चीन में युवा नौकरी करने का दिखावा करने के लिए पैसे दे रहे हैं: बेरोज़गारी बढ़ने के बीच ‘फर्जी दफ्तरों’ का चलन

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चीन में युवा नौकरी करने का दिखावा करने के लिए पैसे दे रहे हैं: बेरोज़गारी बढ़ने के बीच ‘फर्जी दफ्तरों’ का चलन

चीन में युवाओं की बेरोज़गारी के संकट का अनोखा समाधान

चीन के शहरों में एक अजीबोगरीब नया उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है: युवा नौकरी करने का दिखावा करने के लिए पैसे दे रहे हैं। रोज़ाना 30 से 50 युआन (लगभग 4–7 डॉलर) देकर बेरोज़गार युवा नकली दफ्तर में एक डेस्क किराये पर ले सकते हैं। यहां वाई-फाई, कॉफी, नाश्ते और यहां तक कि नकली सुपरवाइजरों के साथ बनावटी बातचीत की भी सुविधा है। ‘काम करने का दिखावा’ कराने वाली ये कंपनियां शेनझेन, शंघाई, चेंगदू, हांगझोउ और बीजिंग जैसे बड़े शहरों में खुली हैं। इनमें सह-कार्यस्थल, मनोवैज्ञानिक सहारे और सामाजिक प्रयोग का अनोखा मेल मिलता है। चीनी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह चलन देश में युवाओं की लंबे समय से बनी बेरोज़गारी की समस्या और उत्पादक दिखने के भारी सामाजिक दबाव की सीधी प्रतिक्रिया है।

विषय-सूची
  1. चीन में युवाओं की बेरोज़गारी के संकट का अनोखा समाधान
  2. ‘काम करने का दिखावा’ कराने वाला उद्योग कैसे काम करता है
  3. चीन के युवा काम करने का दिखावा करने के लिए पैसे क्यों दे रहे हैं?
  4. दफ्तरों से आगे: पुस्तकालय, कैफे और अध्ययन कक्ष
  5. दिखावे का कारोबार: इन दफ्तरों को कौन चलाता है?
  6. लचीले रोजगार वाले पेशेवर: एक नया नाम
  7. सामाजिक और मनोवैज्ञानिक असर: दबाव और कलंक से जूझना
  8. सामाजिक बहस: मुश्किलों से निपटने का रचनात्मक तरीका या अपरिहार्य को टालना?
  9. सरकार की प्रतिक्रिया और युवा रोजगार का भविष्य
  10. संक्षेप में

‘काम करने का दिखावा’ कराने वाला उद्योग कैसे काम करता है

पहली नज़र में ये दफ्तर किसी भी आधुनिक कार्यस्थल जैसे दिखते हैं: कतार में लगी मेजें, तेज़ इंटरनेट, बैठक कक्ष और कॉफी व नाश्ते की लगातार उपलब्धता। लेकिन इसमें एक पेंच है—यहां मौजूद अधिकतर लोग किसी कंपनी में नौकरी नहीं करते। इसके बजाय, वे सुबह 9 से शाम 5 बजे तक के आम कार्यदिवस का आभास पैदा करने के लिए पैसे देते हैं। कुछ जगहों पर नकली काम, बनावटी ईमेल और मैनेजर या बागी कर्मचारी की भूमिका निभाने का विकल्प भी मिलता है। अतिरिक्त शुल्क देकर ग्राहक किसी ‘बॉस’ के साथ नकली बहस में भी हिस्सा ले सकते हैं, जिससे माहौल और असली लगता है।

कई लोगों के लिए इसका आकर्षण सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं है। खाने-पीने के कारोबार के 30 वर्षीय पूर्व मालिक शुई झोउ, डोंगगुआन के एक नकली दफ्तर में जाने के लिए रोज़ 30 युआन देते हैं। उनका कहना है कि वहां का माहौल उन्हें अनुशासित रहने में मदद करता है और जरूरी सामाजिक मेलजोल भी देता है। झोउ बताते हैं, “ऐसा लगता है जैसे हम एक समूह के रूप में साथ काम कर रहे हों।” उनका कहना है कि कारोबार बंद होने के बाद से इस दिनचर्या और साथियों के बीच रहने से उनका मूड और प्रेरणा बेहतर हुई है।

ये दफ्तर सिर्फ दिखावे के लिए नहीं हैं। वहां आने वाले लोग नौकरी तलाशने, नए कारोबार के विचारों पर काम करने या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं। हाल में स्नातक हुई श्याओवेन तांग जैसे कुछ लोग विश्वविद्यालय की इंटर्नशिप की शर्त पूरी करने के लिए इन जगहों पर समय बिताते हैं और नौकरी का सबूत देने के लिए अपने ‘कार्यस्थल’ की तस्वीरें भेजते हैं। कुछ लोग बस परिवार और पड़ोसियों की निगाहों से बचना चाहते हैं, जो वरना उनसे नौकरी न होने पर सवाल कर सकते हैं।

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चीन के युवा काम करने का दिखावा करने के लिए पैसे क्यों दे रहे हैं?

नकली दफ्तरों का उभार आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारणों के जटिल मेल से जुड़ा है। हाल के वर्षों में चीन में युवाओं की बेरोज़गारी दर 14% से 21% के बीच रही है; यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसकी गणना कैसे की जाती है। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2024 में 16 से 24 वर्ष के उन लोगों में बेरोज़गारी दर 17.6% थी जो छात्र नहीं थे, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि असली आंकड़ा इससे अधिक है। आर्थिक मंदी, कोविड-19 महामारी के लंबे असर और विश्वविद्यालयी शिक्षा तथा उपलब्ध नौकरियों के बीच तालमेल की कमी से रोजगार बाजार को गहरी चोट पहुंची है।

चीनी समाज में नौकरी का दर्जा व्यक्तिगत पहचान और परिवार के सम्मान से गहराई से जुड़ा है। सफल दिखने का दबाव बहुत अधिक है, खासकर उन युवाओं पर जिन्होंने उच्च शिक्षा में कई साल लगाए हैं। बेरोज़गारी को अक्सर शर्मिंदगी का कारण माना जाता है, इसलिए कुछ लोग अपनी स्थिति छिपाने के लिए काफी हद तक जाते हैं। काम करने का दिखावा करने वाले एक दफ्तर के उपयोगकर्ता ने NewsBytes से कहा, “मैं कार्यस्थल नहीं, बल्कि बेकार इंसान न होने का सम्मान बेच रहा हूं।”

सोशल मीडिया ने इस चलन को और बढ़ाया है। शियाओहोंगशू (इंस्टाग्राम का चीनी समकक्ष) और डोयिन (चीन का टिकटॉक) जैसे मंचों पर #IPretendedToGoToWorkToday जैसे हैशटैग को लाखों बार देखा जा चुका है। वीडियो में युवा नकली दफ्तरों में अपनी रोज़मर्रा की दिनचर्या दिखाते हैं; कभी-कभी पहचान से बचने के लिए वे चेहरा छिपा लेते हैं। इस घटना ने ऑनलाइन बहस छेड़ दी है। कुछ लोग चीन के युवाओं की रचनात्मकता और मुश्किलों से जूझने की क्षमता की सराहना करते हैं, जबकि दूसरों को चिंता है कि इससे असली नौकरी तलाशने में देरी हो सकती है।

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दफ्तरों से आगे: पुस्तकालय, कैफे और अध्ययन कक्ष

दिनचर्या और ढांचे को बनाए रखने की चाह केवल नकली दफ्तरों तक सीमित नहीं है। चीन में कई बेरोज़गार युवा पुस्तकालयों, इंटरनेट कैफे और किराये पर मिलने वाले अध्ययन कक्षों में भी जाते हैं। ये जगहें सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने, नौकरियों के लिए आवेदन देने या परिवार की चौकस निगाहों से दूर रहने के लिए शांत माहौल देती हैं। अध्ययन कक्ष में डेस्क घंटे, दिन या महीने के हिसाब से किराये पर मिल सकती है और बेरोज़गारी दर बढ़ने के साथ इनकी मांग भी तेजी से बढ़ी है।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति और जटिल है। 40 साल तक के लोगों का अपने माता-पिता के साथ रहना आम बात है। कभी-कभी परिवार की पेंशन या छोटे पैमाने की खेती से उनका गुज़ारा होता है। लेकिन विकास के लिए कृषि भूमि का इस्तेमाल बदलने से कई परिवार आजीविका के साधन खो देते हैं और रोजगार तलाशना और भी जरूरी हो जाता है।

दिखावे का कारोबार: इन दफ्तरों को कौन चलाता है?

काम करने का दिखावा कराने वाला उद्योग अपने ग्राहकों की तरह ही विविध है। कुछ व्यवसाय औपचारिक सह-कार्यस्थलों के रूप में चलते हैं, जबकि कुछ अनौपचारिक कारोबार हैं जिन्हें वीचैट जैसे ऐप के जरिए चलाया जाता है। डोंगगुआन के 30 वर्षीय उद्यमी फेइयू ने महामारी के दौरान खुद बेरोज़गारी का अनुभव करने के बाद अपनी “काम करने का दिखावा कंपनी” शुरू की। अब वह ऐसे युवाओं को कार्यस्थल किराये पर देते हैं जिन्हें दिनचर्या और सम्मान की तलाश है। फेइयू कहते हैं, “मैं इसे एक सामाजिक प्रयोग मानता हूं।” हालांकि, उन्हें यकीन नहीं कि लंबे समय में यह कारोबार मुनाफे में रहेगा या नहीं।

ज्यादातर ग्राहक हाल में स्नातक हुए युवा, फ्रीलांसर या डिजिटल नोमैड हैं और उनकी औसत उम्र करीब 30 साल है। कुछ लोग इस जगह का इस्तेमाल संपर्क बनाने, अपना बायोडाटा अपडेट करने या नए कौशल सीखने के लिए करते हैं—खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में, जिन्हें बेहतर रोजगार की संभावनाओं का रास्ता माना जाता है। वहीं, कुछ लोग बस बेरोज़गारी के कलंक से दूर ऐसी जगह चाहते हैं जहां वे सामान्य महसूस कर सकें।

कुछ लोगों के लिए नकली दफ्तर आगे बढ़ने की एक सीढ़ी है। वेलिंगटन की विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. क्रिश्चियन याओ बताते हैं, “काम का दिखावा कराने वाली कंपनियां संक्रमण के दौर के समाधानों में से एक हैं। आर्थिक बदलाव और शिक्षा तथा रोजगार बाजार के बीच तालमेल की कमी के कारण युवाओं को अपने अगले कदमों के बारे में सोचने या इस बीच छोटे-मोटे काम करने के लिए ऐसी जगहों की जरूरत है।”

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लचीले रोजगार वाले पेशेवर: एक नया नाम

आधिकारिक तौर पर, इन युवाओं में से कई को “लचीले रोजगार वाले पेशेवर” कहा जाता है। यह नौकरशाही शब्द पारंपरिक रोजगार से अलग कई तरह की व्यवस्थाओं को समेटता है, जिनमें गिग अर्थव्यवस्था की नौकरियों से लेकर फ्रीलांस परियोजनाएं तक शामिल हैं। इससे लोगों और कंपनियों को रोजगार का आभास बनाए रखते हुए चीन के कड़े श्रम नियमों के बीच रास्ता निकालने में मदद मिलती है। विश्वविद्यालयों के लिए यह उन छात्रों को छूट देने का तरीका है जिन्हें स्नातक होने के लिए इंटर्नशिप या कार्य अनुभव का सबूत देना पड़ता है।

हालांकि, हर कोई इसे टिकाऊ समाधान नहीं मानता। मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंथ्रोपोलॉजी के निदेशक डॉ. बियाओ शियांग इस चलन को गहरी हताशा और बेबसी का लक्षण मानते हैं। वे कहते हैं, “काम करने का दिखावा एक ऐसा खोल है जिसे युवा अपने लिए तलाशते हैं। इससे वे मुख्यधारा के समाज से थोड़ी दूरी बना पाते हैं और अपने लिए थोड़ी जगह बना लेते हैं।”

सामाजिक और मनोवैज्ञानिक असर: दबाव और कलंक से जूझना

चीन में बेरोज़गारी का मनोवैज्ञानिक असर काफी गंभीर है। उत्पादकता और माता-पिता के प्रति कर्तव्य को महत्व देने वाली संस्कृति में बेरोज़गार होना चिंता, अवसाद और नाकामी की भावना पैदा कर सकता है। कई युवा अपनी स्थिति को लेकर शर्मिंदगी महसूस करते हैं, खासकर जब वे घर पर रहते हों या माता-पिता पर निर्भर हों। नकली दफ्तर उन्हें दिनचर्या फिर से बनाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों से जुड़ने का तरीका देते हैं।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इन जगहों से मानसिक स्वास्थ्य को वास्तविक लाभ मिलता है। कामकाजी दिन का ढांचा, भले ही कृत्रिम हो, बेरोज़गारी के साथ अक्सर आने वाली दिशाहीनता और अकेलेपन से निपटने में मदद कर सकता है। एक प्रतिभागी ने Radii से कहा, “इससे मेरे मानसिक स्वास्थ्य को मदद मिलती है। मैं अधिक सामान्य और कम चिंतित महसूस करता हूं।”

फिर भी, इसके कुछ जोखिम भी हैं। रोजगार पाने की हताशा ने कुछ युवाओं को धोखाधड़ी का आसान निशाना बना दिया है। ठगी की ऐसी योजनाएं सामने आई हैं जो मोटी फीस के बदले नकली नौकरियों या इंटर्नशिप का वादा करती हैं। कुछ मामलों में, पीड़ितों को शोषणकारी अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने या गैर-जरूरी प्रक्रियाएं कराने के लिए बहकाया गया है। चीनी सरकार ने नौकरी तलाशने वालों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है और रोजगार संबंधी धोखाधड़ी पर कार्रवाई करने का वादा किया है।

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सामाजिक बहस: मुश्किलों से निपटने का रचनात्मक तरीका या अपरिहार्य को टालना?

काम करने का दिखावा कराने वाले दफ्तरों के उभार ने विद्वानों, नीति-निर्माताओं और आम लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे व्यवस्थागत चुनौतियों से निपटने का रचनात्मक और कुशल तरीका मानते हैं, जिससे मुश्किल समय में युवा अपना सम्मान और उम्मीद बनाए रख सकते हैं। दूसरों को चिंता है कि इससे लोग बचने की प्रवृत्ति अपना सकते हैं या असली रोजगार की तलाश टाल सकते हैं। वुहान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में सामाजिक कार्य के प्रोफेसर झांग योंग का मानना है कि यह घटना अपेक्षाकृत सीमित है, लेकिन वे युवाओं पर पड़ रहे भारी दबाव को स्वीकार करते हैं। उनकी सलाह है, “युवाओं को अपनी स्थिति का ईमानदारी से आकलन करना चाहिए, रोजगार बाजार के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए और करियर के विकल्पों को लेकर स्वस्थ सोच विकसित करने के लिए अपने परिवारों से खुलकर बात करनी चाहिए।”

फिलहाल, इस चलन के धीमा पड़ने के संकेत नहीं हैं। जब तक रोजगार बाजार तंग रहेगा और सामाजिक अपेक्षाएं ऊंची रहेंगी, चीन के युवा मुश्किलों से निपटने, दूसरों से जुड़ने और जीवन में उद्देश्य तलाशने के रचनात्मक तरीके खोजते रहेंगे—भले ही इसके लिए उन्हें काम करने का दिखावा करने के पैसे देने पड़ें।

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सरकार की प्रतिक्रिया और युवा रोजगार का भविष्य

चीनी सरकार ने युवाओं की बेरोज़गारी की समस्या को स्वीकार किया है और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार को नीतिगत प्राथमिकता बनाया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिक नौकरियां पैदा करने और युवा उद्यमियों को समर्थन देने का आह्वान किया है, लेकिन ठोस समाधान सामने आने में देर हुई है। आलोचकों का तर्क है कि मौजूदा आर्थिक नीतियां, जो अक्सर निजी कारोबार के बजाय सरकारी कंपनियों को तरजीह देती हैं, रोजगार वृद्धि और नवाचार को बाधित कर रही हैं।

सरकार के कुछ कार्यक्रम उद्यमिता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और लचीली कार्य व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखते हैं। हालांकि, इन उपायों की प्रभावशीलता अब भी अनिश्चित है, खासकर ऐसे समय में जब काम का दिखावा कराने वाले दफ्तर जैसे असामान्य समाधान लोकप्रिय हो रहे हैं। नीतियों और अर्थव्यवस्था में बड़े बदलावों के बिना, कई विशेषज्ञों को डर है कि चीन के युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं निराशाजनक बनी रहेंगी।

इस बीच, नकली दफ्तरों का चलन लगातार बदल रहा है। कुछ कारोबार कौशल विकसित करने की कार्यशालाओं, संपर्क बनाने के कार्यक्रमों और यहां तक कि नौकरी तलाशने वालों के लिए साथी ढूंढ़ने जैसी नई सेवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। कुछ अन्य इसे एक अस्थायी दौर मानते हैं—जब तक अर्थव्यवस्था में सुधार न हो और पारंपरिक रोजगार के अधिक अवसर फिर से न लौटें, तब तक का एक कामचलाऊ उपाय।

संक्षेप में

  • चीन में युवाओं की बेरोज़गारी के संकट से एक अनोखा उद्योग उभरा है, जहां युवा नकली दफ्तरों में नौकरी करने का दिखावा करने के लिए पैसे देते हैं।
  • ये दफ्तर दिनचर्या और सामाजिक मेलजोल देते हैं तथा उत्पादक दिखने के भारी सामाजिक दबाव के बीच सम्मान बनाए रखने का तरीका मुहैया कराते हैं।
  • इस चलन को ऊंची बेरोज़गारी दर, शिक्षा और रोजगार बाजार के बीच तालमेल की कमी तथा चीनी संस्कृति में बेरोज़गारी से जुड़े कलंक से बढ़ावा मिलता है।
  • सोशल मीडिया ने इस घटना को और फैलाया है तथा इसके मनोवैज्ञानिक लाभों और संभावित नुकसानों पर बहस छेड़ी है।
  • कुछ लोग नकली दफ्तरों को मुश्किलों से निपटने का रचनात्मक तरीका मानते हैं, जबकि दूसरों को चिंता है कि इससे असली नौकरी तलाशने में देरी हो सकती है।
  • चीनी सरकार ने समस्या को स्वीकार किया है, लेकिन अब तक प्रभावी समाधान नहीं दिए हैं। ऐसे में कई युवा उम्मीद और उद्देश्य की तलाश असामान्य तरीकों से कर रहे हैं।
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