जकार्ता ने शहरव्यापी व्यापक अभियान में आक्रामक सफाई मछली के खिलाफ जंग छेड़ी

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Explosion of janitor fish is a sign Ciliwung River heavily polluted ...

राजधानी में गहराता पारिस्थितिक संकट

जकार्ता ऐसे पारिस्थितिक संकट का सामना कर रहा है, जिससे उसके जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और बाढ़ नियंत्रण के अहम बुनियादी ढांचे, दोनों को खतरा है। इसके जवाब में गवर्नर प्रामोनो अनंग ने इंडोनेशिया की राजधानी के जलमार्गों से आक्रामक कवचधारी कैटफ़िश हटाने के लिए अभूतपूर्व समन्वित अभियान का आदेश दिया है। स्थानीय तौर पर सपु-सपु या "सफाई मछली" के नाम से जानी जाने वाली इस मछली के खिलाफ यह अभियान दक्षिण-पूर्व एशिया में किसी आक्रामक प्रजाति से निपटने के सबसे व्यापक नगर-स्तरीय प्रयासों में से एक है। इसमें जकार्ता के पांचों प्रशासनिक शहरों में सैकड़ों कर्मी एक साथ काम कर रहे हैं।

विषय-सूची
  1. राजधानी में गहराता पारिस्थितिक संकट
  2. शहरव्यापी लामबंदी में अहम जलमार्ग निशाने पर
  3. नकद प्रोत्साहन से सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा
  4. ढांचागत नुकसान से बाढ़ सुरक्षा को खतरा
  5. दफनाने से आगे: आर्थिक उपयोग की संभावनाएं
  6. निरंतर अभियान से क्षेत्रीय मिसाल
  7. मुख्य बातें

यह अभियान शुक्रवार को सैन्य सटीकता के साथ शुरू हुआ। महानगर के दस अलग-अलग स्थानों पर दमकलकर्मियों, आपदा-न्यूनीकरण अधिकारियों, स्थानीय अधिकारियों और स्वयंसेवकों को तैनात किया गया। ये सकरमाउथ कैटफ़िश (वैज्ञानिक वर्गीकरण में Hypostomus plecostomus और Loricariidae परिवार की सदस्य) जकार्ता की नदियों और नहरों में तेजी से फैल चुकी हैं। इनसे पैदा हुआ बहुआयामी खतरा पर्यावरणीय चिंताओं से आगे बढ़कर सार्वजनिक सुरक्षा तक पहुंच गया है।

शैवाल और जैविक अवशेष खाने की क्षमता के कारण आम तौर पर "सफाई मछली" कहलाने वाली यह मछली वैश्विक पालतू जीव व्यापार के जरिए इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में पहुंची। दक्षिण अमेरिका में ब्राजील, वेनेजुएला और रियो दे ला प्लाटा बेसिन की नदी प्रणालियों की मूल निवासी ये कवचधारी कैटफ़िश, एक्वेरियम उद्योग के जरिए जकार्ता आईं। शौकीन लोग इन्हें टैंक की प्राकृतिक सफाई करने वाली मछली के रूप में पसंद करते थे, क्योंकि इनसे रखरखाव की जरूरत कम होती है। पारिस्थितिक समस्या तब शुरू होती है, जब पालतू जानवरों के मालिक इन मछलियों को प्राकृतिक जलमार्गों में छोड़ देते हैं। ऐसा वे तब करते हैं, जब मछली टैंक से बड़ी हो जाती है, या बाढ़ के दौरान अनजाने में ऐसा हो जाता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र को अस्थिर करने वाले इन आक्रमणकारियों के प्रभावों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। अवसरवादी सर्वाहारी ये मछलियां 50 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं और 10 से 15 साल तक जीवित रह सकती हैं। ये शैवाल, जलीय पौधे, अकशेरुकी जीव और खास तौर पर स्थानीय प्रजातियों के अंडे खाती हैं। इनके कवचधारी शरीर और बिल बनाने की आदत जैविक शिकार के साथ-साथ भौतिक नुकसान भी पहुंचाती है। इससे नदी के किनारे और तटबंध कमजोर होते हैं, जो निचले तटीय शहर में बाढ़ रोकने के अहम अवरोध हैं। इन जीवों की रात्रिचर आदतें इन्हें हटाने के प्रयासों को और कठिन बनाती हैं, क्योंकि पकड़ने वाली टीमें दिन में काम करती हैं और उस समय ये छिपे रहते हैं।

पारिस्थितिक व्यवधान का असर सीधे शिकार करने तक सीमित नहीं है। सफाई मछलियां शैवाल और जैविक अवशेष खा जाती हैं, जो आम तौर पर स्थानीय अकशेरुकी जीवों की आबादी को सहारा देते हैं। इस तरह वे खाद्य जाल की बुनियादी परतों को ही हटा देती हैं। नीचे से शुरू हुआ यह व्यवधान पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में फैलता है और बड़ी स्थानीय मछलियों के लिए भोजन की उपलब्धता घटाता है। ये बड़ी मछलियां स्थानीय आबादी के आहार का अहम हिस्सा हैं। स्थानीय जैव विविधता का नुकसान जकार्ता के जलमार्गों की पारिस्थितिक मजबूती भी घटाता है, जिससे वे प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और प्राकृतिक रूप से पानी साफ करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है।

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शहरव्यापी लामबंदी में अहम जलमार्ग निशाने पर

पूर्वी जकार्ता में मेयर मुंजीरिन ने खुद लगभग 150 कर्मियों की अगुवाई करते हुए क्रामत जाति में सिलिवुंग नदी के किनारे बड़े पैमाने पर जाल बिछाने का अभियान चलाया। टीम ने जलमार्ग में व्यवस्थित तरीके से काम किया और पूरी तरह विकसित मछलियों से लेकर हाल में दिए गए अंडों तक को इकट्ठा किया। कुछ ही घंटों में अधिकारियों ने इस एक जगह से लगभग 200 किलोग्राम मछलियां पकड़ीं। जिले के नौ अन्य स्थानों से मिली मछलियों की गिनती जारी थी। अकेले पूर्वी जकार्ता के दस अलग-अलग स्थानों पर यह समन्वित अभियान चला। भौगोलिक कवरेज बढ़ाने के लिए हर जिले में एक स्थान चुना गया।

निपटान का तरीका इन आक्रामक जीवों की असाधारण सहनशीलता को दर्शाता है। अधिकारियों ने पकड़ी गई मछलियों को नदी किनारे तय दफन स्थलों तक पहुंचाया और केवल हटाने के बजाय उन्हें पूरी तरह जमीन में दफन किया। यह सावधानी जरूरी है, क्योंकि यह प्रजाति लंबे समय तक पानी से बाहर भी जीवित रह सकती है। इस जैविक विशेषता के कारण निपटान के सामान्य तरीके पर्याप्त नहीं हैं। मरी हुई मछलियों को इसलिए दफन किया जाता है, ताकि वे जीवित न बचें और पारिस्थितिकी तंत्र में फिर से न पहुंचें। यह प्रजाति अपनी सहनशीलता और पानी से बाहर भी लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता के लिए जानी जाती है।

जकार्ता की खाद्य सुरक्षा, समुद्री मामलों और कृषि एजेंसी के प्रमुख हसुदुंगन ए. सिदाबालोक ने बताया कि पहले के नियंत्रण प्रयास खास तौर पर सिलिवुंग नदी पर केंद्रित थे। पकड़ी गई मछलियों को उचित निपटान के लिए सिगांजुर स्थित मत्स्य निरीक्षण और प्रसंस्करण केंद्र ले जाया जाता था। हालांकि, प्रजाति के तेजी से प्रजनन और लंबी उम्र के सामने पहले के प्रयास नाकाफी साबित हुए, जिसके चलते अब अभियान का दायरा बढ़ाया गया है।

मुंजीरिन ने शुक्रवार को अभियान शुरू होने के दौरान इसके दायरे की जानकारी दी और संकेत दिया कि यह एक बार की कार्रवाई नहीं, बल्कि लंबे अभियान की शुरुआत है।

गवर्नर के निर्देश पर हम पूर्वी जकार्ता के 10 स्थानों पर अभियान चला रहे हैं, हर जिले में एक स्थान पर।

शहर के अधिकारियों ने इन अभियानों को नियमित रूप से दोहराने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका उद्देश्य हटाने का ऐसा सिलसिला कायम करना है, जिससे प्रजनन करने वाली आबादी धीरे-धीरे घटे और बची हुई मछलियों या नई छोड़ी गई मछलियों से उनकी फिर से तादाद न बढ़े।

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नकद प्रोत्साहन से सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा

पश्चिमी जकार्ता की मेयर ईन मुतमैनाह ने मछलियों को हटाने की रफ्तार बढ़ाने और समुदाय की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई आर्थिक पहल शुरू की। अभियान में हिस्सा लेने वाली टीमों और मछलियां पकड़ने वाले लोगों को अब हर किलोग्राम सफाई मछली के लिए 25,000 रुपये (लगभग $1.50) मिलते हैं। सबसे अधिक मछलियां पकड़ने वाली टीमों को अतिरिक्त पुरस्कार भी दिए जाते हैं। मुआवजे की यह व्यवस्था पर्यावरण की जरूरत को स्थानीय निवासियों के लिए आर्थिक अवसर में बदल देती है।

इस प्रोत्साहन योजना के तत्काल नतीजे चेंगकारेंग जिले में दिखे, जहां संयुक्त टीमों ने विशेष जालों से नदी की धाराओं में अभियान चलाया। दो घंटे से भी कम समय में टीमों ने 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी लगभग 20 किलोग्राम मछलियां पकड़ीं। नगर निगम के संसाधनों और नागरिकों की भागीदारी के मेल से अभियान की ताकत कई गुना बढ़ती है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे आक्रामक आबादी की प्रजनन क्षमता पर काबू पाया जा सकेगा।

इसी तरह के अभियान मध्य जकार्ता में प्लाजा इंडोनेशिया के पास के जलमार्गों के साथ-साथ केलापा गाडिंग और सेतु बाबाकन में भी एक साथ चलाए गए। गवर्नर प्रामोनो ने कहा कि पांचों प्रशासनिक शहरों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य जकार्ता) में समन्वित कार्रवाई व्यापक पर्यावरणीय बहाली के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दिखाती है। कई जिलों में एक ही समय अभियान चलाने से मछलियां कार्रवाई के दौरान साफ किए गए क्षेत्रों से बिना छुए हिस्सों में नहीं जा सकीं।

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ढांचागत नुकसान से बाढ़ सुरक्षा को खतरा

सफाई मछलियां ढांचागत इंजीनियरिंग के लिए ऐसा अनूठा खतरा पैदा करती हैं, जो आक्रामक प्रजातियों से जुड़ी आम चिंताओं से अलग है। घोंसले बनाने के लिए ये नदी किनारे की मिट्टी और तलछट में गहरी सुरंगें खोदती हैं, जहां अंडे सुरक्षित रखे जा सकें। इस खुदाई से मिट्टी के तटबंधों की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित होती है। पूरे जकार्ता में ये तटबंध बाढ़ नियंत्रण के अहम बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं। यह शहर मौसमी बाढ़ और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बढ़ती गंभीर जल घटनाओं के प्रति हमेशा से संवेदनशील रहा है।

गवर्नर प्रामोनो ने सप्ताह की शुरुआत में हुई विशेष समन्वय बैठक में इन खतरों को स्पष्ट किया। अभियान की रणनीति बनाने के लिए उन्होंने हजार द्वीप जिले को छोड़कर जकार्ता के सभी मेयरों को बैठक में बुलाया था। उनकी चेतावनियों में पारिस्थितिकी और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चिंताओं के बीच का संबंध सामने आया।

यह मछली दक्षिण अमेरिका से आई है, बहुत सहनशील है और स्थानीय मछलियों की शिकारी बन गई है। यह उनका भोजन खाती है और बिल बनाकर तटबंधों को नुकसान पहुंचाती है।

नदी किनारों और तटबंधों को कमजोर करके ये मछलियां कटाव बढ़ाती हैं। साथ ही, मानसून के दौरान अधिक मात्रा में पानी रोकने की इन अवरोधों की क्षमता भी घटाती हैं। जैविक आक्रमण और बुनियादी ढांचे का क्षरण मिलकर शहरी बाढ़ का जोखिम बढ़ाते हैं। इससे रिहायशी इलाकों, व्यावसायिक जिलों और परिवहन नेटवर्क को खतरा है।

अमेरिका के टेक्सास राज्य में भी इसी प्रजाति के कारण ऐसी ही चुनौतियां हैं। वहां इसने आक्रामक आबादी स्थापित कर ली है और इसके नियंत्रण के लिए मिलते-जुलते प्रयास किए जा रहे हैं। इस समस्या का वैश्विक स्वरूप दिखाता है कि एक्वेरियम व्यापार के जरिए कई महाद्वीपों में फैल चुकी प्रजातियों का प्रबंधन कितना कठिन है। दोनों क्षेत्रों में इन मछलियों के कवचधारी शरीर के कारण स्थानीय प्रजातियां इनका आसानी से शिकार नहीं कर पातीं। अन्यथा वे प्राकृतिक रूप से इनकी आबादी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती थीं।

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दफनाने से आगे: आर्थिक उपयोग की संभावनाएं

मछलियों को स्थायी रूप से हटाने के लिए मौजूदा नियमों के तहत उन्हें दफन किया जाता है। हालांकि, वैज्ञानिक शोध से ऐसे विकल्पों का संकेत मिलता है, जिनसे इस पर्यावरणीय संकट से आर्थिक मूल्य पैदा किया जा सकता है। ResearchGate पर प्रकाशित 2023 के एक अध्ययन में सकरमाउथ कैटफ़िश की त्वचा से अम्ल में घुलनशील कोलेजन निकालने की पड़ताल की गई। इसमें ऐसे औद्योगिक उपयोग की संभावनाएं सामने आईं, जो हटाने के अभियान को केवल खर्च वाली गतिविधि के बजाय संभावित आय का स्रोत बना सकती हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि इन आक्रामक कैटफ़िश की त्वचा से गीले वजन के आधार पर लगभग 10% कोलेजन मिलता है। इससे हल्के सफेद रंग का पदार्थ बनता है, जिसके गुण बाजार में उपलब्ध अन्य स्रोतों के कोलेजन से तुलनीय हैं। निष्कर्षण की प्रक्रिया में अम्ल में घुलनशील विधियों का इस्तेमाल होता है। इससे तेज एसिटिक एसिड गंध वाला उत्पाद मिलता है, लेकिन इसके गुण औद्योगिक उपयोग के अनुकूल हैं। जांच में हाइड्रॉक्सीप्रोलाइन की मात्रा 1.6% पाई गई, जो औद्योगिक उपयोग के लिए कोलेजन की गुणवत्ता का अहम संकेतक है। इसकी श्यानता 0.6 मिलीपास्कल-सेकंड और पीएच स्तर 5.51 था, जो दवा संबंधी उपयोग के स्वीकार्य मानकों के दायरे में है।

सबसे अहम बात यह है कि भारी धातुओं की जांच में उनकी मात्रा सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा में उपयोग के लिए सुरक्षित सीमा के भीतर पाई गई। इससे औद्योगिक उपयोग से जुड़ी मुख्य सुरक्षा चिंताओं का समाधान होता है। निकाले गए कोलेजन में भारी धातुओं की मात्रा दवा और सौंदर्य प्रसाधन संबंधी उपयोग के लिए स्वीकार्य स्तर पर थी। यह माप मछलियों की विभिन्न प्रजातियों पर हुए पिछले अध्ययनों के नतीजों के समान था।

अध्ययन के लेखकों ने निष्कर्ष निकाला कि इन मछलियों की औद्योगिक मांग पैदा करने से उन्हें बड़े पैमाने पर हटाने के आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ सकते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से उनकी आबादी नियंत्रित हो सकती है। प्रोटीन से भरपूर कई टन जैविक सामग्री को दफनाने के बजाय जकार्ता सिगांजुर केंद्र जैसी प्रसंस्करण सुविधाएं स्थापित कर सकता है, जिसका जिक्र अधिकारियों ने किया था। हालांकि, इन सुविधाओं को पकड़ी गई मछलियों से सौंदर्य और चिकित्सा उद्योगों के लिए उपयोगी कोलेजन बनाने के अनुरूप तैयार करना होगा। यह तरीका पश्चिमी जकार्ता में पहले से लागू मछली पकड़ने पर नकद प्रोत्साहन योजना के साथ मेल खाएगा। इससे प्रति किलोग्राम मिलने वाली मौजूदा 25,000 रुपये की दर से अधिक मूल्य मिल सकता है और उपयोगी प्रसंस्करण के जरिए निपटान की समस्या भी हल हो सकती है।

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निरंतर अभियान से क्षेत्रीय मिसाल

अधिकारियों ने साफ कहा है कि यह कार्रवाई दीर्घकालिक प्रबंधन रणनीति का केवल शुरुआती चरण है। अधिकारियों ने नियमित निगरानी और मछलियों को हटाने के जो सिलसिलेवार अभियान घोषित किए हैं, उनसे जाहिर है कि वे समझते हैं कि इतनी बड़ी और स्थापित आक्रामक आबादी को एक बार की कार्रवाई में खत्म करना संभव नहीं है। इसके बजाय, जकार्ता धीरे-धीरे इस आबादी को घटाने की रणनीति अपना रहा है। इसमें प्रजनन करने वाली मछलियों की संख्या व्यवस्थित रूप से घटाने के साथ-साथ नई छोड़ी गई मछलियों को भी रोका जाएगा।

शहर के अधिकारियों ने जकार्ता की कार्रवाई को इंडोनेशिया के उन अन्य क्षेत्रों के लिए संभावित मिसाल बताया है, जो आक्रामक प्रजातियों की ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पर्यावरण अधिकारियों, आपदा-न्यूनीकरण टीमों और स्थानीय प्रशासनिक तंत्र को साथ लाने वाला यह बहु-एजेंसी समन्वित तरीका जलीय पर्यावरण में एकीकृत कीट प्रबंधन का नमूना पेश करता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जकार्ता की कार्रवाई ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य क्षेत्रों के लिए मिसाल बनेगी और दिखाएगी कि नगर सरकारें एक साथ कई जिलों में संसाधन कैसे जुटा सकती हैं।

इस अभियान से एक्वेरियम की जिम्मेदार देखभाल को लेकर जन-जागरूकता की अहमियत भी सामने आती है। मौजूदा अभियान मछलियों की अचानक बढ़ी आबादी से निपटता है, लेकिन भविष्य में इनके फिर से आने को रोकने के लिए पालतू जानवरों के मालिकों का व्यवहार बदलना जरूरी है। कई लोगों को यह समझ नहीं होता कि एक्वेरियम की मछलियों को प्राकृतिक जलमार्गों में छोड़ने के पारिस्थितिक नतीजे क्या हो सकते हैं। यह मछली 50 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती है और 10 से 15 साल तक जीवित रह सकती है। पूरी तरह विकसित होने के बाद यह आम घरेलू एक्वेरियम के लिए उपयुक्त नहीं रहती, जिसके चलते कई मालिक इसे छोड़ देते हैं।

गवर्नर प्रामोनो के प्रशासन ने संकेत दिया है कि पर्यावरण की सफाई के प्रयास सफाई मछली अभियान से आगे भी जारी रहेंगे। नदी के स्वास्थ्य में सुधार राजधानी के व्यापक स्थिरता एजेंडे का एक प्रमुख आधार है। केलापा गाडिंग, सेतु बाबाकन, चेंगकारेंग और सिलिवुंग नदी में एक साथ चलाए गए अभियान समस्या और प्रस्तावित समाधान, दोनों के भौगोलिक विस्तार को दिखाते हैं।

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मुख्य बातें

  • गवर्नर प्रामोनो अनंग ने सपु-सपु नाम की आक्रामक सफाई मछली को हटाने के लिए जकार्ता के पांचों प्रशासनिक शहरों में एक साथ अभियान चलाने का आदेश दिया।
  • पूर्वी जकार्ता की टीमों ने अकेले सिलिवुंग नदी से लगभग 200 किलोग्राम मछलियां पकड़ीं। वहीं, पश्चिमी जकार्ता में सामुदायिक भागीदारी के लिए प्रति किलोग्राम 25,000 रुपये ($1.50) का प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
  • वैज्ञानिक नाम Hypostomus plecostomus वाली और दक्षिण अमेरिका की मूल निवासी यह कवचधारी कैटफ़िश 50 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती है और 10 से 15 साल जीवित रहते हुए स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाती है।
  • बिल बनाने की आदत से ये मछलियां नदी किनारों को नुकसान पहुंचाती हैं, कटाव बढ़ाती हैं और निचली राजधानी के लिए अहम बाढ़ नियंत्रण बुनियादी ढांचे को खतरे में डालती हैं।
  • पकड़ी गई मछलियों को नदी किनारे दफन किया जाता है, ताकि वे जीवित न बचें। यह प्रजाति लंबे समय तक पानी से बाहर रह सकती है और उचित निपटान न होने पर जलमार्गों में फिर से फैल सकती है।
  • वैज्ञानिक शोध से संकेत मिलता है कि इन मछलियों से दवा-स्तर का कोलेजन निकाला जा सकता है। इससे दफनाने के विकल्प के तौर पर आर्थिक उपयोग की संभावना बनती है।
  • शहर के अधिकारियों का कहना है कि यह नियमित निगरानी और मछलियों को हटाने के निरंतर प्रयासों की शुरुआत है, ताकि पारिस्थितिकी को और नुकसान से बचाया जा सके।
  • एक्वेरियम की मछलियों को जलमार्गों में छोड़ने से यह आक्रमण शुरू हुआ। इससे भविष्य में पारिस्थितिक व्यवधान रोकने के लिए पालतू जीवों की जिम्मेदार देखभाल पर जन-जागरूकता की जरूरत सामने आती है।
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