समुद्र पार तक पहुंचा संदूषण का मामला
मामला अमेरिकी बंदरगाहों पर नियमित विकिरण जांच से शुरू हुआ। शुरुआती पतझड़ तक, जकार्ता के पश्चिम में एक औद्योगिक क्षेत्र में प्रसंस्कृत जमे हुए झींगों को अमेरिका के कम-से-कम एक दर्जन राज्यों से वापस मंगाया जा चुका था। निरीक्षकों ने उनमें सीज़ियम-137 के अंश पाए थे। यह रेडियोधर्मी समस्थानिक परमाणु दुर्घटनाओं और हथियार परीक्षणों से जुड़ा है। इस खोज के बाद इंडोनेशिया में व्यापक जांच शुरू हुई। वहां सरकारी कार्यबल ने मॉडर्न चिकांडे इंडस्ट्रियल एस्टेट की 22 इकाइयों में संदूषण पाया और बड़े पैमाने पर सफाई अभियान शुरू किया। साथ ही, विदेशी खरीदारों को भरोसा दिलाया कि खाद्य निर्यात सुरक्षित रहेगा।
विषय-सूची
- समुद्र पार तक पहुंचा संदूषण का मामला
- अमेरिकी बंदरगाहों पर अलार्म क्यों बजा
- चिकांडे में जांचकर्ताओं को क्या मिला
- झींगे रेडियोधर्मी कैसे हुए
- कबाड़ धातु और लावारिस रेडियोधर्मी स्रोत
- स्वास्थ्य जोखिम और विकिरण के आंकड़ों का मतलब
- उपभोक्ता अभी क्या कर सकते हैं
- सरकारी कार्रवाई और सफाई
- व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर असर
- जांचकर्ताओं को अब भी किन बातों की पुष्टि करनी है
- जानने योग्य बातें
प्रभावित झींगा नमूनों में विकिरण का स्तर अमेरिका में कार्रवाई की सीमा से काफी कम था, इसलिए उपभोक्ताओं के लिए तत्काल कोई खतरा नहीं था। फिर भी, प्रमुख खुदरा विक्रेताओं समेत कंपनियों ने उत्पाद दुकानों से हटा लिए। जांचकर्ताओं ने संदूषण का स्रोत बैंटन प्रांत के चिकांडे क्षेत्र में खोजा, जो राजधानी से करीब एक घंटे की दूरी पर है। इंडोनेशियाई अधिकारियों ने विकिरण जांच दल तैनात किए, प्रवेश बिंदुओं पर आवाजाही सीमित की, वाहनों की जांच की और औद्योगिक क्षेत्र के पास कामगारों व निवासियों की चिकित्सकीय जांच की व्यवस्था की। नौ लोगों में संपर्क के बाद सीज़ियम-137 के अंश मिले। अस्पताल में जांच के बाद उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी गई।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, संभावित स्रोत एक इस्पात निर्माता था, जो उसी क्षेत्र में आयातित कबाड़ धातु को पिघलाता है। वह झींगा पैक करने वाली कंपनी पीटी बहारी मकमुर सजाती (बीएमएस फूड्स) से दो किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है। इंडोनेशिया में कोई परमाणु बिजली संयंत्र नहीं है और न ही उसका कोई हथियार कार्यक्रम है। अधिकारियों को संदेह है कि सीज़ियम-137 संदूषित कबाड़ के जरिए और संभवतः निर्यात में इस्तेमाल होने वाले शिपिंग कंटेनरों से आया। सरकार ने कबाड़ धातु के आयात पर रोक लगा दी और इस्पात संयंत्र पीटी पीटर मेटल टेक्नोलॉजी के परिसर को संदूषित सामान के लिए पृथक स्थल घोषित किया।
अमेरिकी बंदरगाहों पर अलार्म क्यों बजा
जुलाई में अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग के विकिरण पोर्टल मॉनिटरों ने इंडोनेशिया से आए कई कंटेनरों को चिह्नित किया। अगस्त में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बीएमएस फूड्स में प्रसंस्कृत जमे हुए ब्रेडेड झींगों की एक खेप का नमूना लिया और उसमें सीज़ियम-137 पाया। जारी सलाह में वितरकों और खुदरा विक्रेताओं से प्रभावित खेपों को नष्ट करने को कहा गया। अलबामा, अर्कांसस, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, केंटकी, लुइज़ियाना, मिसौरी, मिसिसिपी, ओहायो, ओक्लाहोमा, पेंसिल्वेनिया, टेक्सास और वेस्ट वर्जीनिया की दुकानों में बिके झींगों को भी वापस मंगाया गया।
एफडीए ने जोर देकर कहा कि विकिरण का पाया गया स्तर सीज़ियम-137 के लिए एजेंसी की 1,200 बेकरेल प्रति किलोग्राम की व्युत्पन्न कार्रवाई सीमा से काफी नीचे था और एक बार भोजन करने से कोई तात्कालिक खतरा नहीं था। स्वास्थ्य संबंधी चिंता एक बार सेवन से नहीं, बल्कि समय के साथ बार-बार संपर्क में आने से है।
एक सार्वजनिक सूचना में एफडीए ने भोजन में रेडियोधर्मी संदूषकों की कम मात्रा के लंबे समय तक संपर्क के जोखिम को समझाया।
लंबे समय तक बार-बार कम मात्रा के संपर्क से होने वाली प्रमुख स्वास्थ्य चिंता कैंसर का बढ़ा हुआ जोखिम है, जो शरीर की जीवित कोशिकाओं के भीतर डीएनए को नुकसान पहुंचने के कारण होता है।
इस मामले से जुड़े प्रयोगशाला नतीजों में झींगे के एक नमूने में सीज़ियम-137 का स्तर करीब 68 बीक्यू/किग्रा और लौंग के एक नमूने में 732 बीक्यू/किग्रा बताया गया। लौंग का नमूना अमेरिकी बाजार में नहीं पहुंचा था। अक्टूबर में खाद्य सुरक्षा आधुनिकीकरण अधिनियम के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए एफडीए ने जावा और लैम्पुंग प्रांत से आने वाले झींगों और कुछ मसालों के लिए आयात प्रमाणन अनिवार्य करना शुरू किया। इंडोनेशिया की दो कंपनियों, बीएमएस फूड्स और नेचुरल जावा स्पाइस को आयात चेतावनी सूची में रखा गया। अब उनकी खेपों को अमेरिकी मानकों पर खरा उतरने का प्रमाण देना होगा।
चिकांडे में जांचकर्ताओं को क्या मिला
इंडोनेशिया ने जकार्ता से लगभग 60 से 70 किलोमीटर पश्चिम में, बैंटन के सेरांग रीजेंसी स्थित मॉडर्न चिकांडे इंडस्ट्रियल एस्टेट में विकिरण जांच दल भेजे। कम-से-कम 22 इकाइयों में संदूषण दर्ज किया गया। कार्यबल के मुताबिक, बीएमएस फूड्स ने सफाई अभियान चलाया और बाद में परमाणु नियामक से काम फिर शुरू करने की मंजूरी मिली। अधिकारियों ने इलाके में प्रवेश कड़ा किया, वाहनों में विकिरण के अंश जांचे और संदूषित सामग्री रखने के लिए पीटी पीटर मेटल टेक्नोलॉजी परिसर में पृथक सुविधा स्थापित की।
चिकित्सा दलों ने कामगारों और आसपास के निवासियों की जांच की। नौ लोगों में सीज़ियम-137 के संपर्क के संकेत मिले। अस्पताल में जांच के बाद उन्हें घर लौटने की अनुमति दी गई। अधिकारियों ने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित जगहों पर रहने वाले लोगों को संदूषण हटाने का काम जारी रहने तक दूसरी जगह बसाया जाएगा।
पर्यावरण मंत्री हनीफ फैइसोल ने कहा कि अधिक संपर्क वाले क्षेत्रों के निवासियों को सफाई पूरी होने तक वहां से हटाया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि कार्रवाई में लोगों का कल्याण सर्वोपरि है।
निवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कार्यबल के प्रवक्ता बारा हसीबुआन ने कहा कि जांचकर्ता संभावित स्रोत के रूप में आयातित कबाड़ धातु पर ध्यान दे रहे हैं। जांच जारी रहने तक उसके आयात पर प्रतिबंध लागू रहेंगे।
कबाड़ धातु का आयात संदूषण का संभावित स्रोत है और सरकार इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाएगी।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि उत्तरी जकार्ता के तंजुंग प्रिओक बंदरगाह पर कबाड़ के 14 शिपिंग कंटेनरों में सीज़ियम-137 मिला। यह इस बात का संकेत है कि कुछ संदूषण कंटेनरों के जरिए भी आया हो सकता है, न कि केवल औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थानीय उत्सर्जन से।
झींगे रेडियोधर्मी कैसे हुए
सीज़ियम-137 परमाणु विखंडन का उप-उत्पाद है और इसका अर्ध-आयुकाल करीब 30 वर्ष है। इसका उपयोग सीलबंद औद्योगिक माप उपकरणों और कुछ चिकित्सा उपकरणों में होता है। जब इसका कोई अज्ञात स्रोत वैश्विक कबाड़ धातु व्यापार में पहुंच जाता है, तो उसे अनजाने में पिघलाया जा सकता है। इसका एक आम रूप, सीज़ियम क्लोराइड, भट्ठी के तापमान पर वाष्प बन जाता है और चिमनी की गैस में महीन कणों के रूप में फैल सकता है। यह धूल छतों, नलिकाओं, अहातों और उपकरणों पर जम सकती है, और वेंटिलेशन प्रणाली के जरिए इमारत के भीतर भी पहुंच सकती है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, बीएमएस फूड्स का पैकिंग संयंत्र संदिग्ध इस्पात निर्माता से दो किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। अगर रेडियोधर्मी धूल गलाने वाले संयंत्र से निकलकर हवा में फैल गई, तो वह खाद्य प्रसंस्करण इकाई में पहुंचकर सतहों और पैकिंग लाइनों को दूषित कर सकती थी। ऐसी धूल के संपर्क में आए या संदूषित कंटेनरों में पैक किए गए झींगों में रेडियोधर्मिता दर्ज हो सकती है, भले ही पालन के दौरान समुद्री भोजन का रेडियोधर्मी सामग्री से सीधा संपर्क न हुआ हो।
कबाड़ धातु और लावारिस रेडियोधर्मी स्रोत
दुनिया भर के नियामक लावारिस रेडियोधर्मी स्रोतों को लेकर चेतावनी देते हैं। इस शब्द का मतलब ऐसे रेडियोधर्मी उपकरणों से है जो नियंत्रण से बाहर होकर कचरे के प्रवाह में पहुंच जाते हैं। सीमाओं और कारखानों के प्रवेश द्वारों पर लगे विकिरण पोर्टल मॉनिटर इन्हें पकड़ने के लिए होते हैं, लेकिन व्यवस्था में खामियां बनी हुई हैं। संदूषित कबाड़ को पिघलाने पर धातु अनुपयोगी हो सकती है और स्लैग तथा फिल्टर रेडियोधर्मी कचरा बन जाते हैं। अगर धुआं और धूल गलाने वाले संयंत्र की चिमनी से बाहर तक पहुंचें, तो आसपास के कारोबार भी प्रभावित हो सकते हैं।
इंडोनेशिया में जांच दल हवा, मिट्टी, पानी और सतहों को पोंछकर लिए गए नमूनों की जांच कर रहे हैं, ताकि अधिक विकिरण वाले स्थानों का नक्शा बनाया जा सके और औद्योगिक क्षेत्र में धूल के फैलने के रास्तों का पता लगाया जा सके। वे यह भी जांच रहे हैं कि पहले संदूषित कबाड़ ढोने वाले शिपिंग कंटेनरों का दोबारा खाद्य सामग्री के लिए इस्तेमाल तो नहीं हुआ। ऐसा होने पर सीज़ियम के अंश कंटेनर की दीवारों, पैलेट या बाहरी पैकिंग तक पहुंच सकते हैं।
स्वास्थ्य जोखिम और विकिरण के आंकड़ों का मतलब
भोजन में विकिरण की जांच के नतीजे अक्सर बेकरेल प्रति किलोग्राम में बताए जाते हैं। एक बेकरेल का मतलब है हर सेकंड एक परमाणु का क्षय। सीज़ियम-137 के लिए अमेरिका में कार्रवाई की सीमा 1,200 बीक्यू/किग्रा है। यह स्तर जीवनभर के जोखिम को कम रखने के लिए तय किया गया है। वापस मंगाए गए झींगों के नमूने में यह स्तर इस सीमा से काफी नीचे था, इसलिए एक बार सेवन से अल्पकालिक खतरा नहीं है।
शरीर में सीज़ियम का व्यवहार कुछ हद तक पोटैशियम जैसा होता है। मानव शरीर निगले गए सीज़ियम का अधिकांश हिस्सा बाहर निकाल देता है। इसका जैविक अर्ध-आयुकाल करीब 110 दिन है, हालांकि इसका थोड़ा हिस्सा नरम ऊतकों में बना रहता है। सीज़ियम कई खाद्य पदार्थों में मौजूद प्राकृतिक रेडियोसमस्थानिक पोटैशियम-40 से अधिक जैविक रूप से सक्रिय है। इसी वजह से नियामक मानव निर्मित सीज़ियम की मौजूदगी को मामूली स्तर होने पर भी नजरअंदाज नहीं करते।
उपभोक्ताओं के लिए मुख्य जोखिम बार-बार संपर्क में आना है। कम स्तर का संदूषण अगर रोज खाया जाए, तो संचयी मात्रा बढ़ती है। इसी वजह से अधिकारियों ने प्रभावित खेपें वापस मंगाईं और आयात नियंत्रण कड़े किए, जबकि शुरुआती प्रयोगशाला जांच में स्तर ऊंचे नहीं थे।
उपभोक्ता अभी क्या कर सकते हैं
उत्पाद कोड और खेप संख्या को वापस मंगाए गए उत्पादों की सूची से मिलाएं और धनवापसी के लिए खुदरा विक्रेता के निर्देशों का पालन करें। पैकिंग पर मूल देश की जानकारी देखें। अगर उत्पाद किसी अप्रभावित इकाई या क्षेत्र से आया है, तो उसे निर्देशानुसार इस्तेमाल करना सुरक्षित है। संदेह होने पर और जानकारी उपलब्ध न होने पर उत्पाद फेंक देना समझदारी है। पकाने से सीज़ियम-137 नहीं निकलता।
इंडोनेशियाई अधिकारियों का कहना है कि समुद्री भोजन का निर्यात सुरक्षित है, क्योंकि संदूषित इकाइयों की सफाई हो रही है और भेजने से पहले खेपों को प्रमाणित किया जा रहा है। मत्स्य मामलों के मंत्री सक्ती वाह्यू त्रेंगोनो ने कहा कि नियंत्रण कड़े किए गए हैं और अमेरिकी नियामकों के साथ सक्रिय सहयोग जारी है।
भेजे जा रहे झींगों की जांच की जाती है और वे रेडियोधर्मी सामग्री से मुक्त हैं।
सरकारी कार्रवाई और सफाई
इंडोनेशिया ने खाद्य मामलों के समन्वय मंत्रालय की अगुवाई में सीज़ियम-137 कार्यबल बनाया। चिकांडे औद्योगिक क्षेत्र को गंभीर घटना क्षेत्र घोषित किया गया, जिससे अधिकारियों को जगहों की घेराबंदी करने, तेजी से संदूषण हटाने और आने-जाने वाले यातायात को नियंत्रित करने का अधिकार मिला। परमाणु नियामक बापेटेन, अनुसंधान एजेंसी ब्रिन, पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय पुलिस जांच, कचरा प्रबंधन और कानून लागू करने के काम में समन्वय कर रहे हैं।
संदूषण हटाने वाले दल कार्यस्थलों से धूल वैक्यूम कर और पोंछकर साफ कर रहे हैं, संदूषित कबाड़ तथा फिल्टर को थैलों में बंद कर रहे हैं, उपकरण धो रहे हैं और मिट्टी या मलबे के छोटे, अधिक विकिरण वाले हिस्सों को हटाकर पृथक स्थल पर सुरक्षित रख रहे हैं। इस्पात संयंत्र के कचरे की जांच की जा रही है। कामगारों और निवासियों की जांच हो रही है और उन्हें स्वच्छता संबंधी सलाह दी जा रही है, ताकि महीन कण दोबारा हवा में न फैलें।
सीमा पर जोखिम घटाने के लिए सरकार ने आयात की शर्तों में बदलाव करते हुए कबाड़ धातु का आयात रोक दिया है। नई शर्तों में कारखानों और गोदामों के प्रवेश द्वारों पर विकिरण पोर्टल मॉनिटर लगाने और चिमनियों पर लगातार उत्सर्जन की निगरानी करने वाली प्रणाली लगाना शामिल है, ताकि कणों के उत्सर्जन पर नजर रखी जा सके। अधिकारियों का कहना है कि कंपनियों के विकिरण सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने का प्रमाण देने के बाद मामले-दर-मामले आधार पर आयात परमिट बहाल किए जाएंगे।
व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर असर
झींगा इंडोनेशिया की निर्यात आय का अहम हिस्सा है और अमेरिका उसका प्रमुख खरीदार है। संदूषण की खबरों के बाद कुछ कंटेनर लौटाए गए, नए सिरे से जांच हुई और खेपों को अस्थायी तौर पर रोक दिया गया। जिन उत्पादों का संबंध अमेरिका में पाए गए संदूषण से जुड़ा था, उस बीएमएस फूड्स का कहना है कि उसने अपनी इकाई साफ कर ली है और परमाणु एजेंसी की निगरानी में काम कर रही है। अब खरीदारों को भेजने से पहले खेप के संदूषण मुक्त होने का दस्तावेजी प्रमाण चाहिए।
अमेरिकी नियामकों ने इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों से आने वाले झींगों और चुनिंदा मसालों के लिए आयात प्रमाणन अनिवार्य करने का अधिकार इस्तेमाल किया है। पहले संदूषण पाए जाने वाली कंपनियां तब तक आयात चेतावनी सूची में रहेंगी, जब तक हर खेप खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरती। खुदरा विक्रेताओं ने एहतियात के तौर पर वापसी का दायरा बढ़ाया। नियामकों का कहना है कि सीज़ियम-137 की पुष्टि वाले कोई उत्पाद अमेरिकी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचे।
जांचकर्ताओं को अब भी किन बातों की पुष्टि करनी है
अमेरिकी बंदरगाह पर जांच में संदूषित पाई गई लौंग की एक खेप चिकांडे से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित निर्यातक से आई थी। इंडोनेशियाई निरीक्षकों का कहना है कि उन्हें उस लौंग प्रसंस्करण इकाई में विकिरण नहीं मिला है और वे नतीजों की पुष्टि के लिए दोबारा आयात किए गए नमूनों की जांच कर रहे हैं। एक संभावित वजह यह मानी जा रही है कि पहले संदूषित कबाड़ या अन्य सामान ढोने के लिए इस्तेमाल किए गए कंटेनर की दीवारों से सीज़ियम के अंश मसालों की बोरियों तक पहुंचे हों।
जांचकर्ता इंडोनेशिया के भीतर संदूषित कबाड़ की आवाजाही का भी पता लगा रहे हैं। जकार्ता के मुख्य बंदरगाह पर 14 संदिग्ध कंटेनरों का मिलना सीमा पार तक फैली आपूर्ति श्रृंखला की समस्या की ओर इशारा करता है। स्रोतों का पता लगाने और उन्हें चलन से हटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की तकनीकी सहायता समेत अंतरराष्ट्रीय सहयोग जारी है।
जानने योग्य बातें
- अमेरिका में जांच के दौरान इंडोनेशिया में प्रसंस्कृत जमे हुए झींगों में सीज़ियम-137 पाया गया, जिसके बाद एक दर्जन से अधिक राज्यों में उत्पाद वापस मंगाए गए।
- इंडोनेशिया ने जकार्ता के पश्चिम में मॉडर्न चिकांडे इंडस्ट्रियल एस्टेट की 22 इकाइयों में संदूषण पाया।
- जांचकर्ताओं के मुताबिक, संभावित स्रोत आयातित कबाड़ धातु गलाने वाले इस्पात निर्माता से हवा में फैली धूल है।
- औद्योगिक क्षेत्र के पास नौ लोगों में संपर्क के संकेत मिले। अस्पताल में जांच के बाद उन्हें घर जाने की अनुमति दी गई। सफाई के दौरान अधिक संपर्क वाले इलाकों के निवासियों को दूसरी जगह बसाया जाएगा।
- बीएमएस फूड्स ने संदूषण हटाने का काम किया और बाद में परमाणु नियामक से निगरानी के तहत काम फिर शुरू करने की मंजूरी मिली।
- एफडीए का कहना है कि पाए गए स्तर कार्रवाई की सीमा से काफी नीचे थे और उनसे तात्कालिक खतरा नहीं है, लेकिन बार-बार संपर्क से लंबे समय में कैंसर का जोखिम बढ़ता है।
- अमेरिकी अधिकारियों ने अब इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों से आने वाले झींगों और कुछ मसालों के लिए आयात प्रमाणन अनिवार्य किया है। संदूषण पाए जाने वाली कंपनियां आयात चेतावनी सूची में हैं।
- इंडोनेशिया ने कबाड़ धातु का आयात रोक दिया है और संबंधित कारखानों में विकिरण पोर्टल मॉनिटर तथा उत्सर्जन निगरानी प्रणाली अनिवार्य कर रहा है।
- अधिकारियों को जकार्ता के मुख्य बंदरगाह पर कबाड़ के 14 कंटेनरों में सीज़ियम-137 मिला। इससे कुछ मामलों में कंटेनरों के जरिए संदूषण फैलने की आशंका है।
- सफाई और संदूषण हटाने का काम जारी है। अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहायता मिल रही है और सरकार का कहना है कि निर्यात की खेपें सुरक्षित हैं और उनकी जांच की जाती है।






