बिजली गिरने से ओसाका व्हील रुका, 20 लोग नौ घंटे तक फंसे

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OSAKA WHEEL!日本一の高さと常識を変える観覧車 …

एक्सपोसिटी में क्या हुआ

मंगलवार को शाम 6 बजे से कुछ समय पहले उत्तरी ओसाका में आए तूफान के कारण सुइता शहर के एक्सपोसिटी परिसर में 123 मीटर ऊंचा ओसाका व्हील आपात स्थिति में रुक गया। विशाल संरचना के रुकने पर नौ गोंडोलाओं में सवार करीब 20 लोग हवा में फंस गए। कर्मचारियों ने एक-एक केबिन को नीचे लाने के लिए हाथ से पहिया घुमाकर लोगों को सुरक्षित उतारने की प्रक्रिया शुरू की। किसी के घायल होने की खबर नहीं है। आखिरी व्यक्ति बुधवार तड़के करीब 2:40 बजे जमीन पर पहुंचा, यानी पहिया रुकने के लगभग नौ घंटे बाद।

विषय-सूची
  1. एक्सपोसिटी में क्या हुआ
  2. बचाव अभियान की समयरेखा
  3. बिजली गिरने से विशाल पहिया क्यों रुक सकता है
  4. फेल-सेफ प्रणालियां कैसे काम करती हैं
  5. बिजली के झटके के बाद प्रबंधन
  6. ऊंची संरचनाओं पर बिजली से सुरक्षा
  7. घंटे बीतने के दौरान गोंडोलाओं के भीतर
  8. जमीन पर बचाव अभियान
  9. घटनाओं के बाद सुरक्षा और जांच
  10. ओसाका व्हील और आसपास का इलाका
  11. जांचकर्ता आगे किन बातों की समीक्षा करेंगे
  12. यात्रा और टिकट
  13. मुख्य बिंदु

जापान का सबसे ऊंचा फेरिस व्हील बताए जाने वाले इस आकर्षण में 72 बंद गोंडोलाएं हैं और यहां से ओसाका का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। उस रात इस नज़ारे के साथ घंटों इंतजार, जमीन पर सावधानीपूर्वक समन्वय और एक सुनियोजित बचाव अभियान भी जुड़ गया। इलाके में तूफान और तेज हवाओं के बावजूद अभियान में सुरक्षा और गति के बीच संतुलन रखा गया।

बचाव अभियान की समयरेखा

संचालक और स्थानीय बचावकर्मियों के अनुसार, मंगलवार को शाम 6 बजे से कुछ समय पहले तूफान के दौरान पहिया रुक गया। कर्मचारियों ने पहले पहिए को हाथ से घुमाने की कोशिश की, ताकि हर भरी हुई गोंडोला को प्लेटफॉर्म के सामने लाया जा सके। सवारी रुकने और बिजली व्यवस्था के तुरंत सामान्य न हो पाने पर यह मानक प्रक्रिया है। इसे जानबूझकर धीमी गति से किया जाता है, क्योंकि इसका उद्देश्य अचानक होने वाली हलचल रोकना और सवार लोगों के जोखिम को कम करना है।

शाम के शुरुआती घंटों में कई गोंडोलाओं को प्लेटफॉर्म तक लाया गया। अभियान को कई घंटे बीतने के बाद दमकलकर्मी और अन्य आपातकालीन दल विशेष उपकरणों के साथ मदद के लिए पहुंचे। करीब एक दर्जन लोग अब भी ऊपर थे, इसलिए उन केबिनों तक पहुंचने के लिए एक सीढ़ी वाला दमकल वाहन लगाया गया जिन्हें जल्दी प्लेटफॉर्म तक नहीं लाया जा सकता था। दोनों तरीकों से बचाव अभियान जारी रहा और आखिरी यात्री तड़के करीब 2:40 बजे नीचे उतरा।

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बिजली गिरने से विशाल पहिया क्यों रुक सकता है

जांचकर्ता तूफान से जुड़ी घटनाओं की कड़ी की पड़ताल कर रहे हैं। संचालक का मानना है कि बिजली गिरने से सवारी को बिजली देने वाली ग्रिड आपूर्ति बाधित हुई। इस रुकावट के चलते पहिया अपने आप रुक गया। इसके कुछ ही समय बाद बाहरी बिजली आपूर्ति बहाल हो गई, लेकिन खबरों के मुताबिक पहिए की अपनी बिजली और नियंत्रण व्यवस्था में खराबी आ गई, जिससे सामान्य संचालन दोबारा शुरू नहीं हो सका। इसके बाद बचाव दलों को हाथ से चलने वाली प्रक्रियाओं और ऊंचाई पर बचाव के उपकरणों पर निर्भर रहना पड़ा।

फेल-सेफ प्रणालियां कैसे काम करती हैं

मनोरंजन सवारियों को इस तरह बनाया जाता है कि सेंसर में खराबी, बिजली के उतार-चढ़ाव या अन्य अनियमित स्थितियां दिखने पर वे सुरक्षित अवस्था में चली जाएं। बड़े फेरिस व्हील में ब्रेक लगकर घूमना रुक जाता है। गोंडोला प्लेटफॉर्म पर न हो और उसे खोलने की अनुमति न दी गई हो, तो उसके दरवाजे बंद रहते हैं। नियंत्रण कक्ष तब तक सवारी दोबारा शुरू नहीं होने देता, जब तक जांच में बिजली की स्थिर आपूर्ति, संचार व्यवस्था और सेंसर के सही संकेतों की पुष्टि न हो जाए। सुरक्षा की इन परतों का मकसद पहले गति रोकना और फिर स्थिति की जांच करना है।

बिजली के झटके के बाद प्रबंधन

बिजली गिरने से वोल्टेज में उछाल या थोड़ी देर के लिए बिजली गुल होने पर, ग्रिड आपूर्ति जल्दी लौट आने के बावजूद आगे के उपकरण बंद हो सकते हैं। मोटर, ब्रेक और केबिन प्रणालियों का तालमेल संभालने वाला कंट्रोलर खराब हो जाए, तो तकनीशियन सवारी को दोबारा शुरू करने का आदेश नहीं दे पाते। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित कर्मचारी पहिए को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने के लिए हाथ से चलने वाली प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं, या दमकलकर्मियों को बुलाते हैं, जो सीढ़ियों से यात्रियों तक पहुंच सकते हैं। यह प्रक्रिया धीमी होती है, लेकिन इससे हवा में लोगों के रहते दूसरी खराबियों की आशंका घटती है।

ऊंची संरचनाओं पर बिजली से सुरक्षा

आमतौर पर इस आकार के आकर्षणों में बिजली से सुरक्षा और अर्थिंग की व्यवस्था होती है, ताकि बिजली का प्रवाह लोगों से दूर सुरक्षित रास्ते से जमीन तक पहुंच सके। इससे जोखिम घटता है, लेकिन तेज तूफान के दौरान संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का चालू रहना सुनिश्चित नहीं होता। बिजली गिरने की आशंका के बाद संचालक आमतौर पर सवारी को फिर से चलाने की अनुमति देने से पहले केबल, नियंत्रण कैबिनेट और सुरक्षा उपकरणों की जांच करते हैं।

घंटे बीतने के दौरान गोंडोलाओं के भीतर

सवारी के केबिन बंद होते हैं और आमतौर पर उनमें हीटिंग और कूलिंग की सुविधा होती है। संचालक के अनुसार, बिजली बंद रहने के दौरान ये प्रणालियां काम नहीं कर रही थीं। ऐसे में सवार लोगों को गोंडोला के ढांचे से मिलने वाले आश्रय और कर्मचारियों से समय-समय पर मिलने वाली जानकारी पर निर्भर रहना पड़ा। ऊंचाई पर हवा के कारण केबिन थोड़ा झूल सकते हैं, जिससे असुविधा बढ़ती है, भले ही ढांचे को कोई खतरा न हो। किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन तापमान नियंत्रण या शौचालय की सुविधा के बिना लंबा इंतजार तनावपूर्ण हो सकता है, खासकर बच्चों वाले परिवारों और बुजुर्गों के लिए।

बचावकर्मियों ने सुरक्षा जांच और संवाद को प्राथमिकता दी। धीमी और सोच-समझकर अपनाई गई गति से लोगों को व्यवस्थित ढंग से नीचे लाया जा सका: या तो पहिए को हाथ से घुमाकर प्लेटफॉर्म तक लाया गया, या उन केबिनों तक सीढ़ी वाले दमकल वाहन से पहुंचा गया जिन्हें आसानी से सामने नहीं लाया जा सकता था। मौसम और ऊंची संरचनाओं से जुड़े बचाव अभियानों में नियंत्रण बनाए रखने के लिए गति के बजाय सावधानी को प्राथमिकता देना आम बात है।

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जमीन पर बचाव अभियान

पहिया रुकते ही एक्सपोसिटी के कर्मचारियों ने उसे हाथ से घुमाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। उन्होंने दमकल अधिकारियों के साथ तालमेल करके उपकरण तैयार रखे, प्लेटफॉर्म को तैयार किया और यात्रियों को कदम-दर-कदम नीचे उतरने में मदद की। तेज झोंकों के बीच सीढ़ी वाले दमकल वाहन को लगाते समय सही जगह और पर्याप्त खाली जगह का ध्यान रखना जरूरी होता है। इसलिए दलों ने हर गोंडोला के लिए जो तरीका ज्यादा सुरक्षित था, उसके अनुसार यांत्रिक रूप से पहिया घुमाने और सीढ़ी से पहुंचने के बीच बारी-बारी से काम किया।

दमकलकर्मियों ने बताया कि जब वे अभियान में शामिल हुए, तब तक कर्मचारियों ने कई यात्रियों को बचा लिया था। बाकी केबिनों तक पहुंचने के लिए दलों ने दूर तक फैलने वाली सीढ़ी का इस्तेमाल किया, दरवाजों तक पहुंचे, यात्रियों को सुरक्षित किया और उन्हें नीचे लाए। ऊंचाई पर बचाव और प्लेटफॉर्म संचालन का प्रशिक्षण शहरी दमकल विभागों की नियमित तैयारी का हिस्सा है। घटनास्थल पर शांत और स्थिर गति से चला अभियान इसी तैयारी का नतीजा था।

घटनाओं के बाद सुरक्षा और जांच

ऐसी घटना के बाद संचालक आमतौर पर पूरी संरचना, ड्राइव और ब्रेक प्रणालियों तथा नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स की ऊपर से नीचे तक जांच करते हैं। बिजली के झटके से प्रभावित पुर्जों को बदला या ठीक किया जाता है। अधिकारी रखरखाव के रिकॉर्ड की समीक्षा कर सकते हैं और सवारी दोबारा शुरू करने की योजना को मंजूरी दे सकते हैं। संचालक पहले ही कह चुका है कि वह घटना के कारण की जांच कर रहा है और पहिया रुकने की रात अपनाई गई आपातकालीन प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है।

तूफान में पहिए को काफी नुकसान पहुंचा है और यह अब भी बंद है। दोबारा खुलने की तारीख तय नहीं हुई है। सवारी शुरू होने से पहले तकनीशियन केबल, बेयरिंग, सेंसर नेटवर्क और प्रणाली का तालमेल संभालने वाली बिजली प्रबंधन इकाइयों की स्थिति की पुष्टि करेंगे। आमतौर पर सीमित रूप से सवारी फिर शुरू करने से पहले खाली केबिनों के साथ परीक्षण किया जाता है और कर्मचारी हर सर्किट पर नजर रखने के लिए तैयार रहते हैं।

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ओसाका व्हील और आसपास का इलाका

ओसाका व्हील सुइता शहर के एक खरीदारी और मनोरंजन परिसर, एक्सपोसिटी के भीतर है। यह स्थल टॉवर ऑफ द सन के पास है। यह ऐतिहासिक मूर्ति 1970 के जापान विश्व एक्सपो के समय से संरक्षित है। साफ मौसम में केबिनों से उत्तरी ओसाका के मैदान का नज़ारा दिखता है, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है।

ओसाका व्हील को जापान का अपनी तरह का सबसे ऊंचा पहिया बताया जाता है और इसकी अधिकतम ऊंचाई 123 मीटर है। इसमें प्रीमियम केबिनों समेत 72 गोंडोलाएं हैं और मौसम अनुकूल होने पर यह पूरे साल चलता है। इसका आकार और ऊंचाई इसे आकर्षक बनाते हैं, लेकिन प्रणाली में खराबी आने पर बचाव कार्य में समय भी लगता है, भले ही कर्मचारी इसके लिए अच्छी तरह प्रशिक्षित हों।

जांचकर्ता आगे किन बातों की समीक्षा करेंगे

तकनीकी दल पहली बिजली संबंधी गड़बड़ी से लेकर आखिरी व्यक्ति को सुरक्षित निकालने तक की घटनाओं का सटीक क्रम तैयार करेंगे। शुरुआती जांच का ध्यान बिजली गिरने से ग्रिड आपूर्ति बाधित होने और उसके बाद पहिए की अपनी बिजली प्रबंधन प्रणाली में खराबी आने पर है। इंजीनियर जांचेंगे कि बिजली सीधे पहिए पर गिरी थी या पास की बिजली लाइनों अथवा जमीन के रास्ते आए वोल्टेज के झटके से समस्या हुई। वे यह भी पता लगाएंगे कि ग्रिड बिजली लौटने के बाद कंट्रोलर ने सवारी को दोबारा शुरू करने की अनुमति क्यों नहीं दी।

आपातकालीन प्रक्रियाओं की भी समीक्षा होगी। कर्मचारियों ने पहिए को हाथ से घुमाने और केबिनों में सवार लोगों को आवाज देकर जानकारी देने पर भरोसा किया। दमकलकर्मियों ने ऊंचे केबिनों तक पहुंचने के लिए सीढ़ी वाले वाहन का इस्तेमाल किया। प्रबंधक आकलन करेंगे कि क्या भविष्य में ऐसे तूफानों के दौरान यात्रियों का लंबा इंतजार आसान बनाने के लिए परिसर में अतिरिक्त बैकअप बिजली, अस्थायी रोशनी या पोर्टेबल जलवायु नियंत्रण उपकरण रखे जा सकते हैं। वे यह भी देखेंगे कि जोखिम बढ़ाए बिना बचाव का समय घटाने के लिए सॉफ्टवेयर, वोल्टेज सुरक्षा या प्रशिक्षण में बदलाव किया जा सकता है या नहीं।

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यात्रा और टिकट

मरम्मत के लिए आकर्षण बंद होने के चलते एक्सपोसिटी जाने की योजना बना रहे लोगों को निकलने से पहले पहिए की स्थिति जांच लेनी चाहिए। पास के भोजनालय, दुकानें और एक्सपो स्मारक पार्क सामान्य समय पर खुले रहते हैं, बशर्ते मौसम अनुकूल हो। सवारी बंद होने की स्थिति में टिकट संबंधी नियम बिक्री केंद्र पर संचालक तय करता है। संचालन दोबारा शुरू होने पर कर्मचारी आमतौर पर ग्राहकों को रिफंड या टिकट की नई तारीख तय करने के बारे में जानकारी देते हैं।

तूफान गर्मियों में सबसे आम होते हैं, लेकिन साल के अन्य समय में भी आ सकते हैं। जापान के पार्क और मनोरंजन स्थल आसपास बिजली गिरने की स्थिति में सवारियां रोक देते हैं। उद्योग में यह मानक प्रक्रिया है और इस घटना में किसी के घायल न होने की यह भी एक वजह है।

मुख्य बिंदु

  • सुइता के एक्सपोसिटी स्थित ओसाका व्हील मंगलवार को शाम 6 बजे से कुछ समय पहले तूफान के दौरान रुक गया।
  • नौ गोंडोलाओं में करीब 20 लोग फंसे थे; सभी को बिना किसी चोट के बचा लिया गया।
  • कर्मचारियों ने पहिया हाथ से घुमाया और दमकलकर्मियों ने ऊंचे केबिनों तक पहुंचने के लिए सीढ़ी वाले वाहन का इस्तेमाल किया।
  • आखिरी यात्री करीब नौ घंटे बाद, तड़के 2:40 बजे जमीन पर पहुंचा।
  • संचालक के अनुसार, बिजली गिरने से जुड़ी बिजली आपूर्ति में खराबी और नियंत्रण प्रणाली की गड़बड़ी इसकी संभावित वजह है।
  • पहिया रुका रहने के दौरान केबिनों में हीटिंग और कूलिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
  • यह पहिया 123 मीटर ऊंचा है, इसमें 72 गोंडोलाएं हैं और जांच तथा मरम्मत के लिए अब भी बंद है।
  • जांच जारी रहने के कारण दोबारा खुलने की समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
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