गो केंग स्वी: सिंगापुर के राज्य-संबद्ध उद्यमों और आर्थिक चमत्कार के दूरदर्शी शिल्पकार

पढ़ने में 10 मिनट
गो केंग स्वी: सिंगापुर के राज्य-संबद्ध उद्यमों और आर्थिक चमत्कार के दूरदर्शी शिल्पकार

गो केंग स्वी: सिंगापुर के राज्य-संबद्ध उद्यमों और आर्थिक चमत्कार के दूरदर्शी शिल्पकार

आधुनिक इतिहास में बहुत कम लोगों ने किसी राष्ट्र की नियति को उतनी गहराई से आकार दिया है, जितना डॉ. गो केंग स्वी ने सिंगापुर के लिए किया। इस नगर-राज्य के पहले वित्त मंत्री और आर्थिक शिल्पकार के रूप में व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले गो की विरासत राजकोषीय नीति से कहीं आगे तक जाती है। वे सिंगापुर के विशिष्ट राज्य-संबद्ध उद्यमों के नेटवर्क के सूत्रधार थे—इस व्यवस्था ने संसाधनों से वंचित, असुरक्षित द्वीप को दुनिया की सबसे समृद्ध और संकटों से उबरने में सक्षम अर्थव्यवस्थाओं में बदल दिया। इस लेख में गो के विचारों, सिंगापुर के विशाल सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों की स्थापना और प्रबंधन तथा सिंगापुर और दुनिया पर उनकी दूरदर्शिता के स्थायी प्रभाव की पड़ताल की गई है।

विषय-सूची
  1. गो केंग स्वी: सिंगापुर के राज्य-संबद्ध उद्यमों और आर्थिक चमत्कार के दूरदर्शी शिल्पकार
  2. सिंगापुर को राज्य-संबद्ध उद्यमों की जरूरत क्यों पड़ी?
  3. संकट का जवाब: राज्य उद्यमों की शुरुआत
  4. गो के सिद्धांत: उद्देश्यपूर्ण मुनाफा
  5. बुनियाद खड़ी करना: टेमासेक, जीआईसी और अन्य
  6. राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूती में राज्य उद्यमों की भूमिका
  7. मॉडल का प्रसार: अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और अनुकूलन
  8. सिंगापुर का मॉडल किस वजह से अनूठा है?
  9. गो केंग स्वी की व्यापक विरासत: शिक्षा, रक्षा और संस्कृति
  10. सफलता का आकलन: गरीबी से समृद्धि तक
  11. चुनौतियां और आगे की राह
  12. संक्षेप में

सिंगापुर को राज्य-संबद्ध उद्यमों की जरूरत क्यों पड़ी?

1960 के दशक में सिंगापुर के सामने अस्तित्व का संकट था। 1967 में ब्रिटेन की अचानक वापसी का मतलब था हजारों नौकरियों और देश के सकल घरेलू उत्पाद के एक बड़े हिस्से का नुकसान। प्राकृतिक संसाधनों से रहित छोटे से द्वीप और नवोदित निजी क्षेत्र के लिए सिंगापुर का अस्तित्व साहसिक, लीक से हटकर समाधान खोजने पर निर्भर था। विकास अर्थशास्त्री के रूप में प्रशिक्षित गो केंग स्वी ने समझा कि सरकार को हस्तक्षेप करना होगा—अर्थव्यवस्था पर हावी होने के लिए नहीं, बल्कि उसके विकास को गति देने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।

गो का दृष्टिकोण अपने आप में राज्य का नियंत्रण स्थापित करने के बारे में नहीं था। इसके बजाय, वे कारोबार को एक साधन मानते थे: रोजगार सृजन, नवाचार को बढ़ावा और सिंगापुर की नाजुक स्वतंत्रता का संरक्षण। वे बाजार के “अदृश्य हाथ” के बारे में एडम स्मिथ के विचार से प्रभावित थे, लेकिन उनका मानना था कि अति से बचने और जनहित साधने के लिए पूंजीवाद को विवेकपूर्ण मार्गदर्शन की जरूरत है। उनके शिष्य फिलिप यो ने कहा था,

वह कंपनी को कुशलतापूर्वक और सही तरीके से चलाता है, पैसा उधार लेता है और लोगों को काम पर रखता है। वह किसी कारोबारी से अलग नहीं है। लेकिन मुख्य अंतर यह है कि डॉ. गो राज्य-पूंजीवादी हैं। कारोबारी अपने लिए मुनाफा कमाता है; डॉ. गो ने यह जनहित के लिए किया।

संकट का जवाब: राज्य उद्यमों की शुरुआत

ब्रिटिश सेना की वापसी से सिंगापुर की अर्थव्यवस्था में एक बड़ी रिक्तता पैदा हो गई। गो ने वित्त, समुद्री कारोबार, खुदरा व्यापार, रक्षा, बीमा और परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में दर्जनों नई कंपनियां खड़ी करके इसका जवाब दिया। इन उद्यमों का मकसद सरकार के स्थायी अंग बनना नहीं था, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को गति देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और सिंगापुरवासियों को सार्थक रोजगार देना था। आज इन कारोबारों का मूल्य करीब 200 अरब डॉलर आंका जाता है, जो उनकी स्थायी सफलता का प्रमाण है।

गो के सिद्धांत: उद्देश्यपूर्ण मुनाफा

राज्य उद्यमों के प्रति गो केंग स्वी का दृष्टिकोण दो मूल सिद्धांतों पर आधारित था: वित्तीय स्थिरता और प्रतिभा। उनका जोर था कि सरकारी कंपनियां कुशल, लाभदायक और आत्मनिर्भर हों। कोई विशेष रियायत, सब्सिडी या बेलआउट नहीं दिया जाना था। यदि कोई राज्य उद्यम अच्छा प्रदर्शन नहीं करता, तो उसे दिवालिया होने दिया जाता। इस अनुशासन ने सिंगापुर को उन कई देशों से अलग पहचान दी, जहां सरकारी कंपनियां विशाल और अकुशल हो गईं तथा सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ बन गईं।

गो का यह विश्वास भी उतना ही अहम था कि सबसे प्रतिभाशाली लोगों को नियुक्त किया जाए। सरकारी अधिकारियों ने इन कंपनियों की स्थापना में मदद की, लेकिन गो का तर्क था कि उन्हें पेशेवर चलाएं, न कि राजनेता या नौकरशाह। उन्होंने शुरुआती दौर का नेतृत्व करने के लिए शीर्ष सरकारी अधिकारियों को चुना, लेकिन जल्द ही कंपनियों की कमान पेशेवर प्रबंधकों को सौंप दी और उन्हें कामकाज की स्वायत्तता दी। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने बाद में याद करते हुए कहा,

डॉ. गो ने कई देशों में होने वाली उस आम गलती के बारे में चेताया था, जहां राजनेता और सरकारी अधिकारी सोचते हैं कि वे उद्यमशीलता से जुड़े कामों में भी उत्कृष्टता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने इसे ‘दुखद भ्रम’ कहा—दुखद इसलिए कि सभी सरकारी उद्यमों की शुरुआत नेक इरादों के साथ होती है। लेकिन फिर, समय के साथ वे व्यावसायिक और बाजार के अनुशासन को भूल जाते हैं और विशाल, अकुशल तथा फिजूलखर्च बन जाते हैं।

गो की नेतृत्व शैली ने लोगों को पहल करने और नवाचार के लिए सशक्त बनाया। वे अपने प्रबंधकों का साथ देते थे, भले ही उनसे गलतियां हुई हों, बशर्ते उनके कदम जनहित में उठाए गए हों। जवाबदेही और स्वायत्तता की यह संस्कृति सिंगापुर की राज्य-संबद्ध कंपनियों की पहचान बन गई।

विज्ञापन

बुनियाद खड़ी करना: टेमासेक, जीआईसी और अन्य

सरकार से जुड़ी कंपनियों (जीएलसी) के बढ़ते पोर्टफोलियो का प्रबंधन करने के लिए सिंगापुर ने 1974 में टेमासेक होल्डिंग्स की स्थापना की। टेमासेक को सरकार से स्वतंत्र दूरी पर काम करने के लिए बनाया गया था और उसे सख्त व्यावसायिक सिद्धांतों के तहत संपत्तियों के प्रबंधन का स्पष्ट दायित्व दिया गया। सरकार रोजमर्रा के कामकाज में दखल नहीं देगी और कंपनियां राज्य से विशेष रियायतें नहीं मांगेंगी। भूमिकाओं के इस बंटवारे से जीएलसी राजनीतिक उद्देश्यों के बजाय दक्षता और मुनाफे पर ध्यान केंद्रित कर सकीं।

1981 में गो ने सिंगापुर सरकार निवेश निगम (जीआईसी) बनाने का प्रस्ताव दिया। इसके साथ ही उन्होंने ऐसी अर्थव्यवस्था के लिए संप्रभु संपत्ति कोष की अवधारणा को आगे बढ़ाया, जो जिंसों पर आधारित नहीं थी। जीआईसी को सिंगापुर के विदेशी मुद्रा भंडार का दुनिया भर में विविधीकृत पोर्टफोलियो में निवेश करके दीर्घकालिक प्रतिफल हासिल करने का जिम्मा दिया गया। यह कदम प्राकृतिक संसाधनों से रहित छोटी और खुली अर्थव्यवस्था के रूप में सिंगापुर की कमजोरियों को देखते हुए उठाया गया था। पर्याप्त भंडार जुटाकर और समझदारी से निवेश करके सिंगापुर ने संकटों से बचाव का एक आधार और आने वाली पीढ़ियों के लिए आय का स्थिर स्रोत बनाया।

राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूती में राज्य उद्यमों की भूमिका

गो की दूरदृष्टि अर्थव्यवस्था से आगे तक जाती थी। वे राज्य उद्यमों को सिंगापुर की सुरक्षा और संकटों से उबरने की क्षमता के लिए अहम मानते थे। उदाहरण के लिए, ब्रिटिश वापसी के बाद सैन्य गोदीघरों को वाणिज्यिक जहाज निर्माण केंद्रों और इंजीनियरिंग कंपनियों में बदलने से न केवल नौकरियां बचीं, बल्कि देश के लिए महत्वपूर्ण क्षमताएं भी विकसित हुईं। सिंगापुर टेक्नोलॉजीज इंजीनियरिंग (एसटी इंजीनियरिंग) जैसी कंपनियां एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में क्षेत्रीय और वैश्विक कंपनियों के रूप में उभरीं और सैन्य तथा वाणिज्यिक, दोनों क्षेत्रों को सहयोग दिया।

कोविड-19 महामारी जैसे संकटों के दौरान टेमासेक और उसके पोर्टफोलियो की कंपनियों ने आपूर्ति शृंखलाएं बनाए रखने, सामुदायिक देखभाल केंद्र स्थापित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों को समर्थन देने में अहम भूमिका निभाई। तेजी और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने की उनकी क्षमता गो और उनकी टीम द्वारा रखी गई मजबूत नींव का सीधा नतीजा थी।

विज्ञापन

मॉडल का प्रसार: अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और अनुकूलन

सिंगापुर के राज्य उद्यम मॉडल ने दुनिया का ध्यान खींचा है। चीन, श्रीलंका और अन्य देशों के नीति-निर्माताओं ने राज्य की संपत्तियों का कुशल प्रबंधन करने के उदाहरण के रूप में टेमासेक और जीआईसी का अध्ययन किया है। हालांकि, अकादमिक विश्लेषणों के अनुसार, सिंगापुर के मॉडल की सफलता उसकी विशिष्ट ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, राजनीतिक संस्कृति और आकार में निहित है। दूसरे देशों में इसे दोहराने के प्रयासों के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। अक्सर शासन व्यवस्था, राज्य क्षेत्र के आकार और राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका में अंतर इसकी वजह रहे हैं।

उदाहरण के लिए, चीन ने कॉरपोरेट गवर्नेंस के मामले में टेमासेक के दृष्टिकोण से संवाद किया, लेकिन अंततः अपने सरकारी उद्यमों के लिए अलग संस्थागत ढांचा अपनाया। श्रीलंका शासन में सुधार और राजकोषीय जोखिम घटाने के लिए फिलहाल टेमासेक की तर्ज पर होल्डिंग कंपनी बनाने की योजना बना रहा है, लेकिन उसे अस्थिर मंत्रालयों और मौद्रिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

सिंगापुर का मॉडल किस वजह से अनूठा है?

कई कारक सिंगापुर के दृष्टिकोण को अलग पहचान देते हैं:

  • भूमिकाओं का स्पष्ट बंटवारा: सरकार नीतियां तय करती है, जबकि पेशेवर प्रबंधक कंपनियां चलाते हैं।
  • सख्त व्यावसायिक अनुशासन: राज्य उद्यमों के लिए कोई सब्सिडी या विशेष रियायत नहीं।
  • प्रतिभा पर जोर: राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना बेहतरीन लोगों को नियुक्त करना और उन्हें अधिकार देना।
  • दीर्घकालिक दृष्टिकोण: अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के बजाय आने वाली पीढ़ियों के लिए निवेश।
  • मजबूती और अनुकूलन क्षमता: संकटों का जवाब देने और नए अवसरों का लाभ उठाने की क्षमता।
विज्ञापन

गो केंग स्वी की व्यापक विरासत: शिक्षा, रक्षा और संस्कृति

गो को भले ही उनकी आर्थिक उपलब्धियों के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता हो, लेकिन उनका प्रभाव सिंगापुर के जीवन के हर पहलू तक पहुंचा। आंतरिक और रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय सेवा शुरू की, सैन्य सेवा अनिवार्य की और देश की सुरक्षा मजबूत की। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार किए और यह सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को उनकी योग्यता के अनुसार अलग-अलग धाराओं में बांटने की व्यवस्था तथा पाठ्यक्रम विकास शुरू किया कि सिंगापुरवासी आधुनिक अर्थव्यवस्था की मांगों के लिए तैयार हों।

गो ने जुरोंग बर्ड पार्क, सिंगापुर चिड़ियाघर और सिंगापुर सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा जैसी सांस्कृतिक और मनोरंजक परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया। इन पहलों ने देश के सामाजिक ताने-बाने को समृद्ध किया और सिंगापुर की जीवंत, विश्वनगरीय शहर के रूप में प्रतिष्ठा को मजबूत किया।

सफलता का आकलन: गरीबी से समृद्धि तक

एक गरीब और संघर्षरत द्वीप से दुनिया के सबसे धनी देशों में शामिल होने तक सिंगापुर का बदलाव गो की रणनीतियों की प्रभावशीलता का प्रमाण है। विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, सिंगापुर के नेताओं ने सिर्फ गरीबी मिटाने पर नहीं, बल्कि समृद्धि पैदा करने पर ध्यान दिया। रोजगार पैदा करने और उसे बनाए रखने, निवेश आकर्षित करने तथा नवाचार को बढ़ावा देने के तरीके खोजकर उन्होंने दीर्घकालिक सफलता की नींव रखी। आज सिंगापुर में प्रति व्यक्ति जीडीपी 57,000 डॉलर से अधिक है, लगभग सभी को माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध है और दुनिया भर में उसे विश्वास, ईमानदारी और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है।

विज्ञापन

चुनौतियां और आगे की राह

सिंगापुर का राज्य उद्यम मॉडल आलोचनाओं और चुनौतियों से अछूता नहीं है। प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग और लॉरेंस वोंग, दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि कारोबार में सरकारों के हस्तक्षेप का जोखिम हमेशा बना रहता है। व्यावसायिक अनुशासन और सार्वजनिक जवाबदेही के बीच नाजुक संतुलन बनाए रखना लगातार जारी रहने वाला काम है। वैश्विक माहौल भी बदल रहा है, जहां संरक्षणवाद बढ़ रहा है, आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हो रही हैं और सुरक्षा से जुड़ी नई चिंताएं सामने आ रही हैं।

फिर भी, गो केंग स्वी द्वारा स्थापित आत्मनिर्भरता, खुलापन, अनुकूलन क्षमता और सरकार तथा कारोबार के बीच स्पष्ट अलगाव के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। टेमासेक और जीआईसी के प्रबंधन में सिंगापुर का भंडार संकटों से बचाव का आधार और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का स्रोत बना हुआ है। इन संस्थानों की सफलता उत्कृष्टता, ईमानदारी और दीर्घकालिक सोच के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है।

संक्षेप में

  • डॉ. गो केंग स्वी सिंगापुर की राज्य-संबद्ध उद्यम व्यवस्था के शिल्पकार थे। उन्होंने पूंजीवाद को जनहित के मजबूत उद्देश्य से जोड़ा।
  • अस्तित्व के संकटों का जवाब देते हुए उन्होंने प्रमुख क्षेत्रों में कुशल और आत्मनिर्भर कंपनियां खड़ी कीं तथा व्यावसायिक अनुशासन और पेशेवर प्रबंधन पर जोर दिया।
  • राज्य की संपत्तियों और भंडार का सरकार से स्वतंत्र दूरी पर प्रबंधन करने तथा दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए टेमासेक होल्डिंग्स और जीआईसी की स्थापना की गई।
  • सिंगापुर के मॉडल ने दूसरे देशों को प्रेरित किया है, लेकिन अपने इतिहास, शासन और संस्कृति के कारण यह अब भी अनूठा है।
  • गो की व्यापक विरासत में रक्षा, शिक्षा और संस्कृति के सुधार भी शामिल हैं, जिन्होंने सिंगापुर को समृद्ध और संकटों से उबरने में सक्षम राष्ट्र बनाने में योगदान दिया।
  • बदलती दुनिया में आत्मनिर्भरता, खुलेपन और भूमिकाओं के अलगाव के सिद्धांत सिंगापुर की आर्थिक रणनीति का मार्गदर्शन करते हैं।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है