COP30 में एक बड़े कोयला उपभोक्ता के लिए निर्णायक मोड़
दक्षिण कोरिया ने ब्राज़ील के बेलेम में COP30 के दौरान ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लिया। सरकार ने घोषणा की कि वह पॉवरिंग पास्ट कोल अलायंस में शामिल हो गया है। यह देशों, क्षेत्रों, शहरों और कंपनियों का ऐसा गठबंधन है, जो बिना कार्बन नियंत्रण वाले कोयला बिजली उत्पादन को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सदस्यता के साथ दो बड़ी प्रतिबद्धताएं जुड़ी हैं। सियोल कार्बन उत्सर्जन नियंत्रित करने वाली तकनीकों के बिना कोयला जलाने वाले नए बिजलीघर बनाना बंद करेगा और 2040 तक 40 मौजूदा कोयला इकाइयां बंद करेगा। सिंगापुर के बाद गठबंधन में शामिल होने वाली यह एशिया की दूसरी राष्ट्रीय सरकार है। यह उस देश का फैसला है, जहां अब भी करीब एक-तिहाई बिजली कोयले से बनती है।
विषय-सूची
- COP30 में एक बड़े कोयला उपभोक्ता के लिए निर्णायक मोड़
- प्रतिबद्धता में क्या शामिल है
- कोरिया में कोयला अब भी क्यों अहम है
- पॉवरिंग पास्ट कोल अलायंस कैसे काम करता है
- बिजली मिश्रण में कोयले की जगह क्या लेगा
- रोजगार, उद्योग और न्यायसंगत बदलाव
- चुनौतियां, लागत और आगे की समय-सारणी
- क्षेत्रीय और वैश्विक असर
- मुख्य बातें
यह कदम उस देश की रणनीति में बदलाव का संकेत है, जिसके पास दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कोयला बिजलीघर बेड़ा है और जो कोयले का चौथा सबसे बड़ा आयातक है। कोयला लंबे समय से कोरियाई बिजली आपूर्ति की रीढ़ रहा है, क्योंकि पहले इसे स्थिर उत्पादन और कीमत के लिहाज से उपयोगी माना जाता था। बिजली क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का सबसे बड़ा अकेला स्रोत भी यही है। गठबंधन में शामिल होकर सियोल अपनी राष्ट्रीय नीति को उस वैश्विक रुझान के अनुरूप कर रहा है, जो स्वच्छ बिजली की लागत में लगातार गिरावट और कोयला परियोजनाओं से वित्तीय निवेश के दूर जाने के साथ तेज हो रहा है।
अधिकारियों ने इस फैसले को जलवायु कार्रवाई के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने का तरीका बताया। सरकार ने घोषणा के साथ 2035 का नया जलवायु लक्ष्य भी रखा: 2018 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन में 53 से 61 प्रतिशत की कटौती। यह 2050 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने की राह का एक पड़ाव है। यह प्रतिबद्धता ऐसे समय आई है, जब दुनिया भर में नवीकरणीय ऊर्जा नए रिकॉर्ड बना रही है और बिजली प्रणालियां ऐसे भविष्य की तैयारी कर रही हैं, जिसमें पवन, सौर ऊर्जा, भंडारण और लचीले संसाधनों की प्रमुख भूमिका होगी।
प्रतिबद्धता में क्या शामिल है
गठबंधन का लक्ष्य बिना कार्बन नियंत्रण वाले कोयला बिजली उत्पादन को समाप्त करना है। इसका मतलब ऐसे कोयला संयंत्रों को बंद करना है, जो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को पकड़ने या उल्लेखनीय रूप से घटाने वाली तकनीकों के बिना चलते हैं। दक्षिण कोरिया ने 2040 तक 40 कोयला इकाइयां बंद करने और बिना कार्बन नियंत्रण वाले नए संयंत्रों की सभी योजनाएं रद्द करने की प्रतिबद्धता जताई है। बाकी संयंत्रों के बेड़े का भविष्य आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं पर सार्वजनिक परामर्श के बाद तय होगा। विस्तृत रोडमैप अगले साल आने की उम्मीद है।
यह नीति बिजली उत्पादन पर लागू होती है। इसमें इस्पात जैसे उद्योगों में कोयले का इस्तेमाल शामिल नहीं है, लेकिन इससे राष्ट्रीय बिजली मिश्रण का स्वरूप बदलेगा। मंत्रालय ने कोयले को चरणबद्ध ढंग से हटाने को ऊर्जा सुरक्षा बेहतर करने, वायु प्रदूषण घटाने और स्वच्छ बिजली तथा सहायक उद्योगों में निवेश आकर्षित करने का अवसर बताया है। इन उद्योगों में ग्रिड उपकरण, बैटरियां और स्वच्छ हाइड्रोजन शामिल हैं।
अधिकारियों ने कहा कि बाकी इकाइयों के लिए सटीक समय-सारणी सार्वजनिक प्रक्रिया के जरिए तय होगी। मंत्रालय प्रणाली की विश्वसनीयता, लागत और क्षेत्रीय प्रभावों की समीक्षा के बाद 2026 में विस्तृत रोडमैप प्रकाशित करने की योजना बना रहा है।
कोरिया में कोयला अब भी क्यों अहम है
पिछले साल कोयले से कोरिया की करीब 30.5 प्रतिशत बिजली बनी, जो 2009 के 46.3 प्रतिशत से काफी कम है। फिर भी कोयला संयंत्रों का कुल बेड़ा बड़ा है, इसलिए इस नीति का महत्व प्रतीकात्मकता से कहीं आगे है। मौजूदा व्यवस्था में कोयला बिजलीघर स्थिर बिजली देते हैं, खासकर सर्दियों में मांग बढ़ने पर और पवन तथा सौर ऊर्जा का उत्पादन कमजोर रहने के दौरान।
कोयला जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म कण निकलते हैं। एक गीगावाट-घंटा बिजली बनाने के लिए कोयला जलाने से आम तौर पर करीब 888 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है। सूक्ष्म कण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाते हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए, और दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। कोयले से बिजली उत्पादन घटाने से जलवायु और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाली वे लागतें भी कम होंगी, जो मासिक बिजली बिलों में नजर नहीं आतीं।
देश आयातित कोयले पर भी निर्भर है, जिससे बिजली उपभोक्ता कीमतों में उतार-चढ़ाव और विनिमय दर के जोखिम के प्रति संवेदनशील रहते हैं। 2021 से 2022 के दौरान कीमतों में आए झटकों और यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद गैस बाजार में अस्थिरता ने आपूर्ति सुरक्षा को लेकर सोच बदल दी। वैश्विक कोयला बाजारों पर निर्भरता घटाने से लागत स्थिर रखने में मदद मिल सकती है, जबकि घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण और मजबूत ग्रिड का विस्तार होगा।
पॉवरिंग पास्ट कोल अलायंस कैसे काम करता है
पॉवरिंग पास्ट कोल अलायंस की शुरुआत 2017 में COP23 के दौरान ब्रिटेन और कनाडा के नेतृत्व में हुई थी। इसमें राष्ट्रीय और उपराष्ट्रीय सरकारें, व्यवसाय तथा वित्तीय संस्थान शामिल हैं, जो बिना कार्बन नियंत्रण वाले कोयला बिजली उत्पादन को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। गठबंधन नए, बिना कार्बन नियंत्रण वाले संयंत्रों पर रोक लगाने को प्रोत्साहित करता है और सदस्य देशों को संयंत्र बंद करने की समय-सारणी तथा कामगारों और समुदायों की मदद करने वाली नीतियां बनाने में सहायता देता है।
गठबंधन पेरिस समझौते के अनुरूप दिशा तय करता है। उसके विश्लेषण के मुताबिक, OECD और यूरोपीय संघ के सदस्यों को 2030 तक कोयले का इस्तेमाल चरणबद्ध ढंग से समाप्त कर देना चाहिए, जबकि बाकी दुनिया को 2040 तक ऐसा करना चाहिए। सियोल शहर 2020 में उपराष्ट्रीय सदस्य के रूप में गठबंधन में शामिल हुआ था और उसने 2030 तक कोयला छोड़ने की प्रतिबद्धता जताई थी। कोरिया के कई अन्य प्रांत और शहर भी इसमें शामिल हो चुके हैं। कोरिया के गठबंधन में शामिल होने के दिन ही बहरीन भी इसका सदस्य बना और उसने कोयला बिजलीघर कभी न बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
ब्रिटेन के ऊर्जा सुरक्षा और नेट ज़ीरो विभाग में जलवायु मंत्री और गठबंधन की सह-अध्यक्ष केट व्हाइट ने इस फैसले का स्वागत किया।
जब दुनिया कोयले से दूर जा रही है, तब दक्षिण कोरिया ने इस आंदोलन में शामिल होकर जलवायु नेतृत्व का सच्चा उदाहरण पेश किया है।
बिजली मिश्रण में कोयले की जगह क्या लेगा
कोयले को सफलतापूर्वक चरणबद्ध ढंग से हटाने के लिए यह स्पष्ट योजना जरूरी है कि बिजली उत्पादन क्रम में उसकी जगह कौन लेगा। सरकार ने ऐसा रास्ता बताया है जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ेगी, परमाणु ऊर्जा को भरोसेमंद कम-कार्बन स्रोत के रूप में बनाए रखा जाएगा और गैस का इस्तेमाल आपात स्थितियों के लिए होगा। 2035 तक राष्ट्रीय जलवायु योजना का लक्ष्य 2018 के स्तर से उत्सर्जन में 53 से 61 प्रतिशत की कटौती करना है। 2038 के लिए योजना दस्तावेजों में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत के मध्य स्तर पर और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रखने का संकेत है। इससे कार्बन-मुक्त बिजली की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकती है।
अधिकारियों ने एक दर्जन कोयला बिजलीघरों को हाइड्रोजन या अमोनिया के मिश्रण से चलाने के प्रस्तावों का भी जिक्र किया। इनमें से कुछ इकाइयां जरूरत के चरम घंटों में क्षमता उपलब्ध कराने के लिए चलेंगी। ये विकल्प लचीलापन देने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनके साथ समझौते भी जुड़े हैं। हाइड्रोजन का उत्पादन अब भी सीमित और महंगा है, और आज अधिकांश हाइड्रोजन जीवाश्म ईंधन से बनाई जाती है। कोयला बॉयलरों में अमोनिया मिलाकर जलाने से चिमनी से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड घट सकती है, लेकिन इससे आपूर्ति शृंखला, नाइट्रोजन ऑक्साइड नियंत्रण और लागत को लेकर सवाल उठते हैं।
पवन और सौर ऊर्जा के उत्पादन में उतार-चढ़ाव पर गैस से तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकती है, लेकिन गैस आपूर्ति शृंखला में मीथेन रिसाव से जलवायु संबंधी लाभ घट जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में अस्थिरता रह सकती है। कोरिया के नागरिक समाज समूहों ने सरकार से नई गैस क्षमता को बढ़ावा देकर उस पर निर्भरता कायम करने से बचने और इसके बजाय नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण, मांग-प्रतिक्रिया और पारेषण ढांचे में सुधार के निवेश तेज करने की अपील की है। कई अध्ययनों का तर्क है कि राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप कोयला संयंत्रों का पूरा बेड़ा 2035 तक बंद होना चाहिए। इसके लिए तेज समय-सारणी और मजबूत प्रोत्साहन जरूरी होंगे।
रोजगार, उद्योग और न्यायसंगत बदलाव
नीति निर्माताओं ने इस प्रतिबद्धता को प्रतिस्पर्धात्मकता और रोजगार सृजन से जोड़ा। नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड विस्तार और स्वच्छ विनिर्माण नई पूंजी आकर्षित कर सकते हैं, खासकर तब जब बहुराष्ट्रीय खरीदार अपनी आपूर्ति शृंखलाओं के लिए कम-कार्बन बिजली मांग रहे हैं। शुरुआत में कदम उठाने वाले घरेलू उद्योगों को पुर्जों, ग्रिड नियंत्रण प्रणालियों और बैटरी सामग्री के ऑर्डर मिल सकते हैं।
COP30 में कोरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जलवायु मंत्री किम सुंग-ह्वान ने सार्वजनिक वक्तव्य में इन लाभों पर जोर दिया।
जलवायु के लिए कोयले को चरणबद्ध ढंग से हटाना जरूरी है, और इससे ऊर्जा सुरक्षा, कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता तथा रोजगार सृजन को भी लाभ होगा।
इन लाभों को हासिल करना ऐसी न्यायसंगत बदलाव योजना पर निर्भर करेगा, जो कोयला संयंत्रों और कोयला आपूर्ति शृंखला में काम करने वाले लोगों की मदद करे। इसमें पुनः प्रशिक्षण, स्थानीय निवेश कोष और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा कारखाने तथा ग्रिड परियोजनाएं स्थापित करने के प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं। स्पष्ट समय-सीमाएं समुदायों और व्यवसायों को पहले से योजना बनाने में मदद करती हैं।
चुनौतियां, लागत और आगे की समय-सारणी
सरकार ने 2040 तक 40 संयंत्र बंद करने की पुष्टि की है और कहा है कि बाकी संयंत्रों पर फैसला आर्थिक और पर्यावरणीय व्यवहार्यता के सार्वजनिक परामर्श के बाद होगा। अधिकारियों की योजना अगले साल विस्तृत रोडमैप प्रकाशित करने की है। इस प्रक्रिया में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, वहनीयता और नई पारेषण लाइनों तथा भंडारण के लिए अनुमति देने की गति पर विचार करना होगा।
कोरिया ने बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी पहले ही घटाकर करीब 30 प्रतिशत कर दी है, लेकिन बाकी उत्पादन की जगह लेने के लिए पवन और सौर ऊर्जा में बड़े विस्तार, तेजी से ग्रिड से जोड़ने और लचीली बिजली आपूर्ति को सही प्रोत्साहन देने की जरूरत होगी। मांग-प्रतिक्रिया और भंडारण में भागीदारी के नियम चरम मांग और ग्रिड पर दबाव घटा सकते हैं। घरों और कारखानों में ऊर्जा दक्षता बेहतर करने वाले उपभोक्ता कार्यक्रम बिल कम कर सकते हैं और उपलब्ध क्षमता बढ़ा सकते हैं।
हर संयंत्र के लिए स्पष्ट समय-सारणी, नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण की पारदर्शी खरीद प्रक्रिया तथा ग्रिड में लगातार निवेश बदलाव को लेकर भरोसा बढ़ा सकते हैं। गठबंधन का ढांचा कोरिया को उन देशों के अनुभव तक पहुंच देता है, जिन्होंने ऐसे ही बदलाव किए हैं। इससे नीतियां बनाने और कामगारों की मदद करने के तरीकों से सीखने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
दक्षिण कोरिया समुद्री मार्ग से आने वाले तापीय कोयले का एक बड़ा खरीदार है। 2040 तक कोयला बिजली उत्पादन चरणबद्ध ढंग से बंद करने की प्रतिबद्धता निर्यातकों के लिए दीर्घकालिक मांग कमजोर होने का संकेत है। इनमें ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है, जहां कोरियाई बिजली कंपनियां सबसे बड़े ग्राहकों में रही हैं। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि इस घोषणा से अन्य एशियाई खरीदारों पर अपनी कोयला-बंदी की समय-सारणी घोषित करने का दबाव बढ़ेगा।
इस प्रतिबद्धता का कूटनीतिक महत्व भी है। अब तक कोरिया OECD के उन गिने-चुने सदस्यों में था, जो गठबंधन में शामिल नहीं थे। इसके शामिल होने से पूर्वोत्तर और दक्षिण-पूर्व एशिया के साझेदारों को संकेत मिलता है। कोयले के दो सबसे बड़े उपभोक्ता चीन और भारत गठबंधन के सदस्य नहीं हैं। फिर भी सियोल का फैसला दिखाता है कि बड़े कोयला संयंत्र बेड़े वाली एक बड़ी औद्योगिक अर्थव्यवस्था अब योजनाबद्ध तरीके से कोयले से बाहर निकलने की तैयारी कर सकती है।
मुख्य बातें
- दक्षिण कोरिया COP30 में पॉवरिंग पास्ट कोल अलायंस में शामिल हुआ और सिंगापुर के बाद ऐसा करने वाली एशिया की दूसरी सरकार बना।
- सरकार बिना कार्बन नियंत्रण वाले नए कोयला संयंत्र बनाना बंद करेगी और 2040 तक 40 मौजूदा कोयला इकाइयां बंद करेगी।
- बाकी कोयला इकाइयों को बंद करने की समय-सारणी सार्वजनिक परामर्श के जरिए तय होगी। विस्तृत रोडमैप 2026 में आने की उम्मीद है।
- पिछले साल कोरिया की करीब 30.5 प्रतिशत बिजली कोयले से बनी, जो 2009 के 46.3 प्रतिशत से कम है।
- कोरिया ने 2035 तक उत्सर्जन में 2018 के स्तर से 53 से 61 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य रखा है। यह 2050 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने की राह का हिस्सा है।
- बिजली मिश्रण की भावी योजनाओं में नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा बढ़ाने, गैस को आपात स्थितियों के लिए रखने और कुछ कोयला इकाइयों को हाइड्रोजन या अमोनिया पर चलाने का प्रस्ताव है।
- अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से ऊर्जा सुरक्षा, प्रतिस्पर्धात्मकता और रोजगार सृजन को मदद मिलेगी, जबकि गैर-सरकारी संगठन तेज समय-सारणी और नई गैस परियोजनाओं पर रोक की मांग कर रहे हैं।
- इस कदम के क्षेत्रीय और व्यापारिक असर होंगे। इससे तापीय कोयले के निर्यात की दीर्घकालिक मांग कमजोर होने का संकेत मिलता है और अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर कोयले से बाहर निकलने की योजनाएं प्रकाशित करने का दबाव बढ़ता है।






