मजबूरी पर टिकी वित्तीय जीवनरेखा
म्यांमार की सैन्य जुंटा ने विदेशों में काम करने वाले अपने नागरिकों की कमाई को देश में आने वाली विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा स्रोत बना दिया है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में कामगारों द्वारा भेजी गई रकम 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर (7.1 अरब सिंगापुर डॉलर) तक पहुंच गई, जो देश में आने वाली कुल विदेशी पूंजी का लगभग 38 प्रतिशत है। फरवरी 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद के साल 2022 में यह रकम महज 670 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी। इस भारी उछाल की सीधी वजह 2024 में लागू किए गए दबावपूर्ण नियम हैं, जिनके तहत प्रवासी कामगारों को अपनी आय का 25 प्रतिशत राज्य-नियंत्रित आधिकारिक बैंकिंग माध्यमों से भेजना अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और लंबे समय से जारी गृह संघर्ष के बीच विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहे शासन के लिए ये जबरन भेजी गई रकम अस्तित्व बनाए रखने का जरूरी साधन बन गई है।
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इस बढ़ोतरी का पैमाना स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन काउंसिल की गहराती आर्थिक बदहाली दिखाता है, जैसा कि जुंटा खुद को कहती है। इसी आंकड़े के मुताबिक, महंगाई करीब 30 प्रतिशत बनी हुई है और 2025 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश घटकर महज 83 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया। इसके मुकाबले, अब प्रवासियों से आने वाली रकम पूंजी के हर दूसरे वैध स्रोत से कहीं अधिक है। जोखिम खुफिया कंपनी वेरिस्क मैपलक्रॉफ्ट के प्रमुख एशिया विश्लेषक डॉ. काहो यू ने कहा कि ये रकम गंभीर दबाव में चल रही, कड़े नियंत्रण वाली बैंकिंग प्रणाली को विदेशी मुद्रा की तरलता स्थिर करने में अहम सहारा दे रही है। इस नीति के जरिए लाखों प्रवासियों की आर्थिक मजबूरी को सीधे शासन के खजाने की आय में बदल दिया गया है।
म्यांमार के अधिकारियों ने धन भेजने के इन नियमों को रकम को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के जरिए लाने और अनौपचारिक हस्तांतरण पर अंकुश लगाने की कोशिश बताया है। उनका तर्क है कि पैसे को विनियमित खातों में लाने से केंद्रीय बैंक को विनिमय दर संभालने और जरूरी आयात के लिए पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। लेकिन मार्च 2024 तक विदेशी मुद्रा भंडार करीब 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर होने के बावजूद, लगभग 5.4 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए यह सुरक्षा भंडार बहुत कम है। तख्तापलट के बाद से केंद्रीय बैंक 30 ट्रिलियन क्याट से अधिक की मुद्रा छाप चुका है, जो 2020 के स्तर से दस गुना है। इससे बेलगाम महंगाई बढ़ी और मुद्रा का मूल्य 80 प्रतिशत गिर गया। इस पृष्ठभूमि में, धन भेजने से हुई यह आमदनी विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन से ज्यादा आपातकालीन वसूली जैसी लगती है।
नियम लागू कराने का तंत्र
नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जुंटा ने निगरानी का ऐसा तंत्र बनाया है, जिसकी पहुंच सीमाओं के पार और प्रवासी कामगारों की रोजमर्रा की जिंदगी तक है। 30 अगस्त 2024 को 13 सदस्यीय समिति बनाई गई। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्रालय के ब्रिगेडियर जनरल विन म्यिंट खाइंग करते हैं। इसमें सैन्य खुफिया, सैन्य सुरक्षा मामलों के प्रमुख का कार्यालय, पुलिस की विशेष शाखा और वित्त, विदेश, आव्रजन तथा श्रम समेत कई मंत्रालयों के अधिकारी शामिल हैं। यह समिति सीधे विदेशी मुद्रा पर्यवेक्षण समिति को रिपोर्ट करती है, जो विनिमय दर स्थिर रखने का काम करती है और ईंधन, दवा, उर्वरक तथा निर्माण सामग्री जैसे जरूरी आयातों पर विदेशी मुद्रा खर्च की अनुमति देती है।
नियम लागू कराने का तरीका नौकरशाही दबाव पर निर्भर है। आधिकारिक सहमति ज्ञापन (एमओयू) के तहत विदेश जाने वाले प्रवासी कामगारों को रवाना होने से पहले शासन द्वारा विनियमित बैंकों में संयुक्त खाते खोलने होते हैं, फिर हर महीने या तिमाही अपनी कमाई का 25 प्रतिशत भेजना होता है। नियम न मानने वालों के पासपोर्ट का नवीनीकरण रोका जा सकता है। इससे वे विदेश में कानूनी स्थिति के बिना फंस सकते हैं या घर लौटने के बाद दोबारा देश से बाहर नहीं जा पाते। रोजगार एजेंसियों पर अपने कामगारों की निगरानी का दबाव है और गंतव्य देशों में शासन के प्रतिनिधि धन भेजने के प्रवाह पर सक्रिय नजर रखते हैं। थाईलैंड में, जहां म्यांमार के लगभग 50 लाख लाइसेंसशुदा और बिना लाइसेंस वाले प्रवासी काम करते हैं, जुंटा के श्रम मंत्रालय ने अगस्त 2024 में इन नियमों को लागू करना शुरू किया। लाओस के अधिकारियों से भी कामगारों को औपचारिक माध्यम अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है।
भुगतान में पीछे रहने वाले कामगारों को अपनी स्थिति से परे भी नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। अधिकारों की पैरवी करने वाले समूहों के मुताबिक, रकम भेजने में चूक होने पर म्यांमार में उनके परिवारों से संपर्क किया जा सकता है। इससे अप्रत्यक्ष दबाव की ऐसी व्यवस्था बनती है जिसमें रिश्तेदारों को नियम लागू कराने का जरिया बना दिया जाता है।
जमीनी स्तर पर मानवीय कीमत
कामगारों के लिए इस नीति का मतलब तुरंत आर्थिक मुश्किलें हैं। थाईलैंड में प्रवासियों का कहना है कि उन्हें हर महीने कम से कम 2,500 बाट भेजने को कहा जाता है, जो कभी-कभी उनकी वास्तविक मजदूरी के 25 प्रतिशत से भी अधिक होता है। बहुत से प्रवासी न्यूनतम मजदूरी या उससे थोड़ी अधिक कमाते हैं। अनिवार्य रकम और कर कटने के बाद उनके पास अपने खर्च के लिए लगभग कुछ नहीं बचता। अक्टूबर 2023 में म्यांमार ने कर कानूनों में संशोधन कर विदेशों में काम करने वालों को 2012 से मिली आयकर छूट रद्द कर दी। अब उनकी विदेशी कमाई पर दो प्रतिशत की एकसमान दर या 10 से 25 प्रतिशत तक की अलग-अलग दरों से कर लगाया जा सकता है। चूंकि कामगार मेजबान देशों में पहले से आयकर देते हैं, इसलिए इस बदलाव का अर्थ है कि कारखानों, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों और निर्माण स्थलों में मामूली वेतन पर काम करने वालों पर दोहरा कर बोझ पड़ता है।
थाईलैंड में कारखाने में काम करने वाले 31 वर्षीय आंग थीन क्याव ने एक श्रम अधिकार संगठन को बताया कि उन्होंने मूल रूप से तख्तापलट के बाद की उथल-पुथल और राजनीति से बचने के लिए म्यांमार छोड़ा था। लेकिन वे खुद को ऐसी व्यवस्था में फंसा हुआ पाते हैं जो कामगारों से निर्णय लेने की स्वतंत्रता छीन लेती है।
लेकिन दुख की बात है कि हम अब भी उन पागलपन भरे नियमों से बंधे हैं, जिनसे उन्हें विदेशी मुद्रा हासिल करने में मदद मिल सकती है। हमारे पास पैसे भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
थाईलैंड में समुद्री खाद्य प्रसंस्करण का काम करने वाले 29 वर्षीय म्यो को ऊ ने बताया कि अनिवार्य रूप से रकम भेजने से पहले से मौजूद मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। जब वेतन का बड़ा हिस्सा अपने आप काट लिया जाता है, तो बीमारी की छुट्टी और ओवरटाइम न मिलना बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी कठिन बना देता है।
हम गुजारा करने के लिए जूझ रहे हैं, खासकर तब जब हमें बीमारी की छुट्टी लेनी पड़े या ओवरटाइम काम न मिले। अच्छा होता अगर हमें अपनी मेहनत की कमाई का पैसा खुद अपनी मर्जी से खर्च करने दिया जाता।
बैंक, विनिमय दरें और सैन्य संबंध
औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में आने के बाद ये रकम उन संस्थानों तक पहुंचती है जिनके सैन्य बलों से संबंध दर्ज हैं। बैंकों का संचालन करने वाले कई निजी समूहों के तातमादॉ, यानी म्यांमार के सशस्त्र बलों, से गहरे संबंध हैं। संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने 2019 में इनमें से दो समूहों के खिलाफ आपराधिक जांच की मांग की थी। उन पर रोहिंग्या के खिलाफ मानवता-विरोधी अपराधों में पर्याप्त और प्रत्यक्ष योगदान देने के आरोप थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया है। उसी तथ्य-जांच मिशन ने पाया कि निजी वित्तीय संस्थानों ने विमानन ईंधन और सैन्य उपकरणों की खरीद में मदद की है। इससे संकेत मिलता है कि औपचारिक बैंकिंग क्षेत्र सिर्फ व्यावसायिक गतिविधियों से आगे बढ़कर रणनीतिक रक्षा प्राथमिकताओं की भी सेवा करता है।
मुद्रा विनिमय के तरीकों ने वसूली की एक और परत जोड़ दी है। जब 25 प्रतिशत रकम भेजने के नियम पहली बार लागू हुए, तो खबरों के मुताबिक बैंकों ने डॉलर को बाजार दर से कम पर बदला और रकम परिवारों तक पहुंचने से पहले ही छिपा हुआ मुनाफा हासिल किया। अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि तब से विनिमय दरें बाजार भाव के करीब आई हैं। इससे प्रवासियों का सीधा नुकसान घटता है, लेकिन विदेशी मुद्रा पर शासन का नियंत्रण बना रहता है। आधिकारिक विनिमय दर लंबे समय से बाजार की वास्तविकता से अलग रही है। केंद्रीय बैंक जहां क्याट का मूल्य एक डॉलर के मुकाबले करीब 3,600 पर तय करता है, वहीं अनौपचारिक बाजार में यह करीब 4,200 पर कारोबार करता है। इस अंतर के चलते हुंडी नेटवर्क, यानी प्रतिबंधित अनौपचारिक धन हस्तांतरण प्रणाली, उन लोगों के लिए कहीं ज्यादा आकर्षक हैं जिन्हें आधिकारिक माध्यम अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाता। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने चेतावनी दी है कि दंडात्मक धन-प्रेषण नीतियां कामगारों को छिपकर इन अनौपचारिक प्रणालियों का इस्तेमाल करने की ओर धकेल सकती हैं और औपचारिक व्यवस्था बनाने के घोषित लक्ष्य को कमजोर कर सकती हैं।
रोजगार एजेंसियां अक्सर प्रवासियों से विदेश में पहली तनख्वाह मिलने से पहले ही नियमित रूप से रकम भेजने की प्रतिबद्धता वाले समझौतों पर हस्ताक्षर करवाती हैं। इस तरह रवाना होते ही कामगारों को नियमों के पालन के अनुबंध में बांध दिया जाता है।
सैन्य भर्ती का डर बढ़ाता प्रवासन संकट
धन भेजने पर यह दबाव पहले से ही अस्थिर प्रवासन की स्थिति पर और बढ़ता है। म्यांमार ने अनिवार्य सैन्य भर्ती कानून फिर से लागू किया है। फरवरी 2024 में जुंटा ने 2010 के जन सैन्य सेवा कानून को लागू करना शुरू किया, जिसके तहत 18 से 35 वर्ष के पुरुषों और 18 से 27 वर्ष की महिलाओं को दो साल तक सेना में सेवा देनी होगी। इस घोषणा के बाद बड़ी संख्या में युवा थाईलैंड, मलेशिया और अन्य पड़ोसी देशों में कानूनी और अनियमित रास्तों से जाने लगे। पासपोर्ट कार्यालयों पर काम का बोझ बढ़ गया और महीनों पहले से अपॉइंटमेंट बुक होने लगे, जबकि शोषणकारी बिचौलियों ने तत्काल आवेदन के लिए कीमतें बढ़ा दीं। इसके बाद एक और पाबंदी लगाते हुए शासन ने मई 2024 से विदेश में नौकरी तलाशने वाले पुरुष नागरिकों के लिए परमिट रोक दिए, ताकि भर्ती की उम्र वाले पुरुष सेना की सेवा से बचकर न भाग सकें।
थाईलैंड ने अनजाने में प्रवासी समुदाय पर जुंटा की पकड़ मजबूत कर दी है। थाईलैंड के 2025 के श्रम दस्तावेजीकरण नियम के तहत वर्क परमिट के लिए म्यांमार सरकार की मंजूरी जरूरी है। इस तरह बैंकॉक में जुंटा का प्रतिनिधित्व करने वाले दूतावास को यह तय करने का वीटो अधिकार मिल जाता है कि कौन काम पर बना रह सकता है। प्रवासी सहायता कार्यक्रम के निदेशक ब्रह्म प्रेस ने कहा कि कई प्रवासियों ने पंजीकरण से इसलिए परहेज किया क्योंकि उन्हें बर्मी सरकार की जवाबी कार्रवाई का डर था, खासकर उन लोगों को जो पहले सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल थे या पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज से जुड़े थे।
ज्यादातर लोग व्यवस्था से बाहर रहने का फैसला इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें बर्मी सरकार की जवाबी कार्रवाई का डर है, जो उनके या उनके परिवारों के खिलाफ हो सकती है। खासकर वे लोग जो अनिवार्य सैन्य भर्ती से बचकर आए हैं, या जो पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज अथवा सविनय अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा रहे हैं।
माए सॉट जैसे पश्चिमी जिलों में हजारों कामगारों से पहचान की जानकारी बचाने के लिए पंजीकरण की समयसीमा छोड़ने की उम्मीद थी। तख्तापलट के बाद से शासन 21,000 से अधिक राजनीतिक कैदियों को हिरासत में ले चुका है। लेकिन बिना दस्तावेजों की स्थिति कामगारों को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बैंकिंग और थाईलैंड के भीतर आने-जाने की आजादी से वंचित कर देती है। प्रेस ने चेतावनी दी कि लोगों को बिना दस्तावेजों के छोड़ने और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी औपचारिक सुविधाओं तक उनकी पहुंच सीमित करने से मलेरिया, तपेदिक और अन्य संक्रामक बीमारियां बढ़ सकती हैं। म्यांमार की निर्वासित समानांतर नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट ने थाईलैंड से विदेशों में काम करने वाले म्यांमार के लोगों पर जुंटा का बढ़ता नियंत्रण खत्म करने का आह्वान किया है।
क्षेत्रीय असर और आर्थिक अस्थिरता
जुंटा भले ही धन भेजने के नियमों को विदेशी मुद्रा बाजार स्थिर करने के केंद्रीय बैंक के प्रयास बताती हो, लेकिन अर्थव्यवस्था की व्यापक स्थिति बिगड़ रही है। विश्व बैंक ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशों से भेजी गई रकम 46 प्रतिशत बढ़कर 2.1 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई। इससे व्यापार और निवेश में गिरावट के बावजूद चालू खाते में अधिशेष दर्ज हुआ। हालांकि, ये आंकड़े भीतर गहराती बदहाली को छिपाते हैं। आर्थिक तबाही और सैन्य भर्ती के आतंक के चलते बढ़ते प्रवासन से देश में कामगारों की कमी हो रही है, जिससे निवेशकों का दीर्घकालिक भरोसा खतरे में पड़ रहा है। वेरिस्क मैपलक्रॉफ्ट के यू ने चेतावनी दी कि कामगारों की यह कमी निवेशकों के लिए देश का आकर्षण और घटा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समीकरण इस स्थिति को और जटिल बनाते हैं। म्यांमार के अलग-थलग पड़ने का फायदा उठाकर चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है। इनमें रखाइन राज्य का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्याउकफ्यू बंदरगाह भी शामिल है। साथ ही, बीजिंग हथियारों की आपूर्ति करता है और संयुक्त राष्ट्र में राजनयिक समर्थन देता है। वॉशिंगटन ने 2023 में म्यांमार फॉरेन ट्रेड बैंक के खिलाफ कार्रवाई समेत लक्षित प्रतिबंध लगाए, लेकिन शासन ने लेन-देन म्यांमार इकनॉमिक बैंक के जरिए करना शुरू कर दिया। लोवी इंस्टीट्यूट के विश्लेषकों का तर्क है कि वॉशिंगटन के पास ऐसे आर्थिक उपाय हैं जिनका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ है। इनमें केंद्रीय बैंक को प्रतिबंधित इकाई घोषित करना और जब्त संपत्तियां समानांतर नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट को देना शामिल है। इन कदमों से संघर्ष की वित्तीय दिशा बदल सकती है। न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के पास फिलहाल म्यांमार के केंद्रीय बैंक की एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की जब्त संपत्तियां हैं। कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि इन पर मिले ब्याज को नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट को दिया जाए, जैसा यूक्रेन की मदद के लिए रूसी संपत्तियों के मामले में किया गया है। हालांकि, आम प्रवासी कामगारों के लिए भू-राजनीतिक गणनाएं दूर की बातें हैं, जबकि उन पर अनिवार्य रकम भेजने और कर चुकाने का तत्काल दबाव है।
जानने योग्य बातें
- म्यांमार की जुंटा ने 2025 में प्रवासियों द्वारा भेजी गई रकम से 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए। यह कुल विदेशी आमद का लगभग 38 प्रतिशत था और 2022 के मुकाबले आठ गुना अधिक था।
- 2024 के एक नियम के तहत प्रवासी कामगारों को अपनी तनख्वाह का 25 प्रतिशत शासन द्वारा विनियमित बैंकों के जरिए भेजना अनिवार्य है। नियम न मानने पर पासपोर्ट नवीनीकरण और यात्रा पर पाबंदियां लग सकती हैं।
- धन भेजने की नीति लागू कराने और रोजगार एजेंसियों पर दबाव डालने के लिए अधिकारियों ने अगस्त 2024 में सेना के नेतृत्व वाली 13 सदस्यीय निगरानी समिति बनाई।
- 2023 के कर संशोधन से विदेशी आय पर छूट खत्म होने के बाद कामगारों पर दोहरा कर बोझ है। मेजबान देश के करों के अलावा, प्रवासियों पर 2 से 25 प्रतिशत तक की दर से कर लगाया जा सकता है।
- अधिकार समूहों और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने चेतावनी दी है कि धन भेजने की शर्त को पासपोर्ट की वैधता से जोड़ना आवाजाही की आजादी का उल्लंघन कर सकता है और कामगारों को प्रतिबंधित अनौपचारिक धन हस्तांतरण नेटवर्क की ओर धकेल सकता है।
- थाईलैंड की 2025 की श्रम दस्तावेजीकरण की शर्त से म्यांमार के दूतावास को प्रवासी कामगारों के वर्क परमिट पर निगरानी का अधिकार मिलता है, जिससे सैन्य भर्ती और राजनीतिक निशाना बनाए जाने का डर बढ़ा है।






