डीएमज़ेड पार कर दुर्लभ पलायन
रविवार को उत्तर कोरिया का एक सैनिक असैन्यीकृत क्षेत्र (डीएमज़ेड) के मध्य सेक्टर में सैन्य सीमांकन रेखा पार कर दक्षिण कोरियाई बलों के सामने आत्मसमर्पण कर गया। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि सैनिकों ने बफर क्षेत्र में उस व्यक्ति का पता लगाया, उसकी गतिविधियों पर नज़र रखी और दक्षिणी हिस्से में पहुंचने पर उसे अपने कब्ज़े में ले लिया। सैनिक ने दक्षिण कोरियाई कर्मियों से कहा कि वह दक्षिण में बसना चाहता है।
विषय-सूची
- डीएमज़ेड पार कर दुर्लभ पलायन
- दक्षिण कोरिया के मुताबिक क्या हुआ
- इतनी कड़ी सुरक्षा वाली सीमा कोई कैसे पार कर सकता है
- कौन पलायन करता है और आमतौर पर दक्षिण कैसे पहुंचता है
- अब सैनिक के साथ क्या होगा
- अंतर-कोरियाई संबंधों का संवेदनशील दौर
- अतीत में हुए जोखिम भरे पलायन
- इस सीमा पार करने का सैन्य योजना पर क्या असर हो सकता है
- कानूनी और मानवीय पहलू
- सीमा पार करने का हालिया रुझान
- मुख्य बातें
अधिकारी अब सैनिक की पहचान, सैन्य इकाई, रास्ते और सीमा पार करने के कारणों की पुष्टि के लिए उससे पूछताछ कर रहे हैं। सेना ने कहा कि जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां तय प्रक्रिया के अनुसार मामले को संभालेंगी। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के मुताबिक, घटना के बाद से उत्तर कोरियाई सीमा इकाइयों की कोई असामान्य गतिविधि नहीं देखी गई है।
इस सैनिक का पलायन बेहद दुर्लभ है। अगस्त 2024 के बाद ज़मीनी सीमा पार कर दक्षिण पहुंचने वाले उत्तर कोरियाई सैनिक का यह पहला दर्ज मामला है। डीएमज़ेड 1950 से 1953 के कोरियाई युद्धविराम के बाद बनाया गया 248 किलोमीटर लंबा और 4 किलोमीटर चौड़ा बफर क्षेत्र है। इस इलाके में बारूदी सुरंगों, टैंक रोधी अवरोधों, घनी बाड़ और दोनों ओर तैनात सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों की कई परतें हैं। अतीत में भागने की कोशिश करने वाले सैनिकों पर उत्तर कोरियाई इकाइयों ने गोली चलाई है। 2017 में दक्षिण की ओर दौड़ते समय एक उत्तर कोरियाई सैनिक को कई गोलियां लगी थीं, जब उसके साथियों ने करीब 40 राउंड फायर किए थे। दक्षिण कोरियाई सैनिक उसे सुरक्षित स्थान पर ले गए और डॉक्टरों ने उसकी जान बचाई।
दक्षिण कोरिया पहुंचने वाले ज्यादातर उत्तर कोरियाई लोग डीएमज़ेड पार करने के बजाय चीन के रास्ते आते हैं। कोरियाई युद्ध खत्म होने के बाद से उत्तर के करीब 34,000 लोग दक्षिण में बस चुके हैं। अंतर-कोरियाई सीमा पार करना दुर्लभ है, क्योंकि इलाके में बारूदी सुरंगें बिछी हैं, कैमरों और सेंसर से गतिविधियों पर नज़र रखी जाती है और किसी भी सेंध के संकेत पर सैनिक तुरंत कार्रवाई करते हैं।
दक्षिण कोरिया के मुताबिक क्या हुआ
सैन्य अधिकारियों ने बताया कि सैनिक का सबसे पहले प्रायद्वीप को बांटने वाली रेखा के पास बफर क्षेत्र के मध्य हिस्से में पता चला। अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों ने, उनके बताए मुताबिक, इलाके पर नियंत्रण बनाए रखते हुए घुसपैठिए को सुरक्षित रूप से पकड़ने के लिए किए जाने वाले मानक मार्गदर्शन अभियान से पहले उसकी गतिविधियों पर नज़र रखी। सैनिक रेखा के दक्षिण में आया और बिना किसी घटना के उसे हिरासत में ले लिया गया।
इतनी कड़ी सुरक्षा वाली सीमा कोई कैसे पार कर सकता है
कंटीले तारों, निगरानी मीनारों और बारूदी सुरंगों की कई परतों के बावजूद, डीएमज़ेड के कुछ हिस्सों में घनी वनस्पति और ऊबड़-खाबड़ इलाका है। दोनों सेनाएं थर्मल कैमरे, रडार और ट्रिपवायर सेंसर इस्तेमाल करती हैं, लेकिन भारी बारिश, कोहरा या अंधेरा जैसी परिस्थितियों में निगरानी में चूक हो सकती है। सीमा के पास रहने वाले या तैनात लोग अक्सर पगडंडियों और मौसमी जलस्तर से परिचित होते हैं, जिससे सीमा पार करना थोड़ा कम जानलेवा हो सकता है। गश्त के चक्र और निगरानी की कमज़ोर जगहों से परिचित सैनिक को वह बढ़त मिल सकती है जो किसी आम नागरिक के पास नहीं होती।
सियोल के विश्लेषकों का कहना है कि इस हालिया पलायन में स्थानीय भूभाग और सुरक्षा व्यवस्था की गहरी जानकारी ने संभवतः मदद की। वर्दी में आया कोई सैनिक कभी-कभी पहरेदारों की अदला-बदली के समय का अंदाज़ लगा सकता है या उन इलाकों की पहचान कर सकता है जहां बाढ़ के मौसम, कटाव या वनस्पति के बढ़ने से बारूदी सुरंगें खिसक गई हों या दृश्यता घट गई हो। यह जानकारी कुछ मिनट दिला सकती है, और डीएमज़ेड में मिनट मायने रखते हैं। कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के वरिष्ठ विश्लेषक होंग मिन का कहना है कि सैनिक खतरनाक हिस्सों से इसलिए निकल सकते हैं क्योंकि वे इलाके को जानते हैं। उनके मुताबिक, प्योंगयांग इस मामले को सुरक्षा में चूक मानेगा, क्योंकि सैनिक सैन्य गतिविधियों की जानकारी साझा कर सकता है।
अनुभव के बावजूद, सीमा पार करना जोखिम भरा दांव है। इलाके में बारूदी सुरंगें बिछी हैं और दोनों ओर की इकाइयों को सैन्य सीमांकन रेखा के आसपास किसी भी गतिविधि पर जवाबी कार्रवाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। दक्षिण कोरियाई गश्ती दल और सेंसर अक्सर किसी व्यक्ति के रेखा तक पहुंचने से काफी पहले ही घुसपैठ का पता लगा लेते हैं। इसी वजह से कई बार पीछा करने के बजाय उसे सुरक्षा घेरे में ले जाया जाता है। फिर भी खतरा बना रहता है। 2017 के मामले से पता चला कि खुले मैदान में दौड़ने पर उत्तर की ओर से कुछ ही सेकंड में गोलीबारी हो सकती है।
कौन पलायन करता है और आमतौर पर दक्षिण कैसे पहुंचता है
दक्षिण पहुंचने के रास्ते आमतौर पर चीन से होकर गुजरते हैं। उत्तर कोरियाई लोग पश्चिम में यालू नदी या पूर्व में तुमेन नदी पार करते हैं, फिर किसी तीसरे देश से होते हुए दक्षिण कोरिया पहुंचते हैं। यह रास्ता लंबा और जोखिम भरा है। चीनी अधिकारी अक्सर उत्तर कोरियाई लोगों को हिरासत में लेकर वापस भेज देते हैं। वहां से निकल पाने वाले लोग आमतौर पर बिचौलियों और चर्च नेटवर्क की मदद लेते हैं और पकड़ में आने से बचने के लिए छोटे समूहों में यात्रा करते हैं।
आंकड़े इस चलन को दिखाते हैं। युद्धविराम के बाद से उत्तर कोरिया के करीब 34,000 लोग दक्षिण पहुंच चुके हैं। पिछले साल उत्तर के 236 लोग दक्षिण कोरिया पहुंचे। इनमें करीब 88 प्रतिशत महिलाएं थीं। हाल के कई वर्षों में यह रुझान बना हुआ है, क्योंकि महिलाएं अक्सर चीन में मौसमी काम ढूंढ़ लेती हैं और उनके बिना तुरंत किसी की नज़र में आए आवाजाही कर पाने की संभावना अधिक होती है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल केवल कुछ ही लोग, कुल तीन, किसी तीसरे देश के बजाय अंतर-कोरियाई सीमा पार करके पहुंचे।
डीएमज़ेड के भीतर से सीधे सीमा पार करना अब भी दुर्लभ है, क्योंकि कुछ भी गलत होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। बारिश और जमाव वाले तापमान के कारण बारूदी सुरंगें खिसक सकती हैं। छोटी धाराएं उथली दिख सकती हैं, लेकिन उनमें छिपी बाधाएं हो सकती हैं। गश्ती दल बहुत कम खाली जगह छोड़ते हैं। आम नागरिक कभी-कभी दिन में आड़ में बिना हिले-डुले रहते हैं और केवल रात में आगे बढ़ते हैं। तब भी कई लोग थर्मल कैमरों या ज़मीनी सेंसर की पकड़ में आ जाते हैं।
अब सैनिक के साथ क्या होगा
शुरुआती चिकित्सकीय जांच और सुरक्षा तलाशी के बाद, सेना और खुफिया सेवाएं पलायन करने वालों से पूछताछ करती हैं। इसका उद्देश्य पहचान की पुष्टि करना, भागने का रास्ता समझना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई एजेंट घुसपैठ करके नहीं आया है। उत्तर के सैनिकों से अक्सर लंबी पूछताछ होती है, क्योंकि उन्हें सीमा इकाइयों, संचार व्यवस्था या मानक आदेशों के बारे में संवेदनशील जानकारी हो सकती है। जांचकर्ता उनसे इकाई के ठिकाने, कमान संरचना और रसद के बारे में पूछेंगे।
सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद, दक्षिण में रहने का विकल्प चुनने वाले ज्यादातर उत्तर कोरियाई दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के पुनर्वास कार्यक्रम में शामिल होते हैं। हनावॉन नाम का पुनर्वास केंद्र बैंकिंग और आवास से लेकर स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल कौशल तक की कक्षाएं देता है। इसके बाद लोग स्थानीय समुदायों में बसते हैं और उन्हें नौकरी ढूंढ़ने में मदद मिलती है। उत्तर कोरियाई सेना में सेवा दे चुके लोगों को सख्त सैन्य कमान वाली व्यवस्था से बाहर आने के तनाव से निपटने के लिए विशेष परामर्श भी मिल सकता है।
इस मामले में सैनिक दक्षिण कोरिया के सैन्य योजनाकारों के लिए खास दिलचस्पी का विषय हो सकता है, क्योंकि वह सीमा के मध्य सेक्टर में तैनात था। रेखा के पास की इकाइयों में गश्त के रास्तों, उपकरणों और सैनिकों के मनोबल के बारे में जानकारी दक्षिण को अपनी रक्षा योजनाएं बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इसका इस्तेमाल सीमा पार तैनात सैनिकों को निशाना बनाने वाले प्रचार संदेशों का आकलन करने में भी हो सकता है।
अंतर-कोरियाई संबंधों का संवेदनशील दौर
यह पलायन गहरे अविश्वास के दौर में हुआ है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने जून में पद संभाला और बातचीत तथा मानवीय सहयोग आगे बढ़ाने का वादा किया। उत्तर ने उनकी पहल का जवाब नहीं दिया है। दोनों पक्षों के संबंध जमे हुए हैं। प्रचार वाले गुब्बारे, सीमा के पास तोपखाने के अभ्यास और समय-समय पर मिसाइल प्रक्षेपण ने आम माहौल को परिभाषित किया है, जबकि आधिकारिक संपर्क माध्यम खामोश बने हुए हैं।
सीमा पर होने वाली घटनाओं का प्रतीकात्मक महत्व होता है। दक्षिण जाने का विकल्प चुनने वाले सैनिक का इस्तेमाल सियोल यह तर्क देने के लिए कर सकता है कि उत्तर में जीवन कठिन है और शासन के प्रति निष्ठा कमज़ोर है। प्योंगयांग आम तौर पर निंदा करते हुए पलटवार करता है और कहता है कि ऐसे पलायन सुनियोजित या दबाव में कराए गए हैं। उत्तर का सरकारी मीडिया अक्सर पलायन करने वालों को अपराधी या झूठा बताता है। इसके बाद सीमा पर सैन्य तैयारी का प्रदर्शन हो सकता है, हालांकि दक्षिण कोरियाई अधिकारियों का कहना है कि इस हालिया घटना के बाद उन्हें कोई असामान्य गतिविधि नहीं दिखी है।
अतीत में हुए जोखिम भरे पलायन
डीएमज़ेड में कुछ नाटकीय पलायन हुए हैं, जो दिखाते हैं कि बफर क्षेत्र में हालात कितने अप्रत्याशित हो सकते हैं। 2017 में उत्तर कोरिया का एक सैनिक गाड़ी चलाकर सीमा तक पहुंचा। गाड़ी खाई में फंसने पर वह पैदल भागा और सीमा पार गिरने से पहले गोलियों की बौछार झेली। दक्षिण कोरियाई चिकित्साकर्मियों ने आपातकालीन सर्जरी की और यह घटना सीमा पार करने के लिए उठाए जाने वाले व्यक्तिगत जोखिम का एक सजीव उदाहरण बन गई।
पिछले साल खतरे और संयम, दोनों की नई मिसालें देखने को मिलीं। अगस्त 2024 में उत्तर कोरिया का एक स्टाफ सार्जेंट सीमा के पूर्वी हिस्से से चुपचाप पार आया और दक्षिण कोरियाई बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस जुलाई में एक अलग मामले में उत्तर कोरिया का एक नागरिक डीएमज़ेड से लंबा रास्ता तय करके दक्षिण पहुंचा। इस अभियान से पता चला कि गोलीबारी न होने पर भी सीमा पार करने की प्रक्रिया कितनी सावधानी और धीमी गति से पूरी हो सकती है।
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बाद में उस रात हुई छोटी बातचीत का ब्यौरा दिया। पास में तैनात सैनिकों की आहट से चौंके नागरिक ने पहले बात की और सैनिकों ने जवाब दिया। ये संवाद बताते हैं कि दबाव और अंधेरे में ऐसी मुठभेड़ें कैसे होती हैं।
उत्तर कोरिया के एक व्यक्ति ने पूछा, "तुम कौन हो?" दक्षिण कोरियाई सैनिकों ने जवाब दिया, "हम दक्षिण कोरियाई सेना हैं। हम आपको सुरक्षित स्थान तक ले जाएंगे।"
जुलाई का यह अभियान करीब 20 घंटे चला। सैनिकों ने निगरानी प्रणालियों से उस व्यक्ति की गतिविधियों पर नज़र रखी, उत्तर की ओर से पकड़े जाने का जोखिम घटाने के लिए रात होने का इंतज़ार किया और फिर उसे सीमा पार ले गए। हर स्थिति इस मामले जैसी नहीं होती, लेकिन इससे यह समझने में मदद मिलती है कि दक्षिण कोरिया गोलीबारी शुरू किए बिना सीमा पार कराने की कोशिश कैसे करता है।
इस सीमा पार करने का सैन्य योजना पर क्या असर हो सकता है
सेना से पलायन करने वाला हर व्यक्ति दूसरी ओर की योजना बनाने में मददगार जानकारी देता है। एक सैनिक को सीमा की बाड़ और खाइयों की हालत, किसी चौकी पर तैनात नाइट विज़न उपकरणों के प्रकार और सीमा के आसपास गश्त की गति का पता होता है। वह बता सकता है कि ईंधन या भोजन की कमी से प्रशिक्षण के घंटे घटे हैं या नहीं, रेडियो कितनी बार खराब होते हैं और हाल की घटनाओं के जवाब में कमांडरों ने इकाइयों को बदला है या नहीं।
यह जानकारी एक सीधी वजह से अहम है। डीएमज़ेड एक संकरा इलाका है, जहां फैसले जल्दी लेने पड़ते हैं। अगर उत्तर की सीमा इकाइयों के पास अतिरिक्त पुर्जों की कमी है या अहम हिस्सों की रखवाली नए भर्ती सैनिक कर रहे हैं, तो इससे दक्षिण अपनी गश्त का तरीका बदल सकता है। यह तय करने में भी मदद मिल सकती है कि नए कैमरे कहां लगाए जाएं और चेतावनी अभ्यास कैसे किए जाएं। मनोबल की जानकारी का आकलन करना कठिन है, लेकिन यह पलायन करने वाले व्यक्ति की सबसे कीमती जानकारियों में से एक हो सकती है।
कानूनी और मानवीय पहलू
दक्षिण कोरिया अपने संविधान के तहत उत्तर से आए लोगों को नागरिक मानता है। इसके बावजूद, एक सावधानीपूर्ण कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। जासूसी रोकने और मानव तस्करी के पीड़ितों की पहचान करने के लिए जांचकर्ता यहां पहुंचने वालों की पड़ताल करते हैं। जो लोग किसी अन्य देश में जाना चाहते हैं, वे तीसरे देश की यात्रा में मदद मांग सकते हैं। दक्षिण में रहने वालों को आवास सहायता, कुछ समय के लिए बुनियादी भत्ता और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा की सुविधा मिलती है। नागरिक समाज के समूह सीमा के कारण बिछड़े परिवारों की मदद करते हैं और पलायन करने वालों को नौकरी दिलाने में सहयोग करते हैं।
पुनर्वास के बाद का जीवन कठिन हो सकता है। यहां आने वाले कई लोग वर्षों की निगरानी और अभाव का मानसिक आघात साथ लेकर आते हैं। कुछ लोगों को भेदभाव या दक्षिण की तेज़ी से बदलती तकनीक और कामकाजी संस्कृति के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किल होती है। इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने परामर्श और नौकरी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया है। चर्च, पूर्व विद्यार्थियों के नेटवर्क और नियोक्ता अब आत्मविश्वास और स्थिरता बनाने के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षुता के अवसर देते हैं।
सीमा पार करने का हालिया रुझान
राष्ट्रपति ली जे म्युंग के जून में पद संभालने के बाद से उत्तर के तीन लोग डीएमज़ेड पार कर दक्षिण पहुंचे हैं। जुलाई में उनमें से दो नागरिक थे। मौजूदा मामला उनके कार्यकाल में किसी सैनिक के पलायन का पहला है। महामारी से पहले के वर्षों के मुकाबले यह संख्या अब भी कम है, जब हर साल सैकड़ों उत्तर कोरियाई चीन के रास्ते दक्षिण पहुंचते थे। महामारी के दौरान सीमा पर कड़ी पाबंदियों और चीन की नए सिरे से सख्त कार्रवाई से कुछ समय के लिए आवाजाही घटी थी और संख्या अब तक पूरी तरह नहीं उबरी है।
फिलहाल, अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर शांति है। जिस मध्य सेक्टर से सैनिक ने सीमा पार की, उसके पास उत्तर कोरियाई बलों की कोई असामान्य गतिविधि नहीं देखी गई है। इस संयम से सीमा पर अचानक टकराव का जोखिम घटता है, जबकि दक्षिण उसकी पूछताछ और चिकित्सकीय जांच पूरी कर रहा है।
मुख्य बातें
- उत्तर कोरियाई सैनिक ने रविवार को डीएमज़ेड के मध्य सेक्टर से सीमा पार की और दक्षिण कोरियाई सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण किया
- दक्षिण कोरियाई सेना के मुताबिक, सैनिक दक्षिण में बसना चाहता है और उससे पूछताछ की जा रही है
- अगस्त 2024 के बाद ज़मीनी सीमा पार कर किसी सैनिक के पलायन का पहला मामला और राष्ट्रपति ली जे म्युंग के कार्यकाल में पहला ऐसा पलायन
- डीएमज़ेड पार करना दुर्लभ है, क्योंकि सीमा पर बारूदी सुरंगें बिछी हैं, बाड़ लगी है और कड़ी सुरक्षा है
- युद्धविराम के बाद से उत्तर कोरिया के करीब 34,000 लोग दक्षिण में बस चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर चीन के रास्ते आए
- सीमा पार करने के बाद से उत्तर कोरिया की कोई असामान्य सैन्य गतिविधि नहीं देखी गई है
- सैनिक सीमा इकाइयों, गश्त और मनोबल के बारे में जानकारी दे सकता है






