नियंत्रण और खुलापन कैसे बने चीन की तकनीकी प्रगति की ताकत

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नियंत्रण और खुलापन कैसे बने चीन की तकनीकी प्रगति की ताकत

चीन की तकनीकी प्रगति में नियंत्रण और प्रतिस्पर्धा का मेल

बीजिंग द्वारा ‘मेड इन चाइना 2025’ की घोषणा के एक दशक बाद, चीन ने वह कर दिखाया है जिसे वॉशिंगटन और यूरोप के कई लोग असंभव मानते थे: दुनिया की असेंबली लाइन से अत्याधुनिक तकनीक के केंद्र में बदलाव, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी राजनीति पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। यह बदलाव विशाल सौर कारखानों, इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर वैश्विक बदलाव को गति देने वाले बैटरी संयंत्रों, वीडियोग्राफरों और आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों के लिए मानक उपकरण बन चुके उपभोक्ता ड्रोन और निर्यात आंकड़ों में दिखता है, जो बताते हैं कि चीन अब किसी भी अन्य देश से अधिक कारें निर्यात करता है।

विषय-सूची
  1. चीन की तकनीकी प्रगति में नियंत्रण और प्रतिस्पर्धा का मेल
  2. स्मार्ट सत्तावाद कैसा दिखता है
  3. नियंत्रण और सूचना प्रबंधन के उपकरण
  4. बाजारों और विश्वविद्यालयों के लिए गुंजाइश
  5. जमीनी स्तर पर नतीजे कैसे दिखते हैं
  6. मानव पूंजी और शोध
  7. डिजिटल सिल्क रोड के जरिए मॉडल का निर्यात
  8. क्या नियंत्रण और नवाचार के बीच संतुलन बना रह सकता है
  9. लोकतांत्रिक देशों की प्रतिक्रिया और मानकों की होड़
  10. क्वांटम तकनीक, डिजिटल मुद्राएं और अगली लहर
  11. कंपनियां और नागरिक समाज
  12. मुख्य बिंदु

चीन यहां तक एक ऐसी व्यवस्था बनाकर पहुंचा है जिसे कई विद्वान ‘स्मार्ट सत्तावाद’ कहते हैं। यह तरीका डिजिटल युग के नियंत्रण के साधनों को बाजारों, विश्वविद्यालयों और निजी आविष्कारकों के फलने-फूलने के लिए पर्याप्त गुंजाइश के साथ जोड़ता है। व्यापक दमन के बजाय अधिकारी सूचना पर नियंत्रण, लगातार निगरानी, कठोर दमन की जिम्मेदारी दूसरों को सौंपने और ऐसे प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहनों पर जोर देते हैं, जो पूंजी और प्रतिभा को रणनीतिक उद्योगों की ओर मोड़ते हैं। यह पूर्वी एशिया के पहले के विकासशील देशों और सिंगापुर से सबक लेता है, और अब इसमें सेंसर, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा रियल टाइम डेटा प्रवाह भी जुड़ गए हैं।

अनुसंधान और विकास में निवेश वर्षों से बढ़ा है। चीन अब किसी भी अन्य देश से अधिक विज्ञान और इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट उपाधिधारक तैयार करता है, और अग्रणी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनियों के कई इंजीनियरों ने देश की घरेलू व्यवस्था में प्रशिक्षण लिया है। चीन की कंपनियां सौर विनिर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों और वाणिज्यिक ड्रोन के क्षेत्र में दबदबा रखती हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल निर्यातक बन गया है और बैटरियों में उसकी स्थिति उसे इलेक्ट्रिक वाहन युग में लागत और प्रदर्शन पर प्रभाव डालने की ताकत देती है। पेटेंट आवेदन, उच्च गुणवत्ता वाला वैज्ञानिक शोध और उच्च मूल्य वाले विनिर्माण की ओर तेज बदलाव ने चीन को वैश्विक नवाचार सूचकांक के शीर्ष स्तर पर पहुंचा दिया है। कुछ आकलनों में वह दुनिया में लगभग दसवें स्थान पर है।

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स्मार्ट सत्तावाद कैसा दिखता है

स्मार्ट सत्तावाद तीन स्तंभों पर टिका है। पहला, पार्टी व्यापक निगरानी के जरिए समाज की बारीक जानकारी जुटाना चाहती है। दूसरा, वह सूचना के प्रवाह पर कड़ा नियंत्रण रखती है। तीसरा, वह अर्थव्यवस्था और शिक्षा जगत के चुनिंदा हिस्सों को तीव्र प्रतिस्पर्धा, विदेशी सहयोग और उद्यम पूंजी के लिए खोलती है। इसका नतीजा ऐसी व्यवस्था है जिसका लक्ष्य राजनीतिक जोखिम को संभालते हुए आधुनिकीकरण और नवाचार के लाभ हासिल करना है।

नियंत्रण और सूचना प्रबंधन के उपकरण

पुलिस और स्थानीय अधिकारी अब विशाल डेटाबेस का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें फोन की लोकेशन संबंधी सूचनाएं, यात्रा का इतिहास, कैमरा फ़ीड, सोशल मीडिया पोस्ट और वित्तीय लेन-देन शामिल होते हैं। शिनजियांग में इसी व्यवस्था का इस्तेमाल लाखों तुर्किक मुसलमानों की निगरानी और नियंत्रण के लिए किया गया है। देश भर में तथाकथित ‘सेफ सिटी’ प्लेटफॉर्म सड़कों, ट्रेनों, स्कूलों और उद्यम प्रणालियों के डेटा को जोड़कर अशांति का अनुमान लगाते और असहमति रोकते हैं। केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा का परीक्षण भुगतान पर निगरानी की एक नई परत जोड़ता है। अधिकारी ऐसे ऐप इस्तेमाल करने की भी मांग करते हैं जो नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों को पार्टी के सिद्धांतों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करें। ये उपकरण बड़े पैमाने पर इसलिए काम कर पाते हैं क्योंकि चीनी कंपनियां सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती हैं और विकासशील देशों के लिए ये प्रणालियां किफायती हैं।

मानवाधिकारों के उल्लंघनों की जांच करने वाले गैर-सरकारी संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने चेतावनी दी है कि यह तकनीक-केंद्रित मॉडल सामाजिक नियंत्रण को दक्षता के साथ जोड़ता है और अब चीन की सीमाओं से बाहर भी फैल रहा है। संगठन ने इस सोच का सार एक तीखे वाक्य में बताया।

चीनी सरकार को उम्मीद है कि तकनीक उसे शासन के अपने भयावह रूप से नवाचारी तरीके को मजबूत करने में मदद करेगी।

चीन के भीतर यही डेटा प्रणालियां सार्वजनिक सेवाओं को भी चलाती हैं। स्वास्थ्य कोड प्रणालियों और शहर के डैशबोर्ड ने अधिकारियों को महामारी संभालने में मदद की, संक्रमण के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने से लेकर जरूरी सामान की आपूर्ति तक। सुविधा और नियंत्रण का यह मेल उन सरकारों को आकर्षित करता है जो सेवाओं की बेहतर आपूर्ति चाहती हैं, लेकिन अपना दबदबा भी कायम रखना चाहती हैं।

बाजारों और विश्वविद्यालयों के लिए गुंजाइश

इसी दौरान, बीजिंग ने निजी उद्यम, क्षेत्रों के बीच प्रतिस्पर्धा और उच्च शिक्षा में चुनिंदा खुलेपन के लिए जगह बनाई है। विश्वविद्यालयों का तेजी से विस्तार हुआ, विदेशी साझेदारों के साथ संयुक्त प्रयोगशालाओं ने वैज्ञानिकों की एक पीढ़ी को प्रशिक्षित किया और स्टार्टअप में उद्यम पूंजी का बड़ा निवेश हुआ। राज्य ने रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन दिया, लेकिन कई बड़ी खोजों को निजी कंपनियों ने आगे बढ़ाया और उन्हें व्यावसायिक रूप देने का जोखिम उठाया। शक्तिशाली प्लेटफॉर्म और बड़े ट्यूशन कारोबार पर समय-समय पर हुई कार्रवाई ने राजनीतिक सीमाएं दिखाईं। इसके बाद कुछ क्षेत्रों में नियामकों ने भरोसा और निवेश बहाल करने के लिए दबाव कम किया। एक साल सख्ती और अगले साल ढील का यह संतुलन इस मॉडल की पहचान है।

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जमीनी स्तर पर नतीजे कैसे दिखते हैं

इसका लाभ कुछ खास बाजारों में साफ दिखता है। सौर ऊर्जा क्षेत्र में चीनी कंपनियों का आपूर्ति शृंखला के ज्यादातर चरणों पर नियंत्रण है, पॉलीसिलिकॉन से लेकर मॉड्यूल तक। इससे वैश्विक कीमतें घटी हैं और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने की रफ्तार तेज हुई है। बैटरियों के क्षेत्र में चीनी सेल निर्माता अब लागत, ऊर्जा घनत्व और विनिर्माण पैमाने के मानक तय करते हैं। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कभी खारिज किए गए चीनी ब्रांड अब रिकॉर्ड मात्रा में निर्यात कर रहे हैं और यूरोप, मध्य पूर्व तथा लैटिन अमेरिका में प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रिक मॉडल बेच रहे हैं। ड्रोन क्षेत्र में कुछ कंपनियां ऐसे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और क्लाउड उपकरणों के साथ दुनिया भर के नागरिक बाजार पर छाई हुई हैं, जिन्हें एक साथ काम करने के लिए तैयार किया गया है। इन प्रमुख क्षेत्रों के अलावा चीन जैव-विनिर्माण, औद्योगिक रोबोटिक्स और उपग्रहों में भी अपनी पैठ बना रहा है।

मानव पूंजी और शोध

मानव पूंजी में दशकों के निवेश के बाद अब प्रतिभाओं का बड़ा समूह तैयार हो चुका है। चीन दुनिया में सबसे अधिक विज्ञान और इंजीनियरिंग में पीएचडी उपाधिधारक तैयार करता है और उसने अपने विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ाई है, खासकर इंजीनियरिंग और अनुप्रयुक्त विज्ञान में। शोध का उत्पादन तेजी से बढ़ा है और अत्यधिक उद्धृत शोधपत्रों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। अहम बात यह है कि कई उद्योगों में देश असेंबली से डिजाइन की ओर बढ़ा है। उद्यम पूंजी के निवेश चक्र ऐसे इंजीनियर तैयार करते हैं जो स्टार्टअप और बड़ी कंपनियों के बीच आते-जाते हैं और हर नई पहल में अपना व्यावहारिक ज्ञान साथ ले जाते हैं।

महामारी के दौरान सरकार और निजी क्षेत्र ने तेजी से कई प्रयोग किए, जिनसे पता चला कि यह व्यवस्था कितनी तेजी से काम कर सकती है। संक्रमण फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य कोड ऐप ने सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच नियंत्रित की, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स समूहों ने बड़े पैमाने पर बिना संपर्क वाली डिलीवरी शुरू की, स्कूलों ने दूरस्थ शिक्षा अपनाई और कंपनियों ने कामकाज जारी रखने के लिए क्लाउड कार्यालयों का इस्तेमाल किया। सेवा के आधार पर सरकारी एजेंसियों ने नियंत्रक या समर्थक की भूमिका निभाई, जबकि कंपनियों ने सामाजिक हित और आर्थिक लक्ष्य, दोनों साधे। इस मेल ने ठोस समस्याएं सुलझाने के लिए डेटा और सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की प्रवृत्ति को मजबूत किया।

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डिजिटल सिल्क रोड के जरिए मॉडल का निर्यात

बीजिंग विकासशील दुनिया के बड़े हिस्से को डिजिटल नेटवर्क से भी जोड़ रहा है। ‘डिजिटल सिल्क रोड’ के नाम पर चीनी विक्रेता 4G और 5G नेटवर्क से लेकर स्मार्ट सिटी प्लेटफॉर्म, क्लाउड डेटा केंद्र और समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबल तक, डिजिटल बुनियादी ढांचे के अहम हिस्से बना रहे हैं। बेइदौ उपग्रह नौवहन प्रणाली अब कई तरह के उपकरणों में शामिल है। चीनी क्लाउड प्रदाता और भुगतान प्लेटफॉर्म व्यापार मार्गों के साथ अपना विस्तार कर रहे हैं। सरकारी बैंकों का वित्तपोषण और आक्रामक कीमतें उन्हें उन बाजारों में सौदे जीतने में मदद करती हैं जहां बजट सीमित हैं और सुरक्षा जोखिम दूर की बात लगते हैं।

इन निर्यातों से दीर्घकालीन निर्भरताएं पैदा होती हैं। सॉफ्टवेयर अपडेट पर नियंत्रण रखने वाले उपकरण विक्रेता डेटा जुटा सकते हैं या नेटवर्क को आकार दे सकते हैं। स्मार्ट सिटी के पैकेज निगरानी की डिफॉल्ट सेटिंग के साथ आते हैं और अनुबंध की शर्तें अक्सर डेटा को साझेदारों के क्लाउड में रखने का प्रावधान करती हैं। कुछ परियोजनाओं के साथ अपारदर्शी कर्ज भी जुड़ा होता है। नीति विशेषज्ञों का तर्क है कि किफायती विकल्प सुरक्षा संबंधी चेतावनियों जितने ही महत्वपूर्ण हैं। वे एक ही आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता घटाने के एक तरीके के रूप में ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। कीमत और प्रदर्शन के लिहाज से उपयुक्त विकल्पों के बिना कई सरकारें उसी से खरीदारी करती रहेंगी जो पूरा और सस्ता समाधान लेकर आएगा।

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क्या नियंत्रण और नवाचार के बीच संतुलन बना रह सकता है

लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि क्या शी जिनपिंग के नेतृत्व में बढ़ता केंद्रीकरण उस रचनात्मक क्षमता को कमजोर कर देगा जिसने चीन की इस प्रगति को काफी हद तक गति दी। पार्टी ने नागरिक समाज और मीडिया पर अपनी पकड़ मजबूत की है, मुखर उद्यमियों को सजा दी है और ऐसे तरीकों पर भरोसा किया है जो खुलकर प्रयोग करने से अधिक स्थिरता को महत्व देते हैं। आलोचकों को चिंता है कि निष्ठा के आधार पर नियुक्तियां होने से शीर्ष नेतृत्व तक सटीक सूचना का प्रवाह सीमित होता है और सरकारी कंपनियों का लगातार बड़ा प्रभाव पूंजी के आवंटन को विकृत करता है। समर्थकों का जवाब है कि बीजिंग ने नीतियों की अति होने पर उनसे पीछे हटना सीखा है और प्रयोगशालाओं, कारखानों तथा नगरपालिकाओं के प्रायोगिक क्षेत्रों में अब भी लक्षित लचीलापन मौजूद है।

डार्टमाउथ कॉलेज में सरकार विषय की एसोसिएट प्रोफेसर और पूर्वी एशिया तथा स्मार्ट सत्तावाद का अध्ययन करने वाली जेनिफर लिंड का तर्क है कि नियंत्रण की तकनीक एक नए चरण में पहुंच गई है और इसने व्यवस्था के दबाव को संतुलित करने के तरीके को प्रभावित किया है।

दमन की तकनीकें वास्तव में बहुत आगे बढ़ चुकी हैं। हम बायोमेट्रिक्स के इस्तेमाल की ओर बढ़ते कदम भी देख रहे हैं, जो सचमुच डरावना है।

लोकतांत्रिक देशों की प्रतिक्रिया और मानकों की होड़

लोकतांत्रिक सरकारें नियंत्रण और क्षमता निर्माण के मेल से जवाब दे रही हैं। अमेरिका ने उन्नत चिप और विनिर्माण उपकरणों पर निर्यात नियंत्रण कड़े किए हैं, देश में आने वाले और बाहर जाने वाले निवेश की जांच की है, सार्वजनिक नेटवर्कों में असुरक्षित दूरसंचार उपकरणों पर रोक लगाई है और जबरन मजदूरी से जुड़े आयातों पर प्रतिबंध लागू किए हैं। एजेंसियों के नियम कार्यपालिका को तकनीकी सौदों की समीक्षा करने के नए अधिकार देते हैं। सरकारी खरीद पर लगी रोक कुछ विक्रेताओं को सरकारी प्रणालियों से बाहर रखती है। सहयोगी देश इस एजेंडे के कुछ हिस्सों पर तालमेल बना रहे हैं और सुरक्षित क्लाउड से लेकर उपग्रहों तक अपने विकल्पों के लिए धन दे रहे हैं। साझा लक्ष्य यह है कि पूरा व्यापार बंद किए बिना रणनीतिक निर्भरता घटाई जाए।

क्वांटम तकनीक, डिजिटल मुद्राएं और अगली लहर

तकनीकों का अगला दौर शासन व्यवस्था को डेटा पर और अधिक निर्भर बना सकता है। चीनी शोध समूह ऐसे क्वांटम कंप्यूटर बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो आज के एन्क्रिप्शन को खतरे में डाल सकें। इससे यह जोखिम बढ़ता है कि आज चुराए गए डेटा को भविष्य में डिक्रिप्ट किया जा सकता है। चीन क्वांटम कुंजी वितरण के लिए मोज़ी उपग्रह चला रहा है और राष्ट्रीय क्वांटम नेटवर्क बना रहा है। साथ ही, ब्रिक्स साझेदारों के साथ सीमा पार संपर्क की योजना भी है। देश के भीतर केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा अधिकारियों को लेन-देन पर सीधी नजर देती है, जबकि एमब्रिज जैसी परियोजनाएं सीमा पार इस्तेमाल के उन तरीकों की जांच कर रही हैं जो प्रतिबंधों के असर को कम कर सकते हैं। सुरक्षा शोधकर्ता पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी को तेजी से अपनाने, एआई निगरानी में पारदर्शिता और मानक तय करने वाली संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी की मांग करते हैं।

कंपनियां और नागरिक समाज

आगे क्या होगा, यह निजी क्षेत्र और नागरिक समूह भी तय करेंगे। बड़ी अमेरिकी तकनीकी कंपनियों ने कभी चीन में सेंसरशिप और सुरक्षा संबंधी मांगों का पालन किया, राज्य से जुड़ी संस्थाओं के साथ तकनीकी जानकारी साझा की या जबरन मजदूरी के आरोपों का सामना करने वाले आपूर्तिकर्ताओं से सामान लिया। इन फैसलों ने निर्भरताओं का ऐसा जाल बनाया है जो अब नीति-निर्माण को जटिल करता है। वहीं, नागरिक समाज संगठन सेंसरशिप को दरकिनार करने के उपकरण बनाकर, एल्गोरिदम प्रणालियों की जांच करके और सार्वजनिक डेटा को जवाबदेही के लिए उपयोगी बनाकर डिजिटल सत्तावाद का मुकाबला कर रहे हैं। उनका काम एक सीधी बात रेखांकित करता है: तकनीक का शासन केवल राज्य-कला का मामला नहीं है, यह रोजमर्रा के प्लेटफॉर्मों और सेवाओं में दर्ज मूल्यों का भी सवाल है।

मुख्य बिंदु

  • बीजिंग ने चुनिंदा खुलेपन को कड़े नियंत्रण के साथ जोड़कर स्मार्ट सत्तावादी व्यवस्था बनाई, जो अब भी नवाचार पैदा कर सकती है।
  • चीन ने अनुसंधान और विकास में भारी निवेश किया है और अब विज्ञान तथा इंजीनियरिंग में सबसे अधिक पीएचडी उपाधिधारक तैयार करता है।
  • घरेलू कंपनियां सौर ऊर्जा, बैटरियों, इलेक्ट्रिक वाहनों और ड्रोन में अग्रणी हैं और चीन कारों का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।
  • सेफ सिटी, स्वास्थ्य कोड और डिजिटल युआन के परीक्षण समेत निगरानी और डेटा प्लेटफॉर्म अधिकारियों को बारीक जानकारी देते हैं।
  • डिजिटल सिल्क रोड के जरिए चीनी तकनीक और वित्तपोषण विकासशील देशों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ रहे हैं और निर्भरताएं पैदा कर रहे हैं।
  • मानवाधिकार संगठन चेतावनी देते हैं कि यह मॉडल दक्षता को दमन के साथ जोड़ता है और अन्य देशों में फैल रहा है।
  • शी जिनपिंग के नेतृत्व में केंद्रीकरण से नवाचार कमजोर पड़ने का जोखिम है, हालांकि नीतियों में बदलाव दिखाता है कि संतुलन अब भी साधा जा रहा है।
  • रणनीतिक निर्भरता घटाने के लिए लोकतांत्रिक देश निर्यात नियंत्रण, निवेश जांच और सुरक्षित विकल्प अपना रहे हैं।
  • क्वांटम शोध और केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राएं सुरक्षा संबंधी नई चिंताएं पैदा करती हैं, जिससे पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और मजबूत मानकों की जरूरत बढ़ती है।
  • उभरती तकनीकें खुली या बंद व्यवस्थाओं को मजबूत करेंगी, यह कंपनियों के फैसलों और नागरिक समाज के प्रयासों से तय होगा।
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