आपूर्ति शृंखला टूटने पर आपातकालीन उपाय
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से जुड़ी गंभीर आपूर्ति बाधाओं का सामना कर रहे पेट्रोकेमिकल क्षेत्र के लिए इंडोनेशिया ने आपातकालीन शुल्क कटौती लागू की है। इसके तहत प्लास्टिक के अहम कच्चे माल और द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) पर सभी आयात शुल्क खत्म कर दिए गए हैं। छह महीने के इस उपाय की घोषणा आर्थिक मामलों के समन्वय मंत्री एयरलांग्गा हार्तार्तो ने 28 अप्रैल को जकार्ता के होटल मुलिया में इन्वेस्टर डेली राउंडटेबल के दौरान की। यह कदम देश के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल उत्पादकों की ओर से अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण दायित्वों से छूट (फोर्स मेज्योर) घोषित किए जाने के बाद उठाया गया है। ये कंपनियां अब पर्याप्त नेफ्था आपूर्ति हासिल नहीं कर पा रही हैं। यह नीति मई 2026 से लागू होगी और छह महीने तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद अधिकारी बाजार की स्थिति की समीक्षा करेंगे।
विषय-सूची
चंद्रा असरी पेट्रोकेमिकल और लोटे केमिकल इंडोनेशिया, जिनका घरेलू प्लास्टिक उत्पादन में दबदबा है, पॉलीएथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन बनाने के मुख्य कच्चे माल नेफ्था की आपूर्ति हासिल करने में कठिनाई के बाद अपने संविदात्मक दायित्वों को निलंबित कर चुकी हैं। इस कमी से प्लास्टिक रेजिन की कीमतें 50 से 100 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। इससे खाद्य पदार्थों, पेय और उपभोक्ता वस्तुओं की पैकेजिंग लागत के जरिये पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने का खतरा है। इस बाधा ने रोजमर्रा की व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जरूरी डाउनस्ट्रीम सामग्रियों को प्रभावित किया है। सरकार के लिए यह जरूरी हो गया है कि संकट के सुपरमार्केट की अलमारियों और पूरे द्वीपसमूह में खुदरा कीमतों तक पहुंचने से पहले हस्तक्षेप किया जाए। घोषणा के दौरान एयरलांग्गा ने स्थिति की तात्कालिकता समझाई।
यह आयात शुल्क कम करने का हस्तक्षेप है, खासकर पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए, जिसे होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष के कारण नेफ्था हासिल करने में मुश्किल हो रही है। हम सभी पर आयात शुल्क शून्य प्रतिशत करेंगे, लेकिन सिर्फ छह महीने के लिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति की बाधा
इंडोनेशिया के औद्योगिक दबाव की जड़ें हजारों किलोमीटर दूर होर्मुज जलडमरूमध्य में हैं। यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरा समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया की लगभग 90 प्रतिशत नेफ्था खेप गुजरती है। ईरान से जुड़े जारी सैन्य संघर्ष ने इस अहम मार्ग से यातायात बाधित किया है। इससे पैदा हुई अड़चनों का असर टोक्यो से जकार्ता तक एशिया के विनिर्माण केंद्रों में महसूस किया जा रहा है। कच्चे तेल के शोधन के दौरान बनने वाला वाष्पशील तरल हाइड्रोकार्बन मिश्रण नेफ्था, प्लास्टिक का बुनियादी कच्चा माल है। जब रिफाइनरियों को नेफ्था नहीं मिल पाता, तो खाद्य पैकेजिंग फिल्म से लेकर ऑटोमोबाइल के पुर्जों और निर्माण सामग्री तक, पूरी उत्पादन शृंखलाएं ठप होने का जोखिम पैदा हो जाता है।
इस संकट के चलते जापानी निर्माता मारुज़ेन पेट्रोकेमिकल और मित्सुई केमिकल्स को आयात निविदाएं रद्द करनी पड़ी हैं। वहीं, इंडोनेशियाई संयंत्रों ने इससे भी सख्त कदम उठाते हुए फोर्स मेज्योर लागू किया है। यह एक कानूनी प्रावधान है, जो अप्रत्याशित परिस्थितियों में पक्षों को संविदात्मक दायित्वों से मुक्त करता है। मध्य पूर्व में नेफ्था उत्पादन का भौगोलिक संकेंद्रण और पूरे अरब प्रायद्वीप का चक्कर लगाए बिना वैकल्पिक जहाजरानी मार्गों की सीमित उपलब्धता एशियाई पेट्रोकेमिकल उत्पादकों को क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति खास तौर पर संवेदनशील बनाती है। मारेक्स में पेट्रोकेमिकल ट्रेडिंग के वैश्विक निदेशक वासुदेव बालिगोपाल ने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं पूरे क्षेत्र में व्यापार प्रवाह और आपूर्ति कार्यक्रमों को बुनियादी तौर पर बदल रही हैं।
मार्ग बदलने और सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्त होने से आपूर्ति कार्यक्रम जटिल हो रहे हैं और आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
इन लॉजिस्टिक चुनौतियों ने कच्चे माल की उपलब्धता सीमित कर दी है, जबकि विनिर्माण की मांग स्थिर बनी हुई है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और वैश्विक उथल-पुथल के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रहे इंडोनेशियाई नीति-निर्माता चिंतित हैं।
शून्य प्रतिशत शुल्क लागू
इस आर्थिक दबाव को रोकने के लिए इंडोनेशिया मई से छह महीने तक पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएथिलीन, हाई डेंसिटी पॉलीएथिलीन (HDPE) और लीनियर लो डेंसिटी पॉलीएथिलीन (LLDPE) पर शून्य प्रतिशत आयात शुल्क लगाएगा। विशिष्ट उत्पाद वर्गीकरण और मूल देश के आधार पर इन सामग्रियों पर पहले 5 से 15 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। ये विशाल द्वीपसमूह देश के लगभग हर उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र से जुड़े प्लास्टिक पैकेजिंग निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल हैं। शुल्क खत्म करने का लाभ खास तौर पर प्लास्टिक पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों पर लागू होगा, ताकि नेफ्था की कमी के बावजूद खाद्य और पेय पदार्थों के कंटेनर, कृषि में इस्तेमाल होने वाली रैपिंग सामग्री और औद्योगिक पैकेजिंग फिल्म उपलब्ध रहें। साथ ही, सरकार ने औद्योगिक उपयोग के लिए LPG के आयात पर पहले लगने वाला 5 प्रतिशत शुल्क भी हटा दिया है। यह दोहरी रणनीति तत्काल सामग्री की कमी और पेट्रोकेमिकल क्रैकर्स के लिए कच्चे माल के विकल्प, दोनों जरूरतों को पूरा करती है। ये क्रैकर्स हाइड्रोकार्बन को तोड़कर उपयोगी रासायनिक घटक बनाते हैं।
इस रणनीति से निर्माता उत्पादन प्रक्रियाओं में बदलाव करते हुए उत्पादन का स्तर बनाए रख सकते हैं। इससे पैकेजिंग संयंत्र नेफ्था की कमी के बावजूद खाद्य और पेय उद्योग को आपूर्ति जारी रख सकते हैं, जबकि इस कमी के कारण अन्यथा उत्पादन रोकना पड़ता। एयरलांग्गा ने कहा कि यह नीति उपभोक्ता अर्थव्यवस्था में इस कमजोर दौर के दौरान महंगाई के तेज चक्र को रोकने के लिए सोचा-समझा हस्तक्षेप है। पैकेजिंग लागत बढ़ने से दुकानों की अलमारियों पर खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतें सीधे प्रभावित होती हैं, जिससे उपभोक्ता कीमतों पर व्यापक दबाव पड़ता है। सरकार अन्य आर्थिक बदलावों के प्रबंधन के साथ इस दबाव से बचना चाहती है। इन उपायों को स्थायी रूप से लागू करने के बजाय छह महीने बाद समीक्षा के लिए तय करना दर्शाता है कि ये आपातकालीन कदम हैं। रासायनिक क्षेत्र में व्यापक व्यापार उदारीकरण या घरेलू उद्योग के लिए सुरक्षात्मक शुल्क छोड़ने की कोई दीर्घकालिक नीति नहीं।
फोर्स मेज्योर और उत्पादन में रुकावट
चंद्रा असरी और लोटे केमिकल की फोर्स मेज्योर घोषणाएं दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में औद्योगिक कमजोरी की दुर्लभ स्वीकारोक्ति हैं। यहां ये समूह आम तौर पर बाजार में मजबूत दबदबे और सुरक्षित आपूर्ति के साथ काम करते हैं। खासकर चंद्रा असरी को कच्चे माल की खेप हासिल करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। कंपनी ने डाउनस्ट्रीम ग्राहकों के साथ मौजूदा संविदात्मक दायित्व पूरे करने में असमर्थता की औपचारिक घोषणा की है। इसका असर विनिर्माण क्षेत्र में फैल रहा है, क्योंकि कंपनी जावा और सुमात्रा में सैकड़ों छोटे पैकेजिंग उत्पादकों को जरूरी रेजिन की आपूर्ति करती है। ये संयंत्र आम तौर पर नेफ्था से डाउनस्ट्रीम प्लास्टिक बनाते हैं, जिनकी आपूर्ति इंडोनेशिया के विशाल पैकेजिंग उद्योग को होती है। यह उद्योग देश के बड़े खाद्य और पेय क्षेत्र तथा कृषि निर्यात बाजारों को सहारा देता है।
घरेलू निर्माताओं ने बताया है कि आधुनिक उत्पाद वितरण और खुदरा प्रदर्शन के लिए जरूरी प्लास्टिक फिल्म, कंटेनर, बोतल और रैपिंग सामग्री के नियमित ऑर्डर पूरे करना काफी मुश्किल हो गया है। यह कमी इंडोनेशिया की आर्थिक प्रगति के संवेदनशील दौर में आई है। देश ऊर्जा नीति और औद्योगिक नियमन में जटिल बदलावों का प्रबंधन करते हुए विकास की गति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। सरकार के तत्काल हस्तक्षेप के बिना, आपूर्ति की बाधाओं से कई विनिर्माण क्षेत्रों की उत्पादन लाइनें ठप होने का खतरा था, जिससे दुकानों में पैक किए गए सामान की अस्थायी कमी हो सकती थी। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री बहलिल लाहादालिया को पारंपरिक मध्य पूर्वी आपूर्तिकर्ताओं के बाहर नेफ्था के वैकल्पिक स्रोत तलाशने और उन्हें सुरक्षित करने का निर्देश दिया है। प्राथमिकता ऐसे क्षेत्रों को दी गई है जो संकटग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य के जहाजरानी मार्ग पर निर्भर न हों। यह निर्देश इस बात को स्वीकार करता है कि अस्थायी शुल्क कटौती से तत्काल राहत तो मिलती है, लेकिन लंबे समय की आपूर्ति सुरक्षा के लिए आयात संबंधों में विविधता लाना और संभवतः घरेलू शोधन क्षमता बढ़ाना जरूरी है, ताकि अस्थिर अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी मार्गों पर निर्भरता कम हो।
वैकल्पिक कच्चे माल के रूप में LPG
LPG आयात शुल्क माफ करने के फैसले से नेफ्था आधारित उत्पादन का एक तकनीकी विकल्प मिलता है, जो मौजूदा कमी के दौरान निर्माताओं को संचालन में अहम लचीलापन देता है। बेहतर रासायनिक गुणों और उत्पादन दर के कारण ज्यादातर पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं में नेफ्था को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन कुछ लचीली उत्पादन व्यवस्थाओं में LPG नेफ्था की लगभग 50 प्रतिशत जरूरत की जगह ले सकती है। यह विकल्प पूर्ण नहीं है, लेकिन संकट के दौरान उत्पादन पूरी तरह बंद करने के बजाय निर्माताओं को बुनियादी उत्पादन जारी रखने में मदद करता है। उद्योग मंत्रालय में अपस्ट्रीम केमिकल इंडस्ट्री की निदेशक वाइविक पुजियास्तुति ने पुष्टि की कि LPG का मिश्रण सीमित स्तर पर ही संभव है, लेकिन आपातकालीन अवधि में उत्पादन जारी रखने के लिए यह व्यवहार्य है।
नेफ्था के विपरीत, जो मुख्य रूप से संकटग्रस्त होर्मुज मार्ग से आता है और ज्यादातर मध्य पूर्वी रिफाइनरियों में उत्पादित होता है, LPG की आपूर्ति अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और संघर्ष क्षेत्र से बाहर के अन्य उत्पादकों से आसानी से उपलब्ध है। इस संकट के दौरान अमेरिका एक खास तौर पर महत्वपूर्ण वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। अमेरिकी LPG निर्यातक प्रशांत महासागर के रास्ते माल भेज सकते हैं, जिससे संकटग्रस्त मध्य पूर्व से पूरी तरह बचा जा सकता है। भौगोलिक रूप से आपूर्ति के स्रोतों में यह विविधता इंडोनेशिया को होर्मुज की उस बाधा से बचाव देती है जिसने नेफ्था की आपूर्ति ठप कर दी है। 5 प्रतिशत आयात शुल्क हटाकर इंडोनेशिया ने नेफ्था और LPG के बीच लागत का अंतर प्रभावी रूप से कम किया है। इससे निर्माताओं को कच्चे माल की ऐसी ऊंची लागत का सामना किए बिना उत्पादन मिश्रण और रासायनिक इनपुट बदलने का प्रोत्साहन मिलता है, जो इस विकल्प को आर्थिक रूप से अव्यावहारिक बना सकती थी।
उद्योग मंत्रालय के प्रवक्ता फेब्री हेंद्री अंतोनी आरिफ ने कहा कि इस बदलाव के दौरान अपस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल आपूर्तिकर्ताओं और डाउनस्ट्रीम पैकेजिंग निर्माताओं के बीच संतुलन बनाए रखना अहम है।
सिद्धांत रूप में, यह अपस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए अच्छी खबर है। हमारे लिए अहम बात अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम उद्योगों के बीच संतुलन बनाए रखना है। हम यह संतुलन बनाए हुए हैं।
नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना और व्यापार सुगम करना
शुल्क घटाने के अलावा, इंडोनेशिया औद्योगिक लाइसेंस और आयात प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए व्यापक प्रक्रियागत सुधार कर रहा है। इन प्रक्रियाओं के कारण पहले बंदरगाहों और सीमा शुल्क केंद्रों पर अड़चनें पैदा होती रही हैं। सरकार राष्ट्रीय औद्योगिक सूचना प्रणाली (SINAS) के जरिये आयात लाइसेंस प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से संशोधन कर रही है और इंडोनेशियाई राष्ट्रीय मानक (SNI) ढांचे को मजबूत बना रही है, ताकि नौकरशाही की उन देरी को घटाया जा सके जिनके चलते जरूरी सामग्री हफ्तों तक गोदामों में फंसी रह सकती है। लाइसेंस मंजूरी के लिए स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तय करने हेतु एक नया सेवा-स्तर समझौता तंत्र बनाया जाएगा। इससे नियामकीय अनिश्चितता को लेकर कारोबारी नेताओं की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का समाधान होगा, जो आपात स्थितियों में आपूर्ति शृंखला की चुनौतियां और बढ़ाती है।
उद्योग मंत्रालय उन वस्तुओं की विस्तृत सूची तैयार करेगा जिन पर तकनीकी विचार जरूरी है, जबकि व्यापार मंत्रालय अस्थायी शुल्क छूट को शामिल करने और सीमा शुल्क अधिकारियों तथा आयातकों के बीच भ्रम रोकने के लिए मौजूदा आयात नियमों को अद्यतन करेगा। इन प्रशासनिक बदलावों से यह स्वीकार किया गया है कि अगर सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, तकनीकी मानकों का आकलन और परमिट की पुष्टि बंदरगाह पर देरी पैदा करें, तो केवल शुल्क कटौती से आपूर्ति की बाधाएं दूर नहीं होंगी। ऐसे में जरूरी सामग्री बंदरगाह पर पड़ी रहेगी और कारखाने बंद रहेंगे। आपातकालीन शुल्क नीति के साथ नियामकीय ढांचे का तालमेल बैठाकर अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आयातित सामग्री बिना प्रक्रियागत बाधा या गैर-जरूरी दस्तावेजी शर्तों के विनिर्माण इकाइयों तक पहुंचे। ऐसी बाधाएं शुल्क खत्म करने के उद्देश्य को विफल कर सकती हैं।
क्षेत्रीय आर्थिक संदर्भ और वैश्विक असर
इंडोनेशिया के आपातकालीन उपाय एशियाई विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं में उभरते व्यापक रुझानों को दर्शाते हैं। ये अर्थव्यवस्थाएं मध्य पूर्व संघर्ष से पैदा हुए ऊर्जा कीमतों के झटकों और आपूर्ति शृंखला की अस्थिरता से निपटने के लिए इसी तरह के कदम उठा रही हैं। भारत ने रासायनिक उत्पादन लागत स्थिर रखने के लिए मिलती-जुलती रणनीतियां लागू की हैं, जबकि आसियान के अन्य सदस्य क्षेत्रीय व्यापार प्रवाह और प्रतिस्पर्धी संतुलन पर संभावित असर के लिए स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं। यह नीति दिखाती है कि ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के प्रति आयात पर निर्भर औद्योगिक अर्थव्यवस्थाएं कितनी संवेदनशील हैं, खासकर वे देश जहां कच्चे माल का घरेलू उत्पादन सीमित है।
औद्योगिक क्षेत्र की कच्चे माल की 55 से 60 प्रतिशत जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर इंडोनेशिया के सामने मौजूदा संकट ऐसे संरचनात्मक जोखिम उजागर करता है जो अस्थायी कीमत उतार-चढ़ाव से आगे बढ़कर आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति की मजबूती के बुनियादी सवाल खड़े करते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि छह महीने की शुल्क अवधि जरूरी राहत देती है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव वाले क्षेत्रों से गुजरने वाली दूरस्थ आपूर्ति शृंखलाओं पर बुनियादी निर्भरता दूर नहीं कर सकती। सिंगापुर और मलेशिया जैसे क्षेत्रीय व्यापार भागीदारों के लिए इंडोनेशिया की शुल्क कटौती से प्लास्टिक उत्पाद बाजारों में प्रतिस्पर्धा का समीकरण बदल सकता है। पड़ोसी देशों के निर्माताओं पर प्रतिस्पर्धी दबाव बदल सकता है, क्योंकि शुल्क-मुक्त कच्चे माल से इंडोनेशियाई उत्पादकों को अस्थायी लागत लाभ मिलेगा। आपातकालीन उपाय लागू रहने के दौरान इससे अल्पावधि में सीमा-पार आपूर्ति व्यवस्थाएं और निर्यात के रुझान बदल सकते हैं।
मुख्य बिंदु
- इंडोनेशिया ने मई 2026 से छह महीने के लिए पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएथिलीन, HDPE और LLDPE समेत प्लास्टिक के प्रमुख कच्चे माल पर आयात शुल्क खत्म कर दिए हैं। पहले इन पर 5 से 15 प्रतिशत तक शुल्क लगता था।
- आपूर्ति संकट के दौरान निर्माताओं को नेफ्था के बदले दूसरे कच्चे माल का इस्तेमाल करने में सक्षम बनाने के लिए पेट्रोकेमिकल उपयोग के लिए LPG पर 5 प्रतिशत शुल्क खत्म किया गया है।
- नेफ्था की आपूर्ति हासिल न कर पाने के कारण प्रमुख उत्पादक चंद्रा असरी पेट्रोकेमिकल और लोटे केमिकल इंडोनेशिया ने फोर्स मेज्योर घोषित किया। इससे घरेलू प्लास्टिक की कीमतें 50 से 100 प्रतिशत तक बढ़ गईं।
- आपूर्ति में बाधा होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष से पैदा हुई है। नेफ्था की लगभग 90 प्रतिशत खेप इसी रास्ते से गुजरती है, जिससे एशियाई निर्माताओं के लिए अड़चनें पैदा हुई हैं।
- सामग्री की कमी को प्रक्रियागत देरी से और बढ़ने से रोकने के लिए सरकार आयात लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने और सेवा-स्तर समझौते लागू करने समेत नियामकीय सुधार कर रही है।
- राष्ट्रपति प्रबोवो ने छह महीने की आपातकालीन अवधि के बाद भी आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मध्य पूर्व से बाहर नेफ्था के वैकल्पिक स्रोत तलाशने का आदेश दिया है।






