रेडियोधर्मी खेप ने फिलीपींस और इंडोनेशिया को कैसे जोड़ा
इंडोनेशिया पहुंचने के बाद रेडियोधर्मी समस्थानिक की जांच में पॉजिटिव पाए गए जिंक पाउडर की खेप को लेकर फिलीपींस ने जांच शुरू कर दी है। इंडोनेशिया का कहना है कि इस घटना में नौ लोग कुछ समय के लिए विकिरण की चपेट में आए थे, जो अब ठीक हो चुके हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी सचिव रेनाटो सोलिडम जूनियर ने कहा है कि यह मामला सीमित क्षेत्र में हुए संदूषण का लगता है और आम लोगों के लिए व्यापक खतरे का कोई संकेत नहीं है। फिलीपीन अधिकारियों के अनुसार, कंटेनरों को अक्टूबर के आखिर में मनीला वापस भेजा जाएगा। यात्रा के दौरान उन्हें खोला नहीं जाएगा और माल के बाहर कोई विकिरण नहीं पाया गया। जहाज के चालक दल को जोखिम में नहीं माना जा रहा है। खेप के पहुंचने के बाद तकनीकी टीमें उपकरणों की जांच और सुरक्षित भंडारण की योजना बना रही हैं। साथ ही, सरकार यह पता लगाने के लिए खेप की अभिरक्षा-श्रृंखला का नक्शा बना रही है कि संदूषण कहां हुआ।
विषय-सूची
- रेडियोधर्मी खेप ने फिलीपींस और इंडोनेशिया को कैसे जोड़ा
- इंडोनेशिया में जांचकर्ताओं ने क्या पता लगाया
- औद्योगिक क्षेत्र घटना के केंद्र में
- विकिरण की निगरानी और सफाई
- रेडियोधर्मी समस्थानिक आपूर्ति श्रृंखला में कैसे पहुंच सकता है
- Cs 137 क्या है और संपर्क कैसे होता है
- धातु और कंटेनर संदूषण कैसे फैला सकते हैं
- फिलीपींस की प्रतिक्रिया और जिंक के स्रोत की तलाश
- जिंक की धूल का स्रोत पता करना
- बंदरगाह पर सुरक्षा का प्रबंधन
- खाद्य निर्यात पर असर और नियामकीय कदम
- अमेरिकी अधिकारी क्या अनिवार्य कर रहे हैं
- कबाड़ धातु और सीलबंद स्रोत बार-बार चुनौती क्यों बनते हैं
- व्यापार को नुकसान पहुंचाए बिना नियंत्रण मजबूत करना
- मुख्य बातें
इससे पहले इंडोनेशियाई अधिकारियों ने उत्तर जकार्ता के तंजुंग प्रिओक बंदरगाह पर कंटेनरों को रोका था। इनमें जिंक सांद्रण पाउडर के नौ कंटेनर भी थे, जिनसे विकिरण अलार्म सक्रिय हो गए। इंडोनेशिया की परमाणु ऊर्जा नियामक एजेंसी, जिसे बापेतन कहा जाता है, ने सीज़ियम-137 की मौजूदगी की पुष्टि की और खेप को फिलीपींस वापस भेजने की सिफारिश की। इसी अवधि में, अमेरिका की चेतावनियों के बाद जांच बढ़ाई गई। इससे जमे हुए झींगे की खेपों और बाद में इंडोनेशिया की लौंग में सीज़ियम-137 के अंश मिले, जिसके बाद उत्पाद वापस मंगाए गए और नए आयात नियंत्रण लागू किए गए। इंडोनेशियाई अधिकारियों का कहना है कि बंदरगाह पर माल संभालते समय विकिरण की चपेट में आए सभी नौ लोग ठीक हो गए हैं।
फिलीपीन अधिकारियों के अनुसार, मनीला लौटाई जाने वाली खेप की व्यवस्था चीन के स्वामित्व वाली कंपनी ज़ानवान इंटरनेशनल ट्रेडिंग ने की थी। यह कंपनी बुलाकान प्रांत के मेयकाउयान शहर से काम करती है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, फिलीपीन परमाणु अनुसंधान संस्थान, आंतरिक और स्थानीय सरकार विभाग, फिलीपीन बंदरगाह प्राधिकरण, सीमा शुल्क ब्यूरो और स्वास्थ्य विभाग के क्वारंटीन ब्यूरो की एक अंतर-एजेंसी टीम सक्रिय की गई है। टीम जांच और सुरक्षा के उपायों में तालमेल के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ काम कर रही है। घरेलू इस्पात उत्पादन चक्र की भी समानांतर जांच हो रही है, क्योंकि कबाड़ को संसाधित करने वाली इकाइयों से जिंक की धूल जैसे उप-उत्पाद निकलते हैं, जो निर्यात की खेपों में शामिल हो सकते हैं।
इंडोनेशिया में जांचकर्ताओं ने क्या पता लगाया
इंडोनेशिया में जांचकर्ताओं का कहना है कि इस घटना का केंद्र बैंटन प्रांत के सेरांग में स्थित चिकांडे औद्योगिक क्षेत्र है। आयातित कबाड़ को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करने वाली इस्पात निर्माता कंपनी पीटी पीटर मेटल टेक्नोलॉजी से कण निकलने का संदेह है, जो आसपास की सतहों पर जम गए। समुद्री खाद्य प्रसंस्करण कंपनी पीटी बहारी मकमुर सेजाती इस्पात संयंत्र से दो किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। इंडोनेशियाई अधिकारियों ने कहा कि हवा के जरिए सीज़ियम-137 के कण इस्पात संयंत्र से पैकेजिंग सामग्री और मालवाहक कंटेनरों के भीतर तक पहुंचे होंगे। सरकार ने रोकथाम और संदूषण हटाने का काम तेज करने के लिए क्षेत्र को गंभीर घटना क्षेत्र घोषित किया है। साथ ही, खाद्य सुरक्षा जांच जारी है।
जांच के दौरान तंजुंग प्रिओक बंदरगाह के अधिकारियों ने संदूषण वाले कई कंटेनरों की पहचान की। इंडोनेशियाई अधिकारियों की सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, इनमें विदेश से आए कबाड़ धातु के बक्सों का एक समूह और फिलीपींस से आए जिंक सांद्रण के नौ कंटेनर शामिल थे। एहतियात के तौर पर कई कंटेनरों को उनके मूल स्थान पर लौटाने का आदेश दिया गया। इंडोनेशिया ने एक कार्यबल बनाया है, जो आंकड़े साझा करने और सफाई के काम में मार्गदर्शन के लिए अमेरिकी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ काम कर रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र घटना के केंद्र में
इंडोनेशियाई सरकार के वरिष्ठ सलाहकारों ने संदूषण के संभावित स्रोत का पता चिकांडे औद्योगिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्र तक लगाया है। उनकी मौजूदा परिकल्पना सीधी है। यदि सीज़ियम क्लोराइड का कोई सीलबंद स्रोत कबाड़ के एक जत्थे में पहुंच जाए और उसे गलाया जाए, तो यौगिक ऐसे तापमान तक पहुंच सकता है जहां वह वाष्प बन जाए। वाष्प और बहुत छोटे कण हवा के साथ आगे बढ़ सकते हैं, उपकरणों और दीवारों पर जम सकते हैं और पड़ोसी इकाइयों में उत्पादों या पैकेजिंग पर लग सकते हैं। चिकांडे के पास झींगा पैकेजिंग और कंटेनरों के भीतर मिले संदूषण का स्वरूप इसी प्रक्रिया से मेल खाता है।
विकिरण की निगरानी और सफाई
इंडोनेशिया के परमाणु नियामक ने जांच दल भेजे, अवरोधक लगाए और निर्धारित क्षेत्र के भीतर लक्षित तरीके से संदूषण हटाने का काम शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था लागू है और प्रभावित सामग्री को सीमित क्षेत्र में पहचानकर हटाने का काम जारी है। सरकार ने संदूषित कबाड़ को फिर से निर्यात करने और मालवाहक कंटेनरों की भूमिका की जांच करने के कदम भी उठाए हैं। चिंता यह है कि संदूषित कबाड़ ढो चुके बक्सों में बाद में खाद्य पदार्थ रखे जा सकते हैं, जिससे जोखिम पर नियंत्रण जटिल हो जाता है।
रेडियोधर्मी समस्थानिक आपूर्ति श्रृंखला में कैसे पहुंच सकता है
सीज़ियम-137 (Cs 137) परमाणु विखंडन से बनने वाला कृत्रिम रेडियोन्यूक्लाइड है। इसका इस्तेमाल चिकित्सा उपकरणों और औद्योगिक माप यंत्रों में होता है। यह पुराने परमाणु हथियार परीक्षणों और रिएक्टर संचालन का अवशेष भी है। यह समस्थानिक उच्च ऊर्जा वाली गामा किरणें उत्सर्जित करता है और इसका अर्ध-जीवन लगभग 30 साल है, यानी दशकों तक इसका पता लगाया जा सकता है। सामान्य इस्तेमाल में सीलबंद स्रोत सीज़ियम को अपनी जगह पर रोके रखते हैं। समस्या तब शुरू होती है, जब कोई स्रोत खो जाए या चोरी हो जाए और बाद में कबाड़ की आपूर्ति श्रृंखला में पहुंच जाए। यदि ऐसा स्रोत इस्पात की भट्ठी में पिघलाया जाए, तो सीज़ियम वाष्पित होकर एरोसोल या धूल के रूप में फैल सकता है। ये कण कबाड़, सतहों, पैलेट और कंटेनरों की अंदरूनी सतहों पर चिपक सकते हैं। सावधानीपूर्वक जांच न होने पर संदूषण मूल स्थान से बहुत दूर तक पहुंच सकता है।
Cs 137 क्या है और संपर्क कैसे होता है
विकिरण का संपर्क कई तरह से हो सकता है। बाहरी संपर्क तब होता है जब Cs 137 की गामा किरणें शरीर से होकर गुजरती हैं। आंतरिक संपर्क तब होता है जब कोई व्यक्ति संदूषित धूल सांस के साथ अंदर लेता या निगलता है। विकिरण की बहुत अधिक खुराक से तीव्र विकिरण बीमारी और जलन हो सकती है। लंबे समय तक कम खुराक के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। खाद्य नियामक जोखिम का आकलन करने के लिए गतिविधि-सांद्रता का इस्तेमाल करते हैं, जिसे प्रति किलोग्राम बेकरल में मापा जाता है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन खाद्य पदार्थों में Cs 137 के लिए 1,200 Bq प्रति किलोग्राम का व्युत्पन्न हस्तक्षेप स्तर लागू करता है। मौजूदा मामले में अधिकारियों के अनुसार, जांच में झींगे की एक खेप में 68 Bq प्रति किलोग्राम और लौंग के एक नमूने में 732 Bq प्रति किलोग्राम पाया गया। ये आंकड़े FDA के हस्तक्षेप स्तर से नीचे हैं, लेकिन बार-बार संपर्क संभावित जोखिम पैदा कर सकता है और किसी भी मात्रा का पता चलने पर कड़ी जांच होती है।
धातु और कंटेनर संदूषण कैसे फैला सकते हैं
कबाड़ छंटाई प्रणालियों को यार्ड और बंदरगाहों पर रेडियोधर्मी स्रोतों की पहचान कर उन्हें अलग करने के लिए बनाया गया है। इन प्रणालियों के बावजूद, कभी-कभी ऐसे अनाथ स्रोत जांच से बच निकलते हैं। गलाने पर उनसे निकला धुआं संयंत्र के भीतर और पूरे औद्योगिक इलाके में महीन कण जमा कर सकता है। कबाड़ धातु ढोने के लिए इस्तेमाल किए गए कंटेनर भी संदूषित हो सकते हैं। यदि उन्हीं कंटेनरों का बाद में खाद्य पदार्थों की ढुलाई के लिए इस्तेमाल हो, तो बक्से की सफाई या संदूषण हटाए बिना पैकेजिंग पर विकिरण का निम्न स्तर दर्ज हो सकता है। उद्योग और लॉजिस्टिक्स की यह मिली-जुली श्रृंखला बताती है कि जांच में केवल खाद्य पदार्थों में ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग और कंटेनरों के भीतर भी संकेत क्यों मिले।
फिलीपींस की प्रतिक्रिया और जिंक के स्रोत की तलाश
मनीला में सरकार दो अहम सवालों के जवाब तलाश रही है। जिंक पाउडर में सीज़ियम का संदूषण कहां से आया और लौटने वाली खेप को सुरक्षित तरीके से कैसे संभाला जाए। सचिव रेनाटो सोलिडम जूनियर ने जोर देकर कहा है कि उपलब्ध माप सीमित क्षेत्र में हुए मामले की ओर इशारा करते हैं और आम लोगों के लिए जोखिम कम है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान कंटेनर सीलबंद रहेंगे, निरीक्षकों को बक्सों के बाहर कोई विकिरण नहीं मिला और चालक दल को कोई खतरा नहीं है। मनीला पहुंचने पर खेप का निरीक्षण किया जाएगा और उसे एक सुरक्षित गोदाम में ले जाया जाएगा।
जिंक की धूल का स्रोत पता करना
जांचकर्ता स्थानीय इस्पात उत्पादन चक्र की पड़ताल कर रहे हैं, क्योंकि इस्पात निर्माण और गैल्वनाइजिंग के दौरान भट्टियों और फिल्टर प्रणालियों से निकलने वाले धुएं को पकड़ने पर जिंक की धूल बनती है। यह धूल वस्तु के रूप में निर्यात की खेपों में शामिल हो सकती है। फिलीपीन आपदा प्रतिक्रिया दलों के सर्वेक्षण के अनुसार, निर्यातक से जुड़ी एक इकाई, शिन रिसाइक्लिंग, मेयकाउयान शहर में जिंक की धूल के बोरे रखती है। फिलीपीन परमाणु अनुसंधान संस्थान ने शिन रिसाइक्लिंग के दो गोदामों के बाहर जमीन पर संदूषण की सूचना दी, जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्र को घेर दिया। निरीक्षकों को भंडारण इमारतों के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई। कंपनी के एक प्रतिनिधि ने फिलीपीन अधिकारियों को बताया कि जिंक की धूल कई इस्पात कंपनियों के नेटवर्क से आई थी और आपूर्तिकर्ताओं के रूप में स्टीलएशिया और कैपास्को का नाम लिया। स्टीलएशिया के एक अधिकारी ने कहा कि कंपनी जांच करेगी। अधिकारियों ने इस्पात प्रसंस्करण इकाइयों की व्यापक समीक्षा शुरू की है, ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं कोई खोया हुआ स्रोत कबाड़ में मिलकर बाद में जिंक की धूल तक तो नहीं पहुंचा।
बंदरगाह पर सुरक्षा का प्रबंधन
आंतरिक और स्थानीय सरकार विभाग ने जहाज के आगमन और सुरक्षित ढंग से खेप संभालने की योजना बनाने के लिए फिलीपीन बंदरगाह प्राधिकरण, सीमा शुल्क ब्यूरो, स्वास्थ्य विभाग के क्वारंटीन ब्यूरो और विज्ञान एजेंसियों के साथ आपात बैठक की। सीमा शुल्क ब्यूरो विकिरण जांच के उन गेटों की मरम्मत कर रहा है जो फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं। तब तक घाट पर हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल होगा। जहाज के मनीला में लंगर डालने के बाद बंदरगाह कर्मचारियों को घेराबंदी वाले क्षेत्र, सीधे विकिरण-मात्रा माप और नमूनों की अभिरक्षा-श्रृंखला के सख्त नियमों के तहत काम करना होगा। अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध कंटेनरों को घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में खोलने की कोई योजना नहीं है। इसके बजाय, उन्हें पूरी जांच के लिए नियंत्रित स्थानों पर ले जाया जाएगा।
खाद्य निर्यात पर असर और नियामकीय कदम
इंडोनेशिया में बंदरगाह पर मिले संकेतों का असर खाद्य सुरक्षा निगरानी पर भी पड़ा, क्योंकि आसपास की इकाइयों से जुड़े मालवाहक कंटेनरों और पैकेजिंग में सीज़ियम के संकेत मिले। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने चिकांडे के पास स्थित झींगा प्रसंस्करण इकाई पीटी बहारी मकमुर सेजाती और पीटी नैचुरल जावा स्पाइस को आयात अलर्ट पर रखा। साथ ही, उपभोक्ताओं और कारोबारियों को कंपनी के कुछ झींगा उत्पाद न खाने, न बेचने और न परोसने की सलाह दी। FDA की जांच में बाद में पीटी नैचुरल जावा स्पाइस की लौंग की एक खेप में Cs 137 की पुष्टि हुई। एजेंसी अब कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकार के तहत ऐसा नियम लागू कर रही है, जिसके अनुसार 31 अक्टूबर, 2025 से इंडोनेशिया के निर्दिष्ट क्षेत्रों से आने वाले झींगे और सभी मसालों के लिए आयात प्रमाणन जरूरी होगा। इस नीति के तहत निर्यातकों और आयातकों को यह प्रमाणित करने के लिए तीसरे पक्ष से मंजूरी लेनी होगी कि उत्पाद अमेरिकी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं और उनमें Cs 137 नहीं है।
FDA ने कहा कि इस आवश्यकता का मकसद उपभोक्ताओं की रक्षा करना और प्रभावित क्षेत्रों से बाहर के सुरक्षित उत्पादों का व्यापार जारी रखना है। एजेंसी ने सार्वजनिक सूचना में कहा:
पीटी बहारी मकमुर सेजाती और पीटी नैचुरल जावा स्पाइस के उत्पादों को अमेरिकी बाजार में तब तक प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कंपनियां ऐसी जानकारी नहीं देतीं जिससे पर्याप्त रूप से साबित हो कि उल्लंघन की आशंका पैदा करने वाली स्थितियों को उन्होंने ठीक कर लिया है।
एजेंसी ने यह भी कहा कि जिन खेपों की जांच में संदूषण पॉजिटिव मिला, उनमें से कोई भी अमेरिकी वाणिज्यिक बाजार तक नहीं पहुंची। खुदरा विक्रेताओं ने एहतियातन अलर्ट से जुड़े उत्पादों को दुकानों की अलमारियों से हटाने के लिए नियामकों के साथ काम किया। FDA, अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग तथा इंडोनेशियाई अधिकारी जांच के निष्कर्ष साझा करना और लक्षित जांच को सख्त करना जारी रखे हुए हैं।
अमेरिकी अधिकारी क्या अनिवार्य कर रहे हैं
आयात प्रमाणन जावा द्वीप और लैंपुंग प्रांत से आने वाले झींगे और सभी मसालों पर लागू होगा। दोनों संबंधित कंपनियों की खेपों को रोका गया है। उचित आश्वासन न दिए जाने पर आगे आने वाली खेपों को भी भौतिक जांच के बिना रोका जा सकता है। FDA प्रवेश बंदरगाहों पर बढ़ी हुई जांच भी कर रहा है। एजेंसी उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए विस्तृत जानकारी प्रकाशित करती है। आयातित खाद्य पदार्थों में सीज़ियम-137 से जुड़े मौजूदा अपडेट FDA के सार्वजनिक पेज पर उपलब्ध हैं। FDA की सूचना पढ़ें.
कबाड़ धातु और सीलबंद स्रोत बार-बार चुनौती क्यों बनते हैं
एशिया और अन्य क्षेत्रों में इस्पात निर्माता और पुनर्चक्रणकर्ता ऐसे कबाड़ पर निर्भर हैं जो लंबी दूरी तय कर सकता है। सीज़ियम क्लोराइड वाले औद्योगिक गामा माप यंत्रों और चिकित्सा उपकरणों का उपयोग अवधि पूरी होने पर हिसाब रखा जाना और उन्हें वापस हासिल किया जाना चाहिए। खो जाने पर ऐसे स्रोतों को अनाथ स्रोत कहा जाता है। यदि किसी यार्ड के निगरानी उपकरणों से अनाथ स्रोत का पता न चले और वह भट्ठी तक पहुंच जाए, तो चिकांडे जैसी संदूषण की घटना हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी कबाड़ यार्डों, बंदरगाहों और नियामकों से कई स्तरों वाली पहचान व्यवस्था अपनाने की अपील करती है। इसमें गेट पर लगे निगरानी उपकरण, हाथ में पकड़े जाने वाले यंत्र और कर्मचारियों का प्रशिक्षण शामिल है, ताकि सीलबंद स्रोतों को गलाने से पहले ही रोका जा सके।
व्यापार को नुकसान पहुंचाए बिना नियंत्रण मजबूत करना
इंडोनेशिया और फिलीपींस के सामने जटिल काम है। उन्हें संदूषित सामग्री को अलग करना, प्रभावित स्थानों और कंटेनरों की सफाई करना और व्यापार में भरोसा बहाल करना होगा। अमेरिका का लक्षित आयात प्रमाणन सुरक्षित वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला खुली रखने के साथ प्रभावित कंपनियों और क्षेत्रों पर सुधारों का दस्तावेजीकरण करने का दबाव बनाने के लिए है। मनीला और जकार्ता के बंदरगाह प्राधिकरण कंटेनरों की जांच के अतिरिक्त कदम उठा रहे हैं और सर्वोत्तम तौर-तरीकों के लिए IAEA के साथ काम करेंगे। जिंक की धूल या कबाड़ का कारोबार करने वाली कंपनियों को तब तक कड़े दस्तावेजी नियमों और ऑडिट का सामना करना पड़ सकता है, जब तक इस खेप की अभिरक्षा-श्रृंखला का पूरा पता न लगा लिया जाए।
मुख्य बातें
- फिलीपींस जांच कर रहा है कि इंडोनेशिया निर्यात किए गए जिंक पाउडर में सीज़ियम-137 कैसे पहुंचा। उसका कहना है कि सीलबंद कंटेनरों के बाहर विकिरण नहीं मिला।
- इंडोनेशिया की जांच में सीज़ियम-137 के संकेत चिकांडे औद्योगिक क्षेत्र के एक इस्पात संयंत्र तथा उसके पास की पैकेजिंग और कंटेनरों से जुड़े मिले।
- इंडोनेशिया में बंदरगाह पर माल संभालते समय नौ लोगों का विकिरण से मापने योग्य संपर्क हुआ। वे ठीक हो गए हैं और सरकार ने सफाई के लिए क्षेत्र को गंभीर घटना क्षेत्र घोषित किया है।
- अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने दो इंडोनेशियाई कंपनियों को आयात अलर्ट पर रखा है और 31 अक्टूबर, 2025 से निर्दिष्ट क्षेत्रों के झींगे और मसालों के लिए आयात प्रमाणन अनिवार्य करेगा।
- फिलीपीन एजेंसियों ने प्रतिक्रिया दल सक्रिय किया, बुलाकान में निर्यातक से जुड़े दो गोदामों के बाहर संदूषण पाया और लौटने वाली खेप को सुरक्षित ढंग से संभालने की तैयारी की।
- खाद्य नमूनों की जांच में झींगे की एक खेप में 68 Bq प्रति किलोग्राम और लौंग के एक नमूने में 732 Bq प्रति किलोग्राम गतिविधि मिली। ये FDA के हस्तक्षेप स्तर से नीचे हैं, लेकिन फिर भी कड़ी निगरानी शुरू हुई।
- कबाड़ धातु की आवाजाही और अनाथ रेडियोधर्मी स्रोत भट्टियों तथा कंटेनरों में संदूषण फैला सकते हैं। इसी वजह से दोनों देश IAEA के साथ समन्वय कर रहे हैं और बंदरगाहों पर जांच कड़ी कर रहे हैं।






