शिबुया का 13 अरब डॉलर का पुनर्विकास और जापान का शहरी भविष्य

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शिबुया का 13 अरब डॉलर का पुनर्विकास और जापान का शहरी भविष्य

चौराहे से जुड़े हुए शहर तक

शिबुया स्क्रैम्बल स्क्वायर की 230 मीटर ऊंची छत पर बने डेक से टोक्यो हर दिशा में टावरों, रेल पटरियों और नियोन रोशनी की घाटी की तरह फैला दिखाई देता है। दो सौ तीस मीटर नीचे, लोगों का सैलाब उस मशहूर स्क्रैम्बल क्रॉसिंग से गुजरता है, जो फिल्म लॉस्ट इन ट्रांसलेशन में दिखाई गई थी। इसी जगह से दिखने वाली क्षितिजरेखा पर क्रेनें छाई हैं, क्योंकि यह जिला अपने इतिहास के सबसे महत्वाकांक्षी पुनर्निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विषय-सूची
  1. चौराहे से जुड़े हुए शहर तक
  2. क्या बन रहा है और कब
  3. टावर और प्लाजा: तय समय-सारणी
  4. रेल केंद्र कैसे शहरी बदलाव को गति देता है
  5. टोक्यो में टीओडी क्यों अहम है
  6. करदाताओं पर अधिक बोझ डाले बिना पुनर्निर्माण का वित्तपोषण
  7. व्यवहार में जमीन के मूल्य का उपयोग
  8. आपदा की तैयारी और सार्वजनिक जगहें
  9. स्टार्टअप और संस्कृति के लिए लॉन्चपैड के रूप में शिबुया
  10. कार्यालयों की मांग, खुदरा कारोबार में बदलाव और पर्यटन
  11. दूसरे शहर क्या देख रहे हैं
  12. मुख्य बातें

यह कार्यक्रम अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। 2030 तक, नया बहुस्तरीय पैदल यात्री नेटवर्क शिबुया स्टेशन को हर दिशा से जोड़ेगा और जिले में आवागमन को सहज बनाएगा। 2031 में शिबुया स्क्रैम्बल स्क्वायर के दो नए टावर 2019 में खुले मौजूदा ईस्ट टावर के साथ जुड़ेंगे, जिससे शहर के सबसे बड़े खुदरा और कार्यालय परिसरों में से एक बनेगा। 2034 तक कुल करीब 20,000 वर्ग मीटर के पांच प्लाजा तैयार हो जाएंगे, जो रोजमर्रा की जिंदगी के काम आएंगे और आपात स्थितियों में निकासी क्षेत्र के रूप में भी इस्तेमाल होंगे। इस परियोजना में अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है और यह दिखाती है कि जापान व्यस्त परिवहन केंद्रों के नवीनीकरण के लिए निजी रेल और रियल एस्टेट कंपनियों का किस तरह उपयोग करता है।

शिबुया एक प्राकृतिक कटोरे जैसी घाटी में बसा है। स्टेशन घाटी के तल में है और पूर्व तथा पश्चिम की ढलानों के बीच घिरा हुआ है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाना मुश्किल होता है और भीड़ बढ़ती है। योजनाकार इसका जवाब एक शहरी केंद्र से दे रहे हैं: लिफ्टों और एस्केलेटरों की ऐसी ऊर्ध्वाधर आवागमन व्यवस्था, जो लोगों को ऊंची इमारतों से ऊपर ले जाकर पुलों और डेक तक पहुंचाती है। 2030 के लिए निर्धारित एक ऊंचा स्काईवे पूर्वी हिस्से के शिबुया हिकारी को पश्चिम में मार्क सिटी से जोड़ेगा। इससे पैदल यात्रियों के लिए चढ़ाई आसान होगी और जिले के दोनों हिस्से आपस में जुड़ेंगे।

क्या बन रहा है और कब

स्टेशन के आसपास आधुनिक पुनर्निर्माण की शुरुआत 2002 में टोक्यू तोयोको लाइन को भूमिगत किए जाने के बाद हुई। इससे सतह पर जगह खाली हुई और जमीन के स्तर पर नए भूखंडों के विकास का रास्ता खुला। 43 मंजिला परिसर शिबुया हिकारी 2012 में कार्यालयों, दुकानों और एक थिएटर के साथ खुला। शिबुया स्ट्रीम 2018 में होटल और कार्यस्थलों के साथ शुरू हुआ। इसके बाद 2019 में शिबुया स्क्रैम्बल स्क्वायर का ईस्ट टावर खुला, जिसके शीर्ष पर 230 मीटर की ऊंचाई पर शिबुया स्काई अवलोकन डेक है। यात्रियों के बीच आवाजाही बेहतर बनाने और कॉनकोर्स का विस्तार करने के लिए स्टेशन के मुख्य हिस्सों का नवीनीकरण 2020 तक जारी रहा। 2024 में जिले ने मिश्रित उपयोग वाली इमारतों की नई लहर के तहत शिबुया सकुरा स्टेज और शिबुया ऐक्स का अनावरण किया।

टावर और प्लाजा: तय समय-सारणी

इस दशक में आखिरी कड़ियां जुड़ेंगी। 2030 तक, पैदल यात्री नेटवर्क स्टेशन के पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के हिस्सों को जोड़ेगा। 20 मीटर से अधिक चौड़ा, निशुल्क पूर्व-पश्चिम गलियारा परिसर के दोनों हिस्सों को जोड़ेगा। जेआर हाचिको प्रवेशद्वार के सामने जमीन के स्तर पर बने निशुल्क रास्ते चौड़े होकर करीब 22 मीटर तक और जेआर साउथ प्रवेशद्वार के सामने करीब 23 मीटर तक पहुंचेंगे। ऊपरी मंजिलों पर करीब 3,000 वर्ग मीटर का डेक जेआर और गिन्ज़ा लाइन के टिकट गेट को शिबुया चुओ स्ट्रीट और सकुरागाओका से जोड़ेगा। शिबुया स्क्रैम्बल स्क्वायर का दूसरा चरण 2031 के लिए प्रस्तावित है। इसमें सेंट्रल और वेस्ट टावर होंगे, जो ईस्ट टावर से जुड़ेंगे और 6,000 वर्ग मीटर तक के विशाल खुदरा तल उपलब्ध कराएंगे। सेंट्रल टावर की 10वीं मंजिल पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान केंद्र बनाने की योजना है, जहां से क्रॉसिंग और शिंजुकु का नजारा दिखेगा।

दो और बड़ी परियोजनाएं क्षितिजरेखा को पूरा करेंगी। शिबुया अपर वेस्ट परियोजना पूर्व डिपार्टमेंट स्टोर की जगह पर 2029 तक पूरी होने की योजना है। इसके केंद्र में 155.7 मीटर ऊंचा, 34 मंजिला परिसर होगा, जिसमें समकालीन लग्जरी होटल और बंकामुरा के द म्यूजियम का नया ठिकाना होगा। मियामासुज़ाका शिता चौराहे के उत्तर-पूर्व में मियामासुज़ाका एरिया टाइप 1 शहरी पुनर्विकास परियोजना 2031 तक पूरी करने का लक्ष्य है। इसमें करीब 180 मीटर ऊंची 33 मंजिला इमारत बनेगी, जिसमें बैठकों और प्रदर्शनियों के लिए बड़े हॉल तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवास होंगे। स्थल के पूर्वी हिस्से में शिबुया मियामासु मिताके श्राइन का पुनर्निर्माण और एक नई मध्यम ऊंचाई वाली व्यावसायिक इमारत शामिल होगी।

सड़क के स्तर पर मौजूद जगहें भी बदल रही हैं। शिबुया नदी, जो कभी इमारतों के पीछे छिपी कंक्रीट की नहर थी, उसे अलग-अलग हिस्सों में खोलकर पेड़ों और पैदल रास्ते वाले प्लाजा में बदला जा रहा है। स्टेशन के पुनर्निर्माण में नए प्रवेशद्वार, चौड़ी सीढ़ियां और अधिक स्पष्ट रास्ते शामिल हैं। इसके शीर्ष पर बना अवलोकन डेक आगंतुकों को शहर और साफ मौसम में माउंट फ़ूजी का विस्तृत नजारा दिखाता है। साथ ही, नोनबेई योकोचो जैसे ऐतिहासिक हिस्सों में जिले के स्थानीय चरित्र को नई क्षितिजरेखा के साथ बनाए रखने की कोशिश हो रही है।

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रेल केंद्र कैसे शहरी बदलाव को गति देता है

शिबुया का स्टेशन क्षेत्र जापान के सबसे व्यस्त परिवहन केंद्रों में से एक है। यहां रोजाना करीब 21 लाख यात्री आते-जाते हैं और जेआर ईस्ट, टोक्यू, केइओ और टोक्यो मेट्रो की सेवाओं समेत कई रेल लाइनों का जाल है। इस पैमाने पर परिवहन-केंद्रित योजना प्रभावी साबित होती है। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) स्टेशन से कुछ मिनट की दूरी में कार्यालयों, घरों, दुकानों और सार्वजनिक जगहों को मिलाकर घनी, पैदल चलने योग्य बस्तियां विकसित करता है। इसका लक्ष्य कार यात्राएं घटाना, सार्वजनिक परिवहन के यात्रियों की संख्या बढ़ाना और रोजमर्रा की जरूरतों को पास में उपलब्ध कराना है।

टोक्यो में टीओडी क्यों अहम है

टोक्यो का रेल नेटवर्क अक्सर चलता है और भरोसेमंद है, जबकि केंद्रीय इलाकों में निजी पार्किंग के लिए बहुत कम जगह है। पैदल यात्रियों के अनुकूल स्टेशन क्षेत्र कारोबार और निवासियों, दोनों के लिए फायदेमंद होता है। शिबुया की योजना लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करती है, जिनमें मुश्किल स्थानांतरण, भीड़भाड़ वाले संकरे रास्ते और सार्वजनिक जगहों की कमी शामिल हैं। डिजाइनरों ने कॉनकोर्स और टिकट गेट के क्षेत्रों को चौड़ा किया है, नए ऊर्ध्वाधर संपर्क जोड़े हैं और परिसर के बीच से 20 मीटर से अधिक चौड़ा स्पष्ट पूर्व-पश्चिम गलियारा बनाया है। ऊपरी मंजिलों पर नया पैदल डेक टिकटिंग क्षेत्रों को आसपास की सड़कों और बस्तियों से जोड़ेगा। इससे यात्राएं छोटी होंगी और उन इमारतों के बीच लोगों की आवाजाही सहज होगी, जो पहले एक-दूसरे से कटी हुई लगती थीं।

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करदाताओं पर अधिक बोझ डाले बिना पुनर्निर्माण का वित्तपोषण

बड़े स्टेशन प्रोजेक्ट बनाना और उनका रखरखाव करना महंगा होता है। टोक्यो ने ऐसा मॉडल विकसित किया है जिसमें नए विकास से पैदा हुए जमीन के मूल्य का इस्तेमाल सार्वजनिक निर्माण के खर्च में मदद के लिए किया जाता है। इसे लैंड वैल्यू कैप्चर (एलवीसी) कहते हैं। कर और शुल्क के साधनों में संपत्ति कर से होने वाली बढ़ोतरी, सुधार शुल्क और टैक्स इन्क्रीमेंट फाइनेंसिंग शामिल हैं। विकास से जुड़े साधनों में जमीन की बिक्री और पट्टे पर देना, पटरियों और सड़कों के ऊपर निर्माण अधिकार बेचना, भूखंडों को एकत्र कर उनका पुनर्वितरण करने वाली भूमि पुनर्समायोजन प्रक्रिया और विशेष शहरी पुनर्विकास वित्तपोषण शामिल हैं। शिबुया में रेल कंपनियां और डेवलपर स्टेशन के उन्नयन से लाभ पाने वाली अचल संपत्ति में निवेश करते हैं और उस मूल्य का एक हिस्सा सुधारों के वित्तपोषण में मदद करता है।

व्यवहार में जमीन के मूल्य का उपयोग

परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भूमिकाएं स्पष्ट होना जरूरी है। रेल क्षेत्र पटरियों और स्टेशन के उन्नयन पर ध्यान देता है। सार्वजनिक क्षेत्र सड़कों और उपयोगिता सेवाओं की अगुवाई करता है। निजी और रेलवे साझेदार टावरों और खुदरा परिसरों की जिम्मेदारी लेते हैं। परियोजनाओं के लिए भूस्वामियों की सहमति ऐसी व्यवस्था के तहत ली जाती है, जिसमें दो-तिहाई हितधारकों की मंजूरी मिलने पर काम आगे बढ़ सकता है। इसके साथ लंबी परामर्श प्रक्रिया और डिजाइन की समीक्षा भी होती है। निर्माण के वर्षों के दौरान समर्थन बनाए रखने के लिए सामुदायिक भ्रमण, सूचना अभियान और निर्माण स्थलों के दौरे तक आयोजित किए गए हैं, जबकि ट्रेनें लगातार चलती रहती हैं। इसका नतीजा परियोजनाओं की एक निरंतर श्रृंखला के रूप में सामने आता है, जिसका सार्वजनिक बजट पर सीधा असर सीमित है और जो स्टेशन तथा उसके आसपास की इमारतों के बीच मजबूत संबंध बनाती है।

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आपदा की तैयारी और सार्वजनिक जगहें

सुरक्षा इस योजना का केंद्रीय विषय है। शिबुया में बन रही कई इमारतें 1980 के दशक या उससे पहले की उन संरचनाओं की जगह ले रही हैं, जो अब भूकंप और आग से जुड़े मौजूदा मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। 2011 के ग्रेट ईस्ट जापान भूकंप से मिले सबक ने टावरों की इंजीनियरिंग और सार्वजनिक जगहों के उपयोग को प्रभावित किया है। स्टेशन के आसपास के नए प्लाजा रोजमर्रा में लोगों के मिलने-जुलने की जगह होंगे और आपात स्थिति में अस्थायी निकासी स्थलों के रूप में काम करने के लिए बनाए गए हैं। चौड़े निशुल्क रास्ते और डेक नेटवर्क भीड़भाड़ घटाते हैं और किसी घटना की स्थिति में आपात सेवा दलों को वैकल्पिक रास्ते देते हैं।

बेहतर सार्वजनिक जगहें उस जिले में भीड़ संभालने का साधन भी हैं, जहां दिन-रात आगंतुक आते हैं। शिबुया विदेशी पर्यटकों के लिए टोक्यो का सबसे अधिक देखा जाने वाला इलाका बन गया है। स्थानीय अधिकारियों ने संकरी सड़कों पर दबाव घटाने के लिए लोगों को क्रॉसिंग और हाचिको की मूर्ति से आगे के इलाकों की ओर भेजने की कोशिश की है। शहरी केंद्र और स्काईवे पैदल यात्रियों को घाटी के अलग-अलग हिस्सों में फैलाने में मदद करेंगे। नए दिशा-सूचक आगंतुकों को स्टेशन के पश्चिम में नाबेशिमा शोटो पार्क जैसी अपेक्षाकृत शांत जगहों की ओर ले जाएंगे। इस पार्क में वास्तुकार केंगो कुमा द्वारा डिजाइन किया गया सार्वजनिक शौचालय है, जो द टोक्यो टॉयलेट परियोजना का हिस्सा है। यह इस बात का छोटा उदाहरण है कि जिला रोजमर्रा के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन का इस्तेमाल कैसे करता है। रात के समय की नीतियों का लक्ष्य भीड़ को कुछ ही ब्लॉकों में केंद्रित करने के बजाय पूरे शिबुया में संगीत बार और छोटे आयोजन स्थलों तक फैलाना है।

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स्टार्टअप और संस्कृति के लिए लॉन्चपैड के रूप में शिबुया

यह पुनर्विकास सिर्फ नई इमारतों के बारे में नहीं है। टोक्यू लैंड और उसके साझेदार 2.5 किलोमीटर के दायरे में ग्रेटर शिबुया क्षेत्र विकसित करने की बात करते हैं, जो दाइकेनयामा, हाराजुकु, आओयामा और योयोगी जैसे इलाकों को जोड़ता है। नई अवधारणा, जिसे अक्सर ग्रेटर शिबुया 2.0 कहा जाता है, डिजिटल सेवाओं और टिकाऊ विकास कार्यक्रमों के साथ काम, रहन-सहन और मनोरंजन को एकीकृत करना चाहती है। मैबल्स नाम का डिजिटल प्लेटफॉर्म अलग-अलग इमारतों में काम करने वाले कर्मचारियों को जोड़ता है और नए साझा स्थानों में मिलन-कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और सीखने के सत्र होते हैं। स्टार्टअप को समर्थन देना इस योजना का अहम हिस्सा है। सहयोगी सुविधाओं और साकुरा डीपटेक शिबुया जैसे कार्यक्रमों का लक्ष्य उन्नत क्षेत्रों में काम कर रहे शोधकर्ताओं और संस्थापकों को आकर्षित करना है।

इलाके का प्रबंधन रोजमर्रा के कामकाज में अहम भूमिका निभाता है। डेवलपर और वार्ड प्रशासन स्थानीय समूहों के साथ मिलकर सड़कों की सफाई, सड़क सुरक्षा और मौसमी कार्यक्रमों का समन्वय करते हैं। शिबुया के नए साल के उलटी गिनती वाले कार्यक्रम को सुरक्षित और परिवारों के अनुकूल बनाया गया है। यह उन अनियंत्रित जमावड़ों से अलग है, जिनसे पहले इलाके की सड़कें जाम हो जाती थीं। लक्ष्य उस ऊर्जा को बनाए रखना है जिसने शिबुया को मशहूर बनाया, साथ ही निवासियों, कामगारों और आगंतुकों के लिए अनुभव को अधिक साफ-सुथरा, आसान और समावेशी बनाना है।

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कार्यालयों की मांग, खुदरा कारोबार में बदलाव और पर्यटन

शिबुया का पुनरुत्थान ऐसे दौर में हो रहा है, जब काम करने के तरीके बदल रहे हैं। महामारी के दौरान दूरस्थ और लचीले कार्य-समय का चलन बढ़ा और कंपनियां अब भी कार्यालयों के आकार और बनावट पर नए सिरे से विचार कर रही हैं। अनिश्चितता से बचाव के लिए शिबुया के डेवलपर हर परियोजना में अलग-अलग उपयोगों को शामिल कर रहे हैं। नए टावरों में कार्यालयों और दुकानों के साथ होटल, सर्विस्ड अपार्टमेंट, सांस्कृतिक सुविधाएं और कार्यक्रम स्थल भी हैं। प्रस्तावित सेंट्रल टावर की 10वीं मंजिल पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान केंद्र होगा। वहीं, स्क्रैम्बल स्क्वायर का संयुक्त परिसर हर मंजिल पर करीब 6,000 वर्ग मीटर के बड़े खुदरा क्षेत्र उपलब्ध कराएगा, ताकि प्रमुख ब्रांडों के स्टोर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आकर्षक आयोजन हो सकें।

पर्यटन जोरदार ढंग से लौट आया है और शिबुया कई पर्यटकों के यात्रा कार्यक्रम में शामिल है। सर्वेक्षण बताते हैं कि टोक्यो आने वाले विदेशी पर्यटकों में से अधिकांश अपने प्रवास के दौरान शिबुया जाते हैं। इस लोकप्रियता के साथ भीड़ और शोर को संभालने की चुनौती भी आती है, खासकर सप्ताहांत और छुट्टियों की रातों में। वार्ड अधिकारी जगहों के डिजाइन और कार्यक्रमों के समय, दोनों के जरिए लोगों को अलग-अलग समय और इलाकों में फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पैदल रास्तों का नेटवर्क, स्पष्ट संकेत और नए प्लाजा दिन के समय आगंतुकों को फैलाएंगे। बार और नाइटक्लब संघों के साथ साझेदारी लोगों को पूरे जिले में संगीत बार और छोटे आयोजन स्थलों तक जाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे डोगेनज़ाका और शिबुया 109 के आसपास की सड़कों जैसे लोकप्रिय ठिकानों पर दबाव घटेगा।

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दूसरे शहर क्या देख रहे हैं

पूर्वी एशिया में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। अधिक आबादी घनत्व, अक्सर चलने वाली रेल सेवाएं और निजी कारों के स्वामित्व को हतोत्साहित करने वाली नीतियां पैदल चलने योग्य केंद्रों और लोगों की निरंतर आवाजाही को बढ़ावा देती हैं। हांगकांग और सिंगापुर जैसे शहर मजबूत सार्वजनिक परिवहन के साथ ऐसी नीतियां अपनाते हैं जिनसे कार रखना महंगा हो जाता है और लोग रेल की ओर बढ़ते हैं। शिबुया दिखाता है कि जब परिवहन, अचल संपत्ति और सार्वजनिक जगहों को एक ही योजना में रखा जाता है, तो रेल क्षेत्र नए निवेश का मंच कैसे बन सकता है। सफलता स्थानीय बारीकियों को समझने पर निर्भर करती है: वहां की भौगोलिक बनावट और संस्कृति से लेकर परियोजनाओं को आगे बढ़ाने वाले कानूनी साधनों तक।

शिबुया का तरीका विदेशों का ध्यान खींच रहा है। होनोलूलू ने हाल ही में शिबुया के साथ सिस्टर सिटी संबंध स्थापित किया है। इसका एक उद्देश्य उसके परिवहन केंद्र और निजी क्षेत्र की अगुवाई वाले विकास से सीखना है। दौरे पर आए अधिकारियों ने देखा कि निजी रेल और भूमि कंपनियां शहर के योजनाकारों के साथ मिलकर समन्वित परियोजनाएं कैसे पूरी करती हैं। जापान के अन्य परिवहन केंद्रों में भी यही तरीका अपनाया जाता है।

एशिया के दूसरे शहरों से तुलना करना उपयोगी है। टोक्यो ने 2002 में शहरी पुनरुत्थान पर राष्ट्रीय विशेष कानून अपनाया था, जिसने चुने हुए क्षेत्रों में फर्श क्षेत्र की सीमाएं ढीली कीं और परिवहन से जुड़ी बड़ी मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं को संभव बनाया। इस निरंतरता से परियोजनाओं की लंबी श्रृंखला तैयार करने में मदद मिली। इसके उलट, जहां बदलती नीतियों और विरासत को लेकर विवादों के कारण पुनर्विकास अटका हुआ है, वहां अक्सर वर्षों की देरी होती है। स्पष्ट मानक, स्थिर नियम और व्यापक सार्वजनिक संवाद से बेहद केंद्रीय इलाकों में पुराने और नए के बीच संतुलन बनाना आसान होता है।

मुख्य बातें

  • 2030 तक शिबुया एक बहुस्तरीय पैदल यात्री नेटवर्क पूरा करेगा, जो स्टेशन को हर दिशा से जोड़ेगा।
  • शिबुया स्क्रैम्बल स्क्वायर के सेंट्रल और वेस्ट टावर 2031 में खुलने वाले हैं। ये 2019 के ईस्ट टावर से जुड़ेंगे और बड़े खुदरा तल उपलब्ध कराएंगे।
  • 2034 तक कुल करीब 20,000 वर्ग मीटर के पांच नए प्लाजा बनाने की योजना है। इनका उपयोग रोजमर्रा के कामों और आपात निकासी, दोनों के लिए होगा।
  • शिबुया स्टेशन के उन्नयन में चौड़े कॉनकोर्स, नए टिकट गेट और 20 मीटर से अधिक चौड़ा निशुल्क पूर्व-पश्चिम गलियारा शामिल हैं।
  • योजना में 3,000 वर्ग मीटर का पैदल डेक शामिल है, जो स्टेशन के टिकटिंग क्षेत्रों को शिबुया चुओ स्ट्रीट और सकुरागाओका से जोड़ेगा।
  • ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट इस कार्यक्रम का आधार है। यहां रोजाना करीब 21 लाख यात्रियों की आवाजाही घनी, पैदल चलने योग्य सड़कों को सहारा देती है।
  • वित्तपोषण जमीन के मूल्य का उपयोग और रेल तथा रियल एस्टेट कंपनियों के निजी निवेश पर निर्भर है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बजट पर असर सीमित रहता है।
  • 2011 के भूकंप के बाद आपदा की तैयारी ने डिजाइन को प्रभावित किया। नए प्लाजा अस्थायी निकासी स्थलों के रूप में काम कर सकते हैं।
  • शिबुया वार्ड क्रॉसिंग से आगे आगंतुकों को फैलाकर और घाटी में ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज आवाजाही बेहतर बनाकर भीड़ से निपट रहा है।
  • ग्रेटर शिबुया रणनीति डिजिटल प्लेटफॉर्म, साझा स्थानों और इलाके के प्रबंधन के जरिए स्टार्टअप और संस्कृति को बढ़ावा देती है।
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