सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जापान की दांव भरी वापसी: महत्वाकांक्षा, गठबंधन और तकनीकी प्रासंगिकता की दौड़

पढ़ने में 13 मिनट
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जापान की दांव भरी वापसी: महत्वाकांक्षा, गठबंधन और तकनीकी प्रासंगिकता की दौड़

सेमीकंडक्टर नेतृत्व फिर हासिल करने की जापान की महत्वाकांक्षी कोशिश

जापान के सबसे उत्तरी द्वीप पर स्थित चितोसे शहर में, देश के औद्योगिक इतिहास का एक नया अध्याय तेज़ी से लिखा जा रहा है। 2022 में स्थापित, सरकार समर्थित सेमीकंडक्टर स्टार्टअप रैपिडस ने अपनी शुरुआत के महज़ तीन साल के भीतर दो नैनोमीटर (2nm) ट्रांजिस्टर के प्रायोगिक उत्पादन की घोषणा कर वैश्विक टेक समुदाय को चौंका दिया है। ये दुनिया की सबसे उन्नत चिपों में शामिल हैं। 73 वर्षीय ऊर्जावान इंजीनियर अत्सुयोशी कोइके के नेतृत्व में हासिल यह उल्लेखनीय उपलब्धि उस क्षेत्र में फिर से प्रासंगिकता पाने के जापान के संकल्प का संकेत है, जिस पर कभी उसका दबदबा था, लेकिन बाद में ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के प्रतिद्वंद्वियों ने बढ़त हासिल कर ली।

विषय-सूची
  1. सेमीकंडक्टर नेतृत्व फिर हासिल करने की जापान की महत्वाकांक्षी कोशिश
  2. वैश्विक दबदबे से गिरावट तक: जापान ने अपनी बढ़त कैसे गंवाई
  3. सेमीकंडक्टर क्यों अहम हैं: राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अस्तित्व
  4. रैपिडस: जापान के सेमीकंडक्टर पुनरुत्थान का प्रमुख ध्वजवाहक
  5. 2nm चिपें इतनी अहम क्यों हैं?
  6. जापान की बहुआयामी रणनीति: सब्सिडी, गठबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
  7. चुनौतियां: वित्तपोषण, तकनीक और प्रतिभा की कमी
  8. 1. भारी पूंजी की ज़रूरत
  9. 2. तकनीक हस्तांतरण की “मृत्यु की घाटी”
  10. 3. प्रतिभाओं की भारी कमी
  11. 4. बेहद प्रतिस्पर्धी बाज़ार में ग्राहक हासिल करना
  12. रणनीतिक गठबंधन और भू-राजनीतिक शतरंज
  13. पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: बुनियादी ढांचा, सामग्री और स्वचालन
  14. जोखिम, आलोचनाएं और औद्योगिक नीति की सीमाएं
  15. कामयाबी का मतलब: जापान और दुनिया के लिए
  16. संक्षेप में

हालांकि, जापान अपने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को फिर से खड़ा करने के लिए अरबों डॉलर लगा रहा है, लेकिन दांव कॉरपोरेट प्रतिस्पर्धा से कहीं बड़े हैं। सेमीकंडक्टर की दौड़ अब राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और तकनीकी संप्रभुता का सवाल बन गई है। दुनिया की नज़रें इस पर हैं: क्या जापान का महत्वाकांक्षी दांव सफल होगा, या वैश्विक प्रतिस्पर्धा और देश के भीतर की गंभीर चुनौतियों के सामने यह नाकाम रहेगा?

वैश्विक दबदबे से गिरावट तक: जापान ने अपनी बढ़त कैसे गंवाई

जापान का सेमीकंडक्टर उद्योग कभी दुनिया के लिए ईर्ष्या का विषय था। 1980 के दशक में जापानी कंपनियों के पास डायनैमिक रैंडम-एक्सेस मेमोरी (DRAM) चिपों के वैश्विक बाज़ार का आधे से अधिक हिस्सा था। ये चिपें कंप्यूटर से लेकर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स तक सब कुछ चलाती थीं। लेकिन कई झटकों—अमेरिका के साथ व्यापार विवाद, येन का तेज़ी से मजबूत होना और उभरते लॉजिक चिप तथा फैबलेस-फाउंड्री कारोबारी मॉडल की ओर रुख करने में नाकामी—ने जापान को तेज़ गिरावट की राह पर ला दिया। 2000 के दशक तक वैश्विक सेमीकंडक्टर बाज़ार में जापान की हिस्सेदारी गिरकर लगभग 10% रह गई।

इसके गंभीर नतीजे हुए। इलेक्ट्रॉनिक्स में जापान का व्यापार अधिशेष खत्म हो गया और 2022 तक यह घाटे में बदल गया। कोविड-19 महामारी ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की कमज़ोरी उजागर की; चिपों की कमी से जापान का महत्वपूर्ण वाहन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस बीच, अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिद्वंद्विता और भू-राजनीतिक अस्थिरता का खतरा—खासकर दुनिया के चिप निर्माण केंद्र ताइवान को लेकर—विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को रेखांकित करने लगा।

सेमीकंडक्टर क्यों अहम हैं: राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अस्तित्व

सेमीकंडक्टर आधुनिक उपकरणों का “दिमाग” हैं। स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उन्नत हथियारों तक, हर चीज़ इनके सहारे चलती है। JAPAN Forward के अनुसार, ये सिर्फ़ औद्योगिक उत्पाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम रणनीतिक सामग्री हैं। अत्याधुनिक चिपों को डिज़ाइन और निर्मित करने की क्षमता को अब आर्थिक स्वतंत्रता और तकनीकी नेतृत्व के लिए अनिवार्य माना जाता है।

इसे समझते हुए जापान सरकार ने सेमीकंडक्टर के मामले में आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। 2022 के आर्थिक सुरक्षा संवर्धन अधिनियम में चिपों की स्थिर आपूर्ति को राष्ट्रीय स्तर का तात्कालिक लक्ष्य घोषित किया गया। नीति-निर्माता यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वैश्विक व्यवधानों या विदेश नीति से जुड़े झटकों के कारण जापान बंधक बने बिना अपनी और अपने सहयोगियों की ज़रूरतें पूरी कर सके।

रैपिडस: जापान के सेमीकंडक्टर पुनरुत्थान का प्रमुख ध्वजवाहक

जापान की पुनरुत्थान रणनीति के केंद्र में रैपिडस है। यह सार्वजनिक-निजी संयुक्त उपक्रम है, जिसे अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (METI) के साथ टोयोटा, सोनी, एनटीटी और सॉफ्टबैंक समेत बड़े औद्योगिक समूहों का समर्थन हासिल है। सरकार की 6 अरब डॉलर से अधिक की सब्सिडी और अतिरिक्त निजी निवेश के सहारे रैपिडस का लक्ष्य 2027 तक बड़े पैमाने पर 2nm लॉजिक चिपों का उत्पादन करना है—यानी खोई हुई दो दशक की तकनीकी बढ़त को महज़ पांच साल में पार करना।

यह लक्ष्य हासिल करने के लिए रैपिडस ने वैश्विक अग्रणी कंपनियों के साथ साझेदारियां की हैं: IBM अपनी उन्नत गेट-ऑल-अराउंड (GAA) चिप संरचना तक पहुंच दे रहा है, जबकि बेल्जियम का IMEC एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट (EUV) लिथोग्राफी में विशेषज्ञता मुहैया करा रहा है। कंपनी ने गहन प्रशिक्षण के लिए 150 से अधिक इंजीनियरों को IBM के न्यूयॉर्क शोध केंद्र और IMEC की बेल्जियम स्थित प्रयोगशालाओं में भेजा है। दिसंबर 2023 में रैपिडस डच आपूर्तिकर्ता ASML से EUV प्रणाली हासिल करने वाली पहली जापानी कंपनी बनी। 2nm नोड पर उत्पादन के लिए यह एक अहम कदम है।

जुलाई 2025 में रैपिडस ने घोषणा की कि उसने होक्काइडो स्थित अपने फैब में 2nm ट्रांजिस्टर का सफल प्रायोगिक उत्पादन किया है। सीईओ अत्सुयोशी कोइके ने तीन साल से भी कम पुरानी कंपनी के लिए इसे “अविश्वसनीय गति” बताया। अब यह प्रायोगिक उत्पादन लाइन एक अहम परीक्षण स्थल है। ब्रॉडकॉम जैसे साझेदारों को प्रोटोटाइप की आपूर्ति से इस परियोजना की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

विज्ञापन

2nm चिपें इतनी अहम क्यों हैं?

“2nm” का मतलब सिलिकॉन वेफर पर उकेरे गए ट्रांजिस्टर के आकार से है। छोटे ट्रांजिस्टर होने पर एक चिप में अधिक ट्रांजिस्टर लगाए जा सकते हैं, जिससे प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता बढ़ती है। ये चिपें AI, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और स्वायत्त वाहनों तथा 6G दूरसंचार जैसे अगली पीढ़ी के अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक हैं। फिलहाल सिर्फ़ कुछ कंपनियां—TSMC, सैमसंग और इंटेल—2nm तकनीक का व्यावसायीकरण करने की दौड़ में हैं। इससे रैपिडस की महत्वाकांक्षा और भी साहसिक हो जाती है।

जापान की बहुआयामी रणनीति: सब्सिडी, गठबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण

जापान का सेमीकंडक्टर पुनरुत्थान सिर्फ़ रैपिडस तक सीमित नहीं है। सरकार ने 2030 तक 65 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की व्यापक योजना पेश की है। लक्ष्य घरेलू चिप बिक्री को तीन गुना बढ़ाकर 15 ट्रिलियन येन से अधिक करना है। इस रणनीति के कई प्रमुख आधार हैं:

  • भारी सब्सिडी: 2021 से 2023 के बीच जापान ने इस क्षेत्र पर 3.9 ट्रिलियन येन (27 अरब डॉलर) खर्च किए—GDP के अनुपात में यह अमेरिकी CHIPS Act के खर्च से भी अधिक था।
  • विदेशी निवेश आकर्षित करना: दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता ताइवान की TSMC ने सोनी और डेन्सो के साथ कुमामोतो में एक संयंत्र खोला है और दूसरे संयंत्र की योजना है। इंटेल और माइक्रॉन जैसी अमेरिकी कंपनियां भी जापान में अपना विस्तार कर रही हैं।
  • शोध और विकास केंद्र: 2022 में स्थापित लीडिंग-एज सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी सेंटर (LSTC) उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) का समन्वय करता है और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ काम करता है।
  • आपूर्ति शृंखला की मज़बूती: जापान महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है। इसमें चिप निर्माण के लिए आवश्यक गैसों की आपूर्ति हेतु एयर लिक्विड की नई वायु पृथक्करण इकाई और घरेलू सामग्री तथा उपकरण आपूर्तिकर्ताओं को समर्थन देना शामिल है।
  • कार्यबल विकास: इंजीनियरों की भारी कमी को देखते हुए जापान विदेशों से—विशेषकर वियतनाम से—प्रतिभाओं की भर्ती कर रहा है और देश में प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ा रहा है।

इन प्रयासों का मकसद सिर्फ़ जापान की विनिर्माण क्षमता बहाल करना नहीं, बल्कि सुरक्षित और उन्नत सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं के अमेरिका-नेतृत्व वाले गठबंधन में देश को एक अनिवार्य केंद्र के रूप में स्थापित करना भी है।

चुनौतियां: वित्तपोषण, तकनीक और प्रतिभा की कमी

इस गति के बावजूद, जापान के सेमीकंडक्टर पुनरुत्थान के रास्ते में बड़ी बाधाएं हैं। The Diplomat और East Asia Forum के अनुसार, तीन चुनौतियां खास तौर पर सामने आती हैं:

1. भारी पूंजी की ज़रूरत

विश्वस्तरीय चिप फाउंड्री बनाना सबसे महंगे औद्योगिक उपक्रमों में से एक है। बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुंचने के लिए रैपिडस को अनुमानित 5 ट्रिलियन येन (34.5 अरब डॉलर) की ज़रूरत है, लेकिन अब तक उसे सरकार और निजी निवेशकों से इसका सिर्फ़ एक हिस्सा मिला है। नए कानून अतिरिक्त सार्वजनिक सहायता और कर्ज़ गारंटी की अनुमति देते हैं, लेकिन आलोचक एक ऐसी परियोजना में करदाताओं का पैसा लगाने की समझदारी पर सवाल उठाते हैं, जिसकी कामयाबी अभी साबित नहीं हुई है। सीईओ कोइके कंपनी की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए अधिक निजी निवेश आकर्षित करना चाहते हैं, लेकिन रैपिडस के पास सफलता का कोई रिकॉर्ड न होने के कारण संदेह बना हुआ है।

विज्ञापन

2. तकनीक हस्तांतरण की “मृत्यु की घाटी”

अत्याधुनिक शोध को भरोसेमंद, ऊंची उत्पादन-उपज वाले बड़े पैमाने के विनिर्माण में बदलना बेहद मुश्किल है। इस चरण को अक्सर “मृत्यु की घाटी” कहा जाता है। रैपिडस के इंजीनियर IBM की GAA तकनीक और EUV लिथोग्राफी में महारत हासिल करने की होड़ में हैं, लेकिन जापान की मौजूदा सबसे उन्नत लॉजिक चिप तकनीक 40nm नोड पर है, जो अग्रणी कंपनियों से दो दशक पीछे है। अगर 2nm चिपों के प्रोटोटाइप तैयार भी हो जाएं, तो लगातार एक जैसी गुणवत्ता के साथ व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन बढ़ाना कठिन चुनौती होगी। रैपिडस और जापान की व्यापक महत्वाकांक्षाओं का भविष्य इस अंतर को पाट पाने पर निर्भर हो सकता है।

3. प्रतिभाओं की भारी कमी

पिछले दशकों में जापान का सेमीकंडक्टर कार्यबल नाटकीय रूप से सिकुड़ा है। कई अनुभवी इंजीनियर अब 50 की उम्र पार कर चुके हैं या विदेशों में काम कर रहे हैं। देश में 40,000 इंजीनियरों की कमी होने का अनुमान है और घटती जन्म दर से समस्या और गंभीर हो रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए जापानी कंपनियां वियतनामी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं की भर्ती कर रही हैं, लेकिन कुशल कामगारों की मज़बूत आपूर्ति तैयार करने में वर्षों लगेंगे।

4. बेहद प्रतिस्पर्धी बाज़ार में ग्राहक हासिल करना

तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को पार करने के बाद भी रैपिडस को TSMC और सैमसंग के दबदबे वाले बाज़ार में ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करना होगा। इन दोनों कंपनियों के 2025 तक बड़े पैमाने पर 2nm उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है—रैपिडस के लक्ष्य से दो साल पहले। रैपिडस ने ब्रॉडकॉम के साथ साझेदारी की घोषणा की है और सिलिकॉन वैली की कंपनियों से बातचीत कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कारोबार जारी रखने के लिए उसे पर्याप्त ऑर्डर मिल पाएंगे या नहीं। सीईओ कोइके तेज़ आपूर्ति समय और विशेष सेवाएं देकर बाज़ार में अपनी जगह बनाने की उम्मीद करते हैं, लेकिन मुनाफ़े तक पहुंचने का रास्ता अनिश्चित है।

विज्ञापन

रणनीतिक गठबंधन और भू-राजनीतिक शतरंज

जापान का सेमीकंडक्टर पुनरुत्थान अमेरिका-चीन की बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के माहौल में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका, जापान और नीदरलैंड ने चीन की उन्नत चिप निर्माण तकनीक तक पहुंच सीमित करने के लिए निर्यात नियंत्रणों में तालमेल किया है। इससे सामग्री और उपकरणों में जापान की विशेषज्ञता एक अहम रणनीतिक अड़चन बन गई है। साथ ही, जापान चीन से पूरी तरह आर्थिक संबंध तोड़ने को लेकर सतर्क है। चीन उसका सबसे बड़ा व्यापार साझेदार और दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर उपभोक्ता है। मई 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने चीन और दक्षिण कोरिया के साथ आपूर्ति शृंखला सहयोग मजबूत करने और व्यवधानों से बचने की प्रतिबद्धता जताई थी।

यह नाज़ुक संतुलन जापान की व्यापक रणनीति को दर्शाता है: आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाना, अमेरिका और यूरोप के साथ गठबंधन मजबूत करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना। IBM और IMEC के साथ रैपिडस की साझेदारियां तथा TSMC, इंटेल और अन्य कंपनियों का विदेशी निवेश इस रणनीति के केंद्र में हैं। जापान बढ़त बनाए रखने के लिए उन्नत पैकेजिंग, स्वचालन और AI शोध में भी निवेश कर रहा है।

पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: बुनियादी ढांचा, सामग्री और स्वचालन

सेमीकंडक्टर विनिर्माण को फिर से खड़ा करने के लिए सिर्फ़ फैब पर्याप्त नहीं हैं। जापान सहायक पारिस्थितिकी तंत्र में भी भारी निवेश कर रहा है:

  • महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा: एयर लिक्विड की नई वायु पृथक्करण इकाई जैसी परियोजनाएं चिप निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक गैसों की आपूर्ति करेंगी। इससे सेमीकंडक्टर और हरित प्रौद्योगिकी, दोनों क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा।
  • सामग्री और उपकरण: जापान फोटोरेजिस्ट और चिप निर्माण में काम आने वाली अन्य सामग्रियों के मामले में अब भी वैश्विक अग्रणी है। JSR और टोक्यो इलेक्ट्रॉन जैसी कंपनियां अहम भूमिका निभा रही हैं।
  • स्वचालन और उत्पादन के अंतिम चरण: इंटेल और जापानी कंपनियों के साथ सहयोग का लक्ष्य असेंबली और परीक्षण को स्वचालित करना है, जिससे दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
  • ऊर्जा आपूर्ति: सेमीकंडक्टर फैब में बहुत अधिक ऊर्जा लगती है। स्थिर बिजली आपूर्ति—संभवतः परमाणु ऊर्जा से—होक्काइडो में रैपिडस की सफलता के लिए अहम मानी जाती है।
विज्ञापन

जोखिम, आलोचनाएं और औद्योगिक नीति की सीमाएं

जापान की सेमीकंडक्टर पहल विवादों से अछूती नहीं है। कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारी सब्सिडी बाज़ार को विकृत कर सकती है और दीर्घकालिक सफलता की गारंटी नहीं देती, खासकर तब जब अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे प्रतिद्वंद्वी जापान से अधिक खर्च करते रहें। OECD और IMF ने चेतावनी दी है कि जवाबी औद्योगिक नीतियों की होड़ वैश्विक व्यापार नियमों को कमज़ोर कर सकती है और अक्षमताएं बढ़ा सकती है।

सार्वजनिक सहायता को लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता को लेकर भी चिंताएं हैं। राजकोषीय दबाव और बूढ़ी होती आबादी के बीच जापान सरकार को रणनीतिक निवेश की ज़रूरत और राजकोषीय समेकन की अनिवार्यता के बीच संतुलन बनाना होगा। “प्रतिभाओं की बढ़ती कमी” का जोखिम और R&D में हुई कामयाबी को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने की चुनौती अब भी बड़ी बाधाएं हैं।

कामयाबी का मतलब: जापान और दुनिया के लिए

अगर जापान का सेमीकंडक्टर पुनरुत्थान सफल होता है, तो इसके दूरगामी बदलावकारी लाभ हो सकते हैं। अत्याधुनिक चिपें अगली पीढ़ी के AI, स्वायत्त वाहनों और डिजिटल बुनियादी ढांचे को शक्ति देंगी, जिससे जापान की आर्थिक वृद्धि और तकनीकी प्रभाव बढ़ेगा। मज़बूत घरेलू आपूर्ति शृंखला राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाएगी और वैश्विक झटकों के प्रति संवेदनशीलता घटाएगी। इसके प्रभाव वाहन उद्योग से लेकर नवीकरणीय ऊर्जा तक, कई क्षेत्रों में दिखेंगे और वैश्विक टेक पारिस्थितिकी तंत्र में जापान की अहम भूमिका को और मज़बूत करेंगे।

लेकिन आगे का रास्ता अनिश्चितताओं से भरा है। East Asia Forum के अनुसार, “हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती”—नाकामी का जोखिम वास्तविक है और गलत कदमों की कीमत भारी हो सकती है। फिलहाल, होक्काइडो में रैपिडस की प्रायोगिक उत्पादन लाइन उम्मीद के प्रतीक और जापान के संकल्प की परीक्षा, दोनों के रूप में खड़ी है।

विज्ञापन

संक्षेप में

  • जापान अपने सेमीकंडक्टर उद्योग को फिर से खड़ा करने के लिए बड़ा दांव लगा रहा है। इस कोशिश में सबसे आगे रैपिडस है, जिसका लक्ष्य 2027 तक 2nm चिपों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करना है।
  • सरकार ने 65 अरब डॉलर से अधिक की सब्सिडी और प्रोत्साहन देने का संकल्प लिया है। इससे विदेशी निवेश आकर्षित करने और मज़बूत R&D पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद मिल रही है।
  • मुख्य चुनौतियों में भारी पूंजी की ज़रूरत, तकनीकी बाधाएं, प्रतिभाओं की गंभीर कमी और कड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा शामिल हैं।
  • IBM, IMEC, TSMC और अन्य कंपनियों के साथ रणनीतिक गठबंधन जापान की नीति के केंद्र में हैं। इसके साथ ही अमेरिका और चीन, दोनों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना भी अहम है।
  • कामयाबी से जापान की आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी नेतृत्व मजबूत होंगे, लेकिन नाकामी और बाज़ार में विकृति के जोखिम अब भी बड़े हैं।
  • रैपिडस का प्रायोगिक उत्पादन कितना सफल होता है और वह कितने ग्राहक जुटा पाती है, इससे जापान के सेमीकंडक्टर पुनरुत्थान का भविष्य निर्णायक रूप से तय होगा।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है