सुधार की समयसीमा और बंद संसद आमने-सामने
नेपाल के विमानन नियामक को हवाई अड्डों और नेविगेशन सेवाओं से अलग करने का जनवरी 2027 के मध्य तक का लक्ष्य खतरे में पड़ गया है। शुक्रवार को संसद का सत्र समाप्त होने से कुछ घंटे पहले दो अहम विधेयक निचले सदन में पहुंचे। इस देरी से यूरोपीय आयोग की एयर सेफ्टी लिस्ट से हटने की सरकार की प्रस्तावित राह भी कमजोर हुई है। नेपाल दिसंबर 2013 से इस सूची में बना हुआ है।
विषय-सूची
- सुधार की समयसीमा और बंद संसद आमने-सामने
- मई का ऑडिट एक और समयसीमा क्यों तय करता है
- यूरोप की मांग क्या है और क्या नहीं
- लगभग दो दशक से अधूरा कानून
- दोनों प्राधिकरण कैसे काम करेंगे
- नेतृत्व के नियमों से स्वतंत्रता की परीक्षा
- हवाई अड्डों में निवेश और कर्मचारियों का स्थानांतरण
- बजट का दांव यूरोपीय मार्गों से आगे तक
- पहले की सुरक्षा प्रगति से ईयू प्रतिबंध नहीं हटे
- मुख्य बिंदु
वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने 30 मई को बजट पेश करते हुए यह समयसीमा घोषित की थी। नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण विधेयक और नेपाल वायु सेवा प्राधिकरण विधेयक उस संस्था को दो हिस्सों में बांटेंगे, जो फिलहाल विमानन सेवाएं संचालित करने के साथ उनकी सुरक्षा की निगरानी भी करती है। लगातार सरकारों ने इस बदलाव का वादा किया, लेकिन कोई इसे पूरा नहीं कर पाई।
तत्काल समस्या संसद में उपलब्ध समय की है। पर्यटन मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि मसौदों को वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिल चुकी थी और संसद में देर से पेश किए जाने से लगभग दो महीने पहले वे कानून मंत्रालय पहुंच गए थे। सत्रावसान के बाद, यानी सत्र औपचारिक रूप से समाप्त हो जाने पर, अधिकारियों को उम्मीद है कि विधेयकों पर ठोस विचार-विमर्श शीतकालीन सत्र तक टल जाएगा।
संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि देरी से बजट की समयसारिणी प्रभावित हुई है:
"अब जबकि संसद का सत्रावसान हो चुका है, विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने के लिए हमें सर्दियों के अगले सत्र तक इंतजार करना होगा। बजट में घोषित योजना के मुताबिक नेपाल के एयर सेफ्टी लिस्ट से बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं है," अधिकारी ने कहा।
यह एक अधिकारी की चेतावनी है, यूरोप की ओर से घोषित फैसला नहीं। नेपाल का कानून पारित करना और ईयू की सूची से हटना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अगर सांसद सर्दियों में विधेयकों को जल्दी मंजूरी भी दे दें, तब भी अधिकारियों को नई संस्थाएं स्थापित करनी होंगी और साबित करना होगा कि सुरक्षा निगरानी व्यवहार में कारगर है।
मई का ऑडिट एक और समयसीमा क्यों तय करता है
नेपाल की योजना मई 2027 में अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन से सुरक्षा निगरानी ऑडिट कराने का अनुरोध करने की है। विमानन अधिकारियों के अनुसार, देश के कानूनी और नियामक दस्तावेजों को छह महीने पहले अंतिम रूप देकर स्थिर करना होगा। इससे तैयारी की समयसीमा नवंबर 2026 के आसपास आती है।
इन अधिकारियों के मुताबिक, अद्यतन नियमों, प्रक्रियागत मार्गदर्शन और मूल्यांकन जांच-सूचियों को भी दौरे से चार से छह महीने पहले आईसीएओ के ऑनलाइन फ्रेमवर्क पर अपलोड करना होगा। ऑडिटर आने से पहले इन दस्तावेजों की समीक्षा करते हैं, ताकि वे निरीक्षण की योजना बना सकें और जांच के लिए जरूरी साक्ष्य पहचान सकें।
इसलिए दस्तावेजों को स्थिर करने की समयसीमा सिर्फ एक प्रशासनिक कटऑफ नहीं है। नए कानून के लिए लागू करने के नियम, तय जिम्मेदारियां, प्रशिक्षित कर्मचारी और ऐसे रिकॉर्ड जरूरी हैं जो दिखाएं कि व्यवस्थाओं का वास्तव में इस्तेमाल हुआ है। ऑडिट से ठीक पहले मंजूर कानून अपने आप में यह इतिहास नहीं दे सकता।
आईसीएओ अपने सार्वभौमिक सुरक्षा निगरानी ऑडिट कार्यक्रम को इस आकलन के रूप में बताता है कि कोई देश सुरक्षा निगरानी के अहम तत्वों को प्रभावी और लगातार लागू करता है या नहीं। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुपालन में मदद करता है और राष्ट्रीय निगरानी दायित्वों की निरंतर निगरानी की सुविधा देता है। इसमें केवल यह नहीं गिना जाता कि किसी देश ने कितने कानून पारित किए हैं।
नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्राधिकरण नए कानून को ऑडिट में शामिल कराने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध करेगा। देरी से जुड़ी रिपोर्टों में इस अनुरोध की कोई संशोधित तारीख या मंजूरी घोषित नहीं की गई है।
समयक्रम से जुड़ी एक समस्या भी है: प्रस्तावित मई 2027 का ऑडिट सरकार के जनवरी 2027 के लक्ष्य के बाद होगा। अगर नेपाल को उम्मीद है कि यह ऑडिट ईयू की सूची से हटने के पक्ष में साक्ष्य देगा, तो जनवरी से पहले प्रक्रिया का यह हिस्सा पूरा नहीं हो सकता। ऑडिट टालने से सुधारों के लिए अधिक समय मिल सकता है, लेकिन यह साक्ष्य मिलने की तारीख को और आगे धकेल देगा।
यूरोप की मांग क्या है और क्या नहीं
ईयू के प्रतिबंध नेपाल में प्रमाणित एयरलाइनों, जिनमें नेपाल एयरलाइंस कॉरपोरेशन भी शामिल है, को यूरोपीय हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने से रोकते हैं। यह नेपाल आने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध नहीं है। मुख्य सवाल यह है कि नेपाल अपनी जिम्मेदारी के तहत आने वाली एयरलाइनों और विमानन सेवाओं की निगरानी करने में कितना सक्षम है।
नेपाल में यूरोपीय संघ की राजदूत वेरोनिक लोरेंजो ने मई में कहा था कि नई सरकार ने मंत्रिस्तरीय बैठकों में बार-बार सुरक्षा सूची का मुद्दा उठाया है। उन्होंने इस राजनीतिक ध्यान का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि ईयू स्वतंत्र निगरानी चाहता है, किसी एक खास संस्थागत मॉडल की मांग नहीं करता।
लोरेंजो ने यूरोप का रुख समझाया:
यूरोपीय संघ ने कभी भी सेवा प्रदायगी को नियमन से अलग करने के लिए कानून में बदलाव की मांग नहीं की," उन्होंने कहा। "उसने हितों के टकराव से बचने के लिए हर कार्य की स्वतंत्रता पर जोर दिया है।
यह अंतर विधेयकों को लेकर पहले जताई गई उम्मीदों को नए संदर्भ में रखता है। सुधार की पिछली कोशिश के दौरान 21 अक्टूबर को दिए एक संबोधन में लोरेंजो ने कहा था कि कार्यों को अलग करने वाला कानून पारित होने से यूरोपीय प्रतिबंध हट सकता है। उनकी बाद की व्याख्या स्पष्ट करती है कि अलग-अलग संस्थाएं बनाना स्वतंत्र निगरानी का एक संभावित रास्ता है, प्रतिबंध हटने की स्वचालित गारंटी नहीं।
सितंबर 2023 में यूरोपीय मूल्यांकन दल के दौरे में प्राधिकरण की स्वीकृत संगठनात्मक संरचना और विभागों, अनुभागों तथा कर्मचारियों के वास्तविक बंटवारे के बीच विसंगतियां मिलीं। नेपाल ने 2022 में मौजूदा प्राधिकरण के भीतर कार्यों को अधिक अलग करने के लिए उठाए गए कदमों के साक्ष्य सौंपे थे, लेकिन बाद के दौरे से पता चला कि औपचारिक व्यवस्थाएं और कामकाज पूरी तरह मेल नहीं खाते थे।
इसके बाद नेपाल ने सुधारात्मक कार्रवाई योजना तैयार की। एक विवरण के अनुसार, यह योजना ईयू की समीक्षा के अधीन है; लोरेंजो की हालिया टिप्पणियां इसके धीमे क्रियान्वयन पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में लगभग कोई प्रगति नहीं हुई। ये एक ही प्रक्रिया के अलग-अलग चरण हैं: योजना सौंपने से यह साबित नहीं होता कि उसके उपाय लागू कर दिए गए हैं।
लगभग दो दशक से अधूरा कानून
विमानन नियमन को सेवा प्रदायगी से अलग करने का प्रस्ताव सरकार की 2007-08 से 2009-10 की तीन वर्षीय अंतरिम योजना से जुड़ा है। बाद की नीतियों और बजटों में यह प्रस्ताव बना रहा, लेकिन संस्थागत बदलाव पूरा नहीं हुआ।
विधायी प्रक्रिया में उच्च सदन से पारित होना, कैबिनेट में बार-बार मसौदे पेश होना और लगातार सरकारों के तहत नए मसौदे तैयार होना शामिल है। प्रमुख पड़ाव बताते हैं कि यह मुद्दा कितने लंबे समय से अनसुलझा है:
- 2007-08 से 2009-10: तीन वर्षीय अंतरिम योजना में विमानन प्राधिकरण के पुनर्गठन की सिफारिशों पर विचार का प्रस्ताव रखा गया।
- 23 फरवरी 2020: विमानन से जुड़े दो विधेयक पंजीकृत किए गए।
- 2 अगस्त 2021: उच्च सदन ने विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित किया।
- 2022: आईसीएओ ने नेपाल ऑडिट के निष्कर्षों में नियामक और सेवा कार्यों को अलग करने की औपचारिक मांग की।
- 16 जुलाई 2023: पर्यटन मंत्रालय ने यूरोपीय सुरक्षा मूल्यांकन से पहले मसौदे फिर कैबिनेट को भेजे।
- 6 सितंबर 2024: पर्यटन मंत्री बद्री प्रसाद पांडे ने विधेयकों को कैबिनेट के सामने रखा।
- 30 मई को बजट घोषणा: वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने जनवरी 2027 के मध्य तक सुधार का लक्ष्य तय किया।
- सबसे हालिया संसदीय सत्र: सत्रावसान से कुछ समय पहले विधेयक निचले सदन में पहुंचे।
रिपोर्टों में इन प्रयासों की गिनती अलग-अलग है। एक रिपोर्ट मौजूदा कोशिश को तीसरी बताती है, जिसमें 2017 और 2024 के प्रयासों का जिक्र है। दूसरी रिपोर्ट 2020 में पंजीकरण और 2021 में उच्च सदन से पारित होने का उल्लेख करती है और कहती है कि इसके बाद पर्यटन मंत्रालय ने मसौदे चार बार कैबिनेट को भेजे। इन विवरणों को संसदीय स्तर पर पेश किए गए विधेयकों की एक जैसी और सुसंगत गिनती नहीं मानना चाहिए।
राजनीतिक समर्थन के बावजूद प्रक्रियागत देरी जारी रही है। कैबिनेट की विधेयक समिति ने पहले शब्दावली में बदलाव सुझाने के बाद मसौदों को मंजूरी दी थी, लेकिन संसद में पंजीकरण से पहले कैबिनेट की आगे की मंजूरी जरूरी थी। 27 मार्च को नियुक्त कानून मंत्री सोबिता गौतम ने विमानन उपायों समेत 45 विधेयकों का मसौदा तैयार करने को प्राथमिकता दी। फिर भी विमानन अधिकारी हालिया देरी के लिए कानून मंत्रालय में करीब दो महीने तक मसौदों के अटके रहने को जिम्मेदार ठहराते हैं।
दोनों प्राधिकरण कैसे काम करेंगे
प्रस्तावित बंटवारे के तहत नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण नियमन के लिए जिम्मेदार होगा, जबकि हवाई अड्डों का संचालन और संबंधित सेवाएं अलग वायु सेवा प्राधिकरण के पास होंगी। रिपोर्टों में प्रस्तावित सेवा संस्था के लिए नेपाल वायु सेवा प्राधिकरण और नेपाल एयर सर्विस अथॉरिटी, दोनों नाम इस्तेमाल किए गए हैं; दूसरे नाम को नासा भी कहा गया है।
नियामक एयर ऑपरेटर प्रमाणपत्र जारी करेगा, जो एयरलाइनों को व्यावसायिक उड़ानें संचालित करने के लिए जरूरी हैं। वह विमान पंजीकृत करेगा, उनकी उड़ानयोग्यता प्रमाणित करेगा और पायलटों, हवाई यातायात नियंत्रकों तथा इंजीनियरों को लाइसेंस देगा। प्रस्तावित प्रवर्तन शक्तियों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली एयरलाइनों या विमानन संगठनों पर जुर्माना और उनका निलंबन शामिल है।
सेवा प्राधिकरण हवाई अड्डों का निर्माण, रखरखाव, उन्नयन और संचालन करेगा तथा हवाई नेविगेशन और हवाई यातायात प्रबंधन उपलब्ध कराएगा। इसकी जिम्मेदारियों में विमानन संचार, मौसम सेवाएं, हवाई अड्डा सुरक्षा, अग्निशमन और खोज एवं बचाव भी शामिल होंगे। वह लैंडिंग, पार्किंग, नेविगेशन और यात्री सेवा शुल्क वसूल सकेगा और हवाई अड्डे की सुविधाओं का व्यावसायिक उपयोग कर सकेगा।
विधेयक जिस व्यावहारिक टकराव को दूर करना चाहते हैं, वह यही है: हवाई अड्डों और नेविगेशन सेवाओं का संचालन करने वाली संस्था ही यह भी जांचती है कि वे सेवाएं सुरक्षा जरूरतें पूरी करती हैं या नहीं। अलग-अलग संस्थाएं बनने से नियामक को निरीक्षण करने और जरूरत पड़ने पर दंड देने के लिए एक स्वतंत्र संस्था मिलेगी।
पर्यटन मंत्री खड़क राज पौडेल, जिनका नाम कुछ रिपोर्टों में खड्गराज पौडेल भी लिखा गया है, ने कहा कि अलगाव से इस टकराव का समाधान और निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल उद्योग के प्रशिक्षण में सुधार कर रहा है, जिससे पता चलता है कि पुनर्गठन के अलावा भी काम करने की जरूरत है।
पौडेल ने सुरक्षा सुधार की निरंतरता पर जोर दिया:
"विमानन सुरक्षा में लगातार सुधार जरूरी है, केवल एक बार का ढांचागत बदलाव नहीं," उन्होंने कहा।
नेतृत्व के नियमों से स्वतंत्रता की परीक्षा
प्रस्तावित नियामक के अध्यक्ष पर्यटन मंत्री होंगे और पर्यटन तथा वित्त मंत्रालयों के संयुक्त सचिव सदस्य होंगे। इसका महानिदेशक मुख्य कार्यकारी और सदस्य सचिव होगा। सरकार द्वारा नामित विमानन विशेषज्ञ के पास स्नातकोत्तर डिग्री और संबंधित क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना जरूरी होगा।
सेवा प्राधिकरण में सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ अध्यक्ष होगा। पर्यटन, वित्त और गृह मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ दो नामित विशेषज्ञ भी होंगे, जिनमें कम से कम एक महिला होगी। इसका प्रबंध निदेशक खुली प्रतियोगिता से चुना जाएगा, उसके पास स्नातकोत्तर डिग्री और नागरिक उड्डयन में कम से कम 15 वर्ष का अनुभव होना जरूरी होगा और उसका कार्यकाल चार साल का होगा।
नियामक के कार्यकारी प्रमुख की योग्यता पर विवरण अलग-अलग हैं। हालिया देरी से जुड़ा विस्तृत विवरण कहता है कि महानिदेशक का चयन वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों या प्राधिकरण के 12वें स्तर के कर्मचारियों में से होगा। उनका कार्यकाल चार साल का होगा और दोबारा नियुक्ति संभव होगी। एक अन्य विवरण के अनुसार, दोनों कार्यकारी प्रमुखों के पास मास्टर डिग्री, नागरिक उड्डयन प्रबंधन में 15 साल का अनुभव और कार्यकारी प्रबंधन का अनुभव होना चाहिए।
जब तक मौजूदा प्रावधान तय करने वाला विधेयक का एक समान और प्रकाशित पाठ उपलब्ध न हो, इन विवरणों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। यह अंतर इसलिए अहम है क्योंकि तकनीकी योग्यता, पात्रता की शर्तें और नियुक्ति की प्रक्रिया तय करती हैं कि नए नियामक का नेतृत्व कौन कर सकता है।
प्रस्तावित सिफारिश समिति का नेतृत्व संबंधित मंत्रालय के सचिव करेंगे। इसमें मंत्रालय द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ और संबंधित संयुक्त सचिव भी होंगे। ढांचे के तहत भ्रष्टाचार, धनशोधन, अपहरण और नैतिक अधमता से जुड़े अपराधों समेत कुछ अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों को भी अयोग्य रखा जाएगा।
इसलिए कानूनी रूप से अलग होने के बाद भी मंत्रालयों की नियुक्तियों और संचालन में बड़ी भूमिका बनी रहेगी। व्यावहारिक कसौटी यह होगी कि नियामक सेवा प्राधिकरण से स्वतंत्र होकर सुरक्षा संबंधी फैसले ले पाए और उन फैसलों से हवाई अड्डों के संचालन या एयरलाइन गतिविधियों पर असर पड़ने की स्थिति में दबाव का सामना कर सके। संगठनात्मक चार्ट और वास्तविक कर्मचारी तैनाती के बारे में यूरोपीय निष्कर्ष इस अंतर को खास तौर पर प्रासंगिक बनाते हैं।
हवाई अड्डों में निवेश और कर्मचारियों का स्थानांतरण
सेवा प्राधिकरण विधेयक हवाई अड्डों के निर्माण, संचालन और प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी के अवसर बढ़ाएगा। सरकार की मंजूरी से प्राधिकरण घरेलू या विदेशी निवेशकों के साथ कारोबारी योजना के तहत संयुक्त निवेश कर सकेगा, जिसमें सार्वजनिक और निजी निवेश वाली साझेदारियां भी शामिल होंगी।
प्रस्तावित कानून सेवाओं को ठेके पर देने की भी अनुमति देता है। सरकारी एजेंसियों को सीधे ठेके दिए जा सकेंगे, जबकि निजी और गैर-सरकारी संस्थाओं का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से करना होगा। इन व्यवस्थाओं से यह बदल सकता है कि सेवाएं कौन देगा, लेकिन स्वतंत्र सुरक्षा निगरानी की जरूरत खत्म नहीं होगी।
कर्मचारियों की तैनाती भी एक बड़ा काम होगा। मौजूदा प्राधिकरण के स्थायी कर्मचारी शुरुआत में सेवा प्राधिकरण में जाएंगे। नियामक में शामिल होने के इच्छुक कर्मचारियों को आवेदन के लिए 60 दिन मिलेंगे। तैनाती वरिष्ठता और कार्य-प्रदर्शन के आधार पर होगी और वेतन कम नहीं किया जाएगा।
जो कर्मचारी स्थानांतरित नहीं हो सकते या नहीं होना चाहते, उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। तकनीकी कर्मियों की कमी होने पर सरकारी कर्मचारियों को प्रतिनियुक्त किया जा सकेगा। नए नियुक्त कर्मचारी प्रचलित कानून के तहत अंशदायी पेंशन व्यवस्था में आएंगे।
विधेयक अधिकृत सेवा अधिकारियों को ऐसी गतिविधि रोकने के लिए निजी संपत्ति में प्रवेश का अधिकार भी देता है, जिससे उड़ान संचालन बाधित हो सकता है। सामान्य स्थिति में प्रवेश से पहले सूचना देनी होगी और सुरक्षा कर्मियों तथा स्थानीय प्रतिनिधि की मौजूदगी जरूरी होगी। दुर्घटना रोकने या तत्काल मरम्मत से जुड़ी आपात स्थिति में बिना सूचना प्रवेश किया जा सकेगा, लेकिन बाद में रिपोर्ट देनी होगी। इन संचालन संबंधी शक्तियों से पता चलता है कि दो अलग संस्थाएं बनाने के बड़े वादे के पीछे कितना क्रियान्वयन कार्य है।
बजट का दांव यूरोपीय मार्गों से आगे तक
विमानन सुधार वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के साथ आया है, जिसमें संस्कृति और पर्यटन के लिए 7.34 अरब रुपये तथा नागरिक उड्डयन के लिए 2.93 अरब रुपये आवंटित किए गए हैं। विमानन आवंटन में से 1.53 अरब रुपये त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उन्नयन के लिए तय हैं, जो इस क्षेत्र के घोषित कुल आवंटन का करीब 52 प्रतिशत है।
सरकार गौतम बुद्ध और पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के संचालन में निजी भागीदारी, भरतपुर में रात की उड़ानें, सुर्खेत हवाई अड्डे का विस्तार और ताल्चा तथा तारिगांव में रनवे उन्नयन की भी योजना बना रही है। निजगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के क्रियान्वयन मॉडल को छह महीने के भीतर अंतिम रूप देने का उसका इरादा है।
पर्यटन कार्यक्रम में नेपाल वेलनेस वर्ष 2027 और पर्यटन वर्ष 2028-29, अधिक खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास तथा रिसॉर्ट और होटल में निवेश के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। पर्वतीय योजनाओं में 6,000 मीटर से ऊंची अनाम चोटियों का नामकरण, बचाव व्यवस्थाओं में सुधार और ग्रेट हिमालयन ट्रेल तथा दान्फे रूट का विकास शामिल है।
सांस्कृतिक परियोजनाओं में लुंबिनी के बुनियादी ढांचे के लिए 830 मिलियन रुपये और जनकपुर को अंतरराष्ट्रीय विवाह स्थल के रूप में बढ़ावा देना शामिल है। इन योजनाओं की सफलता प्रचार के साथ-साथ पर्यटकों के भरोसे और भरोसेमंद परिवहन पर निर्भर करती है। हवाई अड्डों और पर्यटन स्थलों पर खर्च, उन्हें जोड़ने वाली विमानन सेवाओं की विश्वसनीय निगरानी का विकल्प नहीं हो सकता।
पहले की सुरक्षा प्रगति से ईयू प्रतिबंध नहीं हटे
नेपाल के आईसीएओ के पुराने नतीजे बताते हैं कि एक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया में प्रगति होने से दूसरी समस्या अपने आप हल नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावी क्रियान्वयन का स्कोर 2009 में 46 प्रतिशत से बढ़कर 2013 में 54.97 प्रतिशत और जुलाई 2017 में 66 प्रतिशत हो गया। 2009 से 2017 के बीच यह 20 प्रतिशत अंक बढ़ा।
आईसीएओ ने 2017 में नेपाल के लिए गंभीर सुरक्षा चिंता का दर्जा वापस ले लिया था। फिर भी यूरोपीय प्रतिबंध जारी रहे। 67 प्रतिशत स्कोर का अनुमान लगाने वाला एक पुराना आंतरिक आकलन आईसीएओ ऑडिट का नया परिणाम नहीं था और इसे मौजूदा तैयारी का पैमाना नहीं समझना चाहिए।
ऑडिट टालने की मिसालें भी हैं। नेपाल ने संस्थागत बंटवारे के लिए समय देने की खातिर 2019 का प्रस्तावित मूल्यांकन स्थगित करने का अनुरोध किया था। पुनर्निर्धारित 10-20 मई 2020 का दौरा कोविड-19 के कारण टल गया और 21 मार्च 2021 को होने वाला एक और दौरा महामारी के दौरान स्थगित कर दिया गया।
सुरक्षा रिकॉर्ड अब भी गंभीर है, हालांकि दुर्घटनाओं के कुल आंकड़े अलग-अलग अवधियों और दायरों पर आधारित हैं। हालिया विवरण में नेपाल के सात दशक के विमानन इतिहास में 109 दुर्घटनाओं का जिक्र है। एक अन्य रिपोर्ट 2000 के बाद से 21 विमान और हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं में कम से कम 380 मौतों की बात करती है। सुधार के पिछले प्रयास से जुड़ी एक रिपोर्ट ने उससे पहले के ढाई वर्षों में आठ दुर्घटनाएं, जिनमें छह घातक थीं, और 100 से अधिक मौतें गिनी थीं। ये आंकड़े एक-दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल नहीं किए जा सकते।
अगले ठोस कदमों में संसद में विचार-विमर्श, विधेयकों की मंजूरी और उनका क्रियान्वयन, ऑडिट की समयसारिणी स्पष्ट करना तथा सुधारात्मक कार्रवाई योजना पर प्रगति के साक्ष्य देना शामिल हैं। मौजूदा देरी से जुड़ी रिपोर्टों में शीतकालीन सत्र की कोई निश्चित तारीख, ऑडिट की नई तारीख या यूरोप के प्रतिबंध हटाने का फैसला घोषित नहीं किया गया है। जून 2026 में काठमांडू में शुरू हुआ ईयू विमानन सुरक्षा सहयोग तकनीकी जुड़ाव जारी रखता है, लेकिन इससे प्रतिबंध हटने की समयसीमा तय नहीं होती।
मुख्य बिंदु
- विमानन से जुड़े दो विधेयक देर से पेश होने से जनवरी 2027 के मध्य तक सुधार का नेपाल का लक्ष्य खतरे में है।
- विमानन अधिकारियों के अनुसार, मई 2027 के प्रस्तावित आईसीएओ ऑडिट के लिए दस्तावेज तैयार करने की समयसीमा नवंबर 2026 के आसपास है।
- नेपाल ऑडिट की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध करने की योजना बना रहा है; नई तारीख को मंजूरी मिलने की घोषणा नहीं हुई है।
- ईयू नियामक और सेवा कार्यों की स्वतंत्रता चाहता है, किसी खास विधायी बंटवारे की अनिवार्य मांग नहीं करता।
- विधेयक सुरक्षा निगरानी को हवाई अड्डा संचालन, नेविगेशन सेवाओं और बुनियादी ढांचे के विकास से अलग करेंगे।
- कानून पारित होने के साथ-साथ नियुक्तियां, कर्मचारी तैनाती और क्रियान्वयन के साक्ष्य भी अहम होंगे।
- नेपाली एयरलाइनों पर दिसंबर 2013 से ईयू के प्रतिबंध लागू हैं।






