यह मिसाइल प्रस्ताव अभी क्यों मायने रखता है
जापान और फिलीपींस जापान की टाइप 03 चू एसएएम, यानी ट्रक पर लगी मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, के हस्तांतरण पर विचार कर रहे हैं। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब टोक्यो अपने रक्षा निर्यात दिशानिर्देशों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। इन दिशानिर्देशों के तहत एक दशक से हथियारों का हस्तांतरण गैर-लड़ाकू भूमिकाओं तक सीमित रहा है। अगर यह समझौता आगे बढ़ता है, तो यह जापान के किसी संपूर्ण घातक हथियार प्रणाली के पहले निर्यातों में से एक होगा और इसका स्पष्ट संकेत होगा कि टोक्यो केवल सहयोगियों से उपकरण खरीदने के बजाय हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता के रूप में काम करना चाहता है।
विषय-सूची
- यह मिसाइल प्रस्ताव अभी क्यों मायने रखता है
- टाइप 03 चू एसएएम क्या है?
- फिलीपींस में एक बैटरी कैसे काम करेगी
- फिलीपींस अब वायु रक्षा क्यों बना रहा है
- टोक्यो के नियमों में बदलाव और घरेलू बहस
- चीन की प्रतिक्रिया और गलत आकलन का जोखिम
- सहयोगी नेटवर्क, अभ्यास और परस्पर संचालन क्षमता
- उद्योग, लागत और समयसीमा
- टोक्यो और मनीला के बीच और क्या चर्चा में है
- अब किन बातों पर नजर रखें
- मुख्य बातें
इस योजना के केंद्र में लंबे समय से चले आ रहे “पांच श्रेणियों” वाले नियम को खत्म करना है, जो निर्यात को बचाव, परिवहन, गश्त, निगरानी और बारूदी सुरंग हटाने तक सीमित करता है। इस बदलाव के लिए नए कानून की जरूरत नहीं है, क्योंकि दिशानिर्देश मंत्रिमंडल के फैसलों पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री साने ताकाइची की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद बदलावों को अपना सकती है, जिन्हें बाद में मंत्रिमंडल मंजूरी देगा। सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और जापान इनोवेशन पार्टी ने अगले साल के लिए पांच श्रेणियों की सीमा हटाने को गठबंधन का लक्ष्य बनाया है। समर्थकों का कहना है कि यह बदलाव नीति को क्षेत्र के अधिक चुनौतीपूर्ण सुरक्षा माहौल के अनुरूप बनाएगा और जापान के रक्षा उद्योग को टिकाऊ बनाने में मदद करेगा। आलोचकों ने चेताया है कि इससे युद्धोत्तर शांतिवादी रुख की सीमा धुंधली पड़ती है और इस पर संसद में अधिक गहन समीक्षा होनी चाहिए।
मनीला के लिए मध्यम दूरी की जमीन आधारित वायु रक्षा परत, पश्चिम फिलीपीन सागर में आंतरिक सुरक्षा से क्षेत्रीय रक्षा की ओर बदलाव का एक और कदम होगी। यह ब्रह्मोस पोत-रोधी मिसाइल जैसी हालिया खरीद का पूरक बनेगी और चीन के दबाव की जद में आने वाले हवाई अड्डों, बंदरगाहों तथा ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करेगी। इस हस्तांतरण से जापान-फिलीपींस के तेजी से बढ़ते सुरक्षा संबंध भी और गहरे होंगे। दोनों देशों के बीच पहले से ही पारस्परिक पहुंच समझौता है, जिसके तहत उनकी सेनाएं एक-दूसरे के क्षेत्र में प्रशिक्षण और अभियान चला सकती हैं।
टाइप 03 चू एसएएम क्या है?
पुरानी होती एमआईएम 23 हॉक प्रणाली की जगह लेने के लिए मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक ने 1990 के दशक में टाइप 03 विकसित की थी। यह जापान की थल आत्मरक्षा बल द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सड़क पर चलने में सक्षम सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसके एक सामान्य प्रक्षेपक में छह मिसाइलें होती हैं। अलग रडार और कमान इकाई अपने 8x8 ट्रकों पर चलती है, जिससे मिसाइल बैटरियां सड़कों पर फैल सकती हैं और ठिकानों से दूर छिप सकती हैं, फिर तेजी से अपनी फायरिंग स्थिति बदल सकती हैं।
सार्वजनिक स्रोतों के अनुसार मिसाइल की मारक दूरी करीब 50 किलोमीटर और अवरोधन की ऊंचाई लगभग 10 किलोमीटर तक है। मिसाइल जड़त्वीय नेविगेशन का इस्तेमाल करती है, उड़ान के दौरान रेडियो लिंक से उसे अपडेट मिलते हैं और अंतिम चरण में सक्रिय रडार सीकर लक्ष्य को पकड़ता है। यह मार्गदर्शन प्रणाली खराब मौसम और अव्यवस्थित या जाम किए गए माहौल में भी लक्ष्य पर निशाना साधने में मदद करती है। अग्नि-नियंत्रण रडार सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग ऐरे वाला है। यह करीब सौ लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और एक साथ कई विमानों या क्रूज मिसाइलों के खिलाफ कार्रवाई संभाल सकता है। बताया जाता है कि मिसाइल की गति मैक 2.5 के आसपास है।
जापान की बहुस्तरीय वायु रक्षा में चू एसएएम मध्यम स्तर की भूमिका निभाती है। यह तन एसएएम जैसी कम दूरी की प्रणालियों से ऊपर है, जो इकाइयों और ठिकानों को निकट दूरी पर सुरक्षा देती हैं, और लंबी दूरी के पैट्रियट अवरोधकों से नीचे है, जो बड़े शहरी इलाकों और अहम ठिकानों की रक्षा करते हैं। कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों और हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहनों को रोकने के लिए तैयार चू एसएएम का उन्नत संस्करण विकसित किया जा रहा है, जिसे वित्त वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि, मौजूदा सेवा में मौजूद मूल प्रणाली ही विमानों और क्रूज मिसाइलों के उस खतरे से निपटती है, जिसे दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश चिंता का विषय मानते हैं।
फिलीपींस में एक बैटरी कैसे काम करेगी
फिलीपींस की एक बैटरी संभवतः अपने रडार, कमान ट्रक और कई प्रक्षेपकों को किसी अहम ठिकाने, जैसे तटीय हवाई अड्डे या ऊर्जा केंद्र, की सुरक्षा के लिए तैनात करेगी। 50 किलोमीटर का दायरा हवाई रास्तों और समुद्री मार्गों को क्षितिज तक कवर कर सकता है, खासकर तब जब रडार ऊंची जमीन पर हो। कारगर होने के लिए इस प्रणाली को सैन्य और नागरिक रडार सहित राष्ट्रीय हवाई निगरानी व्यवस्था के साथ जोड़ना होगा और सहयोगियों से समय पर जानकारी लेनी होगी। सड़क पर चलने की क्षमता विरोधियों की योजना को मुश्किल बनाती है, क्योंकि प्रक्षेपक जगह बदल सकते हैं, मिसाइल दाग सकते हैं और फिर नई स्थिति में पहुंच सकते हैं। इस तरह किसी ठिकाने का रनवे बंद होने पर भी वे काम करते रह सकते हैं।
फिलीपींस अब वायु रक्षा क्यों बना रहा है
समुद्र में वर्षों तक टकराव के बाद फिलीपींस विद्रोह-विरोधी रुख से बाहरी रक्षा की ओर बढ़ रहा है। दबाव डालने की कीमत बढ़ाने के लिए मनीला ने पोत-रोधी मिसाइलों, तटीय रडार और नए गश्ती जहाजों में निवेश किया है। मरीन कॉर्प्स ने हाल ही में पहली ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी का अनावरण किया और नेताओं ने और मिसाइलें खरीदने की योजनाएं बताई हैं। मध्यम दूरी की वायु रक्षा एक अलग तरह की सुरक्षा देगी। इससे लूजोन के ऊपर से उड़ान भरने या तेज जेट और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों से सैन्य ठिकानों के पास पहुंचने की विरोधी की योजना जटिल हो जाएगी।
जापान और फिलीपींस पहले से ही अधिक निकटता से प्रशिक्षण कर रहे हैं। 2024 में हस्ताक्षरित और 2025 में लागू हुआ पारस्परिक पहुंच समझौता दोनों पक्षों को एक-दूसरे की जमीन पर अभ्यास करने की अनुमति देता है, जिससे संयुक्त अभियानों की तैयारी और रसद आसान होती है। जापानी सैनिकों ने जुलाई में ऑस्ट्रेलिया में बहुराष्ट्रीय अभ्यास के दौरान टाइप 03 से मिसाइल दागी थी। इससे दिखा कि यह प्रणाली साझेदार देशों के साथ विदेश में तैनात हो सकती है। अगर मनीला चू एसएएम खरीदता है, तो फिलीपीनी दल संभवतः जापानी प्रशिक्षकों के साथ प्रशिक्षण करेंगे और अमेरिका तथा अन्य साझेदारों के साथ बढ़ते सूचना-साझाकरण नेटवर्क के तहत काम करेंगे।
भूगोल के लिहाज से इस प्रणाली की तैनाती उपयोगी होगी। लूजोन पर तैनात बैटरियां उत्तर की ओर से आने वाले अहम रास्तों पर नजर रख सकती हैं और पश्चिम फिलीपीन सागर में गश्त करने वाले ठिकानों की रक्षा कर सकती हैं। फिलीपींस का क्षेत्र पहली द्वीप शृंखला में पड़ता है और इसका सबसे उत्तरी द्वीप ताइवान से करीब 140 किलोमीटर दूर है। जापान की ओर से आधिकारिक सुरक्षा सहायता के तहत पहले ही दिए गए तटीय निगरानी रडार और गश्ती नौकाएं भविष्य की वायु रक्षा बैटरियों को लक्ष्य संबंधी सूचना देने में मदद करेंगी।
टोक्यो के नियमों में बदलाव और घरेलू बहस
जापान ने 2014 में अपने निर्यात रुख में ढील देना शुरू किया था। उस समय उसने व्यापक प्रतिबंध हटाकर रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तीन सिद्धांत अपनाए। इसके बाद भी लागू दिशानिर्देशों ने संपूर्ण घातक हथियार प्रणालियों पर रोक लगाई हुई थी। केवल पांच गैर-लड़ाकू श्रेणियों के उपकरण और कुछ सह-उत्पादित वस्तुओं की अनुमति थी। 2023 में जापान ने अमेरिका को अपने यहां बने पैट्रियट अवरोधक भेजे, जो इस बात का संकेत था कि दिशानिर्देशों में पहले ही ढील दी जा रही थी। अब विचाराधीन अगले चरण में श्रेणियों की यह सीमा पूरी तरह हटाई जाएगी। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में विचार-विमर्श के बाद मंत्रिमंडल ऐसा कर सकता है। संसद में मतदान की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि ये सिद्धांत कानून नहीं, बल्कि कार्यपालिका की नीति हैं।
लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी का जापान इनोवेशन पार्टी के साथ गठबंधन बनने से बदलाव तेज हुआ है। इससे पहले लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपने लंबे समय के सहयोगी कोमेइतो से नाता तोड़ लिया था, जो रक्षा नीति पर रोक लगाने का काम करता था। प्रधानमंत्री ताकाइची ने क्षेत्रीय खतरों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और तेजी से सैन्य क्षमता बढ़ाने की पैरवी की है। विरोधियों का कहना है कि यह प्रक्रिया संसदीय बहस को दरकिनार करती है और मिसाइलों का निर्यात जापान को संकटों में खींचने का जोखिम पैदा करता है। समर्थकों का जवाब है कि साझेदारों को स्पष्ट रूप से रक्षात्मक प्रणालियां देने से संघर्ष रुक सकता है और आक्रमण की कीमत बढ़ सकती है। सरकार जब मसौदा संशोधन जारी करेगी और शुरुआती निर्यात के संभावित उम्मीदवार बताएगी, तब यह बहस और तेज होगी।
चीन की प्रतिक्रिया और गलत आकलन का जोखिम
बीजिंग नानसेई द्वीप शृंखला में जापान की नई तैनाती की पहले ही आलोचना कर चुका है। इनमें ताइवान जलडमरूमध्य पर नजर रखने के लिए तैनात टाइप 03 इकाइयां भी शामिल हैं। अगर जापान में बनी बैटरी फिलीपींस में तैनात होती है, तो चीन संभवतः इसका विरोध करेगा। चीनी अधिकारियों और सरकारी मीडिया का कहना है कि ताइवान के पास और मिसाइलें तैनात करना खतरनाक है। वे टोक्यो पर संयम छोड़ने का आरोप भी लगाते हैं। उनका यह भी तर्क है कि मनीला को निर्यात से विवादित जलक्षेत्र में फिलीपींस की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
जापानी अधिकारी कहते हैं कि वायु रक्षा प्रणालियां स्वभाव से रक्षात्मक होती हैं। फिलीपींस नई मिसाइलों को अपने क्षेत्र और सेना की सुरक्षा के लिए जरूरी बताता है। हकीकत यह है कि ये बैटरियां सैन्य गणनाओं को बदल देती हैं। वे चट्टानों या रीफ पर दावों को नहीं बदलतीं, लेकिन हवाई अभियानों की योजना बनाने वालों को सुरक्षित क्षेत्रों का हिसाब रखना पड़ता है। इससे विमानों और क्रूज मिसाइलों के लिए जोखिम बढ़ाकर प्रतिरोध मजबूत हो सकता है। साथ ही, दूसरे पक्ष नए सुरक्षा तंत्र को परखने के लिए अधिक गश्त या अभ्यास कर सकते हैं। पूर्वोत्तर और दक्षिण-पूर्व एशिया में दूरियां बहुत कम हैं: ताइवान से करीब 110 किलोमीटर दूर योनागुनी द्वीप से लेकर लूजोन जलडमरूमध्य के फिलीपीनी जलक्षेत्र तक गलती की गुंजाइश बहुत कम है।
सहयोगी नेटवर्क, अभ्यास और परस्पर संचालन क्षमता
चू एसएएम की बिक्री से पूर्वी चीन सागर से दक्षिण चीन सागर तक फैली साझेदार देशों की व्यापक क्षमताओं के नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। उन्नत रक्षा सहयोग समझौते के तहत अमेरिका फिलीपीनी सेना के साथ अभियान जारी रखे हुए है, जबकि नए पहुंच समझौते के तहत जापान मनीला के साथ प्रशिक्षण कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर ने उन बड़े अभ्यासों में हिस्सा लिया है जिनमें जापानी वायु रक्षा इकाइयों ने असली मिसाइलें दागीं। इन आयोजनों का संदेश है कि साझेदार देश एक-दूसरे से जुड़े सेंसर, संचार प्रणालियां और हथियार विकसित करना चाहते हैं।
परस्पर संचालन क्षमता हासिल करना सबसे कठिन काम है। जापानी बैटरी को फिलीपींस और सहयोगियों की हवाई निगरानी व्यवस्था में जोड़ने के लिए साझा डेटा प्रारूप, भरोसेमंद मित्र-विरोधी पहचान प्रक्रिया और संकट के समय स्पष्ट कमान व्यवस्था जरूरी होगी। पहली मिसाइलें पहुंचने से पहले प्रशिक्षण, कलपुर्जों और रखरखाव की व्यवस्था होनी चाहिए। मनीला को साझेदारों के साथ अपनी संचालन अवधारणाएं और संचार व्यवस्था मिलानी होगी, ताकि यह प्रणाली अलग-थलग सुरक्षा घेरे के बजाय साझा हवाई निगरानी चित्र में योगदान दे।
उद्योग, लागत और समयसीमा
जापान का रक्षा उद्योग बढ़ रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान के शोध के अनुसार, दुनिया की शीर्ष 100 हथियार कंपनियों की बिक्री 2024 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। जापानी कंपनियों की कुल हथियार आय सालाना आधार पर करीब 40 प्रतिशत बढ़कर लगभग 13.3 अरब डॉलर हो गई। निर्यात बढ़ाने की टोक्यो की कोशिश का उद्देश्य देश में उत्पादन क्षमता और कौशल बनाए रखना भी है। चू एसएएम का निर्यात रडार और मिसाइल निर्माण आधार को सहारा देगा, जो जापान की अपनी सेना को भी आपूर्ति करता है।
हथियारों की आपूर्ति की समयसीमा अनुबंध, उत्पादन क्षमता और प्रशिक्षण पर निर्भर करेगी। वैश्विक मिसाइल उद्योग में सीकर और अन्य कलपुर्जों की कमी से उत्पादन धीमा हो सकता है। मनीला के लिए आधिकारिक सुरक्षा सहायता अनुदान, रियायती ऋण और संयुक्त प्रशिक्षण पैकेज जैसे वित्तीय साधन अहम होंगे। फिलीपींस अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के नवीनतम चरण पर काम कर रहा है और उन्नत तटीय रक्षा प्रणालियां तैनात करना शुरू कर चुका है। जापान के नियमों में संशोधन के बाद अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए, तो शुरुआती आपूर्ति में कुछ साल लग सकते हैं और इस दौरान चालक दल प्रशिक्षण ले सकते हैं। कुछ बैलिस्टिक खतरों को रोकने में सक्षम उन्नत चू एसएएम को वित्त वर्ष 2028 तक तैयार करने का लक्ष्य है। इसलिए फिलीपींस को मिलने वाली शुरुआती बैटरियां मौजूदा संस्करण की होंगी, जो विमानों और क्रूज मिसाइलों पर केंद्रित है।
टोक्यो और मनीला के बीच और क्या चर्चा में है
मिसाइलों के अलावा, टोक्यो और मनीला ने जापान की समुद्री आत्मरक्षा बल के सेवामुक्त विध्वंसक जहाजों के हस्तांतरण पर चर्चा की है। जापान नए आधिकारिक सुरक्षा सहायता ढांचे के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया के साझेदारों को तटीय निगरानी रडार, गश्ती नौकाएं और अन्य उपकरण भी दे रहा है। इनसे औपचारिक गठबंधन में शामिल किए बिना समुद्री गतिविधियों की निगरानी और कानून लागू करने की क्षमता बेहतर होती है। उपकरणों जितना ही अहम प्रशिक्षण और रखरखाव सहयोग भी है। मनीला के सामने चुनौती ऐसे दल, रसद व्यवस्था और सूचना-साझाकरण तंत्र तैयार करने की है, जो नई प्रणालियों को गश्त के लिए तैयार रखें।
अब किन बातों पर नजर रखें
तत्काल ध्यान देने योग्य पड़ाव टोक्यो में हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद रक्षा हस्तांतरण दिशानिर्देशों में संशोधन पर विचार करेगी, जिसके बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी होगी। यह प्रक्रिया पूरी होने पर संबंधित एजेंसियां टाइप 03 के निर्यात का विस्तृत अध्ययन शुरू कर सकती हैं और फिलीपींस के साथ औपचारिक बातचीत कर सकती हैं। इसके बाद वार्ताकार संख्या, प्रशिक्षण, एकीकरण और वित्तपोषण तय करेंगे। मनीला में रक्षा योजनाकार यह विचार करेंगे कि कितनी बैटरियां खरीदी जाएं और उन्हें कहां तैनात किया जाए। बीजिंग की प्रतिक्रिया भी सामने आएगी। जापान में घरेलू बहस जारी रहेगी, क्योंकि यह बदलाव प्रतिरोध और संवैधानिक संयम के बीच संतुलन की परीक्षा लेगा। अभ्यास और डेटा साझा करने पर सहयोगियों के बीच तालमेल यह शुरुआती संकेत देगा कि फिलीपीनी बैटरी क्षेत्रीय हवाई निगरानी व्यवस्था में कितनी जल्दी शामिल हो सकती है।
मुख्य बातें
- जापान और फिलीपींस मध्यम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली टाइप 03 चू एसएएम के हस्तांतरण पर अनौपचारिक बातचीत कर रहे हैं।
- टोक्यो नई विधायी प्रक्रिया के बिना राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के फैसले और मंत्रिमंडल की मंजूरी से “पांच श्रेणियों” वाली निर्यात सीमा हटाने की योजना बना रहा है।
- टाइप 03 की मारक दूरी करीब 50 किलोमीटर है। इसमें सक्रिय रडार सीकर का इस्तेमाल होता है और यह 8x8 ट्रकों पर लगे एईएसए रडार के साथ काम करती है।
- बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक खतरों में से कुछ को रोकने के उद्देश्य से चू एसएएम का उन्नत संस्करण वित्त वर्ष 2028 तक तैयार करने का लक्ष्य है।
- मनीला बाहरी रक्षा की ओर बढ़ रहा है। वह ब्रह्मोस पोत-रोधी मिसाइलें तैनात कर रहा है और ठिकानों तथा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए जमीन आधारित वायु रक्षा चाहता है।
- जापान और फिलीपींस के बीच अब पारस्परिक पहुंच समझौता है, जो दोनों देशों को एक-दूसरे के क्षेत्र में प्रशिक्षण और तैनाती की अनुमति देता है।
- चीन ताइवान के पास जापानी मिसाइलों की तैनाती की आलोचना करता है और मनीला को बिक्री का विरोध कर सकता है, जिससे तनाव और बढ़ने का जोखिम है।
- जापानी रक्षा कंपनियों की हथियार बिक्री 2024 में करीब 40 प्रतिशत बढ़ी। निर्यात से देश में उत्पादन क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है।
- बातचीत में जापान के सेवामुक्त विध्वंसक जहाजों के संभावित हस्तांतरण और मनीला को रडार तथा गश्ती उपकरणों की निरंतर आपूर्ति भी शामिल है।
- अगर 2026 की शुरुआत में नियम बदलते हैं, तो उसके बाद अनुबंध हो सकता है। पूरी तरह संचालन शुरू होने से पहले हथियारों की आपूर्ति और प्रशिक्षण में कई साल लगने की संभावना है।






