पुतराजया में वापसी और मान्यता का मेल
प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने 8 अक्टूबर को कहा कि मलेशिया ने इस साल अब तक म्यांमार के 10,493 नागरिकों को वापस भेजा है। यह घोषणा ऐसे समय हुई जब उनकी सरकार ने सैन्य नेता मिन आंग ह्लाइंग की मेजबानी की और म्यांमार की आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन) में अधिक पूर्ण भागीदारी की दिशा में काम करने का वादा किया। वार्ता में आव्रजन हिरासत में रखे 5,000 लोगों को वापस भेजने की योजना के साथ उस नेता के लिए कूटनीतिक रास्ता खोलने की पहल भी शामिल थी, जिसे क्षेत्रीय समूह की सर्वोच्च स्तर की बैठकों से अब भी बाहर रखा गया है।
विषय-सूची
- पुतराजया में वापसी और मान्यता का मेल
- नेताओं के बीच क्या चर्चा हुई
- वापसी के आंकड़े अलग-अलग समूहों के हैं
- सुरक्षा के आश्वासनों की जांच की मांग
- रोहिंग्या नागरिकता की शर्त
- आसियान के नियम बदले बिना संवाद
- घरेलू राजनीति और कूटनीतिक लाभ
- प्रवासी और प्रतिरोधी समूह यात्रा के विरोध में
- वार्ता के बाद क्या अनसुलझा है
- मुख्य बातें
हिरासत में रखे लोगों की वापसी की योजना के तहत पहला समूह 1,476 लोगों का था। वे 29 सितंबर को मलेशिया के लुमुत नौसैनिक अड्डे से म्यांमार नौसेना के तीन जहाजों पर रवाना हुए। उनकी रवानगी 7 और 8 अक्टूबर की यात्रा से पहले हुई, जिसके दौरान मिन आंग ह्लाइंग ने पुतराजया में अनवर से मुलाकात की और मलेशियाई कारोबारी नेताओं को संबोधित किया। मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी कि लौटाए गए लोगों को उत्पीड़न, जबरन सैन्य भर्ती या अन्य दुर्व्यवहारों का सामना करना पड़ सकता है।
अनवर ने सीधे बातचीत को सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने और शरणार्थियों को लेकर बढ़ते घरेलू विवाद का समाधान खोजने का तरीका बताया। आलोचकों ने इसे एक अलग लेन-देन के रूप में देखा: मलेशिया को निर्वासन में सहयोग मिल रहा है, जबकि म्यांमार के सैन्य नेतृत्व को आसियान की शांति योजना पर प्रगति दिखाए बिना सार्वजनिक स्वीकार्यता हासिल हो रही है।
इस यात्रा से वार्ता की एक व्यावहारिक सीमा भी उजागर हुई। अनवर चाहते हैं कि म्यांमार रोहिंग्या शरणार्थियों को स्वीकार करे, लेकिन मिन आंग ह्लाइंग ने कहा कि उनका प्रशासन केवल उन लोगों को स्वीकार करेगा जिनकी म्यांमार के नागरिक के रूप में पुष्टि हो। इस शर्त के कारण अधिकतर रोहिंग्या बाहर रह सकते हैं, जिन्हें म्यांमार की लगातार आई सरकारों ने नागरिकता से वंचित रखा है।
नेताओं के बीच क्या चर्चा हुई
मिन आंग ह्लाइंग का पेरदाना पुत्रा परिसर में आधिकारिक स्वागत हुआ। इसके बाद अनवर के साथ करीब आधे घंटे की निजी बैठक हुई। फिर दोनों देशों के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी व्यापक चर्चा में शामिल हुए। यात्रा के दौरान एक कारोबारी संवाद भी हुआ, जिसमें म्यांमार के नेता ने मलेशियाई कंपनियों से अपने देश में निवेश करने का आग्रह किया।
बैठक के बाद सार्वजनिक बयान में अनवर ने केंद्रीय मुद्दे को मलेशिया में म्यांमार के शरणार्थियों की स्थिति और उनकी जातीयता की परवाह किए बिना स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की संभावना बताया। मलेशियाई प्रधानमंत्री ने सीधे बातचीत का अपना कारण समझाया:
मेरा मानना है कि स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति आंग ह्लाइंग और म्यांमार के नेतृत्व के साथ सीधा संवाद और बातचीत आवश्यक है।
अनवर ने सुधारों और नीतिगत बदलावों के म्यांमार के घोषित प्रयासों का भी स्वागत किया, हालांकि उन्होंने कहा कि मलेशिया को वहां के हालात को लेकर अब भी चिंताएं हैं। म्यांमार को भविष्य में आसियान समुदाय में जगह देने के समर्थन से चर्चा का दायरा आव्रजन नियम लागू करने से आगे बढ़कर सैन्य नेतृत्व की क्षेत्रीय स्थिति तक पहुंच गया।
वापसी के आंकड़े अलग-अलग समूहों के हैं
द्विपक्षीय हिरासत योजना में शामिल 5,000 लोग जनवरी से अब तक मलेशिया से लौटाए गए कुल लोगों के समान नहीं हैं। अनवर ने शुरू में संसद को बताया था कि हवाई और समुद्री परिवहन के जरिये करीब 10,000 म्यांमार नागरिकों को वापस भेजा गया है। इसमें नेपीडॉ के अधिकारियों द्वारा आयोजित उड़ानें भी शामिल थीं। 8 अक्टूबर को उन्होंने अधिक सटीक संख्या 10,493 बताई।
म्यांमार के सैन्य अधिकारियों ने पहले कहा था कि जनवरी से मलेशिया से लौटे करीब 8,000 लोगों को उन्होंने स्वीकार किया है। यह मलेशिया के आंकड़े से लगभग 2,500 कम है। दोनों गणनाओं की अवधि और दायरे का सार्वजनिक रूप से मिलान नहीं किया गया है, इसलिए इस अंतर को इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि कोई एक आंकड़ा गलत है।
मलेशिया के गृह मंत्रालय ने कहा कि अगस्त के अंत में आव्रजन हिरासत केंद्रों में म्यांमार के 10,000 से अधिक नागरिक थे। घोषित 5,000 लोगों की योजना, अगर आंकड़े तुलनीय समूहों के बारे में हैं, तो हिरासत में रखी उस आबादी के आधे से भी कम को कवर करती है। 29 सितंबर को रवाना हुआ समूह इस योजना का करीब 29.5 प्रतिशत था। लक्ष्य में बदलाव न होने पर 3,524 लोग बाकी रह जाते हैं।
हिरासत और वापसी के इन आंकड़ों को शरणार्थी पंजीकरण की कुल संख्या से अलग रखना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) से जोड़े गए आंकड़ों के अनुसार, मलेशिया में म्यांमार के शरणार्थियों और शरण चाहने वालों की संख्या करीब 190,000 है। इनमें लगभग 126,000 रोहिंग्या शरण चाहने वाले कुआलालंपुर स्थित एजेंसी में पंजीकृत हैं। इनमें से कोई भी आंकड़ा यह नहीं बताता कि पंजीकृत कितने लोग हिरासत में हैं या वापसी कार्यक्रम में शामिल हैं।
सुरक्षा के आश्वासनों की जांच की मांग
अनवर ने संसद को बताया कि मलेशिया ने स्पष्ट कूटनीतिक प्रतिबद्धताएं मांगी थीं कि म्यांमार अपने नागरिकों को स्वीकार करेगा और उनके साथ बिना दुर्व्यवहार, दबाव या मानवाधिकार उल्लंघन के उचित व्यवहार करेगा। मलेशियाई अधिकारियों ने वापसी को स्वैच्छिक बताया है। विदेश मंत्रालय ने बातचीत को सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के इर्द-गिर्द रखा।
मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाया कि क्या ये आश्वासन गृहयुद्ध से जूझ रहे देश लौटने वाले लोगों की पर्याप्त सुरक्षा करते हैं। फोर्टिफाई राइट्स और ह्यूमन राइट्स वॉच ने आगे की वापसी से पहले यूएनएचसीआर को आव्रजन हिरासत केंद्रों तक तुरंत पहुंच देने की मांग की। उनकी मांग एक अहम अनिश्चितता पर केंद्रित है: क्या हर हिरासत में रखे व्यक्ति को वास्तव में स्वतंत्र और सोच-समझकर निर्णय लेने का मौका मिल सकता है।
यूएनएचसीआर संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी है और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय से अलग है। शरणार्थियों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले कर्मियों को केंद्रों तक पहुंच मिलने से शरण मांगने वाले लोगों की पहचान करने और उनके सामने मौजूद खतरों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। उचित व्यवहार का सरकारी वादा अपने आप यह साबित नहीं करता कि वापसी के लिए चुना गया हर व्यक्ति सुरक्षित रहेगा।
चेतावनियों में उत्पीड़न, दबाव और सैन्य भर्ती के जोखिमों का जिक्र है। ये खतरे हैं, सितंबर में लौटाए गए सभी 1,476 लोगों के साथ हुई पुष्टि की गई घटनाएं नहीं। यात्रा से जुड़े बयानों में उनकी वापसी के बाद के हालात का कोई सार्वजनिक विवरण या स्वतंत्र निगरानी की समय-सारणी सामने नहीं आई।
रोहिंग्या नागरिकता की शर्त
अनवर ने कहा कि हाल की वापसी में कोई रोहिंग्या शामिल नहीं था। यह सितंबर में रवाना हुए समूह के बारे में एक स्पष्ट आश्वासन है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि आगे की वापसी में रोहिंग्या शरणार्थियों या शरण चाहने वालों को शामिल किया जा सकता है या नहीं। अनवर का व्यापक रुख है कि म्यांमार को अपने नागरिकों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए, जिनमें रोहिंग्या भी शामिल हैं।
मिन आंग ह्लाइंग की नागरिकता की शर्त इस उद्देश्य और म्यांमार के प्रस्ताव के बीच अंतर पैदा करती है। लगातार आई सरकारों की नीतियों के कारण कई रोहिंग्या को नागरिक के रूप में मान्यता नहीं मिली है। इसलिए नागरिकता का प्रमाण मांगने से म्यांमार में जन्मे व्यक्ति की वापसी भी रुक सकती है।
यह अंतर सुरक्षा और नीति, दोनों के लिए अहम है। तत्काल कार्यक्रम से बाहर रहने पर रोहिंग्या ऐसी वापसी से बच सकते हैं जिसे मानवाधिकार समूह खतरनाक मानते हैं। लेकिन इससे यह भी हो सकता है कि कूटनीतिक पहल उस आबादी की स्थिति का समाधान न कर पाए, जो मलेशिया में शरणार्थियों पर चल रही घरेलू बहस के केंद्र में है।
2017 में म्यांमार की सेना के अभियान के बाद बड़ी संख्या में रोहिंग्या ने विदेशों में शरण ली थी। उस अभियान में 740,000 से अधिक लोगों को रखाइन राज्य से बांग्लादेश जाना पड़ा। मलेशियाई अधिकारियों ने शरणार्थियों को आश्रय देने को वित्तीय बोझ और सुरक्षा चिंता बताया है। इन दलीलों से यह साबित नहीं होता कि वापसी सुरक्षित है, न ही पुतराजया में घोषित नागरिकता की बाधा दूर होती है।
आसियान के नियम बदले बिना संवाद
अप्रैल में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद मिन आंग ह्लाइंग की मेजबानी करने वाला मलेशिया आसियान का पांचवां सदस्य देश था। इससे पहले वे थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम और लाओस जा चुके थे। समुद्री दक्षिण-पूर्व एशिया में उनकी मेजबानी करने वाला मलेशिया पहला देश था। इस क्रम से यात्रा का महत्व एक द्विपक्षीय आव्रजन समझौते से आगे बढ़ जाता है।
2021 से आसियान ने पांच-सूत्रीय सहमति लागू करने में विफलता के कारण वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधियों को अपनी सर्वोच्च स्तर की बैठकों से बाहर रखा है। 1 फरवरी के सैन्य तख्तापलट के बाद, जिसमें आंग सान सू ची के नेतृत्व वाला निर्वाचित प्रशासन हटा दिया गया था, मिन आंग ह्लाइंग ने अप्रैल 2021 में इस रूपरेखा पर सहमति दी थी।
इस सहमति में हिंसा तुरंत रोकने, सभी पक्षों के बीच संवाद, विशेष दूत के जरिये मध्यस्थता, आसियान के समन्वय केंद्र के माध्यम से मानवीय सहायता और सभी पक्षों से मिलने के लिए विशेष दूत की यात्रा का आह्वान किया गया है। ये राजनीतिक प्रक्रिया की शर्तें हैं, नेपीडॉ के अधिकारियों से केवल संपर्क बनाए रखने की मांग नहीं।
मलेशिया का कहना है कि मिन आंग ह्लाइंग की मेजबानी करना सेना समर्थित सरकार को मान्यता देना नहीं है। उसके विदेश मंत्रालय ने यात्रा को पांच-सूत्रीय सहमति और रचनात्मक व सिद्धांतसम्मत संवाद जारी रखने के आसियान के फैसले के अनुरूप बताया। फिलीपींस की विदेश मंत्री टेरेसा लाजारो ने कहा है कि यह सहमति आसियान की पसंदीदा रूपरेखा बनी हुई है। यात्रा के दौरान वरिष्ठ सैन्य नेताओं को आसियान शिखर सम्मेलनों में वापस लाने का कोई सामूहिक फैसला घोषित नहीं हुआ।
घरेलू राजनीति और कूटनीतिक लाभ
लोवी इंस्टीट्यूट के दक्षिण-पूर्व एशिया कार्यक्रम के निदेशक हंटर मार्स्टन ने मलेशिया की पहल को आंशिक रूप से जुलाई और अगस्त में जोहोर और नेगेरी सेम्बिलान में अनवर के गठबंधन को हुए चुनावी नुकसान से जोड़ा। उनके अनुसार, इन नतीजों से रोहिंग्या की मेजबानी के खिलाफ जनविरोध का जवाब देने का अनवर पर दबाव बढ़ा।
एएलटीसीन-बर्मा की संस्थापक डेबी स्टोथर्ड ने भी वापसी की पहल को प्रवासियों के प्रति शत्रुता के बीच चुनावी समर्थन हासिल करने की कोशिश बताया। ये राजनीतिक मंशा के आकलन हैं, अनवर की ओर से दी गई पुष्ट वजहें नहीं। प्रधानमंत्री का घोषित तर्क है कि मलेशिया अनिश्चितकाल तक शरणार्थियों को आश्रय नहीं दे सकता और उसे बातचीत के लिए किसी प्राधिकरण की जरूरत है।
मिन आंग ह्लाइंग को लाभ सिर्फ लौटने वालों को स्वीकार करने तक सीमित नहीं है। आधिकारिक स्वागत, वरिष्ठ अधिकारियों से बैठकें और कारोबारी नेताओं से संपर्क स्वीकार्यता और आर्थिक संबंध बढ़ा सकते हैं, जबकि आसियान की सामूहिक पाबंदियां लागू हैं।
मार्स्टन ने यात्रा के कूटनीतिक असर का वर्णन किया:
इससे आसियान में बंटवारा और गहरा होता है,
उन्हें चिंता थी कि अलग-अलग देशों की पहल सामूहिक दबाव कमजोर कर सकती हैं और फिलीपींस, सिंगापुर तथा इंडोनेशिया जैसे अधिक सख्त रुख अपनाने वाले देशों को मुश्किल स्थिति में डाल सकती हैं। उन्होंने इस पहल को म्यांमार के व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क बहाल करने के प्रयास का हिस्सा भी बताया।
प्रवासी और प्रतिरोधी समूह यात्रा के विरोध में
मलेशिया में म्यांमार के प्रवासी कामगारों का प्रतिनिधित्व करने वाले गठबंधन म्यांमार अफेयर्स अलायंस ने 7 अक्टूबर को देशव्यापी कामबंदी का आह्वान किया। 5 अक्टूबर के बयान में उसने नियोक्ताओं से कामगारों की परिस्थितियों को समझने की अपील की और कहा कि मिन आंग ह्लाइंग की मेजबानी से मलेशिया को राजनीतिक या आर्थिक लाभ नहीं होगा। इस आह्वान से यह पता नहीं चलता कि कितने कामगारों ने इसमें हिस्सा लिया।
गठबंधन के प्रवक्ता सो मिन थीन ने कहा कि वार्ता से प्रभावित लोगों के हित नेताओं के रिश्तों से ऊपर होने चाहिए:
सत्ता रखने वालों के बीच संवाद जरूरी नहीं कि जनता के हितों की पूर्ति करे। सबसे महत्वपूर्ण जनता की आवाज और उसकी इच्छा है,
फेडरल डेमोक्रेटिक यूनियन के उदय के लिए संचालन परिषद नाम के प्रतिरोधी गठबंधन ने 30 मार्च को मलेशिया से मिन आंग ह्लाइंग को वैधता न देने की अपील की थी। उसकी आपत्ति वापसी की शर्तों से आगे बढ़कर उस राजनीतिक अधिकार से जुड़ी है, जो सत्ता पर कब्जा करने वाले सैन्य नेता का स्वागत करने से मिलता है।
बर्मी रोहिंग्या ऑर्गनाइजेशन यूके ने भी स्वागत का विरोध किया। उसने अर्जेंटीना की एक संघीय अदालत द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट का हवाला दिया, जिसमें 2012 से 2017 के बीच रोहिंग्या के खिलाफ नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराधों का आरोप है। संगठन ने मलेशिया से मिन आंग ह्लाइंग को गिरफ्तार करने की अपील की। हालांकि, इस मांग से यह तय नहीं होता कि मलेशियाई अधिकारी उस वारंट पर क्या कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं या करेंगे।
वार्ता के बाद क्या अनसुलझा है
तत्काल अनसुलझे सवाल व्यावहारिक हैं: आगे की वापसी में किन लोगों को शामिल किया जाएगा, उनकी सहमति का आकलन कैसे होगा, क्या यूएनएचसीआर को हिरासत केंद्रों तक पहुंच मिलेगी और पहुंचने के बाद उनके साथ हुए व्यवहार की जांच कैसे होगी। वार्ता के विवरण में अगले प्रस्थान या 5,000 लोगों के कार्यक्रम को पूरा करने की कोई पक्की तारीख घोषित नहीं की गई।
आईएसईएएस-युसोफ इशाक संस्थान में म्यांमार अध्ययन कार्यक्रम की वरिष्ठ फेलो और समन्वयक मो थुजार ने संपर्क के रास्ते खुले रखने का समर्थन किया, लेकिन चेताया कि संवाद को प्रतिबद्धताओं के पालन और जवाबदेही के आधार पर परखना चाहिए। उन्होंने म्यांमार के अन्य पक्षों से भी संपर्क जारी रखने का आग्रह किया, जिनमें राष्ट्रीय एकता सरकार शामिल है। यह मुख्य विपक्षी संगठन खुद को देश की वैध सरकार मानता है।
म्यांमार मामलों के विशेषज्ञ यू विन मिन ने भी सैन्य नेतृत्व से गहरे संपर्क पर चिंता जताई, हालांकि उन्होंने इन संपर्कों को आसियान की अपरिवर्तित सामूहिक पाबंदियों से अलग बताया। यह अंतर अहम है: द्विपक्षीय स्तर पर पहुंच बढ़ी है, लेकिन क्षेत्रीय समूह में पूर्ण पुनःएकीकरण पर सहमति नहीं बनी।
घटनाक्रम से वापसी कार्यक्रम और कूटनीतिक पहल का क्रम सामने आता है:
- फरवरी 2021: सेना ने सत्ता पर कब्जा कर म्यांमार के निर्वाचित प्रशासन को हटा दिया।
- अप्रैल 2021: मिन आंग ह्लाइंग ने आसियान की पांच-सूत्रीय सहमति पर सहमति दी।
- अगस्त का अंत: मलेशिया ने बताया कि आव्रजन हिरासत में म्यांमार के 10,000 से अधिक नागरिक हैं।
- 29 सितंबर: म्यांमार नौसेना के तीन जहाज 1,476 लौटने वालों के साथ लुमुत से रवाना हुए।
- 5 अक्टूबर: म्यांमार अफेयर्स अलायंस ने यात्रा के विरोध में अपनी अपील जारी की।
- 7 और 8 अक्टूबर: मिन आंग ह्लाइंग राजनीतिक और कारोबारी चर्चा के लिए मलेशिया आए।
- 8 अक्टूबर: अनवर ने उस साल अब तक 10,493 लोगों की वापसी की घोषणा की और आसियान से नजदीकी संबंधों का समर्थन करने का वादा किया।
इसलिए पहल का अगला पैमाना केवल एक और कूटनीतिक स्वागत नहीं होगा। अहम यह है कि क्या मलेशिया सुरक्षित और स्वैच्छिक वापसी सुनिश्चित कर सकता है और क्या बढ़ा हुआ संपर्क आसियान की पहले से अपनाई गई शांति प्रतिबद्धताओं पर प्रगति कराता है।
मुख्य बातें
- मलेशिया का कहना है कि इस साल अब तक म्यांमार के 10,493 नागरिकों को वापस भेजा गया है।
- हिरासत में रखे 5,000 लोगों के लिए अलग कार्यक्रम है; 1,476 लोग 29 सितंबर को समुद्र के रास्ते रवाना हुए।
- अनवर ने 7 और 8 अक्टूबर को मिन आंग ह्लाइंग की मेजबानी की और आसियान में म्यांमार की भविष्य में अधिक पूर्ण भागीदारी का समर्थन किया।
- मानवाधिकार समूह आगे की वापसी से पहले हिरासत में रखे लोगों तक यूएनएचसीआर की पहुंच चाहते हैं।
- अनवर ने कहा कि हाल की रवानगी में कोई रोहिंग्या शामिल नहीं था; म्यांमार की नागरिकता संबंधी शर्त भविष्य में अधिकतर रोहिंग्या को स्वीकार किए जाने से रोक सकती है।
- वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की भागीदारी पर आसियान की पाबंदियां अपरिवर्तित हैं।
- बाकी लोगों की वापसी के लिए कोई पक्की समयसीमा या स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था घोषित नहीं की गई।






