वियतनाम में प्लास्टिक कचरे का संकट: दायरा और प्रभाव
वियतनाम में प्लास्टिक कचरे का संकट बढ़ता जा रहा है। यहां हर साल 18 लाख टन से अधिक प्लास्टिक फेंका जाता है। इसमें से एक-तिहाई से भी कम का पुनर्चक्रण होता है, जबकि बाकी को जमीन में दबा दिया जाता है, जला दिया जाता है या वह भूमि, वायु और जल को प्रदूषित करता है। कचरे में सबसे आम वस्तुएं एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक बैग, पॉलीस्टाइरीन के खाद्य कंटेनर और प्लास्टिक के कप हैं। औसतन, हर घर महीने में करीब 1 किलोग्राम प्लास्टिक बैग इस्तेमाल करता है और इनमें से 80% से अधिक बैग एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दिए जाते हैं। डिस्पोजेबल प्लास्टिक पर यह व्यापक निर्भरता हर जगह दिखती है—शहरी सुपरमार्केट से ग्रामीण बाजारों तक और महंगी दुकानों से सड़क किनारे के विक्रेताओं तक।
विषय-सूची
- वियतनाम में प्लास्टिक कचरे का संकट: दायरा और प्रभाव
- पर्यावरणीय और सामाजिक परिणाम
- प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन इतना मुश्किल क्यों है?
- नीतिगत कदम और राष्ट्रीय पहल
- व्यवहार में बदलाव: छूटी हुई कड़ी
- समुदाय-आधारित और जमीनी स्तर के समाधान
- तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां
- बदलाव की बाधाएं: लागत, सुविधा और समन्वय
- क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ
- आगे की राह: चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर
- सारांश
प्लास्टिक बैग और पैकेजिंग की सुविधा और कम कीमत ने उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में आम बना दिया है। ब्रेड जैसी छोटी खरीदारी पर भी विक्रेता अक्सर बड़े प्लास्टिक बैग देते हैं। पारंपरिक बाजारों में प्लास्टिक बैग अक्सर मुफ्त दिए जाते हैं, वहीं खाद्य और पेय क्षेत्र में ले जाने वाले सामान आमतौर पर पॉलीस्टाइरीन के डिब्बों और प्लास्टिक के कपों में पैक किए जाते हैं। कुछ कारोबारों ने कागज के बैग या जैव-अपघटनीय स्ट्रॉ जैसे विकल्पों को आजमाया है, लेकिन अधिक लागत और टिकाऊपन को लेकर चिंताओं ने उनका इस्तेमाल सीमित रखा है।
पर्यावरणीय और सामाजिक परिणाम
वियतनाम में प्लास्टिक कचरे का पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ रहा है। जल निकासी प्रणालियों का जाम होना, नदियों और नहरों का प्रदूषित होना तथा हनोई और हो ची मिन्ह सिटी जैसे बड़े शहरों में बाढ़ बढ़ना, प्लास्टिक प्रदूषण के सीधे परिणाम हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल ये दोनों शहर हर दिन करीब 80 टन प्लास्टिक कचरा और प्लास्टिक बैग पर्यावरण में छोड़ते हैं। कई जलमार्ग कचरे से अट जाते हैं, खासकर भारी बारिश के बाद। फु क्वोक, कोन दाओ और फु क्वि द्वीप जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी स्थानीय निवासियों और पर्यटकों, दोनों के कारण बढ़ रहे प्लास्टिक कचरे से निपटने में जूझ रहे हैं।
प्लास्टिक प्रदूषण समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मछली पकड़ने तथा पर्यटन पर निर्भर समुदायों की आजीविका के लिए भी खतरा है। समुद्र तटों और महासागर में प्लास्टिक के मलबे का जमाव न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को बिगाड़ता है, बल्कि आवासों और खाद्य शृंखलाओं को भी बाधित करता है। माइक्रोप्लास्टिक्स—बड़े प्लास्टिक के टूटने से बने छोटे-छोटे कण—नदियों, समुद्री जीवों और यहां तक कि जानवरों के पाचन तंत्र में भी पाए गए हैं। इससे वन्यजीवों और मनुष्यों, दोनों पर दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ी है।
प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन इतना मुश्किल क्यों है?
वियतनाम में प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन कई कारणों से खास तौर पर चुनौतीपूर्ण है:
- सुविधा और लागत: एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक सस्ते और इस्तेमाल में आसान हैं, इसलिए कारोबारों और उपभोक्ताओं की पहली पसंद बन जाते हैं।
- सीमित विकल्प: जैव-अपघटनीय बैग या कागज के कंटेनर जैसे पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अक्सर महंगे और कम टिकाऊ होते हैं, जिससे उनका व्यापक इस्तेमाल हतोत्साहित होता है।
- व्यवहारगत आदतें: जागरूकता बढ़ने के बावजूद, कई लोग आदत या सुविधा के कारण डिस्पोजेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल जारी रखते हैं।
- बुनियादी ढांचे की कमी: कचरा संग्रह और पुनर्चक्रण की प्रणालियां अविकसित हैं, खासकर बड़े शहरों के बाहर। केवल करीब 27% प्लास्टिक बैग का उपचार या पुनर्चक्रण होता है।
- नीतियों का क्रियान्वयन: नियम मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन कराने की व्यवस्था अक्सर कमजोर है और अनुपालन कम है।
सेंटर फॉर ग्रीन सपोर्ट डेवलपमेंट (ग्रीनहब) की निदेशक ट्रान थी होआ का कहना है कि एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक की कम कीमत और सुविधा बड़ी बाधाएं हैं। विकल्प उपलब्ध होने पर भी वे हमेशा टिकाऊ या किफायती नहीं होते। वह जोर देकर कहती हैं कि “सबसे अहम बात उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव लाना है, जिसकी शुरुआत स्रोत पर अनावश्यक खपत घटाने से होनी चाहिए।”
नीतिगत कदम और राष्ट्रीय पहल
समस्या की तात्कालिकता को देखते हुए, वियतनाम सरकार ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए अहम कदम उठाए हैं। 2020 में समुद्री प्लास्टिक कचरे पर राष्ट्रीय कार्ययोजना शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 2030 तक समुद्री प्लास्टिक कचरे में 75% की कमी लाना है। 2020 में संशोधित पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत स्रोत पर कचरे को अलग करना अनिवार्य है और 2030 तक एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का रोडमैप तय किया गया है। जनवरी 2025 से सभी घरों के लिए स्रोत पर कचरे को अलग करना अनिवार्य होगा और 2026 से कुछ गैर-जैव-अपघटनीय प्लास्टिक बैग के उत्पादन और आयात पर रोक लगेगी। 2030 तक, वियतनाम इको-लेबल से प्रमाणित उत्पादों को छोड़कर, ज्यादातर एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक उत्पादों का उत्पादन और आयात बंद हो जाएगा।
इन नीतियों के समर्थन में सरकार एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर पर्यावरण कर जैसे वित्तीय प्रोत्साहन और हतोत्साहन के उपाय ला रही है। हालांकि, हो ची मिन्ह सिटी और दा नांग जैसे शहरों के अनुभव से पता चला है कि केवल नियम काफी नहीं हैं। कमजोर क्रियान्वयन और सहायक बुनियादी ढांचे की कमी के कारण अनुपालन कम रहा है और जनता में संदेह बढ़ा है।
व्यवहार में बदलाव: छूटी हुई कड़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक प्रदूषण के स्थायी समाधान के लिए सिर्फ कानून काफी नहीं हैं—जनता के नजरिए और व्यवहार में बुनियादी बदलाव जरूरी है। Rare.org के विश्लेषण के अनुसार, नियमों, विनियमों और सूचना अभियानों जैसे पारंपरिक उपाय व्यवहार विज्ञान की तकनीकों के साथ मिलकर अधिक प्रभावी होते हैं। इनमें शामिल हैं:
- भावनात्मक अपील: गर्व, जिम्मेदारी या अपराधबोध जगाने वाले संदेश लोगों को अपनी आदतें बदलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
- सामाजिक प्रभाव: साथियों का दबाव और सामुदायिक मानदंड लोगों को अधिक टिकाऊ तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
- विकल्पों की प्रस्तुति: दुकानों में पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अधिक स्पष्ट और सुलभ बनाने से उपभोक्ता बेहतर विकल्प चुनने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
युवाओं को बदलाव के अहम वाहक के रूप में देखा जाता है। सर्वेक्षण बताते हैं कि वियतनाम के युवा जहां एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में हैं, वहीं वे इस समस्या के प्रति काफी जागरूक और कार्रवाई के लिए प्रेरित भी हैं। सोशल मीडिया अभियान, स्कूल कार्यक्रम और युवाओं की अगुवाई वाली पहलें नजरिया बदलने और सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करने में मदद कर रही हैं।
समुदाय-आधारित और जमीनी स्तर के समाधान
प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए सामुदायिक भागीदारी अहम है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के समर्थन से चल रही परियोजनाओं ने स्थानीय कार्रवाई की ताकत दिखाई है। उदाहरण के लिए, बिन्ह डुओंग प्रांत में कचरा प्रबंधन के मॉडल ने 1,50,000 प्लास्टिक स्ट्रॉ और 72,800 प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल कम किया है, जिनकी जगह जैव-अपघटनीय विकल्प अपनाए गए। क्वांग निन्ह में पर्यटक नौकाओं ने प्लास्टिक कचरा घटाने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं क्वि न्होन में अनौपचारिक कचरा संग्रहकर्ताओं—जिनमें कई महिलाएं हैं—को प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देकर कचरा इकट्ठा करने और पुनर्चक्रण के लिए अलग करने में सक्षम बनाया गया है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-वियतनाम ने प्लास्टिक घटाने के छह सफल मॉडल पहचाने हैं, जिनमें शामिल हैं:
- मछुआरों को कचरा किनारे लाने के लिए प्रोत्साहित करना: डोंग होई शहर में इस पहल ने समुद्र में फेंके जाने वाले प्लास्टिक को काफी कम किया है और स्थानीय धर्मार्थ संस्थाओं को समर्थन दिया है।
- बाजार में कचरे को अलग करना और खाद बनाना: तुय होआ और हा तिन्ह में आजमाए गए इस मॉडल में जैविक कचरे को फिर से उपयोग में लाया जाता है और कचरा प्रबंधन के प्रति लोगों का नजरिया बदला जाता है।
- पुराने तिरपाल का दोबारा इस्तेमाल: राच जा में पुराने तिरपालों से बाजार में बिकने वाले उत्पाद बनाए जाते हैं, जिससे पर्यावरणीय और सामाजिक, दोनों तरह के लाभ मिलते हैं।
- शून्य-कचरा स्कूल: वियतनाम जीरो वेस्ट अलायंस (वीजेडडब्ल्यूए) स्कूलों के साथ मिलकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को कचरा घटाने, पुनर्चक्रण और टिकाऊ जीवनशैली के बारे में जागरूक करता है। इन कार्यक्रमों से हजारों लोग जुड़े हैं और व्यापक सामुदायिक बदलाव को प्रेरणा मिली है।
तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां
प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ वियतनाम की लड़ाई में तकनीक की भूमिका बढ़ रही है। कान थो में, द ओशन क्लीनअप का इंटरसेप्टर 003—नदी की सफाई की अत्याधुनिक प्रणाली—तैनात किया गया है। यह कान थो नदी से हर दिन 50 टन तक कचरा इकट्ठा कर सकता है। कचरा संग्रह और प्रसंस्करण के बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ ऐसी स्वचालित प्रणालियां प्लास्टिक को समुद्र तक पहुंचने से रोकने में मदद करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी अहम है। वियतनाम नेशनल प्लास्टिक एक्शन पार्टनरशिप (एनपीएपी) का हिस्सा है, जो यूएनडीपी और विश्व आर्थिक मंच के नेतृत्व वाला बहु-पक्षीय मंच है। एनपीएपी प्लास्टिक कचरा घटाने के राष्ट्रीय रोडमैप को लागू करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था के समाधानों को बढ़ावा देने के लिए सरकार, कारोबार और नागरिक समाज के प्रयासों में समन्वय करता है। समुद्री कचरे से निपटने की आसियान क्षेत्रीय कार्ययोजना जैसी क्षेत्रीय पहलें भी ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण में मदद करती हैं।
बदलाव की बाधाएं: लागत, सुविधा और समन्वय
प्रगति के बावजूद बड़ी बाधाएं अब भी बनी हुई हैं। पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की लागत कारोबारों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए बड़ी रुकावट है। उदाहरण के लिए, जैव-अपघटनीय बैग प्लास्टिक बैग से 2.6 गुना महंगे हैं और कागज के डिब्बों की कीमत प्लास्टिक कंटेनरों से 10 गुना तक अधिक हो सकती है। कीमतों का यह अंतर व्यापक इस्तेमाल को हतोत्साहित करता है, खासकर छोटे कारोबारों और कम आय वाले परिवारों में।
सुविधा भी एक बड़ा कारक है। सर्वेक्षण बताते हैं कि 67% युवा एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के इस्तेमाल की मुख्य वजह सुविधा बताते हैं, जबकि 39% लागत का हवाला देते हैं। विकल्प उपलब्ध होने पर भी पुरानी आदतें आसानी से नहीं छूटतीं। प्रभावी बदलाव के लिए किफायती विकल्पों के साथ प्रोत्साहन, मान्यता और जनता को लगातार जागरूक करना भी जरूरी है।
अलग-अलग परियोजनाओं और हितधारकों के बीच समन्वय भी एक चुनौती है। कई पहलें अलग-अलग काम करती हैं, जिससे उनका दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नीति, तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और बाजार-आधारित समाधानों को जोड़ने वाले एकीकृत, बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण की जरूरत है।
क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ
वियतनाम का प्लास्टिक कचरा संकट क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौती का हिस्सा है। दक्षिण-पूर्व एशिया प्लास्टिक प्रदूषण का एक बड़ा केंद्र है। इंडोनेशिया, थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देश भी कुप्रबंधित कचरे और समुद्री मलबे की समस्या से जूझ रहे हैं। क्षेत्र में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बढ़ती उपभोक्तावादी प्रवृत्ति और कचरा प्रबंधन के सीमित बुनियादी ढांचे ने समस्या को और गंभीर बनाया है। 2017 में चीन के प्लास्टिक कचरे के आयात पर प्रतिबंध से इसका बोझ दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर आ गया, जिससे स्थानीय प्रणालियों पर दबाव और बढ़ गया।
दुनियाभर में प्लास्टिक कचरे का केवल करीब 9% पुनर्चक्रित होता है और हर साल लाखों टन कचरा महासागरों में पहुंचता है। दुनिया भर में पानी, मिट्टी और खाद्य शृंखलाओं में माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करते हैं। इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीक का हस्तांतरण और पुनर्चक्रण तथा कचरा प्रबंधन के वैश्विक मानक विकसित करना जरूरी है।
आगे की राह: चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर
विशेषज्ञ और नीति निर्माता तेजी से चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण की वकालत कर रहे हैं, जिसमें सामग्री का दोबारा इस्तेमाल और पुनर्चक्रण किया जाता है तथा उसे यथासंभव लंबे समय तक मूल्य-शृंखला में बनाए रखा जाता है। इसके लिए उत्पादों को पुनर्चक्रण योग्य बनाने के लिए नए सिरे से डिजाइन करना, जैव-अपघटनीय सामग्री को बढ़ावा देना और रासायनिक पुनर्चक्रण तथा अपसाइक्लिंग के लिए नई तकनीकें विकसित करना शामिल है। विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) योजनाओं को भी बढ़ावा मिल रहा है, जिनके तहत निर्माताओं को अपने उत्पादों के पूरे जीवनचक्र के लिए जवाबदेह ठहराया जाता है।
वियतनाम में एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के रोडमैप में प्रतिबंध, शुल्क और अंततः पाबंदियां शामिल हैं। इसके साथ ही टिकाऊ विकल्प विकसित करने वाले नवाचारों और स्टार्टअप को समर्थन दिया जा रहा है। स्थायी बदलाव के लिए जरूरी सांस्कृतिक और व्यवहारगत परिवर्तन लाने में जन-जागरूकता अभियान, स्कूल कार्यक्रम और युवाओं की भागीदारी अहम हैं।
सारांश
- वियतनाम हर साल 18 लाख टन से अधिक प्लास्टिक कचरा पैदा करता है, जिसमें से एक-तिहाई से भी कम का पुनर्चक्रण होता है।
- सुविधा, कम कीमत और गहरी जमी आदतों के कारण कचरे में एक बार इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक हावी है।
- प्लास्टिक प्रदूषण के गंभीर पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं, खासकर शहरों और तटीय इलाकों में।
- सरकार ने महत्वाकांक्षी नीतियां शुरू की हैं, जिनमें 2030 तक एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का रोडमैप और 2025 से कचरे को अनिवार्य रूप से अलग करना शामिल है।
- व्यवहार में बदलाव अहम है; कानूनों और प्रोत्साहनों के साथ शिक्षा, सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार विज्ञान की तकनीकों को जोड़ना जरूरी है।
- स्थानीय स्तर पर सफल मॉडल और तकनीकी नवाचार उम्मीद जगाते हैं, लेकिन इनके विस्तार और बेहतर समन्वय की जरूरत है।
- पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने में लागत और सुविधा अब भी बड़ी बाधाएं हैं।
- दीर्घकालिक समाधान के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना जरूरी है।






