वॉशिंगटन और लंदन की चेतावनी
दक्षिण-पूर्व एशिया के साइबर ठगी उद्योग पर अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाई में राजनीतिक सत्ता और आपराधिक मुनाफे के रिश्तों पर कड़ी रोशनी पड़ी है। अमेरिका और ब्रिटेन ने संयुक्त कार्रवाई में कंबोडिया के प्रिंस ग्रुप पर केंद्रित एक नेटवर्क को निशाना बनाया, जिसकी अध्यक्षता चेन झी करते हैं। अमेरिकी वित्त विभाग ने 146 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए, अभियोजकों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी, मानव तस्करी और धन शोधन का ब्यौरा देने वाले आरोपपत्र सार्वजनिक किए, और जांचकर्ताओं ने करीब 14 अरब डॉलर मूल्य के 127,000 बिटकॉइन जब्त किए। ब्रिटिश अधिकारियों ने कथित नेटवर्क से जुड़ी लंदन की महंगी अचल संपत्तियों को भी फ्रीज कर दिया। इस अभियान का मकसद उस वित्तीय तंत्र पर चोट करना था, जो डिजिटल चोरी को मूर्त संपत्ति में बदलता है।
विषय-सूची
- वॉशिंगटन और लंदन की चेतावनी
- इस उद्योग की जड़ें कैसे जमीं
- नई धनराशि को समेटने वाली संरक्षणवादी राजनीति
- 2010 के बाद चीन की अनौपचारिक पूंजी
- क्रिप्टो और डिजिटल भुगतान से धन शोधन हुआ तेज
- कंबोडिया केंद्र में
- म्यांमार के सीमावर्ती कस्बे और मिलिशिया का वित्तपोषण
- नियंत्रित कार्रवाई, बदलते केंद्र
- लाओस के विशेष क्षेत्र और चुनिंदा कार्रवाई
- फिलीपींस में निरंतर कार्रवाई की परीक्षा
- ठगी और धन के लेन-देन का अंदरूनी तंत्र
- किसे नुकसान होता है और सरकारें क्या करती हैं
- अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई तेज, लेकिन कमियां बरकरार
- इस उद्योग पर अंकुश कैसे लगे
- निचोड़
नुकसान भारी है और लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, 2024 में अमेरिकियों से 10 अरब डॉलर से अधिक की ठगी हुई। निवेश और रोमांस घोटालों से अकेले 16 अरब डॉलर से अधिक के नुकसान का अनुमान है। दुनिया भर में ठगी की कुल रकम हर साल अरबों डॉलर के कई दसियों अरब तक पहुंचती है। ये आंकड़े ऑनलाइन धोखाधड़ी के उस क्षेत्रीय बाजार का नतीजा हैं, जो पिछले दशक में परिपक्व हुआ। बिखरे हुए कॉल सेंटरों के रूप में शुरू हुआ यह कारोबार अब एक अंतरराष्ट्रीय उद्योग बन चुका है, जो बड़े पैमाने पर लोगों की भर्ती करता है, जटिल भुगतान शृंखलाओं के जरिए धन शोधन करता है और ताकतवर लोगों के संरक्षण में फलता-फूलता है।
अमेरिका और ब्रिटेन की कार्रवाई के बाद के हफ्तों में दक्षिण-पूर्व एशिया की सरकारों ने संकल्प जताया है। छापे मारे गए, ठिकानों का निरीक्षण हुआ और अधिकारियों ने बदलाव का वादा किया। लेकिन समस्या राजनीति और धन के ताने-बाने में गहराई से समाई है। ठगी के कारोबार स्थानीय सत्ता दलालों और कारोबारी अभिजात वर्ग के नेटवर्क से जुड़े हैं। इनमें दसियों हजार लोग काम करते हैं, जिनमें से कई की तस्करी की गई है। ये कारोबार ऐसी विदेशी मुद्रा कमाते हैं, जिससे संरक्षण और राजनीतिक वफादारी का तंत्र चलता है। इन्हें बंद करने की कोशिश उन व्यवस्थाओं को चुनौती देती है, जिनसे अभिजात वर्ग सत्ता में बना रहता है और धन का प्रवाह जारी रहता है।
इस उद्योग की जड़ें कैसे जमीं
दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर ठगी का उभार समय के साथ एकजुट हुई तीन ताकतों का नतीजा है। लंबे समय से चली आ रही संरक्षणवादी राजनीति नए धन प्रवाह को अपने में समेट सकती है। 2010 के बाद चीन से निकली अनौपचारिक पूंजी को कैसीनो, अचल संपत्ति और विशेष आर्थिक क्षेत्रों में निवेश के लिए अनुकूल बाजार मिले। डिजिटल भुगतान और क्रिप्टोकरेंसी का तेजी से प्रसार होने से अवैध कमाई को सीमा पार भेजना आसान हुआ। ये ताकतें अलग-अलग पहले से मौजूद थीं, लेकिन साथ मिलकर इन्होंने छोटे-मोटे घोटालों को वैश्विक धोखाधड़ी के तंत्र में बदल दिया।
नई धनराशि को समेटने वाली संरक्षणवादी राजनीति
क्षेत्र के बड़े हिस्से में सत्ता मजबूत संस्थाओं के बजाय निजी अधिकार और संसाधनों पर नियंत्रण के आधार पर चलती है। राजनेता धन जुटाने, वफादारी कायम रखने और विवाद सुलझाने के लिए कारोबारी सहयोगियों, सैन्य बिचौलियों और स्थानीय संपर्कों पर निर्भर रहते हैं। ये नेटवर्क राज्यों के निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया से निकले हैं, जिसमें औपनिवेशिक शासन, शीत युद्ध के संघर्ष और संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण शामिल हैं। जब आय के नए स्रोत सामने आते हैं, चाहे वे वैध हों या अवैध, तो वे इन व्यवस्थाओं में समा जाते हैं। ऑनलाइन धोखाधड़ी ने राजनीति के नए तौर-तरीके नहीं बनाए। वह पहले से मौजूद अवैध वसूली और संरक्षण के ढर्रे में फिट हो गई।
2010 के बाद चीन की अनौपचारिक पूंजी
चीन में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियानों और सख्त पूंजी नियंत्रणों ने अपंजीकृत धन को विदेशों की ओर धकेला। 2012 के बाद निवेशकों ने नकदी रखने के लिए अधिक सुरक्षित जगहें तलाशीं, जबकि ऑनलाइन जुए और सीमा पार लेन-देन पर कार्रवाई ने इस रुझान को तेज किया। कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और फिलीपींस ने उन लोगों को जमीन, लाइसेंस और सुरक्षा मुहैया कराई, जो इसके लिए भुगतान कर सकते थे। कैसीनो, औद्योगिक क्षेत्र और रियल एस्टेट परियोजनाएं धन के प्रवाह के माध्यम बने। डेवलपरों ने प्रभावशाली अभिजात वर्ग के साथ साझेदारी की, जो सुरक्षा और आधिकारिक संरक्षण देते थे। महामारी के दौरान पर्यटन ठप होने पर इनमें से कई जगहों को ठगी के परिसरों में बदल दिया गया। वहां काम करने वालों की जगह ऐसे तस्करी-पीड़ित लोगों को लाया गया, जिन्हें भ्रामक नौकरी के प्रस्ताव देकर भर्ती किया गया था।
क्रिप्टो और डिजिटल भुगतान से धन शोधन हुआ तेज
यह उद्योग तेज और अपारदर्शी धन प्रवाह पर फलता-फूलता है। चोरी की रकम म्यूल खातों से होकर गुजरती है, वर्चुअल मुद्रा में बदली जाती है, अलग-अलग वॉलेट के बीच घुमाई जाती है, दूसरी रकम के साथ मिलाई जाती है और फिर बैंकों में वापस लाई जाती है या संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल होती है। ओवर-द-काउंटर ब्रोकर और ढीले नियमन वाले एक्सचेंज अहम भूमिका निभाते हैं। वैध कारोबार को गति देने वाले वही मोबाइल ऐप कुछ ही सेकंड में धन भेजना आसान बना देते हैं। भ्रष्टाचार के पुराने तरीकों की जगह लेने के बजाय इन औजारों ने उनका दायरा बढ़ाया और अवैध वसूली करने वाले नेटवर्कों को वैश्विक वित्त और तकनीक से जोड़ दिया।
कंबोडिया केंद्र में
इस व्यवस्था के केंद्र में कंबोडिया है। कई दशकों में सत्तारूढ़ कंबोडियन पीपुल्स पार्टी ने सरकारी सत्ता और निजी कारोबार को एक-दूसरे से जोड़ दिया। बड़े कारोबारियों को एकाधिकार वाले ठेके और राजनीतिक संरक्षण मिला, जबकि राजनीतिक रूप से जुड़ा परिवारों का प्रभाव बढ़ता गया। 2019 में ऑनलाइन जुए पर राष्ट्रीय प्रतिबंध लागू होने के बाद कैसीनो और होटल परियोजनाओं का बुनियादी ढांचा गायब नहीं हुआ, बल्कि उसका इस्तेमाल बदल गया। गेमिंग के लिए बनाए गए परिसर ऑनलाइन धोखाधड़ी के केंद्र बन गए। पूरे एशिया से लोगों को अक्सर फर्जी नौकरी के विज्ञापनों के जरिए भर्ती किया गया और फिर दुनिया भर के लोगों को ठगने के लिए मजबूर किया गया।
ताकतवर लोगों के संरक्षण के बिना ये कारोबार नहीं बढ़ सकते थे। ठगी के सरगनाओं के इस्तेमाल वाली संपत्तियां अक्सर राजनीतिक रूप से जुड़े कारोबारियों के नियंत्रण वाली जमीन पर हैं। विदेशी संचालकों को नागरिकता और सम्मान मिले। जांचें ठप पड़ गईं या चुपचाप बंद कर दी गईं। प्रिंस ग्रुप के खिलाफ अमेरिका और ब्रिटेन का मामला दिखाता है कि कथित आपराधिक उद्यम उच्च वित्त, राजनीति और अभिजात वर्ग के नेटवर्कों के साथ कैसे घुल-मिल सकते हैं। प्रतिबंधों के बाद प्रिंस बैंक से कथित तौर पर बड़ी संख्या में ग्राहकों ने धन निकालना शुरू कर दिया, जिससे सरकार को तत्काल भरोसा दिलाना पड़ा। थाई अधिकारियों ने भी नोम पेन्ह की राजनीतिक व्यवस्था से गहरे संबंध रखने वाले प्रभावशाली लोगों की संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की, जिससे संरक्षण के तंत्र पर दबाव बढ़ा।
सरकारी प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की 2024 की मानव तस्करी रिपोर्ट में कंबोडिया को टियर 3 पर रखा गया और ऑनलाइन ठगी के कारोबार में व्यापक भ्रष्टाचार तथा मिलीभगत का जिक्र किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि अधिकारी अक्सर पीड़ितों की पहचान करने में नाकाम रहे, तस्करी के शिकार उन लोगों को उन अपराधों के लिए सजा दी जिन्हें करने के लिए उन्हें मजबूर किया गया था, और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों को जवाबदेह नहीं ठहराया। 2025 की एक बड़ी मानवाधिकार जांच में कंबोडिया भर में ठगी के परिसर पाए गए, जहां से बच निकले लोगों ने मारपीट, जबरन मजदूरी और यहां तक कि यातना-कक्षों की जानकारी दी। छापे अक्सर सतही नजर आए: कुछ कामगारों को छुड़ाया गया, जबकि कारोबार पहले की तरह चलता रहा। दुर्व्यवहार का दस्तावेजीकरण करने वाले पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को प्रतिशोध का सामना करना पड़ा।
धन शोधन को लेकर सवालों का दायरा बढ़ा है। ब्लॉकचेन विश्लेषण कंपनियों ने ठगी की कमाई के बड़े प्रवाह का पता लगाया है, जबकि ताकतवर परिवारों से कथित संबंध रखने वाले एक भुगतान मंच को 2024 के आखिर में अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से प्रतिबंधित कर दिया गया। इस कदम ने संकेत दिया कि अवैध धन ले जाने वाले वित्तीय माध्यमों को निशाना बनाने की इच्छा है। साथ ही, इसने निजी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें सक्षम बनाने वाले राजनीतिक नेटवर्कों से निपटने के बीच का अंतर भी उजागर किया।
म्यांमार के सीमावर्ती कस्बे और मिलिशिया का वित्तपोषण
म्यांमार में ठगी के केंद्र सीमावर्ती इलाकों में बिखरी सत्ता व्यवस्था से उभरे। जातीय सशस्त्र समूह और सेना समर्थक मिलिशिया लंबे समय से अपने प्रशासन चलाते आए हैं। वे कर वसूलते हैं, परमिट जारी करते हैं और इलाकों पर नियंत्रण रखते हैं। धोखाधड़ी के कारोबार भी नशीले पदार्थों, लकड़ी की कटाई और अन्य व्यापारों की तरह आय के ऐसे स्रोत बन गए, जिनसे हथियार और नए लोग जुटाए जाते हैं। दो जगहें खास तौर पर उल्लेखनीय हैं: करेन राज्य का श्वे कोक्को, जिसका यताई न्यू सिटी परियोजना से संबंध है, और थाई सीमा के पास केके पार्क। निवेशकों ने चारदीवारी से घिरे ऐसे परिसर बनाए, जहां अपनी सुरक्षा व्यवस्था, बिजली और दूरसंचार सुविधाएं थीं। दुनिया भर के लोगों को ठगने वाले अभियान चलाने के लिए हजारों तस्करी-पीड़ित कामगारों को वहां लाया गया।
हाल की घटनाएं कार्रवाई और बच निकलने के इस मेल को दिखाती हैं। श्वे कोक्को में बड़े अभियान चलाने के आरोपी और अमेरिका तथा चीन के अधिकारियों द्वारा वांछित शे झिजियांग को 2022 में बैंकॉक में गिरफ्तार किए जाने के बाद नवंबर 2025 में चीन प्रत्यर्पित कर दिया गया। हाई-प्रोफाइल घटनाओं के बाद दबाव और पर्यटन को लेकर चिंताओं का सामना कर रहे थाई अधिकारियों ने कुछ परिसरों की बिजली और पानी काटे, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला किया और लोगों को स्वदेश भेजने वाली उड़ानों का समन्वय किया। म्यांमार की जुंटा ने कुछ ठिकाने बंद करने का दावा किया है, लेकिन विश्वसनीय जानकारी बताती है कि कई कार्रवाईयां नियंत्रित ढंग से होती हैं। सरगनाओं को पहले से चेतावनी मिलती है और वे कारोबार दूसरी जगह ले जाते हैं। बड़ी संख्या में कामगार भाग निकलते हैं, लेकिन मुख्य नेटवर्क कुछ मील दूर जाकर फिर से संगठित हो जाते हैं।
नियंत्रित कार्रवाई, बदलते केंद्र
सीमावर्ती अर्थव्यवस्था में उन लोगों को फायदा होता है जो संरक्षण दे सकते हैं और जो ऐसा नहीं कर पाते, उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। जब कोई परिसर बहुत अधिक नजर में आ जाता है, तो दूसरा शुरू हो जाता है। स्थानीय मिलिशिया, सीमा रक्षक और बिचौलिये हर चरण पर अवैध वसूली करते हैं। नतीजा एक ऐसा मजबूत तंत्र है, जो कानून लागू करने वालों की कार्रवाई से भी तेज खुद को ढाल लेता है।
लाओस के विशेष क्षेत्र और चुनिंदा कार्रवाई
लाओस एक दलीय राज्य है, जहां घरेलू उद्योग कमजोर हैं और कर्ज भारी है। यहां ऐसे निवेश का स्वागत किया गया है जो राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करे और विदेशी मुद्रा लाए। इस माहौल ने ऐसे विशेष क्षेत्रों के लिए जगह बनाई, जहां सरकारी अधिकार निवेशकों को सौंपे जाते हैं। बोकेओ प्रांत का गोल्डन ट्रायंगल विशेष आर्थिक क्षेत्र, जिसे चीनी कारोबारी झाओ वेई चलाते हैं, अपने कैसीनो, सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक अर्थव्यवस्था वाला एक निजी क्षेत्र है। अतीत में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने मानव तस्करी और धन शोधन के आरोपों पर इस क्षेत्र के नेतृत्व को निशाना बनाया था। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर मान्यता मिलती रही। 2024 में दिया गया एक सरकारी पदक भी समर्थन जैसा दिखा।
अधिकारियों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के कारखाने बंद करने की समयसीमाएं घोषित कीं और बीच-बीच में छापे मारे। ज्यादातर कार्रवाई में निचले स्तर के कर्मचारियों का कामकाज बाधित हुआ, जबकि मालिक और मुख्य नेटवर्क बरकरार रहे। कुछ समय की शांति के बाद नई गतिविधियों की खबरें फिर सामने आईं। यह ढर्रा क्षेत्र के अन्य हिस्सों जैसा है: किनारों पर शक्ति प्रदर्शन, लेकिन केंद्र में निरंतरता।
फिलीपींस में निरंतर कार्रवाई की परीक्षा
फिलीपींस ने अलग रास्ता अपनाया। ऑफशोर जुए के उछाल, जिसे पीओजीओ कहा जाता है, ने साइबर ठगी के लिए अवसर पैदा किए। स्थानीय राजनेताओं ने परमिट जारी करके और जांचों को हतोत्साहित करके इन कारोबारों को संरक्षण दिया। 2023 से हाई-प्रोफाइल छापों में तस्करी के शिकार कामगारों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत का खुलासा हुआ। तारलाक प्रांत में जांचकर्ताओं ने एक बड़े परिसर को नगरपालिका नेतृत्व के नेटवर्क से जोड़ा और आरोप दर्ज किए। राष्ट्रीय अधिकारियों ने 2024 में पीओजीओ पर प्रतिबंध लगाया और 2025 में उसे कानून का रूप दिया। पुलिस और आव्रजन अधिकारियों ने बार-बार छापे मारे, स्थानीय अधिकारियों पर मुकदमे चलाए और हजारों कामगारों को निर्वासित किया।
कार्रवाई से यह उद्योग पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। संचालकों ने नए नाम अपनाए, भूमिगत हो गए या नए ठिकानों पर चले गए, जहां कभी-कभी वही लोग और इमारतें इस्तेमाल हुईं। फिर भी, लगातार कार्रवाई ने राजनीतिक संरक्षण की कीमत बढ़ाई और कई बड़े कारोबार बंद किए। फिलीपींस दिखाता है कि लगातार पुलिस कार्रवाई और कानूनी कदम अपराध आधारित अर्थव्यवस्था को सीमित कर सकते हैं, भले ही उसे रातोंरात खत्म न किया जा सके।
ठगी और धन के लेन-देन का अंदरूनी तंत्र
ठगी के तरीके अलग-अलग हैं, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली लगभग एक जैसी है। कामगारों को मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया मंचों पर लोगों का भरोसा जीतने की ट्रेनिंग दी जाती है। वे बैंक कर्मचारी, निवेश सलाहकार या प्रेम-संबंध के इच्छुक साथी बनकर पेश आते हैं। सबसे नुकसानदेह तरीकों में से एक को पिग बुचरिंग कहा जाता है। ठग भावनात्मक रिश्ता बनाने में समय लगाता है, फर्जी मंच पर नकली मुनाफा दिखाता है और फिर पीड़ित पर बड़ी रकम लगाने का दबाव डालता है। पैसा जमा होते ही मंच से निकासी रोक दी जाती है या वह गायब हो जाता है। इसके अन्य रूपों में क्रिप्टो निवेश योजनाएं, सरकारी अधिकारियों का रूप धरना और यौन सामग्री के जरिए ब्लैकमेल करना शामिल हैं।
धन शोधन इस मशीन को चलाए रखने वाला इंजन है। रकम कई देशों के खातों के बीच घूमती है। अक्सर ये खाते भर्ती किए गए लोगों के नाम पर होते हैं, जिन्हें म्यूल का काम करने के बदले थोड़ी रकम दी जाती है। क्रिप्टो वॉलेट और मिक्सर लेन-देन को और अपारदर्शी बनाते हैं। ओवर-द-काउंटर कारोबारी टोकन को नकदी में बदलते हैं। इस कमाई से अचल संपत्ति, वाहन और लग्जरी सामान खरीदे जाते हैं, या इसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों के संपत्ति बाजारों में लगाया जाता है। हर रूपांतरण बिंदु पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों को पैटर्न पहचानने का मौका मिलता है, लेकिन इसके लिए सीमा पार तेज सहयोग और मंचों तथा एक्सचेंजों के पास मौजूद डेटा तक पहुंच जरूरी है।
किसे नुकसान होता है और सरकारें क्या करती हैं
इस ठगी के दोनों सिरों पर पीड़ित हैं। दुनिया भर में लोग अपनी जीवन भर की बचत, घर और सेवानिवृत्ति की रकम गंवाते हैं। तस्करी के शिकार कामगार अपनी आजादी, स्वास्थ्य और सुरक्षा खो देते हैं। कंबोडिया के परिसरों से बच निकले लोगों ने जेल जैसी स्थितियों, मारपीट और रोजाना के लक्ष्य पूरे करने के लिए जबरन काम कराने की बात बताई है। कुछ ठिकानों पर कथित तौर पर यातना के लिए अलग कमरे थे और परिसरों के भीतर हुई मौतों का दस्तावेजीकरण किया गया है। बचाव अभियानों में अक्सर कुछ ही लोगों को छुड़ाया गया, जबकि अन्य को नए ठिकानों पर भेज दिया गया या उनकी फिर से तस्करी की गई।
आधिकारिक रिपोर्टों में लगातार बनी कमियों का जिक्र है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भ्रष्टाचार और मिलीभगत, कमजोर जांच और अभियोजन में नाकामी का हवाला देते हुए 2024 में मानव तस्करी रोकने के प्रदर्शन के मामले में कंबोडिया को सबसे निचले स्तर पर रखा। निष्कर्ष पेश करने के बाद रिपोर्ट ने एक सख्त वाक्य में आधिकारिक आकलन का सार बताया।
रिपोर्ट को सीधे उद्धृत करने से पहले संदर्भ समझना जरूरी है: टियर 3 का मतलब है कि सरकार न्यूनतम मानकों पर खरी नहीं उतर रही और उन्हें पूरा करने के लिए कोई महत्वपूर्ण प्रयास भी नहीं कर रही। भाषा स्पष्ट है और संदेह की गुंजाइश कम छोड़ती है।
कंबोडिया सरकार मानव तस्करी के उन्मूलन के न्यूनतम मानकों को पूरी तरह पूरा नहीं करती और ऐसा करने के लिए कोई महत्वपूर्ण प्रयास भी नहीं कर रही।
मानवाधिकार शोधकर्ताओं का कहना है कि यह ढर्रा लगातार दिखाई देता है। कंबोडिया के दर्जनों परिसरों की जांच में बार-बार दुर्व्यवहार, पीड़ितों को बहुत कम सुरक्षा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सीमित जवाबदेही सामने आई। दुर्व्यवहार उजागर करने वाले पत्रकारों और समर्थकों पर दबाव डाला गया। ये निष्कर्ष ऑनलाइन धोखाधड़ी, मानव तस्करी और जबरन मजदूरी पर नजर रखने वाली क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के व्यापक दस्तावेजों से मेल खाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई तेज, लेकिन कमियां बरकरार
कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच सहयोग तेज हुआ है। अमेरिकी न्याय विभाग ने नवंबर 2025 में स्कैम सेंटर स्ट्राइक फोर्स शुरू की, जिसका मकसद उन सबसे नुकसानदेह योजनाओं की जांच करना, उन्हें बाधित करना और मुकदमा चलाना है, जिनसे अमेरिकियों को हर साल कई अरब डॉलर की दर से ठगा जा रहा है। कंबोडिया और म्यांमार के नेटवर्कों पर प्रतिबंधों की संख्या बढ़ी है। चीन ने अपने नागरिकों को छुड़ाने के अभियान चलाए और प्रत्यर्पण की मांग की, जिसमें शे झिजियांग को थाईलैंड से चीन भेजना शामिल है। थाईलैंड ने साझेदारों के साथ मिलकर कुछ सीमावर्ती परिसरों की बिजली और दूरसंचार लाइनें काटीं और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की।
नीतिगत विरोधाभास बने हुए हैं। अलग-अलग कारोबारियों और कंपनियों को निशाना बनाने से लक्षणों पर कार्रवाई होती है, जबकि उन्हें सक्षम करने वाली व्यवस्थाएं बरकरार रहती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि संरक्षण देने या ठगी से मुनाफा कमाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई से बचना समस्या को गलत ढंग से केवल आपराधिक बताता है, जबकि उसका राजनीतिक और आर्थिक पहलू भी है। कई मामलों में सरकारों ने उन लोगों की मेजबानी की है या उनके साथ सहयोग किया है, जिनके नेटवर्क बाद में प्रतिबंधों की जद में आए, जिससे संदेश उलझ गया। इस बीच, प्रचार अभियान और विदेशी राजधानियों में लॉबिंग के चलते नीतियों को विश्वसनीय सबूतों के अनुरूप बनाना और मुश्किल हो गया है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के बाहर के वित्तीय केंद्र अब भी अहम भूमिका निभाते हैं। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया के कुछ हिस्सों के बैंक, रियल एस्टेट बाजार और क्रिप्टो सेवा प्रदाता अवैध कमाई को अपने में समेटते हैं। लाभकारी स्वामित्व पर कड़े नियंत्रण, जोखिम भरे भुगतानों के लिए सख्त अनुपालन और सूचनाओं का तेज आदान-प्रदान नहीं होगा, तो दक्षिण-पूर्व एशिया के भीतर की कार्रवाई समस्या को घटाने के बजाय एक जगह से दूसरी जगह धकेलेगी।
इस उद्योग पर अंकुश कैसे लगे
क्षेत्र के अनुभव बताते हैं कि कुछ कदम साथ-साथ उठाए जाएं तो उनके सफल होने की संभावना अधिक है। हर कदम उस शृंखला की अलग कड़ी को निशाना बनाता है, जो जबरन ठगी से हासिल रकम को वैध धन में बदलती है।
पहला, संचालकों के साथ उन्हें सक्षम बनाने वालों पर भी प्रतिबंध लगाएं और मुकदमा चलाएं। इसका मतलब है कि ठगी केंद्रों को लाइसेंस देने, संरक्षण देने या उनसे मुनाफा कमाने वाले अधिकारियों के खिलाफ मामले तैयार किए जाएं। साथ ही, उनके धन का प्रबंधन करने वाले वकीलों, ब्रोकरों और मुखौटा कंपनियों को भी निशाना बनाया जाए। भ्रष्टाचार और मिलीभगत की कीमत इतनी भारी होनी चाहिए कि संरक्षण देने के फायदे उसके सामने फीके पड़ जाएं।
दूसरा, भुगतान के माध्यमों पर कार्रवाई करें। नियामकों को क्रिप्टो एक्सचेंजों, ओवर-द-काउंटर ब्रोकरों और अधिक जोखिम वाले भुगतान प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए मानक ऊंचे करने चाहिए। अपने ग्राहक को जानने से जुड़े सख्त नियंत्रण अनिवार्य करें, मिक्सरों की निगरानी करें और ऐसी रिकॉर्ड-रखने की व्यवस्था लागू करें जिससे संपत्तियों का पता लगाना आसान हो। अनुपालन से इनकार करने वाले जोखिम भरे मंचों को बैंकिंग नेटवर्क से काट दिया जाना चाहिए।
तीसरा, संपत्ति बाजारों को साफ करें। लाभकारी स्वामित्व में पारदर्शिता लागू करें, अधिक जोखिम वाली श्रेणियों में गुमनाम खरीद पर पाबंदी लगाएं और प्रतिबंधित देशों या संस्थाओं से जुड़े खरीदारों के लिए कड़ी जांच अनिवार्य करें। चोरी के धन को कॉन्डो, गोदामों और महंगी अचल संपत्ति में बदलने का रास्ता बंद करें।
चौथा, परिसरों में फंसे लोगों की सुरक्षा करें। पीड़ितों की पहचान को प्राथमिकता दें, तस्करी के शिकार उन कामगारों को उन अपराधों के लिए सजा देना बंद करें जिन्हें करने के लिए उन्हें मजबूर किया गया था, और राष्ट्रीयता या लिंग की परवाह किए बिना सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करें। आश्रय, कानूनी सहायता और सुरक्षित स्वदेश-वापसी कार्यक्रमों में निवेश करें। बचकर निकले लोग अहम गवाह होते हैं, जो सत्ता के पदानुक्रम का नक्शा तैयार करने और वित्तीय लेन-देन के पैटर्न पहचानने में मदद कर सकते हैं।
पांचवां, सीमा पार जांच का दायरा बढ़ाएं। साइबर विशेषज्ञों, वित्तीय खुफिया इकाइयों और साझा डेटा पर तेजी से कार्रवाई कर सकने वाले अभियोजकों को मिलाकर संयुक्त टीमें बनाएं। धन के प्रवाह को बाधित करने के लिए संपत्तियां जब्त करें और उससे हासिल रकम का इस्तेमाल पीड़ितों की मदद तथा आगे की जांच में करें। जहां परिसर सीमाओं पर हों, वहां स्थानीय कार्रवाई को क्षेत्रीय टास्क फोर्स से जोड़ें। मकसद पता चलने और कार्रवाई होने के बीच का समय घटाना है।
आखिर में, जनता का दबाव बनाए रखें। विश्वसनीय आंकड़े प्रकाशित करें, अवैध कमाई को वैध बनाने वाली संस्थाओं के नाम उजागर करें और दुर्व्यवहार का दस्तावेजीकरण करने वाले स्वतंत्र मीडिया तथा नागरिक समाज का समर्थन करें। यह उद्योग अंधेरे में फलता-फूलता है। पारदर्शिता से संरक्षण देना महंगा पड़ता है और सुधार तेज होता है।
निचोड़
- अमेरिका और ब्रिटेन की कार्रवाई में कंबोडिया के प्रिंस ग्रुप से जुड़े 146 लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाया गया। 127,000 बिटकॉइन जब्त किए गए और लंदन की संपत्तियां फ्रीज की गईं।
- 2024 में अमेरिकियों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी में कम से कम 10 अरब डॉलर गंवाए। निवेश और रोमांस घोटालों से 16 अरब डॉलर से अधिक के नुकसान का अनुमान है।
- संरक्षणवादी राजनीति, चीन की अनौपचारिक पूंजी के प्रवाह और तेज डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने ठगी के कारोबार को बढ़ाया।
- कंबोडिया एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोप लगातार लगते रहे हैं और परिसरों में दुर्व्यवहार के मामले दर्ज हैं।
- म्यांमार के श्वे कोक्को और केके पार्क स्थित केंद्र मिलिशिया के वित्तपोषण से जुड़े हैं और नियंत्रित कार्रवाई के बीच खुद को ढाल लेते हैं।
- लाओस का गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र एक संरक्षित इलाके की तरह काम करता है, जहां कार्रवाई चुनिंदा रही है।
- फिलीपींस ने लगातार कार्रवाई दिखाई है: पीओजीओ पर प्रतिबंध लगाया और स्थानीय अधिकारियों पर मुकदमे चलाए, हालांकि संचालक भूमिगत हो गए हैं।
- अमेरिकी न्याय विभाग ने स्कैम सेंटर स्ट्राइक फोर्स बनाई है और प्रतिबंधों का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन इस कारोबार को सक्षम बनाने वाले नेटवर्कों पर दबाव अब भी सीमित है।
- प्रभावी कार्रवाई के लिए संरक्षण देने वालों को निशाना बनाना, क्रिप्टो और संपत्ति पर नियंत्रण कड़ा करना, पीड़ितों की सुरक्षा बेहतर बनाना और सीमा पार जांच का दायरा बढ़ाना जरूरी है।






