इंडोनेशिया के कैफ़े ख़ामोश: रॉयल्टी पर कार्रवाई से रोज़मर्रा की ज़िंदगी का संगीत बदला
हाल के महीनों में इंडोनेशिया के कैफ़े और रेस्तरां में बजने वाले पॉप और रॉक संगीत की परिचित गूंज देशभर में फीकी पड़ गई है। जहां कभी नए हिट गाने और स्थानीय इंडी गीत सुनाई देते थे, वहां अब सिर्फ़ एस्प्रेसो मशीनों की सिसकारी और कपों की खनक रह गई है। यह अचानक छाया सन्नाटा पसंद या चलन का मामला नहीं, बल्कि बकाया संगीत रॉयल्टी के ख़िलाफ़ व्यापक कार्रवाई का नतीजा है। इस कदम से कारोबारियों में चिंता है, संगीतकार बंट गए हैं और आम लोग उलझन में हैं कि कौन-सा संगीत बजाया जा सकता है और उसकी कितनी कीमत चुकानी होगी।
विषय-सूची
- इंडोनेशिया के कैफ़े ख़ामोश: रॉयल्टी पर कार्रवाई से रोज़मर्रा की ज़िंदगी का संगीत बदला
- कार्रवाई की वजह क्या बनी? मिए गाकोआन मामला और उसका असर
- इंडोनेशिया की संगीत रॉयल्टी व्यवस्था को समझें
- कारोबारियों को इतनी चिंता क्यों है?
- संगीतकारों में मतभेद: किसे और कैसे मिले भुगतान?
- कानूनी उलझन और सार्वजनिक जीवन पर असर
- पारदर्शिता, तकनीक और आगे का रास्ता
- संकट में संस्कृति: इंडोनेशियाई समाज पर व्यापक असर
- सरकार की प्रतिक्रिया और समाधान की तलाश
- सारांश
कार्रवाई की वजह क्या बनी? मिए गाकोआन मामला और उसका असर
देशव्यापी बदलाव की वजह लोकप्रिय नूडल रेस्तरां श्रृंखला मिए गाकोआन से जुड़ा एक चर्चित विवाद बना। अगस्त 2024 में खबर आई कि बाली स्थित फ्रैंचाइज़ी ने 2022 से संगीत रॉयल्टी नहीं चुकाई थी। इंडोनेशियाई संगीत लाइसेंस केंद्र (SELMI) की ओर से महीनों तक चेतावनी और मध्यस्थता की नाकाम कोशिशों के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया। फ्रैंचाइज़ी ने अंततः अपनी 65 शाखाओं के लिए 2.2 अरब रुपिया (करीब 135,000 डॉलर) बकाया रॉयल्टी चुकाकर मामला सुलझा लिया। लेकिन तब तक आतिथ्य क्षेत्र में इस मामले से खलबली मच चुकी थी और कई कारोबारियों ने पृष्ठभूमि संगीत को लेकर अपना रवैया बदलने पर विचार शुरू कर दिया था।
समझौते की खबर फैलते ही देशभर के कैफ़े और रेस्तरां मालिकों में डर बैठ गया। नियमों को लेकर अनिश्चितता और कानूनी कार्रवाई की आशंका के चलते कई लोगों ने संगीत पूरी तरह बंद कर दिया। कुछ ने विदेशी गाने या वाद्य संगीत बजाना शुरू किया, यह मानकर कि उन पर रॉयल्टी नहीं लगेगी। कुछ कारोबारियों ने प्रकृति की आवाज़ें या बौद्ध मंत्र तक बजाए—फिर उन्हें पता चला कि ये भी कॉपीराइट के दायरे में आ सकते हैं।
इसका नतीजा यह हुआ है कि इंडोनेशिया की सार्वजनिक जगहों का माहौल नाटकीय रूप से बदल गया है। उदाहरण के लिए, जकार्ता में ग्राहकों और कर्मचारियों, दोनों ने यह फर्क महसूस किया है। दक्षिण जकार्ता के एक नूडल रेस्तरां में काम करने वाले गुस्ती ने कहा, "पृष्ठभूमि संगीत के बिना माहौल बेरौनक और नीरस हो गया है। संगीत न सिर्फ़ ग्राहकों का मन बहलाता है, बल्कि कर्मचारियों का मूड भी बेहतर करता है।"
इंडोनेशिया की संगीत रॉयल्टी व्यवस्था को समझें
इस विवाद के केंद्र में इंडोनेशिया का 2014 का कॉपीराइट कानून है। इसके तहत कॉन्सर्ट हॉल से लेकर कॉफ़ी शॉप तक, सभी व्यावसायिक जगहों को संगीत बजाने के अधिकार के लिए सालाना रॉयल्टी चुकानी होती है। इस व्यवस्था का संचालन राष्ट्रीय सामूहिक प्रबंधन एजेंसी (LMKN) करती है। वह शुल्क वसूलती है और छोटे सामूहिक निकायों (LMK) के ज़रिए गीतकारों, कलाकारों और निर्माताओं में बांटती है।
रॉयल्टी की दर बैठने की क्षमता, कामकाज के घंटों और जगह जैसे कारकों के आधार पर तय होती है। उदाहरण के लिए, कैफ़े और रेस्तरां से आम तौर पर प्रति सीट हर साल 120,000 रुपिया लिए जाते हैं, जबकि बार और नाइटक्लब के लिए शुल्क फ़र्श के क्षेत्रफल के आधार पर तय होता है। सूक्ष्म और छोटे कारोबारों को कम दरें मिल सकती हैं, लेकिन इन छूटों के लिए बातचीत की प्रक्रिया हमेशा स्पष्ट नहीं होती।
2014 में कानून पारित होने के बावजूद, 2021 तक इसका पालन ढीला था। उस साल सरकार ने सभी व्यावसायिक सार्वजनिक स्थलों के संचालकों के लिए रॉयल्टी भुगतान अनिवार्य कर दिया। उसके बाद से निगरानी और सख़्त हुई है। कानून एवं मानवाधिकार मंत्रालय कारोबारियों को याद दिलाता रहा है कि सार्वजनिक जगहों पर बजाए जाने वाले हर संगीत के लिए रॉयल्टी देनी होगी—इसमें Spotify या Apple Music जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से स्ट्रीम किए गए गाने भी शामिल हैं। इन सेवाओं की सदस्यता, यहां तक कि व्यावसायिक खाते भी, सार्वजनिक प्रस्तुति के अधिकारों को कवर नहीं करते।
कारोबारियों को इतनी चिंता क्यों है?
कई कारोबारियों का कहना है कि रॉयल्टी व्यवस्था अपारदर्शी और बोझिल है, खासकर उन छोटे प्रतिष्ठानों के लिए जिनका मुनाफ़ा बहुत कम है। सार्वजनिक प्रस्तुति किसे माना जाता है, किन गानों पर रॉयल्टी लागू होती है और क्या LMKN को भुगतान करना पर्याप्त है या कलाकारों से सीधे अनुमति भी लेनी होगी—इन बातों को लेकर व्यापक भ्रम है। कुछ लोगों को आशंका है कि ज़रूरी शुल्क चुकाने के बाद भी व्यक्तिगत संगीतकारों या अधिकार धारकों की ओर से कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इंडोनेशियाई होटल और रेस्तरां संघ (PHRI) के महासचिव मौलाना युसरान ने कहा कि कई मालिक ग़लती से मानते हैं कि डिजिटल संगीत सेवाओं की सदस्यता से उनकी ज़िम्मेदारी पूरी हो जाती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "सार्वजनिक प्रस्तुति के लिए अलग लाइसेंस लेना अब भी ज़रूरी है।" संगीत क्यूरेटर दिमास आरियो एड्रियान्तो ने कहा कि प्रकृति की आवाज़ों की रिकॉर्डिंग भी फोनोग्राम मानी जाती है और उन पर रॉयल्टी देनी होती है।
संगीतकारों में मतभेद: किसे और कैसे मिले भुगतान?
ज़्यादातर संगीतकार मानते हैं कि अपनी रचनाओं के इस्तेमाल के लिए रचनाकारों को भुगतान मिलना चाहिए। लेकिन रॉयल्टी कैसे वसूली और बांटी जाए, इस पर गहरे मतभेद हैं। दिग्गज रॉक गायक इकांग फौज़ी जैसे कुछ कलाकार मौजूदा व्यवस्था का समर्थन करते हैं। उनका तर्क है कि "किसी की रचनात्मक कृति का इस्तेमाल सम्मान और भुगतान के साथ होना चाहिए।" वहीं अहमद धानी और पियू जैसी जानी-मानी हस्तियां सामूहिक प्रबंधन संगठनों को दरकिनार कर कलाकारों और प्रतिष्ठानों के बीच सीधे लाइसेंस समझौतों की हिमायत करती हैं।
इस बहस को कलाकारों को कम भुगतान मिलने की खबरों ने और तेज़ किया है, जबकि कुल रॉयल्टी वसूली कानून के शुरुआती वर्षों के महज़ 400 मिलियन रुपिया (24,400 डॉलर) से बढ़कर आज 200 अरब रुपिया (12.2 करोड़ डॉलर) हो गई है। कुछ संगीतकारों का कहना है कि उन्हें साल में सिर्फ़ 60,000 रुपिया (3.70 डॉलर) तक मिलते हैं। मिसाल के तौर पर, पॉप संगीत के दिग्गज अरी लासो ने हाल में सिर्फ़ 765,000 रुपिया (47 डॉलर) के भुगतान पर सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई और व्यवस्था की निष्पक्षता तथा पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
संगीत रॉयल्टी एजेंसी वामी ने जवाब दिया कि यह रकम एक महीने के लिए सही थी और व्यवस्था में सुधार का काम जारी है। हालांकि, अरी लासो का तर्क था कि उनकी लोकप्रियता और उनके गानों के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए रॉयल्टी कहीं अधिक होनी चाहिए।
ऐसे विवादों के बाद व्यवस्था में सुधार की मांग उठी है। मार्च 2025 में 29 नामचीन गायकों ने संवैधानिक न्यायालय में न्यायिक समीक्षा याचिका दायर कर अधिक स्पष्ट और पारदर्शी रॉयल्टी व्यवस्था की मांग की। इसके बाद सांसदों ने कॉपीराइट कानून में संशोधन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट के साथ रॉयल्टी वसूली को LMKN के तहत केंद्रीकृत करने का वादा किया।
कानूनी उलझन और सार्वजनिक जीवन पर असर
इस कार्रवाई का असर सिर्फ़ कारोबारियों और संगीतकारों तक सीमित नहीं रहा। इससे कार्यक्रम आयोजकों और आम लोगों में भी घबराहट फैल गई। अगस्त के मध्य में एक गैर-लाभकारी संगठन ने सुझाव दिया कि शादियों और पारंपरिक समारोहों में बजाए जाने वाले संगीत पर भी रॉयल्टी लागू हो सकती है, जिससे व्यापक चिंता पैदा हुई। एक अन्य संगीत लाइसेंस निकाय, वाहना म्यूज़िक इंडोनेशिया (WAMI), ने अपनी नीति दोहराई कि समारोहों में बजाए जाने वाले किसी भी लाइव या रिकॉर्ड किए गए संगीत के लिए शादी आयोजकों को रॉयल्टी देनी होगी। शुल्क संगीत उत्पादन की कुल लागत का 2 प्रतिशत तय किया गया।
हालांकि, कॉपीराइट कानून का मसौदा तैयार करने वाले प्रोफेसर अहमद रामली ने स्पष्ट किया कि शादी जैसे गैर-व्यावसायिक आयोजन आम तौर पर छूट के दायरे में आते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत से ज़्यादा सख़्ती उद्योग और कलाकारों, दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है—इससे आम लोग दूरी बना सकते हैं और संगीत का इस्तेमाल पूरी तरह हतोत्साहित हो सकता है।
यूनिवर्सितास मुहम्मदिया योग्याकार्ता के डॉ. त्रिस्नो रहारजो जैसे कानूनी विशेषज्ञ संतुलन की ज़रूरत पर ज़ोर देते हैं। उन्होंने कहा, "सार्वजनिक जगहों पर संगीत बजाना निजी तौर पर संगीत सुनने से बुनियादी रूप से अलग है। संगीत का इस्तेमाल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए होता है, इसलिए रचनाकारों को रॉयल्टी मिलना स्वाभाविक है। लेकिन कानून लागू करने में हद से ज़्यादा सख़्ती नहीं होनी चाहिए, वरना उपभोक्ताओं या छोटे कारोबारों को अपराधी बना दिया जाएगा।"
पारदर्शिता, तकनीक और आगे का रास्ता
मौजूदा व्यवस्था की मुख्य आलोचनाओं में से एक यह है कि रॉयल्टी की गणना और वितरण कैसे होता है, इसकी जानकारी पारदर्शी नहीं है। कारोबारी आश्वासन चाहते हैं कि उनका भुगतान सही गीतकारों और कलाकारों तक पहुंचे, न कि नौकरशाही या संचालन लागत में गुम हो जाए। संचालन के लिए 20 प्रतिशत हिस्सा लेने वाली LMKN ने इन चिंताओं को स्वीकार किया है। वह एकीकृत ऑनलाइन लाइसेंस प्रणाली विकसित करने और डेटा संग्रह बेहतर करने पर काम कर रही है। स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म की प्लेलिस्ट को व्यवस्था में शामिल करने और सालाना ऑडिट कराने की कोशिशें भी चल रही हैं।
इन समस्याओं को सुलझाने में तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है। अरमांद मौलाना जैसे संगीतकारों ने सुझाव दिया है कि ब्लॉकचेन या इसी तरह की नई तकनीकें रॉयल्टी प्रबंधन में वास्तविक पारदर्शिता ला सकती हैं। पड़ोसी देश मलेशिया में, उदाहरण के लिए, अधिक केंद्रीकृत और एकीकृत व्यवस्था रचनाकारों को उचित भुगतान सुनिश्चित करने में कारगर साबित हुई है।
फिलहाल, सरकार कारोबारियों से कह रही है कि मानक शुल्क वहन न कर पाने पर वे LMKN के साथ दरों पर बातचीत करें। सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के लिए अतिरिक्त छूट पर भी विचार किया जा रहा है। सांसद कॉपीराइट कानून की समीक्षा भी कर रहे हैं, ताकि कानूनी स्पष्टता बढ़े और नियम छोटे कारोबारों पर अनुचित बोझ न डालें या देश की जीवंत संगीत संस्कृति को दबाएं नहीं।
संकट में संस्कृति: इंडोनेशियाई समाज पर व्यापक असर
इंडोनेशिया के कैफ़े और रेस्तरां में पसरा सन्नाटा महज़ एक असुविधा नहीं है—यह दूरगामी असर वाला सांस्कृतिक बदलाव है। संगीत लंबे समय से रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह मनोरंजन के साथ-साथ पहचान और समुदाय की भावना भी देता है। मौजूदा कार्रवाई से यह परंपरा कमज़ोर पड़ने का जोखिम है, क्योंकि कानूनी परेशानी से बचने के लिए कारोबारी संगीत बंद कर रहे हैं या सामान्य पृष्ठभूमि धुनें बजा रहे हैं।
कुछ ग्राहकों ने इस बदलाव पर निराशा जताई है। जकार्ता के एक नियमित कैफ़े ग्राहक ने कहा, "परिचित इंडोनेशियाई हिट गानों की जगह अब सामान्य पृष्ठभूमि धुनें बजती हैं, जिससे माहौल नीरस हो गया है।" कुछ लोगों को चिंता है कि स्थानीय संगीत न बजने से उभरते कलाकारों को नुकसान होगा, क्योंकि उन्हें अपना प्रशंसक आधार बनाने के लिए सार्वजनिक जगहों पर मिलने वाले मंच और पहचान पर निर्भर रहना पड़ता है।
यह भी चिंता है कि कार्रवाई का उलटा असर हो सकता है: कारोबारी संगीत से पूरी तरह परहेज़ करने लगें और कलाकार रॉयल्टी तथा प्रचार, दोनों से वंचित रह जाएं। एक रेस्तरां संचालक ने कहा, "अगर हमें हर गीतकार से अनुमति लेनी पड़े, तो शायद हमें अपने गीत गाने चाहिए या कोई भी आवाज़ रिकॉर्ड कर लेनी चाहिए।"
सरकार की प्रतिक्रिया और समाधान की तलाश
व्यापक भ्रम और असंतोष को देखते हुए सरकारी अधिकारियों ने लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की है। उपाध्यक्ष सुफ्मी दास्को अहमद ने हाल में कहा कि कानून में संशोधन होने तक कारोबारी मनमाने रॉयल्टी दावों के डर के बिना पहले की तरह गाने बजा या गा सकते हैं। प्रतिनिधि सभा रॉयल्टी वसूली को LMKN के तहत केंद्रीकृत करने और नियमित ऑडिट के ज़रिए पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मंत्रालयों, संगीतकारों और उद्योग से जुड़े पक्षों के साथ काम कर रही है।
कानून एवं मानवाधिकार मंत्रालय ने छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को भी LMKN के साथ दरों पर बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया है। मंत्रालय ने निष्पक्ष और व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए कारोबारी संगठनों से सलाह-मशविरा करने का वादा किया है। मकसद रचनाकारों के अधिकारों की रक्षा करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना कि कारोबारियों पर अनुचित बोझ न पड़े और वे संगीत बजाने से हतोत्साहित न हों।
इस बीच, कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि कारोबारी सार्वजनिक डोमेन में आ चुके संगीत का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे शास्त्रीय रचनाएं या पुराने लोकप्रिय गीत जिनका कॉपीराइट समाप्त हो चुका है। कानूनी ढांचे में संशोधन होने तक यह एक अस्थायी विकल्प हो सकता है।
सारांश
- मिए गाकोआन रेस्तरां श्रृंखला से जुड़े चर्चित मामले के बाद, बिना भुगतान की गई संगीत रॉयल्टी के ख़िलाफ़ कार्रवाई के चलते इंडोनेशिया के कैफ़े और रेस्तरां ख़ामोश हो गए हैं।
- 2014 का कॉपीराइट कानून सार्वजनिक जगहों पर बजाए जाने वाले संगीत के लिए सभी व्यावसायिक स्थलों पर रॉयल्टी भुगतान अनिवार्य करता है। 2021 से कानून का पालन और सख़्ती से कराया जा रहा है।
- कारोबारियों को नियमों और लागत को लेकर उलझन है। वे यह भी नहीं जानते कि LMKN को भुगतान पर्याप्त है या कलाकारों की सीधी मंज़ूरी भी ज़रूरी है।
- रॉयल्टी वसूलने और बांटने की सबसे अच्छी व्यवस्था को लेकर संगीतकारों में मतभेद हैं। कुछ सीधे लाइसेंस समझौतों की हिमायत करते हैं, जबकि कुछ राष्ट्रीय एजेंसी का समर्थन करते हैं।
- रॉयल्टी के वितरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता बड़ी चिंताएं हैं। वसूली बढ़ने के बावजूद कुछ कलाकारों का कहना है कि उन्हें बहुत कम भुगतान मिलता है।
- कार्रवाई ने कारोबारियों और संगीतकारों के साथ-साथ सार्वजनिक आयोजनों तथा व्यापक सांस्कृतिक माहौल को भी प्रभावित किया है। इसके बाद कानूनी सुधार और अधिक स्पष्टता की मांग उठी है।
- सरकार कॉपीराइट कानून में संशोधन और रॉयल्टी वसूली को केंद्रीकृत करने पर काम कर रही है, ताकि नियम रचनाकारों की रक्षा करें और इंडोनेशिया की संगीत संस्कृति को दबाएं नहीं।






