इंडोनेशिया और चीन ने सीमा-पार क्यूआर भुगतान का परीक्षण शुरू किया
इंडोनेशिया और चीन ने अपनी क्यूआर कोड-आधारित भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने के लिए आधिकारिक तौर पर एक महत्वपूर्ण परीक्षण शुरू किया है। यह एशिया के डिजिटल वित्त परिदृश्य में एक अहम पड़ाव है। इंडोनेशिया के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य इंडोनेशिया के क्विक रिस्पॉन्स इंडोनेशियन स्टैंडर्ड (QRIS) को चीन के विशाल डिजिटल भुगतान तंत्र से जोड़ना है। इससे सीमा-पार लेन-देन का स्वरूप बदलने, पर्यटन को बढ़ावा देने और दोनों देशों के छोटे कारोबारों को सशक्त बनाने की उम्मीद है।
विषय-सूची
- इंडोनेशिया और चीन ने सीमा-पार क्यूआर भुगतान का परीक्षण शुरू किया
- सीमा-पार क्यूआर भुगतान क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- इंडोनेशिया-चीन क्यूआर भुगतान परीक्षण कैसे काम करता है
- आर्थिक प्रभाव: व्यापार, पर्यटन और छोटे उद्यम
- क्षेत्रीय एकीकरण: आसियान में डिजिटल भुगतान क्रांति
- आसियान क्यूआर भुगतान पर ध्यान क्यों दे रहा है?
- तकनीकी और नियामकीय चुनौतियां
- वैश्विक मायने: बहुध्रुवीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर
- जमीनी असर: यात्रियों और कारोबारियों के अनुभव
- सीमा-पार क्यूआर भुगतान का अगला कदम क्या है?
- संक्षेप में
सीमा-पार क्यूआर भुगतान क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
क्यूआर (क्विक रिस्पॉन्स) कोड से भुगतान में उपयोगकर्ता अपने स्मार्टफोन से कोड स्कैन करके लेन-देन कर सकते हैं और रकम तुरंत एक खाते से दूसरे खाते में भेजी जाती है। चीन में क्यूआर भुगतान का व्यापक चलन है। वहां करीब 96% मोबाइल उपयोगकर्ता सड़क किनारे मिलने वाले खाने से लेकर महंगे सामान तक, लगभग हर चीज के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। 2019 में शुरू हुआ इंडोनेशिया का QRIS तेजी से देश की प्रमुख डिजिटल भुगतान प्रणाली बन गया है। 2025 तक इसके 57 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता और 29 मिलियन पंजीकृत कारोबारी थे, जिनमें अधिकांश छोटे और मध्यम आकार के उद्यम (SMEs) हैं।
सीमा-पार क्यूआर भुगतान प्रणालियां इस सुविधा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराती हैं। QRIS को चीन के यूनियनपे और अन्य भुगतान नेटवर्क से जोड़ने पर यात्री और कारोबारी नकदी या अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड की जरूरत के बिना, अपनी स्थानीय मुद्रा में सीधे अपने घरेलू बैंक खातों से भुगतान कर सकेंगे या उनमें रकम प्राप्त कर सकेंगे। इससे लेन-देन आसान होगा और पारंपरिक भुगतान तरीकों की तुलना में बेहतर विनिमय दरें तथा कम शुल्क मिलेंगे।
इंडोनेशिया-चीन क्यूआर भुगतान परीक्षण कैसे काम करता है
पायलट चरण में इंडोनेशिया का पेमेंट सिस्टम एसोसिएशन (ASPI), चीन का यूनियनपे इंटरनेशनल और कई स्थानीय भुगतान सेवा प्रदाता शामिल हैं। तकनीकी, कारोबारी और परिचालन संबंधी समझौतों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इंडोनेशिया की चार स्विचिंग सेवा प्रदाताओं ने संयुक्त रूप से प्रणाली विकसित करने और सैंडबॉक्स परीक्षण करने के लिए सहमति दी है। लक्ष्य दोनों प्रणालियों के बीच निर्बाध तालमेल कायम करना है: इंडोनेशिया आने वाले चीनी पर्यटक QRIS कोड स्कैन करके अपने परिचित यूनियनपे-सहायता प्राप्त ऐप से भुगतान कर सकेंगे, जबकि चीन में इंडोनेशियाई लोग चीनी क्यूआर कोड के जरिये अपने घरेलू ऐप से भुगतान कर सकेंगे।
बैंक इंडोनेशिया के गवर्नर पेरी वारजियो ने इस नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए कहा:
स्वीकृति का दायरा बढ़ाने और डिजिटल आर्थिक तथा वित्तीय समावेशन को समर्थन देने के लिए QRIS में नवाचार लगातार विकसित हो रहा है। सीमा-पार QRIS भी ऐसा ही एक नवाचार है।
परीक्षण चरण पूरा होने और सफल साबित होने के बाद इस प्रणाली को आधिकारिक तौर पर शुरू किया जाएगा, जिससे इंडोनेशिया और चीन के बीच सीमा-पार क्यूआर भुगतान व्यापक रूप से उपलब्ध हो जाएगा।
आर्थिक प्रभाव: व्यापार, पर्यटन और छोटे उद्यम
इंडोनेशिया के भुगतान नेटवर्क को चीन से जोड़ने से कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है:
- सीमा-पार व्यापार लेन-देन आसान होंगे: कारोबारी, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यम, तुरंत और सुरक्षित रूप से भुगतान निपटा सकेंगे। इससे नकदी पर निर्भरता घटेगी और मुद्रा बदलने की दिक्कतें कम होंगी।
- पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा: घर पर क्यूआर भुगतान के आदी चीनी पर्यटकों के लिए इंडोनेशिया में खर्च करना आसान होगा, चाहे वे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हों या छोटी स्थानीय दुकानों में। यह इसलिए अहम है क्योंकि इंडोनेशिया 2024 में 1.5 मिलियन तक चीनी पर्यटकों को आकर्षित करना चाहता है। महामारी से पहले 2019 में 2 मिलियन से अधिक चीनी पर्यटक आए थे।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सशक्त बनाया जाएगा: QRIS अपनाने से इंडोनेशिया के लाखों MSMEs पहले ही डिजिटल भुगतान स्वीकार कर पा रहे हैं। सीमा-पार भुगतान की सुविधा नए बाजार और ग्राहक वर्ग खोलेगी। इसका लाभ चीनी पर्यटकों को सेवाएं देने वाले इंडोनेशियाई विक्रेताओं और विदेश में खरीदारी करने वाले इंडोनेशियाई यात्रियों, दोनों को मिलेगा।
इंडोनेशिया के पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित क्यूआर भुगतान प्रणाली चीनी पर्यटकों की संख्या, उनके ठहरने की अवधि और कुल खर्च बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। क्यूआर से आसानी से भुगतान कर पाने की सुविधा से अधिक चीनी पर्यटक बाली से सुमात्रा तक इंडोनेशिया के विविध पर्यटन स्थलों को देखने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
क्षेत्रीय एकीकरण: आसियान में डिजिटल भुगतान क्रांति
इंडोनेशिया-चीन क्यूआर भुगतान परीक्षण दक्षिण-पूर्व एशिया में तेजी से बढ़ते व्यापक बदलाव का हिस्सा है। आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) ने क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के प्रमुख आधार के रूप में डिजिटल भुगतान संपर्क को प्राथमिकता दी है। 2023 की ‘क्षेत्रीय भुगतान संपर्क को आगे बढ़ाने और स्थानीय मुद्रा लेन-देन को प्रोत्साहित करने पर आसियान नेताओं की घोषणा’ ने नवाचार-आधारित पहलों की नींव रखी। इनका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर जैसी बाहरी मुद्राओं पर निर्भरता घटाना और आर्थिक मजबूती को बढ़ावा देना है।
इंडोनेशिया के QRIS ने मलेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर के साथ पहले ही सीमा-पार संपर्क स्थापित कर लिया है। इन देशों में QRIS उपयोगकर्ता स्थानीय कारोबारियों को सीधे भुगतान कर सकते हैं और इसके उलट भी। उदाहरण के लिए, अगस्त 2022 से QRIS ने थाईलैंड में करीब 1 मिलियन लेन-देन किए, जिनका मूल्य Rp 437 billion ($27 million) से अधिक था। मलेशिया में 4 मिलियन से अधिक लेन-देन का मूल्य Rp 1.15 trillion ($71 million) रहा। जापान अगस्त 2025 में इस नेटवर्क से जुड़ा, जबकि भारत और दक्षिण कोरिया में तकनीकी परीक्षण चल रहे हैं।
आसियान क्यूआर भुगतान पर ध्यान क्यों दे रहा है?
क्यूआर-आधारित भुगतान के कई फायदे हैं:
- वित्तीय समावेशन: इसके लिए केवल स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन चाहिए, जिससे बैंकिंग सुविधा से वंचित या सीमित सुविधा वाली आबादी भी इसका इस्तेमाल कर सकती है।
- MSMEs को सहायता: छोटे कारोबार महंगे बिक्री-बिंदु उपकरणों के बिना डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकते हैं।
- पर्यटन और धन-प्रेषण: यात्री और प्रवासी कामगार आसानी से तथा सुरक्षित रूप से भुगतान कर सकते हैं और सीमा-पार पैसे भेज सकते हैं।
- स्थानीय मुद्रा का उपयोग: स्थानीय मुद्राओं में सीधे भुगतान संभव बनाकर आसियान देश अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाते हैं और अपने आर्थिक भविष्य पर अधिक नियंत्रण हासिल करते हैं।
Data Reportal के 2024 के एक अध्ययन के अनुसार, क्यूआर कोड के इस्तेमाल में चीन, मलेशिया और थाईलैंड दुनिया में सबसे आगे हैं। वहां मासिक उपयोग दर 60% से अधिक है। ई-वॉलेट और क्यूआर भुगतान अपनाने में इंडोनेशिया भी क्षेत्रीय अग्रणी है। केवल 2022 में QRIS के लेन-देन 98.5 trillion rupiah ($6.5 billion) तक पहुंच गए थे।
तकनीकी और नियामकीय चुनौतियां
सीमा-पार क्यूआर भुगतान की संभावनाएं बहुत बड़ी हैं, लेकिन कई चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं:
- नियमों में सामंजस्य: निरंतरता और आपसी तालमेल सुनिश्चित करने के लिए देशों को डेटा गोपनीयता, उपभोक्ता संरक्षण, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के मानकों पर सहमति बनानी होगी।
- डिजिटल बुनियादी ढांचा: खासकर ग्रामीण इलाकों में भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी और मजबूत साइबर सुरक्षा जरूरी हैं।
- उपभोक्ता जागरूकता: उपयोगकर्ताओं को समझना होगा कि क्यूआर भुगतान का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे करें और विवाद या धोखाधड़ी होने पर क्या कदम उठाएं।
- कारोबारियों द्वारा अपनाना: व्यापक इस्तेमाल के लिए सीमा-पार क्यूआर भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारियों का नेटवर्क बढ़ाना अहम है।
आसियान क्षेत्रीय नियामकीय सैंडबॉक्स और डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए सार्वजनिक-निजी निवेश कोष जैसी सहयोगी पहलों के जरिये इन मुद्दों का समाधान कर रहा है। डिजिटल भुगतान के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय साक्षरता अभियान और मजबूत उपभोक्ता संरक्षण ढांचे भी विकसित किए जा रहे हैं।
वैश्विक मायने: बहुध्रुवीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर
इंडोनेशिया-चीन क्यूआर भुगतान साझेदारी महज तकनीकी उन्नयन नहीं है, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में बदलाव का संकेत भी देती है। स्थानीय मुद्रा में लेन-देन को बढ़ावा देकर और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाकर, आसियान देश अधिक आर्थिक संप्रभुता का दावा कर रहे हैं। इसके दूरगामी नतीजे हो सकते हैं और एक ऐसी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का मार्ग खुल सकता है, जहां उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में बड़ी भूमिका हो।
चीन के लिए इंडोनेशिया के साथ यह साझेदारी दक्षिण-पूर्व एशिया और उससे आगे अपने डिजिटल भुगतान प्रभाव का विस्तार करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यूनियनपे इंटरनेशनल का इंडोनेशिया के ASPI के साथ सहयोग इस बात का एक उदाहरण है कि चीनी भुगतान नेटवर्क क्षेत्रीय साझेदारों के साथ तालमेल स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
इंडोनेशिया के लिए यह कदम उसे डिजिटल भुगतान के नवाचारक और क्षेत्रीय वित्तीय एकीकरण के अहम भागीदार के रूप में स्थापित करता है। राष्ट्रपति जोको विडोडो ने सीमा-पार भुगतान पहल को वैश्विक डिजिटल दुनिया में पहला कदम बताया है। इसका लक्ष्य भारत, दक्षिण कोरिया और सऊदी अरब समेत और देशों तक इस प्रणाली का विस्तार करना है।
जमीनी असर: यात्रियों और कारोबारियों के अनुभव
सीमा-पार क्यूआर भुगतान के फायदे यात्रियों और कारोबारियों को पहले से महसूस होने लगे हैं। उदाहरण के लिए, जकार्ता आए एक मलेशियाई पर्यटक ने बताया कि नकदी खत्म होने के बावजूद वह अपने ई-वॉलेट से एक सुविधा स्टोर में भुगतान कर सका। जैसे-जैसे अधिक कारोबारी और उपभोक्ता डिजिटल भुगतान अपना रहे हैं, ऐसे अनुभव आम होते जा रहे हैं।
इंडोनेशियाई टूर लीडरों का कहना है कि विस्तारित क्यूआर भुगतान प्रणाली से चीन यात्रा करने वाले ग्राहकों के भुगतान आसान होंगे। उन्हें भुगतान के कई विकल्पों को संभालने या अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड स्वीकार न किए जाने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। चीन के बड़े शहरों से बाहर अक्सर अंतरराष्ट्रीय कार्ड स्वीकार नहीं किए जाते, इसलिए क्यूआर भुगतान एक जरूरी विकल्प बन जाता है।
इंडोनेशियाई MSMEs के लिए विदेशी पर्यटकों के पसंदीदा ऐप से भुगतान स्वीकार कर पाना नए आय-स्रोत खोलता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बाधाएं घटाता है। भाग लेने वाले कारोबारियों का नेटवर्क बढ़ने के साथ आने-जाने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा और सुरक्षा मिलेगी।
सीमा-पार क्यूआर भुगतान का अगला कदम क्या है?
इंडोनेशिया-चीन क्यूआर भुगतान परीक्षण के बाद पूरी प्रणाली शुरू होने की उम्मीद है, जिससे लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध सीमा-पार भुगतान संभव होगा। बैंक इंडोनेशिया आगे विस्तार की योजना बना रहा है और भारत तथा दक्षिण कोरिया में तकनीकी परीक्षण शुरू होने वाले हैं। रुझान साफ है: एशिया और उससे आगे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के लिए क्यूआर कोड भुगतान नया सामान्य तरीका बन रहा है।
जैसे-जैसे और देश इस नेटवर्क से जुड़ेंगे और नियामकीय ढांचे विकसित होंगे, पूरे एशिया में एक एकीकृत, परस्पर-संगत डिजिटल भुगतान तंत्र का सपना साकार होता दिख रहा है। इससे उपभोक्ताओं और कारोबारियों को लाभ होगा और तेजी से अनिश्चित होते वैश्विक माहौल में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण तथा मजबूती भी बढ़ेगी।
संक्षेप में
- इंडोनेशिया और चीन ने अपनी क्यूआर कोड भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के लिए परीक्षण शुरू किया है, जिसका लक्ष्य निर्बाध सीमा-पार लेन-देन है।
- इस पहल से दोनों देशों में व्यापार, पर्यटन और छोटे कारोबारों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- इंडोनेशिया की प्रमुख डिजिटल भुगतान प्रणाली QRIS पहले ही मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और जापान से जुड़ चुकी है। आगे और विस्तार की योजना है।
- सीमा-पार क्यूआर भुगतान सुविधा, कम शुल्क और वित्तीय समावेशन उपलब्ध कराते हैं, खासकर यात्रियों और MSMEs के लिए।
- डिजिटल भुगतान एकीकरण के लिए आसियान की पहल क्षेत्रीय आर्थिक संबंधों को नया रूप दे रही है और बाहरी मुद्राओं पर निर्भरता घटा रही है।
- तकनीकी, नियामकीय और जागरूकता संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन उन्हें दूर करने के लिए सहयोग जारी है।
- यह साझेदारी बहुध्रुवीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव का संकेत है, जिसमें भुगतान नवाचार में एशिया अग्रणी भूमिका निभा रहा है।






