नई नौकरी जो दुःस्वप्न बन गई
डेक्स खुद को ठग नहीं मानता था। कंबोडिया में अपनी नई नौकरी के पहले दो महीनों तक उसने मिले आदेशों का पालन किया। हर दिन वह स्क्रीन के सामने बैठकर तयशुदा संदेश भेजता और एक दूर-दराज़ के अनजान व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचता। उसके आसपास कतारों में दक्षिण कोरिया के दूसरे लोग भी यही कर रहे थे। फोन और पासपोर्ट जब्त थे और घेराबंद परिसर में पहरेदार गश्त करते थे, इसलिए भागना नामुमकिन लगता था। और फिर, उसे पैसों की जरूरत थी।
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जब वह पहली बार कंबोडिया के लिए रवाना हुआ था, तो उसे लगा था कि यह "शेयर निवेश समूह के लिए बस एक संदिग्ध मैसेजिंग नौकरी है। मुझे नहीं पता था कि यह असली धोखाधड़ी है," डेक्स ने CNN को बताया। "जब मैं पहुंचा, तो उन्होंने कहा कि दो तरह के घोटाले होते हैं: रोमांस और शेयर निवेश, और वे दोनों चलाते हैं।"
अपनी पहचान की रक्षा के लिए बदला गया नाम इस्तेमाल कर रहे डेक्स उन सैकड़ों दक्षिण कोरियाई लोगों में शामिल हो गया था, जिन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय चीनी आपराधिक गिरोहों द्वारा चलाए जा रहे बड़े ठगी नेटवर्कों में खींच लिया गया था। उसके जैसे कई लोगों को जल्दी अमीर बनाने का वादा करने वाले फर्जी नौकरी के विज्ञापनों से फुसलाया गया, लेकिन अंत में वे फंस गए और अपनी मातृभाषा में ठगी करने के लिए मजबूर हुए।
पिछले साल इन ठगी अभियानों ने दक्षिण कोरियाई लोगों से करोड़ों डॉलर ऐंठे, उनकी बचत खत्म कर दी और जिंदगियां बर्बाद कर दीं। यह अरबों डॉलर के वैश्विक ठगी नेटवर्क की महज एक शाखा थी, जिसने हाल के वर्षों में दुनिया भर में लोगों को निशाना बनाया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए सिरदर्द पैदा किया। अब भाग निकलने के बाद डेक्स अपने ही परिसर के कुछ पीड़ितों के साथ मिलकर कोरियाई भाषा में चलाए जा रहे इस ठगी अभियान के सरगनाओं पर मुकदमा चलाने के लिए मामला तैयार कर रहा है।
वैश्विक ठगी उद्योग का पैमाना
कंबोडिया, लाओस और म्यांमार समेत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के दूरदराज़ और अक्सर अराजक सीमावर्ती इलाके 21वीं सदी की इस तरह की ठगी के केंद्र बन गए हैं। कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और जरूरत के मुताबिक कई परिसर खुल रहे हैं तथा दूसरी जगहों पर स्थानांतरित हो रहे हैं।
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया के ठगी नेटवर्कों ने अकेले 2024 में अमेरिकियों से कम से कम 10 अरब डॉलर ऐंठे। संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में दक्षिण कोरियाई लोगों ने इन अभियानों में करीब 14.8 करोड़ डॉलर गंवाए। अक्टूबर 2025 तक स्थिति और भी चिंताजनक हो गई थी। दक्षिण कोरिया का अनुमान था कि कंबोडिया के ठगी परिसरों में उसके करीब 1,000 नागरिक काम कर रहे थे।
कंबोडिया में 14 साल से रह रहीं और बंधकों को घर लौटने में मदद कर चुकीं ईसाई मिशनरी ओक हे-शिल ने CNN को बताया, "कोरियाई लोगों को बहुत महत्व दिया जाता है, क्योंकि वे कुशलता से काम करते हैं और जल्दी लक्ष्य हासिल करते हैं।"
दक्षिण कोरियाई अधिकारियों का मानना है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में इन परिसरों में विभिन्न देशों के लगभग 2,00,000 कर्मचारी हैं, जिनमें करीब 1,000 दक्षिण कोरिया से हैं। यह विशाल कार्यबल ऐसे वैश्विक संकट को बढ़ावा दे रहा है, जिसने दुनिया भर में लाखों लोगों को शिकार बनाया है।
The Diplomat के अनुसार, राष्ट्रीय खुफिया सेवा का मानना है कि कंबोडिया में करीब 50 ठगी परिसर फैले हुए हैं, हालांकि अनुमान है कि यह संख्या 400 तक हो सकती है। हाल के वर्षों में यह उद्योग तेजी से फैला है। खासकर म्यांमार और लाओस में चीन की कार्रवाई के बाद 2023 के आखिर और 2024 में ठगी के अभियान कंबोडिया स्थानांतरित हो गए।
'पिग बुचरिंग' ठगी का तरीका
डेक्स को महिला बनकर मैसेजिंग ऐप पर पुरुषों से बातचीत करने और उन्हें फर्जी शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की ओर ले जाने का निर्देश दिया गया था। इस तरीके को "पिग बुचरिंग" कहा जाता है: पहले निवेशक का धीरे-धीरे भरोसा जीतना और फिर उसके पैसे चुरा लेना।
नौकरी के शुरुआती दो महीनों में डेक्स जैसे चैटर आमतौर पर करीब 100 लोगों से संपर्क करते थे और संभावित पीड़ितों की बचत का पता लगाने के लिए तयशुदा स्क्रिप्ट का सख्ती से पालन करते थे। तीसरे महीने तक सबसे अच्छे संभावित शिकारों को, जिनकी संख्या दो दर्जन से भी कम होती थी, संगठन के फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाता था। डेक्स ने बताया कि पीड़ित की हर रकम आते ही एक विशाल घंटा बजाकर इसकी घोषणा की जाती थी। एक शिकार से करीब 6,900 डॉलर की कमाई होती थी।
उसने बताया कि आदर्श शिकार "50 की उम्र के पुरुष" होते थे। "आमतौर पर उनके पास अच्छी-खासी संपत्ति होती है और उन्हें 30 की उम्र की महिलाओं से बात करने का मौका बहुत कम मिलता है।"
इन अभियानों की चालाकी सिर्फ संदेशों तक सीमित नहीं थी। कथित सरगनाओं में से एक द्वारा संचालित डीपफेक "निवेश विशेषज्ञ" रोज़ YouTube पर लाइव सत्र करता था, जिनके दर्शकों की संख्या कृत्रिम रूप से बढ़ाई जाती थी। एक्सचेंज के कर्मचारियों का रूप धरने वाले टीम लीडर पीड़ितों को म्यूल खातों में पैसे जमा करने को कहते थे। इन खातों के बैंक नंबर लगातार बदलते रहते थे, जिससे जांचकर्ताओं के लिए पैसों का सुराग लगाना मुश्किल हो जाता था।
इंसानी कीमत: पीड़ित और बचकर निकले लोग
मई 2024 में, अपना 50वां जन्मदिन मनाने के कुछ ही समय बाद, हून को Facebook पर एक महिला का संदेश मिला। उसने अपना परिचय सियोल में ब्यूटी शॉप चलाने वाली 38 वर्षीय महिला के रूप में दिया था। उसकी प्रोफाइल तस्वीर में दिल के आकार का चेहरा था और काले बाल एक कान के पीछे करीने से रखे हुए थे।
हून ने, जिसकी पहचान की रक्षा के लिए उसका नाम बदल दिया गया है, महिला से कहा कि उसे उसका ध्यान पाने का हकदार नहीं लगता। उसने खुद को साधारण बताया और कहा कि उसके जैसी महिलाओं के मामले में वह अनुभवहीन है। महिला ने उसे भरोसा दिलाया, तो वह और करीब आया। उसने उसे "मेरे जैसे किसी इंसान के लिए बहुत ज्यादा खूबसूरत" कहा और पूछा कि वह "देने के लिए कुछ भी न रखने वाले" आदमी से बात करना क्यों चुनेगी।
उसने प्यार से जवाब दिया, उसे अपना "बॉयफ्रेंड" कहा और शादी, साथ में घर बसाने और माता-पिता से मिलने की योजनाएं बताईं। जब हून ने दोस्तों की जताई शंकाओं का जिक्र किया, तो उसने उन्हें अनदेखा करने को कहा और जोर दिया कि उनकी खुशी "हम दोनों के बीच" ही रहनी चाहिए।
कुछ ही हफ्तों में वे एक-दूसरे को सुप्रभात और शुभरात्रि के संदेश भेजने लगे। उनकी बातचीत हून के दिन के शांत पलों का हिस्सा बन गई। उसने उसे दक्षिण कोरिया की राजधानी से काफी दूर अपनी सुरक्षा की नौकरी के बारे में बताया। वह प्यार से उसे शर्मीला कहकर चिढ़ाती थी। फिर उसने उसे बुलावा भेजा।
उसने बताया कि वह एक प्रशिक्षक के लाइव YouTube व्याख्यान देख रही थी और विदेशी मुद्रा के कारोबार से हुए मुनाफे के स्क्रीनशॉट भेजे। उसने दावा किया कि एक दिन में सैकड़ों हजार और अगले दिन लाखों कमाए। फिर उसने हून को भी जुड़ने के लिए मनाया और जोर दिया कि प्लेटफॉर्म सुरक्षित है। उसने कहा, "खाता खोलने पर 300 डॉलर का बोनस भी मिलता है।"
हून हिचकिचाया। उसने भरोसा दिलाया कि उसने अपनी 1,00,000 डॉलर की बचत निवेश की है और उसे कम रकम से शुरुआत करने को कहा: 700 डॉलर काफी थे। जल्द ही उसने उसे एक "सहायक" से जोड़ दिया, जिसने उसे एक समूह चैट में शामिल किया। वहां निवेशकों को लाइव सत्रों और विदेशी मुद्रा कारोबार के बारे में निर्देश दिए जाते थे।
हून ने एक बैंक खाते में करीब 6,800 डॉलर भेजे। यह कई लेन-देन की शुरुआत थी, जिनसे अंततः उसकी 1,45,000 डॉलर की बचत खत्म हो गई। जब उसे समझ आया कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो ब्यूटी शॉप चलाने वाली महिला ने उसके खाते में कथित तौर पर जमा की गई एक फर्जी रकम को लेकर उसे धमकाया और फिर गायब हो गई।
करीब 3,500 किलोमीटर दूर, नोम पेन्ह में कहीं, कोई व्यक्ति शायद उसी वक्त घंटे पर चोट कर रहा था।
ठगी परिसरों की क्रूर हकीकत
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशक वी सुंग-लाक ने बताया कि पिछले साल 330 से ज्यादा दक्षिण कोरियाई कंबोडिया में लापता हुए। ज्यादातर मिल गए, लेकिन 79 का अब भी पता नहीं चला है। वी ने कहा कि कुछ लोग अवैध गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए जानबूझकर कंबोडिया गए थे और वापस भेजे जाने के बाद भी वहां लौट आए।
कुछ लोगों के लिए इन नेटवर्कों में फंसने की शुरुआत भारी कर्ज से होती है। दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे लोगों को सलाह देने वाले ऋण वकील पार्क की-ते ने दक्षिण कोरिया के कर्ज में डूबे युवाओं की निराशा की ओर इशारा किया। उनके हाल के तीन मुवक्किल, सियोल के बाहर के एक प्रांत के 20 की उम्र के मध्य के पुरुष, नौकरी के विज्ञापनों या विदेश में रहने वाले दोस्तों के जरिए इन नेटवर्कों में खिंचे चले आए। बाद में उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए "अपहरण" कर लिया गया या "मजबूर" किया गया।
पार्क ने CNN को बताया, "तीनों पहले से कर्ज में थे।" उन्होंने देश में कई युवाओं की मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा, "निराशा उन्हें ऐसे प्रस्तावों के प्रति असुरक्षित बना देती है जो सच होने से बहुत अच्छे लगते हैं।"
दक्षिण-पूर्व एशिया के ठगी परिसरों में कई ठगों ने भयानक हिंसा झेलने की बात कही है। डेक्स ने बताया कि कोरियाई लोगों द्वारा चलाए जा रहे हिस्से में "लगभग कोई हिंसा नहीं" होती थी और उसे कभी पीटा नहीं गया। लेकिन पर्यवेक्षक चेतावनी देते थे कि काम में पीछे रहने और कंपनी के कर्ज में फंसने वाले लोगों को चीनी गिरोहों को "बेच" दिया जाता था, जहां पिटाई और बिजली के झटके दिए जाते थे।
जब उसने ऐसे ही एक कर्मचारी को चुपचाप गायब होते देखा, तो उसने कसम खाई कि वह कभी उसकी तरह नहीं होगा। अगस्त और सितंबर में कंबोडिया के ठगी ठिकानों से 16 दक्षिण कोरियाई लोगों को बचाने में मदद करने वाले सांसद पार्क चान-दे ने कहा कि कुछ बंधकों ने क्रूर व्यवहार की जानकारी दी थी।
उन्होंने CNN को बताया, "उन्हें पीटा गया, यौन हिंसा की धमकियां दी गईं और अंगों की संभावित तस्करी से जुड़े मेडिकल परीक्षणों से भी गुजरना पड़ा।"
VnExpress के अनुसार, दक्षिण कोरियाई पीड़ितों ने बताया कि आदेश न मानने या लक्ष्य पूरा न करने पर धातु की पाइपों से पीटना और बिजली का करंट देना आम सजा थी। 20 की उम्र के एक पीड़ित ने याद किया, "उन्होंने मुझसे दीवारों और फर्श पर लगे खून के धब्बे साफ करवाए। एक हफ्ते तक मेरे हाथों से खून की गंध आती रही।"
हर बंधक की किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी। कई स्थानीय समाचारों के अनुसार, पिछले जुलाई में पार्क मिन-हो ने अपने परिवार को बताया कि वह रोजगार मेले में जा रहा है। बाद में उसके विश्वविद्यालय ने CNN से इसकी पुष्टि की। कुछ हफ्तों बाद, 22 वर्षीय पार्क का शव नोम पेन्ह से करीब 90 मील दक्षिण-पश्चिम में कंपोत प्रांत में एक कार के अंदर मिला, कंबोडिया सरकार ने अक्टूबर में बताया। जिस इमारत में वह ठहरा था, उसे ठगी परिसर के रूप में पहचाना गया। अधिकारियों ने कहा कि "भीषण यातना से आए दिल के दौरे" के कारण उसकी मौत हुई थी। उसके पूरे शरीर पर चोट के निशान और घाव थे।
अधिकारियों ने उसकी मौत के मामले में तीन चीनी पुरुषों और दो अन्य लोगों पर आरोप लगाए हैं। कंबोडिया सरकार के अनुसार, दो सहयोगी अब भी फरार हैं। यह मामला दक्षिण कोरिया की तेज की गई कार्रवाई का उत्प्रेरक बना और देश को एक असहज आत्ममंथन के लिए मजबूर किया।
सरकारी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
अक्टूबर 2025 तक दक्षिण कोरिया कंबोडिया में हिरासत में लिए गए 60 से अधिक नागरिकों को पहले ही वापस ला चुका था और ठगी के लिए कुख्यात इलाकों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा चुका था। छात्र की मौत के बाद दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय ने कंबोडिया के कुछ हिस्सों के लिए "कोड-ब्लैक" यात्रा प्रतिबंध जारी किया। इनमें कंपोत प्रांत का बोकोर माउंटेन क्षेत्र, बावेट शहर और पोइपेट शहर शामिल थे।
मंत्रालय ने कहा, "इन इलाकों में आने या ठहरने वाले दक्षिण कोरियाई नागरिकों पर पासपोर्ट अधिनियम और अन्य संबंधित नियमों के तहत दंड लगाया जा सकता है। इसलिए इन इलाकों की यात्रा की योजना बना रहे नागरिकों को अपने दौरे रद्द करने की कड़ी सलाह दी जाती है।"
जनवरी 2026 में कार्रवाई का दायरा तेजी से बढ़ा, जब दक्षिण कोरिया के 73 संदिग्धों को चार्टर विमान से कंबोडिया से वापस लाया गया, ताकि देश में उनसे पूछताछ की जा सके। दक्षिण कोरियाई आपराधिक संदिग्धों की यह अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक वापसी थी। छात्र की मौत के बाद विदेशों में चल रहे ठगी परिसरों को लेकर जनता का आक्रोश बढ़ गया था।
Yonhap News Agency के अनुसार, संदिग्धों पर 869 दक्षिण कोरियाई लोगों से करीब 48.6 अरब वॉन (3.3 करोड़ डॉलर) की धोखाधड़ी करने का आरोप है। जांचकर्ताओं ने कंबोडिया में इस समूह से जुड़े सात ठगी केंद्रों की पहचान की। इनमें एक दंपती भी शामिल है, जिस पर डीपफेक तकनीक के जरिए रोमांस ठगी करते हुए 100 से अधिक पीड़ितों से करीब 12 अरब वॉन ऐंठने का आरोप है।
अधिकारियों ने कहा कि पहचान से बचने के लिए इस जोड़े ने प्लास्टिक सर्जरी कराई हो सकती है। राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने पत्रकारों से कहा, "दक्षिण कोरियाई अधिकारियों से बचने के लिए संदिग्धों ने छिपे रहने के दौरान प्लास्टिक सर्जरी कराकर अपना हुलिया बदल लिया।"
अक्टूबर 2025 में राष्ट्रपति ली जे-म्युंग और कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट के बीच शिखर बैठक के बाद दक्षिण कोरिया ने सरकार-व्यापी कार्यबल बनाया। यह कार्यबल अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के प्रयासों में तालमेल बैठाता है। इसमें छिपी संपत्तियों का पता लगाने और अपराध से हासिल रकम वापस पाने के प्रयास तेज करने की योजना भी शामिल है।
राष्ट्रपति के प्रवक्ता कांग यू-जुंग ने कहा, "कार्यबल के जरिए सरकार तब तक सख्ती से कार्रवाई करती रहेगी, जब तक कोरियाई लोगों को निशाना बनाने वाले विदेश-आधारित ठगी अभियान पूरी तरह खत्म नहीं हो जाते।"
अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई
कंबोडिया के ठगी उद्योग से निपटने की कोशिश करने वाला दक्षिण कोरिया अकेला देश नहीं है। फरवरी 2025 में चीन ने म्यांमार और कंबोडिया के ठगी परिसरों पर कार्रवाई का नेतृत्व किया। मंगलवार को अमेरिका और ब्रिटेन ने कंबोडिया के एक समूह, प्रिंस ग्रुप, के कुछ हिस्सों पर प्रतिबंध लगाए। उनका कहना था कि यह समूह दुनिया भर में ठगी नेटवर्क चला रहा था।
अमेरिका के संघीय अभियोजकों ने इसके अध्यक्ष चेन झी पर अभियोग लगाया और 15 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की। अभियोजकों के मुताबिक, यह चेन की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग योजनाओं से हासिल रकम थी। अमेरिकी न्याय विभाग ने इसे विभाग के इतिहास में "जब्ती की सबसे बड़ी कार्रवाई" बताया।
अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल ऐसे घोटालों में अमेरिकी नागरिकों और कारोबारों की गंवाई रकम 66% बढ़कर 10 अरब डॉलर से अधिक हो गई। ज्यादातर ठगी केंद्र कंबोडिया और म्यांमार से चलाए जाते हैं और मुख्य रूप से चीनी आपराधिक संगठन इन्हें संचालित करते हैं।
प्रिंस ग्रुप के अध्यक्ष चेन झी इससे पहले हुन मानेट और पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन, दोनों के वरिष्ठ सलाहकार रह चुके हैं। चेन अब भी किसी भी गलत काम से इनकार करते हैं, लेकिन अमेरिकी सरकार ने ठगी से हुई कमाई से कथित तौर पर जुड़े 15 अरब डॉलर के क्रिप्टो संपत्ति जब्त की।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ने उन राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के जटिल जाल को उजागर किया है, जिनकी वजह से ये अभियान फलते-फूलते हैं। चीन पर कंबोडिया की अत्यधिक आर्थिक निर्भरता ने राजनीतिक संरक्षण का माहौल बनाया है। कंबोडिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का करीब 50%, बाहरी कर्ज का 44% और आयात का 49% चीन से आता है।
ठग से सहयोगी तक
जब हून अपनी गंवाई रकम वापस पाने की कोशिश कर रहा था, तब दक्षिण कोरिया लौट चुका डेक्स उस गिरोह से Telegram पर धमकियां पा रहा था, जिससे वह भाग निकला था। फिर उसने उसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के बारे में एक समाचार देखा, जिसका उसका संगठन पीड़ितों को ठगने के लिए इस्तेमाल करता था।
खबर के नीचे किसी ने अपनी संपर्क जानकारी के साथ टिप्पणी लिखी थी और जानकारी रखने वाले लोगों से सामने आने की अपील की थी। डेक्स हिचकिचाया, फिर उसने फोन किया। जवाब देने वाली महिला क्ले थी, जो इस योजना में 1,38,000 डॉलर से अधिक गंवा चुकी थी। उसकी पहचान की रक्षा के लिए उसका नाम भी बदल दिया गया है।
मामले पर नजर रख रही क्ले ने डेक्स से पुलिस से बात करने का आग्रह किया। पहले तो वह डर के कारण पीछे हट गया कि उसे अपराधी समझा जाएगा। लेकिन आखिरकार उसने तस्वीरें, स्प्रेडशीट और चैट लॉग सौंप दिए, जिनसे पुलिस अलग-अलग शिकायतों को जोड़कर बड़ी जांच शुरू कर सकी।
डेक्स ने कहा, "जब उन्होंने गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार करना शुरू किया, तो धमकियां बंद हो गईं।"
अधिकारियों को आपस में जुड़ी सौ से अधिक शिकायतें मिलीं, जिनमें कुल करीब 12 अरब दक्षिण कोरियाई वॉन (81 लाख डॉलर) का नुकसान बताया गया था। इस फैसले के बाद महीनों तक पूछताछ और नींद से भरी रातें रहीं, लेकिन आखिरकार प्रगति हुई।
क्ले ने तब से ठगे गए कोरियाई लोगों का एक समूह बनाया है। इसमें हून भी शामिल है। अब वे अधिकारियों पर उस चीज के खिलाफ कार्रवाई का दबाव डाल रहे हैं, जिसे क्ले "वैश्विक ठगी संकट" कहती हैं। समूह में दो बच्चों की एक मां है, जिसने 10 लाख डॉलर गंवाए; एक तलाकशुदा पुरुष है, जिसने 1,00,000 डॉलर से अधिक गंवाए; और एक महिला है, जिसने कंबोडिया से संचालित ठगी का शिकार होने के बाद अपने परिवार के एक सदस्य को आत्महत्या में खो दिया।
क्ले जैसे पीड़ितों का कहना है कि उन्हें धीरे-धीरे समझ आया कि उनका नुकसान कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक बड़े अभियान का हिस्सा था। चैट लॉग और वॉइस रिकॉर्डिंग की तुलना करने पर उन्हें पता चला कि कथित सरगना कांग दा-विट वही कोरियाई व्यक्ति था, जो कई फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्मों पर अलग-अलग नामों से सामने आता था। वह ठगी प्रसारणों में डीपफेक के जरिए निवेश विशेषज्ञ की भूमिका निभाता था।
डेक्स ने क्ले के लिए खातों की पुष्टि करने में मदद की। फरवरी 2025 में कंबोडियाई पुलिस ने कांग को गिरफ्तार किया और उसे उसकी पत्नी के साथ दक्षिण कोरिया वापस भेज दिया गया। वे कंबोडिया में हिरासत में लिए गए और इस नेटवर्क में कथित संलिप्तता के आरोप में वापस भेजे गए 70 से अधिक दक्षिण कोरियाई लोगों में शामिल थे। राष्ट्रपति कार्यालय ने इस वापसी को अपने पैमाने में अभूतपूर्व बताया।
पैसे का सुराग और न्याय की मांग
पीड़ितों का कहना है कि अब वे बाकी सरगनाओं के प्रत्यर्पण की मांग कर रहे हैं। लेकिन जवाबदेही का मतलब पैसे का पीछा करना भी है। जांचकर्ताओं ने रकम के अंतिम ठिकाने की सार्वजनिक रूप से पहचान नहीं की है, लेकिन क्ले जैसे पीड़ित अधिकारियों पर यह पता लगाने का दबाव डाल रहे हैं कि पैसा आखिर कहां गया।
The Diplomat की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले कंबोडिया में ठगी उद्योग से सालाना अनुमानित 12 से 19 अरब डॉलर की कमाई होती है और सरकारी अधिकारी इन कारोबारों से सीधे लाभ उठाते हैं। हितों का यह बुनियादी टकराव अंतरराष्ट्रीय दबाव के बिना वास्तविक कार्रवाई को लगभग असंभव बना देता है।
पीड़ितों को निशाना बनाने का यह सिलसिला उस चीज को उजागर करता है जिसे शोधकर्ता "गुब्बारा प्रभाव" कहते हैं: एक जगह कार्रवाई होने पर अभियान बस दूसरी जगह चले जाते हैं। 2023 में जब कार्रवाई का केंद्र गोल्डन ट्रायंगल था, तब लाओस मुख्य ठिकाना था और वहां दक्षिण कोरिया के 56 पीड़ित थे। वहां दबाव बढ़ने पर अभियान कंबोडिया चले गए। 2024 में वहां 220 मामले दर्ज हुए, जो 2023 के 17 मामलों से दस गुना से भी अधिक थे।
2025 तक कंबोडिया में दक्षिण कोरियाई पीड़ितों की सबसे बड़ी संख्या बनी रही: सितंबर तक 386 मामले। लेकिन ठगी का दायरा अन्य जगहों पर भी फैल रहा था। फिलीपींस में पांच साल में पहली बार तीन पीड़ित मिले, वियतनाम में भी पहली बार तीन और मलेशिया में पहली बार एक। थाईलैंड में 2023 के एक मामले की तुलना में 2025 में नौ मामले दर्ज हुए।
शायद सबसे अहम बात यह है कि दक्षिण कोरियाई पुलिस उन देशों में सक्रिय जांच कर रही है, जहां पहले ऐसे मामलों का नाममात्र या कोई अनुभव नहीं था: फिलीपींस में 14, चीन में नौ, थाईलैंड में सात, वियतनाम में छह और लाओस में तीन मामलों की जांच चल रही है।
आज डेक्स कार सीट बनाने वाली फैक्टरी में लंबी शिफ्टों में काम करता है। डर कम हो गया है, लेकिन उसके माता-पिता अब भी मानते हैं कि वह सिर्फ कंबोडिया घूमने गया था। वह उन्हें यही मानने देना चाहता है। इस बीच, क्ले और अन्य पीड़ित जवाबदेही की मांग जारी रखे हुए हैं। उनकी मांग सिर्फ अपराध करने वालों को जवाबदेह ठहराने की नहीं, बल्कि उन व्यवस्थाओं को भी जिम्मेदार मानने की है, जिन्होंने इतने सालों तक इन अभियानों को बिना किसी खास रोक-टोक के फलने-फूलने दिया।
मुख्य बिंदु
- 2025 में 330 से अधिक दक्षिण कोरियाई कंबोडिया में लापता हुए और 79 का अब तक पता नहीं चला है। यह इस क्षेत्र में मानव तस्करी के बड़े पैमाने को उजागर करता है
- भाग निकला पूर्व ठग डेक्स सरगनाओं पर मुकदमा चलाने में मदद के लिए पीड़ितों के साथ जुड़ा, जिससे अपराधियों और पीड़ितों के बीच के जटिल संबंध सामने आते हैं
- ठगी अभियानों में परिष्कृत "पिग बुचरिंग" तरीकों का इस्तेमाल होता है। पीड़ितों की जीवनभर की बचत चुराने से पहले रोमांस और निवेश योजनाओं के जरिए उनका भरोसा जीता जाता है
- हून जैसे दक्षिण कोरियाई पीड़ितों ने इन सुनियोजित घोटालों में 1,45,000 डॉलर तक गंवाए
- 22 वर्षीय दक्षिण कोरियाई छात्र कंबोडिया में यातना के बाद मृत मिला। इस घटना ने सरकार को ज्यादा सख्त प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित किया
- कंबोडिया के ठगी उद्योग में पूरे क्षेत्र में करीब 2,00,000 कर्मचारी शामिल हैं और 1,000 से अधिक दक्षिण कोरियाई इन अभियानों में फंसे हैं
- दक्षिण कोरिया ने ठगी के 73 संदिग्धों को वापस भेजा। विदेश से आपराधिक संदिग्धों को लाने की यह उसकी अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। समूह पर 869 पीड़ितों से करीब 3.3 करोड़ डॉलर की धोखाधड़ी का आरोप है
- चेन झी पर अमेरिकी प्रतिबंध और 15 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी जब्त किए जाने समेत अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई, अमेरिकी न्याय विभाग के इतिहास में जब्ती की सबसे बड़ी कार्रवाई है
- ठगी अभियानों में "गुब्बारा प्रभाव" दिखता है: एक जगह कार्रवाई होने पर ये पड़ोसी देशों में चले जाते हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलकर कार्रवाई करना जरूरी है
- पीड़ित सिर्फ अपराधियों को ही नहीं, बल्कि उन व्यवस्थाओं और सरकारों को भी जवाबदेह ठहराने की मांग कर रहे हैं जिन्होंने इन अभियानों को फलने-फूलने दिया






