जापान की आईटी श्रम उत्पादकता में भारी गिरावट: जी7 में सबसे अलग स्थिति
लंबे समय से तकनीकी महाशक्ति माने जाने वाले जापान में आईटी श्रम उत्पादकता में चिंताजनक गिरावट आ रही है। 2019 से 2023 के बीच जापान के आईटी क्षेत्र में श्रम उत्पादकता की गिरावट सात प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह (जी7) में सबसे तेज रही। आईटी कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफे में वृद्धि उस रफ्तार से नहीं हुई, जिससे देश की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और भविष्य की विकास संभावनाओं को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
विषय-सूची
- जापान की आईटी श्रम उत्पादकता में भारी गिरावट: जी7 में सबसे अलग स्थिति
- जापान की उत्पादकता समस्या कितनी गंभीर है?
- आईटी क्षेत्र: कर्मचारी ज्यादा, उत्पादन कम
- जापान क्यों पिछड़ रहा है?
- 1. जरूरत के मुताबिक बनाए गए आईटी सिस्टम और पुरानी कार्यप्रणालियां
- 2. डिजिटल बदलाव की धीमी रफ्तार
- 3. श्रम बाजार की संरचना: आजीवन रोजगार और गैर-नियमित कर्मचारी
- 4. मानव पूंजी और नवाचार में कम निवेश
- 5. जनसांख्यिकीय दबाव और श्रमिकों की कमी
- जी7 के अन्य देशों के मुकाबले जापान
- जापान की अर्थव्यवस्था और समाज पर असर
- 1. आर्थिक वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता
- 2. वेतन में ठहराव और जीवन स्तर
- 3. प्रतिभा और पूंजी का देश से बाहर जाना
- 4. सामाजिक और जनसांख्यिकीय चुनौतियां
- जापान इस रुझान को कैसे पलट सकता है?
- व्यापक असर: वृद्धि और खुशहाली पर नए सिरे से विचार
- संक्षेप में
इस लेख में जापान की उत्पादकता समस्या के पैमाने, इसके मूल कारणों और देश की अर्थव्यवस्था व समाज पर इसके असर की पड़ताल की गई है। साथ ही, जी7 के अन्य देशों के मुकाबले जापान की स्थिति और इस रुझान को पलटने के लिए विशेषज्ञों के सुझाए जरूरी कदमों पर भी नजर डाली गई है।
जापान की उत्पादकता समस्या कितनी गंभीर है?
जापान की श्रम उत्पादकता दशकों से चिंता का विषय रही है, लेकिन हालिया आंकड़े आईटी क्षेत्र में खास तौर पर तेज गिरावट दिखाते हैं। जापान उत्पादकता केंद्र और ओईसीडी के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 से 2023 के बीच जापान की आईटी श्रम उत्पादकता 13% गिर गई। यह जी7 देशों में सबसे बड़ी गिरावट थी और समूह में यह दो अंकों की गिरावट वाला एकमात्र देश था। इसके उलट, इसी अवधि में अमेरिका और ब्रिटेन में आईटी श्रम उत्पादकता बढ़ी।
कुल मिलाकर, 2023 में जापान श्रम उत्पादकता के मामले में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के 38 सदस्य देशों में 29वें स्थान पर था। वहां प्रति घंटे उत्पादकता 56.80 डॉलर रही। यह जापान को जी7 में सबसे नीचे रखता है, जो अमेरिका (97.70 डॉलर प्रति घंटा) से काफी पीछे और ओईसीडी के 65.20 डॉलर प्रति घंटे के औसत से भी कम है। ओईसीडी में शीर्ष स्थान पर रहने वाले आयरलैंड की उत्पादकता 154.90 डॉलर प्रति घंटा है।
अमेरिका के साथ जापान की उत्पादकता का अंतर समय के साथ बढ़ा है। वर्ष 2000 में जापान की उत्पादकता अमेरिका के स्तर की करीब 70% थी, लेकिन हाल के वर्षों में यह घटकर 60% से भी नीचे आ गई है। यह गिरावट केवल आईटी तक सीमित नहीं है; जापान की कुल उत्पादकता कई क्षेत्रों, खासकर सेवा क्षेत्र में, स्थिर रही है या घटी है।
आईटी क्षेत्र: कर्मचारी ज्यादा, उत्पादन कम
कोविड-19 महामारी के दौरान जापानी कंपनियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे डिजिटल साधनों में निवेश किया और आईटी कर्मचारियों की संख्या 20% बढ़ाकर 23.5 लाख कर दी। हालांकि, 2019 से 2023 के बीच इस क्षेत्र का कुल मूल्यवर्धन केवल 5% बढ़ा। तुलना में, इसी अवधि में अमेरिका के आईटी क्षेत्र का मूल्यवर्धन 39% और जर्मनी का 12% बढ़ा।
इसका मतलब है कि आईटी क्षेत्र में अधिक लोग काम कर रहे हैं, लेकिन औसतन हर कर्मचारी पहले से कम मूल्य पैदा कर रहा है। आबादी में गिरावट और श्रम की कमी का सामना कर रहे देश के लिए यह चिंताजनक संकेत है।
जापान क्यों पिछड़ रहा है?
आईटी और व्यापक अर्थव्यवस्था, दोनों में जापान की धीमी उत्पादकता के पीछे कई कारण हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, संरचनात्मक, सांस्कृतिक और तकनीकी चुनौतियों से पार पाना मुश्किल साबित हुआ है।
1. जरूरत के मुताबिक बनाए गए आईटी सिस्टम और पुरानी कार्यप्रणालियां
जापान की जरूरत के मुताबिक तैयार किए गए आईटी सिस्टम पर निर्भरता एक बड़ी समस्या है। मानकीकृत, क्लाउड-आधारित सेवाएं देने वाली अमेरिकी कंपनियों के विपरीत, जापानी कंपनियां अक्सर हर ग्राहक के लिए अलग समाधान विकसित करती हैं। ऐसे सिस्टम को चलाने और रखरखाव के लिए अधिक कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है, जिससे दक्षता और विस्तार की क्षमता घटती है। नतीजतन, डिजिटलीकरण से उत्पादकता में होने वाला सुधार सीमित रहता है।
2. डिजिटल बदलाव की धीमी रफ्तार
उन्नत आईटी समाज बनने की जापान की कोशिशें उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुई हैं। माई नंबर पहचान पत्र जैसी डिजिटल सरकारी सेवाओं का सीमित इस्तेमाल और राइड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म का अभाव देश में डिजिटल बदलाव की धीमी रफ्तार को उजागर करते हैं। कई कारोबार अब भी कागज-आधारित प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं और ऐसे नियामकीय अवरोधों का सामना करते हैं जो नवाचार को रोकते हैं।
3. श्रम बाजार की संरचना: आजीवन रोजगार और गैर-नियमित कर्मचारी
जापान की पारंपरिक आजीवन रोजगार प्रणाली नौकरी की सुरक्षा तो देती है, लेकिन कर्मचारियों की आवाजाही और लचीलेपन को सीमित करती है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए कंपनियों ने गैर-नियमित कर्मचारियों (अंशकालिक, अस्थायी या संविदा कर्मचारी) की भर्ती बढ़ाई है। अब ये कुल कार्यबल का करीब 40% हैं। आम तौर पर इन कर्मचारियों को कम वेतन मिलता है और कौशल विकास के अवसर भी कम मिलते हैं। इससे नई तकनीक में निवेश का प्रोत्साहन घटता है और उत्पादकता दबाव में रहती है।
जापान उत्पादकता केंद्र के शोध की देखरेख करने वाली गाकुशुइन विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मिहो ताकिजावा ने कहा:
जापान की श्रम उत्पादकता कम रहने का मुख्य कारण जापानी कंपनियों का वेतन बढ़ाने जैसे उपायों के जरिए मानव संसाधन में निवेश न करना है। मूल्यवर्धन बढ़ाने के लिए डिजिटल क्षेत्र समेत अमूर्त परिसंपत्तियों में निवेश को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
4. मानव पूंजी और नवाचार में कम निवेश
जानकारों का कहना है कि जापानी कंपनियां कर्मचारियों के प्रशिक्षण, नए कौशल सिखाने और सॉफ्टवेयर तथा बौद्धिक संपदा जैसी अमूर्त परिसंपत्तियों में निवेश करने में धीमी रही हैं। इस कम निवेश से नवाचार को झटका लगता है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी नई तकनीकों को अपनाने की क्षमता सीमित होती है।
5. जनसांख्यिकीय दबाव और श्रमिकों की कमी
जापान की बूढ़ी होती और घटती आबादी को अक्सर श्रमिकों की कमी का कारण बताया जाता है। हालांकि, कामकाजी उम्र की आबादी घटने के बावजूद महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ती भागीदारी के कारण कुल कार्यबल बढ़ा है। फिर भी, उत्पादकता कम होने से जापान को दूसरे देशों जितना उत्पादन करने के लिए अधिक कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है। कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि जापान में श्रमिकों की कमी आंशिक रूप से उत्पादकता की समस्या है: अगर उत्पादकता अमेरिका के स्तर पर होती, तो जापान बहुत कम कर्मचारियों के साथ काम चला सकता था।
जी7 के अन्य देशों के मुकाबले जापान
जापान और जी7 की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच का अंतर साफ नजर आता है। उदाहरण के लिए, श्रम उत्पादकता में अमेरिका जी7 में सबसे आगे है और वहां मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज हुई है। इसकी एक वजह कर्मचारियों की उच्च दक्षता, नवाचार में मजबूत निवेश और गतिशील कारोबारी माहौल है। मॉर्निंग ब्रू के मुताबिक, अमेरिका का औसत कर्मचारी सालाना 171,000 डॉलर की वस्तुएं और सेवाएं पैदा करता है, जबकि जापानी कर्मचारी के लिए यह आंकड़ा 96,000 डॉलर है।
अमेरिकी कंपनियों को आधुनिक मशीनरी, उन्नत सॉफ्टवेयर और ऐसी कारोबारी संस्कृति का लाभ मिलता है जो नौकरी बदलने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करती है। इन कारणों से अमेरिका का तकनीकी क्षेत्र वैश्विक अगुवा बना है, जबकि जापान का आईटी उद्योग अपनी रफ्तार बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है।
जर्मनी और ब्रिटेन जैसे जी7 के अन्य देशों में भी आईटी श्रम उत्पादकता बढ़ी है, हालांकि इसकी रफ्तार अमेरिका से कम रही। ओईसीडी की उत्पादकता रैंकिंग में आयरलैंड के तेजी से शीर्ष पर पहुंचने का श्रेय अनुकूल कर नीतियों और नवाचार पर जोर के चलते आईटी कंपनियों को आकर्षित करने में मिली सफलता को दिया जाता है।
जापान की अर्थव्यवस्था और समाज पर असर
आईटी श्रम उत्पादकता में गिरावट का जापान की अर्थव्यवस्था, समाज और वैश्विक स्थिति पर दूरगामी असर पड़ रहा है।
1. आर्थिक वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता
कम उत्पादकता आर्थिक वृद्धि को सीमित करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की जापान की क्षमता घटाती है। जैसे-जैसे दूसरी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ अंतर बढ़ रहा है, जापान को प्रौद्योगिकी और सेवाओं समेत प्रमुख उद्योगों में और पीछे छूटने का जोखिम है।
2. वेतन में ठहराव और जीवन स्तर
उत्पादकता स्थिर रहने का असर वेतन पर भी पड़ता है। जापान काम के जरूरत से ज्यादा लंबे घंटों को कम करने में सफल रहा है, लेकिन वेतन वृद्धि जी7 के अन्य देशों से पीछे रही है। इससे जीवन स्तर में गिरावट आई है और कर्मचारियों में आर्थिक असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
3. प्रतिभा और पूंजी का देश से बाहर जाना
जापान की लंबी आर्थिक मंदी ने "अर्जेंटीनीकरण" की आशंकाएं बढ़ाई हैं। इस स्थिति में बेहतर अवसरों की तलाश में उच्च गुणवत्ता वाले लोग, सामान और पैसा देश से बाहर जाने लगते हैं। विदेशों में स्थायी रूप से रहने वाले जापानी नागरिकों की संख्या बढ़ रही है और जापानी कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए विदेशों में निवेश बढ़ा रही हैं।
4. सामाजिक और जनसांख्यिकीय चुनौतियां
बूढ़ी होती आबादी और कम जन्म दर के कारण जापान पर आर्थिक सक्रियता बनाए रखने का दबाव बढ़ रहा है। अगर उत्पादकता में सुधार नहीं हुआ, तो देश को अपनी सामाजिक कल्याण प्रणाली बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए उच्च जीवन स्तर सुनिश्चित करने में मुश्किल हो सकती है।
जापान इस रुझान को कैसे पलट सकता है?
विशेषज्ञ और नीति निर्माता इस बात पर सहमत हैं कि जापान की उत्पादकता में गिरावट रोकने के लिए बड़े सुधारों और बदलाव अपनाने की इच्छा की जरूरत होगी। प्रमुख सुझावों में शामिल हैं:
- डिजिटल बदलाव में तेजी: जरूरत के मुताबिक बनाए गए पुराने आईटी सिस्टम से हटकर मानकीकृत, क्लाउड-आधारित समाधानों को अपनाने से दक्षता और विस्तार की क्षमता बढ़ सकती है।
- मानव पूंजी में निवेश: नवाचार और बदलती परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनियों को कर्मचारियों के प्रशिक्षण, नए कौशल सिखाने और वेतन वृद्धि को प्राथमिकता देनी होगी।
- श्रम बाजार की संरचना में सुधार: रोजगार की कठोर प्रथाओं में ढील देने और नियमित व गैर-नियमित कर्मचारियों के बीच आवाजाही को बढ़ावा देने से कौशल को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकता है।
- नवाचार और अमूर्त परिसंपत्तियों को बढ़ावा: डिजिटल युग में उत्पादकता बढ़ाने के लिए शोध, सॉफ्टवेयर और बौद्धिक संपदा में अधिक निवेश जरूरी है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल: जनरेटिव एआई और अन्य उन्नत तकनीकों को अपनाने से उत्पादकता बढ़ सकती है। एनटीटी समूह जैसी जापान की कुछ बड़ी आईटी कंपनियां पहले ही एआई के जरिए दक्षता बढ़ाकर प्रति व्यक्ति कार्य उत्पादकता में 20% वृद्धि का लक्ष्य रख रही हैं।
जापान उत्पादकता केंद्र इस बात पर जोर देता है कि घटती आबादी के कारण श्रमिकों की कमी का सामना कर रहे जापान को तकनीकी नवाचार और नए कौशल सिखाने के जरिए नतीजे हासिल करने में अधिक प्रभावी बनना होगा।
व्यापक असर: वृद्धि और खुशहाली पर नए सिरे से विचार
कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि जापान की चुनौतियां उत्पादकता और जीडीपी रैंकिंग से आगे जाती हैं। ध्यान का केंद्र समग्र खुशहाली होनी चाहिए, जिसमें केवल आर्थिक उत्पादन ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता, सामाजिक बुनियादी ढांचा और पर्यावरणीय टिकाऊपन भी शामिल हों। दासगुप्ता समीक्षा में बताए गए पूंजी दृष्टिकोण के अनुसार, निजी पूंजी, सामाजिक बुनियादी ढांचे, प्राकृतिक पूंजी और मानव पूंजी में निवेश करके खुशहाली बढ़ाई जा सकती है।
जीडीपी और उत्पादकता का ठहराव गंभीर चिंताएं हैं, लेकिन जापान को वृद्धि की ऐसी नई परिकल्पना की जरूरत हो सकती है जो जीवन को अधिक समृद्ध बनाने और समृद्धि के व्यापक पैमानों को प्राथमिकता दे।
संक्षेप में
- 2019 से 2023 के बीच जापान की आईटी श्रम उत्पादकता 13% गिरी, जो जी7 देशों में सबसे बड़ी गिरावट थी।
- आईटी कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बावजूद मुनाफे और मूल्यवर्धन में वृद्धि पीछे रही, जिससे अक्षमताएं उजागर हुईं।
- कुल श्रम उत्पादकता में जापान जी7 देशों में सबसे नीचे और ओईसीडी के 38 देशों में 29वें स्थान पर है।
- प्रमुख कारणों में जरूरत के मुताबिक बनाए गए आईटी सिस्टम पर निर्भरता, डिजिटल बदलाव की धीमी रफ्तार, श्रम बाजार की कठोर संरचना और मानव पूंजी तथा नवाचार में कम निवेश शामिल हैं।
- इसके नतीजों में धीमी आर्थिक वृद्धि, वेतन में ठहराव, प्रतिभाओं का देश से बाहर जाना और जनसांख्यिकीय चुनौतियां शामिल हैं।
- विशेषज्ञ उत्पादकता बढ़ाने के लिए डिजिटल बदलाव में तेजी, मानव पूंजी में निवेश, श्रम बाजार में सुधार और एआई के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।
- जापान को केवल जीडीपी के बजाय समग्र खुशहाली पर ध्यान देते हुए अपने विकास मॉडल पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत हो सकती है।






