॉजिस्टिक सुविधाएं मिलती हैं। काई मेप-थी वाई गहरे पानी का बंदरगाह परिसर अमेरिकी पश्चिमी और पूर्वी तटों तक सीधे जहाजरानी सेवाएं देता है। इससे उत्तरी मार्गों की तुलना में परिवहन समय घटता है। यह भौगोलिक विभाजन दिखाता है कि वियतनामी बाजार में प्रवेश करते समय विदेशी निवेशकों को रणनीतिक चुनाव करना पड़ता है: उत्तर में तकनीकी एकीकरण या दक्षिण में लॉजिस्टिक लचीलापन।

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तेज वृद्धि की सीमाएं

उम्मीदों के बावजूद, इस तेजी से कई बड़ी अड़चनें पैदा हो रही हैं। सबसे तात्कालिक चुनौती श्रम बाजार की है। कारखानों के बीच कामगारों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने से मजदूरी बढ़ रही है और भर्ती मुश्किल होती जा रही है। शेनझेन से स्थानांतरित हुई एक दूरसंचार उपकरण कंपनी के कर्मचारी पेंग ने श्रम बाजार में बढ़ते दबाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2024 से श्रम लागत 10% से 15% बढ़ चुकी है और आगे भी बढ़ने की आशंका है। कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए बैक निन्ह की कंपनियां अधिक वेतन, जॉइनिंग बोनस और यहां तक कि इंस्टेंट नूडल्स का पैकेट या आने-जाने वाले कर्मचारियों के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी सुविधाएं दे रही हैं।

मजदूरी का यह दबाव वियतनाम के एक प्रमुख प्रतिस्पर्धी लाभ, यानी कम श्रम लागत, को कमजोर करता है। जुलाई 2024 में न्यूनतम वेतन 6% बढ़ा था। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर जीवन स्तर की मांग के साथ यह रुझान जारी रहेगा। इसके अलावा, कार्यबल युवा और ऊर्जावान तो है, लेकिन उच्च-तकनीक विनिर्माण के लिए जरूरी विशेष कौशल अक्सर उसमें नहीं हैं। हीली कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वियतनामी कामगारों के बड़े हिस्से के पास प्रमाणपत्र या व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं है। इस कमी को पूरा करने के लिए कंपनियों को शिक्षा और प्रशिक्षण में भारी निवेश करना पड़ रहा है।

अमेरिका स्थित एसईकेओ लॉजिस्टिक्स के वैश्विक मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी ब्रायन बोर्के ने कहा कि जूते, फर्नीचर और प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए वियतनाम अब भी प्रमुख गंतव्य है, लेकिन बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक क्षमता में वह चीन से पीछे है। ये सीमाएं बैक निन्ह जैसे तेजी से बढ़ते औद्योगिक शहरों में साफ दिख रही हैं, जहां उद्योगों की तेज आमद सहायक सेवाओं और परिवहन नेटवर्क के विकास से आगे निकल रही है।

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आपूर्ति शृंखला की दुविधा

एक और बड़ी कमजोरी आयातित सामग्री, खासकर चीन से आने वाली सामग्री पर वियतनाम की निर्भरता है। चीन स्थित वेलॉन्ग एंटरप्राइजेज के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैकब रोथमैन ने कहा कि सरकारी समर्थन और भारी निवेश के जरिए चीन ने दशकों में "दुनिया का सबसे अच्छा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र" बनाया है। उन्होंने साफ कहा, "इसे रातोंरात दोबारा नहीं बनाया जा सकता।" वियतनामी निर्माता मध्यवर्ती वस्तुओं, अर्ध-प्रसंस्कृत उत्पादों और पूंजीगत सामान के लिए अक्सर चीन और दक्षिण कोरिया से आयात पर काफी निर्भर रहते हैं। इससे इन देशों के साथ व्यापार घाटा होता है और आपूर्ति शृंखला में एक के बाद एक असर पड़ता है।

चीन में कारखाने बंद होने या बंदरगाहों पर भीड़ जैसी बाधाएं आने पर उसका असर तुरंत वियतनाम में महसूस होता है। सीमा पार से जरूरी कलपुर्जे न मिलने पर वियतनामी कारखानों की उत्पादन लाइनें रुक जाती हैं और माल की डिलीवरी में देरी होती है। यह निर्भरता पूरी तरह स्वतंत्र विनिर्माण महाशक्ति बनने के लक्ष्य को मुश्किल बनाती है। इसका मतलब यह भी है कि वियतनाम चीनी आपूर्ति शृंखलाओं की जगह पूरी तरह लेने के बजाय उनके लिए असेंबली का काम कर रहा है।

पश्चिमी बाजारों को लक्ष्य बनाने वाली कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक अब भी एक बाधा है। वियतनाम प्रशांत महासागर के पार है, इसलिए अमेरिका तक सामान भेजने में कई सप्ताह लगते हैं और मेक्सिको जैसे नजदीकी देशों में उत्पादन स्थानांतरित करने की तुलना में लागत काफी अधिक आती है। एशिया से अमेरिका तक माल ढुलाई की दरें बहुत बढ़ गई हैं। लंबा परिवहन समय देरी और भंडार की कमी का जोखिम भी बढ़ाता है। इसके अलावा, देश के भीतर परिवहन बुनियादी ढांचे को कमजोर माना जाता है। सड़क परिवहन बुनियादी ढांचे की वैश्विक रैंकिंग में वियतनाम 103वें स्थान पर है और राष्ट्रीय राजमार्ग व्यवस्था का केवल छोटा हिस्सा ही पक्का है। इससे कारखानों से बंदरगाहों तक माल ले जाने में बाधाएं आती हैं।

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व्यापार संबंधों और प्रतिस्पर्धा के बीच राह

वियतनाम की सफलता पर राजनीतिक निगाहें टिक गई हैं। अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से वियतनाम को जितना लाभ हुआ है, उतना कम ही देशों को हुआ है। 2024 में अमेरिका के साथ वियतनाम का व्यापार अधिशेष 123.5 अरब डॉलर रहा, जो चीन और मेक्सिको के बाद तीसरा सबसे बड़ा था। इस भारी अधिशेष से ट्रंप प्रशासन नाराज हुआ। उसने वियतनामी सामान पर 46% आयात शुल्क लगाने की धमकी दी, फिर इसे घटाकर 20% पर सहमति जताई। दोनों देश शुल्क इसी स्तर पर बनाए रखने की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन ऊंचे शुल्कों का खतरा बना हुआ है। शुल्क से बचने के लिए वियतनाम के रास्ते माल भेजे जाने वाले केंद्र के रूप में उसकी भूमिका की जांच-पड़ताल ने भी कुछ निर्माताओं को सतर्क कर दिया है।

इन जोखिमों को कम करने के लिए कंपनियां अपने निवेश में विविधता ला रही हैं। ब्रायन बोर्के ने बताया कि एसईकेओ लॉजिस्टिक्स के एक ग्राहक ने फर्नीचर उत्पादन का कुछ हिस्सा खास तौर पर भारत में स्थानांतरित किया, क्योंकि वह "अपने सारे अंडे वियतनाम की एक ही टोकरी में नहीं रखना" चाहता था। यह भावना निवेशकों में बढ़ती सतर्कता को दिखाती है। वे मानते हैं कि वियतनाम में संभावनाएं तो हैं, लेकिन वह असीमित उत्पादन क्षमता को अपने यहां समेट नहीं सकता।

इसके अलावा, क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। शुरुआती दौर में वियतनाम को मिले लाभ से चूक गए इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देश खुद को वैकल्पिक विनिर्माण केंद्रों के रूप में आक्रामक ढंग से बढ़ावा दे रहे हैं। फिलीपींस ने हाल ही में विदेशी निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश के लिए निजी जमीन 99 साल तक पट्टे पर देने की अनुमति वाला कानून पारित किया। वहीं, भारत अपने विशाल घरेलू बाजार और कुशल कार्यबल का लाभ उठाकर एप्पल जैसी बड़ी कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश में खुद को प्रतिद्वंद्वी महाशक्ति के रूप में पेश कर रहा है। मेक्सिको भी आगे बढ़ रहा है। अमेरिका से नजदीकी और यूएसएमसीए जैसे अनुकूल व्यापार समझौतों का लाभ उठाकर वह आपूर्ति शृंखलाएं छोटी करने के इच्छुक निर्माताओं को आकर्षित कर रहा है।

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2045 की ओर

इन चुनौतियों को समझते हुए वियतनाम सरकार अर्थव्यवस्था को उन्नत करने के लिए देशव्यापी और समन्वित प्रयास शुरू कर रही है। देश ने 2045 तक समृद्ध बनने का लक्ष्य रखा है और दक्षिण कोरिया तथा ताइवान जैसी एशिया की "टाइगर अर्थव्यवस्थाओं" की कतार में शामिल होने की आकांक्षा जताई है। इस दृष्टि को पूरा करने के लिए कम लागत वाली असेंबली से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा और स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों जैसे अधिक मूल्य वाले विनिर्माण क्षेत्रों में जाना होगा।

बुनियादी ढांचे का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है। चीन की सीमा तक यात्रा का समय घटाने के लिए नए राजमार्ग बनाए जा रहे हैं। प्रस्तावित रेलवे हनोई को बंदरगाह शहर हाई फोंग और सीमावर्ती शहर लाओ काई से जोड़ेगी। दिसंबर में बैक निन्ह ने उच्च-तकनीक विनिर्माण के लिए समर्पित औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार का काम शुरू किया। देशभर में सरकार ने एक बड़े राजनीतिक सम्मेलन से पहले राजकोषीय महत्वाकांक्षा दिखाते हुए 129 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की 234 प्रमुख परियोजनाएं शुरू कीं।

इस बदलाव को समर्थन देने के लिए वियतनाम आयातित मशीनरी पर कर छूट और रियायती किराये जैसे प्रोत्साहन दे रहा है, ताकि आपूर्तिकर्ता अपने काम को उन्नत और आधुनिक बना सकें। देश मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और भारत को निर्यात बढ़ाकर अमेरिकी बाजार पर निर्भरता घटाने की भी कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह ने देश की पहुंच और क्षमता बढ़ाने का आह्वान करते हुए इस लक्ष्य को महत्वाकांक्षी रूप में पेश किया है। हालांकि, हकीकत यह है कि वियतनाम की अर्थव्यवस्था चीन से 40 गुना छोटी है, इसलिए वह पूरी तरह उसकी जगह नहीं ले सकता। रणनीति चीन की जगह लेना नहीं, बल्कि विविध वैश्विक नेटवर्क में बेहतर ढंग से एकीकृत होना और मूल्य शृंखला में ऊपर उठना है।

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मुख्य बिंदु

  • विदेशी निवेश की आमद और "चीन प्लस वन" रणनीति के कारण वियतनाम, खासकर बैक निन्ह, कृषि क्षेत्र से बड़े विनिर्माण केंद्र में बदल गया है।
  • सैमसंग और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियां आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने और चीन से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिम घटाने के लिए उत्पादन वियतनाम स्थानांतरित कर रही हैं।

    तेज औद्योगिक वृद्धि पर बढ़ती श्रम लागत, कामगारों की कमी और कमजोर सड़क नेटवर्क तथा बंदरगाहों की भीड़ समेत अपर्याप्त बुनियादी ढांचे की बाधाएं हैं।

    देश कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं के लिए चीन पर काफी निर्भर है। इससे आपूर्ति शृंखला की ऐसी कमजोरी पैदा होती है, जो पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को कमजोर करती है।

    अमेरिका के साथ बड़े व्यापार अधिशेष ने जांच-पड़ताल और शुल्क लगाने की धमकियां बढ़ाई हैं। इसके जवाब में कुछ कंपनियां भारत और मेक्सिको जैसे अन्य देशों में विस्तार कर जोखिम घटा रही हैं।

    वियतनाम का लक्ष्य 2045 तक उच्च-तकनीक वाली "टाइगर अर्थव्यवस्था" बनना है। मूल्य शृंखला में ऊपर उठने के लिए वह बुनियादी ढांचे और प्रोत्साहनों में अरबों डॉलर लगा रहा है।

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