ताइवान के पास जापान के ड्रोन और मिसाइल जमावड़े को चीनी सेना ने बताया खतरनाक दांव

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ताइवान के पास जापान के ड्रोन और मिसाइल जमावड़े को चीनी सेना ने बताया खतरनाक दांव

पीएलए के मुखपत्र ने टोक्यो पर रक्षात्मक दावों की आड़ में आक्रामक हथियार छिपाने का आरोप लगाया

पीएलए ने जापान पर ताइवान के पास दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों पर उपग्रह-सहायता प्राप्त ड्रोन तैनात करने की योजना के जरिए खतरनाक दांव खेलने का आरोप लगाया है। रविवार को प्रकाशित एक टिप्पणी में पीएलए डेली ने कहा कि टोक्यो का दावा है कि वह बहुस्तरीय तटीय रक्षा प्रणाली बना रहा है, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की प्रकृति स्पष्ट रूप से आक्रामक है। अखबार ने कहा कि इसे ढाल कहा जा रहा है, लेकिन असल में यह भाला है। ये टिप्पणियां तब से बीजिंग की सबसे कड़ी चेतावनियों में शामिल हैं, जब से टोक्यो ने रयूक्यू द्वीपसमूह में अपना सैन्य जमावड़ा तेज किया है। यह 55 से अधिक द्वीपों की शृंखला है, जो ताइवान की ओर फैली हुई है। चीनी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि लंबी दूरी के ड्रोन, स्टैंडऑफ मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों का मेल जापान को चीनी क्षेत्र के भीतर दूर तक हमला करने की क्षमता देता है, जबकि उसकी अपनी सेना तत्काल खतरे से बाहर रहती है।

विषय-सूची
  1. पीएलए के मुखपत्र ने टोक्यो पर रक्षात्मक दावों की आड़ में आक्रामक हथियार छिपाने का आरोप लगाया
  2. आरोपों के पीछे का हथियार भंडार
  3. योनागुनी द्वीप बना अग्रिम मोर्चा
  4. मित्र देशों के अभ्यास और अमेरिकी सैन्य तैनाती
  5. बीजिंग ने सैन्य दायरे से बाहर भी जवाबी कार्रवाई बढ़ाई
  6. जापानी सुरक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव
  7. टोक्यो और बीजिंग का अंतिम लक्ष्य
  8. मुख्य बिंदु

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में संशोधन और आत्मरक्षा बलों की भूमिका का विस्तार करने पर जोर दिया है। यह योनागुनी द्वीप और ताइवान के बीच चीनी ड्रोन की बार-बार हुई उड़ानों के बाद भी आई है, जिनके चलते हाल के महीनों में जापानी लड़ाकू विमानों को उड़ान भरनी पड़ी। दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों को लेकर तनाव उस बिगड़ती प्रतिद्वंद्विता के केंद्र में है, जिसमें अब सैन्य शक्ति प्रदर्शन के साथ आर्थिक जवाबी कार्रवाई और कूटनीतिक धमकियां भी शामिल हैं।

आरोपों के पीछे का हथियार भंडार

जापान 1,000 किलोमीटर, यानी लगभग 620 मील से अधिक दूरी तक उड़ान भरने वाले मानवरहित हवाई तंत्र हासिल करने की योजना बना रहा है। ये ड्रोन टाइप 25 सतह से जहाज पर मार करने वाली मिसाइल और टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के साथ काम करेंगे। इससे जापानी क्षेत्र से पूर्वी चीन सागर में समुद्री और जमीनी लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम बहुस्तरीय प्रहार प्रणाली बनेगी। ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के लिए देश में विकसित टाइप 25 मिसाइल लगभग 1,500 किलोमीटर तक पहुंच सकती है, जिससे चीनी मुख्यभूमि के बंदरगाह और हवाई अड्डे इसकी मारक सीमा में आ जाते हैं। इसके अलावा, जापान अमेरिका से 400 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहा है। इनमें से हर मिसाइल की मारक दूरी लगभग 1,600 किलोमीटर है, जिससे नौसैनिक पोत दुश्मन की नजदीकी मारक क्षमता के दायरे में गए बिना अंदरूनी इलाकों के लक्ष्यों पर हमला कर सकते हैं।

दक्षिण-पश्चिमी जापान में उन्नत टाइप 12 जमीन से जहाज पर मार करने वाली मिसाइल भी सेवा में शामिल हो रही है। मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित इसकी विस्तारित दूरी वाला मॉडल लगभग 1,000 किलोमीटर तक जा सकता है, जो मूल 200 किलोमीटर वाले संस्करण से पांच गुना अधिक है। मार्च की शुरुआत में कुमामोतो प्रांत के केंगुन कैंप में रात के समय गोपनीय अभियान के तहत लॉन्चर पहुंचाए गए। स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध किया और शिकायत की कि प्रांत को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई थी। मिसाइलों के मार्च के अंत तक संचालन में आने की उम्मीद है। इस साल के आखिर में शिजुओका के फूजी कैंप में भी इनकी तैनाती की योजना है। जापान ने ओकिनावा, इशिगाकी और मियाको द्वीपों पर पीएसी-3 इंटरसेप्टर और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें तैनात की हैं, जिससे पहली द्वीप शृंखला के साथ मिसाइल सुरक्षा का एक घेरा बनता है।

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योनागुनी द्वीप बना अग्रिम मोर्चा

ताइवान से लगभग 110 किलोमीटर पूर्व में स्थित योनागुनी द्वीप जापानी क्षेत्र के पश्चिमी छोर पर है। साफ मौसम में वहां से ताइवान का समुद्रतट दिखाई देता है। यह द्वीप जापानी और अमेरिकी बलों का तेजी से व्यस्त होता केंद्र बन गया है। टोक्यो की योजना अब मार्च 2031 तक वहां सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें तैनात करने की है। रक्षा मंत्री शिन्जिरो कोइज़ुमी ने द्वीप के दौरे के दौरान यह समयसीमा घोषित की और कहा कि ये प्रणालियां क्षेत्र को खतरा पहुंचाने वाले विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकेंगी। इस प्रस्तावित तैनाती के साथ पहली बार अधिकारियों ने योनागुनी में हवाई सुरक्षा तैनात करने की पक्की समयसीमा दी है।

इस द्वीप पर पहले भी अमेरिकी मरीन तैनात हो चुके हैं। उन्होंने 2024 के आखिर में और फिर 2025 में फॉरवर्ड आर्मिंग एंड रिफ्यूलिंग पॉइंट, यानी एफएआरपी, स्थापित किया था। यह अस्थायी केंद्र हेलीकॉप्टर गश्त की दूरी बढ़ाता है और संकट की स्थिति में मोबाइल जहाज-रोधी बैटरियों के लिए जमावड़ा स्थल बन सकता है। नवंबर 2025 में जापानी लड़ाकू विमानों ने योनागुनी और ताइवान के बीच उड़ रहे संदिग्ध चीनी निगरानी ड्रोन को रोकने के लिए उड़ान भरी। ऐसी कई घटनाओं ने द्वीप के रणनीतिक महत्व को उजागर किया है। जापान वायु आत्मरक्षा बल का दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा क्षेत्र अब इस जलमार्ग पर करीबी नजर रखता है और विदेशी गतिविधियों का दस्तावेजीकरण करने के लिए हर घुसपैठ के बाद उड़ान मार्गों के नक्शे जारी करता है।

विश्लेषकों का कहना है कि मियाको जलडमरूमध्य के रास्ते पश्चिमी प्रशांत महासागर तक चीनी नौसेना की पहुंच रोकने के लिए यह द्वीप आदर्श स्थिति में है। यह जलडमरूमध्य पीएलए नौसेना के लिए एक अहम मार्ग है। मरीन कॉर्प्स का सिद्धांत किसी भी संघर्ष से पहले विरोधी के हथियारों की मारक सीमा के भीतर सैनिक तैनात करने की बात कहता है। योनागुनी ताइवान से केवल 67 मील दूर एक ठिकाना उपलब्ध कराता है। एनएमईएसआईएस जहाज-रोधी प्रणाली जैसे हथियार, जो नेवल स्ट्राइक मिसाइलों से लैस हैं, द्वीप के लिए संभावित विकल्पों के तौर पर चर्चा में रहे हैं। हालांकि, संकट के दौरान उन्हें वहां पहुंचाना बेहद कठिन होगा, क्योंकि पीएलए की मिसाइल और हवाई क्षमताएं व्यापक हैं।

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मित्र देशों के अभ्यास और अमेरिकी सैन्य तैनाती

पहली द्वीप शृंखला के साथ समन्वय मजबूत करने के उद्देश्य से तैनाती और संयुक्त अभ्यासों के जरिए अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। अप्रैल 2025 में अमेरिकी सेना ने घोषणा की कि वह उन्हीं जलक्षेत्रों में चीनी ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एमक्यू-4सी ट्राइटन निगरानी ड्रोन ओकिनावा के कडेना एयर बेस भेजेगी। हाल ही में जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के लगभग 300 सैनिकों और अमेरिकी मरीन कॉर्प्स की 12वीं मरीन लिटोरल रेजिमेंट के करीब 20 सदस्यों ने 17 से 22 मई तक मियाको, इशिगाकी और योनागुनी द्वीपों पर अभ्यास किया। अभ्यासों में मियाको पर कमान केंद्र का प्रशिक्षण, इशिगाकी पर तट-आधारित जहाज-रोधी मिसाइलों की रसद और योनागुनी पर स्कैन ईगल 2 ड्रोन से मानवरहित टोही उड़ानें शामिल थीं।

12वीं मरीन लिटोरल रेजिमेंट एक्सपेडिशनरी एडवांस्ड बेस ऑपरेशंस में विशेषज्ञता रखती है। इस अवधारणा के तहत छोटी, मोबाइल टीमें बाहरी द्वीपों पर मिसाइल और सेंसर केंद्र स्थापित करती हैं। अभ्यासों में मियाको द्वीप पर ग्राउंड कंपोनेंट कमांड के अभ्यास के दौरान जापानी और अमेरिकी कर्मियों से बना पहला संयुक्त समन्वय केंद्र भी शामिल था। अमेरिकी फोर्सेज कोरिया के कमांडर जनरल ज़ेवियर ब्रनसन ने हाल ही में एक ‘किल वेब’ का प्रस्ताव रखा, जो अमेरिकी, जापानी, दक्षिण कोरियाई और फिलीपीन बलों को पहली द्वीप शृंखला में फैले एक संयुक्त संचालन नेटवर्क में जोड़ेगा। फिलीपींस में बालिकातान अभ्यास के दौरान इस विचार का परीक्षण किया गया, जिसमें लूज़ोन जलडमरूमध्य से चीनी नौसेना का रास्ता रोकने की स्थिति का अभ्यास किया गया। नानसेई द्वीपों के अभ्यासों को इसी नेटवर्क का उत्तरी आधार माना जाता है।

बीजिंग में अमेरिका की बढ़ती मौजूदगी पर नजर रही है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने सहयोगी देशों पर अंतरिक्ष के हथियारीकरण और सैन्यीकरण में तेजी लाने तथा हथियारों की होड़ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वॉशिंगटन ने हाल ही में ताइवान को 700 मिलियन डॉलर की एनएएसएएमएस वायु रक्षा प्रणालियों की बिक्री और विमान के कलपुर्जों का 330 मिलियन डॉलर का सौदा मंजूर किया। इससे प्रतिरोध की उन परतों में इजाफा हुआ है, जिन्हें बीजिंग घेराबंदी के रूप में देखता है।

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बीजिंग ने सैन्य दायरे से बाहर भी जवाबी कार्रवाई बढ़ाई

चीन ने सैन्य जमावड़े के जवाब में ऐसे कदम उठाए हैं जो नौसैनिक गश्त और ड्रोन उड़ानों से कहीं आगे तक जाते हैं। प्रधानमंत्री ताकाइची ने 2025 के आखिर में संकेत दिया था कि चीन के ताइवान पर हमला करने की स्थिति में जापान संभवतः सैन्य रूप से शामिल होगा। इसके बाद बीजिंग ने अपने नागरिकों को जापान की यात्रा न करने की सलाह दी, पुनः सैन्यीकरण से जुड़ी 40 जापानी संस्थाओं को निर्यात पर पाबंदियां लगाईं और टोक्यो के यूनो चिड़ियाघर से विशाल पांडा वापस बुला लिए। ये पांडा लंबे समय से द्विपक्षीय मित्रता का प्रतीक रहे हैं। चीनी पर्यटक जापान की अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग 11 अरब डॉलर का योगदान देते हैं, इसलिए यात्रा संबंधी चेतावनी एक स्पष्ट आर्थिक संकेत थी। वाणिज्य मंत्रालय ने 20 कंपनियों को निर्यात नियंत्रण सूची में और 20 अन्य को निगरानी सूची में रखा। टोक्यो ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इन कदमों को निंदनीय बताया।

द्विपक्षीय व्यापार दोनों पक्षों पर एक मजबूत अंकुश बना हुआ है। 2005 से चीन जापान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार 322 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जापान चीन को निर्यात करने की तुलना में वहां से लगभग 43 अरब डॉलर अधिक का आयात करता है, जिससे ऐसी निर्भरता बनती है जिसका फायदा उठाने के लिए बीजिंग तैयार दिखता है। चीन पर विशेष ध्यान देने वाले भू-राजनीतिक विश्लेषक अर्नॉ बर्ट्रां ने तर्क दिया कि जापान की सैन्य मुद्रा मजबूत करने के साथ एक बुनियादी विरोधाभास सामने आता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की आर्थिक परस्पर निर्भरता के कारण टोक्यो के लिए हथियारों की होड़ टिकाऊ नहीं है।

जापान एक साथ चीन के खिलाफ सैन्यीकरण नहीं कर सकता और उस आर्थिक रिश्ते को भी कायम नहीं रख सकता जिस पर उसकी समृद्धि निर्भर है। किसी मोड़ पर टोक्यो को चुनाव करना होगा और बीजिंग उस चुनाव को जितना संभव हो उतना स्पष्ट बनाने की कोशिश कर रहा है।

जापानी जलक्षेत्रों के पास चीनी सैन्य दबाव भी तेज हुआ है। सितंबर 2024 में पीएलए नौसेना का लियाओनिंग कैरियर स्ट्राइक ग्रुप योनागुनी और इरिओमोटे द्वीप के बीच से गुजरा। अब ऊंचाई पर उड़ने वाले निगरानी ड्रोन योनागुनी और ताइवान के बीच के जलमार्ग से नियमित रूप से गुजरते हैं। हर उड़ान के बाद जापान वायु आत्मरक्षा बल के लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं और कार्रवाई-जवाबी कार्रवाई का ऐसा चक्र चलता है, जिसका इस्तेमाल दोनों पक्ष आगे खर्च बढ़ाने को सही ठहराने के लिए करते हैं।

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जापानी सुरक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

मौजूदा सैन्य जमावड़े की नींव एक दशक से भी पहले शुरू हुए नीतिगत बदलावों में है। 2014 में आबे सरकार ने विवादास्पद ढंग से शांतिवादी संविधान की नई व्याख्या की, जिससे सीमित सामूहिक आत्मरक्षा की अनुमति मिली और जापानी बलों की भूमिका सख्त क्षेत्रीय रक्षा से आगे बढ़ी। इस नई व्याख्या ने अमेरिका के साथ करीबी सहयोग का रास्ता खोला और रयूक्यू द्वीपशृंखला में अब आकार ले रही तैनातियों की शुरुआत की। विश्लेषकों का कहना है कि हर कदम को सीमित और रक्षात्मक बताकर पेश किया गया। 2016 में योनागुनी पर तटीय निगरानी शुरू हुई, 2023 में इशिगाकी तक मिसाइलें पहुंचीं, फिर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाइयां तैनात हुईं और अब लंबी दूरी के ड्रोन तथा स्टैंडऑफ हथियार इस बदलाव को पूरा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ताकाइची ने ताइवान संघर्ष की आशंका को जापानी सैन्य तैयारियों से स्पष्ट रूप से जोड़कर अपने पूर्ववर्तियों से आगे कदम बढ़ाया है। पिछले नवंबर में संसद में दिए बयान के दौरान उन्होंने ताइवान संकट की स्थिति में जापान की सैन्य भागीदारी की संभावना उठाई। यह इस मुद्दे पर लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टता से बड़ा बदलाव था। उनकी टिप्पणियां ताइवान पर जापानी औपनिवेशिक शासन के अंत की 80वीं वर्षगांठ के कुछ ही समय बाद आईं, जिससे बीजिंग के लिए ऐतिहासिक संवेदनशीलता और बढ़ गई। चीनी विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों की निंदा की और मांग की कि जापान अपने युद्ध अपराधों के लिए पूरी तरह पश्चाताप करे और ताइवान के मुद्दे पर आग से खेलना बंद करे।

सेंटर फॉर इंटरनेशनल गवर्नेंस इनोवेशन के वरिष्ठ फेलो एइनार टैंगेन ने चेतावनी दी कि जापान की मिसाइल तैनाती योजनाएं अलग-थलग कदम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समयसीमा को प्रधानमंत्री ताकाइची के कूटनीतिक कार्यक्रम के साथ जानबूझकर जोड़ा गया है।

जापान का यह फैसला क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाली सोची-समझी उकसावे की कार्रवाई है। ये कदम निर्वात में नहीं उठाए जा रहे हैं। इन्हें वॉशिंगटन दौरे से पहले प्रधानमंत्री साने ताकाइची की स्थिति मजबूत करने के लिए तय समय पर उठाया जा रहा है।

टैंगेन ने कहा कि वॉशिंगटन यात्रा से पहले यह समय ताकाइची की बातचीत की स्थिति मजबूत करता है। वहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा की अधिक जिम्मेदारी उठाने का दबाव डाला है। जापानी मंत्रिमंडल ने नौ ट्रिलियन येन से अधिक का रिकॉर्ड रक्षा बजट मंजूर किया, जो लगभग 58 अरब डॉलर है। इसमें खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्रतिशत तक दोगुना करने की योजना है। बजट में ‘शील्ड’ नामक ढांचे के लिए 100 अरब येन रखे गए हैं, जिसके तहत मार्च 2028 तक बड़ी संख्या में हवाई, सतही और पानी के भीतर काम करने वाले मानवरहित तंत्र तैनात किए जाएंगे।

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टोक्यो और बीजिंग का अंतिम लक्ष्य

जापान की तेज की गई समयसीमा टोक्यो में तात्कालिकता की भावना का संकेत देती है। अधिकारियों ने टाइप 12 मिसाइलों की तैनाती एक साल आगे कर दी और रक्षा मंत्री ने योनागुनी की हवाई सुरक्षा के लिए पक्की समयसीमा तय की है। विश्लेषकों का कहना है कि टोक्यो को लगता है कि चीनी क्षमताएं चुनौती देने के लिहाज से बहुत शक्तिशाली हो जाएं, उससे पहले अग्रिम ठिकाने स्थापित करने का अवसर तेजी से बंद हो रहा है। कोइज़ुमी का जोर है कि योनागुनी के लिए नियोजित टाइप 03 चू एसएएम सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें रक्षात्मक हैं और उनका मकसद दूसरे देशों पर हमला करना नहीं, बल्कि द्वीप की रक्षा करना है। फिर भी, जैसे-जैसे मारक दूरी बढ़ रही है और हथियार प्रणालियों की संख्या बढ़ रही है, रक्षा और आक्रमण के बीच की रेखा धुंधली हो गई है। पूर्वी चीन सागर के ऊपर मिसाइलों को रोकने में सक्षम ढाल उसी ठिकाने से संचालित होने वाले हमलावर विमानों और मिसाइलों को भी सुरक्षा देती है।

बीजिंग के लिए ताइवान अब भी वही मुद्दा है जिसे अधिकारी ‘मुख्य हितों का मूल’ कहते हैं। विश्लेषक बर्ट्रां के अनुसार, यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर चीनी समाज, सरकार और सेना के बीच वास्तविक सहमति है। किसी भी ताइवान संघर्ष में जापान की स्पष्ट भागीदारी और चीनी मुख्यभूमि तक पहुंचने वाले हथियारों का मेल ऐतिहासिक शिकायतों और क्षेत्रीय दावों को छूता है, जिन पर कोई भी पक्ष समझौता करता नहीं दिखता। इसका नतीजा एक ऐसा सुरक्षा-दुविधा वाला माहौल है, जिसमें एक शक्ति का हर रक्षात्मक कदम दूसरी को आक्रामक खतरा लगता है। इससे दोनों देश कूटनीति की रफ्तार से आगे हथियार बढ़ाने लगते हैं।

ताइवान के आसपास कई तरह की परिस्थितियों के लिए दोनों देश तैयारी कर रहे हैं। इस बीच दक्षिण-पश्चिमी द्वीप शांत परिधि से बदलकर एशिया के सबसे अधिक सैन्यीकृत गलियारों में से एक बन गए हैं। यह सैन्य जमावड़ा संघर्ष को रोकता है या उसे अधिक संभावित बनाता है, यह टोक्यो, बीजिंग और वॉशिंगटन में लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करता है। फिलहाल ड्रोन, मिसाइलें और संयुक्त अभ्यास संकेत देते हैं कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।

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मुख्य बिंदु

  • पीएलए डेली ने जापान पर आक्रामक सैन्य क्षमताओं को रक्षात्मक तटीय सुरक्षा के रूप में पेश करने का आरोप लगाया और ड्रोन तथा मिसाइल योजनाओं को खतरनाक दांव बताया।
  • जापान लंबी दूरी के ड्रोन, उन्नत टाइप 12 मिसाइलें, टाइप 25 स्टैंडऑफ हथियार और 400 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात कर रहा है, जो चीन के भीतर दूर तक लक्ष्यों पर हमला कर सकती हैं।
  • ताइवान से लगभग 110 किलोमीटर पूर्व में स्थित योनागुनी द्वीप पर मार्च 2031 तक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें तैनात करने की योजना है। इसके साथ जापानी और अमेरिकी बलों के संयुक्त अभ्यासों का विस्तार भी हो रहा है।
  • प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने जापान की सैन्य तैयारियों को ताइवान संकट की संभावित स्थिति से जोड़ा है, जिससे दशकों से चली आ रही अस्पष्टता खत्म हुई है।
  • चीन ने निर्यात प्रतिबंधों, यात्रा चेतावनियों, बार-बार होने वाली नौसैनिक गश्त और जापानी क्षेत्र के पास ड्रोन उड़ानों के जरिए जवाबी कार्रवाई की है।
  • जापान ने जीडीपी के लगभग 2 प्रतिशत के बराबर रिकॉर्ड रक्षा बजट मंजूर किया है। इससे ‘शील्ड’ ढांचे के तहत मानवरहित प्रणालियों को वित्तपोषण और मिसाइल तैनाती की समयसीमा तेज करने में मदद मिलेगी।
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