जापान और दक्षिण कोरिया में रिकॉर्ड गर्मी की लहर: अभूतपूर्व तापमान से जलवायु संकट के संकेत

पढ़ने में 11 मिनट
जापान और दक्षिण कोरिया में रिकॉर्ड गर्मी की लहर: अभूतपूर्व तापमान से जलवायु संकट के संकेत

पूर्वी एशिया में रिकॉर्ड गर्मी की लहर का कहर: जापान और दक्षिण कोरिया में तापमान के रिकॉर्ड टूटे

पूर्वी एशिया अभूतपूर्व गर्मी की लहर की चपेट में है। जापान और दक्षिण कोरिया में रिकॉर्ड तोड़ तापमान के बीच अधिकारी जनस्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए जूझ रहे हैं। 2025 की गर्मियों में दोनों देशों में अब तक के सबसे गर्म दिन दर्ज हुए हैं। साथ ही, लगातार कई रातें भी झुलसाने वाली रहीं, जिससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ा है और क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन के असर को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।

विषय-सूची
  1. पूर्वी एशिया में रिकॉर्ड गर्मी की लहर का कहर: जापान और दक्षिण कोरिया में तापमान के रिकॉर्ड टूटे
  2. गर्मी की लहर कैसे बढ़ी?
  3. मानसून के बदले मिज़ाज और समय से पहले गर्मी
  4. स्वास्थ्य और समाज पर असर
  5. बुनियादी ढांचे और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर दबाव
  6. जलवायु परिवर्तन: चरम गर्मी के पीछे की वजह
  7. क्षेत्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
  8. रातें अधिक गर्म क्यों हो रही हैं?
  9. गर्म होते भविष्य के लिए तैयारी
  10. सारांश

30 जुलाई को जापान के ह्योगो प्रांत के तांबा में 41.2 डिग्री सेल्सियस (106.16 डिग्री फ़ारेनहाइट) तापमान दर्ज किया गया, जो देश में अब तक का सबसे अधिक तापमान है। इस बीच, दक्षिण कोरिया में जुलाई में लगातार 22 “उष्णकटिबंधीय रातें” दर्ज की गईं। सियोल में रात का तापमान तीन सप्ताह से अधिक समय तक 25 डिग्री सेल्सियस (77 डिग्री फ़ारेनहाइट) से नीचे नहीं गया। 1907 में आधुनिक रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से ऐसा पहली बार हुआ है। गर्मी की लहर से अब तक दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है और दसियों हजार लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। बुज़ुर्गों और जोखिमग्रस्त लोगों को विशेष खतरा है।

गर्मी की लहर कैसे बढ़ी?

गर्मी की लहर अचानक शुरू हुई और बेहद तीव्र रही। जापान की मौसम एजेंसी के मुताबिक, 30 जुलाई को उसके 914 निगरानी केंद्रों में से 271 पर तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया और 39 स्थानों पर नए रिकॉर्ड बने। ऐतिहासिक स्थलों और पर्यटन के लिए मशहूर क्योटो में 1880 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद पहली बार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। 2018 में बना और 2020 में बराबर हुआ 41.1 डिग्री सेल्सियस का पिछला राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट गया।

दक्षिण कोरिया में भी हालात अत्यधिक गर्म रहे। कोरिया मौसम विज्ञान प्रशासन (KMA) ने पुष्टि की कि 30 जुलाई को सियोल का रात का न्यूनतम तापमान 29.3 डिग्री सेल्सियस रहा। यह लगातार 22वीं “उष्णकटिबंधीय रात” थी। KMA के अनुसार, उष्णकटिबंधीय रात वह होती है जब शाम 6:01 बजे से अगले दिन सुबह 9 बजे तक तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहे। जुलाई का पिछला रिकॉर्ड 1994 में लगातार 21 ऐसी रातों का था। कुछ क्षेत्रों में दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचा। ग्योंगगी प्रांत के आनसॉन्ग में 27 जुलाई को 40.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

सियोल के मौसम पूर्वानुमान विभाग के निदेशक यून की-हान ने इस घटना की वजह बताते हुए कहा:

आम तौर पर, अगर सिर्फ एक दिन गर्मी पड़ती है, तो तापमान बढ़ता है और फिर जल्दी सामान्य हो जाता है। लेकिन जब गर्म मौसम कई दिनों तक बना रहता है, तो गर्मी पूरी तरह से कम नहीं होती—वह ठहर जाती है और हर दिन के साथ जमा होती जाती है।

मानसून के बदले मिज़ाज और समय से पहले गर्मी

संकट को और गंभीर बना रहा है पूर्वी एशिया का पारंपरिक मानसून, जो लगातार कम पूर्वानुमेय होता जा रहा है। पहले बारिश का मौसम गर्मियों की तपिश से राहत देता था, लेकिन इस साल दक्षिण कोरिया और जापान, दोनों में मानसून का दौर छोटा और कम तीव्र रहा। पश्चिमी जापान में जून के आखिर में बारिश का मौसम खत्म हो गया—रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह सबसे जल्दी हुआ। दक्षिण कोरिया में मानसून इतना छोटा और अनियमित था कि मौसम के पूर्वानुमान के बावजूद कई लोगों ने छाता ले जाना बंद कर दिया।

वैज्ञानिक इन बदलावों के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार मानते हैं, जो वायुमंडलीय पैटर्न बदल रहा है और चरम मौसमी घटनाओं को अधिक बार और अधिक गंभीर बना रहा है। इसके परिणामस्वरूप, क्षेत्र में न सिर्फ दिन अधिक गर्म हो रहे हैं, बल्कि रातें भी गर्म हैं और बारिश अनियमित हो गई है। इससे कृषि, जल आपूर्ति और जनस्वास्थ्य के जोखिम और बढ़ रहे हैं।

स्वास्थ्य और समाज पर असर

गर्मी की लहर ने लोगों पर गंभीर असर डाला है। जापान में 21 जुलाई से पहले वाले सप्ताह में 10,800 से अधिक लोगों को लू और गर्मी से जुड़ी अन्य बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया—इस साल का अब तक का सबसे बड़ा साप्ताहिक आंकड़ा। उस अवधि में 16 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकतर 64 वर्ष से अधिक उम्र के थे। अग्नि एवं आपदा प्रबंधन एजेंसी ने जापान के 47 में से 33 प्रांतों के लिए लू संबंधी चेतावनी जारी की और लोगों से घर के भीतर रहने, एयर कंडीशनिंग का इस्तेमाल करने और शरीर में पानी की कमी न होने देने की अपील की।

दक्षिण कोरिया में भी गर्मी से जुड़ी बीमारियों और मौतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। इस साल अब तक कम से कम 16 लोगों की संदिग्ध लू से मौत हो चुकी है, जो 2024 की इसी अवधि के आंकड़े से तीन गुना है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है और अधिकारियों ने तेज़ गर्मी के घंटों में बाहर की गतिविधियों से बचने की बार-बार चेतावनी दी है।

विज्ञापन

बुज़ुर्ग, बच्चे और बाहर काम करने वाले लोग विशेष रूप से जोखिम में हैं। सरकार ने शीतलन केंद्र खोले हैं और जोखिमग्रस्त लोगों को पानी और पंखे बांटे हैं। सियोल में अधिकारियों ने लोगों को एयर कंडीशनर चलाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पानी के बिलों में राहत तक दी है। इससे पता चलता है कि संकट से निपटने के लिए कितने असाधारण कदम उठाए जा रहे हैं।

बुनियादी ढांचे और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर दबाव

गर्मी की लहर ने बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव डाला है। लाखों लोगों के एयर कंडीशनिंग पर निर्भर होने से बिजली की मांग आसमान छू रही है और संभावित बिजली कटौती की चिंता बढ़ी है। परिवहन प्रणालियां भी प्रभावित हुई हैं। भीषण गर्मी से रेल की पटरियों और सड़कों के विकृत होने का खतरा है। ग्रामीण इलाकों में किसान फसलों को गर्मी और सूखे से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जेजू द्वीप जैसी जगहों पर फल समय से पहले गिरने और सब्जियों के धूप से झुलसने की खबरें हैं।

क्योटो जैसे शहरों में पर्यटन, जो अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है, भी प्रभावित हुआ है। पिछले साल रिकॉर्ड 1.088 करोड़ विदेशी पर्यटकों का स्वागत करने वाले इस शहर में पहली बार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। पर्यटकों और स्थानीय लोगों, दोनों से दिन के सबसे गर्म घंटों में बाहर घूमने से बचने की अपील की गई है।

जलवायु परिवर्तन: चरम गर्मी के पीछे की वजह

वैज्ञानिकों की व्यापक सहमति है कि मानव गतिविधियों से प्रेरित जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में गर्मी की लहरों की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ा रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, एशिया का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी तेज़ी से बढ़ रहा है। पिछले साल एशिया के भूभाग का औसत तापमान 1991-2020 के रुझान से करीब 1.04 डिग्री सेल्सियस अधिक था। आंकड़ों के स्रोत के आधार पर 2024 अब तक का सबसे गर्म या दूसरा सबसे गर्म साल रहा।

NOAA, NASA और कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के अनुसार, जून 2025 वैश्विक स्तर पर 1850 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद तीसरा सबसे गर्म जून था। यूरोप और एशिया, दोनों में यह पांचवां सबसे गर्म जून रहा, जबकि दुनिया भर में अलग-अलग महाद्वीपों पर गर्मी के कई रिकॉर्ड टूटे। WMO ने चेतावनी दी है कि भीषण गर्मी अब लाखों लोगों के लिए रोज़मर्रा की हकीकत बन चुकी है। संगठन इसे “खामोश हत्यारा” बताता है। मॉडल आधारित अनुमानों के मुताबिक, 2000 से 2019 के बीच हर साल गर्मी से जुड़ी करीब 4,89,000 मौतें हुईं, जिनमें अधिकतर एशिया और यूरोप में थीं।

विज्ञापन

WMO और संयुक्त राष्ट्र ने चरम गर्मी के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई की अपील की है। इसमें पूर्व चेतावनी प्रणालियों में सुधार, गर्मी और स्वास्थ्य से जुड़ी कार्ययोजनाएं तैयार करना और जोखिमग्रस्त आबादी की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करना शामिल है। हालिया अध्ययनों के अनुसार, 57 देशों में गर्मी और स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी प्रणालियों का विस्तार करने से हर साल अनुमानित 98,314 लोगों की जान बचाई जा सकती है।

क्षेत्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

पूर्वी एशिया की गर्मी की लहर 2025 में चरम मौसम की व्यापक होती घटनाओं का हिस्सा है। भूमध्यसागरीय क्षेत्र और बाल्कन इस गर्मी की तीसरी लू झेल रहे हैं। जंगलों में लगी आग के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा है और जानें भी गई हैं। उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में बिजली और पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि अमेरिका में लंबे समय तक चली गर्मी की लहरों के दौरान हीट इंडेक्स 43-46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। स्कैंडिनेविया भी इससे अछूता नहीं रहा। फिनलैंड में 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले 15 से ज्यादा दिन रहे, जबकि नॉर्वे और स्वीडन में जंगल की आग का गंभीर खतरा बना हुआ है।

एशिया में संकट विशेष रूप से गंभीर है। चीन के राष्ट्रीय जलवायु केंद्र ने मार्च के मध्य से 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले दिनों की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की। जून में हीट इंडेक्स 51.9 डिग्री सेल्सियस पहुंचने के बाद भारत ने नई दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया। म्यांमार में अप्रैल का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज हुआ, जब चाउक में पारा 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

रातें अधिक गर्म क्यों हो रही हैं?

मौजूदा गर्मी की लहर का सबसे चिंताजनक पहलू रात में तापमान का लगातार ऊंचा बना रहना है, जिसे “उष्णकटिबंधीय रातें” कहा जाता है। ऐसी रातों में दिन की गर्मी से बहुत कम राहत मिलती है। इससे मानव शरीर को संभलने का मौका नहीं मिलता और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति बुज़ुर्गों, पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों और एयर कंडीशनिंग की सुविधा से वंचित लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है।

कोरिया मौसम विज्ञान प्रशासन के अनुसार, इस जुलाई सियोल में उष्णकटिबंधीय रातों की संख्या ने 117 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। रात में तापमान कम न होने के पीछे कई कारण हैं। इनमें शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (जहां कंक्रीट और डामर के कारण शहर गर्मी को रोककर रखते हैं), अधिक आर्द्रता और जलवायु परिवर्तन से वायुमंडलीय परिसंचरण में आए व्यापक बदलाव शामिल हैं।

विज्ञापन

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान बढ़ने के साथ उष्णकटिबंधीय रातें आम होती जाएंगी। इससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे और ऊर्जा प्रणालियों पर दबाव और पड़ेगा। WMO ने जोर दिया है कि शहरों को हरित क्षेत्रों का विस्तार करके, इमारतों के इन्सुलेशन में सुधार करके और सार्वजनिक शीतलन सुविधाओं में निवेश करके खुद को बदलते हालात के अनुकूल बनाना होगा।

गर्म होते भविष्य के लिए तैयारी

जापान और दक्षिण कोरिया की सरकारें भीषण गर्मी की नई हकीकत के अनुरूप कदम उठा रही हैं। दोनों देशों ने जन-जागरूकता अभियान शुरू किए हैं, शीतलन उपकरण बांटे हैं और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच बढ़ाई है। सबसे अधिक जोखिमग्रस्त लोगों—खासकर बुज़ुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों—की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय संगठन भी अपने प्रयास तेज़ कर रहे हैं। WMO और संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय के साथ साझेदारी में ग्लोबल हीट हेल्थ इन्फॉर्मेशन नेटवर्क ने देशों को गर्मी के जोखिम घटाने की रणनीतियां मजबूत करने में मदद देने के लिए नए संसाधन जारी किए हैं। इनमें गर्मी से निपटने की कार्ययोजनाओं का आकलन, गर्मी के प्रति लचीलेपन पर केस स्टडी और शासन व्यवस्था तथा नवाचार के सर्वोत्तम तरीकों पर मार्गदर्शन शामिल हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि सिर्फ अनुकूलन पर्याप्त नहीं है। मूल कारण—ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन—आक्रामक उत्सर्जन-कटौती प्रयासों के जरिए दूर करना होगा। WMO और संयुक्त राष्ट्र देशों से पेरिस समझौते के अनुरूप, औद्योगिक युग से पहले के स्तरों से वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की अपील कर रहे हैं, ताकि जलवायु परिवर्तन के सबसे विनाशकारी प्रभावों से बचा जा सके।

विज्ञापन

सारांश

  • जापान और दक्षिण कोरिया रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहरों का सामना कर रहे हैं। जापान में तापमान 41.2°C तक पहुंचा और सियोल में लगातार 22 उष्णकटिबंधीय रातें दर्ज हुईं।
  • गर्मी की लहर से गर्मी से जुड़ी बीमारियों और मौतों में बढ़ोतरी हुई है, खासकर बुज़ुर्गों और जोखिमग्रस्त लोगों में।
  • मानसून के बदलते मिज़ाज और लगातार ऊंचे तापमान का संबंध मानव गतिविधियों से प्रेरित जलवायु परिवर्तन से है।
  • अधिकारी आपातकालीन उपाय लागू कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अनुकूलन के साथ ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने के लिए आक्रामक कदम उठाना भी ज़रूरी है।
  • पूर्वी एशिया का संकट चरम गर्मी के वैश्विक चलन का हिस्सा है और समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की तत्काल जरूरत को उजागर करता है।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है